Stocks to Watch: PC Jeweller, Wipro और Angel One समेत 15 स्टॉक्स; खास वजहों से आज फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों में रौनक के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी बढ़त के साथ शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 100.50 प्वाइंट्स यानी 0.44% की मजबूती के साथ 23,088.50 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 15 अक्टूबर को सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 1533.72 प्वाइंट्स यानी 2.11% की बढ़त के साथ 74,315.61 और निफ्टी भी 374.65 प्वाइंट्स यानी 1.66% की मजबूती के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Tech Mahindra Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टेक महिंद्रा का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 32.7% बढ़कर ₹1,585.6 करोड़ और रेवेन्यू 15.6% उछलकर ₹16,180.2 करोड़ पर पहुंच गया। डॉलर टर्म में कंपनी का रेवेन्यू इस दौरान 6.7% बढ़कर $169.3 करोड़ हो गया। इसके अलावा कंपनी के बोर्ड ने ₹15 के डिविडेंड और 1:1 के रेश्यो में यानी एक पर एक शेयर बोनस में देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

Wipro Q2 (YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर विप्रो का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 1.4% घटकर ₹3,200.6 करोड़ रह गया लेकिन कंसालिडेटेड रेवेन्यू 9.06% उछलकर ₹24,752.7 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का आईटी सर्विसेज रेवेन्यू 8.95% बढ़कर ₹24,667 करोड़ और आईटी सर्विसेज डॉलर रेवेन्यू 0.3% बढ़कर $261.15 करोड़ हो गया लेकिन आईटी सर्विसेज ईबीआईटी मार्जिन 20 बीपीएस घटकर 16.5% रह गया। दिसंबर तिमाही के लिए कंपनी का अनुमान है कि आईटी सर्विसेज रेवेन्यू $2,57.1-$262.5 करोड़ के बीच रह सकता है।

Jio Financial Services Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज ₹340.44 करोड़ के कंसालिडेटेड प्रॉफिट में रही। सालाना आधार पर कंपनी की टोटल इनकम (एक्स-डिविडेंडः 132% बढ़कर ₹1,699 करोड़ पर पहुंच गई तो प्री-प्रोविजनिंग ऑपरेटिंग प्रॉफिट (एक्स-डिविडेंड) 85% बढ़कर ₹574 करोड़ और एयूएम 154% उछलकर ₹37,320 करोड़ पर पहुंच गया।

IIFL Finance Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर आईआईएफएल फाइनेंस का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 103.7% बढ़कर ₹766.4 करोड़ और नेट इंटेरेस्ट इनकम (NII) 50.2% उछलकर ₹2,160.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Persistent Systems Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर पर्सिस्टेंट सिस्टम्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 25.4% गिरकर ₹351.5 करोड़ पर आ गया, लेकिन रेवेन्यू 30.3% उछलकर ₹4,663.9 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का ईबीआईटी 19.5% बढ़कर ₹697.7 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन ईबीआईटी मार्जिन 130 बीपीएस फिसलकर 15% पर आ गया।

Angel One Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एंजेल वन का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 58.2% बढ़कर ₹335 करोड़ और रेवेन्यू 18.7% उछलकर ₹1,427 करोड़ पर पहुंच गया।

Sri Lotus Developers and Realty Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 77.9% बढ़कर ₹82.1 करोड़ और रेवेन्यू 52.5% उछलकर ₹268.6 करोड़ पर पहुंच गया।

Solar Industries India

सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया की सब्सिडियरी सोलर एक्सप्लोकेम ने शिवशक्ति इंडस्ट्रियल एक्सप्लोसिव्स के साथ एक शेयर पर्चेज एग्रीमेंट किया है। इसके तहत सोलर एक्सप्लोकेम ₹115.02 करोड़ में शिवशक्ति में 100% हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगी।

Mankind Pharma

मैनकाइंड फार्मा बेल्जियम की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी आर्म्ड सेल थेरेप्यूटिक्स में मेजॉरिटी हिस्सेदारी 4.8 करोड़ यूरो में खरीदेगी। यह कंपनी कैंसर के इलाज के लिए अगली पीढ़ी की CAR-T (काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल) थेरेपी डेवलप कर रही है।

Agastya Energy & Infrastructure

अगस्त्य एनर्जी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर को अपनी सब्सिडियरी आईएमसी सोलर बीडीएन से एक सोलर पावर प्लांट प्रोजेक्ट के लिए ₹106.04 करोड़ का EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) और O&M (ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस) कॉन्ट्रैक्ट मिला है।

