Stock Market View: अगले 6 महीने तेजी में मुनाफावसूली की रणनीति करेगी काम, पावर और एक्सपोर्ट सेगमेंट में कमाई के मौके

Stock Market View : 13 अक्टूबर के शानदार सेशन के बाद मार्केट पर आज फिर दबाव देखने को मिल रहा है। निफ्टी 22,700 के लेवल से नीचे आ गया है। बुल्स मोमेंटम बनाए रखने के लिए संघर्ष रहे हैं। सेंसेक्स भी थोड़ा नीचे है और 73,000 के लेवल से नीचे फिसल गया है। निफ्टी बैंक इंडेक्स भी मंदडियों की पकड़ से जूझ रहा है और लगभग 100 अंक नीचे है। बाजार जानकारों का कहना है कि निफ्टी के लिए निचले स्तर पर 22,700 का लेवल बचाए रखना अहम होगा। वहीं, फिर से तेजी पकड़ने के लिए 23,000 के लेवल तक पहुंचना भी जरूरी होगा।

ऐसे माहौल में मार्केट आउटलुक पर चर्चा करते हुए डाइमेंशन्स कॉर्पोरेट फाइनेंस सर्विसेज़ ( Dimensions Corporate Finance Services) के मैनेजिंग डायरेक्टर अजय श्रीवास्तव ने कहा कि रुपए में गिरावट और महंगाई बढ़ने के चलते बाजार पर दबाव देखने को मिल रहा है। बाजार की गिरावट से कोई सरप्राइज नहीं है। अगले 6 महीने तक बाजार में मुनाफावूसली की रणनीति काम करती दिखेगी।

मिडकैप में अच्छी तेजी रही है। प्राइमरी मार्केट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि IPO का सबसे ज्यादा फायदा एंकर निवेशकों ने उठाया है। IPO से रिटेल निवेशकों को खास फायदा नहीं हुआ है। बाजार की तेजी में मुनाफावसूली की रणनीति रखें। मिडकैप में प्रॉफिट बुकिंग की रणनीति बेहतर काम करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि इस समय इंजीनियरिंग में पावर और एक्सपोर्ट सेगमेंट में कमाई के मौके हैं। इन सेगमेंट में क्वालिटी शेयरों पर फोकस करें। नॉन-फेरस मेटल की थीम भी बेहतर है। NBFCs में गोल्ड लोन कंपनियां बेहतर लग रही हैं।

फार्मा शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि CDMO शेयर लंबी अवधि के नजरिए से अच्छे लग रहे हैं। इनमें एंट्री पर ध्यान दें। इसके अलावा इंडिया का होटल सेक्टर अच्छा कर सकता है। न्यू ऐज शेयर भी लंबी अवधि के लिहाज से अच्छे लग रहे हैं। आईटी शेयरों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि IT काफी ओवरसोल्ड है। इस सेक्टर को रुपए की गिरावट से फायदा होगा। फिर भी IT सेक्टर में अभी दम नहीं नजर आ रहा है। उनका यह भी मानना है कि स्टारलिंक से टेलीकॉम की तस्वीर बदलती नजर आएगी।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

NCL Industries Q2 Update: सीमेंट प्रोडक्शन और डिस्पैच 22% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

NCL Industries Q2 Update: सीमेंट कंपनी NCL Industries का दूसरी तिमाही में कारोबार बेहतर रहा। कंपनी का सीमेंट प्रोडक्शन और डिस्पैच दोनों 22% बढ़े हैं। कंपनी ने अपने लेटेस्ट प्रोडक्शन और डिस्पैच अपडेट में यह जानकारी दी।

30 सितंबर 2026 को खत्म हुई तिमाही में सीमेंट का प्रोडक्शन 7.81 लाख टन रहा। एक साल पहले इसी तिमाही में यह 6.40 लाख टन था। सीमेंट डिस्पैच भी 22% बढ़कर 7.79 लाख टन हो गया। पिछले साल यह 6.40 लाख टन था।

सीमेंट बोर्ड का प्रोडक्शन भी 22% बढ़ा

सीमेंट बोर्ड के प्रोडक्शन में भी 22% की बढ़ोतरी हुई। यह बढ़कर 13,071 टन हो गया। एक साल पहले यह 10,673 टन था। हालांकि, सीमेंट बोर्ड का डिस्पैच 3% घट गया। तिमाही में यह 13,953 टन रहा। पिछले साल इसी तिमाही में डिस्पैच 14,346 टन था।

