‘मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 4.7 करोड़ चुराए हैं’, टेक कर्मचारी ने 2 साल तक कुछ काम न करने पर कही बड़ी बात

एक टेक कर्मचारी ने यह दावा करके इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया है कि उसने लगभग दो साल तक काम पर लगभग कुछ भी न करते हुए 275,000 डॉलर (करीब 2.6 करोड़ रुपये) की सालाना सैलरी कमाई। कर्मचारी का अनुमान है कि इस दौरान उसे 500,000 डॉलर (लगभग 4.7 करोड़ रुपये) से ज्यादा का भुगतान किया गया, जबकि उसके पास लगभग कोई जिम्मेदारी नहीं थी।

रेडिट पोस्ट वायरल

रेडिट (Reddit) पर एक पोस्ट में उसने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक में एक बड़ा प्रमोशन कैसे एक अप्रत्याशित मोड़ पर आ गया। कंपनी में अचानक हुए पुनर्गठन (restructuring) के कारण उसके पास न तो कोई सार्थक काम बचा और न ही उसे मैनेजमेंट से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले।

रेडिट के ‘r/corporate’ सबरेडिट पर अपना अनुभव साझा करते हुए कर्मचारी ने कहा- “मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 500,000 डॉलर से ज्यादा चुरा लिए हैं।” उसने बताया कि उसने कंपनी में लगभग एक दशक बिताया और इस दौरान पांच अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। हालांकि 2025 की शुरुआत में जो उसके करियर का एक अहम पड़ाव होना चाहिए था, वह अनिश्चितता के एक लंबे दौर में बदल गया।

रेडिट यूजर के अनुसार- उसे एक नई टीम में शामिल होने का ऑफर मिला, जो उसके करियर में एक बड़ा कदम था। लेकिन जिस दिन उसने नई टीम जॉइन की उसी दिन कंपनी में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन हुआ, जिसके चलते वे मैनेजर और डायरेक्टर दोनों ही कंपनी छोड़कर चले गए, जिन्होंने उसे काम पर रखा था।

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इस मौके के लिए अपने परिवार को वेस्ट कोस्ट से न्यूयॉर्क शहर ले जाने के बाद उन्होंने एक-दो सप्ताह इंतजार करने का फैसला किया कि नई लीडरशिप के तहत टीम कैसे काम करेगी। हालांकि हालात वैसे नहीं सुधरे जैसी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने लिखा- “तो वहां मैं था। साल के लगभग 275,000 डॉलर कमा रहा था एक ऐसी टीम में जहां कोई जिम्मेदारी या मैनेजमेंट का कोई दिशा-निर्देश नहीं था। बस कुछ नहीं कर रहा था।”

ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे

कर्मचारी ने बताया कि उनका अनुभव सिर्फ कम काम या कभी-कभार होने वाली मीटिंग्स से कहीं बढ़कर था। उन्होंने बताया कि वे अपने काम के घंटों में ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे। न्यूयॉर्क शहर के मशहूर रेस्तरां ढूंढ़ते थे और मैनहट्टन में घूमते-फिरते थे। भले ही यह सुनने में एक बहुत ही शानदार स्थिति लगे, लेकिन उन्होंने कहा कि किसी उद्देश्य का न होना धीरे-धीरे उनके लिए निराशा का कारण बन गया।

रेडिट यूजर ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने सार्थक काम पाने और बिजनेस को बेहतर ढंग से समझने के लिए कई कोशिशें कीं। हालांकि उनका कहना है कि नए मैनेजर की तरफ से कोई खास दिशा-निर्देश नहीं मिले, जिसकी वजह से वे अपने काम से पूरी तरह अलग-थलग महसूस करने लगे।

आखिरकार उसने काम खोजने की नियमित कोशिशें बंद कर दीं और ज्यादातर दिन घर पर ही रहने लगा। उसने बताया कि वह अपने अपार्टमेंट के जिम में समय बिताता था, तरह-तरह के नाश्ते तैयार करता था, बालकनी में बैठकर शहर के नजारे देखते हुए कॉफी पीता था और कॉर्पोरेट जीवन की बेतुकी बातों के बारे में सोचता रहता था।

इस अनुभव ने टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के प्रति उसके नजरिए को भी बदल दिया। उसने कहा कि उसे इस बात से काफी हैरानी हुई कि कोई कर्मचारी इतने लंबे समय तक बिना किसी काम (बिना किसी असाइनमेंट) के रह सकता है और फिर भी उसे अच्छी-खासी सैलरी मिलती रहती है।

टेक कर्मचारी का कहना है कि आखिरकार उसे एक बेहतर रोल मिल गया

इन अजीब हालात के बावजूद कर्मचारी ने तय किया कि वह इस अनचाहे ब्रेक का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेगा। कई महीनों तक इंटरव्यू देने के बाद उसे हाल ही में उसी कंपनी में एक और पद मिल गया, जिसे उसने अपने करियर में एक बड़ी तरक्की बताया। हालांकि वह इस नए मौके को लेकर उत्साहित था, लेकिन लगभग दो साल तक बिना किसी काम के रहने के बाद फिर से एक चुनौतीपूर्ण रोल में लौटना काफी मुश्किल साबित हुआ।

उन्होंने लिखा, “मुझे यहां आए अभी सिर्फ डेढ़ हफ्ता ही हुआ है और मुझे लगभग 2 साल तक कोई काम न करने का असर अभी से महसूस होने लगा है। मुझे लग रहा है कि मैं काफी पीछे छूट गया हूं और मेरी कार्यक्षमता भी काफी कम हो गई है।” फिर भी उन्होंने कहा कि वे खुश हैं कि उन्हें एक ऐसी भूमिका मिल गई है, जहां वे सार्थक योगदान दे सकते हैं और फिर से कुछ नया सीख सकते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बिना ज्यादा काम किए सैलरी लेने पर कोई गिल्ट महसूस हुआ तो उन्होंने माना कि शुरुआत में उन्हें लगा जैसे वे कंपनी पर एक ‘बेवजह का खर्च’ बन गए हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि इससे पहले एक सेल्सपर्सन के तौर पर वे कंपनी के लिए काफी रेवेन्यू (कमाई) लाते थे।

