मिड कैप आईटी के अंदर में ज्यादा पॉजिटिव संकेत, ऑटो और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में भी है दम

भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने शुरुआती बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया है। लेकिन निफ्टी 24100 के आसपास अब भी बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है। फिलहाल सेंसेक्स 105.25 अंक या 0.14 प्रतिशत बढ़कर 77,038.84 पर और निफ्टी 3.15 अंक या 0.01 प्रतिशत गिरकर 24,087.70 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी पर बढ़त बनाने वाले प्रमुख शेयरों में TCS, HCL Tech, Infosys, Tech Mahindra और Wipro शामिल हैं।

टेक्नो फंडा नजरिए के साथ बाजार पर बात करते हुए JM Financial Services के PMS के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चतुरमोहता ने कहा कि आईटी शेयरों में पिछले कुछ दिनों में एक अच्छी रैली देखने को नजर आई है। खासतौर पर ब्लूमबर्ग एआई वैल्यू चेन इंडेक्स में, जो सारे एआई डेटा सेंटर स्टोरी का कॉम्बीनेशन है, में करेक्शन के दौरान हमें आईटी में रिकवरी देखने को मिली है। एआई से हुए स्विच ट्रेड के चलते हमें आईटी में स्ट्रेंथ देखने को नजर आ रही है। डॉलर के मुकाबले रुपए में भी स्टेबिलिटी देखने को नजर आ रही है। ऐसे में लगता है कि मिड टियर आईटी कंपनीज में और ग्रोथ आएगी। यहां पर हमारी टॉप पिक कोफर्ज और परसिस्टेंस हैं। इनमें आगे हमें 23 से 24% की ग्रोथ देखने को नजर आ सकती है।

खासतौर पर कोफोर्स- एनकोरा की डील के बाद हमें एनकोरा में अच्छा टर्म एराउंड देखने को मिल सकता है। इसका बेनिफिट कोफोर्ट के मार्जिन के साथ ही साथ इसके ओवरऑल ग्रोथ में देखने को नजर आएगी। इस समय मिड कैप आईटी के अंदर में ज्यादा पॉजिटिव संकेत मिल रहे हैं। लार्ज कैप आईटी में इस समय भी अंडरवेट पोजीशन है। हालांकि बड़ी आईटी कंपनियों में यहां से किसी बड़े डाउन साइड का डर नहीं है। लेकिन इनमें रिकवरी आने में शायद थोड़ा समय लगे। इनमें कंसोलिडेशन फेज देखने को नजर आ सकता है।

ऑटो और ऑटो एंजिलरी स्पेस पर बात करते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि एथर एनर्जी और TVS Motors ये दो ऐसे स्टॉक है जो उनको बहुत ज्यादा पसंद है। इन दोनों कंपनियों ने ईवी के अंदर में अपना अच्छा पेनिट्रेशन किया है। TVS Motors ने बहुत ही अच्छी बढ़त बनाए रखी है और अपना मार्केट शेयर लगातार बढ़ाया है। इसकी वजह से लगता है ये कंपनी आने वाले समय में भी बहुत अच्छी ग्रोथ दिखाएगी। इनका ईवी सेगमेंट भी काफी अच्छा ग्रोथ कर रहा है। एथर इंडस्ट्रीज में अभी एक टर्न अराउंड दिखना शुरू हो गया है। डिमांड साइड पर काफी बड़ी ग्रोथ देखने को नजर आई है। कंपनी अपनी क्षमता में बहुत बड़ा विस्तार कर रही है। कंपनी की करंट कैपेसिटी पर इसकी आर्डर बुक पोजीशन काफी अच्छी बनी हुई है। कंपनी बड़ी तेजी से टर्न अराउंड हो रही है। कंपनी जल्द ही मुनाफे में आ सकती है। इसके चलते आगे एथर एनर्जी में बढ़िया रीटिंग देखने को नजर आ सकती है।

