25 लाख सालाना कमाने वाला शख्स अब बेच रहा ऑनलाइन प्रोडक्ट, कमल टोलानी ने बताया बिजनेस का पहला महीने का हिसाब

₹25 लाख सालाना की नौकरी, तय सैलरी और कॉरपोरेट की सुरक्षित जिंदगी को छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना हर किसी के बस की बात नहीं होती। लेकिन कमल टोलानी ने नौकरी की सुरक्षा के बजाय अपने दम पर कुछ बनाने का रास्ता चुना। उन्होंने करीब एक महीने पहले अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर ई-कॉमर्स बिजनेस की शुरुआत की। अब अपने नए सफर का पहला महीना पूरा होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर कमाई के आंकड़े शेयर किए हैं। कमल ने बताया कि Amazon, Meesho और Flipkart जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनके बिजनेस का प्रदर्शन कैसा रहा।

दिलचस्प बात यह है कि पहले महीने में उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा Amazon से आया, जबकि Flipkart पर उन्हें कोई कमाई नहीं हुई। उनकी कहानी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक तरफ उन्होंने लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़ी, वहीं दूसरी ओर अब बिजनेस की अनिश्चित दुनिया में अपने फैसले को आजमा रहे हैं।

नौकरी की फिक्स सैलरी से सीधे बिजनेस की अनिश्चितता तक

कमल ने Instagram पर बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई है। पहले हर महीने एक तय सैलरी मिलती थी और कॉरपोरेट जॉब की अपनी सुरक्षा थी। अब उनका पूरा ध्यान प्रोडक्ट, ऑर्डर, विज्ञापन, रिटर्न और ग्राहकों से जुड़ी दूसरी जिम्मेदारियों पर है। उन्होंने माना कि नए सफर में उनसे गलतियां भी हुईं, लेकिन इसी दौरान उन्हें काफी कुछ सीखने को भी मिला।

Amazon, Meesho और Flipkart पर आजमाई किस्मत

कमल ने अपने वीडियो में बताया कि ई-कॉमर्स के पहले 30 दिनों में उन्होंने Amazon, Meesho और Flipkart पर बिक्री की कोशिश की। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्लेटफॉर्म से उन्हें कितनी कमाई हुई। उनके मुताबिक, पिछले 30 दिनों में Meesho से ₹3,200 की कमाई हुई, जबकि Flipkart से कोई कमाई नहीं हुई। दूसरी ओर, Amazon से उन्हें ₹45,382 की बिक्री हासिल हुई।इस तरह उनके साझा किए आंकड़ों के अनुसार, तीनों प्लेटफॉर्म से कुल कमाई ₹48,582 रही।

₹25 लाख की नौकरी के मुकाबले पहला महीना कैसा रहा?

कमल की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने इसी सवाल को लेकर चर्चा शुरू कर दी। कुछ लोगों ने उनके नए सफर की तारीफ की और उन्हें आगे के लिए शुभकामनाएं दीं। वहीं, कुछ यूजर्स का कहना था कि ₹25 लाख सालाना नौकरी छोड़ना सही फैसला नहीं था और बिजनेस को उस स्तर की कमाई तक पहुंचने में काफी समय लग सकता है।

आखिर क्यों छोड़ दी इतनी अच्छी नौकरी?

कमल ने इससे पहले अपनी एक पोस्ट में इस फैसले की वजह बताई थी। उनके अनुसार, अच्छी सैलरी और नौकरी की सुरक्षा के बावजूद उनके मन में अपना कुछ शुरू करने का विचार लगातार चल रहा था। उन्होंने माना कि उन्हें खुद नहीं पता कि यह फैसला आगे कहां लेकर जाएगा। बिजनेस सफल होगा या नहीं, यह भी तय नहीं है। लेकिन वह इस सफर में मिलने वाली अनिश्चितता, असफलताओं, छोटी सफलताओं और रोजमर्रा के अनुभवों को लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं।

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14 साल तक पहनी एयरफोर्स की वर्दी, अब देहरादून में चलाती है बुटिक! वजह सुन आप भी करेंगे सलाम

14 साल तक भारतीय वायु सेना में नौकरी करने के बाद एक पूर्व महिला अधिकारी ने अपनी रोज की जिंदगी को बदलने का फैसला किया। उन्होंने नौकरी छोड़ी और देहरादून वापस आकर कपड़ों की दुकान शुरू कर ली। उनका यह कदम किसी बड़े सपने को पूरा करने के लिए नहीं था, बल्कि एक खास वजह से लिया गया भावनात्मक फैसला था।

आखिर क्या है इस फैसले की वजह?

