Q2 Results: आईटी कंपनी को ₹1586 करोड़ का मुनाफा, डिविडेंड और बोनस शेयर का ऐलान

Q2 Results: आईटी कंपनी Tech Mahindra ने सितंबर तिमाही में 1,586 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया। यह जून तिमाही के 1,465 करोड़ रुपये से 8.2% ज्यादा है। CNBC-TV18 के पोल में मुनाफा 1,576 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। यानी कंपनी के नतीजे अनुमान से बेहतर रहे।

डॉलर में रेवेन्यू भी बढ़ा

टेक महिंद्रा का डॉलर में रेवेन्यू भी 2% बढ़कर 1,693 मिलियन डॉलर हो गया। जून तिमाही में यह 1,660 मिलियन डॉलर था। वहीं, EBIT यानी ऑपरेटिंग मुनाफा सालाना आधार पर 40.5% बढ़कर 2,387 करोड़ रुपये पहुंच गया।

कंपनी का EBIT मार्जिन भी सुधरा है। यह जून तिमाही के 14.4% से बढ़कर 14.8% हो गया। Tech Mahindra का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के अंत तक इसे 15% तक पहुंचाना है।

डिविडेंड और बोनस शेयर को मंजूरी

टेक महिंद्रा ने शेयरधारकों को 15 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का ऐलान किया है। इसके अलावा, बोर्ड ने 1:1 बोनस शेयर जारी करने को भी मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र निवेशकों को हर एक शेयर के बदले एक अतिरिक्त शेयर मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए जरूरी मंजूरियां मिलना बाकी है।

नए ऑर्डर और AI से ग्रोथ की उम्मीद

टेक महिंद्रा के CEO मोहित जोशी ने तिमाही प्रदर्शन को बेहद मजबूत बताया। सितंबर तिमाही में कंपनी को 1.023 अरब डॉलर के नए सौदे मिले। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस कारोबार में 4.6% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, हेल्थकेयर कारोबार 6.6% बढ़ा।

कंपनी को Orange के बड़े टेलीकॉम प्रोजेक्ट से भी मदद मिली। Avant Techno Solutions के अधिग्रहण से भी तिमाही के रेवेन्यू में योगदान हुआ। इसके अलावा, Tech Mahindra AI कारोबार को बढ़ाने पर जोर दे रही है। कंपनी के मुताबिक, उसका AI कलेक्शन सॉल्यूशन बकाया रकम की वसूली में करीब 40% तक एफिशिएंसी बढ़ा रहा है। कंपनी ने Cisco और SpaceX AI के साथ भी साझेदारी की घोषणा की है।

H-1B वीजा पर क्या बोले CEO?

अमेरिका के वीजा नियमों से जुड़े सवाल पर मोहित जोशी ने कहा कि अमेरिकी सरकार ने जिन कंपनियों का नाम लिया था, उनमें Tech Mahindra शामिल नहीं थी। उन्होंने कहा कि कंपनी दुनियाभर में वीजा नियमों और उनके अनुपालन को लेकर सतर्क रहती है।

जोशी के मुताबिक, H-1B वीजाधारक कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 1% हैं। कंपनी का अमेरिका और वैश्विक स्तर पर स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती पर जोर है।

शेयर में 4.75% की तेजी

नतीजों की घोषणा से पहले गुरुवार को Tech Mahindra का शेयर 4.75% बढ़कर 1,650 रुपये पर बंद हुआ। इस तेजी से शेयर सालभर के हिसाब से भी बढ़त में आ गया। पिछले 12 महीनों में इसमें 13% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।

Jio Platforms IPO: जानिए वैल्यूएशन, रेवेन्यू और मुनाफे के मामले में भारती एयरटेल के मुकाबले कितना मजबूत है जियो प्लेटफॉर्म्स

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘औपनिवेशिक मानसिकता वाली भाषा अपमानजनक!’ US PERM विवाद पर अमेरिका को भारत का करारा जवाब

PERM Program Suspension: अमेरिका द्वारा चुनिंदा कंपनियों के ‘परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन’ (PERM) प्रोग्राम को निलंबित किए जाने और इस संबंध में अमरीकी उप-राष्ट्रपति की ओर से की गई टिप्पणियों पर भारत सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक विस्तृत और सख्त बयान जारी करते हुए साफ किया है कि इस फैसले से H-1B वीजा धारकों के मौजूदा स्टेटस पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह दोनों देशों के आपसी आर्थिक और तकनीकी हितों के अनुकूल नहीं है।

