मां का ITR भरते समय हुई देरी, बेटे को लगा 5,000 रुपये का झटका, वायरल हुआ मामला

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने में हुई थोड़ी सी देरी ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। एक यूजर ने दावा किया कि सिर्फ कुछ घंटों की देरी के कारण मामूली टैक्स राशि पर हजारों रुपये की लेट फीस जुड़ गई। इस मामले ने एक बार फिर टैक्स नियमों, समय पर रिटर्न भरने की जरूरत और आम लोगों से होने वाली छोटी गलतियों पर चर्चा शुरू कर दी है। जहां कुछ लोग इसे नियमों का जरूरी हिस्सा बता रहे हैं, वहीं कई यूजर्स का मानना है कि पहली बार फाइल करने वालों या कुछ घंटे की देरी जैसे मामलों में मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर वायरल इस पोस्ट के बाद लोग जुर्माने की व्यवस्था और टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को लेकर अपनी-अपनी राय साझा कर रहे हैं।

पहली बार मां का ITR भर रहा था शख्स

एक्स यूजर @poojaofficial5 ने अपनी पोस्ट में बताया कि एक व्यक्ति पहली बार अपनी मां का इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल भर रहा था। पोस्ट के मुताबिक, वह चाहता था कि रिटर्न में कोई गलती न हो, इसलिए उसने एक जरूरी दस्तावेज मिलने का इंतजार किया। उसका मकसद सही जानकारी के साथ ITR जमा करना था। लेकिन इसी इंतजार के दौरान फाइलिंग की आखिरी तारीख निकल गई।

सिर्फ ढाई घंटे की देरी और लग गया ₹5,000 जुर्माना

पोस्ट में दावा किया गया कि जब वह इनकम टैक्स पोर्टल पर लॉग इन कर पाया, तब तक डेडलाइन खत्म हुए सिर्फ करीब ढाई घंटे हुए थे। हालांकि, सिस्टम ने देरी के लिए तय लेट फाइलिंग फीस जोड़ दी। इसके बाद जो टैक्स राशि पहले ₹850 थी, वह बढ़कर ₹5,850 हो गई। यूजर ने सवाल उठाया कि जब टैक्स की असली रकम इतनी कम थी और देरी भी कुछ घंटों की थी, तो क्या जुर्माना इतना ज्यादा होना उचित है?

यूजर ने नियमों में मानवीय गलती की जगह देने की बात कही

पोस्ट में कहा गया कि टैक्स नियमों का उद्देश्य लोगों को समय पर रिटर्न भरने के लिए प्रेरित करना है, लेकिन कई बार आम लोगों से छोटी गलतियां हो सकती हैं। यूजर ने लिखा कि पहली बार ITR भरने वालों या कुछ घंटों की देरी जैसे मामलों में कुछ राहत या ग्रेस पीरियड पर विचार किया जाना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

इस मामले पर इंटरनेट यूजर्स भी दो हिस्सों में बंट गए। कुछ लोगों ने सिस्टम को सख्त बताया और कहा कि छोटी देरी पर इतना बड़ा जुर्माना परेशान करने वाला है। एक यूजर ने लिखा कि टैक्स फाइलिंग के लिए लोगों के पास काफी समय होता है, इसलिए आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए। वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि नियम जरूरी हैं, लेकिन ईमानदारी से की गई कोशिश और छोटी मानवीय गलतियों के लिए कुछ गुंजाइश होनी चाहिए।

लोगों ने दी समय से ITR भरने की सलाह

कई यूजर्स ने इस घटना को लेकर लोगों को सलाह दी कि आखिरी तारीख का इंतजार न करें। पहले से दस्तावेज तैयार रखकर समय पर ITR दाखिल करने से ऐसी परेशानियों से बचा जा सकता है। यह मामला एक बार फिर चर्चा में ले आया है कि टैक्स नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन छोटे स्तर की गलतियों और जानबूझकर की गई लापरवाही में अंतर कैसे तय किया जाए।

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Revised ITR Rules: 31 जुलाई से पहले भरा ITR और हो गई गलती? जानें रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने का सही तरीका

How to File Revised ITR: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 खत्म हो चुकी है। कई टैक्सपेयर्स ने आखिरी समय की जल्दबाजी में अपना रिटर्न तो जमा कर दिया, लेकिन बाद में पता चला कि कोई बैंक ब्याज, शेयर बाजार से हुआ मुनाफा या फिर कोई टैक्स सेविंग डिडक्शन जोड़ना छूट गया है।

अगर आपने भी अपने ITR में कोई गलत जानकारी भर दी है या कोई आय छिपा ली है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 139(5) आपको अपनी गलती सुधारने का पूरा मौका देता है। आइए जानते हैं कि धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने के नियम, डेडलाइन और आसान तरीका क्या है।

क्या होता है ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ (सेक्शन 139(5))?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत अगर किसी टैक्सपेयर को अपना ओरिजिनल ITR सबमिट करने के बाद यह अहसास होता है कि उससे कोई गलत जानकारी चली गई है या कोई ब्योरा दर्ज होने से रह गया है, तो वह एक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कौन कर सकता है फाइल?: जिस भी व्यक्ति ने सेक्शन 139(1) के तहत समय पर (31 जुलाई तक या समय बीतने के बाद बिलेटेड रिटर्न (सेक्शन 139(4)) जमा किया है, वह रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल कर सकता है।

कितनी बार कर सकते हैं रिवाइज?: कानूनन आप अपने ITR को एक से अधिक बार भी रिवाइज कर सकते हैं, बशर्ते वह डेडलाइन के भीतर हो।

रिवाइज्ड ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 दिसंबर 2026 है। अगर इनकम टैक्स विभाग द्वारा आपके रिटर्न का एसेसमेंट (सेक्शन 144) पहले ही पूरा कर लिया जाता है, तो एसेसमेंट पूरा होने के बाद या 31 दिसंबर 2026 जो भी पहले हो तक ही आप इसे रिवाइज कर सकेंगे।

रिवाइज्ड ITR फाइल करते समय ध्यान रखें ये 4 अहम बातें

1- ओरिजिनल ITR का पावती नंबर: रिवाइज्ड रिटर्न भरते समय आपको अपने पुराने ITR का पावती नंबर और फाइल करने की तारीख दर्ज करनी होगी।

