HDFC Bank Share Price: MD और CEO पर नए ऐलान से दिखी 3% तक तेजी, अब ब्रोकरेज का क्या है नजरिया

HDFC Bank के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) शशिधर जगदीशन अपना कार्यकाल (टर्म) खत्म होने के बाद फिर से नियुक्ति नहीं चाहते हैं। उनका टर्म 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। इस ऐलान के बाद 31 अगस्त को दिन में बैंक के शेयर में करीब 3 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। बीएसई पर शेयर 739.50 रुपये के हाई तक गया। कई ब्रोकरेज फर्मों ने मैनेजमेंट में संभावित बदलाव को लेकर सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। लेकिन नए CEO की नियुक्ति को लेकर निकट भविष्य की अनिश्चितता के कारण सावधान भी हैं।

HDFC Bank ने नए MD और CEO की तलाश शुरू कर दी है। कहा है कि उसका बोर्ड उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक को उम्मीद है कि वह जगदीशन के 26 अक्टूबर को रिटायर होने से पहले ही अपने नए CEO की नियुक्ति कर लेगा। HDFC Bank के नए MD और CEO के रोल के लिए इंटरनल और एक्सटर्नल दोनों तरह के कैंडिडेट्स पर विचार किया जा रहा है।

HDFC Bank स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्मों के रुख की बात करें तो HDFC Bank पर कवरेज करने वाले एनालिस्ट्स इस डेवलपमेंट को लेकर बंटे हुए हैं। बर्नस्टीन ने बैंक के स्टॉक के लिए ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज लीडरशिप में बदलाव को सकारात्मक मानता है। उसका कहना है कि नया CEO बैंक की कहानी को नए सिरे से पेश करने का स्वाभाविक मौका दे सकता है।

जेपी मॉर्गन ने भी स्टॉक पर अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 990 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस घटनाक्रम का असर निकट भविष्य में स्टॉक पर पड़ सकता है, लेकिन समय पर उत्तराधिकार की प्रक्रिया पूरी होने से नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता कम हो सकती है। निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए नेट इंटरेस्ट इनकम (शुद्ध ब्याज आय) में बढ़ोतरी का फिर से शुरू होना काफी मायने रखता है है।

एक्सिस कैपिटल ने ‘बाय’ कॉल के साथ 1,030 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि जगदीशन के फैसले से दूसरे कार्यकाल के छोटा होने की आशंका खत्म हो गई है। नए उत्तराधिकारी को पूरे 3 साल का कार्यकाल मिल सकता है।

IIFL, जेफरीज, ICICI सिक्योरिटीज की क्या राय

IIFL ने जगदीशन के फैसले को न्यूट्रल से थोड़ा पॉजिटिव बताया है। तर्क है कि इससे रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर अगला कार्यकाल छोटा होने का जोखिम खत्म हो जाता है। हालांकि कैजाद भरूचा एक संभावित इंटरनल कैंडिडेट (अंदरूनी उम्मीदवार) हो सकते हैं, लेकिन IIFL का कहना है कि कार्यकाल की पाबंदियों के कारण उन्हें काम करने के लिए कम समय मिल सकता है। भरूचा का HDFC Bank के बोर्ड में फुल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर 15 साल का कार्यकाल 2029 में खत्म होगा। इसके चलते उन्हें टॉप पोजिशन पर बहुत कम मौका मिलेगा। कहा जा रहा है कि यह उनके नाम पर विचार करने में रुकावट बन सकता है। IIFL के मुताबिक, इसके उलट कोई भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार लीडरशिप में एक नई शुरुआत और लंबा कार्यकाल दे सकता है।

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अन्य ब्रोकरेज ने इस बदलाव को लेकर ज्यादा सावधानी भरा रुख अपनाया है। जेफरीज ने ‘बाय’ रेटिंग तो बनाए रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को 1,050 रुपये से घटाकर 880 रुपये कर दिया है। FY27-29 के लिए कमाई के अनुमानों में भी 3-3 प्रतिशत की कटौती की है। ब्रोकरेज का मानना है कि नेतृत्व में बदलाव से बैंक के रेवेन्यू की रफ्तार, खासकर डिपॉजिट जुटाने और फीस से होने वाली आय पर असर पड़ सकता है। साथ ही बढ़ती अनिश्चितता से बैंक की कॉस्ट ऑफ इक्विटी बढ़ सकती है और वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है।