इस महिला का इंस्टाग्राम पर @thefaujifounder नाम से एक अकाउंट है, जहां उन्होंने एक वीडियो में अपनी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि उनकी दुकान पर आने वाले लोग उनसे पूछते हैं कि आखिर वायु सेना की अधिकारी से वह कपड़ों की दुकान चलाने वाली कैसे बन गईं। उन्होंने बताया कि उन्होंने शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के तौर पर 14 साल तक सेवा की, लेकिन नौकरी छोड़ने के बाद उन्हें लगा कि अब परिवार के साथ रहना ज्यादा जरूरी है। उनके बच्चे बड़े हो रहे थे और माता-पिता भी बुजुर्ग हो रहे थे।

इसके बाद वह देहरादून लौट आईं। उनका घर उनकी दुकान से सिर्फ 100 मीटर दूर है। उन्हें कपड़ों और क्रिएटिव काम में इंटरेस्ट थी, इसलिए उन्होंने सोचा कि क्यों न ऐसा काम किया जाए, जिससे परिवार के पास रहने को भी मिल सके। इसी सोच के साथ उन्होंने कपड़ों की दुकान शुरू कर दी।

सोशल मीडिया पर पसंद आई उनकी यह कहानी

वह कहती है कि उनका यह फैसला किसी बड़े मुकाम तक पहुंचने के लिए नहीं था। वह बस अपने बच्चों के साथ रहकर जिंदगी को मजे से जीना चाहती थीं। उनकी कहानी सोशल मीडिया पर भी लोगों को पसंद आई। कई लोगों ने कहा – परिवार के साथ समय बिताना बहुत कीमती और यादगार पल होता है।

ये कहानी इसलिए लोगों के दिल को छू रही है क्योंकि इसमें कोई मोटिवेशनल ज्ञान नहीं है। एक मां का सिंपल फैसला है – करियर से ज्यादा जरूरी है परिवार के साथ रहना।

सोशल मीडिया पर लोग कमेंट कर रहे हैं – आपने वर्दी उतारी है, जज्बा नहीं।

8 साल की IPS सेवा के बाद कॉर्पोरेट की दुनिया में कदम, राजन सिंह ने ऐसे रची सफलता की नई कहानी!

एक नौकरी से शुरू हुआ सफर, जिसने राजन सिंह को पहुंचाया अलग-अलग करियर तक

राजन सिंह का करियर किसी एक तय रास्ते पर नहीं चला। IIT कानपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विस का रास्ता चुना और IPS में शामिल हुए। करीब आठ साल पुलिस सेवा में रहने के बाद उन्होंने MBA के लिए अमेरिका का रुख किया। इसके बाद कंसल्टिंग, प्राइवेट इक्विटी और फिर अपना बिजनेस शुरू करने तक उनका सफर पहुंचा। इस दौरान उन्होंने कई बार अपना करियर बदला और हर नए पड़ाव पर एक अलग तरह का अनुभव हासिल किया।

IIT के बाद चुनी पुलिस की राह

इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजन सिंह ने सामान्य इंजीनियरिंग करियर में जाने के बजाय सिविल सेवा परीक्षा दी। सितंबर 1997 में उन्होंने IPS जॉइन किया और केरल के करुणागप्पल्ली में ASP के तौर पर पहली पोस्टिंग मिली। कुछ ही सालों में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ीं और 2001 तक वह तिरुवनंतपुरम के पुलिस कमिश्नर बन गए। उस समय वह इस पद पर पहुंचने वाले कम उम्र के अधिकारियों में शामिल थे।

पुलिस सेवा छोड़कर पहुंचे Wharton

2004 में पुलिस कमिश्नर रहते हुए उनके करियर ने एक नया मोड़ लिया। एक पुलिस ऑपरेशन के दौरान उन्हें अपने साथी IPS अधिकारी के Wharton MBA में एडमिशन की जानकारी मिली। इस घटना ने उन्हें अपने आगे के करियर के बारे में सोचने पर मजबूर किया। करीब आठ साल पुलिस सेवा में बिताने के बाद उन्होंने जुलाई 2005 में IPS छोड़ दिया और Wharton के MBA प्रोग्राम में दाखिला लिया। 2007 में MBA पूरा करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क में McKinsey & Company के साथ कंसल्टेंट के तौर पर काम शुरू किया।

कंसल्टिंग के बाद इन्वेस्टमेंट की दुनिया

McKinsey में काम करते हुए राजन ने इंश्योरेंस, फार्मा, बायोटेक्नोलॉजी और बैंकिंग जैसे अलग-अलग सेक्टर की कंपनियों के साथ काम किया। इसके बाद उन्होंने प्राइवेट इक्विटी फर्म New Silk Route का रुख किया। यहां उन्हें कंपनियों और कारोबार को एक इन्वेस्टर की नजर से समझने का मौका मिला। इसी दौरान उन्होंने यह भी करीब से देखा कि कोई व्यक्ति सुरक्षित प्रोफेशनल करियर चुनने के बजाय अपना नया बिजनेस शुरू करने का जोखिम क्यों लेता है।

पहला स्टार्टअप नहीं चला, फिर भी नहीं रुके

2012 में राजन ने Course Brew नाम से ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म शुरू किया। यह उनका एंटरप्रेन्योर के तौर पर शुरुआती बड़ा प्रयोग था, लेकिन यह बिजनेस ज्यादा समय तक नहीं चल पाया। इसके बाद उन्होंने दोबारा कोशिश की और ConceptOwl शुरू किया। इसका मकसद छोटे शहरों के छात्रों को अच्छी साइंस और मैथ्स की पढ़ाई उनके अपने शहरों के करीब उपलब्ध कराना था। कंपनी ने ऑनलाइन पढ़ाई के साथ क्लासरूम प्रोग्राम पर भी काम किया। एक समय शिक्षकों की कमी हुई तो राजन ने खुद फिजिक्स पढ़ाना शुरू कर दिया। कंपनी ने आगे चलकर निवेश भी जुटाया और एजुकेशन सेक्टर में अपना मॉडल आगे बढ़ाया।