RMC कारोबार में गिरावट

रेडी-मिक्स कंक्रीट यानी RMC का कारोबार कमजोर रहा। दूसरी तिमाही में इसका प्रोडक्शन और बिक्री 10% घटकर 59,882 क्यूबिक मीटर रह गई। एक साल पहले इसी तिमाही में RMC का प्रोडक्शन और बिक्री 66,185 क्यूबिक मीटर थी।

हाइड्रो पावर जनरेशन भी घटी

कंपनी के हाइड्रो पावर कारोबार में भी बड़ी गिरावट आई। दूसरी तिमाही में हाइड्रो पावर जनरेशन 43% घटकर 9.22 मिलियन यूनिट यानी MU रही। Q2 FY26 में हाइड्रो पावर जनरेशन 16.14 MU थी।

छह महीने में सीमेंट कारोबार मजबूत

वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में सीमेंट प्रोडक्शन 16% बढ़कर 14.74 लाख टन रहा। सीमेंट डिस्पैच भी 15% बढ़कर 14.60 लाख टन हो गया। हालांकि, सीमेंट बोर्ड का प्रोडक्शन 12% घटा। यह 24,710 टन रहा। दूसरी ओर, सीमेंट बोर्ड का डिस्पैच 6% बढ़कर 27,076 टन हो गया।

पहली छमाही में RMC का प्रोडक्शन और बिक्री 18% घटकर 1.15 लाख क्यूबिक मीटर रही। वहीं, हाइड्रो पावर जनरेशन 43% गिरकर 9.22 MU रह गई।

NCL Industries के शेयर का हाल

NCL Industries के शेयर गुरुवार को NSE पर शेयर 2.28% गिरकर 160.20 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 13.96% बढ़ा है। 1 साल में यह 22.26% टूटा है। कंपनी का मार्केट कैप 738.51 करोड़ रुपये है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GST Council Meeting: 57वीं बैठक में बड़े बदलाव, रिफंड से लेकर रजिस्ट्रेशन और गिरफ्तारी तक बदलेगा सिस्टम

GST Council Meeting: GST काउंसिल की 57वीं बैठक में कारोबारियों और टैक्सपेयर्स के लिए कई बड़े प्रोसेस सुधारों को मंजूरी दी गई है। इनका मकसद GST को समझना और उसका पालन करना आसान बनाना है। साथ ही रिफंड की प्रक्रिया तेज होगी और टैक्स अधिकारियों का फिजिकल इंटरवेंशन कम किया जाएगा।

ये बदलाव GST के दो-दर वाले स्ट्रक्चर लागू होने के करीब एक साल बाद किए गए हैं। सरकार के मुताबिक, टैक्सेबल सप्लाई 25.8% बढ़कर हर महीने 50.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है। पहले यह 40.19 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, कंज्यूमर्स को रिपोर्ट की गई सप्लाई 26.7% बढ़कर 7.58 लाख करोड़ रुपये हो गई है।

इस दौरान घरेलू सप्लाई पर प्रभावी टैक्स रेट भी घटा है। यह 14.55% से कम होकर 13.13% रह गया है। अब Council का फोकस टैक्स रेट से हटकर GST के रोजमर्रा के कामकाज पर है। इसमें रजिस्ट्रेशन, रिटर्न, रिफंड, मुकदमे और टैक्स कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं।

GST रिफंड अब तेजी से मिलेगा

सबसे बड़ा बदलाव रिफंड की प्रक्रिया में किया गया है। रिफंड क्लेम को स्वीकार करने की समयसीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव है। अगर 10 दिन के भीतर न तो एक्नॉलेजमेंट जारी होता है और न ही डेफिशिएंसी मेमो, तो क्लेम को अपने आप एक्नॉलेज्ड माना जाएगा।

अब सिस्टम रिस्क असेसमेंट के आधार पर रिफंड क्लेम की 90% रकम को मंजूर करेगा। इसमें अधिकारी की भूमिका कम होगी। एक्नॉलेजमेंट के तीन वर्किंग डे के भीतर रिफंड ऑर्डर जारी करना होगा। अभी इसके लिए सात दिन का समय है।

