फाइनल राउंड तक पहुंचा उम्मीदवार, फिर कंपनी ने ऐसा किया जिसकी उम्मीद नहीं थी

एक अच्छी नौकरी की तलाश में उम्मीदवार कई चरणों से गुजरते हैं और हर सफल राउंड के बाद उनकी उम्मीदें बढ़ने लगती हैं। ऐसा ही कुछ एक सीनियर एग्जीक्यूटिव पद के उम्मीदवार के साथ हुआ, जिसे लंबी इंटरव्यू प्रक्रिया के बाद लगा कि अब उसका चयन लगभग तय है। कंपनी की ओर से मिले सकारात्मक संकेतों और भरोसे भरी बातचीत ने उसकी उम्मीदों को और मजबूत कर दिया था। लेकिन अंतिम चरण के बाद कहानी अचानक बदल गई। जिस कंपनी से जल्द जवाब मिलने की उम्मीद थी, वहां से कोई संदेश नहीं आया।

न ऑफर की जानकारी मिली और न ही प्रक्रिया आगे बढ़ने को लेकर कोई अपडेट। इस अनुभव ने हायरिंग प्रक्रिया में उम्मीदवारों के साथ होने वाले व्यवहार और ‘घोस्टिंग’ की समस्या पर नई बहस छेड़ दी है।

5 घंटे के फाइनल इंटरव्यू के बाद भी नहीं मिला अपडेट

उम्मीदवार ने यह अनुभव Reddit पर साझा किया और पूछा कि क्या सीनियर लेवल की भर्ती प्रक्रिया में ऐसा व्यवहार सामान्य है। उसने बताया कि वो एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी में Senior Director पद के लिए इंटरव्यू देने गया था।

फाइनल राउंड के लिए उसने करीब 5 घंटे कंपनी के ऑफिस में बिताए। इस दौरान उसने लीडरशिप टीम के सामने प्रेजेंटेशन दिया और कई बड़े अधिकारियों से मुलाकात की।

रिक्रूटर के भरोसे से बढ़ी उम्मीदें

उम्मीदवार के मुताबिक, भर्ती प्रक्रिया के दौरान रिक्रूटर का रवैया काफी सकारात्मक था। रिक्रूटर ने उसे भरोसा दिलाया कि कंपनी उसकी जरूरतों के हिसाब से भूमिका तैयार करने की कोशिश करेगी। उम्मीदवार ने बताया कि क्योंकि वो शहर बदलना नहीं चाहता था, इसलिए रिक्रूटर ने दूसरे ऑफिस से रिपोर्टिंग जैसी संभावनाओं पर भी चर्चा की थी।

‘आपकी पसंद के हिसाब से बनाएंगे भूमिका’

उम्मीदवार का कहना है कि रिक्रूटर ने ये भी कहा था कि भूमिका को उसके पसंदीदा काम के अनुसार तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा जल्दी निर्णय लेने का संकेत भी दिया गया था।

इन बातों के बाद उम्मीदवार को लगा कि चयन लगभग तय है। उसने इंटरव्यू से जुड़ी यात्रा खर्च की जानकारी भी तुरंत जमा कर दी।

धन्यवाद मेल का भी नहीं आया जवाब

इंटरव्यू के चार दिन बाद उम्मीदवार ने कंपनी को धन्यवाद मेल भेजा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसी बीच उसने देखा कि कंपनी ने उसी पद की वैकेंसी दोबारा ऑनलाइन डाल दी।

दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी न तो उसे रिजेक्शन मिला, न प्रक्रिया में देरी की जानकारी दी गई और न ही कोई अपडेट आया।

उम्मीदवार ने पूछा- क्या यह सामान्य है?

अपनी पोस्ट में उम्मीदवार ने सवाल किया कि क्या सीनियर लेवल की भर्ती में पहले इतना भरोसा दिलाकर बाद में पूरी तरह संपर्क खत्म कर देना आम बात है।

उसने इसे “उम्मीदें बढ़ाने के बाद अचानक गायब हो जाना” बताया और Reddit यूजर्स से अपने अनुभव साझा करने को कहा।

रिक्रूटर और हायरिंग मैनेजर की भूमिका अलग होती है

Reddit पर कई लोगों ने कहा कि रिक्रूटर का सकारात्मक व्यवहार हमेशा नौकरी पक्की होने का संकेत नहीं होता। उनके अनुसार, रिक्रूटर का काम उम्मीदवारों को प्रक्रिया में बनाए रखना होता है, जबकि अंतिम फैसला हायरिंग मैनेजर और कंपनी के अधिकारियों का होता है।

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि कई बार बजट में बदलाव, कंपनी की अंदरूनी मंजूरी या संगठनात्मक बदलाव के कारण भर्ती रुक सकती है।

खर्च की वापसी और नौकरी को अलग रखें

कुछ लोगों ने उम्मीदवार को सलाह दी कि यात्रा खर्च की वापसी को नौकरी के फैसले से अलग रखें। उनके अनुसार, उम्मीदवार को खर्च के लिए अलग से स्पष्ट ईमेल भेजकर भुगतान की समय सीमा मांगनी चाहिए।

वहीं, कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया कि उम्मीदवार को कंपनी के अधिकारियों से संपर्क बनाए रखना चाहिए, क्योंकि भविष्य में दूसरे अवसर मिल सकते हैं।