हालांकि समय के साथ उनका यह अपराधबोध गुस्से में बदल गया और फिर उन्होंने स्थिति को स्वीकार कर लिया। आखिरकार उन्होंने इस समय का भरपूर फायदा उठाने का फैसला किया—अपनी पत्नी के साथ अच्छा समय बिताया, न्यूयॉर्क के अलग-अलग रेस्तरां में खाना चखा और खुद को एक बहुत जरूरी मानसिक ब्रेक दिया।

उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी नौकरियों के बारे में एक अलग नजरिया दिया है। यहां कर्मचारी कभी-कभी कंपनी की व्यवस्था की कमियों के बीच ऐसे छिप सकते हैं कि किसी को पता ही नहीं चलता कि उनकी जिम्मेदारियां क्या हैं।

पोस्ट के अंत में उन्होंने पाठकों को अपने सवाल पूछने के लिए इनवाइट किया। बाद में एक एडिट में उन्होंने अपने जैसे अनुभव साझा करने वाले लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी कहानियां सुनकर उन्हें अपनी स्थिति के बारे में बेहतर महसूस हुआ।

रेडिट यूजर्स ने अपने मिलते-जुलते अनुभव साझा किए

इस कर्मचारी की कहानी पढ़ने के बाद कई रेडिट यूजर्स ने अपने विचार साझा किए। कुछ लोगों को इस स्थिति से जलन हुई तो कुछ ने इस बात पर चिंता जताई कि कोई सार्थक काम न होने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एक यूजर ने कहा, “न्यूयॉर्क में इधर-उधर घूमना किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन अगर मेरे हफ्ते में 2 दिन से ज्यादा समय खाली निकल जाए तो मैं पागल होने लगता हूं।”

एक दूसरे यूजर ने कहा, “मैं खुद टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं और पूरे दिन व्यस्त रहता हूं, इसलिए आप मेरी ‘ड्रीम जॉब’ जी रहे हैं! बस फर्क इतना है कि अगर मैं आपकी जगह होता तो उस खाली समय का इस्तेमाल अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने और नए सर्टिफिकेशन लेने में करता।”

एक तीसरे यूजर ने कहा, “मैं यहां कुछ पूछने नहीं आया हूं, बस इतना कहना चाहता हूं कि ‘मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है!’ कुछ समय तक तो मजा आता है, लेकिन फिर यह निराशाजनक लगने लगता है। मुझे अभी एक प्रमोशन मिला है और मैं थोड़ा घबराया हुआ हूं क्योंकि अब मुझे सच में काम करना पड़ेगा, लेकिन साथ ही मुझे कुछ नया सीखने और असली काम करने का मौका भी मिलेगा! और हां, अब यह पूरी तरह से रिमोट (घर से काम) नहीं है, बल्कि हाइब्रिड है, जिसे लेकर मैं काफी उत्साहित हूं! और सबसे अच्छी बात यह है कि मैं यूरोप जा रहा हूं।”

साल भर में 92 लाख का टैक्स दिया, अब 90 लाख की नौकरी भी नहीं मिल रही – Uber इंजीनियर के पोस्ट ने मचाया बवाल

नई दिल्ली। अच्छी सैलरी वाली नौकरी और लाखों रुपये का इनकम टैक्स देने के बाद भी नौकरी जाने का डर खत्म नहीं होता। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। Uber में सीनियर इंजीनियर होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि पिछले साल उन्होंने 92 लाख रुपये इनकम टैक्स दिया था। लेकिन अब पैटरनिटी लीव के दौरान नौकरी जाने के बाद वे नई नौकरी खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने रेडिट (Reddit) पर 7 अक्टूबर 2026 को शेयर की गई उनकी पोस्ट के मुताबिक, घर में नवजात बच्चा है और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच नई नौकरी ढूंढना आसान नहीं होता है।

नौकरी छूटने का कारण रहा पैटरनिटी लीव

इंजीनियर का कहना है कि वे चार महीने की पैटरनिटी लीव (Paternity leave) पर थे, तभी उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। घर में नवजात बच्चा है और परिवार की मदद के लिए भी कोई खास सहारा नहीं है। ऐसे में बच्चे की देखभाल के साथ नई नौकरी ढूंढना उनके लिए मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि परिवार की जिम्मेदारियों के चलते वे नौकरी खोजने और इंटरव्यू की तैयारी पर पूरा समय नहीं दे पा रहे हैं। नौकरी जाने के बाद घर के खर्च और बच्चे की देखभाल की चिंता भी बढ़ गई है। वह कहते है कि नौकरी जाने के बाद उन्हें ऐसी नई नौकरी नहीं मिल पा रही है, जिसमें सालाना कम से कम 90 लाख रुपये मिलें।

सेवरेंस पे पर टैक्स से नाराज, भारत छोड़ने की कही बात

नौकरी जाने के बाद मिलने वाले पैसे यानी सेवरेंस पे (Severance pay) पर टैक्स लगने से भी इंजीनियर नाराज हैं। उनका कहना है कि नई नौकरी मिलने तक परिवार का खर्च चलाने के लिए उन्हें इस पैसे की जरूरत है। ऐसे में टैक्स कटने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। इंजीनियर ने कहा कि वे जल्द ही भारत छोड़ देंगे और वापस नहीं आना चाहते।

इस घटना ने एक बार फिर नौकरी की सुरक्षा, टैक्स और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा शुरू कर दी है।

जैक याडेगरी कौन हैं? 15 विश्वविद्यालयों ने किया रिजेक्ट, अब 19 साल की उम्र में अपने AI स्टार्टअप के लिए जुटाए 10 मिलियन डॉलर