Premier Energies

प्रीमियर एनर्जीज की सब्सिडियरी प्रीमियर बैटरी टेक्नोलॉजीज ने जर्मनी के आरसीटी ग्रुप की कंपनी आरसीटी एनर्जी इंडिया के साथ एक शेयर अलॉटमेंट और शेयरहोल्डर एग्रीमेंट किया है। इसके तहत प्रीमियर एनर्जीज स्टोरेज सॉल्यूशंस नाम से एक रणनीतिक जॉइंट वेंचर बनेगा। यह जॉइंट वेंचर 12 GWh की कुल क्षमता वाला BESS (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाएगी। पहला चरण 6 GWh का होगा, जो वित्त वर्ष 2027-28 में तेलंगाना के सीतारामपुर में सेटअप हो सकता है।

Eternal

बोफा (BofA) सिक्योरिटीज यूरोप ने गोल्डमैन सैक्स बैंक यूरोप SE ODI से प्रति शेयर ₹316 के भाव पर ₹168.67 करोड़ में जोमैटो की एटर्नल के 53.37 लाख शेयर खरीदे।

Vardhman Polytex

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक पाइन ओक ग्लोबल फंड ने प्रति शेयर ₹5.55 के भाव पर ₹1.38 करोड़ में वर्धमान पॉलीटेक्स के 25 लाख शेयर और खरीदे हैं, जो कंपनी में 0.49% हिस्सेदारी के बराबर है। ये सभी शेयर अनुपमा कोठारी ने बेचे हैं। सितंबर 2026 के शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार वर्धमान पॉलीटेक्स में पाइन ओक ग्लोबल फंड की 5.34% हिस्सेदारी थी, जबकि हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल इन्वेस्टर अनुपमा कोठारी की 9.83% हिस्सेदारी थी।

LCC Projects

नियोमाइल कॉर्पोरेट एडवाइजरी और इसके फाउंडर-डायरेक्टर कीर्तन मानेकलाल रूपारेलिया ने मिलकर ₹55.11 करोड़ में एलसीसी प्रोजेक्ट्स में 1.4% हिस्सेदारी हासिल की है।

PC Jeweller

निवेशक आदित्य कुमार हलवासिया ने प्रति शेयर ₹14.43 के भाव पर ₹73.59 करोड़ में पीसी ज्वेलर के 5.1 करोड़ इक्विटी शेयर (0.52% हिस्सेदारी) खरीदी है।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: पंजाब नेशनल बैंक, एलटीएम, बजाज हाउसिंग फाइनेंस, क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स, डीएलएफ, फेडरल बैंक, जिंदल सॉ, ओबेरॉय रियल्टी, शॉपर्स स्टॉप, तेजस नेटवर्क्स, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक, अर्बन कंपनी

कल 17 अक्टूबर को इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, आईडीबीआई बैंक, येस बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब एंड सिंध बैंक, बजाज हेल्थकेयर, इंडिया सीमेंट्स, ले ट्रैवेन्यूज टेक्नोलॉजी (इक्सिगो), क्रॉस, रोजरी बायोटेक

एक्स-डिविडेंड: एचसीएल टेक्नोलॉजीज, केनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट कंपनी, हिंदुस्तान कंपोजिट्स

एक्स-स्प्लिट: बंसल वायर इंडस्ट्रीज

एक्स-शेयर कंसालिडेशन: नोबल पॉलिमर्स

F&O बैन: अंबुजा सीमेंट्स, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, सेल (SAIL)

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लाल मार्केट में इक्विटी म्यूचु्अल फंडों पर निवेशकों का दांव, SIP में आया रिकॉर्ड निवेश, Gold ETF की बढ़ी चमक

Mutual Fund Data: शेयर मार्केट में मचे तूफान के बीच पिछले महीने सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा। हालांकि डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी से ओवरऑल म्यूचुअल फंड में निवेश निगेटिव रहा। म्यूचुअल फंड बॉडी AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के लेटेस्ट आंकड़ों से यह बात सामने आई है। पिछले महीने सितंबर में इक्विटी फंड्स में निवेश करीब ₹9000 करोड़ बढ़ गया तो डेट फंड्स से निकासी मासिक आधार पर तीन गुना से अधिक बढ़ गई। वहीं सितंबर में SIP में कॉन्ट्रिब्यूशन रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया लेकिन खातों की संख्या में कमी आई।

Equity Funds में सबसे अधिक क्रेज दिखा SmallCap Funds का

अगस्त महीने में इक्विटी फंडों में निवेश लगभग 19% बढ़ा था और फिर सितंबर महीने में नेट इनफ्लो में और बढ़ोतरी हुई। मासिक आधार पर ₹8,977.93 करोड़ की बढ़ोतरी मासिक निवेश में बड़ी तेजी है। AMFI के आंकड़ों के हिसाब से पिछले महीने इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹38,306.55 करोड़ का निवेश आया जोकि अगस्त महीने में ₹29,328.62 करोड़ के निवेश की तुलना में करीब 31% अधिक रहा।