इसके साथ ही, भारत ने अमेरिकी उप-राष्ट्रपति द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा और बयानों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित और अपमानजनक करार दिया है।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयान के 5 मुख्य बिंदु:

1. PERM प्रोग्राम के निलंबन पर भारत की नजर

भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी श्रम विभाग द्वारा कुछ विशेष कंपनियों के लिए PERM प्रोग्राम को निलंबित करने के फैसले पर बारीकी से नजर बनाए हुए है।

2. H-1B वीजाधारकों पर नहीं पड़ेगा असर, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया हो सकती है प्रभावित

विदेश मंत्रालय ने आम लोगों और आईटी पेशेवरों की आशंकाओं को दूर करते हुए स्थिति साफ की है। PERM प्रोग्राम, H-1B वीजा व्यवस्था से पूरी तरह अलग है। इस सस्पेंशन का असर पहले से जारी H-1B वीजा की वैधता या वीजा धारकों और उनके आश्रितों के लीगल स्टेटस पर नहीं पड़ेगा। हालांकि, प्रभावित कंपनियों के पात्र कर्मचारियों की स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया पर कुछ असर पड़ सकता है।

3. प्रतिभाओं की आवाजाही दोनों देशों के हित में

बयान में भारत ने अमेरिका को याद दिलाया कि कुशल भारतीय पेशेवरों का अमेरिका जाना दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल भारतीयों के लिए अवसर पैदा करता है, बल्कि अमेरिकी कंपनियों को विश्वस्तरीय टैलेंट, इनोवेशन, रिसर्च, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में बढ़त दिलाता है।

भारतीय टैलेंट अमेरिका में जॉब क्रिएशन और शेयरधारकों के लिए वेल्थ (संपत्ति) बनाने में अहम भूमिका निभाता है। अमेरिका का यह कदम दोनों देशों की साझी महत्त्वाकांक्षाओं और प्रगति को आगे नहीं बढ़ाता है।

4. US उप-राष्ट्रपति की टिप्पणियों पर सख्त ऐतराज

अमेरिकी उप-राष्ट्रपति के बयान पर कड़ा रुख अपनाते हुए भारत सरकार ने कहा, ‘ऐसी टिप्पणियां पूरी तरह अनावश्यक और अनुचित हैं। ये बयान इस सच्चाई को नजरअंदाज करते हैं कि अमेरिका में रहने वाले भारतीय पेशेवर अत्यधिक शिक्षित, कुशल और वहां के इनोवेशन इकोसिस्टम के प्रमुख आधार हैं।’

अमेरिका का खुद का इतिहास आप्रवासियों की मेहनत और नवाचार से गढ़ा गया है। ऐसी शब्दावली या भाषा का इस्तेमाल करना, जिसमें औपनिवेशिक काल की दर्दनाक यादें जुड़ी हों, बेहद अपमानजनक और आपत्तिजनक है।

5. स्थिति पर लगातार निगरानी

भारत सरकार ने कहा है कि वह इस मुद्दे से जुड़ी हर एक डेवलपमेंट पर लगातार नजर रख रही है और अमेरिकी प्रशासन के साथ सभी हितधारकों के सामने भारतीय पेशेवरों के हितों को मजबूती से उठाती रहेगी।

H-1B Visa पर ट्रंप का बड़ा एक्शन, $1 लाख फीस का आदेश एक और साल के लिए बढ़ाया; भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?

अमेरिका में नौकरी का सपना देखने वाले लाखों विदेशी प्रोफेशनल्स, खासकर भारतीय IT कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B नॉन-इमिग्रेंट वीजा प्रोग्राम की निगरानी को सख्त करने वाले एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं। इसके तहत H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने वाले आदेश की अवधि एक साल के लिए बढ़ा दी गई है। हालांकि, इस मामले को लेकर कानूनी लड़ाई अभी अदालत में जारी है, लेकिन ट्रंप के इस फैसले के बाद अमेरिका की इमिग्रेशन पॉलिसी और विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।

बता दें की ट्रंप ने कुछ एम्प्लॉयर्स, थर्ड-पार्टी प्लेसमेंट ग्रुप्स और आउटसोर्सिंग फर्मों पर आरोप लगाया है कि वे कम वेतन वाले विदेशी कर्मचारियों से कुशल अमेरिकी कर्मचारियों को बदलने के लिए इस सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने यह नया आदेश 18 सितंबर 2026 को जारी किया। इसका नाम “Enhancing Program Integrity and Interagency Coordination in the Administration of the H-1B Nonimmigrant Visa Program” है। इस आदेश का मकसद H-1B वीजा प्रोग्राम की निगरानी और नियमों को और सख्त करना है।