कैश लेजर में पड़े अतिरिक्त बैलेंस का रिफंड भी पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा। इसमें अधिकारी के दखल की जरूरत नहीं होगी। इसका फायदा खासकर एक्सपोर्टर्स और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के तहत काम करने वाले कारोबारियों को मिल सकता है। करीब 65% रिफंड क्लेम एक्सपोर्ट या इनवर्टेड रेट से जुड़े हैं, जबकि 19% क्लेम कैश लेजर में पहले से पड़े बैलेंस से जुड़े हैं।

GST रजिस्ट्रेशन भी ज्यादा ऑटोमैटिक होगा

GST रजिस्ट्रेशन और उसमें बदलाव की प्रक्रिया को भी और ऑटोमैटिक करने का प्रस्ताव है। अभी कम जोखिम वाले आवेदकों को बिना अधिकारी की मंजूरी के सिस्टम के जरिए तीन वर्किंग डे में रजिस्ट्रेशन मिल सकता है। कुल रजिस्ट्रेशन में ऐसे मामलों की हिस्सेदारी 61% है।

रजिस्ट्रेशन फॉर्म को भी बदला जाएगा। इसमें आवेदक को वही फील्ड दिखाई जाएंगी, जो उसके लिए जरूरी हैं। साथ ही, मांगे जा रहे दस्तावेजों का मकसद भी बताया जाएगा। इससे आवेदन भरने की प्रक्रिया ज्यादा आसान हो सकती है।

ट्रेड नेम, डायरेक्टर या पार्टनर और कारोबार की अतिरिक्त जगहों में बदलाव जैसे कई सामान्य संशोधन अपने आप मंजूर किए जाएंगे। नवंबर 2025 से सितंबर 2026 के बीच दाखिल 16.73 लाख रजिस्ट्रेशन अमेंडमेंट एप्लिकेशन में से 65.45% इन्हीं कैटेगरी से जुड़े थे।

Input Tax Credit में कारोबारियों को राहत

Council ने कई क्षेत्रों में Input Tax Credit यानी ITC का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अब कर्मचारियों के लिए लिए गए हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पर भी ITC मिल सकेगा। फैक्ट्री के बाहर लगे टेलीकॉम टावर और पाइपलाइन पर भी इसका फायदा मिलेगा।

एक्सपायरी के कारण खराब स्टॉक पर भी ITC मिलेगा, अगर कानून के तहत उस सामान को नष्ट करना जरूरी है। फ्री सैंपल पर भी ITC उपलब्ध होगा। इससे उन कारोबारियों को राहत मिल सकती है, जिनके कारोबार में ऐसे खर्च नियमित रूप से होते हैं।

सरकार ने कुछ B2B सर्विस चेन में डबल टैक्सेशन रोकने की भी पहल की है। एजेंट के जरिए बुक किए गए 7,500 रुपये प्रति रात तक के होटल कमरे, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सर्विस और पैसेंजर ट्रांसपोर्ट जैसी सेवाओं पर टैक्स दो बार लेने के बजाय एक बार ही लिया जाएगा।

इनवर्टेड ड्यूटी में ITC रिफंड का दायरा बढ़ेगा

मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स के लिए भी एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। इनवर्टेड रेट स्ट्रक्चर में रिफंड का दायरा बढ़ाया जाएगा। अभी रिफंड सिर्फ गुड्स इनपुट तक सीमित है। अब 1 नवंबर 2026 या उसके बाद लिए गए ITC पर इनपुट सर्विसेज को भी रिफंड में शामिल किया जाएगा।

प्लांट और मशीनरी को रिफंड से बाहर रखने का नियम भी हटाया जाएगा। 1 अप्रैल 2027 या उसके बाद लिए गए ITC पर प्लांट और मशीनरी के रिफंड की गणना हर महीने क्रेडिट के 1/60वें हिस्से के आधार पर होगी। यह अवधि उस एसेट की वर्किंग लाइफ से जुड़ी होगी।

इस बदलाव से फार्मा और FMCG जैसे सेक्टरों के वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट में सुधार की उम्मीद है। खासकर ऐसे कारोबारों में जहां इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के कारण ITC लंबे समय तक फंसा रहता है, वहां रिफंड का दायरा बढ़ने से कैश फ्लो में मदद मिल सकती है।

