25 साल के GenZ ने 1 करोड़ रुपये का जॉब ऑफर ठुकराया! मेंटल पीस से जुड़ी वजह जानकर चौंक जाएंगे

एक 25 साल के प्रोफेशनल ने 1 करोड़ रुपये की नौकरी का ऑफर ठुकरा दिया क्योंकि वह ऐसे माहौल में काम नहीं करना चाहता था, जो मानसिक रूप से नुकसानदेह हो। इस फ़ैसले ने पैसे, मानसिक स्वास्थ्य और युवा कर्मचारी अपने करियर से क्या चाहते हैं, इस पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

यह कहानी बेंगलुरु की प्रोडक्ट डिज़ाइनर मुस्कान अतार ने शेयर की। उन्होंने कहा कि वह इस बात से प्रभावित थीं कि उस युवा प्रोफेशनल ने अपने करियर की शुरुआत में ही कितनी साफ़-साफ़ अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली थीं।

उन्होंने पैसे के बजाय अपने लंबे समय के लक्ष्यों को चुना

मुस्कान अतार ने लिंक्डइन पर लिखा, “मेरे एक दोस्त ने 25 साल की उम्र में ₹1 करोड़ का ऑफर ठुकरा दिया, ताकि उन्हें खराब माहौल वाले वर्कप्लेस में काम न करना पड़े।” उन्होंने कहा कि उन्होंने भी पहले ऐसे मौके ठुकराए हैं, लेकिन 25 साल की उम्र में ऐसा फैसला लेने के बारे में सोचना भी उनके लिए मुश्किल था।

उन्होंने कहा, “मैंने भी ऐसे मौकों को ना कहा है, लेकिन 25 साल की उम्र में इतनी स्पष्ट प्राथमिकता तय करने के बारे में मैं सोच भी नहीं सकती।” अतार ने बताया कि कई तरह के दबावों की वजह से उनके लिए यह फैसला लेना बहुत मुश्किल हो सकता था, जैसे परिवार की ज़रूरतें, दूसरों की उम्मीदें और निजी लक्ष्य।

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“परिवार की ज़िम्मेदारियां, दोस्तों का दबाव और अपनी जीवनशैली की इच्छाओं की वजह से शायद मैं वह ऑफ़र स्वीकार कर लेती। वह भी मेरी ही तरह के बैकग्राउंड से आते हैं, फिर भी उनमें ऐसे फ़ायदे छोड़ने की हिम्मत है जो उनके लंबे समय के लक्ष्यों से मेल नहीं खाते। यह उनके व्यक्तित्व में एक बड़ा सुधार दिखाता है।”

उन्होंने कहा कि इस फ़ैसले से यह भी पता चलता है कि कैसे कुछ युवा कर्मचारी नौकरी चुनते समय सिर्फ़ सैलरी से आगे की चीज़ों पर भी ध्यान दे रहे हैं। “कामकाजी लोगों की अगली पीढ़ी को पता है कि उनके लिए क्या ज़रूरी है। वर्कप्लेस को इसके हिसाब से ढलना सीखना होगा।”

उनकी पसंद पर लोगों की अलग-अलग राय थी

इस पोस्ट पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आईं; कुछ लोगों ने इस फैसले की तारीफ़ की, तो कुछ ने कहा कि हर कोई इतनी बड़ी सैलरी ठुकराने का जोखिम नहीं उठा सकता। एक व्यक्ति ने लिखा, “खुशी है कि लोग अब मानसिक स्वास्थ्य के असर को समझ रहे हैं… चाहे वह अच्छा हो या बुरा… और हां, पैसा ज़रूरी है। मैं हमेशा कहता हूं कि मैं बाकी चीज़ों से ज़्यादा पैसे को चुनूंगा, कभी-कभी तो नौकरी की भूमिका या काम के घंटों से भी ज़्यादा। लेकिन टॉक्सिक माहौल और अजीब काम करने की जगह… बिल्कुल नहीं…!! यह बात मुझे MNC और PSU में एक दशक तक काम करने के बाद समझ आई, लेकिन 25 साल की उम्र में ऐसा करना तारीफ़ के काबिल है।”

एक और व्यक्ति ने कमेंट किया, “मेरे अंदर का मिडिल-क्लास इंसान 45 साल की उम्र में भी ऐसा नहीं कर पाएगा। तो हाँ, वे ऑफ़र मेरी तरफ़ भेज दो।” किसी ने लिखा, “यह बात बहुत रिलेटेबल है, भले ही पिछली पीढ़ी को यह बेवकूफी लगे, लेकिन कौन भला हर किसी की कहानी में हीरो रहा है!”