आशीष चतुरमोहता ने कहा कि ऑटो एंसिलरी कंपनियों में वे उन कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं जो ऑटो के साथ साथ डिफेंस या एरोस्पेस इंडस्ट्री के अंदर में भी अपनी जगह बना रही हैं। इस तरह की पहली कंपनी सनसेरा इंजीनियरिंग है जिसकी टॉप लाइन आज 30 से 35%। एडीएस सेगमेंट से भी योगदान आना शुरू हो गया है। एरोस्पेस डिफेंस और सेमीकंडक्टर में भी कंपनी के लिए मौके बन रहे हैं। इसके चलते आगे कंपनी के मार्जिन और एबिटा में भी काफी अच्छा ग्रोथ होता हुआ नजर आएगा।

सोना बीएलडबल्यू भी काफी अच्छी लग रही है। जापानी कंपनी के साथ अब इनस दो जेबी हो चुके है। फ्यूचर ग्रोथ को ध्यान में रखते हुए यह कंपनी लॉन्ग टर्म नजरिए से काफी पसंद आ रही है।

आज लिस्ट हुए टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स (Tempsens) के शेयरों पर बात करते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि उन्होंने इसके आईपीओ में अप्लाई तो नहीं किया था लेकिन यह शेयर काफी अच्छा लग रहा है। आने वाले पांच साल में जो कंपनी की टॉप लाइन ग्रोथ ऑलमोस्ट 30% सालाना की दर से ग्रो कर सकती है। इसकी मार्जिन भी 24% पर जाती हुई नजर आएगी जिसके चलते एबिटा ग्रोथ 35% की देखने को नजर आएगी। अगर से हम मल्टीपल देखें तो उसको देखते हुए लगता है कि करंट करंट लेवल से भी शायद आपको इसमें 20 से 25% की अपसाइड देखने को नजर आ सकती है। यह बहुत ही इंटरेस्टिंग कंपनी है। यहां पर करंट लेवल से भी इसमें काफी तेजी देखने को मिल सकती है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

आगे खपत से जुड़ी कंपनियों में दिखेगी जोरदार तेजी, फिनटेक और क्विक कॉमर्स शेयरों पर रहे नजर – आशीष चतुरमोहता

शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट देखने को मिल रही है। अलग-अलग सेक्टर में कमजोरी के बीच सेंसेक्स 300 अंक से ज्यादा गिरा है और निफ्टी 24,300 के आसपास बना हुआ है। मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिल रही है। इस सेक्टर का इंडेक्स 1.19 प्रतिशत नीचे आ गया है। जबकि IT सेक्टर के इंडेक्स में 1 प्रतिशत की गिरावट आई है। PSU बैंक और ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी लगभग 0.7 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही है। लेकिन कमजोर बाजार में भी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने 0.66 प्रतिशत की बढ़त हासिल की है। ​​छोटे-मझोले शेयरों में भी बिकवाली आई है। इसके चलते मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है।

टेक्नो फंडा नजरिए से बाजार की चाल पर बात करते हुए जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज ( JM Financial Services) में PMS के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चतुरमोहता ने कहा कि पहली तिमाही के नतीजों का सीजन काफी अच्छा रहा। बहुत लंबे समय बाद पहली बार लार्ज कैप में अर्निंग ग्रोथ आई है। हमें इसमें लगभग 19 से 20% की ग्रोथ देखने को मिली है। स्मॉल और मिड कैप ने भी फिर से बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। स्माल कैप अर्निंग ग्रोथ 30 से 32% के आसपास रही है। वहीं मिड कैप ने भी लगभग 24 से 25% की ग्रोथ दिखाई। साफतौर पर अर्निंग ट्रेजेक्टरी बहुत ज्यादा स्ट्रांग रही है। जिस तरह से ग्लोबल अनसर्टेनिटी बनी रही और क्रूड से जुड़े रॉ मटेरियल की वजह मार्जिन पर प्रेशर बना, उसके बावजूद भी प्रॉफिटेबिलिटी में अच्छी ग्रोथ देखने को नजर आई। अब हमें साफ दिख रहा है कि यहां से कॉर्पोरेट अर्निंग्स में काफी मजबूत री-रेटिंग होती हुई नजर आएगी।