ConceptOwl से HabitStrong तक पहुंचा सफर

कोरोना महामारी के दौरान राजन और उनकी टीम ने रूटीन, आदतों और प्रोडक्टिविटी से जुड़े कार्यक्रमों पर काम करना शुरू किया। इसी प्रयोग से HabitStrong का आइडिया सामने आया। शुरुआत सुबह जल्दी उठने वाले एक साधारण YouTube प्रोग्राम से हुई, जिसे करीब 100 दिनों तक आजमाया गया। लोगों से मिले अनुभवों के बाद इसे एक स्ट्रक्चर्ड प्रोग्राम का रूप दिया गया। 2020 में शुरू हुए HabitStrong का फोकस बेहतर रूटीन बनाने, कंसंट्रेशन बढ़ाने और डिजिटल डिस्ट्रक्शन कम करने जैसी चीजों पर रहा। इस तरह उनका सफर शिक्षा से आगे बढ़कर हैबिट्स और प्रोडक्टिविटी के क्षेत्र तक पहुंच गया।

राजन सिंह की कहानी की खास बात सिर्फ यह नहीं है कि उन्होंने कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया, बल्कि यह है कि हर बदलाव के बाद उन्होंने खुद को नए काम के लिए तैयार किया। इंजीनियरिंग से पुलिस सेवा, फिर MBA, कंसल्टिंग, निवेश और आखिर में स्टार्टअप तक का यह सफर दिखाता है कि करियर हमेशा एक ही दिशा में आगे बढ़े, यह जरूरी नहीं। कई बार अलग-अलग अनुभव मिलकर आगे के काम के लिए नई सोच और नए मौके तैयार करते हैं।

59 की उम्र में करियर ने लिया यू-टर्न! नौकरी छूटने के बाद ये महिला पहुंचीं अंटार्कटिका

59 साल की उम्र में जब मे ली अंटार्कटिका पहुंचीं, तो उनकी नई नौकरी में टेक्नोलॉजी या ऑफिस का काम नहीं, बल्कि फोर्कलिफ्ट, कार्गो और जमा देने वाली ठंड उनका इंतजार कर रही थी। मैकमर्डो रिसर्च स्टेशन पर उन्होंने सामान संभालने का काम शुरू किया। खास बात यह है कि इससे पहले ली ने करीब 30 साल ह्यूलेट-पैकार्ड (HP) जैसी टेक्नोलॉजी कंपनी में काम किया था और उन्हें उम्मीद थी कि वह इसी कंपनी से रिटायर होंगी। उनकी आगे की कहानी बताती है ली के अंटार्कटिका पहुंचने के बाद के अनुभव, वहां के काम और बेहद ठंडे माहौल में जिंदगी कैसे बदली, इसकी कई दिलचस्प बातें भी सामने आती हैं।

लेकिन अचानक नौकरी जाने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ ले लिया। लंबे कॉर्पोरेट करियर के बाद उन्हें नई नौकरी की तलाश करनी पड़ी और इसी दौरान उन्हें अंटार्कटिका में काम करने का मौका मिला। बिल्कुल अलग माहौल में काम करना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इस बदलाव को स्वीकार किया और एक नई तरह की जिंदगी का अनुभव किया। उनकी यह कहानी बताती है कि करियर में बदलाव के लिए उम्र हमेशा रुकावट नहीं बनती।

नौकरी जाने के बाद बदली सोच

HP में करीब 30 साल काम करने के बाद जब 59 साल की उम्र में ली की नौकरी चली गई, तो उन्होंने फिर से टेक्नोलॉजी कंपनी में नौकरी तलाशना शुरू किया। उन्होंने दूसरी कंपनियों में आवेदन किया और अपने पुराने प्रोफेशनल संपर्कों से भी मदद ली, लेकिन अनुभव और रेफरल होने के बावजूद उन्हें जल्दी नौकरी नहीं मिली। करीब एक महीने की कोशिश के बाद एक दोस्त ने उन्हें सलाह दी कि सिर्फ अच्छी सैलरी वाली नौकरी तलाशने के बजाय ऐसा काम क्यों न किया जाए, जिसमें उन्हें सच में दिलचस्पी हो।

अंटार्कटिका से पहले ही था खास लगाव

ली के लिए अंटार्कटिका बिल्कुल अनजान जगह नहीं थी। वह पर्यटक के तौर पर पहले ही दो बार वहां जा चुकी थीं और इस जगह को लेकर उनकी दिलचस्पी बढ़ गई थी। दोस्त की सलाह के बाद उन्होंने सोचना शुरू किया कि अगर अंटार्कटिका उन्हें इतना पसंद है, तो क्यों न वहां घूमने के बजाय काम करने का मौका तलाशा जाए। इसके बाद उन्होंने रिसर्च स्टेशनों पर मिलने वाली नौकरियों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की।