एक यूज़र ने कहा, “अगर कोई कुछ समय के लिए बिना इनकम के रह सकता है, तो ही यह मुमकिन है। शायद इस पीढ़ी के पास वह फ्लेक्सिबिलिटी है। हमारी पीढ़ी के पास वह नहीं थी, और अब भी नहीं है।” एक और व्यक्ति ने लिखा, “सच कहूं तो, उनकी तारीफ़ करनी चाहिए। अभी तो ऐसा लगता है कि वे एक प्रिविलेज्ड बैकग्राउंड से आते हैं, क्योंकि हम सब जानते हैं कि कितने लोग ऐसे ऑफ़र के लिए कुछ भी कर गुज़रने को तैयार होंगे! लेकिन हां, यह जानना बहुत अच्छी बात है कि आप ज़िंदगी में बहुत जल्दी क्या चाहते हैं और आपके पास वह फ़ैसला लेने की क्षमता/हालात/सपोर्ट है!”

एक कमेंट में लिखा था, “काम का भविष्य उन लोगों से तय होगा जो सिर्फ़ सैलरी नहीं, बल्कि मकसद, भलाई और सार्थक ग्रोथ को अहमियत देते हैं।”

66 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने वाली महिला ने खोला राज, बताया क्यों कम वेतन वाली नौकरी लगी बेहतर

कई लोग बेहतर करियर, बड़ी सैलरी और ऊंचे पद को सफलता की पहचान मानते हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की ग्रेस मैक्लेलैंड ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। 66 लाख रुपये सालाना कमाने वाली इस महिला ने तनाव और लगातार दबाव से परेशान होकर अपनी हाई-प्रोफाइल नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने कम वेतन वाली रिसेप्शनिस्ट और ऑफिस मैनेजर की नौकरी चुनी। ग्रेस का कहना है कि कम पैसे के बावजूद इस फैसले ने उन्हें वह चीजें वापस दीं, जो उनकी पुरानी नौकरी उनसे छीन रही थी समय, ऊर्जा और मानसिक शांति। उनकी कहानी बताती है कि कभी-कभी करियर में आगे बढ़ने से ज्यादा जरूरी खुद की खुशहाली और संतुलित जिंदगी होती है।

40% कम सैलरी, लेकिन मिली सुकून भरी जिंदगी सिडनी की रहने वाली ग्रेस ने कई साल तक बड़े पदों पर काम किया। मगर लगातार तनाव, चिंता और काम के दबाव ने उन्हें इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बदलने का फैसला किया। नई नौकरी में उनकी कमाई 40% कम हो गई, लेकिन बदले में उन्हें समय, ऊर्जा और मानसिक शांति मिली।

छोटे पद से शुरू किया सफर, मेहनत से बनीं मैनेजर

ग्रेस ने अपने करियर की शुरुआत एक रिटेल कंपनी में सेल्स एसोसिएट के तौर पर की थी। करीब पांच साल तक मेहनत करने के बाद उन्हें कई प्रमोशन मिले और वह कंपनी के बड़े स्टोर की मैनेजर बन गईं। यह पद उनके लिए बड़ी उपलब्धि था, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारियां और दबाव भी कई गुना बढ़ गए।