अमेरिका ने वेतन में अंतर और नौकरियों के नुकसान का हवाला दिया

आदेश के अनुसार, H-1B प्रोग्राम को खास हुनर ​​वाले और बहुत ज्यादा स्पेशलाइज्ड विदेशी अस्थायी कर्मचारियों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लाने के लिए बनाया गया था। हालांकि, इसमें कहा गया है कि इस प्रोग्राम का “बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल” किया गया है, जिससे कुशल अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखा गया और वेतन कम हुआ।

व्हाइट हाउस ने दावा किया कि सस्ते H-1B कर्मचारियों की वजह से घरेलू वेतन पर दबाव पड़ता है। उसने कहा कि H-1B वीजा धारक, H-1B पर निर्भर उद्योगों में उसी तरह के काम करने वाले अमेरिका में जन्मे कर्मचारियों की तुलना में $9,000 से $20,000 कम कमाते हैं, जबकि समान वेतन का कानूनी नियम है।

आदेश में यह भी कहा गया है कि टेक्नोलॉजी सेक्टर की कंपनियों ने 2022 से 2026 के बीच 8 लाख से 13 लाख अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालते हुए भी लाखों कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा की मांग की थी। इसमें आरोप लगाया गया कि कुछ कंपनियों ने नौकरी से निकाले गए अमेरिकी कर्मचारियों से ही उनकी जगह लेने वाले विदेशी कर्मचारियों को ट्रेनिंग दिलवाई।

आदेश में कहा गया, “सस्ते H-1B कर्मचारियों का गलत इस्तेमाल घरेलू वेतन पर दबाव डालता है। कानून के तहत H-1B कर्मचारियों को उनके घरेलू कर्मियों के बराबर वेतन मिलना चाहिए, फिर भी H-1B वीजा धारक अमेरिका में जन्मे समान स्तर के कर्मचारियों की तुलना में बहुत कम कमाते हैं। वेतन में यह अंतर $9,000 से शुरू होकर H-1B पर निर्भर उद्योगों में $20,000 तक पहुंच जाता है।”

आउटसोर्सिंग’ करने वाली कंपनियां चर्चा में

आदेश में कहा गया है कि कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियां H-1B वीजा वाले कर्मचारियों का इस्तेमाल थर्ड-पार्टी क्लाइंट कंपनियों के अमेरिकी कर्मचारियों की जगह लेने के लिए करती हैं। इसके बाद इन कंपनियों का काफी काम विदेशों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

आदेश के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में इस तरह के आउटसोर्सिंग मॉडल पर काम करने वाली छह सबसे बड़ी H-1B इस्तेमाल करने वाली कंपनियों ने 25,000 से ज्यादा H-1B वीजा रजिस्ट्रेशन किए। आदेश में एक विदेशी मंत्री के बयान का भी जिक्र किया गया है, जिसमें कहा गया कि H-1B वीजा अब ‘आउटसोर्सिंग वीजा’ बन गया है।

वहीं, व्हाइट हाउस ने H-1B प्रोग्राम के इस कथित गलत इस्तेमाल को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंता बताया है। उसके मुताबिक, अमेरिकी जांच एजेंसियों ने H-1B पर निर्भर कुछ आउटसोर्सिंग कंपनियों के खिलाफ वीजा धोखाधड़ी, पैसे की हेराफेरी की साजिश और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को लेकर जांच की है।

आदेश में आगे कहा गया है कि इस तरह के दुर्व्यवहार अमेरिकियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने से हतोत्साहित कर सकते हैं और इन क्षेत्रों में अमेरिका की लीडरशिप को खतरे में डाल सकते हैं।

एजेंसियां ​​एम्प्लॉयर द्वारा कर्मचारियों की छंटनी की जांच करेंगी

नए आदेश के तहत, विदेश, श्रम और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के सचिवों को H-1B वीजा की अर्जियों, लेबर कंडीशन एप्लीकेशन और वीजा की प्रक्रिया के दौरान वाणिज्य और शिक्षा विभाग के सचिवों के साथ मिलकर काम करना होगा। इसमें स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के एडमिनिस्ट्रेटर भी शामिल होंगे।

ये सभी एजेंसियां कर्मचारियों की सैलरी, रोजगार, शिक्षा, इंडस्ट्री और अर्थव्यवस्था से जुड़ी अन्य जानकारी आपस में साझा करेंगी। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि H-1B वीजा से जुड़े नियम इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट के मुताबिक लागू किए जा रहे हैं।