छोटे कारोबारियों को साल में एक बार रिटर्न का विकल्प

काउंसिल ने सालाना 5 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले और सिर्फ कंज्यूमर्स को सामान या सर्विस बेचने वाले टैक्सपेयर्स के लिए एक वैकल्पिक स्कीम को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। इसके तहत ऐसे कारोबारी साल में सिर्फ एक बार रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। हालांकि, टैक्स का भुगतान तिमाही आधार पर करना होगा।

सरकार के मुताबिक, 1.05 करोड़ एक्टिव टैक्सपेयर्स में से 16.85 लाख सिर्फ कंज्यूमर सप्लाई रिपोर्ट करते हैं। इनमें 99% का टर्नओवर 5 करोड़ रुपये से कम है। ये सभी मिलकर GST की कुल रिपोर्टेड देनदारी का 1% से भी कम हिस्सा रखते हैं।

इस स्कीम का पूरा फ्रेमवर्क और जरूरी कानूनी बदलाव अगली GST काउंसिल बैठक में देखे जाएंगे। यानी अभी यह प्रस्ताव शुरुआती स्तर पर है। इसके लागू होने से पहले इसके नियम और प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

रास्ते में माल की जांच भी कम होगी

माल लेकर जा रहे वाहनों की फिजिकल जांच को लेकर भी नए नियम प्रस्तावित हैं। किसी वाहन को तभी रोका जा सकेगा, जब उसके खिलाफ कोई खास इंटेलिजेंस या सूचना हो। इसके लिए जॉइंट कमिश्नर या उससे ऊपर के अधिकारी की पहले से मंजूरी जरूरी होगी।

किसी गाड़ी में जा रहे माल की जांच सिर्फ सोर्स स्टेट और डेस्टिनेशन स्टेट कर सकेंगे। रास्ते में पड़ने वाले दूसरे राज्यों को वाहन रोकने की अनुमति नहीं होगी। इससे कारोबारियों को रास्ते में बार-बार होने वाली जांच से राहत मिल सकती है।

यानी अगर कोई कंसाइनमेंट पांच राज्यों से होकर गुजरता है, तो अभी हर राज्य में उसकी जांच हो सकती है। नए सिस्टम में फिजिकल चेकिंग सिर्फ शुरुआत और अंतिम राज्य तक सीमित रहेगी। इससे सामान की आवाजाही में समय भी बच सकता है।

GST में गिरफ्तारी की शक्ति खत्म होगी

GST से जुड़े प्रवर्तन के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। GST के तहत गिरफ्तारी की शक्ति हटाई जा रही है। किसी आरोपी पर मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की जाएगी। न्यूनतम सजा का प्रावधान भी हटाया जाएगा।

इसके बाद जुर्माना, जेल या दोनों में से क्या सजा दी जाए, यह न्यायिक विवेक पर निर्भर करेगा। जहां कोई खास पेनल्टी तय नहीं है, वहां लगने वाली सामान्य पेनल्टी भी 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये की जाएगी।

सरकार का कहना है कि अब GST सिस्टम खरीदार और विक्रेता के इनवॉइस का मिलान कर सकता है। इससे फर्जी ITC को उसी जगह के करीब पकड़ा जा सकता है, जहां वह बनाया जाता है। इसी वजह से सिस्टम में ज्यादा ऑटोमेशन पर जोर दिया जा रहा है।

सर्विस एक्सपोर्टर्स को भी फायदा

GST काउंसिल ने सर्विस एक्सपोर्ट से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा है। अगर कोई भारतीय कंपनी अपनी विदेशी ब्रांच के जरिए किसी विदेशी ग्राहक को सर्विस देती है, तो उसे एक्सपोर्ट बेनिफिट मिल सकेगा। इसके लिए मौजूदा कानूनी शर्त हटाई जाएगी।

इससे एनालिटिक्स कंपनियों, डिजाइन स्टूडियो, इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी और भारत से काम करने वाले ग्लोबल कंपनियों के ऑफिस को फायदा हो सकता है। ऐसे कारोबारों के लिए विदेशी ग्राहकों को दी जाने वाली सर्विस को एक्सपोर्ट मानने का रास्ता आसान होगा।

