मां का ITR भरते समय हुई देरी, बेटे को लगा 5,000 रुपये का झटका, वायरल हुआ मामला

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने में हुई थोड़ी सी देरी ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक यूजर ने दावा किया कि सिर्फ कुछ घंटों की देरी के कारण मामूली टैक्स राशि पर हजारों रुपये की लेट फीस जुड़ गई। इस मामले ने एक बार फिर टैक्स नियमों, समय पर रिटर्न भरने की जरूरत और आम लोगों से होने वाली छोटी गलतियों पर चर्चा शुरू कर दी है। जहां कुछ लोग इसे नियमों का जरूरी हिस्सा बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स का मानना है कि पहली बार फाइल करने वालों या कुछ घंटे की देरी जैसे मामलों में मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट के बाद लोग जुर्माने की व्यवस्था और टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।

पहली बार मां का ITR भर रहा था शख्स

एक्स यूजर @poojaofficial5 ने अपनी पोस्ट में बताया कि एक व्यक्ति पहली बार अपनी मां का इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल भर रहा था। पोस्ट के मुताबिक, वह चाहता था कि रिटर्न में कोई गलती न हो, इसलिए उसने एक जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार किया। उसका मकसद सही जानकारी के साथ ITR जमा करना था। लेकिन इसी इंतजार के दौरान फाइलिंग की आखिरी तारीख निकल गई।

सिर्फ ढाई घंटे की देरी और लग गया ₹5,000 जुर्माना

पोस्ट में दावा किया गया कि जब वह इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉग इन कर पाया, तब तक डेडलाइन खत्म हुए सिर्फ करीब ढाई घंटे हुए थे। हालांकि, सिस्टम ने देरी के लिए तय लेट फाइलिंग फीस जोड़ दी। इसके बाद जो टैक्स राशि पहले ₹850 थी, वह बढ़कर ₹5,850 हो गई। यूजर ने सवाल उठाया कि जब टैक्स की असली रकम इतनी कम थी और देरी भी कुछ घंटों की थी, तो क्या जुर्माना इतना ज्यादा होना उचित है?

यूजर ने नियमों में मानवीय गलती की जगह देने की बात कही

पोस्ट में कहा गया कि टैक्स नियमों का उद्देश्य लोगों को समय पर रिटर्न भरने के लिए प्रेरित करना है, लेकिन कई बार आम लोगों से छोटी गलतियां हो सकती हैं। यूजर ने लिखा कि पहली बार ITR भरने वालों या कुछ घंटों की देरी जैसे मामलों में कुछ राहत या ग्रेस पीरियड पर विचार किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

इस मामले पर इंटरनेट यूजर्स भी दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों ने सिस्टम को सख्त बताया और कहा कि छोटी देरी पर इतना बड़ा जुर्माना परेशान करने वाला है। एक यूजर ने लिखा कि टैक्स फाइलिंग के लिए लोगों के पास काफी समय होता है, इसलिए आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन ईमानदारी से की गई कोशिश और छोटी मानवीय गलतियों के लिए कुछ गुंजाइश होनी चाहिए।

लोगों ने दी समय से ITR भरने की सलाह

कई यूजर्स ने इस घटना को लेकर लोगों को सलाह दी कि आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पहले से दस्तावेज तैयार रखकर समय पर ITR दाखिल करने से ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है। यह मामला एक बार फिर चर्चा में ले आया है कि टैक्स नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन छोटे स्तर की गलतियों और जानबूझकर की गई लापरवाही में अंतर कैसे तय किया जाए।

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NEET Protest में छाई ये ‘देसी मां’, पोस्टर पर लिखी एक लाइन पढ़कर इंटरनेट हुआ दीवाना

दिल्ली में NEET परीक्षा को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन इन दिनों पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। हजारों छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं और प्रदर्शन से जुड़ी कई तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसी बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आंदोलन के गंभीर माहौल में भी लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। तस्वीर में दिखा एक अनोखा संदेश लोगों के दिलों को इस तरह छू गया कि देखते ही देखते वह इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X से लेकर अन्य मंचों तक लोग इसे जमकर शेयर कर रहे हैं और अपने-अपने अंदाज में प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

कई यूजर्स इसे भारतीय माताओं के स्नेह, सख्ती और सुरक्षा की भावना का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे विरोध प्रदर्शन की सबसे यादगार और दिल छू लेने वाली तस्वीर कह रहे हैं। यही वजह है कि यह फोटो अब सिर्फ एक वायरल पोस्ट नहीं, बल्कि लोगों के बीच चर्चा का खास विषय बन चुकी है।

एक तख्ती, जिसने जीत लिया इंटरनेट का दिल

इस तस्वीर को X (पहले ट्विटर) पर शेयर करते हुए कैप्शन लिखा गया, “Bro, whose mom is this?

