Daily Voice : अमेरिकी मध्यावधि चुनाव बाजार के लिए कर सकते हैं ट्रिगर का काम, चुनिंदा आईटी शेयरों पर रहे नजर

Daily Voice : IT शेयरों में हालिया तेजी भले ही अभी किसी टिकाऊ रिकवरी का संकेत न हो,लेकिन हर उछाल पर आईटी शेयरों में बिकवाली की एकतरफा रणनीति अपनाना भी जल्दबाजी हो सकती है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे बाजारों के लिए एक ट्रिगर का काम कर सकते हैं,लेकिन इस बात की संभावना कम है कि केवल इसी वजह से बाजार में कोई बड़ी तेजी या कच्चे तेल में भारी गिरावट आएगी। ये बातें अल्फएक्यूरेट एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक और संस्थापक राजेश कोठारी ने मनीकंट्रोल से हुई एक बातचीत में कही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आईटी शेयरों में आई हालिया तेजी पॉजिटिव संकेत है लेकिन निवेशकों को अभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि इस सेक्टर में टिकाऊ तेजी की शुरुआत हो गई है। पोर्टफोलियो में कोई बदलाव करने से पहले तेल सप्लाई की स्थिति,डॉलर,बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट अर्निंग पर नजर रखने की जरूरत है।

आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत

राजेश कोठारी के मुताबिक IT शेयरों में हालिया तेजी उत्साहजनक है,लेकिन इसे एक टिकाऊ तेजी मान लेने में सावधानी बरतने की जरूरत है। बड़ा सवाल यह है कि क्या यह तेजी इंडस्ट्री की अर्निंग आउटलुक से मेल खाती है या यह सिर्फ ‘ओवरसोल्ड’लेवल्स से आई खरीदारी है? हमें आईटी में तीन बातों पर नजर रखने की जरूरत है:

मांग की स्थिति: विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप में टाले जा सकने वाला टेक्नोलॉजी खर्च (discretionary technology spending)अहम बना हुआ है। बेहतर सौदे हासिल करने का नतीजा रेवेन्यू ग्रोथ के रूप में दिखना चाहिए।

AI से बदलाव और अवसर: AI कमाई के नए स्रोत पैदा कर सकता है, लेकिन यह पारंपरिक बिलिंग मॉडल को भी बदल सकता है और कीमतों पर दबाव डाल सकता है।

वैल्यूएशन और अर्निंग आउटलुक: भारी तेजी के बाद, जिन शेयरों की कीमत उनकी कमाई की संभावनाओं से आगे निकल गई है, उनमें मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखने को मिल सकती है।

राजेश कोठारी का मानना ​​है कि आईटी सेक्टर में तेजी आने पर हर शेयर बेच देने की रणनीति जल्दबाजी हो सकती है, लेकिन इस तेजी के पीछे भागना भी कोई समझदारी नहीं है। आईटी में उन कंपनियों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए जिनकी ग्रोथ की संभावनाएं बेहतर हो रही हैं, जिनके ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध हैं और जिनके पास AI से कमाई करने के ठोस मौके हैं। ऐसी कंपनियों से दूर रहने की जरूरत है जो अभी भी कमजोर मांग से जूझ रही हैं।

क्या आप कंजम्पशन सेक्टर को लेकर सतर्क हैं? कंजम्पशन डिमांड और इससे जुड़े शेयरों पर आपकी क्या राय है?

राजेश कोठारी ने कहा कि कंजम्पशन सेक्टर को लेकर पूरी तरह सतर्क रहने के बजाय,चुनिंदा रुख अपनाना पसंद करेंगे। जरूरी चीजों पर होने वाले खर्च और गैर-जरूरी (वैकल्पिक) चीजों पर होने वाले खर्च के बीच का अंतर समझना जरूरी है। कई ‘फास्ट फ्रीक्वेंसी’ डेटा इंडिकेटर कंजम्पशन ट्रेंड में सुधार दिखा रहे हैं (जैसे रिटेल क्रेडिट ग्रोथ, टू-व्हीलर की बिक्री में बढ़ोतरी, आदि)।

इस सेक्टर में ऐसी कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जिनके पास मजबूत ब्रांड, अच्छा डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, कीमतों को तय करने की ताकत, अच्छी बैलेंस शीट और सही वैल्यूएशन हों। वैकल्पिक उपभोग (discretionary consumption) के सेक्टर में केवल कीमतों में बढ़ोतरी पर निर्भर रहने के बजाय, बिक्री की मात्रा (volume) में बढ़त के संकेतों पर भी नजर रखने की जरूरत है।

क्या आप आने वाले समय में ‘अल नीनो’ (El Niño) को बड़ा जोखिम मानते हैं? इसका महंगाई, ग्रामीण मांग और भारत के विकास पर क्या असर पड़ सकता है?