आज के दौर में जहां युवा अपनी पढ़ाई और करियर को लेकर भविष्य की योजनाएं बना रहे हैं, वहीं अमेरिका के 19 वर्षीय जैक याडेगरी अपनी उद्यमशीलता और AI तकनीक के दम पर बिजनेस की दुनिया में चर्चा बटोर रहे हैं। कम उम्र में ही उन्होंने अपनी प्रतिभा और मेहनत से एक खास पहचान बनाई है। जैक ने महज सात साल की उम्र में कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था और धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी की दुनिया में अपनी रुचि को एक बड़े अवसर में बदल दिया। उन्हें सबसे पहले Cal AI ऐप से पहचान मिली, जिसने उनकी सफलता की कहानी को नई दिशा दी। अब वह अपने नए AI स्टार्टअप Persona को लेकर सुर्खियों में हैं।

इस स्टार्टअप के लिए 10 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाना उनकी उपलब्धियों में एक और बड़ी कड़ी माना जा रहा है। जैक की कहानी दिखाती है कि सही सोच, तकनीकी कौशल और नए विचारों के साथ कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

7 साल की उम्र में सीखी कोडिंग, 16 में बेची पहली कंपनी

अमेरिका के लॉन्ग आइलैंड, न्यूयॉर्क में रहने वाले जैक याडेगरी को बचपन से ही तकनीक में दिलचस्पी थी। उन्होंने स्कूल के दिनों में Totally Science नाम की गेमिंग वेबसाइट बनाई थी। इस प्लेटफॉर्म के जरिए छात्र स्कूल नेटवर्क पर ब्लॉक किए गए गेम खेल सकते थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जैक ने महज 16 साल की उम्र में इस वेबसाइट को करीब 1 लाख डॉलर में बेच दिया था।

हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड ने किया रिजेक्ट, फिर भी नहीं मानी हार

जैक की कहानी का एक दिलचस्प पहलू कॉलेज एडमिशन से भी जुड़ा है। अप्रैल 2025 में उन्होंने बताया था कि जिन 18 विश्वविद्यालयों में उन्होंने आवेदन किया, उनमें से 15 ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया। इनमें हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थान भी शामिल थे।

रिपोर्ट के अनुसार, उनका GPA 4.0 और ACT स्कोर 34 था। इसके बावजूद उन्हें कई बड़े विश्वविद्यालयों में दाखिला नहीं मिला। बाद में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी में पढ़ाई शुरू की। हालांकि, एडमिशन में मिली निराशा उनके बिजनेस सफर में बाधा नहीं बनी।

Cal AI ऐप ने बनाया करोड़ों का बिजनेस

साल 2024 में जैक ने Cal AI नाम का कैलोरी ट्रैकिंग ऐप लॉन्च किया। इसकी मदद से यूजर्स खाने की तस्वीर अपलोड करके उसमें मौजूद कैलोरी का अनुमान लगा सकते थे। ऐप को लोगों के बीच अच्छी लोकप्रियता मिली।

मार्च 2026 में फिटनेस प्लेटफॉर्म MyFitnessPal ने Cal AI का अधिग्रहण करने की घोषणा की। सौदे की रकम सार्वजनिक नहीं की गई। TechCrunch की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐप के 1.5 करोड़ से ज्यादा डाउनलोड हो चुके थे और दो साल में इसका सालाना राजस्व 3 करोड़ डॉलर से अधिक पहुंच गया था।

अब Persona से AI की दुनिया में नई शुरुआत

MyFitnessPal से जून में अलग होने के बाद जैक ने Persona पर काम शुरू किया। यह AI असिस्टेंट यूजर्स को रोजमर्रा के कामों में मदद देने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए जुटाई गई 10 मिलियन डॉलर की फंडिंग का नेतृत्व Vine Ventures ने किया, जबकि अन्य निवेशकों में Cory Levy और Collective Global शामिल हैं।

दिसंबर में आ सकता है AI डिवाइस

Persona के तहत दिसंबर में 179 डॉलर का एक पहनने योग्य डिवाइस लॉन्च करने की योजना है। इसे बटन दबाकर या कलाई की हलचल से सक्रिय किया जा सकेगा। जैक का कहना है कि कंपनी यूजर्स की बातचीत विज्ञापनदाताओं को नहीं बेचेगी, हालांकि प्रायोजित शॉपिंग सुझाव इसके बिजनेस मॉडल का हिस्सा होंगे। फिलहाल Persona iMessage पर बीटा वर्जन में उपलब्ध है और इसके कुछ हजार शुरुआती यूजर्स हैं।

नौकरी छोड़ने का मन, लेकिन इस्तीफा देने से डर रहा कर्मचारी! Reddit पर बताई अपनी परेशानी

नौकरी छोड़ने का मन, लेकिन इस्तीफा देने से डर रहा कर्मचारी! Reddit पर बताई अपनी परेशानी

नौकरी में तनाव और बढ़ती जिम्मेदारियां कई बार कर्मचारियों को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देती हैं, जिनकी कोई कल्पना भी नहीं करता। ऐसा ही एक मामला सोशल मीडिया पर सामने आया है, जहां एक कर्मचारी ने इस्तीफा देने के बजाय बॉस से नौकरी से निकाले जाने का रास्ता तलाशने की बात कही। उसकी इस सोच के पीछे काम का दबाव, भविष्य की चिंता और आर्थिक सुरक्षा जैसे कई कारण हैं। कर्मचारी की इस परेशानी पर Reddit यूजर्स ने भी अपनी राय दी और उसे अलग-अलग सुझाव दिए।

नई जिम्मेदारी बनी परेशानी की वजह

Reddit के r/QuitCorporate फोरम पर कर्मचारी ने बताया कि वह एक बड़ी कंपनी में काम करता है, लेकिन अब अपनी नौकरी से खुश नहीं है। हाल ही में उसने एक नई जिम्मेदारी स्वीकार की थी, जो उसकी उम्मीद से कहीं ज्यादा मुश्किल साबित हुई। उसे अपने काम का दायरा खुद तय करना पड़ता है और मैनेजर की उम्मीदों पर खरा उतरना भी चुनौती बन गया है। उसे लगता है कि बॉस उससे ऐसे नतीजों की उम्मीद कर रहे हैं, जिन्हें हासिल करना आसान नहीं है।