सप्लाई टेक्नीशियन की मिली नौकरी

रिसर्च करने के दौरान ली को Amentum में काम करने का मौका मिला। यह कंपनी अमेरिकी अंटार्कटिक कार्यक्रम को कई तरह की सेवाएं देती है। ली ने यहां सप्लाई टेक्नीशियन की नौकरी के लिए आवेदन किया। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया के साथ बैकग्राउंड चेक और शारीरिक जांच से भी गुजरना पड़ा। आखिरकार उनका चयन हो गया। इस नौकरी में सैलरी उनकी पिछली नौकरी के मुकाबले काफी कम थी, लेकिन उनके पास बचत थी और घर का लोन भी पहले ही चुका चुकी थीं, इसलिए उन्हें तुरंत ज्यादा सैलरी वाली नौकरी की जरूरत नहीं थी।

2025 में पहुंचीं मैकमर्डो स्टेशन

ली 2025 में अंटार्कटिका पहुंचीं। उनकी यात्रा ऑकलैंड और क्राइस्टचर्च से होते हुए आगे बढ़ी और फिर उन्होंने बोइंग C-17 ग्लोबमास्टर III विमान से अंटार्कटिका की यात्रा की। मैकमर्डो स्टेशन पहुंचने के बाद उन्होंने IT और कम्युनिकेशन्स वेयरहाउस में काम शुरू किया। यहां उनका काम सामान और सप्लाई से जुड़ा था, जो उनके पुराने कॉर्पोरेट काम से काफी अलग अनुभव था।

काम के साथ मिली नई तरह की जिंदगी

अंटार्कटिका में ली को सिर्फ नई नौकरी ही नहीं, बल्कि बिल्कुल अलग तरह की जिंदगी भी मिली। उन्होंने बताया कि वहां लोग फोन में व्यस्त रहने के बजाय खाने के समय साथ बैठकर बातचीत करते हैं। काम के अलावा उन्होंने आर्ट शो, लाइन डांसिंग, मैराथन और बिंगो जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने DJ के तौर पर भी वॉलंटियर किया और 1980 के दशक के संगीत पर साप्ताहिक शो होस्ट किया। स्टेशन पहुंचने के करीब एक हफ्ते के अंदर ही उन्हें महसूस होने लगा कि वह इस नई जिंदगी में खुद को सहज महसूस कर रही हैं और यहीं रहना चाहती हैं।

अंटार्कटिका में बिताए समय ने ली के लिए सिर्फ करियर का रास्ता नहीं बदला, बल्कि जिंदगी को देखने का उनका नजरिया भी बदल दिया। लंबे समय तक कॉर्पोरेट दुनिया में काम करने के बाद उन्हें वहां ऐसा माहौल मिला, जहां लोग एक-दूसरे की मदद करते हैं और साथ मिलकर रहते हैं। इस अनुभव से उन्हें समझ आया कि जिंदगी हमेशा हमारी सोची हुई योजना के मुताबिक नहीं चलती, लेकिन बदलाव आने पर उसके साथ आगे बढ़ना सीखा जा सकता है। ली की कहानी बताती है कि नौकरी छूटना या करियर में बदलाव आना किसी नई शुरुआत का रास्ता भी बन सकता है। उम्र या पुराना करियर किसी को खुद के लिए नई राह चुनने से नहीं रोकता। कभी-कभी जिंदगी में आया अचानक बदलाव ही इंसान को ऐसा अनुभव दे जाता है, जिसकी उसने पहले कभी कल्पना भी नहीं की होती।

कोडिंग छोड़कर जंगलों में रहकर, जानवरों से सीखा बिजनेस और खड़ा कर दिया करोड़ों का स्टार्टअप!

13 साल तक टेक्नोलॉजी की दुनिया में काम करने के बाद हैदराबाद के एक इंजीनियर ने अपना करियर बदलने का फैसला किया। उन्होंने IT की नौकरी छोड़कर वाइल्डलाइफ के अपने पुराने शौक को ही बिजनेस का रूप दे दिया। इस तरह ‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ की शुरुआत हुई, जो जानवरों और नेचर से मिलने वाली सीख को कॉर्पोरेट ट्रेनिंग से जोड़ती है। बिना किसी बाहरी फंडिंग के शुरू हुई इस कंपनी ने पहले ही साल करीब 80 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया।

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टेक से वाइल्डलाइफ तक

2010 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद, चेन्नई और मुंबई में काम किया। इसके बाद 2014 में डेटा साइंस में मास्टर्स करने के लिए अमेरिका चले गए। IT में काम करते हुए भी उनका नेचर और जानवरों से प्यार कम नहीं हुआ। वीकेंड पर वह DSLR कैमरा लेकर जंगल और नेशनल पार्क घूमने निकल जाते थे। धीरे-धीरे भारत, अमेरिका और अफ्रीका के कई नेशनल पार्कों में ट्रैवल ने उनकी इस दिलचस्पी को और बढ़ा दिया।

 

 