इसके जवाब उन्होंने कहा कि ‘अल नीनो’ एक जोखिम तो है,लेकिन इसे देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि भारत के विकास का पूरा आउटलुक ही खराब हो जाएगा। कोई निष्कर्ष निकालने से पहले फसल उत्पादन, जलाशयों के जल-स्तर, खाने-पीने की चीजों की कीमतों के रुझान और ग्रामीण मांग के इंडीकेटरों पर नजर रखने की जरूरत है।

Q2FY27 में बैंकों के नतीजे कैसे रह सकते है? क्या इनके मौजूदा वैल्यूएशन अच्छे लग रहे है या इन स्तरों से आगे बढ़ने की गुंजाइश सीमित है?

इसके जवाब में राजेश कोठारी ने कहा कि बैंक शेयरों का प्रदर्शन उत्साहजनक है। ज़्यादातर बैंकों ने लोन वितरण (डिस्बर्समेंट) में अच्छी बढ़ोतरी और मज़बूत एसेट क्वालिटी की जानकारी दी है। अच्छे बैंकों में मध्यम अवधि के नजरिए निवेश के अच्छे मौके दिख रहे हैं लेकिन वैल्यूएशन के नजरिए से चुनिंदा शेयरों पर ही दांव लगाने की सलाह होगी।

ऐसे बैंकों पर फोकस करने की सलाह होगी जिनकी अर्निंग ग्रोथ को टिकाऊ कोर इनकम,अच्छी एसेट क्वालिटी और मजबूत फंडिंग फ्रेंचाइजी का सपोर्ट हासिल हो। अगले दो से तीन तिमाहियों में मार्जिन में सुधार की स्थिति कैसी रहती है, इस पर भी नजर रहनी चाहिए।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Stocks Markets: बीएसई और एनएसई 20 अक्तूबर को बंद रहेंगे, जानिए कैसा रहेगा 4 दिन का यह कारोबारी हफ्ता

यह हफ्ता शेयर बाजारों के लिए अच्छा रहा। लंबे समय बाद शेयर बाजार में रौनक लौटी। निफ्टी इस दौरान 2.49 फीसदी चढ़ा, जबकि सेंसेक्स में 3.30 फीसदी का उछाल आया। अब बाजार की नजरें 19 अक्तूबर यानी सोमवार पर टिकी हैं। मंगलवार को शेयर बाजारों में दशहरा की छुट्टी है। इसलिए सोमवार के बाद बीएसई और एनएसई में फिर से बुधवार यानी 21 अक्तूबर को कारोबार शुरू होगा। सवाल है कि क्या बाजार में तेजी का सिलसिला क्या अगले हफ्ते जारी रहेगा?

19 अक्टूबर को खुलेगा जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ

अगले हफ्ते शेयर बाजार पर सितंबर तिमाही के नतीजों, क्रूड ऑयल की कीमतों और Jio Platforms के आईपीओ का असर दिखेगा। लेकिन, सबसे ज्यादा नजरें विदेशी निवेशकों पर होंगी। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ एंकर इनवेस्टर्स के लिए 19 अक्तूबर को खुल जाएगा। बाकी इनवेस्टर्स के लिए यह 21 अक्तूबर को खुलेगा। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ है। अब तक किसी कंपनी ने आईपीओ से 30,000 करोड़ रुपये नहीं जुटाए हैं।

30000 करोड़ के इश्यू का असर लिक्विडिटी पर दिख सकता है

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में निवेश के लिए इनवेस्टर्स को पैसे के इंतजाम करने होंगे। कई इनवेस्टर्स इस आईपीओ में निवेश करने के लिए दूसरे शेयरों से पैसे निकाल सकते हैं। चूंकि यह 30,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का इश्यू है, जिससे पैसे की काफी जरूरत पड़ेगी। इसका असर लिक्विडिटी पर पर पड़ सकता है। सूत्रों ने बताया है कि कई बड़े विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस इश्यू में निवेश में दिलचस्पी दिखाई है। वे इस इश्यू में निवेश के लिए दूसरे शेयरों में बिकवाली कर सकते हैं।

क्रूड ऑयल की कीमतों पर भी होंगी बाजार की नजरें 

क्रूड ऑयल की कीमतों का असर भी बाजार पर पड़ेगा। इस हफ्ते के अंत में क्रूड की कीमतों में बड़ा उछाल दिखा। ब्रेंट क्रूड करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया। अगर अगले हफ्ते क्रूड की कीमतों में नरमी नहीं आती है तो बाजार पर दबाव दिख सकता है। महंगे क्रूड की वजह से पेंट्स, टायर सहित कई कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ी है। इसका निगेटिव असर उनके शेयरों पर दिखा है। क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल पर बने रहना भारत की इकोनॉमी के लिए भी अच्छा नहीं है। इससे महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।

आईटी शेयरों में तेजी जारी रही तो बाजार को मिल सकता है सपोर्ट

एनरिच मनी के सीईओ पोममुदी आर ने कहा कि निवेशकों की नजरें इस बात पर होगी कि बाजार में आईटी शेयरों की बदौलत आई तेजी जारी रहती है या नहीं। वे देखना चाहते हैं कि बाजार के प्रमुख सूचकांक अपने रेसिस्टेंस लेवल को तोड़ पाते हैं या नहीं। इस हफ्ते तेजी की वजह से बाजार का मोमेंटम पॉजिटिव बना हुआ है। आईटी शेयरों में अच्छी रिकवरी दिखी है।