दूसरी नौकरी नहीं मिली, इसलिए बढ़ी चिंता

कर्मचारी ने दूसरी कंपनियों में नौकरी तलाशनी शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई अच्छा अवसर नहीं मिला। वह नौकरी छोड़कर कुछ समय आराम करना चाहता है, मगर अनिश्चित जॉब मार्केट उसे ऐसा करने से रोक रहा है। उसकी योजना करीब सात साल बाद जल्दी रिटायरमेंट लेने की है। तब तक वह कम जिम्मेदारी वाली नौकरी करना चाहता है, भले ही इसके लिए कम वेतन स्वीकार करना पड़े।

इस्तीफा नहीं, लेऑफ चाहता है कर्मचारी

इस मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि कर्मचारी खुद इस्तीफा देने के बजाय कंपनी की छंटनी प्रक्रिया का हिस्सा बनना चाहता है। उसे उम्मीद है कि नौकरी से निकाले जाने पर सेवरेंस पैकेज मिल सकता है, जिससे उसे नई नौकरी तलाशने और मानसिक तनाव से उबरने के लिए कुछ समय मिल जाएगा।

उसने बताया कि कंपनी में छंटनी हो रही है, लेकिन उसके विभाग में इस साल की प्रस्तावित छंटनी पूरी हो चुकी है। ऐसे में उसे इंतजार है कि अगली बार मौका कब मिलेगा।

delhi traffic (1)बॉस से मीटिंग करने में भी लगता है डर

लगातार तनाव का असर कर्मचारी की मानसिक स्थिति पर भी पड़ा है। उसने बताया कि अब उसे बॉस के साथ मीटिंग करने से घबराहट होती है। उसे डर है कि कहीं उसे परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) पर न डाल दिया जाए। यह ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें कर्मचारी को प्रदर्शन सुधारने के लिए लक्ष्य और समयसीमा दी जाती है।

उसे अपनी पेशेवर छवि खराब होने की भी चिंता है। वह सहकर्मियों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखते हुए सम्मानजनक तरीके से कंपनी छोड़ना चाहता है।

Reddit यूजर्स ने क्या सलाह दी?

पोस्ट पर कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया कि कर्मचारी मैनेजमेंट को अगली छंटनी में स्वेच्छा से शामिल होने की इच्छा बता सकता है। वहीं, कुछ लोगों ने नौकरी छोड़ने से पहले मेडिकल लीव जैसे विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी।

हालांकि, सेवरेंस पैकेज और बेरोजगारी भत्ते की पात्रता कंपनी की नीतियों और स्थानीय कानूनों पर निर्भर करती है। यह कहानी बताती है कि लगातार काम का दबाव कभी-कभी कर्मचारियों को इस्तीफे के बजाय नौकरी से निकाले जाने को बेहतर विकल्प मानने पर मजबूर कर सकता है।

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‘तुझे पैदा करके गलती कर दी’, ₹95 हजार की नौकरी जाने के बाद बदल गया घर का माहौल, 22 साल के युवक ने बताया कैसे माता-पिता के तानों ने बढ़ाई मुश्किलें

एक अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी होने के बावजूद जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी-कभी हालात ऐसे बदलते हैं कि इंसान को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन मुश्किलें तब और बढ़ जाती हैं, जब बाहर की परेशानियों के बीच अपने ही साथ देना छोड़ दें। सोशल मीडिया पर 22 साल के एक युवक की आपबीती कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। नौकरी छूटने के बाद उसकी जिंदगी में आए बदलाव और परिवार के कथित व्यवहार ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

युवक की पोस्ट पर कई लोग उसके दर्द को समझने की कोशिश कर रहे हैं, तो कुछ ने उसे आत्मनिर्भर बनने और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि मुश्किल दौर में परिवार का साथ कितना मायने रखता है।

नौकरी छूटते ही घर में बदल गया व्यवहार

22 वर्षीय युवक ने बताया कि थर्ड-टियर कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे आईटी सेक्टर में नौकरी मिली थी। उसकी मासिक सैलरी करीब 95,000 रुपये थी, लेकिन छह महीने बाद ही उसकी नौकरी चली गई। अब उसे बेरोजगार हुए दो महीने हो चुके हैं।

युवक के मुताबिक, पिछले एक महीने से माता-पिता उसे कथित तौर पर निकम्मा और दूसरों पर निर्भर रहने वाला कहकर ताने दे रहे हैं। उसने अपनी पोस्ट का शीर्षक रखा, ‘Parents said Galti kardi tujhe paida karke’। उसके अनुसार, एक दिन माता-पिता ने उसकी थाली से खाना हटा दिया और कहा कि उसे पैदा करके गलती कर दी।

दो दिन से खाना नहीं मिलने का दावा

युवक ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि उसने पिछले दो दिनों से कुछ नहीं खाया था और घर में किसी ने उससे खाने के बारे में नहीं पूछा। उसने यह भी आरोप लगाया कि परिवार ने कूलर उससे ले लिया और पेट्रोल खत्म होने पर उसे अपनी बाइक करीब तीन किलोमीटर तक खींचनी पड़ी।

उसका कहना है कि आर्थिक परेशानी के साथ घर का माहौल भी उसकी मानसिक स्थिति पर असर डाल रहा है। वह नाइट गार्ड की नौकरी तलाश रहा था, ताकि काम के साथ भविष्य के इंटरव्यू की तैयारी कर सके। उसने फूड डिलीवरी का काम भी आजमाया, लेकिन उसके मुताबिक, इससे तैयारी के लिए समय नहीं मिल पा रहा था।

अच्छी कमाई के बावजूद नहीं की बचत

युवक ने बताया कि उसने अपनी कमाई से बाइक खरीदी थी और इसके लिए कोई ईएमआई नहीं चल रही थी। हालांकि, नौकरी जाने के बाद उसे महसूस हुआ कि भविष्य की मुश्किलों के लिए पर्याप्त बचत करना कितना जरूरी है।