2- सही ITR फॉर्म का चयन: आप जिस फॉर्म (ITR-1, ITR-2 आदि) में पहले रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, उसी फॉर्म का उपयोग करें, जब तक कि आपकी आय के स्रोतों में बदलाव न हुआ हो।

3- AIS और Form 26AS से मिलान: नई फाइलिंग से पहले अपने Annual Information Statement (AIS) को दोबारा ध्यान से जांचें ताकि इस बार कोई ब्याज, डिविडेंड या कैपिटल गेन छूट न जाए।

4- ई-वेरिफिकेशन अनिवार्य: ओरिजिनल ITR की तरह ही रिवाइज्ड ITR को भी सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर e-Verify करना अनिवार्य है। बिना वेरिफिकेशन के आपका रिवाइज्ड रिटर्न अमान्य माना जाएगा।

ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिवाइज्ड ITR भरने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका

  • स्टेप 1: इनकम टैक्स विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल (eportal.incometax.gov.in) पर जाएं और अपने PAN/Aadhaar तथा पासवर्ड से लॉगिन करें।
  • स्टेप 2: ‘e-File’ टैब में जाएं > ‘Income Tax Returns’ > ‘File Income Tax Return’ पर क्लिक करें।
  • स्टेप 3: Assessment Year 2026-27 चुनें और Filing Type में ‘Revised Return u/s 139(5)’ सिलेक्ट करें।
  • स्टेप 4: स्क्रीन पर मांगे जाने अनुसार अपने ओरिजिनल ITR का Acknowledgement Number और Filing Date दर्ज करें।
  • स्टेप 5: अब फॉर्म में जहाँ भी गलती हुई थी (जैसे आय बढ़ाना, छूटी हुई डिडक्शन जोड़ना या बैंक डिटेल सही करना), उसे ठीक करें।
  • स्टेप 6: टैक्स लायबिलिटी की दोबारा गणना करें और अगर कोई अतिरिक्त टैक्स बनता है, तो उसका भुगतान करें।
  • स्टेप 7: रिटर्न सबमिट करें और तुरंत Aadhaar OTP या नेट बैंकिंग के जरिए इसे e-Verify कर दें।

ITR: 31 जुलाई तक फाइल किए गए करीब 6 करोड़ रिटर्न, इनकम के ट्रेंड में दिखा दिलचस्प बदलाव

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख तक कुल 5.9 लाख रिटर्न फाइल हुए। आईटीआर फॉर्म-1 और आईटीआर फॉर्म-2 से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। फाइल कुल रिटर्न की संख्या की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 1 अगस्त को दी है।

आईटीआर-3 और ITR-4 फॉर्म वाले टैक्सपेयर्स के लिए अंतिम तारीख 31 अगस्त

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की 31 जुलाई की अंतिम तारीख उन टैक्सपेयर्स के लिए थी, जिनके अकाउंट्स का ऑडिट जरूरी नहीं है। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी बिजनेस और प्रोफेशनल इनकम है, उनके लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 अगस्त है। आईटीआर-1 का इस्तेमाल ऐसे रेजिडेंट इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स करते हैं, जिनकी कुल सालाना इनकम 50 लाख रुपये तक होती है। उनकी इनकम में सैलरी, एक घर से इनकम और 5,000 रुपये तक की एग्रीकल्चर इनकम शामिल हो सकती है।

अब ज्यादातर टैक्सपेयर्स की इनकम का स्रोत सिर्फ सैलरी नहीं

ITR फॉर्म 2 उन टैक्सपेयर्स के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से कोई इनकम नहीं है, लेकिन कैपिटल गेंस से इनकम है। टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लियरटैक्स के डेटा के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में टैक्स फाइलिंग का पैटर्न बदला है। अब ज्यादा टैक्सपेयर्स सैलरी के अलावा इनकम के दूसरे स्रोतों की भी रिपोर्टिंग कर रहे हैं।

कैपिटल गेंस दिखाने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़ी

इस साल रिटर्न फाइल कर चुके टैक्सपेयर्स में से सिर्फ 42 फीसदी ने सैलरी को इनकम का मुख्य स्रोत दिखाया है। AY2022-23 में यह संख्या 82 फीसदी थी। टैक्सपेयर्स के इनकम में कैपिटल गेंस बड़ा स्रोत के रूप में सामने आया है। कैपिटल गेंस से इनकम वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी इस साल 39 फीसदी पहुंच गई। AY2022-23 में यह सिर्फ 9 फीसदी थी।

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की हिस्सेदारी बढ़कर 26 फीसदी

बिजनेस इनकम रिपोर्ट करने वाले टैक्सपेयर्स की संख्या भी बढ़कर 26 फीसदी पहुंच गई है। AY2022-23 में यह सिर्फ 4 फीसदी थी। इससे यह संकेत मिलता है कि सेल्फ-एंप्लॉयमेंट वाले लोग अब पहले के मुकाबले ज्यादा रिटर्न फाइल कर रहे हैं। यह ट्रेंड हर उम्र वर्ग के टैक्सपेयर्स में देखने को मिला है। सीनियर सिटीजंस में ऑनलाइन रिटर्न फाइल करे वाले लोगों की संख्या बढ़कर 53 फीसदी हो गई है।

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होम लोन, कार लोन सहित दूसरी जरूरतों की वजह से ज्यादा लोग फाइल कर रहे रिटर्न

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसलिए भी अब पहले के मुकाबले ज्यादा लोग रिटर्न फाइल कर रहे हैं, क्योंकि अब होम लोन, कार लोन, क्रेडिट कार्ड और रेंट एग्रीमेंट बनवाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न मांगा जा रहा है। अब रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं रह गया है। टैक्सपेयर्स इसे गंभीरता से ले रहे हैं। सरकार ने रिटर्न फाइल प्रोसेस को पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है। इसका फायदा भी मिल रहा है।

Income Tax Return: 31 जुलाई तक रिटर्न फाइल करने का मौका चूक गए? जानिए अब आपके लिए क्या हैं विकल्प

अगस्त का महीना शुरू हो गया है। रुपये-पैसे से जुड़े कई नियम आज से बदल गए हैं। आज से आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म से रिटर्न भरने पर पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही आईटीआर-3 और आईटीआर-4 फॉर्म से रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त को खत्म हो जाएगी। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