फोटोग्राफी से मिला नया बिजनेस विजन

शुरुआत में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी उनके लिए जानवरों की फोटो लेने का एक शौक था। लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि जंगल सिर्फ खूबसूरत तस्वीरों के लिए नहीं, बल्कि जानवरों का व्यवहार, उनका एक-दूसरे के साथ जुड़ाव और मुश्किल कंडीशन में उनका सर्वाइव करना इंसानों को भी बहुत कुछ सिखा सकता है। इसी सोच ने आगे चलकर उनके बिजनेस आइडिया की नींव रखी।

 

 

जंगली जानवरों ने सिखाया कॉर्पोरेट मैनेजमेंट

‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ में जंगल और जानवरों के उदाहरणों के जरिए कॉर्पोरेट टीमों को कई जरूरी बातें सिखाई जाती हैं। जैसे, शेरों से टीमवर्क, चींटियों से काम बांटने यानी डेलिगेशन और मधुमक्खियों से खतरे के समय मिलकर काम करने की सीख ली जाती है। इन उदाहरणों को लीडरशिप, टीमवर्क, मुश्किल समय में मजबूती से टिके रहने और माइंडफुलनेस जैसे सब्जेक्ट से जोड़ा जाता है।

 

 

जंगल बना ट्रेनिंग क्लासरूम

यह बिजनेस सिर्फ ऑफिस में बैठकर होने वाली सामान्य ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी कॉर्पोरेट वर्कशॉप के साथ-साथ कई दिनों तक चलने वाले जंगल के एक्सपीरियंस भी कराती है। इन प्रोग्राम्स में टीम के लोगों को नेचर के पास ले जाकर ऐसी एक्टिविटी कराई जाती हैं, जिनसे वे लीडरशिप और मुश्किल हालात में सही फैसला लेने जैसी चीजें सीख सकें। इस तरह जंगल एक तरह से उनका अलग और अनोखा ट्रेनिंग क्लासरूम बन जाता है।

 

लाखों के आइडिया का हिट फॉर्मूला

इस अनोखे बिजनेस आइडिया को कॉर्पोरेट कंपनियों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, बिना इन्वेस्टमेंट के शुरू हुई ‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ ने अपने पहले साल में करीब 80 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया। कंपनी ने परफेटी वैन मेले और सीमेंस डिजिटल जैसी कंपनियों के साथ काम किया है। इस बिजनेस में टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट एक्सपेरिएंस को नेचर और वाइल्डलाइफ के जुनून के साथ जोड़कर एक बिल्कुल अलग तरह का मॉडल तैयार किया गया है।

 

यह कहानी बताती है कि करियर शिफ्ट करने के साथ अपने जुनून पर भरोसा करना भी जरूरी है। सही सोच और मेहनत के साथ पसंद के काम को भी एक सफल बिजनेस बनाया जा सकता है। नेचर से सीख लेकर शुरू किया गया यह अनोखा सफर दूसरों को भी अपनी स्किल और इंटरेस्ट को नए तरीके से देखने के लिए इंस्पिरेशन देता है।

‘मुसाफिर कैफे’ जैसा जीवन चाहते हैं! नौकरी छोड़ने से पहले इन 5 बातों को न करें नजरअंदाज

आपने भी कभी सोचा है कि शहर की भागदौड़ छोड़कर पहाड़ों में सुकून से जिंदगी बिताई जाए! सुबह उठते ही सामने खूबसूरत पहाड़ हों, हाथ में गर्म कॉफी हो और न ट्रैफिक की टेंशन, न ऑफिस की मीटिंग। नेटफ्लिक्स की मुसाफिर कैफे देखने के बाद यह सपना कई लोगों का अपना सपना भी बन गया है। लेकिन पहाड़ों की जिंदगी सिर्फ खूबसूरत नजारों तक नहीं होती। वहां नई शुरुआत करने से पहले कुछ जरूरी बातें जान लेना बहुत जरूरी है, ताकि बाद में आपका सपना मुश्किल में न बदल जाए:

 

असलियत को समझें (Reality Check)

4,400+ Woman Using A Laptop In The Mountain Stock Photos, Pictures & Royalty-Free Images - iStock

पहाड़ों में रहना बहुत अच्छा लगता है, लेकिन वहां रोजमर्रा की जिंदगी भी होती है। अगर आप कैफे, होमस्टे (homestay) या कोई छोटा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो उसमें भी खूब मेहनत करनी पड़ती है। छुट्टियां (vacation) मनाने और हमेशा वहीं रहने में बहुत फर्क होता है। इसलिए फैसला लेने से पहले कुछ दिन वहां रहकर माहौल को जरूर समझें।

 

 

पैसों की सही योजना बनाएं (Financial Planning)

Swiss Traditional House In Rural Switzerland Stock Photo, Picture and Royalty Free Image. Image 12060831.नौकरी छोड़ने से पहले अपनी बचत जरूर देखें। नया काम शुरू होने में समय लग सकता है और शुरुआत में कमाई भी कम हो सकती है। ऐसे में किराया, बिजली, स्टाफ, सामान और दूसरे खर्च चलते रहते हैं। इसलिए कम से कम 6 महीने से 1 साल तक का खर्च पहले से बचाकर रखें।

लोगों से अपनापन बनाएं (Local Community)