उसने दूसरे युवाओं को सलाह दी कि बाइक या कार जैसी महंगी चीजें खरीदने से पहले कुछ पैसे आपातकालीन जरूरतों के लिए जरूर बचाकर रखें।

Parents said “Galti kardi tujhe paida karke”

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Reddit यूजर्स ने बढ़ाया हौसला

युवक की कहानी पर कई लोगों ने उसे हिम्मत रखने और नौकरी की तलाश जारी रखने की सलाह दी। एक यूजर ने उसकी जॉब प्रोफाइल पूछते हुए अपने परिचितों के जरिए नौकरी के अवसर तलाशने में मदद की पेशकश की। कुछ लोगों ने उसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और भविष्य में अपनी परिस्थितियों के अनुसार अलग रहने पर विचार करने को कहा। यह मामला युवक की Reddit पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित है, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी उसकी कहानी एक अहम सवाल उठाती है मुश्किल समय में अपनों को तानों की जरूरत होती है या थोड़े सहारे और समझदारी की?

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Video: Zomato की ₹50 हजार वाली नौकरी छोड़ी, अब 4 तरीकों से कमा रही ₹2.28 लाख रुपये

नौकरी छोड़ने का फैसला अक्सर जोखिम भरा माना जाता है, खासकर जब हर महीने मिलने वाली तय सैलरी का सहारा छूट जाए। लेकिन Zomato की नौकरी छोड़ने वाली वर्षा ने कमाई के लिए एक नहीं, बल्कि चार अलग-अलग रास्ते चुने। पांच महीने पहले तक वह हर महीने 50 हजार रुपये की सैलरी पा रही थीं, लेकिन अब सितंबर में उनकी कुल कमाई 2.28 लाख रुपये से ज्यादा रही। उन्होंने टेक्नोलॉजी से जुड़े वीडियो बनाने, ब्रांड्स के साथ साझेदारी करने, लोगों को ट्रेनिंग देने और रिमोट सेल्स के जरिए पैसे कमाए। वर्षा ने अपनी इस कमाई का पूरा ब्योरा इंस्टाग्राम पर साझा किया, जिसके बाद उनकी कहानी चर्चा में आ गई।

हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि सितंबर की कमाई जुलाई और अगस्त के मुकाबले कम रही। उनकी कहानी बताती है कि कमाई के कई विकल्प बनाना संभव है, लेकिन इसमें मेहनत और आय में उतार-चढ़ाव दोनों शामिल हैं।

टेक्नोलॉजी से जुड़े वीडियो बनाकर कमाए ₹1 लाख से ज्यादा

वर्षा की सितंबर की कमाई में सबसे बड़ा हिस्सा टेक यूजीसी (TechUGC) का रहा। इस काम से उन्होंने 1,00,900 रुपये कमाए। इसमें टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स, ऐप्स, सॉफ्टवेयर और डिजिटल टूल्स के बारे में वीडियो बनाना शामिल है। ऐसे कंटेंट में किसी प्रोडक्ट का डेमो देना या उसके इस्तेमाल का तरीका समझाना भी शामिल हो सकता है। हालांकि, वर्षा के मुताबिक, जुलाई और अगस्त की तुलना में सितंबर में इस काम से उनकी कमाई कम रही।

ब्रांड्स के साथ काम करके मिले ₹86 हजार

वर्षा की कमाई का दूसरा बड़ा जरिया सोशल मीडिया पर ब्रांड पार्टनरशिप है। उन्होंने बताया कि सितंबर में इससे 86,000 रुपये की कमाई हुई। हालांकि, इस रकम में से 66,000 रुपये उस समय तक उनके बैंक खाते में नहीं आए थे। इससे पता चलता है कि ऑनलाइन काम में कमाई दर्ज होने और पैसा वास्तव में खाते में आने के बीच अंतर हो सकता है।

लोगों को सिखाने और रिमोट सेल्स से भी हो रही कमाई

वर्षा केवल कंटेंट बनाकर ही पैसा नहीं कमा रहीं, बल्कि अपने अनुभव को दूसरों के साथ साझा करके भी कमाई कर रही हैं। उन्होंने बताया कि टेक यूजीसी के जरिए कमाई करना सिखाने वाले उनके वन-टू-वन सेशन से सितंबर में करीब 36,242 रुपये आए। वहीं, रिमोट सेल्स से उन्हें 5,744 रुपये मिले। फिलहाल यह उनकी चारों इनकम स्ट्रीम में सबसे छोटा हिस्सा है।

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सितंबर में कमाई घटी, फिर भी अक्टूबर से उम्मीदें

चारों स्रोतों को मिलाकर वर्षा ने सितंबर में 2,28,892 रुपये की कुल कमाई बताई। हालांकि, उन्होंने माना कि यह जुलाई और अगस्त के मुकाबले कम थी। अब उनकी कोशिश अक्टूबर में कमाई को दोबारा बढ़ाने की है।

उनकी कहानी सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रही है। कुछ यूजर्स ने उनके प्रयासों की तारीफ की, जबकि कुछ ने टेक यूजीसी के बारे में और जानकारी जानने की इच्छा जताई।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि वर्षा की बताई गई रकम कुल रेवेन्यू है, जरूरी नहीं कि यही उनका शुद्ध मुनाफा हो। कंटेंट बनाने में लगने वाला खर्च, टैक्स और भुगतान में देरी जैसी बातें वास्तविक कमाई को प्रभावित कर सकती हैं। उनकी कहानी दिखाती है कि कमाई के कई रास्ते बनाना संभव है, लेकिन हर महीने एक जैसी आय की गारंटी नहीं होती।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

127% सैलरी हाइक का ऑफर ठुकराए या नई नौकरी जॉइन करे? कर्मचारी की दुविधा पर Reddit यूजर्स ने दी सलाह

127% सैलरी हाइक का ऑफर ठुकराए या नई नौकरी जॉइन करे? कर्मचारी की दुविधा पर Reddit यूजर्स ने दी सलाह