इसके अलावा पिछले साल मिले जीएसटी और इनकम टैक्स रिलीफ का बेनिफिट अब बाजार को मिलना शुरू हो गया है। इसके संकेत भी पहली तिमाही के नतीजों में मिले हैं। इसी के चलते ऑटो, ऑटो इंसिलरीज और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े नतीजे काफी अच्छे रहे हैं। यहां तक कि न्यू एज कंपनियों के नतीजे भी काफी अच्छे रहे हैं । हमें लगता है कि एक बहुत अच्छी डबल इंजन ग्रोथ देखने को नजर आ रही है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर तो काफी अच्छा कर ही रहा है पर बहुत लंबे समय बाद खपत से जुड़ी कंपनियों से भी अच्छे संकेत मिल रहे है। हमें लगता है कि हमारे मार्केट्स के लिए काफी अच्छी स्थिति बनती हुई नजर आ रही है। क्यूएसआर सेगमेंट पर अपनी राय साझा करते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि इस सेगमेंट में काफी ज्यादा प्रतिस्पर्धा का माहौल है। पिछली तिमाहियों में बर्गर किंग, देवयानी और ज्युबिलेंट फूड जैसी कंपनियों के नतीजों पर इसका असर भी देखने को मिला है। हालांकि पहली तिमाही इनके लिए अच्छी रही है। इसके चलते ये शेयर री-रेट भी होंगे। लेकिन स्ट्रचरली हमें लगता है कि अगर हमें कंजम्प्शन थीम को ही प्ले करना है तो न्यू एज सेगमेंट को प्राथमिकता देनी चाहिए। कंजम्प्शन थीम के लिए तमाम पॉजिटिव फैक्टर नजर आ रहे हैं।

क्विक कॉमर्स की बात करें तो अगले 5-6 सालों में इसका मार्केट 5 अरब डॉलर से बढ़कर 55-65 अरब डॉलर का हो सकता है। इस सेगमेंट में हमें 11-12 गुना की ग्रोथ देखने को मिल सकती है। इस सेगमेंट की कंपनियों में आगे हमें काफी तेज ग्रोथ देखने को मिल सकती है। इसका फायदा इटरनल, स्विगी, मीशो और Honasa जैसी कंपनियों को मिलेगा। इसके अलावा फिन टेक कंपनियों में भी आगे तेज ग्रोथ देखने को मिल सकती है। देश में लोगों की आय और खपत बढ़ने का फायदा इन कंपनियों के मिलेगा। देश में बढ़ेते डिजिटल स्पेंडिंग का सीधा फायदा पेटीएम जैसी कंपनियों को मिलेगा।

 

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Rajeev Thakkar: ‘AUM को कोसना बंद कीजिए…’, कमजोर रिटर्न पर बोले राजीव ठक्कर, याद दिलाया ₹100 करोड़ वाले फंड का किस्सा

PPFAS Flexi Cap Fund Underperformance: जब भी कोई बड़ा म्यूचुअल फंड प्लान हाल के दिनों में कमजोर प्रदर्शन करती है, तो अक्सर उसके विशालकाय फंड साइज या AUM को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन देश के सबसे लोकप्रिय फंड्स में से एक PPFAS Mutual Fund के मुख्य निवेश अधिकारी राजीव ठक्कर इस दलील से इत्तेफाक नहीं रखते।

निवेशकों को लिखे अपने मैसेज में राजीव ठक्कर ने कहा, ‘जो लोग शॉर्ट टर्म में हमारी स्कीम के कमजोर प्रदर्शन का कारण हमारे बड़े AUM को मानते हैं, वे हम पर ‘कुछ ज्यादा ही मेहरबान’ हो रहे हैं।’

आइए आपको बताते हैं कि ₹1.43 लाख करोड़ के बड़े फंड को संभालने वाले फंड मैनेजर ने स्कीम के अंडरपरफॉर्मेंस, बाजार के रुख और 2007 के उस दौर के बारे में क्या-क्या बातें कही हैं।