इन दिग्गज बैंकिंग शेयरों पर दिखेगा सितंबर तिमाही के नतीजों का असर

इस हफ्ते के अंत में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, पीएनबी जैसे बड़े बैंकों ने अपने नतीजों के एलान किए। मिलाजुलाकर ये नतीजे अच्छे हैं। इन बैंकों के शेयरों पर 19 अक्तूबर यानी सोमवार को इन नतीजों का असर दिखेगा। पिछले एक-डेढ़ साल में प्राइवेट बैंकों के शेयरों का प्रदर्शन सरकारी बैंकों के शेयरों के मुकाबले कमजोर रहा है। सितंबर तिमाही के नतीजों से प्राइवेट बैंकों के शेयरों में तेजी शुरू हो सकती है।

अमेरिका में एआई और चिप शेयरों पर भी होगी नजरें 

मार्केट पार्टिसिपेंट्स को ग्लोबल फैक्टर्स पर भी नजर रखने की जरूरत है। खासकर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर फिलहाल मार्केट्स पर बना रहेगा। जियोपॉलिटिकल डेवलपेमेंट पर भी बाजार की नजरें होंगी। इस हफ्ते में अमेरिका में एआई और चिप शेयरों की पिटाई हुई है। अगर अगले हफ्ते भी इन शेयरों पर दबाव जारी रहता है तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख सकती है।

AI में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम, जानिए भारतीय शेयर बाजार पर पड़ेगा कितना असर

अमेरिका में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में आई बड़ी गिरावट ने कई एशियाई शेयर बाजारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका में सेमीकंडक्टर्स शेयरों में लगातार 8 सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। यह 2008 के बाद बिकवाली का सबसे लंबा सिलसिला था। इसका असर नैस्डेक 100 पर भी पड़ा। अप्रैल 2005 के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट आई।

आईआई शेयरों की बदौलत अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी

पिछले 1.5-2 सालों में अमेरिका में एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इस सेक्टर को चिप और दूसरे हार्डवेयर सप्लाई करने वाली एशियाई कंपनियों के शेयरों में भी खूब तेजी आई है। इनमें दक्षिण कोरिया और ताइवान की कई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका में एआई बूम जारी रखने के लिए नए निवेश की जरूरत है। पहले ही इस सेक्टर में काफी ज्यादा निवेश हो चुका है।

एआई में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम

अगर अमेरिका में एआई में निवेश की रफ्तार सुस्त पड़ती है तो इसका असर इस सेक्टर से जुड़ी एशियाई कंपनियों पर भी पड़ेगा। इसका संकेत दिखने लगा है। नियोक्लाउड ऑफर करने वाली कंपनी CoreWeave के बॉन्ड्स की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे इस सेक्टर पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। इनवेस्टर्स सवाल पूछ रहे है कि एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों ने जो निवेश किया है, क्या उसका रिटर्न मिलने जा रहा है? क्या AI की डिमांड इतनी है, जिससे इन कंपनियों के रेवेन्यू को सपोर्ट मिलेगा?

इंटरेस्ट रेट बढ़ने से एआई कंपनियों के लिए बढ़ रही इनवेस्टमेंट कॉस्ट

CoreWeave के शेयरों में 16 अक्तूबर को 12 फीसदी गिरावट आई। क्रूड की बढ़ती कीमतों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों के लिए चिंता और बढ़ा दी है। क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ रही है, जिससे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा रहे हैं। इससे इससे एआई कंपनियों के लिए नए निवेश की लागत भी बढ़ रही है। पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा चुका है। अब नजरें इस महीने की फेड की पॉलिसी पर लगी हैं।

ताइवान और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों को हो सकती है दिक्कत

ताइवान की TSMC, दक्षिण कोरिया की SK Hynix और Samsung Electronics जैसी कंपनियां AI कंप्यूटिंग के लिए जरूरी चिप और मेमोरी की सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों की कमाई एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले इनवेस्टमेंटम पर निर्भर है। अगर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश घटता है तो इन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। Gartner ने चेतावनी दी है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 3.5 ट्रिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट को 2030 तक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टमेंट के अनुपात में रेवेन्यू नहीं दिख रहा।

कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 236% तक उछाल

Union Bancaire Privee में मैनेजिंग डायरेक्टर वी-सेर्न लिंग ने कहा, “अगर हायरपरस्केलर्स और नियोक्लाउड्स को निवेश जारी रखने के लिए फंड नहीं मिलता है तो इसका असर टीएसएमसी, सैमसंग और SK Hynix जैसी एशियाई कंपनियों पर पड़ेगा। उन्हें मिलने वाले ऑर्डर्स घट जाएंगे।” इस साल MSCI Asia-Pacific Index की सबसे ज्यादा चढ़ने वाली 10 कंपनियों से 8 कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां हैं। इनमें से हर कंपनी का शेयर कम से कम 236 फीसदी चढ़ा है।