नौकरी बदलने का फैसला आसान नहीं होता, खासकर तब जब नई कंपनी पहले से कहीं ज्यादा सैलरी देने को तैयार हो और मौजूदा कंपनी भी आपको रोकने के लिए वेतन बढ़ाने का प्रस्ताव दे। बेंगलुरु में काम करने वाले एक क्लिनिकल डेटा स्पेशलिस्ट के सामने ऐसी ही स्थिति आ गई है। उन्हें नई नौकरी में 127 फीसदी सैलरी हाइक का ऑफर मिला है। अब उनकी मौजूदा कंपनी भी वेतन बढ़ाकर उन्हें अपने साथ बनाए रखना चाहती है।

कर्मचारी ने Reddit पर अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि नई नौकरी में पूरी तरह वर्क फ्रॉम होम की सुविधा और घर से काम करने के लिए जरूरी सामान खरीदने हेतु जॉइनिंग बोनस भी दिया जा रहा है। हालांकि, नई जगह काम का दबाव कितना होगा और वर्क-लाइफ बैलेंस कैसा रहेगा, इसे लेकर वह असमंजस में हैं।

पुरानी कंपनी में सुकून, लेकिन भविष्य को लेकर चिंता

कर्मचारी की मौजूदा कंपनी क्लिनिकल रिसर्च इंडस्ट्री में फंक्शनल सर्विस प्रोवाइडर (FSP) मॉडल के तहत काम करती है। उनके मुताबिक, पुरानी नौकरी में टीम और काम करने का तरीका जाना-पहचाना है। काम भी फिलहाल संभालने लायक है, इसलिए वहां बने रहने का मन था।

लेकिन मौजूदा प्रोजेक्ट या FSP एंगेजमेंट को लेकर अनिश्चितता और मैनेजर के कंपनी छोड़ने से उनकी चिंता बढ़ गई है। कंपनी ने नई नौकरी के ऑफर के जवाब में सैलरी मैच करने की संभावना जताई है, मगर अभी तक कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है।

कर्मचारी के सामने सवाल है कि अगर पुरानी कंपनी भी उतनी ही सैलरी देने लगे, तो क्या सिर्फ नए अवसर के लिए नौकरी बदलना सही होगा? या फिर परिचित माहौल में बने रहना ही बेहतर फैसला है?

Reddit यूजर्स ने दी सलाह, काउंटर ऑफर स्वीकार करने से पहले सोचें

कर्मचारी की पोस्ट पर कई Reddit यूजर्स ने उन्हें नई नौकरी चुनने की सलाह दी। कुछ लोगों का मानना था कि इस्तीफे की बात सामने आने के बाद कंपनी का व्यवहार बदल सकता है और भविष्य में कर्मचारी पर ज्यादा काम का दबाव डाला जा सकता है।

एक यूजर ने सलाह दी कि काउंटर ऑफर मिलने के बावजूद नई नौकरी के फायदे और जोखिमों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। दूसरे यूजर ने आशंका जताई कि कंपनी कर्मचारी को रोकने के साथ-साथ कम वेतन पर किसी दूसरे व्यक्ति को नियुक्त करने की योजना भी बना सकती है। हालांकि, इन टिप्पणियों में बताई गई आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

127% hike with a new company vs retention offer from my current employer

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नौकरी बदलने से पहले किन बातों पर दें ध्यान?

यह मामला केवल ज्यादा सैलरी पाने का नहीं, बल्कि लंबे समय के करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाने का भी है। नौकरी बदलने से पहले वेतन के साथ काम के घंटे, जिम्मेदारियां, नौकरी की स्थिरता, मैनेजर और टीम का माहौल तथा भविष्य में तरक्की की संभावनाएं देखना जरूरी है।

साथ ही, अगर मौजूदा कंपनी वेतन बढ़ाने की पेशकश करती है, तो यह जानना भी अहम है कि वह प्रस्ताव लिखित और स्पष्ट है या नहीं। आखिरकार, 127 फीसदी की सैलरी हाइक आकर्षक जरूर है, लेकिन सही फैसला वही होगा जो आर्थिक फायदे के साथ करियर और जीवनशैली के लिए भी बेहतर साबित हो।

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20 रुपये के टिकट की बजाय जान की बाजी लगाने वाले बेटिकट यात्री चलती ट्रेन से कूदे, देखें वायरल Video

उत्तर प्रदेश में टिकट चेकिंग से बचने के लिए यात्रियों के एक बड़े ग्रुप ने चलती ट्रेन से छलांग लगा दी। यह घटना ट्रेन के रसौली रेलवे स्टेशन पहुंचने से कुछ देर पहले हुई। खबर है कि यात्री ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (TTE) से टकराव से बचने की कोशिश कर रहे थे। एक यात्री ने इस घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। रेडिट प्लेटफॉर्म पर यह वीडियो खूब सुर्खियां बटोर रहा है। लोग यात्रियों के ट्रेन से कूदकर स्टेशन से भागने को बेवकूफी करार दे रहे हैं।

स्टेशन से पहले यात्री ट्रेन से कूदे

फुटेज में बड़ी संख्या में लोग रेलवे ट्रैक के पास चलती ट्रेन से उतरते हुए दिख रहे हैं। कुछ लोग नीचे कूदने के बाद भागते हुए देखे जा सकते हैं, जबकि ट्रेन स्टेशन की ओर बढ़ रही है। खबर है कि स्टेशन पर पुलिस अधिकारी मौजूद थे। खतरे के बावजूद, यात्रियों ने टिकट चेकिंग का सामना करने के बजाय प्लेटफॉर्म पर पहुंचने से पहले ही ट्रेन से उतरना चुना।

No wonder why IR can’t recover their cost. (not oc)

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इस घटना को बाद में Reddit पर यूज़र ‘u/Status_Candidate_392’ ने शेयर किया। यह पोस्ट 7 अक्टूबर को अपलोड की गई थी और इसमें बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों पर चर्चा करते हुए यह कमेंट किया गया था, “कोई हैरानी नहीं कि IR अपनी लागत क्यों नहीं वसूल सकता। (oc नहीं)।”

चलती ट्रेन से कूदने से गंभीर चोटें लग सकती हैं, खासकर तब जब लोग रेलवे ट्रैक के पास उतरते हैं और उनके आस-पास दूसरे यात्री होते हैं।

यूजर्स ने सवाल किया, इस जोखिम की जरूरत क्या है?