जब ₹100 करोड़ के PMS में भी झेलना पड़ा था बड़ा अंडरपरफॉर्मेंस

राजीव ठक्कर ने अपने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि किसी फंड का साइज छोटा या बड़ा होना उसके प्रदर्शन की इकलौती वजह नहीं होता। उन्होंने बताया, ‘मैंने साल 2007 में PMS में महज ₹100 करोड़ से थोड़े अधिक के AUM बेस पर आज से भी बड़े अंडरपरफॉर्मेंस का दौर देखा और संभाला है।’

उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म में फंड का रिटर्न कैसा रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किन शेयरों में निवेश किया है और वे उस समय बाजार के ट्रेंड में हैं या नहीं।

कैसा रहा है हालिया प्रदर्शन?

राजीव ठक्कर देश की सबसे बड़ी फ्लेक्सी कैप स्कीम PPFAS Flexi Cap Fund का प्रबंधन करते हैं, जिसका कुल AUM करीब ₹1.43 लाख करोड़ पहुंच चुका है। पिछले एक साल में इस फंड ने लगभग 0.4% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में इसी कैटेगिरी का औसत रिटर्न लगभग 7% रहा है। बाजार में चल रहे कंसोलिडेशन और कुछ सेक्टर्स में आई तेज गिरावट का असर इस फंड पर भी देखने को मिला है।

आउट ऑफ फेवर सेक्टर्स में खरीदारी: क्यों बिगड़ता है शॉर्ट टर्म रिटर्न?

अंडरपरफॉर्मेंस के कारणों पर बात करते हुए ठक्कर ने अपनी निवेश शैली पर प्रकाश डाला:

बाजार के रुझान से अलग सोच: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड अक्सर उन सेक्टर्स या शेयरों में खरीदारी करता है जो उस समय बाजार की पसंद नहीं होते या डिस्काउंट पर मिल रहे होते हैं।

शॉर्ट टर्म में अस्थिरता: जब फंड ऐसे सेक्टर्स में पैसा लगाता है जो फिलहाल बाजार की रेस में पीछे हैं, तो 3 महीने, 1 साल या उससे अधिक समय के लिए पोर्टफोलियो के रिटर्न कमजोर दिख सकते हैं।

‘ट्रेंड’ के पीछे न भागना: उन्होंने साफ किया कि फंड सिर्फ इसलिए किसी लोकप्रिय शेयर या सेक्टर में पैसा नहीं लगाएगा क्योंकि वह उस समय काफी चल रहा है। फंड का पूरा फोकस केवल रिस्क-रिवॉर्ड के आधार पर सही वैल्यू तलाशने पर रहता है।

निवेशकों के लिए राजीव ठक्कर का संदेश

राजीव ठक्कर के मुताबिक, अगर आपने किसी फंड को उसकी लंबी अवधि की रणनीति को देखकर चुना है, तो शॉर्ट टर्म में कमजोर रिटर्न मिलने पर किसी आसान बहाने की तलाश करने के बजाय धैर्य बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

उनका मानना है कि मौजूदा अंडरपरफॉर्मेंस का दौर न तो समय के लिहाज से बहुत लंबा है और न ही नुकसान के आंकड़े के हिसाब से कोई अभूतपूर्व घटना है। लंबी अवधि में प्रक्रिया और रिस्क मैनेजमेंट ही निवेशकों के लिए सही वैल्यू जनरेट करता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Top Stock Picks : केमिकल और सीडीएमओ स्पेस में काफी अच्छे निवेश के मौके, ये तीन ऑटो शेयर करेंगे कमाल

Top Stock Picks : शुक्रवार को दोपहर के कारोबार में भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट देखने के मिल रही है। सेंसेक्स 500 अंक से ज्यादा गिरा है और निफ्टी 24,550 के आस-पास बना हुआ। फिलहाल सेंसेक्स 505.76 अंक या 0.64 प्रतिशत गिरकर 78,449 पर और निफ्टी 100.05 अंक या 0.41 प्रतिशत गिरकर 24,535.95 पर आ गया है। । सेक्टर के हिसाब से प्राइवेट बैंकों में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स 0.90 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। जबकि बैंक निफ्टी में 0.62 प्रतिशत की गिरावट आई है। बाजार की कमजोरी के बावजूद IT और ऑटो शेयरों में तेजी बनी हुई है। वहीं, वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX 2.63 फीसदी बढ़ा है।