अगर किसी विदेशी ग्राहक के सामान पर भारत में टेस्टिंग, रिपेयर, सर्टिफिकेशन, रिसर्च या प्रोसेसिंग का काम किया जाता है, तो वह भी सर्विस एक्सपोर्ट माना जाएगा। इसके लिए जरूरी नहीं होगा कि वह सामान भारत से बाहर जाए।

ई-कॉमर्स पर छोटे विक्रेताओं के लिए रास्ता आसान

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए दूसरे राज्य में कारोबार की जगह दर्ज करना आसान हो सकता है। प्रस्ताव के तहत कोई विक्रेता दूसरे राज्य में ई-कॉमर्स ऑपरेटर के वेयरहाउस को अपना प्रिंसिपल प्लेस ऑफ बिजनेस घोषित कर सकेगा।

इसके लिए ई-कॉमर्स ऑपरेटर की मंजूरी जरूरी होगी। यह मंजूरी सिस्टम के जरिए अपने आप दी जाएगी। हालांकि, विक्रेता की कम से कम एक राज्य में फिजिकल मौजूदगी बनी रहनी चाहिए। यही उसका होम स्टेट होगा।

यह रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्लेटफॉर्म के जरिए की गई सप्लाई तक सीमित रहेगा। काउंसिल अलग-अलग ई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल में टैक्सेशन को भी एक जैसा करना चाहती है। यानी टैक्स इस बात पर निर्भर करेगा कि वास्तव में कौन-सी सर्विस दी गई है, न कि प्लेटफॉर्म ने कॉन्ट्रैक्ट किस तरह बनाया है।

इस बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं

57वीं GST काउंसिल बैठक में GST रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया। आगे से GST रेट से जुड़े मामलों पर साल में एक बार अलग बैठक में चर्चा होगी। यह बैठक सिर्फ रेट से जुड़े मुद्दों के लिए होगी।

इस बार काउंसिल का फोकस पिछले साल के GST 2.0 बदलावों के बाद बची विसंगतियों और अस्पष्टताओं को दूर करने पर रहा। यानी इस बैठक में टैक्स रेट बदलने के बजाय GST के रोजमर्रा के सिस्टम को आसान बनाने पर ज्यादा जोर दिया गया।

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Tuni Textile Mills को ₹30.17 करोड़ तक के ऑर्डर मिले, 19.75 लाख मीटर फैब्रिक की सप्लाई

टुनी टेक्सटाइल मिल्स लिमिटेड को घरेलू बाजार से तीन नए परचेज ऑर्डर मिले हैं। कंपनी ने बताया कि ये सभी ऑर्डर्स सितंबर 2026 में मिले। इन ऑर्डर्स की कुल वैल्यू करीब 29.51 करोड़ रुपये से 30.17 करोड़ रुपये के बीच है। इनमें करीब 19.75 लाख मीटर बुने हुए शर्टिंग और फिनिश्ड फैब्रिक की सप्लाई शामिल है।

कंपनी के मुताबिक, इन ऑर्डर्स में पॉली-कॉटन, ज्यादा कॉटन वाले शर्टिंग फैब्रिक और दूसरे तैयार कपड़े शामिल हैं। कंपनी का कहना है कि इससे आने वाले महीनों के लिए उसकी ऑर्डर विजिबिलिटी मजबूत होगी।

तीन कंपनियों से मिले ऑर्डर

इन तीन ऑर्डर्स में सबसे बड़ा ऑर्डर Northcross Syntex ने दिया है। इसमें 10 लाख मीटर फिनिश्ड फैब्रिक की सप्लाई शामिल है।

वहीं, Sharda Corporation ने 5.75 लाख मीटर फैब्रिक का ऑर्डर दिया है। इसमें पॉली-कॉटन शर्टिंग और ज्यादा कॉटन वाले फैब्रिक शामिल हैं। Disha Clothings ने करीब 4 लाख मीटर वोवन शर्टिंग का ऑर्डर दिया है, जिसमें अलग-अलग पॉली-कॉटन स्पेसिफिकेशन हैं।

120 दिनों तक में करनी होगी डिलीवरी

कंपनी के मुताबिक, इन ऑर्डर्स की डिलीवरी अगले 60 से 120 दिनों में करनी है। Northcross Syntex के ऑर्डर की डिलीवरी 5 जनवरी 2027 तक पूरी करनी है।