कई यूजर्स ने ट्रेन टिकट के पैसे देने से बचने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने के लिए यात्रियों की बुराई की। एक व्यक्ति ने लिखा, “TTs और पुलिस हैरान थे,” जबकि दूसरे ने कहा, “नॉर्दर्न रेलवे में एक आम दिन।” एक और यूजर ने लिखा, “तो वे Rs 20 का टिकट खरीदने के बजाय घायल होने या मरने से भी ठीक हैं। बहुत बढ़िया,” इसमें शामिल खतरे की ओर इशारा करते हुए।

एक यूजर ने धनबाद जंक्शन का अपना अनुभव भी शेयर करते हुए कहा, “इसलिए मैंने देखा है कि धनबाद जंक्शन पर कई बार TTE FOB के खंभों के पास छिप जाते हैं और उनमें से कुछ सिविल ड्रेस में आकर ट्रेन रुकते ही गेट के सामने खड़े हो जाते हैं। एक बार जब वे एग्जिट का रास्ता कुछ समय के लिए ब्लॉक कर देते हैं तो TTE हमला कर देते हैं।”

एक और व्यक्ति ने मुंबई में अपने एक दोस्त के अनुभव को याद करते हुए कहा: “मेरा दोस्त मुंबई में हर सुबह ऐसा करता था। एक दिन उसके बैग का स्ट्रैप दरवाजे के हैंडल में फंस गया। उसके शरीर का बीच का हिस्सा गायब था।”

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कभी ₹3,000 महीना कमाते थे पवन, आज ₹58 लाख सालाना की नौकरी, NIT छोड़कर ऐसे बनाई पहचान

कभी आर्थिक तंगी के चलते NIT की पढ़ाई छोड़ने वाला एक युवक आज अपनी कमाई को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में है। पवन चिंडकुर ने NIT आंध्र प्रदेश में B.Tech ECE की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन परिवार की खराब आर्थिक स्थिति और पिता की तबीयत से जुड़ी परेशानियों के बीच उन्हें पहले ही साल पढ़ाई छोड़नी पड़ी। हालात ऐसे थे कि एक समय उन्होंने Uber ड्राइवर बनने तक का विचार किया। इसके बाद दोस्तों की सलाह पर लोन लेकर लैपटॉप खरीदा और YouTube से टेक्नोलॉजी सीखना शुरू किया।

Reddit और Discord जैसी ऑनलाइन कम्युनिटीज से जुड़कर उन्होंने अपनी स्किल्स को निखारा और ₹3,000 महीने की नौकरी से शुरुआत की।  धीरे-धीरे उनकी कमाई बढ़ती गई और अब रिपोर्ट के मुताबिक वह करीब ₹58 लाख सालाना की रिमोट नौकरी कर रहे हैं। उनकी कहानी ने सोशल मीडिया पर पढ़ाई, स्किल्स और करियर के रास्तों को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

परिवार की हालत ने बदल दी पढ़ाई की राह

COVID-19 महामारी के दौरान पवन के परिवार की आर्थिक स्थिति काफी मुश्किल हो गई थी। उनके पिता ऑटो चलाते थे और उस दौरान उनकी तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी। परिवार की जिम्मेदारियों को देखते हुए पवन ने NIT आंध्र प्रदेश में B.Tech ECE की पढ़ाई पहले साल के बाद छोड़ दी। उस समय उनके सामने आगे पढ़ने से ज्यादा जरूरी परिवार को संभालना था।

कभी Uber ड्राइवर बनने का भी आया ख्याल

पढ़ाई छोड़ने के बाद पवन के सामने करियर को लेकर कोई आसान रास्ता नहीं था। एक समय उन्होंने Uber ड्राइवर बनने तक के बारे में सोचा। लेकिन दोस्तों की सलाह ने उनकी दिशा बदल दी। उन्होंने लोन लेकर एक लैपटॉप खरीदा और YouTube के जरिए टेक्नोलॉजी सीखना शुरू कर दिया।

YouTube से शुरू हुई असली तैयारी

पवन ने सिर्फ वीडियो देखकर सीखने तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने Reddit और Discord जैसी ऑनलाइन कम्युनिटीज से जुड़कर अपनी स्किल्स पर काम करना शुरू किया। इसी दौरान उन्हें पहली नौकरी मिली, जहां उनकी कमाई महज ₹3,000 प्रति माह थी। छोटी शुरुआत के बावजूद उन्होंने सीखना और काम करना जारी रखा।

₹3,000 से ₹60 हजार महीना

करियर में अगला बड़ा मोड़ तब आया, जब पवन ने दुबई की एक स्टार्टअप कंपनी जॉइन की। यहां उनकी कमाई बढ़कर करीब ₹60,000 प्रति माह हो गई। इसके बाद LinkedIn पर बने एक कनेक्शन ने उन्हें Cactro में नौकरी दिलाने में मदद की। यहां उनकी मासिक सैलरी करीब ₹1.2 लाख तक पहुंच गई।

फिर आया ₹58 लाख वाला बड़ा ब्रेक

पवन की सबसे बड़ी छलांग इसके बाद लगी। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने Lingk.io में रिमोट रोल हासिल किया, जहां उनका सालाना पैकेज करीब ₹58 लाख बताया जा रहा है। उनकी कहानी को शेयर करने वाले पोस्ट में इसे एक लाइन में समेटा गया “Skills >>>>>> Traditional Path.”

क्या डिग्री से ज्यादा जरूरी हैं स्किल्स?