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भारतीय बाजार पर इस वजह से नहीं पड़ेगा असर 

जहां तक भारत की बात है तो इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत में एआई और सेमीकंडक्टर्स बनाने वाली कंपनियां नहीं हैं। यहीं वजह है कि पिछले 1-2 सालों में जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में तेजी आई तब भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। यहां तक की एआई बूम का निगेटिव असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा है। अब जब एआई और चिप शेयर गिर रहे हैं तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख रही है।

 

Q2 Results: आईटी कंपनी को ₹1586 करोड़ का मुनाफा, डिविडेंड और बोनस शेयर का ऐलान

Q2 Results: आईटी कंपनी Tech Mahindra ने सितंबर तिमाही में 1,586 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया। यह जून तिमाही के 1,465 करोड़ रुपये से 8.2% ज्यादा है। CNBC-TV18 के पोल में मुनाफा 1,576 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। यानी कंपनी के नतीजे अनुमान से बेहतर रहे।

डॉलर में रेवेन्यू भी बढ़ा

टेक महिंद्रा का डॉलर में रेवेन्यू भी 2% बढ़कर 1,693 मिलियन डॉलर हो गया। जून तिमाही में यह 1,660 मिलियन डॉलर था। वहीं, EBIT यानी ऑपरेटिंग मुनाफा सालाना आधार पर 40.5% बढ़कर 2,387 करोड़ रुपये पहुंच गया।

कंपनी का EBIT मार्जिन भी सुधरा है। यह जून तिमाही के 14.4% से बढ़कर 14.8% हो गया। Tech Mahindra का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के अंत तक इसे 15% तक पहुंचाना है।

डिविडेंड और बोनस शेयर को मंजूरी

टेक महिंद्रा ने शेयरधारकों को 15 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का ऐलान किया है। इसके अलावा, बोर्ड ने 1:1 बोनस शेयर जारी करने को भी मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र निवेशकों को हर एक शेयर के बदले एक अतिरिक्त शेयर मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए जरूरी मंजूरियां मिलना बाकी है।

नए ऑर्डर और AI से ग्रोथ की उम्मीद

टेक महिंद्रा के CEO मोहित जोशी ने तिमाही प्रदर्शन को बेहद मजबूत बताया। सितंबर तिमाही में कंपनी को 1.023 अरब डॉलर के नए सौदे मिले। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस कारोबार में 4.6% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, हेल्थकेयर कारोबार 6.6% बढ़ा।

कंपनी को Orange के बड़े टेलीकॉम प्रोजेक्ट से भी मदद मिली। Avant Techno Solutions के अधिग्रहण से भी तिमाही के रेवेन्यू में योगदान हुआ। इसके अलावा, Tech Mahindra AI कारोबार को बढ़ाने पर जोर दे रही है। कंपनी के मुताबिक, उसका AI कलेक्शन सॉल्यूशन बकाया रकम की वसूली में करीब 40% तक एफिशिएंसी बढ़ा रहा है। कंपनी ने Cisco और SpaceX AI के साथ भी साझेदारी की घोषणा की है।

H-1B वीजा पर क्या बोले CEO?

अमेरिका के वीजा नियमों से जुड़े सवाल पर मोहित जोशी ने कहा कि अमेरिकी सरकार ने जिन कंपनियों का नाम लिया था, उनमें Tech Mahindra शामिल नहीं थी। उन्होंने कहा कि कंपनी दुनियाभर में वीजा नियमों और उनके अनुपालन को लेकर सतर्क रहती है।

जोशी के मुताबिक, H-1B वीजाधारक कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 1% हैं। कंपनी का अमेरिका और वैश्विक स्तर पर स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती पर जोर है।

शेयर में 4.75% की तेजी

नतीजों की घोषणा से पहले गुरुवार को Tech Mahindra का शेयर 4.75% बढ़कर 1,650 रुपये पर बंद हुआ। इस तेजी से शेयर सालभर के हिसाब से भी बढ़त में आ गया। पिछले 12 महीनों में इसमें 13% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Share Market Rally: मार्केट में ताबड़तोड़ तेजी: सेंसेक्स 800 अंक उछला, निफ्टी 22,830 के पार; इन 3 वजहों से लौटी रौनक

Share Market Rally: आज, 15 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार में शानदार रैली देखने को मिल रही है। सुबह के कारोबारी सत्र में प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 1 फीसदी तक की बढ़त दर्ज कर के कारोबर कर रहे है। आईटी इंडेक्स में 2% से ज्यादा की ताबड़तोड़ तेजी ने बाजार को ऊपर उठाने में सबसे मुख्य भूमिका निभाई है।