बिलेटेड रिटर्न 31 दिसंबर तक फाइल किया जा सकता है

ITR-1 और ITR-2 फॉर्म से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। अगर किसी वजह से आप डेडलाइन तक रिटर्न फाइल करने से चूक गए हैं तो आप इस साल 31 दिसंबर तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं। इसके लिए आपको पेनाल्टी चुकानी होगी। साथ ही टैक्स अमाउंट पर इंटरेस्ट देना होगा। ऐसे टैक्सपेयर्स का रिफंड आने में थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए पेनाल्टी चुकानी होगी

ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये से ज्यादा है, उन्हें बिलेटेड रिटर्न फाइल करने के लिए 5000 रुपये पेनाल्टी चुकानी होगी। ऐसे टैक्सपेयर्स जिनकी सालाना इनकम 5 लाख रुपये तक है उन्हें 1000 रुपये पेनाल्टी चुकानी होगी। इसके अलावा टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 234ए के तहत बकाया टैक्स पर इंटरेस्ट चुकाना होगा।

ये टैक्सपेयर्स बगैर पेनाल्टी 31 अगस्त तक फाइल कर सकते हैं रिटर्न

ऐसे टैक्सपेयर्स जिनके लिए आईटीआर-3 या आईटीआर-4 का इस्तेमाल करना जरूरी है और जिन्हें टैक्स ऑडिट की जरूरत नहीं है, उनके लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख 31 अगस्त है। इस कैटेगरी में सेल्फ-एंप्लॉयड प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर्स, छोटे कारोबारी जैसे टैक्सपेयर्स आते हैं। इसके अलावा ऐसे टैक्सपेयर्स भी इस कैटेगरी में आते हैं, जिन्होंने सेक्शन 44 एडी और 44एडीए के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम को सेलेक्ट किया है।

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इस महीने आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी की भी होगी बैठक

इस महीने आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक होगी। 3 अगस्त को यह बैठक शुरू होगी, जिसके नतीजे 5 अगस्त को आएंगे। अगर इस मीटिंग में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान करता है तो होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो जाएंगे। साथ ही जिन लोगों ने पहले से लोन लिए हैं, उनकी EMI बढ़ जाएगी। हालांकि, अगस्त की बैठक में आरबीआईआ के रेपो रेट बढ़ाने की उम्मीद कम है। रेपो रेट बढ़ने से बैंक लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ा देते हैं।

ITR Filing Deadline: क्या 31 जुलाई के बाद बढ़ेगी आईटीआर की डेडलाइन? जानिए क्या है इनकम टैक्स विभाग का अपडेट

Income Tax Return Deadline Extension: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए बिना किसी लेट फीस के इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आज 31 जुलाई 2026 आखिरी तारीख है। हर साल की तरह इस बार भी सोशल मीडिया और करदाताओं के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या सरकार या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इस डेडलाइन को आगे बढ़ाएगा?

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आधिकारिक रुझानों के मुताबिक, इस बार ITR फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ने की संभावना बेहद कम है। करदाताओं को किसी भी तरह की राहत या तारीख बढ़ाए जाने का इंतजार किए बिना आज ही अपना आईटीआर दाखिल कर देना चाहिए।

क्या बढ़ेगी ITR फाइल करने की आखिरी तारीख?

इनकम टैक्स विभाग के सूत्रों के अनुसार, सरकार की तरफ से 31 जुलाई की डेडलाइन बढ़ाने को लेकर फिलहाल कोई विचार नहीं किया जा रहा है। इसके पीछे की वजह ये है कि, इस बार इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल (e-Filing Portal) काफी सुचारू रूप से काम कर रहा है और भारी ट्रैफिक के बावजूद कोई बड़ी तकनीकी खराबी नहीं देखी गई है।

अब तक पांच करोड़ से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना आईटीआर फाइल कर चुके हैं। विभाग का मानना है कि करदाताओं को पर्याप्त समय दिया गया था, इसलिए डेडलाइन बढ़ाने का कोई ठोस कारण नहीं है।

अगर आज 31 जुलाई तक ITR फाइल नहीं किया तो क्या होगा?

अगर आप 31 जुलाई 2026 की मध्यरात्रि तक अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने में चूक जाते हैं, तो आपको ये नुकसान और पेनाल्टी झेलनी पड़ेगी:

लेट फीस (Section 234F): अगर आपकी कुल सालाना कमाई ₹5 लाख से अधिक है, तो आपको ₹5,000 की लेट फीस देनी होगी। वहीं अगर आपकी कुल कमाई ₹5 लाख तक है, तो लेट फीस ₹1,000 होगी।

ब्याज का बोझ (Section 234A): अगर आपका कोई टैक्स बकाया निकलता है, तो 1 अगस्त से आपको बकाया टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से साधारण ब्याज देना होगा।

घाटे को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना: अगर आप शेयर बाजार, F&O या प्रॉपर्टी से हुए नुकसान को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड करना चाहते हैं, तो 31 जुलाई के बाद बिलेटेड रिटर्न में यह सुविधा नहीं मिलेगी।

बिलेटेड रिटर्न फाइल करने का मौका

जो लोग 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएंगे, वे 31 दिसंबर 2026 तक अपना बिलेटेड आईटीआर (Belated ITR) जमा कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें पेनल्टी और ब्याज चुकाना पड़ेगा।

टैक्सपेयर्स के लिए काम की सलाह

इनकम टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रही डेडलाइन एक्सटेंशन की अफवाहों पर बिल्कुल ध्यान न दें। आखिरी समय के रश और सर्वर पर दबाव से बचने के लिए आज ही तुरंत अपना ITR-1 या संबंधित फॉर्म भरकर प्रोसेस पूरा करें और रिटर्न को e-Verify करना न भूलें।

ITR Filing 2026 Deadline: 31 जुलाई से पहले ऐसे भरें आयकर रिटर्न, पेनल्टी से बचें

income tax

अगर आपने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपना आयकर रिटर्न (ITR) अभी तक दाखिल नहीं किया है, तो तुरंत सावधान हो जाएं! व्यक्तिगत करदाताओं और वेतनभोगियों के लिए बिना  किसी लेट फीस के ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है।

 

अंतिम समय में इनकम टैक्स पोर्टल पर ट्रैफिक का दबाव बढ़ने से सर्वर स्लो होने या पेमेंट अटकने की समस्या हो सकती है। यदि आप 31 जुलाई की समय सीमा चूक जाते हैं, तो आपको  भारी लेट फीस, ब्याज और कई वित्तीय नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।
 

धारा 234F के तहत पेनल्टी (Late Fee Slabs) 