ऐसे में टेक्नो फंडा नजरिए के साथ बाजार पर बात करते हुए जेएम फाइनेंशियल्स के PMS के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चतुरमोहता ने कहा की बाजार में क्रूड की वोलेटिलिटी और जियोपॉलिटिकल अनसर्टेनिटी का असर देखने को मिल रहा है। लेकिन उसके बावजूद भी हमारे बाजार ने एक बहुत ही बढ़िया मजबूती दिखाई है। ब्रॉड बेस मार्केट में अप्रैल महीने से अभी तक जिस तरह की रिकवरी देखने को मिली है वह इस बात का क्लियर रिफ्लेक्शन है कि अब कहीं ना कहीं बाजार इस अनसर्टेनिटी को पचाने की क्षमता दिखाना शुरू कर चुका है।

ये सिर्फ सेंटीमेंटल रिकवरी नहीं है। सभी सेक्टरों के पहली तिमाही के नतीजे अच्छे रहे हैं। कई तिमाहियों के बाद हमें इस तरह के उत्साहजनक आंकड़ें देखने को नजर आ रहे हैं। खासतौर पर स्माल कैप ने सबसे ज्यादा सरप्राइज किया है। यहां पर हमें 28% तक की टॉप लाइन एबिट और पैट ग्रोथ देखने को नजर आई है। अभी तक जो रिजल्ट्स उनको देखते हुए बाजार का ट्रेंड साफतौर पर काफी स्ट्रांग है।

ऐसे में अगर हम थीम स्पेसिफिक बात करें तो पूरा ईएमएस स्पेस ही काफी अच्छा लग रहा है। इस सेक्टर के लिए सेमीकॉन 2.0 और सरकारी प्रोत्साहन काफी पॉजिटव फैक्टर है। ऐसे में हमें आगे सिरमा और एवलॉन जैसी कंपनियों में इसका काफी पॉजिटिव असर देखने को मिल सकता है। केन्स (Kynes Tech) जैसा शेयर भी बड़े करेक्शन के बाद तेजी के लिए तैयार दिख रहा है।

इसके अलावा स्पेशलिटी केमिकल और सीडीएमओ स्पेस में भी काफी अच्छे निवेश के मौके दिख रहे हैं। नवीन फ्लोरिन, न्यूलैंड लैब्स और डीवीज लैब जैसी कंपनियों ने जिस तरह के स्ट्रांग टॉप लाइन ग्रोथ और प्रॉफिट ग्रोथ दिखाए हैं, उनको देखकर लगता है कि मार्केट इनको लगातार रिवॉर्ड करता हुआ नजर आएगा।

आशीष चतुरमोहता को इनके अलवा डिफेंस में भी अच्छे मौके दिख रहे हैं। डिफेंस के दिग्गज प्लेयर्स अब तक थोड़े साइडवेज थे। अब ये भी तेजी पकड़ते दिख रहे हैं। डिफेंस कंपनियों की एग्जीक्यूशन कैपेबिलिटी इंप्रूव होती हुई नजर आ सकती है और जिसका बेनिफिट एचएल जैसे स्टॉक में भी देखने को नजर आ सकता है।

टू व्हीलर स्पेस पर अपनी राय रखते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि पहली तिमाही में अक्रॉस द बोर्ड पैसेंजर व्हीकल,कमर्शियल व्हीकल,टू व्हीलर,इलेक्ट्रिक व्हीकल इन सबके नंबर्स बहुत ही ज्यादा अच्छे आए। इनमें डबल डिजिट और किसी-किसी सेगमेंट में तो 20% की भी ग्रोथ देखने को मिली है। अब तो फेस्टिव सीजन भी आने वाला है। ऐसे में नंबर्स यहां से और बढ़ते हुए नजर आ सकते हैं। इसका बहुत अच्छा फायदा M&M, TVS मोटर्स और एथर एनर्जी को हो सकता है। वैसे तो पूरी थीम ही काफी अच्छी लग रही। लेकिन ये तीन शेयर खास हैं, क्योंकि इन्होंने लगातार मार्केट शेयर गेन किया है और नई कैटेगरी क्रिएट करके वहां पर मार्केट लीडर बने हैं।