Inside a legacy mountain house with snowy views of Wyoming's Grand Tetons

अगर पहाड़ों में बसना चाहते हैं, तो सिर्फ घर लेना काफी नहीं है। वहां रहने वाले लोगों से अच्छे रिश्ते बनाना भी जरूरी है। उनकी संस्कृति को समझें, लोकल लोगों के साथ काम करें। इससे नई जगह पर बसना आसान हो जाता है।

पहाड़ों की जिंदगी को अपनाएं (Mountain Lifestyle)

पहाड़ों में हर सुविधा शहर जैसी नहीं मिलती। कई जगह इंटरनेट धीमा हो सकता है, अस्पताल दूर हो सकते हैं और बारिश या बर्फबारी में आने-जाने में भी दिक्कत हो सकती है। इसलिए वहां की लाइफस्टाइल को अपनाने के लिए पहले से तैयार रहें।

 

अपनी स्किल्स का इस्तेमाल करें (Keep Your Skills)

नौकरी छोड़ने का मतलब यह नहीं कि पुरानी स्किल्स बेकार हो जाएंगी। अगर आप राइटिंग, डिजाइनिंग, आईटी, डिजिटल मार्केटिंग या किसी और फील्ड में काम करते हैं, तो पहाड़ों से भी ऑनलाइन काम कर सकते हैं। इससे नई शुरुआत के दौरान आपकी कमाई भी बनी रहेगी और स्ट्रेस भी कम होगा।

 

66 लाख रुपये की नौकरी छोड़ने वाली महिला ने खोला राज, बताया क्यों कम वेतन वाली नौकरी लगी बेहतर

कई लोग बेहतर करियर, बड़ी सैलरी और ऊंचे पद को सफलता की पहचान मानते हैं, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की ग्रेस मैक्लेलैंड ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया। 66 लाख रुपये सालाना कमाने वाली इस महिला ने तनाव और लगातार दबाव से परेशान होकर अपनी हाई-प्रोफाइल नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने कम वेतन वाली रिसेप्शनिस्ट और ऑफिस मैनेजर की नौकरी चुनी। ग्रेस का कहना है कि कम पैसे के बावजूद इस फैसले ने उन्हें वह चीजें वापस दीं, जो उनकी पुरानी नौकरी उनसे छीन रही थी समय, ऊर्जा और मानसिक शांति। उनकी कहानी बताती है कि कभी-कभी करियर में आगे बढ़ने से ज्यादा जरूरी खुद की खुशहाली और संतुलित जिंदगी होती है।

40% कम सैलरी, लेकिन मिली सुकून भरी जिंदगी सिडनी की रहने वाली ग्रेस ने कई साल तक बड़े पदों पर काम किया। मगर लगातार तनाव, चिंता और काम के दबाव ने उन्हें इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं बदलने का फैसला किया। नई नौकरी में उनकी कमाई 40% कम हो गई, लेकिन बदले में उन्हें समय, ऊर्जा और मानसिक शांति मिली।

छोटे पद से शुरू किया सफर, मेहनत से बनीं मैनेजर

ग्रेस ने अपने करियर की शुरुआत एक रिटेल कंपनी में सेल्स एसोसिएट के तौर पर की थी। करीब पांच साल तक मेहनत करने के बाद उन्हें कई प्रमोशन मिले और वह कंपनी के बड़े स्टोर की मैनेजर बन गईं। यह पद उनके लिए बड़ी उपलब्धि था, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारियां और दबाव भी कई गुना बढ़ गए।

सफलता मिली, लेकिन खुद को खोने लगीं

ग्रेस ने बताया कि स्टोर मैनेजर बनने के बाद वह खुद को साबित करने के दबाव में रहने लगी थीं। लंबे काम के घंटे, रोजाना लंबा सफर और लगातार बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद ने उनकी जिंदगी मुश्किल बना दी। उन्होंने कहा कि काम इतना थका देने वाला हो गया था कि ऑफिस के बाद उनके पास किसी और चीज के लिए ऊर्जा ही नहीं बचती थी।

66 लाख की नौकरी भी नहीं दे पाई खुशी

तनाव बढ़ने के बाद ग्रेस ने नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्हें लग रहा था कि शायद किसी नए माहौल में चीजें बेहतर होंगी। उन्हें लग्जरी रिटेल कंपनी में करीब 1 लाख ऑस्ट्रेलियन डॉलर (लगभग 66 लाख रुपये) की नौकरी मिली, जिसमें बोनस और विदेश यात्रा जैसे फायदे भी थे।

लेकिन अच्छी सैलरी के बावजूद उन्हें अंदर से खालीपन महसूस होता रहा। उन्हें लगा कि वह सिर्फ काम कर रही हैं, लेकिन उस काम से जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रही हैं।

फिर चुना आसान रास्ता, बदली सफलता की परिभाषा

दूसरी बार नौकरी छोड़ने के बाद ग्रेस ने तय किया कि अब वह ऐसा काम करेंगी जिसमें जिंदगी के लिए भी समय बचे। करीब एक महीने का ब्रेक लेने के बाद उन्होंने घर के पास एक जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव रोल के लिए आवेदन किया। जुलाई 2024 में उन्होंने रिसेप्शनिस्ट और ऑफिस मैनेजर के रूप में नई शुरुआत की।