कैटेगरीवाइज बात करें तो सबसे अधिक ₹9,038.57 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप फंडों में आया। इसके बाद मिड-कैप फंडों में ₹7,834.84 करोड़ का निवेश हुआ। इन दोनों में कुल ₹16,873.41 करोड़ का निवेश आया, जो सभी इक्विटी फंडों में हुए कुल निवेश का लगभग 44% है।

सितंबर महीने में फ्लेक्सी-कैप फंडों में भी निवेश बढ़कर ₹6,701.80 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹5,059.42 करोड़ था।

लॉर्ज-कैप फंड के भी निवेशक सितंबर में लौटे और लगातार दो महीने तक शुद्ध निकासी के बाद सितंबर में निकासी से अधिक निवेश किया। लॉर्ज कैप फंडों में पिछले महीने ₹859.47 करोड़ का शुद्ध निवेश आया।

इक्विटी इनफ्लो में उछाल के बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का AUM सितंबर में घटकर ₹37.54 लाख करोड़ रह गई। अगस्त में यह ₹39.21 लाख करोड़ थी यानी इसमें लगभग 4.3% की गिरावट आई।

डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी

सितंबर में डेट म्यूचुअल फंडों में सबसे बड़ा बदलाव दिखा। इन फंडों से शुद्ध निकासी बढ़कर ₹1.83 लाख करोड़ हो गई, जबकि अगस्त में यह ₹8,127 करोड़ थी।

सबसे अधिक निकासी लिक्विड फंडों से हुई। सितंबर में इनसे ₹95,743.20 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹19,934.29 करोड़ का निवेश आया था। सितंबर में मनी मार्केट फंडों से भी ₹50,846.21 करोड़ की निकासी हुई, जबकि अगस्त में इन फंडों में ₹11,734.71 करोड़ का निवेश आया था। इन दोनों फंडों से कुल मिलाकर से लगभग ₹1.47 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी हुई और इन्होंने डेट फंडों पर ओवरऑल दबाव डाला।

डेट फंड्स का एयूएम मासिक आधार पर अगस्त में ₹19.33 लाख करोड़ से 8.8% फिसलकर सितंबर में ₹17.64 लाख करोड़ पर आ गया।

हाइब्रिड फंड्स हुआ निगेटिव, ईटीएफ इनफ्लो में उछाल

पिछले महीने सितंबर में हाइब्रिड म्यूचुअल फंडों में भी काफी बदलाव देखने को मिला। पिछले महीने इससे ₹456.68 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई, जबकि अगस्त में इसमें ₹10,045.34 करोड़ का शुद्ध निवेश आया था। इसकी बड़ी वजह ऑर्बिट्रेज फंड्स रहे, जिनसे सितंबर महीने में ₹3,956.38 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹3,789.02 करोड़ का निवेश आया था।

पिछले महीने बैलेंस्ड-एडवांटेज फंडों से भी ₹912.43 करोड़ की निकासी हुई। वहीं मल्टी-एसेट एलोकेशन फंडों में निवेश का सिलसिला जारी रहा और इनमें ₹3,666.98 करोड़ आए।

पिछले महीने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में ₹15,501.40 करोड़ का निवेश आया, जो अगस्त के ₹10,160.87 करोड़ से लगभग 53% अधिक है।

सितंबर महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश लगभग 71% बढ़कर ₹4,450.61 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹2,596.70 करोड़ था तो सिल्वर ETF में भी इस दौरान निवेश भी ₹9,959.96 करोड़ से बढ़कर ₹1,974.32 करोड़ हो गया।

इंडेक्स फंडों की बात करें तो अगस्त महीने में इसमें ₹787.49 करोड़ का निवेश आया था, जबति पिछले महीने इससे ₹3,614.03 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई थी।

विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले ओवरसीज फंडों से निकासी जारी रही। सितंबर में इनसे ₹159.18 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में निकासी ₹72.19 करोड़ थी।

सितंबर महीने में लाइफ साइकिल फंडों में ₹143.75 करोड़ और सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹373.90 करोड़ का निवेश आया।

SIP में निवेश पहुंचा रिकॉर्ड हाई पर

सितंबर में मासिक SIP कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़कर ₹32,490 करोड़ के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। अगस्त में यह ₹32,297 करोड़ था। इस बढ़ोतरी के साथ सितंबर 2026 में एसआईपी का एयूएम ₹17.86 लाख करोड़ हो गया। हालांकि एक खास बात ये है कि सितंबर में लगभग 63 लाख नए एसआईपी रजिस्टर हुए, जबकि 73 लाख एसआईपी या तो मेच्योर हो गए या उन्हें बंद कर दिया गया। सितंबर की शुरुआत से लेकर आखिरी तक एसआईपी अकाउंट्स की संख्या 10.75 करोड़ से 10.06 करोड़ पर आ गई।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