एसयूवी ईवी सेगमेंट में पैसेंजर व्हीकल की बात करें तो महिंद्रा एंड महिंद्रा लगातार लीड बनाए हुए है। टू व्हीलर की बात करें तो TVS मोटर्स टू व्हीलर में तो अच्छा कर ही रहा है, ईवी सेगमेंट के अंदर भी इसका लगभग 25% का मार्केट शेयर हो गया है। इसी तरह एथर एनर्जी जो कि एक नया खलाड़ी था, पहली बार प्रॉफिटेबल हुआ है। कंपनी का कहना है अब उसकी प्रॉब्लम डिमांड नहीं है। डिमांड तो काफी ज्यादा आ रही। मेन प्रॉब्लम सप्लाई साइड से है। इसका मतलब उनको कैपेसिटी और बढ़ानी पड़ेगी। ऐसे में हमें लगता है यह कंपनी भी बहुत स्ट्रांग टर्न अराउंड फेस में एंटर हो रही है। ऐसे में इस समय ऑटो स्पेस और ऑटो एंसिलरी का स्पेस काफी प्रॉमिसिंग दिख रहा है।

 

Market View : ऑटो और ऑटो एंसिलियरी का फ्यूचर अच्छा, आईटी सेक्टर को लेकर रहें सतर्क-हेमंत कानावाला

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

आपके PF का पैसा EPFO कहां निवेश करता है, आपको तगड़ा ब्याज कैसे मिलता है? समझिए पूरा हिसाब

हर महीने आपकी सैलरी से PF कटता है। फिर EPFO उसी पैसे को अलग-अलग जगह निवेश करता है। वहीं से कमाई होती है और उसी कमाई के दम पर EPFO अपने करोड़ों सदस्यों को 8.25% जैसी आकर्षक ब्याज दर देता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का यह विशाल फंड आखिर संभालता कौन है?

जवाब आपको चौंका सकता है। दरअसल, EPFO इस निवेश का बड़ा हिस्सा खुद मैनेज नहीं करता, बल्कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के जरिए प्रोफेशनल फंड मैनेजर को सौंपता है।

PMS आखिर क्या होते हैं?

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में अमीर निवेशकों की तस्वीर आती है। लेकिन हकीकत कुछ और है।

SEBI के जून 2026 के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर दिखाते हैं। PMS इंडस्ट्री के 36.72 लाख करोड़ रुपये में से करीब 31.04 लाख करोड़ रुपये, यानी लगभग 85% पैसा EPFO और दूसरे प्रोविडेंट फंड्स का है। इससे साफ है कि PMS सिर्फ अमीर निवेशकों के लिए नहीं है। बड़े संस्थान भी अपने हजारों-लाखों करोड़ रुपये इसी के जरिए निवेश करते हैं।

EPFO PMS का इस्तेमाल क्यों करता है?

EPFO करोड़ों नौकरीपेशा लोगों की रिटायरमेंट की बचत संभालता है। उसका मकसद ज्यादा मुनाफा कमाना नहीं है। उसकी पहली जिम्मेदारी लोगों का पैसा सुरक्षित रखना है। साथ ही, लंबे समय तक स्थिर रिटर्न देना भी जरूरी है।

इसी वजह से EPFO निवेश की जिम्मेदारी SEBI-रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर को देता है। हालांकि, निवेश से जुड़े बड़े फैसलों पर नजर EPFO और सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की ही रहती है।

नियमों के मुताबिक, EPFO अपने पैसे का 45% से 65% सरकारी बॉन्ड, 35% से 45% कॉरपोरेट बॉन्ड और दूसरे डेट इंस्ट्रूमेंट में लगाता है। वहीं, 15% तक पैसा इक्विटी में लगाया जा सकता है। यह निवेश भी ज्यादातर इंडेक्स ETF के जरिए होता है।

पैसा बाहर के एक्सपर्ट क्यों संभालते हैं?

