करोड़ों की प्रॉपर्टी देखने पहुंचे अशनीर ग्रोवर, रियल एस्टेट कारोबारी ने दे डाला नौकरी का ऑफर

भारतपे के पूर्व को-फाउंडर अशनीर ग्रोवर अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं, लेकिन इस बार वह खुद एक मजेदार सोशल मीडिया पोस्ट का हिस्सा बन गए हैं। गुरुग्राम के एक रियल एस्टेट कारोबारी ने उनकी प्रॉपर्टी विजिट पर चुटकी लेते हुए उन्हें नौकरी तक ऑफर कर दी। मामला गुरुग्राम के महंगे रिहायशी प्रोजेक्ट DLF Camellias का है, जहां अशनीर की विजिट के दौरान फ्लैट के बजाय क्लब, सुविधाओं और हरियाली को दिखाए जाने पर कारोबारी ने सवाल उठाए। उनकी पोस्ट अब सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

फ्लैट देखने पहुंचे अशनीर

गुरुग्राम के रियल एस्टेट कारोबारी अभिषेक भारद्वाज ने X पर एक पोस्ट साझा करते हुए अशनीर ग्रोवर की साइट विजिट पर मजाकिया टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि अशनीर की यह विजिट उनकी पत्नी के चैनल पर शेयर किए गए एक वीडियो में दिखाई गई थी, जिसका शीर्षक ‘Home Beyond the Price Tag’ है। अभिषेक के मुताबिक, फ्लैट में किरायेदार होने और दरवाजा नहीं खुलने की स्थिति में विजिट के दौरान क्लब, दूसरी सुविधाएं और हरियाली दिखाई गई। उन्होंने इस अनुभव की तुलना प्रॉपर्टी ब्रोकरों के उस आम तरीके से की, जिसमें फ्लैट नहीं दिखा पाने पर खरीदार को आसपास की सुविधाएं दिखाकर व्यस्त रखा जाता है।

‘क्लब दिखा दिया, हरियाली दिखा दी, फ्लैट की बात ही नहीं की’

200 से ज्यादा प्रॉपर्टी डील करने का अनुभव रखने वाले अभिषेक ने कहा कि गुरुग्राम के प्रीमियम रिहायशी प्रोजेक्ट्स में कई खरीदारों के लिए फ्लैट के साथ उसका पता और सोसायटी भी काफी मायने रखती है। ऐसी जगहों पर उपलब्ध फ्लैट कम होने के कारण खरीदार कई बार प्रॉपर्टी देखने से पहले ही उसमें दिलचस्पी दिखाने लगते हैं।

हालांकि, अभिषेक का मानना है कि अच्छी साइट विजिट में खरीदार को असली फ्लैट दिखाना जरूरी है। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर किरायेदार दरवाजा नहीं खोल रहा हो, तो वह उसके साथ एक घंटे बैठकर चाय पीने को भी तैयार हैं, लेकिन खरीदार को फ्लैट दिखाए बिना वापस नहीं जाने देंगे।

अशनीर ग्रोवर को दे दी फील्ड एसोसिएट की नौकरी

अभिषेक ने अपनी पोस्ट में अशनीर पर तंज कसते हुए लिखा कि उन्होंने साइट विजिट बिल्कुल उसी अंदाज में की, जैसा प्रॉपर्टी इंडस्ट्री में कई बार देखने को मिलता है। उन्होंने कहा, ‘क्लब दिखा दिया, हरियाली दिखा दी, फ्लैट की बात ही नहीं की।’ इसके बाद कारोबारी ने अशनीर को फील्ड एसोसिएट की नौकरी का ऑफर दे दिया। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल साइट विजिट के लिए लोगों की तलाश कर रहे हैं और अशनीर ने तो पहली विजिट में ही इंडस्ट्री का तरीका दिखा दिया।