तेजी से बदल रही है इनवेस्टमेंट की दुनिया, 2034 तक 436 अरब डॉलर का होगा वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट

इंडिया का वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट 2034 तक बढ़कर दोगुना तक हो जाने की उम्मीद है। 2025 में यह मार्केट करीब 171 अरब डॉलर का था। इसका मतलब कि इसका आकार 2034 तक 436 अरब डॉलर तक का हो जाएगा। इसकी वजह लोगों की बढ़ती इनकम, फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में सेविंग्स का शिफ्ट होना और कैपिटल मार्केट में बढ़ता पार्टिसिपेशन है। एमके वेल्थ मैनेजमेंट ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है।

वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट 10% सीएजीआर से बढ़ेगा

इस रिपोर्ट के मुताबिक, वेल्थ-मैनेजमेंट मार्केट की ग्रोथ अगले 8 साल में 10.6 फीसदी सीएजीआर रहेगी। इस दौरान इनवेस्टर्स की दिलचस्पी इंडिविजुअल इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स से हटकर एसेट ऐलोकेशन, डायवर्सिफिकेशन, टैक्सेशन और सक्सेशन प्लानिंग में बढ़ेगी। पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड्स जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेश में परिवारों की दिलचस्पी बढ़ी है।

म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री का एयूएम 80 लाख करोड़ पहुंचा

कैपिटल मार्केट्स में लोगों का निवेश बढ़ने में SIP जैसे प्रोडक्ट्स का भी बड़ा हाथ है। बाजार में उपलब्ध कुल फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में म्यूचुअल फंड्स की ज्यादा हिस्सेदारी है। एमके वेल्थ के मुताबिक, FY26 में म्यूचुअल फंड्स का तिमाही एवरेज एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 77.98 लाख करोड़ रुपये रहा। वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) के अलावा अब दूसरे लोग भी निवेश कर रहे हैं।

वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में HNI की हिस्सेदारी 63 फीसदी

एक अनुमान के मुताबिक, अभी वेल्थ मैनेजमेंट मार्केट में HNI की हिस्सेदारी 62.8 फीसदी है। एमके वेल्थ का कहना है कि अब अमीर लोगों, फैमिली ऑफिस और इंस्टीट्यूशनल से भी डिमांड आ रही है। इनवेस्टर बेस बढ़ने से बाजार में ज्यादा कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स के आने की उम्मीद है। इनवेस्टर्स पीएमएस, AIF सहित कई प्रोडक्ट्स पर विचार कर रहे हैं। वे डायवर्सिफिकेशन में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

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डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेश में इनवेस्ट करना चाहते हैं लोग

एमके वेल्थ को उम्मीद है कि इनवेस्टर्स डायवर्सिफिकेशन के लिए विदेश में इनवेस्ट करना चाहते हैं। आने वाले समय में यह ट्रेंड बढ़ेगा और वेल्थ मैनेजमेंट का जरूरी हिस्सा बन जाएगा। इसकी वजह यह है कि ग्लोबल मार्केट्स तक इंडियन इनवेस्टर्स की पहुंच बढ़ रही है। खासकर एचएनआई और फैमिली ऑफिसेज विदेश में निवेश के मौके तलाश रहे हैं। गिफ्ट आईएफएससी विदेश में निवेश के बड़े प्लेटफॉर्म के रूप में उभर रहा है।

देश में टर्म प्लान के क्षेत्र में हैं काफी अवसर: अमीश बैंकर

देश में 87 प्रतिशत पात्र लोगों के पास अभी टर्म प्लान नहीं है जिससे इस क्षेत्र में बड़ा अवसर है।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के मुख्य वितरण अधिकारी अमीश बैंकर ने गुरुवार को यहां एक प्रेस वार्ता से इतर समाचार एजेंसी ‘यूनीवार्ता’ को बताया कि एक अध्ययन के मुताबिक देश में टर्म प्लान के मामले में 16.5 लाख करोड़ डॉलर का गैप है। इस क्षेत्र में काफी बड़ा बाजार उपलब्ध है।

उन्होंने कहा कि देश में पात्र लोगों में से सिर्फ 13 प्रतिशत लोग टर्म प्लान लेते हैं। इसका मतलब है कि 87 प्रतिशत अब भी इसके दायरे से बाहर हैं। कंपनी अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए जागरूक करने के लिए स्थानीय भाषाओं में अभियान चला रही है।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए श्री बैंकर ने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान दिल्ली में 100 प्रतिशत दावा निपटान अनुपात दर्ज किया। इस पहल से परिवारों को मुश्किल घड़ी में समय पर आर्थिक मदद मिली है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यहां सालाना आधार पर कारोबार 53.89 प्रतिशत बढ़ा है। केंद्र शासित प्रदेश में 31 मार्च 2026 तक कंपनी की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति (एयूएम) 18,427 करोड़ रुपये थी।