Harsh Goenka ने शेयर किया Yamal और उनके छोटे भाई का Video, बोले- यही था फाइनल के बाद का सबसे पसंदीदा सीन

बीते एक महीने से जारी फीफा वर्ल्ड कप रविवार को खेले गए फाइनल के साथ ही खत्म हो गया। स्पेन ने फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार फुटबॉल वर्ल्ड कप जीत लिया। वहीं इस खिताबी मैच के बाद कई इमोशनल पल भी देखने को मिले। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी हार के बाद भावुक हो गए। उन्होंने अपने से 20 साल छोटे स्पेनिश स्टार लामिन यमाल को गले लगाकर बधाई दी। वहीं यमाल के छोटे भाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी छाया रहा।

यमाल के भाई ने लूटी महफिल

स्पेन फीफा वर्ल्ड कप 2026 में जहां 19 वर्षीय लामिन यमाल पर सभी की नजरें टिकी रहीं, वहीं मैदान के बाहर सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरी यमाल के महज 3 साल के छोटे भाई कीने यमाल ने। स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर मासूम मुस्कान, कैमरे की तरफ मजेदार चेहरे बनाना, स्पेन के प्रशंसकों के बीच पूरे जोश से Vamos यानी Come on! चिल्लाना और हर मैच के बाद बड़े भाई लामिन को गले लगाती उनकी तस्वीर वर्ल्ड कप के दौरान खूब वायरल हुई। वहीं कीने यमाल के एक वीडियो को बिजनेसमैन हर्ष गोयनका ने भी पोस्ट किया है।

हर्ष गोयनका ने पोस्ट किया वीडियो

कीने यमाल के वीडियो को पोस्ट करते हुए हर्ष गोयनका ने कहा कि, ‘फाइनल मैच के बाद मेरा पसंदीदा सीन। यमाल के छोटे भाई ने उसे मैदान पर देखा और उत्साह के साथ दौड़कर उसे गले लगा लिया।’

स्पेन दूसरी बार बना चैंपियन

बता दें कि, अमेरिका के न्यूयार्क में 19 जुलाई को खेले गए फाइनल मुकाबले को स्पेन ने अपने नाम किया। स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप का खिताब जीता। टीम ने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए एक्स्ट्रा टाइम में फेरन टोरेस ने गोल किया। इसी के साथ स्पेन ने 2010 के बाद दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की।

न म्यूचुअल फंड, न शेयर… 50 लाख कमाने वाला प्रोफेशनल आखिर कहां लगा रहा पैसा

आज के दौर में अच्छी सैलरी मिलने पर ज्यादातर लोग अपनी बचत को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या SIP के जरिए बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इसे लंबे समय में संपत्ति बनाने का सबसे लोकप्रिय तरीका माना जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर सामने आई एक कहानी ने इस सोच को नई बहस में बदल दिया है। 50 लाख रुपये सालाना कमाने वाले एक प्रोफेशनल ने पारंपरिक निवेश के बजाय अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा खुद का कारोबार खड़ा करने में लगाने का फैसला किया। उसकी यह रणनीति अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है।

कुछ लोग इसे भविष्य के लिए साहसिक और समझदारी भरा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि शेयर बाजार की कंपाउंडिंग ताकत को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है। इसी को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

आधी सैलरी, आधे कंपनी के शेयर

X पर राम नाम के एक यूजर ने अपने दोस्त की फाइनेंशियल प्लानिंग शेयर की। उन्होंने बताया कि उनके दोस्त का सालाना CTC 50 लाख रुपये है। इसमें 25 लाख रुपये सैलरी के रूप में मिलते हैं, जबकि बाकी 25 लाख रुपये कंपनी के शेयर हैं, जो चार साल में धीरे-धीरे मिलते हैं।

SIP छोड़ बिजनेस पर लगाया दांव

राम के मुताबिक, उनके दोस्त ने अतिरिक्त पैसे को म्यूचुअल फंड या शेयर बाजार में लगाने के बजाय अपना बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। पिछले साल उसने बैग्स का कारोबार शुरू किया और इस साल पुरुषों के कपड़ों का बिजनेस भी लॉन्च कर दिया।

हालांकि, वह पूरी तरह पारंपरिक निवेश से दूर नहीं है। वह PPF में निवेश करता है और हर साल करीब 1.2 लाख रुपये का LIC प्रीमियम भी भरता है। लेकिन उसका सबसे बड़ा फोकस अपने कारोबार को आगे बढ़ाने पर है।

SIP या अपना बिजनेस?