सफलता मिली, लेकिन खुद को खोने लगीं

ग्रेस ने बताया कि स्टोर मैनेजर बनने के बाद वह खुद को साबित करने के दबाव में रहने लगी थीं। लंबे काम के घंटे, रोजाना लंबा सफर और लगातार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद ने उनकी जिंदगी मुश्किल बना दी। उन्होंने कहा कि काम इतना थका देने वाला हो गया था कि ऑफिस के बाद उनके पास किसी और चीज के लिए ऊर्जा ही नहीं बचती थी।

66 लाख की नौकरी भी नहीं दे पाई खुशी

तनाव बढ़ने के बाद ग्रेस ने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्हें लग रहा था कि शायद किसी नए माहौल में चीजें बेहतर होंगी। उन्हें लग्जरी रिटेल कंपनी में करीब 1 लाख ऑस्ट्रेलियन डॉलर (लगभग 66 लाख रुपये) की नौकरी मिली, जिसमें बोनस और विदेश यात्रा जैसे फायदे भी थे।

लेकिन अच्छी सैलरी के बावजूद उन्हें अंदर से खालीपन महसूस होता रहा। उन्हें लगा कि वह सिर्फ काम कर रही हैं, लेकिन उस काम से जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रही हैं।

फिर चुना आसान रास्ता, बदली सफलता की परिभाषा

दूसरी बार नौकरी छोड़ने के बाद ग्रेस ने तय किया कि अब वह ऐसा काम करेंगी जिसमें जिंदगी के लिए भी समय बचे। करीब एक महीने का ब्रेक लेने के बाद उन्होंने घर के पास एक जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव रोल के लिए आवेदन किया। जुलाई 2024 में उन्होंने रिसेप्शनिस्ट और ऑफिस मैनेजर के रूप में नई शुरुआत की।

कम पैसे में ज्यादा खुशी मिली

आज ग्रेस ऑफिस के रोजमर्रा के काम संभालती हैं और टीम को सपोर्ट करती हैं। हालांकि उनकी कमाई पहले से काफी कम है, लेकिन वह इस फैसले को अपनी जिंदगी का सही कदम मानती हैं। उनके मुताबिक यह नौकरी उनके लिए एक “रीसेट बटन” की तरह साबित हुई, जहां वह खुद को दोबारा समझ सकीं और आगे की दिशा तय कर सकीं।

अब लोग उनकी जिंदगी से सीख ले रहे हैं

ग्रेस का कहना है कि अब जब लोग उनसे उनके काम के बारे में पूछते हैं तो उन्हें रिसेप्शनिस्ट बताने में कोई झिझक नहीं होती। बल्कि कई लोग उनकी शांत और संतुलित जिंदगी से प्रभावित होते हैं। काम के अलावा मिले समय में उन्होंने अपने पुराने शौक भी वापस शुरू किए। वह अब क्रोशे बनाती हैं और सोशल मीडिया के जरिए इससे कमाई भी कर रही हैं।

Apoorva Makhija: ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ के विवादित एपिसोड के बाद सुसाइड करना चाहती थीं अपूर्वा मखीजा

Apoorva Makhija: कंटेंट क्रिएटर अपूर्वा मखीजा ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ विवाद के नतीजों को याद करते हुए भावुक हो गईं। इन्फ्लुएंसर ने बताया कि उस मुश्किल दौर में उन्हें सुसाइड के विचार आए थे और उन्होंने साथी कंटेंट क्रिएटर सूफी मोतीवाला का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने उस समय उनका साथ दिया जब उन्हें सबसे ज़्यादा सहारे की जरूरत थी।

रियलिटी शो ‘लॉक अप सीजन 2’ में सूफी मोतीवाला के साथ खुलकर बातचीत के दौरान, अपूर्वा ने माना कि अगर सूफी उनके साथ नहीं होते, तो वह उस विवाद का सामना नहीं कर पातीं। लंबे समय बाद सूफी से मिलकर अपनी भावनाएं जाहिर करते हुए अपूर्वा ने कहा, “मैंने तुम्हें सच में बहुत याद किया। ऐसा दोबारा मत करना। मुझे रोना आ रहा है। जब भी कोई मुझसे तुम्हारे बारे में पूछता है और कहता है, ‘तुम उसकी दोस्त कैसे बनी थीं? वह तो बहुत मतलबी है,’ तो मैं उनसे कहती हूं… अगर ‘लेटेंट फियास्को’ (विवाद) के समय सूफी मेरे साथ नहीं होते, तो मैं सुसाइड कर लेती।”