सोशल मीडिया पर चर्चा में आई पोस्ट

अभिषेक ने अपनी पोस्ट के आखिर में अशनीर से मजाकिया अंदाज में पूछा, ‘इंटरव्यू कब दे रहे हो?’ उनकी इस टिप्पणी ने प्रॉपर्टी विजिट के तरीके और महंगी सोसायटी में घर खरीदने के अनुभव को लेकर चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, यह पूरा मामला कारोबारी की सोशल मीडिया पोस्ट में किए गए दावों और व्यंग्य पर आधारित है।

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Asian Games के लिए भारत ने 503 खिलाड़ियों पर खर्चे 702 करोड़ रुपए

जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने वाले एशियाई खेलों में भारत का 503 सदस्यीय दल हिस्सा लेगा। केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने जानकारी दी कि मंत्रालय ने एशियाड दल और उनके कोच तथा इक्विपमेंट के लिए 702 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के लिए आयोजित विदाई समारोह में दबाव को अच्छे प्रदर्शन में बदलने, प्रतिद्वंद्वियों को अवसर के रूप में देखने और अवसरों को उपलब्धियों में बदलने का खिलाड़ियों से आग्रह किया।

एशियन गेम्स 2026 में भारतीय दल जापान में कई तरह के खेलों में हिस्सा लेगा। 503 सदस्यों वाले इस दल में एथलीट और सपोर्ट स्टाफ़ शामिल हैं, जिनमें से 300 से ज़्यादा एथलीट पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा लेंगे, जो भारतीय खेलों की बढ़ती गहराई और बेंच स्ट्रेंथ को दिखाता है।

उन्होंने कहा, “503 सदस्यों वाला हमारा दल एशियाई खेलों के लिए जा रहा है, और मुझे विश्वास है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे। हमारे 503 खिलाड़ियों में से 300 से अधिक खिलाड़ी पहली बार हिस्सा ले रहे हैं, इसलिए बहुत सारी नई प्रतिभाएं सामने आ रही हैं।” ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के प्रदर्शन की सराहना करते हुए केंद्रीय खेल मंत्री ने कहा, “हमने ओपन ट्रायल के ज़रिए पारदर्शी और योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित किया है, जिसमें स्वतंत्र ऑब्ज़र्वर और कैमरे से निगरानी की व्यवस्था है। पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने 13 गोल्ड मेडल जीते थे; इस बार हमारा प्रदर्शन 35 प्रतिशत से ज़्यादा बेहतर हुआ है। मैं हमारे सभी एथलीटों और सपोर्ट स्टाफ़ को बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ।”

उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य 2036 है – जब हम ओलंपिक्स की मेज़बानी करेंगे, तब तक हमें ग्लोबल स्टेज पर मज़बूती से स्थापित होना होगा। यह 10 साल का प्लान है, जिसमें स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए 36,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि आवंटित की गई है।”

‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

भारत में टेक सेक्टर की नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता। खासकर बड़ी टेक कंपनियों के इंटरव्यू में मुश्किल coding questions और कई दौर की technical screening उम्मीदवारों की अच्छी-खासी तैयारी करवा देती है। अब Reddit पर एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।

पोस्ट करने वाले यूजर का कहना है कि भारत में टेक जॉब इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होते हैं, जबकि कई मामलों में मिलने वाली सैलरी काफी कम होती है। इस दावे के बाद Reddit पर टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।

‘भारत में इंटरव्यू ज्यादा मुश्किल

टेक प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में होने वाले इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में काफी कठिन हैं और इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी कम है। उसके मुताबिक अमेरिकी कंपनियां उम्मीदवार को परखते समय केवल coding skills पर निर्भर नहीं रहतीं। वहां practical experience, system design और behavioural skills को भी काफी महत्व दिया जाता है। इसके उलट भारत में कई कंपनियों के इंटरव्यू में कठिन algorithm और coding problems पर ज्यादा जोर दिया जाता है।

45 मिनट में दो Hard सवाल?