कुल ऑर्डर वॉल्यूम करीब 19.75 लाख मीटर है। यह कंपनी की बताई गई सालाना 20 लाख मीटर की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता का करीब 98.75% है। कंपनी के मुताबिक, ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग के साथ जॉब वर्क, सोर्सिंग और ट्रेडिंग का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

1987 से टेक्सटाइल कारोबार में कंपनी

टुनी टेक्सटाइल मिल्स 1987 से टेक्सटाइल कारोबार में है। कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग सुविधा महाराष्ट्र के MIDC मुरबाड में है। यहां यूरोप में बने रैपियर लूम और दूसरी बुनाई सुविधाएं मौजूद हैं।

कंपनी पॉलीएस्टर, कॉटन, पॉलीएस्टर-कॉटन, पॉलीएस्टर विस्कोस और दूसरे ब्लेंडेड फैब्रिक बनाती है। इसके अलावा प्लेन, ट्विल, ऑक्सफोर्ड, साटन, हेरिंगबोन और पॉपलिन जैसी अलग-अलग बुनाई संरचनाओं में भी फैब्रिक तैयार किया जाता है।

मैनेजिंग डायरेक्टर ने क्या कहा?

टुनी टेक्सटाइल मिल्स के मैनेजिंग डायरेक्टर नरेंद्र कुमार सुरेका ने कहा कि नए ऑर्डर कंपनी के शर्टिंग और ब्लेंडेड फैब्रिक की मांग को दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि तीनों ऑर्डर कंपनी की बुनाई क्षमता और मौजूदा प्रोडक्ट रेंज के अनुरूप हैं।

उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस फैब्रिक की क्वालिटी बनाए रखने, ग्राहकों की जरूरत पूरी करने और समय पर डिलीवरी पर रहेगा। कंपनी ग्राहकों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने पर भी काम कर रही है।

राइट्स इश्यू को भी मिली मंजूरी

टुनी टेक्सटाइल मिल्स ने हाल में राइट्स इश्यू को भी मंजूरी दी है। कंपनी 48,98,66,250 पूरी तरह पेड-अप इक्विटी शेयर जारी करेगी। इस इश्यू की कुल वैल्यू 48.99 करोड़ रुपये है और इश्यू प्राइस 1 रुपये प्रति शेयर रखा गया है।

यह राइट्स इश्यू 16 सितंबर 2026 तक पात्र शेयरधारकों के पास मौजूद हर 4 शेयर पर 15 राइट्स शेयर के अनुपात में होगा। कंपनी की राइट्स इश्यू कमिटी ने इसके लिए लेटर ऑफ ऑफर को भी मंजूरी दे दी है।

कंपनी महाराष्ट्र के MIDC मुरबाड में अपने मैन्युफैक्चरिंग और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए कारोबार कर रही है। इसके पोर्टफोलियो में शर्टिंग, सूट, यूनिफॉर्म और दूसरे कपड़ों के लिए पॉलीएस्टर, कॉटन और ब्लेंडेड फैब्रिक शामिल हैं।

Stocks to Watch: 24 सितंबर को इन 11 शेयरों पर रहेगी नजर, डिफेंस से लेकर पावर स्टॉक्स तक शामिल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks to Watch: 24 सितंबर को इन 11 शेयरों पर रहेगी नजर, डिफेंस से लेकर पावर स्टॉक्स तक शामिल

Stocks to Watch: गुरुवार 24 सितंबर को बाजार में कई शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कंपनियों से जुड़े बड़े अपडेट सामने आए हैं। इनमें ऑर्डर, प्रोजेक्ट, बोनस शेयर और हिस्सेदारी बिक्री जैसी खबरें शामिल हैं।

IRCON International

सरकारी रेल कंपनी IRCON International के खिलाफ Afcons Infrastructure के ₹359.72 करोड़ के दावे पर माइनॉरिटी ट्रिब्यूनल ने ₹23.64 करोड़ देने का फैसला दिया है। यह विवाद T-74R-A वर्क पैकेज से जुड़ा है। इससे पहले मेजॉरिटी ट्रिब्यूनल ने इसी दावे पर ₹147.14 करोड़ देने का फैसला दिया था। इरकॉन का कहना है कि वो फैसले को आगे चुनौती देगी।