मार्केट का ताजा हाल

सुबह के कारोबारी सत्र 10 बजे के आंकड़ों के अनुसार, शेयर बाजार में जबरदस्त रिकवरी देखने को मिली, जिसमें प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 774.05 अंक (+1.06%) की शानदार छलांग के साथ 73,555.94 पर और निफ्टी 50, 215.40 अंक (+0.95%) की मजबूती के साथ 22,838.10 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि आईटी शेयरों में 2.29% की तूफानी तेजी के चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स 30,862.65 पर पहुंच गया और बैंक निफ्टी (+0.49%) व बैंकैक्स (+0.40%) भी हरे निशान में रहे, हालांकि निफ्टी मिडकैप 100, 59,405.05 (-0.00%) पर लगभग सपाट नजर आया।

बाजार में तेजी की 3 बड़ी वजहें:

1. IT शेयरों में तूफानी खरीदारी: HCLTech के शानदार नतीजों के बाद से ही आईटी शेयरों में खरीददारी का दौर जारी है। आईटी इंडेक्स अकेले 690 अंक से ज्यादा उछल चुका है, जिससे पूरे मार्केट का मूड पॉजिटिव हुआ है।

2. निचले स्तरों से वैल्यू बाइंग: बाजार पिछले छह महीने के निचले स्तरों के करीब कारोबार कर रहा था, जिससे कई मजबूत फंडामेंटल वाले शेयर काफी आकर्षक वैल्युएशन पर उपलब्ध हो गए। निवेशकों ने इस मौके का फायदा उठाकर निचले स्तरों पर जोरदार खरीदारी की है।

3. टेक्निकल कारण: बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों का मानना है कि जब तक निफ्टी 22,600 के स्तर से ऊपर बना हुआ है, तब तक घबराने की जरूरत नहीं है। 22,600 का स्तर मजबूत सपोर्ट का काम कर रहा है और इसके टूटने पर ही मंदी का खतरा बनेगा।

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Stock Market View: अगले 6 महीने तेजी में मुनाफावसूली की रणनीति करेगी काम, पावर और एक्सपोर्ट सेगमेंट में कमाई के मौके

Stock Market View : 13 अक्टूबर के शानदार सेशन के बाद मार्केट पर आज फिर दबाव देखने को मिल रहा है। निफ्टी 22,700 के लेवल से नीचे आ गया है। बुल्स मोमेंटम बनाए रखने के लिए संघर्ष रहे हैं। सेंसेक्स भी थोड़ा नीचे है और 73,000 के लेवल से नीचे फिसल गया है। निफ्टी बैंक इंडेक्स भी मंदडियों की पकड़ से जूझ रहा है और लगभग 100 अंक नीचे है। बाजार जानकारों का कहना है कि निफ्टी के लिए निचले स्तर पर 22,700 का लेवल बचाए रखना अहम होगा। वहीं, फिर से तेजी पकड़ने के लिए 23,000 के लेवल तक पहुंचना भी जरूरी होगा।

ऐसे माहौल में मार्केट आउटलुक पर चर्चा करते हुए डाइमेंशन्स कॉर्पोरेट फाइनेंस सर्विसेज़ ( Dimensions Corporate Finance Services) के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय श्रीवास्तव ने कहा कि रुपए में गिरावट और महंगाई बढ़ने के चलते बाजार पर दबाव देखने को मिल रहा है। बाजार की गिरावट से कोई सरप्राइज नहीं है। अगले 6 महीने तक बाजार में मुनाफावूसली की रणनीति काम करती दिखेगी।

मिडकैप में अच्छी तेजी रही है। प्राइमरी मार्केट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि IPO का सबसे ज्यादा फायदा एंकर निवेशकों ने उठाया है। IPO से रिटेल निवेशकों को खास फायदा नहीं हुआ है। बाजार की तेजी में मुनाफावसूली की रणनीति रखें। मिडकैप में प्रॉफिट बुकिंग की रणनीति बेहतर काम करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि इस समय इंजीनियरिंग में पावर और एक्सपोर्ट सेगमेंट में कमाई के मौके हैं। इन सेगमेंट में क्वालिटी शेयरों पर फोकस करें। नॉन-फेरस मेटल की थीम भी बेहतर है। NBFCs में गोल्ड लोन कंपनियां बेहतर लग रही हैं।

फार्मा शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि CDMO शेयर लंबी अवधि के नजरिए से अच्छे लग रहे हैं। इनमें एंट्री पर ध्यान दें। इसके अलावा इंडिया का होटल सेक्टर अच्छा कर सकता है। न्यू ऐज शेयर भी लंबी अवधि के लिहाज से अच्छे लग रहे हैं। आईटी शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि IT काफी ओवरसोल्ड है। इस सेक्टर को रुपए की गिरावट से फायदा होगा। फिर भी IT सेक्टर में अभी दम नहीं नजर आ रहा है। उनका यह भी मानना है कि स्टारलिंक से टेलीकॉम की तस्वीर बदलती नजर आएगी।

 

Market Insight : भारत का बाजार खराब नहीं है, सिर्फ टॉप 10 शेयर में हो रही है दिक्कत