कम पैसे में ज्यादा खुशी मिली

आज ग्रेस ऑफिस के रोजमर्रा के काम संभालती हैं और टीम को सपोर्ट करती हैं। हालांकि उनकी कमाई पहले से काफी कम है, लेकिन वह इस फैसले को अपनी जिंदगी का सही कदम मानती हैं। उनके मुताबिक यह नौकरी उनके लिए एक “रीसेट बटन” की तरह साबित हुई, जहां वह खुद को दोबारा समझ सकीं और आगे की दिशा तय कर सकीं।

अब लोग उनकी जिंदगी से सीख ले रहे हैं

ग्रेस का कहना है कि अब जब लोग उनसे उनके काम के बारे में पूछते हैं तो उन्हें रिसेप्शनिस्ट बताने में कोई झिझक नहीं होती। बल्कि कई लोग उनकी शांत और संतुलित जिंदगी से प्रभावित होते हैं। काम के अलावा मिले समय में उन्होंने अपने पुराने शौक भी वापस शुरू किए। वह अब क्रोशे बनाती हैं और सोशल मीडिया के जरिए इससे कमाई भी कर रही हैं।

नौकरी से छंटनी हुई तो इस शख्स को मिल गया जीवन बदलने का मौका, AI की मदद से मिल गई 1.5 करोड़ की जॉब! जानिए कैसे

एक ही कंपनी में दस साल बिताने के बाद नौकरी छूटने से किसी का भी आत्मविश्वास डगमगा सकता है। एक प्रोफेशनल के लिए, उसके बाद के महीने अनिश्चितता, बार-बार रिजेक्शन और ऐसे इंटरव्यू से भरे रहे जिनसे कोई नतीजा नहीं निकला।

हार मानने के बजाय, उन्होंने अपनी तैयारी का तरीका बदल दिया। इंटरव्यू की प्रैक्टिस करने और अपने जवाबों को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके, उन्हें आखिरकार एक नई नौकरी मिल गई, जिसमें सालाना लगभग 1.5 करोड़ रुपये का पैकेज मिलता है।

AI ने उनके इंटरव्यू की तैयारी का तरीका बदल दिया

इस प्रोफेशनल ने Reddit पर “kml3141” यूज़रनेम से अपना अनुभव शेयर किया। उन्होंने बताया कि एक ही कंपनी में 10 साल काम करने और तीन प्रमोशन पाने के बाद फरवरी के आखिर में उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। यह फैसला एक झटके जैसा था, और अगले पांच महीने नौकरी की मुश्किल तलाश में बीते। उन्होंने कई इंटरव्यू दिए लेकिन उन्हें बार-बार निराशा का सामना करना पड़ा।

कुछ पद रद्द कर दिए गए, कुछ को होल्ड पर डाल दिया गया, जबकि कुछ पद आखिरकार कंपनी के अंदर के लोगों से ही भर दिए गए। अपने चांस बेहतर करने के लिए, उन्होंने इंटरव्यू की तैयारी में AI का इस्तेमाल करना शुरू किया। उन्होंने बताया कि वे AI टूल्स में जॉब डिस्क्रिप्शन पेस्ट करते थे और उन लोगों के बारे में भी जानकारी शेयर करते थे जो उनका इंटरव्यू लेने वाले थे।

इसके बाद AI ने उन्हें इंटरव्यू में पूछे जा सकने वाले संभावित सवालों का अंदाजा लगाने, इंटरव्यू लेने वालों के बारे में जानकारी जुटाने और STAR मेथड का इस्तेमाल करके जवाब तैयार करने में मदद की। उन्होंने यह भी बताया कि AI की मदद से वे इंटरव्यू के दौरान बहुत ज़्यादा बातें करने के बजाय अपने जवाब छोटे और काम की बात पर केंद्रित रख पाए।

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Layoffs

आखिरकार मेहनत रंग लाई

कई महीनों की खोज के बाद, उन्हें एजेंसी इंडस्ट्री से बाहर की एक कंपनी से नौकरी का ऑफर मिला। इस नई नौकरी में सालाना सैलरी $155,000 (लगभग ₹1.5 करोड़) है, साथ ही 15% सालाना बोनस और पहले दिन से ही एम्प्लॉई बेनिफिट्स भी मिलेंगे। इसमें फ्लेक्सिबल वर्किंग अरेंजमेंट्स के साथ हाइब्रिड वर्क मॉडल की सुविधा भी है।

हालांकि उन्होंने सैलरी पर बातचीत (नेगोशिएशन) करने के बारे में सोचा था, लेकिन उन्होंने ऑफर स्वीकार करने का फैसला किया क्योंकि यह उनकी पिछली नौकरी की कमाई से ज़्यादा था। पीछे मुड़कर देखने पर, Reddit यूज़र ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें धैर्य रखने और लगातार अप्लाई करते रहने का महत्व सिखाया, भले ही कोई नौकरी पहुंच से बाहर लग रही हो।