Reddit यूजर ने दावा किया कि भारत में कई कंपनियों के hiring process में उम्मीदवारों को कई coding rounds से गुजरना पड़ता है। उसने खास तौर पर दावा किया कि कुछ जगहों पर staff-level पदों के उम्मीदवारों से 45 मिनट में दो कठिन coding problems हल करने की उम्मीद की जाती है। यूजर के अनुसार, अमेरिका में senior candidates के लिए professional experience और system-design skills ज्यादा अहम हो सकती हैं, जबकि भारत में coding rounds का दबाव काफी ज्यादा दिखाई देता है।

क्या असली नौकरी और इंटरव्यू की तैयारी अलग-अलग चीजें हैं?

यही सवाल इस पूरी बहस के केंद्र में है। कई Reddit यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल coding problems हल करने में माहिर होना और असल दुनिया में किसी product या system को बनाने की क्षमता दो अलग चीजें हैं। एक यूजर ने दावा किया कि उसने ऐसे भारतीय उम्मीदवारों को देखा है जो coding questions में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन अपने वास्तविक काम को समझाने या system design पर चर्चा करने में संघर्ष करते थे। वहीं कुछ विदेशी उम्मीदवार experience-based सवालों में ज्यादा सहज नजर आए।

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‘इंटरव्यू कभी-कभी इंटरव्यूअर का शो बन जाता है’

एक अन्य यूजर ने भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि कई बार इंटरव्यू उम्मीदवार की क्षमता परखने से ज्यादा इंटरव्यू लेने वाले की अपनी समझ और ‘स्मार्टनेस’ दिखाने का मंच बन जाता है। उसका कहना था कि भारत में कुछ इंटरव्यू जरूरत से ज्यादा कठिन और वास्तविक नौकरी की जिम्मेदारियों से दूर होते हैं। खासकर तब, जब इंटरव्यू में उम्मीदवार को सीमित समय में ऐसे सवाल दिए जाएं जिनका रोजमर्रा के काम से सीधा संबंध न हो।

कुछ लोगों ने कहा- ‘मुश्किल है तो खुद को अपस्किल करो’

हालांकि Reddit पर हर कोई भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया के खिलाफ नहीं था। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि अगर कंपनियां कठिन सवाल पूछने के बावजूद पर्याप्त उम्मीदवार खोज पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि बाजार उस मॉडल को स्वीकार कर रहा है। एक यूजर ने कहा कि उम्मीदवारों को शिकायत करने के बजाय अपनी skills बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में hiring bar कम होने की संभावना नहीं है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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इंटरव्यू पाने के लिए रिज्यूमे में छिपा रहे AI के सीक्रेट प्रॉम्प्ट, सफेद टेक्स्ट में लिखी ऐसी बात कि HR भी रह गए हैरान

नौकरी पाने की होड़ अब सिर्फ अच्छे रिज्यूमे और शानदार अनुभव तक सीमित नहीं रह गई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कुछ जॉब सीकर्स अपने रिज्यूमे में ऐसे छिपे हुए AI प्रॉम्प्ट डाल रहे हैं, जो स्क्रीनिंग करने वाले AI टूल्स को प्रभावित कर सकें। इस नए तरीके ने रिक्रूटर्स और HR प्रोफेशनल्स के बीच भरोसे और नैतिकता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सफेद अक्षरों में छिपा था करीब 1,500 कैरेक्टर का मैसेज

यह मामला तब सामने आया जब कैलिफोर्निया की कैप्शनिंग टेक्नोलॉजी कंपनी InnoCaption के CEO पॉल ली ने एक जॉब एप्लीकेशन में कुछ अजीब देखा। कानूनी और कंप्लायंस पद के लिए भेजे गए रिज्यूमे में करीब 1,500 कैरेक्टर का सफेद रंग का टेक्स्ट छिपा हुआ था। यह टेक्स्ट सफेद बैकग्राउंड में होने के कारण सामान्य तौर पर दिखाई नहीं देता था।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस छिपे निर्देश में AI सिस्टम को पुराने निर्देशों को नजरअंदाज कर आवेदक को टॉप कैंडिडेट बताने के लिए कहा गया था, भले ही उसकी योग्यता उस स्तर की हो या नहीं।

