भारत के मुकाबले वियतनाम में वेकेशन मनना कैसे पड़ता है सस्ता, यूजर की बात सुन हैरान रह गए लोग

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में भारत में घूमने-फिरने के खर्च की तुलना वियतनाम में विदेश यात्रा के खर्च से की गई है। इस पोस्ट ने भारत के टूरिज़्म सेक्टर के सामने आ रही चुनौतियों पर ऑनलाइन ज़ोरदार बहस छेड़ दी है। X (पहले ट्विटर) पर पंकज अरोड़ा नाम के यूज़र ने यह पोस्ट शेयर किया। इसमें बताया गया कि उनके एक साथी पहाड़ों पर चार दिन की छुट्टी बिताने की योजना बना रहे थे, लेकिन खर्च की तुलना करने के बाद उन्होंने विदेश जाने का फैसला किया।

पोस्ट के मुताबिक, यात्री ने पहले भारत में मशहूर टूरिस्ट जगहों को देखा, जहां होटल के कमरों का किराया 10,000 रुपये से 18,000 रुपये प्रति रात था। टैक्सी का खर्च 3,000 रुपये से 5,000 रुपये प्रति दिन होने का अनुमान था, जबकि एक जोड़े के लिए आने-जाने की फ़्लाइट टिकट का खर्च लगभग 15,000 रुपये से 20,000 रुपये होने की उम्मीद थी। पोस्ट में दावा किया गया कि देश के भीतर छुट्टी मनाने का कुल अनुमानित बजट 60,000 रुपये से 80,000 रुपये के बीच था।

हालांकि, कई इंटरनेशनल ऑप्शन देखने के बाद, ट्रैवलर ने वियतनाम को चुना। पोस्ट के अनुसार, डिस्काउंट वाली रिटर्न फ्लाइट्स उपलब्ध थीं, और टूरिस्ट जगहों के पास साफ़-सुथरे होटलों का किराया 3,000 से 5,000 रुपये प्रति रात के बीच था। पोस्ट में वियतनाम के पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम, सस्ते खाने और टूरिस्ट-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर की भी तारीफ की गई।

मिस्टर अरोड़ा ने लिखा, “नतीजतन, उन्होंने विदेश में उतना पैसा खर्च नहीं किया जितना भारत में घूमने पर खर्च होता।” पोस्ट में कहा गया है कि भारत के टूरिज़्म सेक्टर को डेस्टिनेशन की प्राकृतिक सुंदरता से आगे बढ़कर अन्य मुद्दों पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है। इसमें सुझाव दिया गया कि कम खर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर, साफ़-सफ़ाई और टूरिस्ट का कुल अनुभव यात्रियों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

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इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जिसमें कई यूज़र्स घरेलू और इंटरनेशनल यात्रा के खर्चों के बारे में अपने अनुभव शेयर कर रहे हैं और भारत के टूरिज़्म को और बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं।

एक यूज़र ने मशहूर जगहों पर होटल की कीमतों को “लालच पर आधारित एल्गोरिदम” का नतीजा बताया। एक अन्य यूज़र ने कहा कि अगर होटल और फ़्लाइट के रेट ज़्यादा वाजिब हों तो भारतीय टूरिज़्म फल-फूल सकता है। एक तीसरे यूज़र ने कोविड के बाद आए बदलाव का ज़िक्र करते हुए कहा कि घरेलू यात्रा की मांग में काफ़ी तेज़ी आई है, और जो जगहें पहले सस्ती थीं, वे अब काफ़ी महंगी हो गई हैं।

ऋषिकेश से कम खर्चे में श्रीलंका का ट्रिप! इस शख्स ने होटल से लेकर फ्लाइट तक पूरा खर्चा कैलकुलेट किया

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट ने ट्रैवल खर्च और टूरिज्म की कीमतों को लेकर नई बहस खड़ी कर दी है। इस पोस्ट में दावा किया गया है कि भारत के लोकप्रिय पर्यटन स्थल ऋषिकेश की तुलना में श्रीलंका जैसी अंतरराष्ट्रीय डेस्टिनेशन कई मामलों में ज्यादा किफायती और बेहतर वैल्यू फॉर मनी साबित हो सकती हैं। इस बात ने इंटरनेट यूजर्स के बीच चर्चा को और तेज कर दिया है। लोग अब घरेलू और विदेशी यात्रा के खर्चों की तुलना करने लगे हैं और अपने-अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

कुछ लोग मानते हैं कि भारत में कई टूरिस्ट स्पॉट्स पर कीमतें जरूरत से ज्यादा बढ़ गई हैं, जबकि कुछ का कहना है कि हर जगह का अनुभव अलग होता है और केवल खर्च के आधार पर तुलना करना सही नहीं है। यह पूरा मुद्दा अब एक बड़े ऑनलाइन डिबेट का रूप ले चुका है।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद? X पोस्ट ने खोला मुद्दा

यह बहस तब शुरू हुई जब कंटेंट क्रिएटर परित्श शर्मा ने X पर एक अनुभव साझा किया। उनके अनुसार, एक दोस्त पहले ऋषिकेश घूमने की योजना बना रहा था, लेकिन होटल और ट्रैवल खर्च देखकर उसने विदेश जाने का फैसला कर लिया।

होटल और फ्लाइट ने बढ़ाया बजट

पोस्ट में बताया गया कि ऋषिकेश में अच्छे होटल के कमरे लगभग ₹9,000 से ₹15,000 प्रति रात तक मिल रहे थे। वहीं मुंबई से दिल्ली की फ्लाइट ही ₹7,000 से ₹8,000 प्रति साइड पड़ रही थी, और आगे का ट्रैवल अलग से जोड़ना पड़ता।

उसी बजट में श्रीलंका बना सस्ता और बेहतर विकल्प

कंटेंट क्रिएटर के मुताबिक, उसी बजट में श्रीलंका की ट्रिप ज्यादा बेहतर साबित हुई। वहां ₹3,000 से ₹5,000 में समुद्र किनारे 5-स्टार होटल मिलने का दावा किया गया, साथ ही शांत वातावरण और साफ-सुथरी जगह का भी जिक्र हुआ।

भारत में टूरिज्म महंगा हो रहा है

पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारत में टूरिज्म धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है और अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो लोग विदेश की ओर ज्यादा रुख कर सकते हैं। इस बयान ने ऑनलाइन बहस को और तेज कर दिया।

सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा

इस मुद्दे पर यूजर्स की राय बंट गई। कुछ लोगों ने कहा कि कोविड के बाद डिमांड बढ़ने से कीमतें बढ़ी हैं, जबकि कुछ ने भारत के टूरिज्म को ओवरप्राइस बताया। वहीं कई लोगों ने यह भी कहा कि दोनों जगहों के अनुभव अलग हैं और सिर्फ कीमत के आधार पर तुलना सही नहीं है।

यात्रा खर्च का अनुभव

कुछ यात्रियों ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारत में कई जगहों पर लागत ज्यादा और सुविधाएं कम मिलती हैं, जबकि कुछ ने इसे गलत तुलना बताया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत में ट्रैवल अब सच में ‘ओवरप्राइस’ हो रहा है?

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