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उन्होंने बताया कि कंपनी के लिए दिल्ली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाजार है। इस क्षेत्र में उल्लेखनीय तेजी नजर आ रही है। कंपनी की रणनीति ग्राहकों को भविष्य की योजना बनाने और उसे नियंत्रित करने में सहायक होने पर केंद्रित है।

मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कंपनी का दावा निपटान अनुपात 99.3 प्रतिशत रहा, और पूरी कंपनी के स्तर पर बगैर जांच वाले व्यक्तिगत दावे के लिए औसत निपटान समय सिर्फ एक दिन था।

एक प्रश्न के उत्तर में श्री बैंकर ने कहा कि आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस का कारोबार मुख्यतः मेट्रो शहरों में है। अभी मझौले और छोटे शहरों में काफी अवसर हैं।

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आप डायरेक्ट प्लान में निवेश करते हैं या रेगुलर प्लान में? जानिए किसमें है आपको फायदा

आप म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट स्कीम में इनवेस्ट करते हैं या रेगुलर स्कीम में? शुरुआत में निवेश के दोनों तरीके एक जैसे लगते हैं, लेकिन लंबी अवधि में दोनों के रिटर्न में फर्क आता है। डायरेक्ट स्कीम का रिटर्न रेगुलर स्कीम के रिटर्न से थोड़ा ज्यादा होता है। यही वजह है कि डायरेक्ट स्कीम में निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। क्रिसिल इंटेलिजेंस ने एंफी के डेटा का विश्लेषण किया है। इससे पता चलता है कि डायरेक्ट प्लान में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है।

डायरेक्ट प्लान में बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी

क्रिसिल इंटेलिजेंस ने पाया है कि रिटेल इनवेस्टर्स के म्यूचुअल फंड्स एसेट्स में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह मार्च 2021 में 21.4 फीसदी थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 36.7 फीसदी हो गई। इसका मतलब है कि पांच साल पहले रिटेल म्यूचुअल फंड में होने वाले 5 रुपये के निवेश में से एक से थोड़े ज्यादा का निवेश डायरेक्ट प्लान के जरिए होता था। आज हर तीन में से एक निवेश डायरेक्ट प्लान के जरिए हो रहा है।

हर स्कीम में होता है डायरेक्ट और रेगुलर प्लान का विकल्प

म्यूचुअल फंड की करीब हर स्कीम में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान होते हैं। दोनों प्लान एक ही स्कीम में निवेश करते हैं। सिर्फ निवेश का तरीके में फर्क होता है। निवेशक जब बगैर किसी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर खुद स्कीम में निवेश करता है तो वह डायरेक्ट प्लान का इस्तेमाल करता है। अगर वह किसी डिस्ट्रिब्यूटर के जरिए निवेश करता है तो वह रेगुलर प्लान के जरिए निवेश करता है।

डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो अपेक्षाकृत कम होता है

दोनों प्लान के बीच सबसे बड़ा फर्क कॉस्ट का है। डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो कम होता है। इसकी वजह यह है कि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर कमीशन शामिल नहीं होता है। रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर का कमीशन शामिल होता है। इस वजह से एक ही स्कीम के डायरेक्ट और रेगुलर प्लान की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में अंतर दिखता है।

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कुल एसेट्स में बढ़ रही डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी 

मार्च 2026 में डायरेक्ट-प्लान का एयूएम 33.28 लाख करोड़ रुपये था। यह इंडस्ट्री के कुल एसेट का 45.1 फीसदी है। यह मार्च 2021 में 43.4 फीसदी था। उधर, कुल एसेट्स में रेगुलर प्लान की हिस्सेदारी घटी है। यह इस दौरान 56.6 फीसदी से घटकर 54.9 फीसदी पर आ गई है। हालांकि, अभी भी यह निवेश का ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है। इस तरीके से होने वाले निवेश का एयूएम 40.46 लाख करोड़ रुपये है।

SBI म्यूचुअल फंड का बड़ा धमाका: कम जोखिम में ज्यादा रिटर्न के लिए नई SIF स्ट्रेटेजी लॉन्च, जानिए कितना करना होगा मिनिमम निवेश

SBI Mutual Fund New SIF Launch: देश के सबसे बड़े एसेट मैनेजर एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अपने स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) फ्रेमवर्क के तहत दूसरी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी पेश की है। फंड हाउस ने ‘मैग्नम इक्विटी एक्स-टॉप 100 लॉन्ग शॉर्ट फंड’ लॉन्च किया है।