पवन की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर शिक्षा और करियर को लेकर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने कहा कि सेल्फ-लर्निंग, प्रैक्टिकल स्किल्स और नेटवर्किंग भी करियर बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि, कुछ यूजर्स ने यह भी याद दिलाया कि पवन का मामला एक असाधारण उदाहरण है और इसे हर छात्र के लिए पारंपरिक कॉलेज शिक्षा का विकल्प नहीं माना जा सकता।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

एक यूजर ने पवन की सफलता की तारीफ करते हुए NIT आंध्र प्रदेश के 2025 NIRF आंकड़ों का संदर्भ दिया और कहा कि पवन की कमाई एक आउटलेयर उदाहरण है। वहीं दूसरे यूजर ने उनकी लगातार सीखने की आदत और वास्तविक काम से जुड़ी स्किल्स की तारीफ की। एक अन्य प्रतिक्रिया में कहा गया कि कई बार स्किल्स ऐसे मौके खोल सकती हैं, जो पारंपरिक रास्ते से आसानी से नहीं मिलते।

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Bengaluru: ट्रैफिक और महंगे किराए से अलग दिखा शहर का खूबसूरत चेहरा, चेन्नई के शख्स ने बताई दिल की बात

बेंगलुरु का नाम आते ही अक्सर ट्रैफिक जाम, महंगे किराए, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और लंबे सफर की बातें होने लगती हैं। लेकिन करीब डेढ़ साल से कर्नाटक की राजधानी में रह रहे चेन्नई के एक शख्स ने शहर की ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसे अक्सर चर्चाओं में जगह नहीं मिलती। उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई छोटी-छोटी चीजें गिनाईं, जिन्होंने उन्हें बेंगलुरु का मुरीद बना दिया।

ट्रैफिक और समस्याओं के बीच दिखीं शहर की अच्छी बातें

Reddit पर एक पोस्ट के जरिए इस शख्स ने लिखा कि बेंगलुरु को लेकर लोगों की कई शिकायतें जायज हैं, लेकिन शहर में ऐसी कई सुविधाएं भी हैं जिनकी लोग अक्सर अनदेखी कर देते हैं।

अपने पोस्ट में उन्होंने बेंगलुरु की तुलना चेन्नई से करते हुए बताया कि शहर की कुछ सामान्य-सी लगने वाली चीजें उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को काफी आसान और बेहतर बनाती हैं।

मोहल्लों के छोटे पार्क बने पसंदीदा ठिकाने

बेंगलुरु के बड़े और मशहूर पार्कों की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन इस चेन्नई निवासी को शहर के छोटे BBMP पार्क खास तौर पर पसंद आए।

उन्होंने बताया कि रिहायशी इलाकों के बीच बने इन छोटे पार्कों में पेड़, हरियाली और बैठने की जगह होती है। उनके लिए ये सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

₹80 का खाना याद आया तो पुरानी यादें ताजा हो गईं

बेंगलुरु की Darshini और Udupi फूड कल्चर भी उन्हें काफी पसंद है। खासतौर पर कम कीमत में साफ-सुथरा शाकाहारी खाना मिलने की सुविधा ने उनका ध्यान खींचा।

उन्होंने अपने इंटर्नशिप के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय महज ₹80 में मिलने वाला Udupi मील उनके लिए काफी मददगार साबित होता था। उनके मुताबिक, कम बजट में पेट भरने के लिए ऐसे विकल्प किसी राहत से कम नहीं थे।

Weekend Trip के लिए बेंगलुरु की लोकेशन शानदार

शहर की भौगोलिक स्थिति भी उन्हें पसंद आई। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और गोवा की ओर जाना आसान है।

खास तौर पर KSRTC बस कनेक्टिविटी को उन्होंने बेहद उपयोगी बताया। उनके मुताबिक, शहर में रहने वालों के लिए आसपास के राज्यों तक पहुंचने के कई सुविधाजनक विकल्प मौजूद हैं।

₹30 की बस राइड ने खींचा ध्यान

उनकी सबसे दिलचस्प बातों में से एक बेंगलुरु की बस सेवा को लेकर थी। उन्होंने 500-सीरीज बसों का जिक्र करते हुए बताया कि Outer Ring Road की ओर जाने के लिए उन्हें अक्सर AC बस मिल जाती है। जहां उनके कुछ साथी कैब या बाइक टैक्सी का सहारा लेते हैं, वहीं वह करीब ₹30 में बस से ऑफिस पहुंच जाते हैं। उनके मुताबिक, इसमें surge pricing जैसी परेशानी भी नहीं होती।

IT और पब्स से आगे भी है Bengaluru

चेन्नई के इस शख्स ने शहर के मंदिरों और पारंपरिक बाजारों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि बेंगलुरु को अक्सर IT कंपनियों, कैफे और पब्स के लिए जाना जाता है, लेकिन शहर का एक पारंपरिक और सांस्कृतिक पक्ष भी है। उनकी पोस्ट का मकसद भी इसी दूसरे पहलू को सामने लाना था। उन्होंने लोगों से शहर की समस्याओं के साथ-साथ उसकी अच्छी चीजों पर भी ध्यान देने की अपील की।

Reddit पर लोगों ने भी की तारीफ

पोस्ट सामने आने के बाद कई Reddit यूजर्स ने इस सकारात्मक नजरिए की सराहना की। एक यूजर ने इसे बेंगलुरु की तारीफ से जुड़ी दुर्लभ पोस्ट बताया। कुछ लोगों ने शहर के मौसम और शाम की सैर का जिक्र किया, जबकि दूसरे यूजर्स ने KSRTC की कनेक्टिविटी को लेकर सहमति जताई। एक यूजर ने तो यहां तक कहा कि यही वह बेंगलुरु है, जिसे वह भी पसंद करता है। कुल मिलाकर, यह पोस्ट बेंगलुरु की उन छोटी-छोटी खूबियों पर रोशनी डालती है, जो बड़े ट्रैफिक जाम और महंगे किराए जैसी चर्चाओं के बीच अक्सर नजरों से ओझल हो जाती हैं।

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