 

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Nifty फिर से 22500 लेवल के पार, एनालिस्ट्स से जानिए बाजार में इस तेजी के जारी रहने की कितनी संभावना है

शेयर बाजारों में 9 अक्टूबर को जोरदार रिकवरी आई। इससे निफ्टी ने फिर से 22,500 का हासिल कर लिया। इस रिकवरी में क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी, आईटी शेयरों में तेजी और सस्ते भाव पर शेयरों की खरीदारी का हाथ है। 1 बजे निफ्टी 1.23 फीसदी यानी 272 अंक चढ़कर 22,504 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.17 फीसदी यानी 836 अंक के उछाल के साथ 72,437 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 1.22 फीसदी की तेजी दिखी। सवाल है कि क्या तेजी टिकाऊ हैं?

निफ्टी के लिए 22,600 के लेवल पर रेसिस्टेंस

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पबित्रो मुखर्जी ने कहा, “निफ्टी अगर 8 अक्टूबर के 22,180 के ऊपर बना रहता है तो इसकी रेंज 22,180-22,600 होगी। 22,600 पर इसे रेसिस्टेंस का सामना करना होगा। गिरावट की स्थिति में यह 22,000 की तरफ बढ़ेगा और 2025 के 21,750 के निचले स्तर तक जा सकता है।”

रेसिस्टेंस लेवल के ऊपर टिके रहने पर आएगी तेजी

उन्होंने कहा कि 9 अक्टूबर को मजबूत शुरुआत के बावजूद मार्केट का स्ट्रक्चर सावधानी वाला है। रिकवरी के लिए निफ्टी का रेसिस्टेंस लेवल से ऊपर टिके रहना जरूरी है। उन्होंने कहा कि तब तक तेजी पर बिकवाली का एप्रोच सही रहेगा। रेसिस्टेंस लेवल के करीब बाजार पर सेलिंग प्रेशर दिख सकता है।

22,500 के बाद सेंटीमेंट में इम्प्रूवमेंट दिख सकता है

थिनक्रेडब्लू सिक्योरिटीज के गौरव उदानी ने कहा कि अगर तेजी में निफ्टी 22,500 को पार कर जाता है तो बाजार के सेंटिमेंट में इम्प्रूवमेंट दिख सकता है, जिससे शॉर्ट-कवरिंग देखने को मिल सकती है। लेकिन, गिरावट की स्थिति में निफ्टी के 22,100 के नीचे जाने पर फिर से कमजोरी दिख सकती है। उन्होंने कहा कि ट्रेडर्स को सावधान रहने की जरूरत है। ओपनिंग गैप के पीछे भागने से बचना ठीक रहेगा। बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

डे ट्रेडर्स को इस सपोर्ट जोन का ध्यान रखने की सलाह

कोटक नियो के हेड (इक्विटी रिसर्च) श्रीकांत चौहान ने कहा, “डे ट्रेडर्स के लिए 22,200/71,500 और 22,150/71,300 अगले सपोर्ट जोन होंगे। इन लेवल से नीचे जाने पर सेलिंग प्रेशर बढ़ सकता है। ऐसे में निफ्टी गिरकर 22,000-21,750 तक आ सकता है। सेंसेक्स 70,800-70,000 तक गिर सकता है।”

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सपोर्ट लेवल टूटने पर फिर से बिकवाली शुरू हो सकती है

उन्होंने कहा कि तेजी की स्थिति में 22,300-22,400/71,800-72,100 अगले रेसिस्टेंस जोन होंगे। इस रेंज के ऊपर तेजी जारी रहने पर 22,500/72,500 की तरफ इंट्राडे पुलबैक दिख सकता है। सपोर्ट लेवल टूटने पर फिर से बिकवाली के लिए रास्ता खुल सकता है।

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Stock Market Rise: इन 3 वजहों से शेयर बाजार में रौनक! सेंसेक्स 850 अंक उछला, निफ्टी 22500 के पार

Stock Market Rise: गुरुवार के चौतरफा बिकवाली के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार ने जोरदार बाउंस-बैक किया है। पिछले सत्र में निचले स्तरों पर जाने के बाद ओवरसोल्ड जोन से आई ‘वैल्यू बाइंग’ और आईटी शेयरों में मची तूफानी खरीदारी के दम पर दोनों मुख्य सूचकांक हरे निशान में ट्रेड कर रहे हैं।

सुबह 10:22 बजे, सेंसेक्स 737.26 अंक (1.02%) की मजबूत बढ़त के साथ 72,330.50 और निफ्टी 50 भी 243.20 अंक (1.09%) चढ़कर 22,475.00 के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, निफ्टी बैंक 610 अंक (1.11%) सुधरकर 55,125.50 पर और मिडकैप 100 इंडेक्स 732 अंक (1.26%) चढ़कर 58,615.30 पर आ गया है। अमेरिकी वायदा बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है।