31 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड संभालना आसान नहीं है। इसके लिए डेट मार्केट की गहरी समझ चाहिए। जोखिम का आकलन करना पड़ता है। हर दिन बाजार पर नजर रखनी होती है।

अगर EPFO यह पूरा काम खुद करे तो उसे बहुत बड़ा निवेश सेटअप तैयार करना पड़ेगा। इसलिए वह यह जिम्मेदारी प्रोफेशनल पोर्टफोलियो मैनेजर को देता है।

EPFO एक नहीं, कई पोर्टफोलियो मैनेजर नियुक्त करता है। उनकी नियुक्ति बोली प्रक्रिया से होती है। प्रदर्शन की लगातार समीक्षा होती है। जो बेहतर काम करता है, उसे ज्यादा फंड मिलता है। खराब प्रदर्शन करने वाले मैनेजर अपना काम भी गंवा सकते हैं।

chart epfo

आम निवेशक क्या सीख सकते हैं?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कि EPFO का पोर्टफोलियो कॉपी करने की जरूरत नहीं है। लेकिन उसकी निवेश करने की सोच जरूर अपनाई जा सकती है।

सबसे बड़ी सीख है अनुशासन। पहले तय करें कि कितना पैसा इक्विटी में रखना है और कितना डेट में। फिर बाजार के उतार-चढ़ाव को देखकर बार-बार फैसला न बदलें। SIP करते रहें और समय-समय पर पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करें।

दूसरी बात, अगर निवेश की ज्यादा समझ नहीं है तो म्यूचुअल फंड या ETF जैसे प्रोफेशनल विकल्प चुनें। हर शेयर खुद खरीदना जरूरी नहीं होता।

तीसरी सीख है कि सिर्फ रिटर्न के पीछे न भागें। रिस्क पर भी बराबर ध्यान दें। पूरा पैसा एक ही शेयर, सेक्टर या कम गुणवत्ता वाले बॉन्ड में लगाना समझदारी नहीं है।

EPFO की रणनीति हर किसी के लिए सही नहीं

EPFO का पोर्टफोलियो उसकी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है। आम निवेशकों की जरूरतें अलग होती हैं। खासकर युवा निवेशकों को लंबी अवधि में संपत्ति बनाने के लिए ज्यादा इक्विटी की जरूरत पड़ सकती है।

एक और बड़ा फर्क टैक्स का है। PMS में हर खरीद और बिक्री पर टैक्स लग सकता है। वहीं, म्यूचुअल फंड में आमतौर पर यूनिट बेचने तक टैक्स नहीं देना पड़ता। इसलिए बिना सोचे-समझे EPFO की निवेश रणनीति अपनाना हर निवेशक के लिए सही नहीं होगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

IDFC First Bank Q1 Results: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का प्रॉफिट जून तिमाही में हुआ दोगुना, एसेट क्वालिटी भी बेहतर हुई

IDFC First Bank Q1 Results: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 25 जुलाई को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया। इस दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट बढ़कर दोगुना यानी 1,075 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में बैंक का प्रॉफिट 465 करोड़ रुपये था। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों पर नतीजों का असर सोमवार यानी 27 जुलाई को दिखेगा।

नेट इंटरेस्ट मार्जिन 21 फीसदी बढ़ा

जून तिमाही में IDFC First Bank का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NII) 21 फीसदी बढ़कर 5,972.3 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,933 करोड़ रुपये था। इस दौरान बैंक की एसेट क्वालिटी में भी इम्प्रूवमेंट आया। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) तिमाही दर तिमाही आधार पर 1.61 फीसदी से घटकर 1.51 फीसदी पर आ गया। नेट एनपीए 0.48 फीसदी से घटकर 0.44 फीसदी पर आ गया।