आयकर कानून की धारा 234F के अनुसार, नियत तारीख के बाद रिटर्न (Belated Return) दाखिल करने पर निम्नलिखित जुर्माना लागू होता है:

 

कुल वार्षिक आय (Total Income) 31 जुलाई के बाद ITR फाइल करने पर लेट फीस

2.5 लाख तक रुपए (मूल छूट सीमा) कोई पेनल्टी नहीं

2.5 लाख से 5 लाख रुपए तक 1,000 रुपए अधिकतम लेट फीस

5 लाख रुपए से अधिक 5,000 रुपए लेट फीस

 

समय पर ITR न भरने के 4 बड़े नुकसान

1. धारा 234A के तहत ब्याज : यदि आपका कोई टैक्स बकाया है, तो समय सीमा समाप्त होने के बाद आपको बकाए टैक्स पर 1% प्रति माह की दर से ब्याज देना होगा। 
 

2. नुकसान (Losses) को कैरी फॉरवर्ड न कर पाना : शेयर बाजार, फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) या बिजनेस से हुए नुकसान को अगले वर्षों के मुनाफे से एडजस्ट (Carry Forward) करने का विकल्प समाप्त हो जाता है।
 

3. ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प बंद: यदि आप पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनना चाहते थे, तो समय सीमा बीत जाने के बाद आप केवल न्यू टैक्स  रिजीम (New Tax Regime) के तहत ही बेलैटेड रिटर्न भर पाएंगे।

4. रिफंड में देरी : यदि आपका TDS कटा है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो देर से फाइल करने पर आपका रिफंड अटक सकता है या उसमें काफी देरी हो सकती है।

 

पोर्टल पर ऑनलाइन ITR फाइल करने की चरणबद्ध प्रक्रिया

समय सीमा समाप्त होने से पहले घर बैठे आधिकारिक पोर्टल (incometax.gov.in) पर आसानी से ITR फाइल करने के लिए इन स्टेप्स का पालन करें:
 

1.ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें: PAN और पासवर्ड तैयार रखें।

आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपनी यूजर आईडी (PAN) और पासवर्ड का उपयोग करके लॉगिन करें।
 

2.File Income Tax Return चुनें:

लॉगिन के बाद मुख्य डैशबोर्ड पर e-File > Income Tax Returns > File Income Tax Return विकल्प पर क्लिक करें।
 

3.आकलन वर्ष (Assessment Year) का चयन करें:

आकलन वर्ष में AY 2026-27 का चयन करें। इसके बाद ऑनलाइन फाइलिंग (Online Mode) चुनें और 'Start New Filing' पर क्लिक करें।
 

4.करदाता स्थिति एवं सही ITR फॉर्म का चुनाव करें:

अपनी स्थिति Individual चुनें। यदि आपकी केवल वेतन, एक मकान संपत्ति या ब्याज से आय है, तो ITR-1 (Sahaj) चुनें।
 

5.AIS और Form 26AS से आंकड़ों का मिलान करें:

अपने फॉर्म 16, AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS के आंकड़ों की जांच करें। यदि कोई टैक्स बकाया दिखता है, तो e-Pay Tax  के माध्यम से तुरंत भुगतान करें।
 

6.समीक्षा करें और e-Verify पूरा करें:

अपनी सभी जानकारियों की दोबारा समीक्षा करके Submit पर क्लिक करें। इसके बाद अपने आधार OTP या नेट बैंकिंग का उपयोग करके e-Verification प्रक्रिया तुरंत पूरी  करें (बिना ई-वेरिफिकेशन के ITR अमान्य माना जाता है)।
 

ITR सबमिट करने से पहले अंतिम चेकलिस्ट 

– AIS/TIS की जांच: अपने पोर्टल पर जाकर AIS जरूर डाउनलोड करें और उसमें दर्ज ब्याज, डिविडेंड या शेयर ट्रेडिंग की जानकारी अपने रिकॉर्ड से मिलाएं।

– बैंक खाता वैलिडेट करें: सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता पोर्टल पर पूर्व-सत्यापित (Pre-validated) है ताकि रिफंड सीधे आपके खाते में आ सके।

– ई-वेरिफिकेशन न भूलें: ITR फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करना अनिवार्य है।

सलाह: यदि पोर्टल पर अत्यधिक लोड के कारण तकनीकी समस्या आए, तो स्क्रीनशॉट लेकर रखें और थोड़ा रुककर पुनः प्रयास करें। 31 जुलाई की मध्यरात्रि से पहले अपनी प्रक्रिया पूरी कर लें। 

 

आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय सही फॉर्म चुनना सबसे महत्वपूर्ण चरण है। गलत फॉर्म चुनने पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपके रिटर्न को 'Defective Return' (धारा  139(9)) करार दे सकता है। 

व्यक्तिगत करदाताओं (Individuals) के लिए ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 सबसे आम फॉर्म हैं। 

ITR-1 (Sahaj) और ITR-2 में मुख्य अंतर 

विषय ITR-1 (Sahaj) ITR-2

पात्रता (Eligibility) केवल भारत के निवासी (Resident Individuals) निवासी (Resident), अनिवासी (NRI) और HUF

कुल आय सीमा ₹50 लाख तक ₹50 लाख से अधिक (कोई सीमा नहीं)

मकान संपत्ति (House Property) केवल 1 मकान संपत्ति से आय 1 से अधिक मकान संपत्तियों से आय

कैपिटल गेन्स (शेयर, MF, प्रॉपर्टी) केवल Section 112A के तहत ₹1.25 लाख तक LTCG सभी प्रकार के Capital Gains (STCG/LTCG,  प्रॉपर्टी, सोना आदि)

विदेशी संपत्ति / आय (Foreign Assets) अनुमति नहीं है विदेश में संपत्ति, शेयर (RSUs/ESOPs) या आय होने पर अनिवार्य

कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 तक ₹5,000 से अधिक होने पर

डायरेक्टर / अनलिस्टेड शेयर कंपनी में डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल नहीं कर सकते कंपनी के डायरेक्टर या अनलिस्टेड शेयरधारक फाइल कर सकते हैं

आपके लिए कौन सा फॉर्म सही है?