यह फंड मुख्य रूप से मार्केट कैप के आधार पर भारत की टॉप 100 कंपनियों के बाहर की कंपनियों में निवेश करेगा। साथ ही उतार-चढ़ाव और जोखिम को मैनेज करने के लिए डेरिवेटिव्स के जरिए सीमित शॉर्ट पोजिशन्स का इस्तेमाल करेगा।

NFO की प्रमुख तारीखें और बेंचमार्क

अगर आप एसबीआई म्यूचुअल फंड की इस नई स्ट्रेटेजी में निवेश करने का विचार कर रहे हैं, तो ये मुख्य तारीखें याद रखें:

  • NFO ओपनिंग डेट: 7 अगस्त 2026
  • NFO क्लोजिंग डेट: 20 अगस्त 2026
  • फंड का प्रकार: ओपन-एंडेड स्ट्रेटेजी
  • बेंचमार्क: BSE 500 TRI (टोटल रिटर्न इंडेक्स)

पैसा कहां और कैसे निवेश करेगा यह फंड?

फंड हाउस के अनुसार, यह फंड अपनी कुल एसेट्स का बंटवारा इस तरह करेगा:

इक्विटी एलोकेशन: कुल एसेट्स का 65% से 100% हिस्सा टॉप-100 से बाहर की कंपनियों के शेयरों और इक्विटी-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जाएगा।

टॉप-100 कंपनियों में एक्सपोजर: जरूरत पड़ने पर 35% तक का हिस्सा टॉप-100 कंपनियों में लगाया जा सकता है।

डेट और अन्य विकल्प: 35% तक डेट और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में, 20% तक InvITs में और 35% तक गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ (ETFs) सहित अन्य म्यूचुअल फंड यूनिट्स में निवेश किया जा सकता है।

विदेशी बाजारों में निवेश: रेगुलेटरी नियमों के तहत नेट एसेट्स का 35% तक ओवरसीज इक्विटीज, विदेशी ईटीएफ और डेट सिक्योरिटीज में अलॉट किया जा सकता है।

कम से कम कितना करना होगा निवेश?

सेबी के स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) नियमों के तहत इसमें निवेश की सीमाएं इस प्रकार हैं:

नए निवेशकों के लिए: मिनिमम इन्वेस्टमेंट ₹10 लाख रखा गया है।

मौजूदा मैग्नम SIF निवेशकों के लिए: अगर पैन लेवल पर उनकी कुल मैग्नम SIF होल्डिंग कम से कम ₹10 लाख है, तो वे प्रति एप्लिकेशन ₹1 लाख से भी एक्स्ट्रा निवेश कर सकते हैं।

फंड मैनेजर, एग्जिट लोड और टैक्सेशन नियम

इस स्ट्रेटेजी का प्रबंधन गौरव मेहता करेंगे, जो एसबीआई के पहले SIF ऑफरिंग ‘मैग्नम हाइब्रिड लॉन्ग शॉर्ट फंड’ को भी मैनेज करते हैं। अलॉटमेंट के 3 महीने के भीतर यूनिट्स रिडीम या स्विच करने पर 1% का एग्जिट लोड लगेगा। 3 महीने पूरे होने के बाद निकासी पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

चालू टैक्स नियमों के अनुसार, 12 महीने से अधिक समय तक होल्ड की गई यूनिट्स पर मिलने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) पर 12.5% टैक्स (प्लस सरचार्ज और सेस) लगेगा। एक वित्त वर्ष में ₹1.25 लाख तक का कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स-फ्री रहेगा।

एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के एमडी और सीईओ देबाशीष मिश्रा के अनुसार, ‘यह नया फंड शोध-आधारित निवेश और भारत के बढ़ते बाजार में निवेशकों के लिए विविधता लाने के उद्देश्य से पेश किया गया है।’ बता दें कि अप्रैल-जून 2026 तिमाही के दौरान एसबीआई म्यूचुअल फंड का औसतन एयूएम (AAUM) ₹12.57 लाख करोड़ से अधिक रहा है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Muthoot Finance Q1 Results: प्रॉफिट 43 फीसदी बढ़ा, गोल्ड लोन एयूएम 2 लाख करोड़ रुपये के करीब

Muthoot Finance Q1 Results: मुथूट फाइनेंस ने जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया। इस दौरान कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 43 फीसदी बढ़ा है। इसमें गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में अच्छी ग्रोथ का हाथ रहा। कंपनी का कंसॉलिडेटेड टैक्स बाद प्रॉफिट (पीएटी) जून तिमाही में 2,825 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 1,974 करोड़ रुपये था।