इस साल 5 फीसदी से ज्यादा गिरा है शेयर 

जून तिमाही में बैंक को NCGTC से CGFMU स्कीम के तहत 514.82 करोड़ रुपये मिले। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक प्राइवेट बैंक है। 24 जुलाई यानी शुक्रवार को बैंक का शेयर 1.3 फीसदी चढ़कर 80.95 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर 5.4 फीसदी गिरा है। इसके मुकाबले निफ्टी में इस दौरान 9 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है।

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शेयर बाजारों में 24 जुलाई को गिरावट 

24 जुलाई को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार पांचवें दिन गिरावट आई। यह बीते चार महीनों में सबसे ज्यादा गिरावट वाला हफ्ता रहा। इसकी वजह मध्यूपूर्व में चल रही लड़ाई है। इस लड़ाई की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।

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PMS के नए नियमों से जुड़े सेबी के प्रस्ताव में क्या है, इसके लागू होने के बाद क्या बदलाव आएगा?

सेबी पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशंस, 2020 में बदलाव की तैयारी में है। रेगुलेटर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) इंडस्ट्री की तेज ग्रोथ को देखते हुए रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को आज की जरूरतों को ध्यान में रख बदलना चाहता है। इस बारे में सेबी ने कंसल्टेशन पेपर इश्यू किया है। इस पर 13 अगस्त तक राय मांगी गई है।

पीएमएस के एयूएम में तेज उछाल

पिछले कुछ सालों में पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ तेज रही है। 31 मई, 2026 को पीएमएस का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर 42.61 लाख करोड़ रुपये हो गया। अप्रैल 2019 में यह 18.07 लाख करोड़ रुपये था। पोर्टफोलियो मैनेजर्स की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है। 2020 में यह संख्या 226 थी, जो अब बढ़कर 515 हो गई है। पीएमएस क्लाइंट्स की संख्या बढ़कर 2.19 लाख हो गई है।

एसेट्स के  निवेश के विकल्प बढ़ेंगे

सेबी ने कहा है कि पीएमएस इंडस्ट्री की ग्रोथ और इस प्रोडक्ट में इनवेस्टर्स की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए इससे जुड़े नियमों पर पुनर्विचार जरूर हो गया है। सबसे बड़ा प्रस्ताव पोर्टफोलियो मैनेजर्स के लिए निवेश के विकल्पों का विस्तार है। सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजर्स को ‘लिस्ट होने वाले’ सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत देने का प्रस्ताव दिया है।

विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत

सेबी के प्रस्ताव में कहा गया है कि पोर्टफोलियो मैनेजर्स को क्लाइंट्स के एसेट का 10 फीसदी इनवेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में निवेश की इजाजत मिलनी चाहिए। इसके अलावा पोर्टफोलियो मैनेजर्स क्लाइंट्स के एसेट्स को विदेशी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे। विदेशी सिक्योरिटीज में विदेश में लिस्टेड शेयर्स, लिस्टेड डेट सिक्योरिटीज, ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स आदि शामिल होंगे।

विदेश में निवेश FEMA के नियमों के तहत 

पीएमएस के फंड मैनेजर्स को FEMA के नियमों के तहत विदेश में निवेश की इजाजत होगी। फंड मैनेजर्स को विदेश में निवेश से पहले क्लाइंट्स की सहमति हासिल करनी होगी। सेबी का मानना है कि पीएमएस के नए नियमों के लागू होने के बाद निवेश के लिहाज से म्यूचुअल फंड्स और उसके बीच का फर्क कम हो जाएगा।

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मिनिमम निवेश 50 लाख से घटकर 25 लाख होगा

सेबी के कंसल्टेशन पेपर में म्यूचुअल फंड-ओनली पीएमएस (MF-PMS) कैटेगरी शुरू करने का भी प्रस्ताव है। इससे अमीर निवेशकों की पहुंच प्रोफेशनली मैनेज्ड पोर्टफोलियो तक बढ़ेगी। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत फंड मैनेजर्स को म्यूचुअल फंड्स, ईटीएफ और स्पेशियलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड में निवेश की इजाजत होगी। सेबी ने इस कैटेगरी के लिए मिनिमम निवेश को 50 लाख रुपये से घटाकर 25 लाख करने का प्रस्ताव पेश किया है।