सूफी मोतीवाला ने अपूर्वा की बात सुनकर जवाब दिया, “ऐसा मत कहो। अपूर्वा ने फिर से कहा कि उस समय उनका साथ कितना जरूरी था। उन्होंने कहा, “मैं उस दौर से गुजर नहीं पाती। तुम ही अकेले इंसान थे जो मेरे साथ थे। मैं किसी को डेट नहीं कर रही थी। पर्सनल तौर पर, मेरी जिंदगी में, एक दोस्त के तौर पर।”

अपनी दोस्ती को याद करते हुए, सूफी मोतीवाला ने माना कि साथ बिताया गया वह समय उनकी ज़िंदगी के सबसे खुशनुमा दौर में से एक था। उन्होंने कहा, “सच कहूं तो भाई, वह एक साल मेरी ज़िंदगी का सबसे पसंदीदा साल था, जब हम दोस्त थे। मुझे आखिरकार लगा कि बॉम्बे में मेरा भी एक सोशल सर्कल है। मुझे लगा कि कोई है, जिसके पास मैं जब चाहूं जा सकता हूं। सच कहूं तो मुझे तुम्हारी बहुत याद आई।”

इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे से माफी मांगी और बातचीत खत्म हुई। अपूर्वा ने कहा कि मुझे भी सच में बहुत अफसोस है। मुझे पता है कि छोटी-छोटी बातें भी बहुत दुख पहुंचा सकती हैं। जब तुम्हें सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब मैं तुम्हारे लिए वह सुरक्षित माहौल नहीं बना पाई, इसके लिए मुझे माफ करना।

फ्रांस बना पहला EU देश, जहां 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन, जानें दुनिया में क्या हैं उम्र के नियम

France Social Media Ban: फ्रांस यूरोपीय संघ (EU) का पहला देश बन गया है, जिसने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन को मंजूरी दे दी है। इस कानून के तहत बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए माता-पिता की अनुमति जरूरी होगी। यह नियम इस साल सितंबर से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और जनवरी 2027 से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।

दुनियाभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने की उम्र सीमा क्या है? News18 की पूरी जानकारी

फ्रांस में सोशल मीडिया बैन

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के समर्थन से लागू किए जा रहे इस नियम के तहत, फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने की तैयारी की है। इसे युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए डिजिटल दुनिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

इस बैन की खास संरचनात्मक, कानूनी और ऑपरेशनल डिटेल्स इस प्रकार हैं:

सितंबर 2026 (पहला चरण): सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 15 साल से कम उम्र के बच्चों के नए अकाउंट बनाने पर रोक लगानी होगी। सभी नए रजिस्ट्रेशन पर अनिवार्य रूप से उम्र की पुष्टि (age-verification) करने वाले कंट्रोल लागू होंगे।

जनवरी 2027 (दूसरा चरण): यह पाबंदी पहले से मौजूद सभी अकाउंट्स पर भी लागू होगी। सोशल मीडिया कंपनियों को 15 साल से कम उम्र के यूजर्स के सभी एक्टिव अकाउंट्स को हटाना या पूरी तरह से सस्पेंड करना होगा।

TikTok, Instagram, Snapchat और YouTube पर सख्ती

TikTok, Instagram, Snapchat और YouTube जैसे प्लेटफॉर्म को उम्र की पुष्टि करने के लिए सख्त नियम लागू करने होंगे। इन टूल्स की जांच और मंजूरी फ्रांस के प्राइवेसी और डेटा रेगुलेटर द्वारा की जाएगी।

बता दें कि फ्रांस के डिजिटल मामलों का मंत्रालय उन कमर्शियल सोशल नेटवर्किंग सेवाओं की एक खास सूची बना रहा है जिन पर प्रतिबंध लागू होगा। इसमें ऐसे प्लेटफॉर्म पर ध्यान दिया जा रहा है जिनके एल्गोरिदम बहुत ज्यादा लत लगाने वाले हैं।