‘लाइन में आगे निकलने’ की कोशिश से नाराज CEO

पॉल ली के लिए यह सिर्फ एक चालाकी नहीं, बल्कि भरोसे से जुड़ा गंभीर मुद्दा था। उन्होंने इसे लाइन में दूसरों से आगे निकलने की कोशिश बताया। खास तौर पर जिस पद के लिए आवेदन किया गया था, उसमें ईमानदारी और भरोसा बेहद महत्वपूर्ण थे। ऐसे में AI को प्रभावित करने के लिए छिपे निर्देशों का इस्तेमाल करना कंपनी के लिए और भी चिंताजनक बन गया।

पहले छिपे Keywords, अब AI Prompts का खेल

रिज्यूमे में AI प्रॉम्प्ट छिपाने की यह रणनीति पूरी तरह नई सोच नहीं है। पहले भी कुछ उम्मीदवार Applicant Tracking Systems (ATS) को प्रभावित करने के लिए रिज्यूमे में ऐसे Keywords या टेक्स्ट छिपाते थे, जिन्हें इंसान आसानी से नहीं देख पाता था। अब AI के भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के साथ यह तरीका एक कदम आगे बढ़ गया है। उम्मीदवार ऐसे निर्देश डालने की कोशिश कर रहे हैं, जो जनरेटिव AI को उनके पक्ष में फैसला लेने के लिए प्रभावित कर सकें।

Hiring Process के ‘Black Box’ बनने की चिंता

HR प्लेटफॉर्म Lattice की CEO सारा फ्रैंकलिन के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया पहले से ही कई लोगों को एक तरह के ‘ब्लैक बॉक्स’ जैसी लगती है। उम्मीदवारों को अक्सर यह साफ नहीं होता कि उनका रिज्यूमे किस आधार पर शॉर्टलिस्ट या रिजेक्ट किया गया। ऐसे में AI को प्रभावित करने वाली तकनीकें सामने आने से भर्ती प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और भरोसे की चिंता और बढ़ सकती है।

क्या सच में मिलेगा इंटरव्यू का फायदा?

हालांकि, HR एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि छिपे AI प्रॉम्प्ट उम्मीदवारों को वास्तविक फायदा पहुंचाएंगे। Terra Vista की HR कॉर्पोरेट डायरेक्टर नथालिया अरयानी के मुताबिक, रिक्रूटर्स अक्सर बड़ी संख्या में आवेदन एक साथ देखते हैं और पर्याप्त योग्य उम्मीदवार मिलने के बाद आगे बढ़ जाते हैं। ऐसे में रिज्यूमे में कितनी भी चालाकी से AI निर्देश छिपाए जाएं, यह जरूरी नहीं कि वह स्क्रीनिंग सिस्टम के जरिए उम्मीदवार को इंटरव्यू तक पहुंचा ही दें।

AI और नौकरी की दुनिया में शुरू हुई नई ‘रेस’

AI जहां कंपनियों के लिए भर्ती प्रक्रिया को तेज और आसान बना रहा है, वहीं उम्मीदवार भी इसी तकनीक को मात देने के नए तरीके खोज रहे हैं। रिज्यूमे में छिपे प्रॉम्प्ट इसी बदलती जॉब मार्केट की एक झलक हैं।

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नौकरी जॉइन करने के 6 घंटे बाद ही दिया इस्तीफा, वजह जानकर मैनेजर भी रह गया हैरान

दिल्ली स्थित कंपनी Hiring Insider के संस्थापक और पूर्व टैलेंट एक्विजिशन लीडर हर्षित श्रीवास्तव की एक LinkedIn पोस्ट ने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है। उन्होंने एक नए कर्मचारी से जुड़ा ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने भर्ती प्रक्रिया और नौकरी की वास्तविकता के बीच के अंतर पर सवाल खड़े कर दिए। खास बात यह रही कि कर्मचारी ने कंपनी जॉइन करने के महज छह घंटे बाद ही इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवारों को नौकरी की पूरी और सच्ची तस्वीर दिखाई जाती है?