राम ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या उनका दोस्त शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में मिलने वाले लंबे समय के कंपाउंडिंग रिटर्न से चूक रहा है? या फिर अपना सफल बिजनेस खड़ा करना भविष्य में इससे भी बड़ा फायदा दे सकता है?

यही सवाल सोशल मीडिया पर बहस की वजह बन गया।

लोगों ने क्या दी राय?

कई यूजर्स का मानना था कि निवेश और बिजनेस, दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलना सबसे अच्छा तरीका है। उनका कहना था कि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव रहता है, जबकि अपने बिजनेस में फैसलों पर खुद का नियंत्रण होता है।

वहीं कुछ लोगों ने कहा कि अगर किसी को अपने बिजनेस और उसकी संभावनाओं पर भरोसा है, तो अपने काम में निवेश करना ज्यादा समझदारी हो सकती है। उनका मानना है कि जब व्यक्ति खुद अपने कारोबार को संभालता है, तो उसके पास बेहतर फैसले लेने और मुनाफा बढ़ाने का मौका होता है।

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एक्स ओरेकल बेंगलुरु के एम्प्लोयी को ऐसे मिला MBA डिग्री का फायदा, 25 हजार से सीधा 1 लाख हुई सैलरी

ओरेकल के पूर्व कर्मचारी प्रदीप कन्नन अपने करियर को कॉर्पोरेट भूमिका से एंटरप्रेन्योरशिप की ओर ले जाने का श्रेय अपने MBA को देते हैं। उनका कहना है कि इस डिग्री ने उन्हें ज़रूरी बिजनेस समझ और एक मजबूत आधार दिया, साथ ही उनकी सैलरी को भी ₹25,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख प्रति माह कर दिया। आजकल मुफ्त में सीखने के कई आधुनिक साधन मौजूद होने के बावजूद, कन्नन इस बात पर ज़ोर देते हैं कि MBA का उनकी ज़िंदगी की दिशा और एंटरप्रेन्योरशिप के सफ़र पर एक खास असर रहा है।

क्या एक डिग्री आपके करियर की दिशा पूरी तरह बदल सकती है? ऐसे समय में जब AI, YouTube और पॉडकास्ट की वजह से बिज़नेस से जुड़ी जानकारी पहले से कहीं ज़्यादा आसानी से मिल रही है, कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या MBA में निवेश करना अब भी फ़ायदेमंद है।

Oracle बेंगलुरु के पूर्व कर्मचारी प्रदीप कन्नन के लिए, इसका जवाब उनके अपने अनुभव से मिलता है। X पर शेयर की गई एक पोस्ट में, उन्होंने बताया कि कैसे MBA ने न सिर्फ उनकी महीने की सैलरी 25,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी, बल्कि उन्हें कॉर्पोरेट जिंदगी छोड़कर एंटरप्रेन्योर बनने का आत्मविश्वास और बिजनेस की समझ भी दी।

उन्होंने लिखा, “अगर मैंने MBA नहीं किया होता, तो मैं एंटरप्रेन्योर नहीं बन पाता। जब मैंने 2010 में MBA शुरू किया था, तब मुझे बिजनेस की कोई समझ नहीं थी। मैं दक्षिण भारत के एक टियर-3 शहर से आया था।”

कन्नन ने बताया कि MBA से उन्हें पहली बार असल में समझ आया कि बिजनेस कैसे काम करते हैं। बिजनेस स्कूल में जाने से पहले, उन्हें एंटरप्रेन्योरशिप या बिजनेस मैनेजमेंट के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। उन्होंने आगे कहा, “MBA मेरे लिए यह समझने का पहला मौका था कि बिजनेस असल में कैसे काम करते हैं। इसने मुझे एक ऐसा आधार दिया जो मैं कहीं और नहीं बना सकता था। मेरी सैलरी ₹25,000 प्रति माह से बढ़कर ₹1 लाख प्रति माह हो गई।”

हालांकि सैलरी में चार गुना बढ़ोतरी एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन कन्नन का कहना है कि असली बदलाव उनकी सोच में आया। उन्होंने 2010 के सीखने के माहौल की तुलना आज उपलब्ध मौकों से भी की।

उन्होंने आगे कहा, “आज, 2026 में, आप लगभग सब कुछ ऑनलाइन सीख सकते हैं। AI आपको स्ट्रेटेजी सिखा सकता है। YouTube आपको फाइनेंस सिखा सकता है। पॉडकास्ट आपको मार्केटिंग सिखा सकते हैं। लेकिन 2010 में, ऐसी दुनिया नहीं थी। कई लोगों के लिए, MBA बस एक और डिग्री थी। मेरे लिए, इसने मेरी जिंदगी की दिशा बदल दी।”