हालांकि, इस प्रतिबंध में साफ तौर पर नॉन-कमर्शियल डिजिटल रिसोर्स को शामिल नहीं किया गया है। 15 साल से कम उम्र के बच्चे अभी भी ऑनलाइन इनसाइक्लोपीडिया (जैसे Wikipedia), एजुकेशनल टूल्स और साइंटिफिक डायरेक्टरी का पूरा इस्तेमाल कर सकेंगे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी और जांच की जिम्मेदारी फ्रांस के ऑडियोविजुअल और डिजिटल कम्युनिकेशन रेगुलेटर Arcom को दी जाएगी।

इस डिजिटल बैन के साथ-साथ, नए कानून में एक और बड़ा फैसला शामिल किया गया है। इसके तहत फ्रांस के सभी हाई स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगाने की नीति तुरंत लागू की जाएगी।

क्यों लाया गया सोशल मीडिया बैन कानून?

यह कानूनी कदम फ्रांस की हेल्थ वॉचडॉग की एक विस्तृत रिपोर्ट के बाद उठाया गया है। इस रिपोर्ट में पता चला है कि 12 से 17 साल की उम्र के लगभग 90% बच्चे रोजाना स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, और इनमें से आधे से ज्यादा बच्चे दिन में पांच घंटे तक ऑनलाइन बिताते हैं।

ऐसे में कई फ्रांसीसी परिवारों ने बड़ी टेक कंपनियों पर एल्गोरिदम के जरिए बच्चों को ज्यादा समय तक ऑनलाइन रखने, गंभीर मानसिक तनाव, डिप्रेशन और युवाओं में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी समस्याओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए मुकदम किए थे। साथ ही प्रोडक्ट की जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं भी जताई थीं। जिसके बाद संसद में इस कानून को तेजी से आगे बढ़ाया गया।

दुनियाभर में सोशल मीडिया इस्तेमाल की उम्र सीमा

ऑस्ट्रेलिया

न्यूनतम उम्र: 16 साल

दिसंबर 2024 में सख्त कानून पास किया गया। इसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म से 16 साल से कम उम्र के यूजर्स को हटाना होगा। नियमों का पालन नहीं करने पर कंपनियों पर 5 करोड़ ऑस्ट्रेलियन डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

यूनाइटेड किंगडम

न्यूनतम उम्र: 16 साल

देशभर में लागू होने वाला प्रतिबंध जनवरी 2027 से लागू किए जाने की योजना है।

फ्रांस

न्यूनतम उम्र: 15 साल

फ्रांस ने कानून पास कर दिया है। इसके तहत सितंबर 2026 से नए अकाउंट और जनवरी 2027 से पुराने अकाउंट भी इस नियम के दायरे में आएंगे।

स्पेन

न्यूनतम उम्र: 16 साल

16 साल से कम उम्र के लोगों की पहुंच सीमित करने के लिए सरकार ने प्रस्तावित प्रतिबंधों की घोषणा की है।

ग्रीस और डेनमार्क

न्यूनतम उम्र: 15 साल / स्थानीय नियमों के अनुसार अलग-अलग

इन देशों की सरकारों ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे नियम लागू करने की योजनाएं पेश की हैं।

यूरोपीय संघ (EU)

न्यूनतम उम्र: 13 से 16 साल

EU में सोशल मीडिया उम्र सीमा डिजिटल सर्विसेज एक्ट और GDPR जैसे नियमों के तहत तय होती है। हर देश डिजिटल उम्र की अपनी सीमा खुद तय करता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका (USA)

न्यूनतम उम्र: 13 साल

यग COPPA (चिल्ड्रन्स ऑनलाइन प्राइवेसी प्रोटेक्शन एक्ट) कानून के तहत नियंत्रित। इसके अनुसार, 13 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा इकट्ठा करने के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी है।