उनकी पोस्ट को दूसरे Reddit यूज़र्स से भी काफी सपोर्ट मिला। एक यूज़र ने पूछा, “बधाई हो! आपने इंटरव्यू की तैयारी कैसे की? आजकल वे ज़्यादातर व्यवहार और स्थिति-आधारित (बिहेवियरल और सिनेरियो-बेस्ड) इंटरव्यू पर ज़ोर देते हैं।”एक और यूज़र ने लिखा, “बधाई हो! यहां दूसरों का हौसला बढ़ाने के लिए धन्यवाद।”

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “अरे OP, इस बड़ी कामयाबी के लिए बधाई। अगर आपको कोई दिक्कत न हो, तो क्या मैं आपसे DM में उन प्रॉम्प्ट्स के बारे में कुछ मदद ले सकता हूं जिनका आपने इस्तेमाल किया था? ये इंटरव्यू की तैयारी में मेरे काम आ सकते हैं। मुझे आपसे कुछ मेंटरशिप चाहिए।”

एक और यूज़र ने बताया, “मैंने एक एजेंसी के लिए काम किया था और मैं दोबारा ऐसा कभी नहीं करूंगा। आपकी नई नौकरी के लिए शुभकामनाएं! अब इस बात पर ध्यान दें कि आपके पास एक बड़ा इमरजेंसी फंड हो और आप अपना कोई भी बकाया कर्ज़ चुका दें।”

Viral Video: ’74 लाख खर्च हुए, फिर भी…’ IIM से पढ़ाई करने के लिए युवक ने छोड़ी सरकारी नौकरी, कहानी हुई वायरल

भारत में सरकारी नौकरी को सबसे सुरक्षित और सम्मानजनक करियर माना जाता है। वहीं एक बार सरकारी नौकरी मिलने के बाद बहुत कम लोग इसे अपनी इच्छा से छोड़ने का फैसला करते हैं। इसी बीच एक युवक का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक युवक ने बेहतर भविष्य और नए अवसरों की तलाश में सरकारी नौकरी छोड़कर आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ाई करने का रास्ता चुना। उसके मुताबिक ये फैसला उनके करियर को नई दिशा देगा और आगे चलकर अधिक बड़े मौके हासिल करने में मदद करेगा।

क्यों छोड़ी नौकरी

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए पोस्ट में अमित सोनी ने बताया कि, आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए करने का फैसला उनके लिए आसान नहीं था। उनके मुताबिक, सरकारी नौकरी छोड़ने और पढ़ाई पूरी करने तक इस फैसले की कुल लागत करीब 74 लाख रुपये रही। उन्होंने बताया कि ये रकम कैसे बनी, लेकिन उनका मुताबिक, उन्हें अपने इस फैसले पर कोई पछतावा नहीं है और वह इसे अपने करियर के लिए सही मानते हैं। अमित सोनी पहले भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात थे

बताया पूरा खर्च

अमित सोनी ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा, “करीब 74 लाख रुपये। सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला मेरे लिए इतना महंगा पड़ा। जिस दिन मुझे आईआईएम अहमदाबाद में दाखिला मिला, उसी दिन मैंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया।” उन्होंने बताया कि इस रकम में एमबीए की पढ़ाई पर होने वाला खर्च भी शामिल है और वह आय भी, जिसे उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने के कारण हासिल नहीं किया।

 

सोनी के अनुसार, आईआईएम अहमदाबाद के एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम फॉर एग्जीक्यूटिव्स (PGPX) की ट्यूशन फीस 37.10 लाख रुपये है। इसके अलावा, इंटरनेशनल इमर्शन प्रोग्राम पर करीब 4.5 लाख रुपये और पढ़ाई के दौरान रहने-खाने सहित अन्य खर्चों पर लगभग 2.5 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद उन्हें 9.80 लाख रुपये रिजाइन बॉन्ड के रूप में जमा करने पड़े।

20 लाख का हुआ नुकसान

इसके अलावा, सोनी ने सरकारी नौकरी छोड़ने से होने वाले ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान एक साल तक नौकरी नहीं करने की वजह से उन्हें वेतन और अन्य नौकरी से मिलने वाले लाभों के रूप में करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद सोनी का कहना है कि उन्हें अपने फैसले पर कभी पछतावा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नौकरी छोड़ते समय उनके पास कोई बैकअप प्लान नहीं था, सिर्फ अपने फैसले पर पूरा भरोसा था। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “सिर्फ विश्वास।” वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या ये फैसला सही था, तो उन्होंने जवाब दिया, “बिल्कुल, यह पूरी तरह इसके लायक था।”

क्यों लिया ये फैसला

सोनी ने कहा कि वह अपने इस फैसले को केवल पैसों के नजरिए से नहीं देखते। उनके मुताबिक, कुछ फैसलों की असली कीमत रुपये में नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले अनुभव और भविष्य में होने वाले बदलाव से तय होती है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “कुछ निवेश की कीमत लाखों रुपये से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि आप आगे चलकर क्या बनते हैं। यूनिफॉर्म से बोर्डरूम तक का यह सफर मेरे जीवन का दूसरा चैप्टर है।” इससे पहले एक इंस्टाग्राम वीडियो में भी उन्होंने बताया था कि सरकारी नौकरी छोड़कर दोबारा पढ़ाई करने का फैसला उन्होंने आरामदायक जीवन नहीं, बल्कि अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए लिया था।

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