1. आपको ITR-1 (Sahaj) चुनना चाहिए यदि:
 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख तक है। 

आपकी आय का मुख्य स्रोत वेतन (Salary), पेंशन (Pension) या ब्याज/डिविडेंड (Other Sources) है। 

आपके पास केवल 1 मकान संपत्ति (Single House Property) है। 

आपकी कृषि आय (Agricultural Income) ₹5,000 या उससे कम है। 

आपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेचे हैं, लेकिन आपका कुल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (Section 112A u/s) ₹1.25 लाख के अंदर है और कोई अन्य कैपिटल गेन  या लॉस नहीं है। 

2. आपको ITR-2 चुनना चाहिए यदि: 

आपकी कुल वार्षिक आय ₹50 लाख से अधिक है। 

आपने शेयर, म्यूचुअल फंड, जमीन, मकान या सोना बेचा है और आपको Short-Term Capital Gain (STCG) या अधिक LTCG हुआ है। 

आपके पास 2 या उससे अधिक मकान हैं जिनसे किराया या आय आती है। 

आपकी विदेशी आय है या विदेश में कोई बैंक खाता/कंपनी शेयर (जैसे MNCs से मिले US Stocks/ESOPs) हैं। 

आपकी कृषि आय ₹5,000 से अधिक है। 

आप किसी कंपनी में डायरेक्टर (Director) हैं या आपके पास अनलिस्टेड कंपनियों के शेयर हैं। 

आपका आवासीय दर्जा NRI (Non-Resident Indian) या RNOR है। 

ध्यान दें: बिजनेस या प्रोफेशन से आय (जैसे फ्रीलांसिंग, कंसल्टेंसी, ट्रेडिंग या बिज़नेस प्रॉफिट) कमाने वाले व्यक्ति ITR-1 या ITR-2 का उपयोग नहीं कर सकते। उनके लिए ITR-3  या ITR-4 लागू होता है। 

 

 

आयकर पोर्टल (Income Tax Portal) से AIS (Annual Information Statement) डाउनलोड करना और उसका Form 16 से मिलान  (Reconciliation) करना आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इससे आपके ITR में किसी प्रकार के मिसमैच की संभावना खत्म हो जाती है।
 

1. AIS कैसे डाउनलोड करें? (Step-by-Step Guide) 
 

1.इ-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करें:

आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट incometax.gov.in पर जाएं। अपने PAN (यूजर ID) और पासवर्ड से लॉगिन करें।

2.Services मेनू में जाएं:

लॉगिन के बाद मुख्य मेनू बार पर Services टैब पर क्लिक करें और ड्रॉपडाउन से Annual Information Statement (AIS) चुनें।

3.AIS पोर्टल पर रिडायरेक्ट हों:

स्क्रीन पर एक पॉप-अप मैसेज आएगा, वहां Proceed पर क्लिक करें। यह आपको एक नए Compliance Portal पर ले जाएगा।

4.असेसमेंट ईयर और फाइल फॉर्मेट चुनें:

Compliance Portal पर AIS टैब पर क्लिक करें। ऊपर से सही असेसमेंट ईयर (जैसे AY 2026-27) चुनें।

5.PDF या Excel में डाउनलोड करें:PDF खोलने के लिए पासवर्ड डालें.

आप पूरे विवरण को PDF या JSON/Excel फॉर्मेट में डाउनलोड करने के लिए Download बटन पर क्लिक करें।
 

PDF खोलने का पासवर्ड Format: 

AIS की PDF फाइल पासवर्ड प्रोटेक्टेड होती है। इसका पासवर्ड आपका PAN (स्मॉल लेटर्स में) + आपकी जन्मतिथि (DDMMYYYY) होता है। 

उदाहरण: यदि आपका PAN ABCDE1234F और DOB 15/08/1990 है, तो पासवर्ड होगा: abcde1234f15081990।

2. Form 16 और AIS का मिलान (Reconciliation) कैसे करें? 

Form 16 आपके एम्प्लॉयर (कंपनी) द्वारा दी गई सैलरी और काटे गए TDS का प्रमाण है, जबकि AIS में आपकी सैलरी के अलावा बैंक ब्याज, डिविडेंड, शेयर ट्रेडिंग आदि की भी  जानकारी होती है। 

दोनों का मिलान करते समय निम्नलिखित बिंदुओं को क्रमानुसार जांचें:

1. ग्रॉस सैलरी (Gross Salary) का मिलान 

Form 16 (Part B): अपनी कुल ग्रॉस सैलरी और एम्प्लॉयर द्वारा काटे गए कुल TDS की जांच करें। 

AIS (Part B – TDS/TCS section): सैलरी कोड (192) के सामने दिख रही रकम और काटे गए TDS का मिलान Form 16 के Part A से  करें। 

ध्यान दें: यदि आपने साल के दौरान नौकरी बदली है, तो दोनों एम्प्लॉयर्स के Form 16 की कुल रकम का जोड़ AIS की कुल सैलरी से मिलना चाहिए। 

2. TDS और Form 26AS से क्रॉस-चेक 

Form 16 में दर्ज कुल TDS कटौती, AIS के TDS/TCS टैब और आपके Form 26AS में दिख रहे टैक्स क्रेडिट से पूरी तरह मैच होनी चाहिए। 

3. अन्य आय (Other Income) की पहचान 

AIS में सैलरी के अलावा कई ऐसी आय दर्ज होती हैं जो Form 16 में नहीं होतीं: 

बैंक ब्याज (Savings/FD Interest): पासबुक और बैंक से मिले इंटरेस्ट सर्टिफिकेट से इसका मिलान करें। 

डिविडेंड (Dividend Income): शेयर या म्यूचुअल फंड से मिले डिविडेंड को क्रॉस-चेक करें। 

कैपिटल गेन्स (Shares/MF Sale): शेयर या प्रॉपर्टी बिक्री से हुई कमाई AIS के SFT Information में दिखती है।
 

यदि AIS में गलत जानकारी या अंतर दिखाई दे तो क्या करें? 
 

अगर AIS में कोई ऐसी इनकम दर्ज दिख रही है जो आपकी नहीं है या कोई आंकड़ा दो बार (Duplicate) दर्ज हो गया है, तो आप पोर्टल पर Feedback दे सकते हैं: 

1. AIS Portal पर उस गलत एंट्री/लाइन आइटम पर क्लिक करें। 

2. Optional / Feedback बटन चुनें।

3. उपयुक्त विकल्प चुनें (जैसे: Information is not correct, Income is not taxable, या Information relates to  other PAN/Year)।

4. इसे सबमिट कर दें। सबमिट करने के बाद आपकी TIS (Taxpayer Information Summary) अपने आप अपडेट हो जाएगी।

PMS के नए नियमों से जुड़े सेबी के प्रस्ताव में क्या है, इसके लागू होने के बाद क्या बदलाव आएगा?