कंसॉलिडेटेड लोन एसेट अंडर मैनेजमेंट 2 लाख करोड़ के करीब

Muthoot Finance का कंसॉलिडेटेड लोन एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जून तिमाही में साल दर साल आधार पर 43 फीसदी बढ़कर 1,91,531 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 1,33,938 करोड़ रुपये था। कंपनी का कंसॉलिडेटेड PAT तिमाही दर तिमाही आधार पर 17 फीसदी गिरा। मार्च तिमाही में 3,397 करोड़ रुपये था। तिमाही दर तिमाही आधार पर एयूएम फीसदी बढ़ा।

कोर गोल्ड लोन  बना बिजनेस का ग्रोथ इंजन

कंपनी को कोर गोल्ड लोन बिजनेस से ग्रोथ को सबसे ज्यादा सपोर्ट मिला। कंसॉलिडेटेजड गोल्ड लोन एयूएम साल दर साल आधार पर 48 फीसदी बढ़कर 1,75,527 करोड़ रुपये हो गया। एक साल में यह 56,767 करोड़ रुपये का इजाफा है। कंपनी ने 1 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। कंपनी के शेयरों पर नतीजों का असर 3 अगस्त को शेयर बाजार खुलने पर दिखेगा।

स्टैंडएलोन टैक्स बाद मुनाफा 2550 करोड़ रुपये

जून तिमाही में स्टैंडएलोन आधार पर कंपनी का टैक्स बाद मुनाफा (PAT) साल दर साल आधार पर 25 फीसदी बढ़कर 2,550 करोड़ रुपये रहा। स्टैंडएलोन लोन एयूएम 43 फीसदी बढ़कर 1,72,053 करोड़ रुपये रहा। स्टैंडएलोन गोल्ड लोन एयूएम साल तर साल आधार पर 44 फीसदी बढ़कर 1,63स298 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने बताया कि जून के अंत में ब्रांच नेटवर्क बढ़कर 7,654 हो गया। एक साल पहले यह 7,413 था।

FY27 की शुरुआत कंपनी के लिए अच्छी रही

मुथूट फाइनेंस के चेयरमैन जॉर्ज जेकब मुथूट ने कहा कि कंपनी के लिए FY27 की शुरुआत स्ट्रॉन्ग रही। कंसॉलिडेटेड एयूएम अब तक के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गया। इसमें कोर गोल्ड लोन बिजनेस के लगातार बेहतर प्रदर्शन का हाथ रहा। उन्होंने कहा कि जून तिमाही के प्रदर्शन से स्ट्रॉन्ग कस्टमर डिमांड का संकेत मिलता है।

31 जुलाई को शेयरों में अच्छी तेजी

मुथूट फाइनेंस का शेयर 31 जुलाई को 3.98 फीसदी चढ़कर 3,128 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में कंपनी का शेयर 20 फीसदी से ज्यादा चढ़ा है। 31 जुलाई को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक निफ्टी और सेंसेक्स भी हरे निशान में बंद हुए। इस हफ्ते बीते चार महीनों में शेयर बाजार में सबसे ज्यादा तेजी आई।

PMS के नए नियमों से जुड़े सेबी के प्रस्ताव में क्या है, इसके लागू होने के बाद क्या बदलाव आएगा?

सेबी पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशंस, 2020 में बदलाव की तैयारी में है। रेगुलेटर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ को देखते हुए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को आज की जरूरतों को ध्यान में रख बदलना चाहता है। इस बारे में सेबी ने कंसल्टेशन पेपर इश्यू किया है। इस पर 13 अगस्त तक राय मांगी गई है।

पीएमएस के एयूएम में तेज उछाल

पिछले कुछ सालों में पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ तेज रही है। 31 मई, 2026 को पीएमएस का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 42.61 लाख करोड़ रुपये हो गया। अप्रैल 2019 में यह 18.07 लाख करोड़ रुपये था। पोर्टफोलियो मैनेजर्स की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 2020 में यह संख्या 226 थी, जो अब बढ़कर 515 हो गई है। पीएमएस क्लाइंट्स की संख्या बढ़कर 2.19 लाख हो गई है।

एसेट्स के  निवेश के विकल्प बढ़ेंगे

सेबी ने कहा है कि पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ और इस प्रोडक्ट में इनवेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए इससे जुड़े नियमों पर पुनर्विचार जरूर हो गया है। सबसे बड़ा प्रस्ताव पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए निवेश के विकल्पों का विस्तार है। सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजर्स को ‘लिस्ट होने वाले’ सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत देने का प्रस्ताव दिया है।

विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत

सेबी के प्रस्ताव में कहा गया है कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स को क्लाइंट्स के एसेट का 10 फीसदी इनवेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत मिलनी चाहिए। इसके अलावा पोर्टफोलियो मैनेजर्स क्लाइंट्स के एसेट्स को विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे। विदेशी सिक्योरिटीज में विदेश में लिस्टेड शेयर्स, लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज, ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स आदि शामिल होंगे।