Max Estates

रियल एस्टेट कंपनी Max Estates गाजियाबाद के इंदिरापुरम में 9.76 एकड़ जमीन के लिए जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (JDA) करेगी। इस प्रोजेक्ट से करीब ₹2,500-3,000 करोड़ का ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) मिलने की उम्मीद है। यहां करीब 15 लाख वर्ग फुट का डेवलपमेंट किया जा सकता है। कंपनी इसे कैपिटल-लाइट मॉडल पर डेवलप करेगी।

GHCL

केमिकल कंपनी GHCL को गुजरात सरकार के कमिश्नर ऑफ जियोलॉजी एंड माइनिंग की ओर से कराई गई ई-नीलामी में कंपोजिट लाइसेंस के लिए प्रिफर्ड बिडर घोषित किया गया है। GHCL भारत की दूसरी सबसे बड़ी सोडा ऐश बनाने वाली कंपनी है।

Exide Industries

बैटरी कंपनी Exide Industries ने अपनी सब्सिडियरी Exide Energy Solutions के 6 GWh लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के फेज-1 की कमीशनिंग पूरी कर ली है। यह प्लांट कंपनी की लिथियम-आयन सेल मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने की योजना का हिस्सा है।

Bharat Dynamics

सरकारी डिफेंस कंपनी Bharat Dynamics (BDL) को रक्षा मंत्रालय से ₹810.79 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। इसके तहत भारतीय वायुसेना के लिए 160 Satellite Smart Anti-Airfield Weapons (SAT-SAAW) और उनसे जुड़े उपकरणों की सप्लाई होगी।

NTPC

सरकारी पावर कंपनी NTPC ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कुल ₹3,393.83 करोड़ का फाइनल डिविडेंड बांटा है। यह कंपनी के पेड-अप इक्विटी शेयर कैपिटल का 35% है। इससे पहले कंपनी ₹2,666.58 करोड़ के दो अंतरिम डिविडेंड भी दे चुकी है।

ESAF Small Finance Bank

प्राइवेट बैंकिंग कंपनी ESAF Small Finance Bank के बोर्ड ने ₹500 करोड़ तक जुटाने को मंजूरी दी है। यह रकम प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करके जुटाई जाएगी। बैंक इस रकम का इस्तेमाल अपने Tier-II Capital को बढ़ाने के लिए करेगा।

Sedemac Mechatronics

ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी Sedemac Mechatronics में निवेशक A91 Emerging Fund, Xponentia Opportunities Fund और HDFC Life Insurance 44.3 लाख शेयर बेच सकते हैं। यह कंपनी की करीब 10% हिस्सेदारी के बराबर है। ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस ₹3,000 प्रति शेयर रखा गया है। इससे करीब ₹1,329 करोड़ जुटाने की योजना है।

Avantel

सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी Avantel को Zetwerk Manufacturing Businesses से ₹177.35 करोड़ का ऑर्डर मिला है। कंपनी इस ऑर्डर के तहत सैटेलाइट इक्विपमेंट की सप्लाई करेगी। यह ऑर्डर कंपनी के सैटेलाइट और डिफेंस कम्युनिकेशन बिजनेस के लिए अहम है।

Concord Biotech

फार्मा कंपनी Concord Biotech के बोर्ड ने 1:1 बोनस शेयर जारी करने को मंजूरी दी है। रिकॉर्ड डेट पर हर एक शेयर पर निवेशकों को एक अतिरिक्त शेयर मिलेगा। इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।

Jagsonpal Pharmaceuticals

फार्मा कंपनी Jagsonpal Pharmaceuticals ने Group Pharmaceuticals का वेलनेस पोर्टफोलियो खरीदने का फैसला किया है। यह सौदा स्लंप सेल के जरिए अधिकतम ₹46.7 करोड़ में होगा। इससे Jagsonpal के वेलनेस बिजनेस पोर्टफोलियो का विस्तार होगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

HDFC Bank CEO Race: अब रेस में सिर्फ 2 नाम, कौन बनेगा HDFC बैंक का नया बॉस?