Stock Market Live Update: सेंसेक्स 700 अंक चढ़ा, निफ्टी 22,450 पर, TCS, Apollo Hospitals शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी

बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बदलने की सबसे बड़ी वजह दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) के शानदार नतीजे रहे, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.45% (958 अंक) का उछाल आया। टीसीएस के शेयर में करीब 4% की तेजी ने पूरे बाजार को सहारा दिया।

शेयर बाजार में रौनक लौटने की 3 मुख्य वजहें

1. आईटी शेयरों में जोरदार खरीदारी: दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के दूसरी तिमाही (Q2 FY27) में 15% मुनाफा बढ़कर ₹13,884 करोड़ रहने और ₹12 प्रति शेयर डिविडेंड के ऐलान से आईटी शेयरों में शानदार तेजी आई है। टीसीएस का शेयर करीब 4% उछला, जिसने पूरे निफ्टी आईटी इंडेक्स को 3.45% मजबूत कर दिया।

2. टेक्निकल बाउंस-बैक: बीते सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी में 1,000 से ज्यादा अंकों की गिरावट के बाद बाजार ओवरसोल्ड जोन में चला गया था। निचले स्तरों पर निवेशकों और संस्थागत खरीदारों की ओर से आई ‘वैल्यू बाइंग’ ने बाजार को सहारा दिया है।

3. वैश्विक बाजारों से मजबूत संकेत: अमेरिकी वायदा बाजारों में 0.5% तक की बढ़त देखी गई, जिसने घरेलू बाजार के सेंटिमेंट को बूस्ट करने का काम किया है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sensex-Nifty Recovery: इस लेवल से वापस घूमा मार्केट, 460 प्वाइंट्स चढ़ा सेंसेक्स, 4 वजहों से निफ्टी ग्रीन

Share Market Recovery: निचले स्तर पर खरीदारी यानी वैल्यू बाइंग के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी ने निचले स्तर पर अच्छी रिकवरी की। निचले स्तर से सेंसेक्स 460.00 प्वाइंट्स रिकवर हुआ तो निफ्टी भी 22750 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी रौनक छाई हुई है और स्मॉलकैप स्पेस में अधिक। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में करीब आधे फीसदी की बढ़त है तो निफ्टी मिडकैप 100 भी ग्रीन है। अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स की बात करें फिलहाल 12:03 PM पर सेंसेक्स (Sensex) 317.24 प्वाइंट्स यानी 0.44% की बढ़त के साथ 72846.31 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 30.25 प्वाइंट्स यानी 0.13% की मजबूती के साथ 22746.45 पर है।

इंट्रा-डे में सेंसेक्स 89.02 प्वाइंट्स टूटकर 72,440.05 तक आया जिससे यू-टर्न लेकर यह 459.59 प्वाइंट्स ऊपर चढ़ा और 72,899.64 तक पहुंच गया तो दूसरी तरफ 56.40 टूटकर 22,659.80 तक आने के बाद निफ्टी 112.00 प्वाइट्स रिकवर हुआ और 22,771.80 तक पहुंचा।

Sensex-Nifty Recovery: ये है वजह

वैल्यू बाइंग

निचले स्तर पर खरीदारी यानी वैल्यू बाइंग से मार्केट को सपोर्ट मिला।

India VIX में नरमी

मार्केट की घबराहट को मापने वाले वोलैटिलिटी इंडेक्स India VIX की नरमी से मार्केट पाने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल यह 0.76% की गिरावट के साथ 13.31 पर है। इसके अधिक होने का मतलब शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बढ़ने की आशंका और कम होने का मतलब शॉर्ट टर्म में उठा-पटक कम होने की संभावना है।

बैंकिंग और आईटी स्टॉक्स का मजबूत सपोर्ट

फार्मा और मेटल स्टॉक्स मार्केट को तोड़ने की कोशिश में हैं लेकिन बैंकिंग और आईटी शेयर इसे संभालने की कोशिश में हैं। निफ्टी फार्मा में डेढ़ फीसदी से अधिक कमजोरी है और निफ्टी मेटल भी करीब 1% टूटा है तो दूसरी तरफ सरकारी और प्राइवेट बैंकों के साथ-साथ आईटी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स 1-1% से अधिक मजबूत दिख रहे हैं।

तकनीकी वजह

एनालिस्ट्स के मुताबिक आगे और बेयरेश सेंटिमेंट तभी दिखेगा, जब निफ्टी 22,650 के नीचे आता है। कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का कहना है कि मार्केट का शॉर्ट-टर्म रुझान कमजोर बना हुआ है लेकिन पुलबैक रैली की भी संभावना बनी हुई है। श्रीकांत के मुताबिक डे-ट्रेडर्स के लिए 22,600/72,200 एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। इस लेवल के ऊपर बने रहने से निफ्टी 22,850–23,000 और सेंसेक्स 73,000–73,500 की तरफ बढ़ सकता है। हालांकि अगर सपोर्ट जोन टूटा तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 22,500–22,300/72,000–71,400 की तरफ खिसक सकते हैं। इसका मतलब हुआ कि मार्केट में उठा-पटक की संभावना बनी हुई है।

बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि मार्केट की कमजोरी बनी रहती है तो यह 22,400 के अहम सपोर्ट एरिया की तरफ फिसल सकता है। यह एरिया पिछले दो वर्षों के अहम निचले स्तरों को जोड़ने वाली ट्रेंडलाइन सपोर्ट और 200-हफ्ते के EMA को जोड़ने वाला प्वाइंट है। उनका कहना है कि 22,830 के ऊपर जाने पर 23,000 के लेवल की तरफ पुलबैक का संकेत मिलेगा। हालांकि इसके लिए जरूरी होगा कि निफ्टी लगातार हायर हाई-हायर लो स्ट्रक्चर बनाना होगा और 23,000-23,100 का लेवल फिर से हासिल करना होगा। अगर यह 23,100 के ऊपर लगातार बना रहा तो गिरावट थमने का संकेत मिल सकता है। उनका कहना है कि डेली स्टॉकेस्टिक 13 पर आ गया है जोकि ओवरसोल्ड टेरिटरी में है यानी कि तेज रिकवरी की सभावना बनी हुई है।

चॉइस ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट हितेश टेलर का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद अहम टेक्निकल लेवल पर खरीदारी के दम पर सेंसेक्स और निफ्टी ऊपर आ सकता है। हालांकि FIIs यानी विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली चिंता की बात बनी हुई है और इससे रिकवरी सीमित हो सकती है। निफ्टी और बैंक निफ्टी के अहम सपोर्ट जोन के करीब होने के कारण इंट्रा-डे प्राइस एक्शन सतर्कता के साथ एक दायरे में रह सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Infosys Share Price: इंट्राडे में छह साल के निचले स्तर पर आया इंफोसिस, अब खरीदें या बेचने में भलाई?

Infosys Share Price: आईटी कंपनी Infosys के शेयर मंगलवार को NSE पर छह साल के निचले स्तर ₹980.40 तक पहुंच गए। हालांकि, बाद में शेयर में रिकवरी आई और यह ₹1,015.40 पर बंद हुआ। दिन में शेयर 1.2% चढ़ा।

Nifty IT के शेयरों में Infosys ही बढ़त के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, Nifty IT इंडेक्स 1.5% गिर गया। LTIMindtree और Mphasis में 4% तक की गिरावट रही।

चार्ट पर डाउनट्रेंड साफ

Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक इंफोसिस के डेली चार्ट पर डाउनट्रेंड साफ दिख रहा है। शेयर लगातार निचले हाई और निचले लो बना रहा है।

20-डे, 50-डे और 200-डे जैसे प्रमुख मूविंग एवरेज भी नीचे जा रहे हैं। इससे शेयर पर दबाव बना हुआ है। शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेज फिलहाल रेजिस्टेंस की तरह काम कर रहा है।

₹980-1,000 का सपोर्ट अहम

मयंक जैन का कहना है कि इंफोसिस अभी ₹980-1,000 के अहम सपोर्ट जोन के आसपास है। मौजूदा स्तर से शेयर में कुछ समय के लिए रिकवरी हो सकती है।

अगर सपोर्ट से खरीदारी आती है तो शेयर ₹1,100-1,150 तक जा सकता है। हालांकि, यह सिर्फ शॉर्ट टर्म राहत वाली तेजी हो सकती है।

अगर शेयर भारी वॉल्यूम के साथ ₹980 के नीचे बंद होता है तो बिकवाली और बढ़ सकती है। ऐसे में आगे और कमजोरी देखने को मिल सकती है।

₹1,180-1,200 पर बड़ी चुनौती

जैन के मुताबिक, ऊपर की तरफ ₹1,180-1,200 का जोन अहम रेजिस्टेंस है। यह शेयर के पिछले ब्रेकडाउन का स्तर है। यहां पहुंचने पर बिकवाली का दबाव आ सकता है।

उनका कहना है कि इंफोसिस में मजबूत तेजी का ट्रेंड तभी बन सकता है जब शेयर ₹1,200 के ऊपर टिके। इसके साथ 200-डे मूविंग एवरेज के ऊपर जाना भी जरूरी होगा।

फंडामेंटल पर भी दबाव

129 Wealth & Research के फंड मैनेजर और एनालिस्ट प्रसेनजित पॉल के मुताबिक कंपनी AI, टैलेंट और प्लेटफॉर्म में निवेश बढ़ा रही है। Q1 FY27 में कंपनी का मार्जिन 21.1% था।

हालांकि, इन निवेशों का असर आने वाले समय में ग्रोथ और मार्जिन पर पड़ सकता है। पॉल का कहना है कि फंडामेंटल आउटलुक अभी सकारात्मक नहीं है। टेक्निकल चार्ट भी कमजोरी दिखा रहा है।

Nifty Outlook: सितंबर में 1600 अंक से ज्यादा टूटा निफ्टी, क्या अब 22600 का अहम लेवल बचेगा?

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