विदेश में निवेश FEMA के नियमों के तहत 

पीएमएस के फंड मैनेजर्स को FEMA के नियमों के तहत विदेश में निवेश की इजाजत होगी। फंड मैनेजर्स को विदेश में निवेश से पहले क्लाइंट्स की सहमति हासिल करनी होगी। सेबी का मानना है कि पीएमएस के नए नियमों के लागू होने के बाद निवेश के लिहाज से म्यूचुअल फंड्स और उसके बीच का फर्क कम हो जाएगा।

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मिनिमम निवेश 50 लाख से घटकर 25 लाख होगा

सेबी के कंसल्टेशन पेपर में म्यूचुअल फंड-ओनली पीएमएस (MF-PMS) कैटेगरी शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इससे अमीर निवेशकों की पहुंच प्रोफेशनली मैनेज्ड पोर्टफोलियो तक बढ़ेगी। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत फंड मैनेजर्स को म्यूचुअल फंड्स, ईटीएफ और स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड में निवेश की इजाजत होगी। सेबी ने इस कैटेगरी के लिए मिनिमम निवेश को 50 लाख रुपये से घटाकर 25 लाख करने का प्रस्ताव पेश किया है।

SBI Funds Management share: शेयर 7% प्रीमियम पर लिस्ट, खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

देश की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी एसबीआई फंड मैनेजमेंट के शेयर 21 जुलाई को 6.8 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए। हालांकि, बाद में शेयरों में कुछ तेजी दिखी। 11:10 बजे एनएसई पर शेयर का प्राइस 8.47 फीसदी चढ़कर 622 रुपये पर चल रहा था। कंपनी ने आईपीओ में निवेशकों को शेयर प्रति शेयर 574 रुपये के प्राइस पर शेयर एलॉट किया था। शेयर की लिस्टिंग 613 रुपये पर हुई। बीएसई पर शेयर 610 रुपये पर लिस्ट हुआ।

शेयर की लिस्टिंग अनुमान से कम प्राइस पर

SBI Funds Management के शेयर अनुमान से कम प्राइस पर लिस्ट हुए। ग्रे मार्केट से शेयर के 18-19 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट होने के संकेत मिल रहे थे। लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1,25,804 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का आईपीओ 14-16 जुलाई के बीच खुला था। इस इश्यू को 41 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब्शन मिला था।

निवेशकों के सामने अब ये हैं विकल्प

सवाल है कि जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, क्या उन्हें इसे होल्ड करना चाहिए या बेचना चाहिए? दूसरा यह कि क्या जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट नहीं हुए, उन्हें शेयर बाजार से इसे खरीदना चाहिए? स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट में वेल्थ की हेड शिवानी नयाती ने कहा, “एसबीआई फंड मैनेजमेंट के शेयरों की शुरुआत शेयर बाजार में अच्छी रही। शेयर करीब 6.8 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए।”

लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से शेयर अट्रैक्टिव

उन्होंने कहा कि भले ही शेयर ज्यादा प्रीमियम पर लिस्ट नहीं हुए, लेकिन लंबी अवधि में शेयर के लिए अच्छी संभावना दिखती है। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट देश की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी है। इसे SBI जैसे स्ट्रॉन्ग ब्रांड का सपोर्ट है। एसबीआई का डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क काफी बड़ा है। एसेट मैनेजमेंट कंपनी एसेट लाइट बिजनेस मॉडल का इस्तेमाल करती है। खास बात यह कि दूसरी एएमसी के मुकाबले इसकी वैल्यूएशन कम है।

शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स 585-590 पर लगाएं स्टॉपलॉस

नयाती ने कहा कि जिन निवेशकों को शेयर आईपीओ में एलॉट हुए हैं, उन्हें इसे होल्ड करना चाहिए। उनका नजरिया लंबी अवधि का होना चाहिए। जिन निवेशकों के शेयर आईपीओ में एलॉट नहीं हुए, वे कीमत गिरने पर इसे खरीद सकते हैं। उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को शेयर में करीब 585-590 रुपये पर स्टॉपलॉस मेंटेन करना चाहिए। उनका मानना है कि जिन निवेशकों का भरोसा देश की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की अच्छी ग्रोथ पर है, वे इस शेयर पर दांव लगा सकते हैं।

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एएमसी का 13 लाख करोड़ रुपये का एयूएम

ब्रोकरेज फर्म Equirus Securities ने इस शेयर को कवर करना शुरू किया है। उसने लंबी अवधि के लिहाज से शेयर को खरीदने की सलाह दी है। एसबीआई फंड्स देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई और अमुंडी का ज्वाइंट वेंचर है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट 13 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। कंपनी का फोकस अपने इंटरनेशनल एयूएम को बढ़ाकर अगले तीन साल में दोगुना यानी 5 अरब डॉलर करने का है।

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