अक्सर कंपनियां किसी पद को आकर्षक तरीके से पेश करती हैं, लेकिन असली जिम्मेदारियां, काम का दबाव और टीम का माहौल जॉइन करने के बाद सामने आता है। हर्षित की पोस्ट ने इसी अंतर को बेहद दिलचस्प तरीके से उजागर किया, जिसके बाद LinkedIn पर लोगों के बीच पारदर्शिता और ईमानदार hiring को लेकर सवाल उठा दिए हैं।

पुराने कर्मचारी ने ही नए कर्मचारी को ट्रेनिंग दी

कहानी के मुताबिक, एक कर्मचारी पहले ही इस्तीफा दे चुका था। मैनेजर ने उससे कहा कि जाने से पहले वो अपनी जगह किसी नए व्यक्ति को हायर करे और उसे काम समझाकर जाए। उस कर्मचारी ने उम्मीदवार का इंटरव्यू लिया, उसे चुना और जॉइनिंग के पहले दिन उसे काम की पूरी जानकारी दी।

इंटरव्यू से अलग थी असलियत

नए कर्मचारी को सिर्फ सामान्य काम नहीं बताया गया। उसे कंपनी की पॉलिसी, टीम स्ट्रक्चर, स्टेकहोल्डर्स, काम का दबाव, डेडलाइन और एस्केलेशन कल्चर तक सब कुछ साफ-साफ समझाया गया। सबसे खास बात यह थी कि पुराने कर्मचारी ने कुछ छिपाया नहीं और न ही बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया।  नतीजा? दिन खत्म होते-होते नए कर्मचारी ने नौकरी छोड़ने का फैसला कर लिया।

मैनेजर ने पूछा “तुमने उसे क्या बताया?”

नए कर्मचारी के इस्तीफे से मैनेजर हैरान और नाराज था। उसने पुराने कर्मचारी से पूछा कि आखिर उसने नए व्यक्ति को ऐसा क्या बता दिया कि उसने कुछ ही घंटों में नौकरी छोड़ दी। जवाब मिला “वही सब, जो आपने मुझे उसे सिखाने के लिए कहा था।” यानी नए कर्मचारी को पहली बार नौकरी की असली तस्वीर दिखाई गई थी। कंपनी ने नौकरी बेची, कर्मचारी ने काम की सच्चाई दिखाई

श्रीवास्तव ने इस घटना को एक दिलचस्प लाइन में समझाया कंपनी ने उसे नौकरी का सपना दिखाया था, जबकि पुराने कर्मचारी ने उसे उस नौकरी की हकीकत दिखा दी। उनका कहना था कि कई बार नौकरी के विज्ञापन और इंटरव्यू में भूमिका जितनी आकर्षक दिखाई जाती है, असल में काम उससे काफी अलग होता है।

ईमानदारी से हो सकती है बेहतर भर्ती

इस कहानी के बाद LinkedIn पर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि भर्ती के दौरान सैलरी और पद के साथ-साथ काम की असली चुनौतियां भी बतानी चाहिए। अगर कंपनी शुरुआत में ही काम का दबाव, जिम्मेदारियां, टीम कल्चर और वास्तविक उम्मीदें साफ कर दे, तो बाद में कर्मचारी के निराश होकर छोड़ने की संभावना कम हो सकती है।

अच्छी hiring सिर्फ कंपनी को पसंद आने वाला उम्मीदवार ढूंढना नहीं है। यह भी देखना है कि उम्मीदवार को कंपनी और नौकरी की सच्ची तस्वीर पहले से पता हो और फिर भी वह वहां काम करना चाहे।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

‘जॉब मिलने की थी पूरी उम्मीद, फिर कंपनी ने…’ सोशल मीडिया पर वायरल हुई उम्मीदवार की पोस्ट