सेबी पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशंस, 2020 में बदलाव की तैयारी में है। रेगुलेटर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ को देखते हुए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को आज की जरूरतों को ध्यान में रख बदलना चाहता है। इस बारे में सेबी ने कंसल्टेशन पेपर इश्यू किया है। इस पर 13 अगस्त तक राय मांगी गई है।

पीएमएस के एयूएम में तेज उछाल

पिछले कुछ सालों में पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ तेज रही है। 31 मई, 2026 को पीएमएस का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 42.61 लाख करोड़ रुपये हो गया। अप्रैल 2019 में यह 18.07 लाख करोड़ रुपये था। पोर्टफोलियो मैनेजर्स की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 2020 में यह संख्या 226 थी, जो अब बढ़कर 515 हो गई है। पीएमएस क्लाइंट्स की संख्या बढ़कर 2.19 लाख हो गई है।

एसेट्स के  निवेश के विकल्प बढ़ेंगे

सेबी ने कहा है कि पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ और इस प्रोडक्ट में इनवेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए इससे जुड़े नियमों पर पुनर्विचार जरूर हो गया है। सबसे बड़ा प्रस्ताव पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए निवेश के विकल्पों का विस्तार है। सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजर्स को ‘लिस्ट होने वाले’ सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत देने का प्रस्ताव दिया है।

विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत

सेबी के प्रस्ताव में कहा गया है कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स को क्लाइंट्स के एसेट का 10 फीसदी इनवेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत मिलनी चाहिए। इसके अलावा पोर्टफोलियो मैनेजर्स क्लाइंट्स के एसेट्स को विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे। विदेशी सिक्योरिटीज में विदेश में लिस्टेड शेयर्स, लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज, ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स आदि शामिल होंगे।

विदेश में निवेश FEMA के नियमों के तहत 

पीएमएस के फंड मैनेजर्स को FEMA के नियमों के तहत विदेश में निवेश की इजाजत होगी। फंड मैनेजर्स को विदेश में निवेश से पहले क्लाइंट्स की सहमति हासिल करनी होगी। सेबी का मानना है कि पीएमएस के नए नियमों के लागू होने के बाद निवेश के लिहाज से म्यूचुअल फंड्स और उसके बीच का फर्क कम हो जाएगा।

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मिनिमम निवेश 50 लाख से घटकर 25 लाख होगा

सेबी के कंसल्टेशन पेपर में म्यूचुअल फंड-ओनली पीएमएस (MF-PMS) कैटेगरी शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इससे अमीर निवेशकों की पहुंच प्रोफेशनली मैनेज्ड पोर्टफोलियो तक बढ़ेगी। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत फंड मैनेजर्स को म्यूचुअल फंड्स, ईटीएफ और स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड में निवेश की इजाजत होगी। सेबी ने इस कैटेगरी के लिए मिनिमम निवेश को 50 लाख रुपये से घटाकर 25 लाख करने का प्रस्ताव पेश किया है।

Income Tax Return: खुद रिटर्न फाइल करें या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें? जानिए क्या हैं एक्सपर्ट्स के जवाब

Income Tax Return: इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आ गई है। कई टैक्सपेयर्स इस उलझन में हैं कि खुद रिटर्न फाइल करें या टैक्स एक्सपर्ट की मदद लें। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अपने टैक्स फाइलिंग पोर्टल को काफी टैक्स फ्रेंडली बना दिया है। इस पर टैक्सपेयर्स को प्री-फिल्ड डेटा यानी पहले से भरे गए डेटा दिखते हैं। एआई पावर्ड टूल्स भी उपलब्ध हैं। सवाल है कि आपको खुद रिटर्न फाइल करना चाहिए या टैक्स एक्सपर्ट के पास जाना चाहिए?

इनकम के एक से ज्यादा स्रोत होने पर खुद फाइल करने में आ सकती है मुश्किल

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी टैक्सपेयर के इनकम के कई स्रोत हैं और कैपिटल गेंस जैसी चीजें हैं तो खुद रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है। अगर कोई सैलरीड टैक्सपेयर है और उसकी सिर्फ एक इनकम है तो वह खुद रिटर्न फाइल कर सकता है। डेरिवेटिव ट्रेडिंग, क्रिप्टोकरेंसी से प्रॉफिट, फॉरेन एसेट या फॉरेन इनकम वाले टैक्सपेयर्स को खुद रिटर्न फाइल करने में दिक्कत आ सकती है।

अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है

एसबीएचएस एंड एसोसिएट्स के पार्टनर हिमांग सिंगला ने कहा, “अब यह धारणा टूट रही है कि इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना सिर्फ एक औपचारिकता है।” उन्होंने कहा कि आज टैक्सपेयर्स कई तरह के एसेट्स में इनवेस्ट करते हैं। इनमें शेयर, म्यूचुअल फंड्स, REITs, InvITs, बिजनेस ट्रस्ट्स, फॉरेन एसेट्स और वर्चुअल डिजिटल एसेट्स शामिल हैं।

अलग-अलग एसेट के लिए इनकम टैक्स के अलग-अलग नियम हैं

इनकम टैक्स के नियमों में अलग-अलग एसेट क्लास के लिए अलग-अलग नियम हैं। सिंगला ने कहा कि अगर इनकम टैक्स के पोर्टल पर रिटर्न फाइल कर दिया जाता है और उसमें कोई गलती होती है या पूरा डिसक्लोजर नहीं होता है या गलत आईटीआर फॉर्म का इस्तेमाल किया गया होता है तो टैक्सपेयर्स को नोटिस आ सकता है। इसका मतलब है कि टैक्स चुकाने के बावजूद छोटी सी गलती बड़ी मुसीबत पैदा कर सकती है।

एआईएस और फॉर्म 26एएस को टैक्सपेयर्स को खुद चेक कर लेना जरूरी है

King Stubb & Kasiva में पार्टनर आदित्य भट्टाचार्य ने कहा कि इनकम के कई स्रोत, बिजनेस इनकम, फॉरेन एसेट्स या कॉम्प्लेक्स डिडक्शंस वाले टैक्सपेयर्स को रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्स एक्सपर्ट की मदद लेनी चाहिए। हालांकि, एक्सपर्ट भी रिटर्न फाइल करने से पहले टैक्सपेयर को आईटीआर को रिव्यू करने को कहते हैं। इसके अलावा फॉर्म 26एएस, एआईएस और TIS जैसे डॉक्युमेंट्स के डेटा को चेक करने की जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होती है।

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रिटर्न फाइल करने के लिए अंतिम तारीख का नहीं करें इंतजार 

अब रिटर्न फाइल करने के लिए एक हफ्ते से कम का समय बचा है। अगर आपने अब तक फाइल नहीं किया है तो आपको जल्द रिटर्न फाइल कर देना चाहिए। आपको अगर खुद फाइल करने में दिक्कत आ रही है तो आप टैक्स एक्सपर्ट की मदद ले सकते हैं। इससे आपको बाद में दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।

Income Tax Return: अगर ITR फाइल करने में की ये गलती तो 200% तक पेनाल्टी के साथ जेल भी हो सकती है!