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, कन्नन ने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम करना जारी रखा और फिर 2019 में एक अलग रास्ता चुनने का फैसला किया। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और ‘द फालूदा शॉप’ (The Falooda Shop) शुरू किया, जो पारंपरिक भारतीय ड्रिंक्स से प्रेरित एक डेज़र्ट ब्रांड है।

जो एक छोटा सा बिज़नेस शुरू हुआ था, वह अब लगभग ₹9 करोड़ की वैल्यू वाले बिज़नेस में बदल गया है। यह ब्रांड अब भारत और दुबई में 18 से ज्यादा आउटलेट चलाता है, जहां कई तरह के फालूदा, मिल्कशेक और डेजर्ट मिलते हैं।

ऋषिकेश से कम खर्चे में श्रीलंका का ट्रिप! इस शख्स ने होटल से लेकर फ्लाइट तक पूरा खर्चा कैलकुलेट किया

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट ने ट्रैवल खर्च और टूरिज्म की कीमतों को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि भारत के लोकप्रिय पर्यटन स्थल ऋषिकेश की तुलना में श्रीलंका जैसी अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन कई मामलों में ज्यादा किफायती और बेहतर वैल्यू फॉर मनी साबित हो सकती हैं। इस बात ने इंटरनेट यूजर्स के बीच चर्चा को और तेज कर दिया है। लोग अब घरेलू और विदेशी यात्रा के खर्चों की तुलना करने लगे हैं और अपने-अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

कुछ लोग मानते हैं कि भारत में कई टूरिस्ट स्पॉट्स पर कीमतें जरूरत से ज्यादा बढ़ गई हैं, जबकि कुछ का कहना है कि हर जगह का अनुभव अलग होता है और केवल खर्च के आधार पर तुलना करना सही नहीं है। यह पूरा मुद्दा अब एक बड़े ऑनलाइन डिबेट का रूप ले चुका है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? X पोस्ट ने खोला मुद्दा

यह बहस तब शुरू हुई जब कंटेंट क्रिएटर परित्श शर्मा ने X पर एक अनुभव साझा किया। उनके अनुसार, एक दोस्त पहले ऋषिकेश घूमने की योजना बना रहा था, लेकिन होटल और ट्रैवल खर्च देखकर उसने विदेश जाने का फैसला कर लिया।

होटल और फ्लाइट ने बढ़ाया बजट

पोस्ट में बताया गया कि ऋषिकेश में अच्छे होटल के कमरे लगभग ₹9,000 से ₹15,000 प्रति रात तक मिल रहे थे। वहीं मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट ही ₹7,000 से ₹8,000 प्रति साइड पड़ रही थी, और आगे का ट्रैवल अलग से जोड़ना पड़ता।

उसी बजट में श्रीलंका बना सस्ता और बेहतर विकल्प

कंटेंट क्रिएटर के मुताबिक, उसी बजट में श्रीलंका की ट्रिप ज्यादा बेहतर साबित हुई। वहां ₹3,000 से ₹5,000 में समुद्र किनारे 5-स्टार होटल मिलने का दावा किया गया, साथ ही शांत वातावरण और साफ-सुथरी जगह का भी जिक्र हुआ।

भारत में टूरिज्म महंगा हो रहा है

पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारत में टूरिज्म धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है और अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो लोग विदेश की ओर ज्यादा रुख कर सकते हैं। इस बयान ने ऑनलाइन बहस को और तेज कर दिया।

सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा

इस मुद्दे पर यूजर्स की राय बंट गई। कुछ लोगों ने कहा कि कोविड के बाद डिमांड बढ़ने से कीमतें बढ़ी हैं, जबकि कुछ ने भारत के टूरिज्म को ओवरप्राइस बताया। वहीं कई लोगों ने यह भी कहा कि दोनों जगहों के अनुभव अलग हैं और सिर्फ कीमत के आधार पर तुलना सही नहीं है।

यात्रा खर्च का अनुभव

कुछ यात्रियों ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारत में कई जगहों पर लागत ज्यादा और सुविधाएं कम मिलती हैं, जबकि कुछ ने इसे गलत तुलना बताया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में ट्रैवल अब सच में ‘ओवरप्राइस’ हो रहा है?

बेंगलुरु के इस संगीतकार ने 16 पासपोर्ट भर डाले, 245 देशों की यात्रा के बाद इंटरनेट पर छा गए