नए आदेश के तहत इमिग्रेशन अधिकारियों को यह भी देखना होगा कि H-1B वीजा के लिए स्पॉन्सर करने वाली किसी कंपनी ने पिछले एक साल में सीधे या किसी अन्य तरीके से कर्मचारियों की छंटनी की है या नहीं। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि कंपनी भविष्य में ऐसी छंटनी करने की योजना तो नहीं बना रही है, जिससे समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी कर्मचारियों पर नकारात्मक असर पड़े।

आदेश के मुताबिक, 30 दिनों के भीतर, लेबर डिपार्टमेंट के ‘वेज एंड आवर डिवीजन’ को पहले जमा किए गए ‘लेबर कंडीशन एप्लीकेशन’ के डेटा की समीक्षा शुरू करनी होगी, ताकि यह तय किया जा सके कि क्या स्पॉन्सर करने वाले एम्प्लॉयर्स के खिलाफ आगे कोई कार्रवाई करने की रूरत है।

अमेरिकी सरकार की जांच में क्या सामने आया?

आदेश के मुताबिक, अमेरिका के कई सरकारी विभागों और एजेंसियों ने H-1B वीजा का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों में बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियों की जानकारी दी है। आरोप है कि कुछ कंपनियां कम वेतन और कम स्किल वाले विदेशी कर्मचारियों को नौकरी पर रखने के लिए H-1B प्रोग्राम का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।

जांच में जिन कथित नियमों के उल्लंघन का जिक्र किया गया है, उनमें अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को रखना, नौकरी की जिम्मेदारियों और काम की परिस्थितियों के बारे में गलत जानकारी देना, ऐसी नौकरियों को ‘स्पेशलिटी ऑक्युपेशन’ बताना जो इसके योग्य नहीं हैं, जरूरी वेतन को कम दिखाना और फर्जी या संदिग्ध डिग्री देने वाले संस्थानों (डिप्लोमा मिल) की डिग्री के आधार पर H-1B आवेदन जमा करना शामिल है।

वहीं, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी वर्कफोर्स की सुरक्षा और उन्हें प्राथमिकता देने के लिए और कदम उठाने की जरूरत है, साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि H-1B प्रोग्राम राष्ट्रीय हित में काम करे।

इस आदेश के तहत विदेश, वाणिज्य, श्रम और होमलैंड सिक्योरिटी विभागों के सचिवों को इसे लागू करने के लिए जरूरी नियम, नीतियां और ऑपरेशनल गाइडेंस जारी करने या अपनाने का अधिकार दिया गया है।

व्हाइट हाउस ने कहा कि इस आदेश को लागू करते समय मौजूदा कानूनों और उपलब्ध फंड का ध्यान रखा जाएगा। साथ ही, यह भी कहा गया कि इस आदेश से अमेरिकी सरकार या उसकी एजेंसियों के खिलाफ कोई ऐसा कानूनी अधिकार या लाभ नहीं बनता, जिसे अदालत में लागू कराया जा सके।

क्या है H-1B वीजा कार्यक्रम?

अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 1990 में शुरू किया गया यह वीजा कार्यक्रम विशेष रूप से उन प्रौद्योगिकी (टेक) कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत और चीन से प्रतिभाशाली पेशेवरों की भर्ती करना चाहती हैं। H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत अमेरिकी कंपनियां विदेशी कुशल पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। तकनीकी, इंजीनियरिंग, आईटी, वित्तीय सेवाओं और अन्य विशेषज्ञ क्षेत्रों में काम करने वाले हजारों पेशेवर हर साल इस वीजा के माध्यम से अमेरिका जाते हैं। यह कार्यक्रम विशेष रूप से भारतीय और चीनी पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

किन लोगों पर लागू नहीं होगा आदेश

यह आदेश उन विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होता जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में मौजूद हैं और बाद में H-1B वीजा प्राप्त करते हैं। इसके अलावा मौजूदा H-1B वीजा के नवीनीकरण पर भी यह नियम लागू नहीं किया गया है.।इसी कारण नए आवेदकों और पहली बार वीजा प्रायोजन कराने वाली कंपनियों पर इसका प्रभाव अधिक माना जा रहा है।

यह भी पढ़ें: रूस पर ट्रंप का शिकंजा, 100% टैरिफ वाले बिल पर किया साइन, जानें भारत और चीन पर कैसे पड़ेगा असर