ITR Update: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन आते ही कई टैक्स पेयर्स अपनी टैक्स देनदारी को कम करने के जुगाड़ में लग जाते हैं। कई बार लोग बिना उचित डॉक्युमेंट्स के या फिर फर्जी बिल और रसीदें लगाकर टैक्स छूट का दावा कर देते हैं। शॉर्ट टर्म में यह तरीका भले ही टैक्स बचाने का आसान रास्ता लगे लेकिन इनकम टैक्स एक्ट के तहत इसके बेहद गंभीर और कानूनी परिणाम हो सकते हैं।

मनी कंट्रोल पर्सनल फाइनेंस सेगमेंट में आषुष मिश्रा की रिपोर्ट में विस्तार से बताया गया है कि टैक्स चोरी या गलत वेरिफिकेशन के मामलों में करदाताओं पर भारी-भरकम जुर्माने से लेकर आपराधिक मुकदमा और जेल की सजा तक हो सकती है। आइए जानते हैं कि आईटीआर दाखिल करते समय की गई कौन सी गलतियां आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती हैं।

क्या है धारा 270A और कब लगती है भारी पेनाल्टी?

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 270A असेसिंग ऑफिसर (AO), कमिश्नर (अपील), प्रिंसिपल कमिश्नर या कमिश्नर को यह अधिकार देती है कि अगर कोई टैक्स पेयर अपनी इनकम को कम दिखाता है या गलत जानकारी देता है तो उस पर जुर्माना लगाया जा सकता है। डिफॉल्ट की गंभीरता के आधार पर यह पेनाल्टी कम दिखाई गई आय पर देय टैक्स के 50 प्रतिशत से लेकर 200 प्रतिशत तक हो सकती है।

इनकम को कम दिखाना क्या है?

1- धारा 270A के तहत नीचे दी गई परिस्थितियों में यह माना जाता है कि टैक्स पेयर ने अपनी इनकम कम दिखाई है:

  • जब आय का कोई हिस्सा बही-खातों या इनकम टैक्स रिटर्न में घोषित न किया गया हो।
  • आयकर विभाग द्वारा आकलित की गई आय फाइल किए गए ITR में दिखाई गई आय से अधिक हो।
  • कोई टैक्स रिटर्न दाखिल ही न किया गया हो, विभाग द्वारा निर्धारित की गई आय मूल छूट सीमा से अधिक हो।
  • सामान्य प्रावधानों के तहत आकलित की गई आय, धारा 115JB या 115JC के विशेष प्रावधानों के तहत गणना की गई आय से अधिक हो।

2- इनकम को गलत तरीके से पेश करना क्या है?

यह बेहद गंभीर मामला है जिसमें जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी दी जाती है। धारा 270A के तहत इसे मिसरिपोर्टिंग माना जाता है:

  • तथ्यों को गलत तरीके से पेश करना या उन्हें छिपाना।
  • बही-खातों में निवेश को दर्ज न करना।
  • बिना किसी पुख्ता सबूत या सहायक दस्तावेजों के खर्चों का दावा करना।
  • बही-खातों में झूठी या फर्जी एंट्रियां दर्ज करना।
  • खातों में प्राप्तियों को दर्ज करने में विफल रहना।
  • किसी अंतरराष्ट्रीय लेनदेन या ऐसे ही किसी माने गए लेनदेन को रिपोर्ट न करना।

फर्जी दस्तावेज दिखाए तो हो सकती है जेल

टैक्स विशेषज्ञों के मुताबिक अगर टैक्स बचाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया जाता है तो यह सिर्फ टैक्स विवाद नहीं रह जाता बल्कि इनकम टैक्स एक्ट के तहत एक आपराधिक अपराध बन जाता है। इसके लिए नीचे दी गई धाराएं लगाई जाती हैं-

धारा 276C (जानबूझकर टैक्स चोरी का प्रयास): अगर टैक्स चोरी की रकम 25 लाख रुपये से अधिक है तो दोषी पाए जाने पर 6 महीने से लेकर 7 साल तक की सश्रम जेल और जुर्माना हो सकता है। अगर यह राशि 25 लाख रुपये से कम है तो जेल की अवधि 3 महीने से 2 साल तक और साथ में जुर्माना हो सकता है।

धारा 277 (सत्यापन में झूठे बयान): यह धारा तब लागू होती है जब कोई करदाता जानबूझकर झूठे दस्तावेजों को सत्यापित करता है या जमा करता है। टैक्स चोरी के प्रयास की राशि के आधार पर इसमें 3 महीने से लेकर 7 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

धारा 278 (उकसाना या बढ़ावा देना): इसके तहत केवल टैक्स भरने वाला ही नहीं बल्कि अपराध को बढ़ावा देने या सुविधाजनक बनाने वाला कोई भी व्यक्ति (जैसे कन्सल्टेंट, एजेंट, या फर्जी डोनेशन/किराया रसीद जारी करने वाली संस्था) भी कानूनी कार्रवाई और सजा का भागीदार बनेगा।

अन्य कानूनी शिकंजे और री-असेसमेंट का खतरा

अगर जालसाजी के लिए नकली स्टांप, फर्जी सील या जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया है तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराएं भी लागू हो सकती हैं। इसके अलावा अगर बड़े पैमाने पर संगठित रूप से धारा 80G के तहत फर्जी डोनेशन रसीदें जारी करने या बड़े कैश ट्रेल का मामला सामने आता है तो प्रवर्तन एजेंसियां प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत भी कार्रवाई कर सकती हैं। अगर किसी एक वित्त वर्ष में आपके दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं तो आयकर विभाग पिछले वर्षों के मामलों को भी दोबारा खोल सकता है ताकि यह जांचा जा सके कि क्या अतीत में भी ऐसे फर्जी दावे किए गए थे।