HDFC Bank CEO Race: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर HDFC Bank के अगले MD और CEO की तलाश अब आखिरी दौर में पहुंच गई है। रेस में सिर्फ दो नाम बचे हैं। इनमें पहले डिप्टी MD कैजाद एम. भरूचा हैं। और दूसरे ICICI Prudential Life के MD और CEO अनूप बागची।

CNBCTV18 ने सूत्रों के हवाले से बताया कि भरूचा इंटरनल कैंडिडेट हैं। यानी वह पहले से HDFC Bank में हैं। वहीं बागची एक्सटर्नल कैंडिडेट हैं। उन्हें बैंक के बोर्ड ने शॉर्टलिस्ट किया है। इस बारे में अनूप बागची और HDFC Bank को भेजे गए सवालों का खबर छपने तक जवाब नहीं मिला था।

HDFC Bank में CEO की तलाश क्यों?

बैंक के मौजूदा MD और CEO शशिधर जगदीशन का दूसरा कार्यकाल अक्टूबर 2026 में खत्म हो रहा है। उन्होंने दोबारा इस पद पर आने की इच्छा नहीं जताई है।

बोर्ड ने उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मनाने की कोशिश भी की थी। लेकिन अब बैंक नए CEO की तलाश में आगे बढ़ चुका है।

कैजाद भरूचा कौन हैं

कैजाद भरूचा 1995 से HDFC Bank के साथ हैं। उन्हें बैंकिंग का 35 साल से ज्यादा का अनुभव है। वह 2014 से बैंक के बोर्ड में होल-टाइम डायरेक्टर हैं। अप्रैल 2023 में उन्हें डिप्टी MD बनाया गया था।

भरूचा ने बैंक में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने कॉरपोरेट बैंकिंग, बिजनेस बैंकिंग और रिटेल एसेट्स जैसे कारोबार देखे हैं। यानी बैंक के कामकाज को वह अंदर से जानते हैं। अगर उन्हें CEO बनाया जाता है, तो बैंक को अंदर से ही नया नेतृत्व मिल जाएगा। इससे कामकाज में निरंतरता बनी रह सकती है।

लेकिन उनके सामने एक दिक्कत भी है। भरूचा 2014 से बैंक के बोर्ड में होल-टाइम डायरेक्टर हैं। उनके 13 साल से ज्यादा पूरे हो चुके हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, होल-टाइम डायरेक्टर का कुल कार्यकाल 15 साल तक हो सकता है। इसमें MD और CEO भी शामिल हैं।

ऐसे में भरूचा की मौजूदा पात्रता 2029 तक ही रह सकती है। अगर वह CEO बनते हैं, तो करीब तीन साल ही इस पद पर रह पाएंगे। अगर बैंक उन्हें इसके बाद भी पूरा कार्यकाल देना चाहता है, तो RBI से छूट लेनी पड़ सकती है।

अनूप बागची की दावेदारी

दूसरे दावेदार अनूप बागची हैं। वह अभी ICICI Prudential Life के MD और CEO हैं। बागची को बैंकिंग, कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने रिटेल, MSME और कॉरपोरेट बैंकिंग में काम किया है। इसके अलावा ट्रेजरी और क्रेडिट पॉलिसी का भी अनुभव है।

बागची ICICI Group के पुराने अधिकारियों में शामिल हैं। वह इससे पहले ICICI Securities के MD और CEO रह चुके हैं। वह ICICI Bank के बोर्ड में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भी रहे हैं।

उनका अनुभव सिर्फ बैंकिंग तक सीमित नहीं है। कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस की भी उन्हें अच्छी समझ है। यही वजह है कि वह HDFC Bank के लिए मजबूत बाहरी उम्मीदवार माने जा रहे हैं।

अब RBI की मंजूरी का इंतजार

नए MD और CEO का फैसला सिर्फ HDFC Bank का बोर्ड नहीं करेगा। इसके लिए रेगुलेटरी मंजूरी भी जरूरी है। इसमें RBI की मंजूरी सबसे अहम होगी। अब असली सवाल यह है कि बैंक किसे चुनता है।

एक तरफ कैजाद भरूचा हैं। उन्हें HDFC Bank के कामकाज की अंदर से अच्छी समझ है। दूसरी तरफ अनुप बागची हैं। उनके पास बैंकिंग के साथ कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस का भी अनुभव है।

निवेशकों की नजर अब बोर्ड के अंतिम फैसले और RBI की मंजूरी पर रहेगी। यही दोनों चीजें HDFC Bank के शेयर के लिए आगे बड़ा ट्रिगर बन सकती हैं।

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