हायरिंग प्रक्रिया में बढ़ रही है ‘घोस्टिंग’ की समस्या

ये मामला एक बार फिर दिखाता है कि लंबी भर्ती प्रक्रिया और सकारात्मक संकेतों के बावजूद अंतिम फैसला हमेशा निश्चित नहीं होता। उम्मीदवारों के लिए जरूरी है कि वे ऑफर लेटर मिलने तक दूसरी संभावनाओं को खुला रखें और केवल मौखिक आश्वासनों पर निर्भर न रहें।

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‘जॉब मिलने की थी पूरी उम्मीद, फिर कंपनी ने…’ सोशल मीडिया पर वायरल हुई उम्मीदवार की पोस्ट

नई नौकरी की तलाश के दौरान उम्मीदवारों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हाल ही में नई नौकरी की तलाश कर रही एक उम्मीदवार ने इंटरव्यू से जुड़ा अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने बताया कि, इंटरव्यू के दौरान सब कुछ ठीक चल रहा था और उन्हें लगा कि जल्द ही नौकरी मिल जाएगी। लेकिन बाद में काफी इंतजार और कई बार संपर्क करने के बावजूद कंपनी की ओर से कोई जवाब नहीं आया। LinkedIn पर शेयर किया गया ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर ये एक्सपीरिएंश श्रुति राय ने LinkedIn पर शेयर किया, जहां उन्होंने इसे “अब तक का सबसे बुरा अनुभव” बताया।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

श्रुति राय ने पोस्ट में कहा, “अब तक का सबसे बुरा अनुभव। मैंने हाल ही में एक एजेंसी में इंटरव्यू दिया, जहां मैं पहले काम कर चुकी थी। इंटरव्यू शुरू होने से पहले ही मैंने अपनी सैलरी की उम्मीदें साफ तौर पर बता दी थीं। मैंने उनसे ये भी कहा था कि अगर मेरी अपेक्षाएं उनके बजट में फिट नहीं बैठतीं, तो मैं किसी का समय बर्बाद नहीं करना चाहूँगी। इसके बावजूद उन्होंने इंटरव्यू की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया।”

क्या यहीं है हायरिंग का सही तरीका

उन्होंने कहा, “इंटरव्यू खुद अजीब लगा। मेरे अनुभव, मेरे काम या मेरे द्वारा लीड किए गए कैंपेन को समझने की कोशिश करने के बजाय, ऐसा लगा कि इंटरव्यू लेने वाला किसी सार्थक बातचीत के बजाय अपनी बात साबित करने में ज्यादा दिलचस्पी रखता था। मेरे हर जवाब पर एक नया सवाल खड़ा कर दिया जाता था, मानो उम्मीदवार को असहज करना ही मकसद हो। अगर यही हायरिंग का तरीका है, तो मुझे सच में लगता है कि ये अब पुराना हो चुका है। इंटरव्यू का उद्देश्य किसी की काबिलियत को परखना होना चाहिए, न कि बेवजह पावर डायनामिक बनाना।”

मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं

राय ने बताया कि उन्हें पूरा भरोसा था कि जल्द ही नौकरी का ऑफर मिल जाएगा। इसी वजह से उन्होंने एक दूसरे नौकरी के अवसर को फिलहाल आगे नहीं बढ़ाया। लेकिन जब उन्होंने तय समय के बाद कंपनी से संपर्क किया, तो उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मुझे रिजेक्ट होने से कोई परेशानी नहीं है, अगर फैसला यही है तो। कंपनियों को किसी दूसरे उम्मीदवार को चुनने का पूरा अधिकार है। लेकिन परेशानी इस बात से है कि उम्मीदवार से समय देने की उम्मीद की जाती है, जबकि उसके समय की कोई कद्र नहीं की जाती।

उन्होंने आगे लिखा, “अगर आप आगे नहीं बढ़ना चाहते, तो साफ बता दीजिए। अगर आपके प्लान बदल गए हैं, तो इसकी जानकारी दे दीजिए। उम्मीदवार भी इंसान होते हैं, कोई ऐसी जगह नहीं जहां आप बिना कुछ बताए चीजें लंबित छोड़ दें।”

उन्होंने आगे लिखा, “मुझे सच में उम्मीद है कि कंपनियां समझेंगी कि उनकी हायरिंग प्रक्रिया भी उनके कार्य संस्कृति को उतना ही दिखाती है, जितना किसी उम्मीदवार का इंटरव्यू उसकी काबिलियत को दिखाता है। P.S. इस वजह से मैंने एक और अच्छा मौका खो दिया, और यही बात मुझे सबसे ज्यादा परेशान करती है।”

यूजर्स ने किया कमेंट

एक यूजर ने लिखा, “मैं पूरी तरह सहमत हूं। यही सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात होती है। मुझे समझ नहीं आता कि इतने सारे उम्मीदवारों को जानबूझकर तनाव और बेचैनी में रखने के बाद लोग चैन से कैसे रह लेते हैं।” एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, “आपने बिल्कुल सही कहा। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है। उन लोगों ने मुझसे काफी बातचीत की, लेकिन आखिर में बिना किसी जवाब के गायब हो गए।” एक और यूजर ने कहा, “यह वाकई मुश्किल होता है। मेरे साथ भी ऐसा हो चुका है। एक बार तो मुझसे मेरी खुद की जॉब डिस्क्रिप्शन तक लिखवाई गई और उसके बाद मुझे कोई जवाब नहीं मिला। फिर भी आगे बढ़ना ही पड़ता है। आप यह कर सकते हैं।”