नई नौकरी की तलाश के दौरान उम्मीदवारों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में नई नौकरी की तलाश कर रही एक उम्मीदवार ने इंटरव्यू से जुड़ा अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि, इंटरव्यू के दौरान सब कुछ ठीक चल रहा था और उन्हें लगा कि जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन बाद में काफी इंतजार और कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। LinkedIn पर शेयर किया गया ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर ये एक्सपीरिएंश श्रुति राय ने LinkedIn पर शेयर किया, जहां उन्होंने इसे “अब तक का सबसे बुरा अनुभव” बताया।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

श्रुति राय ने पोस्ट में कहा, “अब तक का सबसे बुरा अनुभव। मैंने हाल ही में एक एजेंसी में इंटरव्यू दिया, जहां मैं पहले काम कर चुकी थी। इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही मैंने अपनी सैलरी की उम्मीदें साफ तौर पर बता दी थीं। मैंने उनसे ये भी कहा था कि अगर मेरी अपेक्षाएं उनके बजट में फिट नहीं बैठतीं, तो मैं किसी का समय बर्बाद नहीं करना चाहूँगी। इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया।”

क्या यहीं है हायरिंग का सही तरीका

उन्होंने कहा, “इंटरव्यू खुद अजीब लगा। मेरे अनुभव, मेरे काम या मेरे द्वारा लीड किए गए कैंपेन को समझने की कोशिश करने के बजाय, ऐसा लगा कि इंटरव्यू लेने वाला किसी सार्थक बातचीत के बजाय अपनी बात साबित करने में ज्यादा दिलचस्पी रखता था। मेरे हर जवाब पर एक नया सवाल खड़ा कर दिया जाता था, मानो उम्मीदवार को असहज करना ही मकसद हो। अगर यही हायरिंग का तरीका है, तो मुझे सच में लगता है कि ये अब पुराना हो चुका है। इंटरव्यू का उद्देश्य किसी की काबिलियत को परखना होना चाहिए, न कि बेवजह पावर डायनामिक बनाना।”

मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं

राय ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा था कि जल्द ही नौकरी का ऑफर मिल जाएगा। इसी वजह से उन्होंने एक दूसरे नौकरी के अवसर को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया। लेकिन जब उन्होंने तय समय के बाद कंपनी से संपर्क किया, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं है, अगर फैसला यही है तो। कंपनियों को किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनने का पूरा अधिकार है। लेकिन परेशानी इस बात से है कि उम्मीदवार से समय देने की उम्मीद की जाती है, जबकि उसके समय की कोई कद्र नहीं की जाती।

उन्होंने आगे लिखा, “अगर आप आगे नहीं बढ़ना चाहते, तो साफ बता दीजिए। अगर आपके प्लान बदल गए हैं, तो इसकी जानकारी दे दीजिए। उम्मीदवार भी इंसान होते हैं, कोई ऐसी जगह नहीं जहां आप बिना कुछ बताए चीजें लंबित छोड़ दें।”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे सच में उम्मीद है कि कंपनियां समझेंगी कि उनकी हायरिंग प्रक्रिया भी उनके कार्य संस्कृति को उतना ही दिखाती है, जितना किसी उम्मीदवार का इंटरव्यू उसकी काबिलियत को दिखाता है। P.S. इस वजह से मैंने एक और अच्छा मौका खो दिया, और यही बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है।”

यूजर्स ने किया कमेंट

एक यूजर ने लिखा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं। यही सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात होती है। मुझे समझ नहीं आता कि इतने सारे उम्मीदवारों को जानबूझकर तनाव और बेचैनी में रखने के बाद लोग चैन से कैसे रह लेते हैं।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “आपने बिल्कुल सही कहा। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है। उन लोगों ने मुझसे काफी बातचीत की, लेकिन आखिर में बिना किसी जवाब के गायब हो गए।” एक और यूजर ने कहा, “यह वाकई मुश्किल होता है। मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है। एक बार तो मुझसे मेरी खुद की जॉब डिस्क्रिप्शन तक लिखवाई गई और उसके बाद मुझे कोई जवाब नहीं मिला। फिर भी आगे बढ़ना ही पड़ता है। आप यह कर सकते हैं।”