एक्सपर्ट की राय: विभाग के पास है आपका पूरा डेटा

एचजे अग्रवाल एंड कंपनी (चार्टर्ड अकाउंटेंट्स) के पार्टनर हर्षित अग्रवाल के मुताबिक, वर्तमान में आयकर विभाग के पास एक दशक पहले की तुलना में वित्तीय जानकारी के कहीं अधिक व्यापक स्रोत हैं। वह कहते हैं कि विभाग एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) जैसे सिस्टम के जरिए आपकी सैलरी, बैंकिंग, इंश्योरेंस, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय डेटा को आसानी से क्रॉस-वेरिफाई कर सकता है। ऐसे में गलत या फर्जी डिडक्शन के दावों को पकड़ना अब बेहद आसान हो चुका है।

हर्षित अग्रवाल ने सलाह दी कि वित्तीय जुर्माने से कहीं अधिक दर्दनाक और लंबी चलने वाली आपराधिक प्रक्रियाएं होती हैं जो सालों ले सकती हैं और अत्यधिक मानसिक तनाव व कानूनी खर्च का कारण बनती हैं। ऐसे में अगक किसी करदाता को यह अहसास होता है कि उसने कोई गलत दावा कर दिया है तो विभाग द्वारा पकड़े जाने का इंतजार करने के बजाय खुद से आगे आकर रिवाइज्ड (संशोधित) या अपडेटेड रिटर्न दाखिल कर उसे सुधार लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

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EPFO Alert: PF फंड का क्लेम और e-नॉमिनेशन के लिए तुरंत अपडेट करें प्रोफाइल फोटो, नहीं तो हो सकती है परेशानी

EPFO Alert: अगर आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के सदस्य हैं, तो आपके लिए एक जरूरी खबर है। EPFO ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि वे यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (Unified Member Portal) पर अपनी प्रोफाइल फोटो अपडेट कर लें। यह फोटो ई-नॉमिनेशन (e-nomination) की प्रक्रिया पूरी करने और ऑनलाइन PF फंड के क्लेम के दौरान पहचान वेरीफाई करने में अहम भूमिका निभाती है। प्रोफाइल फोटो अपडेट नहीं होने पर आपको कुछ सर्विस का लाभ लेने में देरी या परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

यह प्रोफाइल फोटो पीएफ सदस्यों की एक विजुअल पहचान के रूप में काम करती है। इससे विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं के दौरान ईपीएफओ को खाताधारक की पहचान वेरिफाई करने में मदद मिलती है। हालांकि सभी ईपीएफओ लेन-देन के लिए फोटो अपलोड करना अनिवार्य नहीं है। लेकिन ई-नॉमिनेशन जैसी कुछ खास सेवाओं के लिए यह बेहद जरूरी है। प्रोफाइल फोटो अपडेट रहने से पीएफ दावों की प्रोसेसिंग के दौरान होने वाली देरी से बचा जा सकता है।

e-Nomination के लिए क्यों जरूरी है प्रोफाइल फोटो?

EPFO के मुताबिक, सदस्यों को अपनी प्रोफाइल में हाल ही की पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी चाहिए। यह e-Nomination पूरा करने के लिए जरूरी है। e-Nomination के जरिए सदस्य अपने परिवार के किसी सदस्य या पात्र व्यक्ति को नामांकित कर सकते हैं। ताकि सदस्य की मृत्यु होने पर EPF, Employees Pension Scheme (EPS) और Employees’ Deposit Linked Insurance (EDLI) का लाभ आसानी से नामित व्यक्ति को मिल सके।

PF क्लेम के निपटारे में मिलती है मदद

यदि सदस्य की प्रोफाइल पूरी तरह अपडेट रहती है, तो EPFO को ऑनलाइन पहचान सत्यापित करने में आसानी होती है। इससे PF से जुड़े दावों के निपटारे में कम समय लगता है और कागजी प्रक्रिया भी घट जाती है। वैध e-Nomination होने पर नामित व्यक्ति को क्लेम सेटलमेंट में भी कम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

इन जानकारियों को भी रखें अपडेट

EPFO ने सदस्यों को सलाह दी गई है कि प्रोफाइल फोटो के अलावा आधार, PAN, बैंक खाता, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी भी पोर्टल पर सही तरीके से लिंक और वैरीफाई रखें। इससे e-Nomination, ऑनलाइन PF निकासी, पेंशन संबंधी सेवाओं और अन्य डिजिटल सुविधाओं का लाभ बिना किसी बाधा के लिया जा सकता है। साथ ही अपने पहचान प्रमाण दस्तावेजों को भी अपडेट रखें। इन सभी जानकारियों को अपडेट रखने से ई-नॉमिनेशन, ऑनलाइन पीएफ निकासी (PF Withdrawal) और पेंशन से जुड़ी डिजिटल सेवाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के तेजी से मिलता है।

EPFO पोर्टल पर प्रोफाइल फोटो अपडेट करने के आसान स्टेप्स

EPFO सदस्य इन आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपनी प्रोफाइल फोटो अपडेट कर सकते हैं:-

पोर्टल पर लॉग इन करें: सबसे पहले ईपीएफओ यूनिफाइड मेंबर पोर्टल (EPFO Unified Member Portal) पर जाएं। फिर अपने यूएएन (UAN), पासवर्ड और कैप्चा कोड का उपयोग करके लॉग इन करें।

प्रोफाइल सेक्शन में जाएं: डैशबोर्ड पर जाने के बाद ‘Profile’ या ‘View’ सेक्शन पर नेविगेट करें और प्रोफाइल फोटो अपलोड/अपडेट करने के विकल्प को चुनें।

फोटो का चयन करें: एक हालिया पासपोर्ट साइज फोटो चुनें जो पोर्टल की तय फाइल साइज और फॉर्मेट की शर्तों को पूरा करती हो।

अपलोड और सेव करें: चुनी गई फोटो को अपलोड करें और बदलावों को सेव (Save) कर दें।

वेरीफाई करें: आगे की ई-नॉमिनेशन प्रक्रिया या ऑनलाइन क्लेम फाइल करने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि अपडेट की गई फोटो आपके प्रोफाइल पर सही तरीके से दिख रही है या नहीं।

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