जेफरीज का कहना है कि इन सबके बावजूद HDFC Bank की वैल्यूएशन इतनी ज्यादा नहीं है कि रेटिंग घटाई जाए। ICICI सिक्योरिटीज ने भी अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 1,020 रुपये से घटाकर 920 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

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HDFC Bank के नए CEO कौन होंगे? कैजाद भरूचा का नाम सबसे आगे, बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश

HDFC Bank New CEO: प्राइवेट सेक्टर का सबसे बड़ा लेंडर HDFC Bank अक्टूबर में नए एमडी और CEO का ऐलान कर सकता है। मौजूदा एमडी और CEO शशिधर जगदीशन अक्टूबर में अपने पद से रिटायर हो रहे हैं। बैंक अपने डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर कैजाद भरूचा का नाम आगे कर सकता है। हालांकि, अभी इस पर आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

बाहरी उम्मीदवार भी तलाश रहा बैंक

रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि बैंक एक बाहरी उम्मीदवार की भी तलाश कर रहा है। RBI के नियम के तहत CEO पद के लिए एक से ज्यादा नाम भेजने होते हैं। बैंक जिन नामों का प्रस्ताव देगा, उन पर RBI फैसला करेगा। HDFC Bank और कैजाद भरूचा ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

क्यों अहम है कैजाद भरूचा का नाम

कैजाद भरूचा बैंक के पुराने अधिकारियों में शामिल हैं। वह रिटेल और होलसेल, दोनों बिजनेस संभाल रहे हैं। इसलिए उन्हें जगदीशन का संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। वह 2029 तक रिटायर नहीं होंगे, जो उनके पक्ष में एक अहम बात है।

RBI के नियमों में कैसे फिट बैठते हैं

RBI के नियमों के तहत फुल-टाइम डायरेक्टर का अधिकतम कार्यकाल 15 साल हो सकता है। 2029 तक भरूचा के 15 साल पूरे होंगे। ऐसे में वह CEO पद के लिए पात्र हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर कार्यकाल की सीमा में छूट के लिए भी आवेदन किया जा सकता है।

जगदीशन ने दोबारा कार्यकाल क्यों नहीं लिया

शनिवार को HDFC Bank ने बताया कि शशिधर जगदीशन ने दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है। वह अक्टूबर 2020 से बैंक के MD और CEO हैं। उनका दूसरा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। बैंक ने उनके फैसले के पीछे कोई खास वजह नहीं बताई।

छह महीने से नेतृत्व को लेकर उठापटक

पिछले करीब छह महीने HDFC Bank के लिए आसान नहीं रहे हैं। मार्च में बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने कहा था कि बैंक की कुछ प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से मेल नहीं खातीं। इसके बाद बैंक के टॉप मैनेजमेंट को लेकर सवाल उठने लगे।

जांच में नहीं मिले आरोपों के सबूत

चेयरमैन के आरोपों की बाद में बाहरी कानूनी समीक्षा कराई गई। इस जांच में गवर्नेंस से जुड़े आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं मिला। हालांकि, पिछले महीने बड़े डिपॉजिट की प्राइसिंग के एक अलग मामले में जगदीशन समेत चार अधिकारियों पर कार्रवाई हुई। इससे बैंक के नेतृत्व पर दबाव बढ़ा।

शेयर पर भी दिखा असर

इस साल HDFC Bank के शेयर में करीब 27% की गिरावट आई है। मार्च में चेयरमैन के इस्तीफे के बाद गिरावट और तेज हो गई। जून के अंत तक बैंक में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 40% थी। 2023 में HDFC Ltd के साथ हुए बड़े मर्जर का फायदा भी निवेशकों को उम्मीद के मुताबिक नहीं दिखा है।

नए CEO के सामने क्या चुनौती

HDFC Bank को अब जल्द नया CEO चुनना है। बोर्ड ने भी उत्तराधिकारी की नियुक्ति प्रक्रिया तेज करने की बात कही है। नए CEO के सामने शेयर की गिरावट रोकने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की चुनौती होगी। साथ ही HDFC Ltd के साथ मर्जर का पूरा फायदा निकालना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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HDFC Bank News: बैंक के एमडी शशिधर जगदीशन नहीं चाहेंगे पुनर्नियुक्ति, अक्तूबर में होंगे रिटायर

एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शशिधर जगदीशन पुनर्नियुक्ति नहीं चाहेंगे। उन्होंने यह फैसला ले लिया है। वह 26 अक्तूबर, 2026 को अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। बैंक ने इस बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को बताया है। एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है।

HDFC Bank ने कहा है कि शशिधर जगदीशन ने अपने फैसले के बारे में 29 अगस्त को बैंक के बोर्ड को बताया। बैंक ने कहा है कि अनुरोध करने के बावजूद उन्होंने अपनी पुनर्नियुक्ति स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। इस वजह से वह एचडीएफसी बैंक की सेवा से 26 अक्तूबर, 2026 को रिटायर करना चाहेंगे।

एचडीएफसी बैंक ने बैंक की ग्रोथ और स्टैबिलिटी के लिए जगदीशन की प्रतिबद्धता, लीडरशिप के लिए उनकी तारीफ की है। बैंक ने कहा है कि एचडीएफसी बैंक में एचडीएफसी के विलय में भी उनकी अहम भूमिका रही। बैंक के बोर्ड ने बेहतर भविष्य के लिए जगदीशन को शुभकामना दी है।

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जगदीशन के फैसले के बाद बैंक ने कहा कि बैंक ने जल्द उनके उत्तराधिकारी की तलाश की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है। तय समयसीमा के तहत यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। बैंक का शेयर 29 अगस्त को 1.20 फीसदी चढ़कर 719.50 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 24 फीसदी गिरा है।

HDFC Bank में CEO पद को लेकर हलचल बढ़ी, RBI गवर्नर से मिले चेयरमैन राजीव कुमार

HDFC Bank CEO Appointment: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन का मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। अब इसमें दो महीने से थोड़ा ज्यादा समय बचा है। इसी बीच बैंक के चेयरमैन राजीव कुमार ने पिछले हफ्ते RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा से मुलाकात की है।

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में सबसे अहम बात जगदीशन के अगले कार्यकाल को लेकर हुई। RBI यह समझना चाहता है कि बैंक बोर्ड जगदीशन को दोबारा एमडी और सीईओ बनाने के पक्ष में है या नहीं।

बोर्ड में जगदीशन के नाम पर कितनी सहमति?

RBI यह भी जानना चाहता था कि राजीव कुमार के चेयरमैन बनने के बाद बोर्ड में किसी दूसरे नाम पर भी चर्चा हुई है या नहीं। एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा कि अभी तक HDFC Bank बोर्ड ने एमडी और सीईओ की नियुक्ति को लेकर RBI को कोई सिफारिश नहीं भेजी है।

RBI अब जल्द फैसला चाहता है

राजीव कुमार 30 जून 2026 को HDFC Bank के बोर्ड में शामिल हुए थे। इसके बाद से RBI अधिकारियों के साथ उनकी यह चौथी औपचारिक बातचीत बताई जा रही है।

शुरुआत में RBI ने बोर्ड को कुछ समय दिया। इसकी वजह यह थी कि राजीव कुमार ने 15 जुलाई को औपचारिक रूप से चेयरमैन का पद संभाला था। अब उन्हें पद संभाले करीब एक महीना हो चुका है। ऐसे में RBI चाहता है कि बैंक के नेतृत्व को लेकर तस्वीर जल्द साफ हो।

आमतौर पर छह महीने पहले शुरू हो जाती है प्रक्रिया

बैंकों में आम तौर पर एमडी और सीईओ का कार्यकाल खत्म होने से करीब छह महीने पहले दोबारा नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। बोर्ड अपनी सिफारिश RBI को भेजता है।

अगर नया सीईओ चुनना हो, तो पसंदीदा उम्मीदवारों के नाम आम तौर पर कार्यकाल खत्म होने से कम से कम चार महीने पहले RBI को भेजे जाते हैं।

HDFC Bank का मामला इसलिए अलग दिख रहा है। जगदीशन का कार्यकाल खत्म होने में अब करीब दो महीने बचे हैं। लेकिन बोर्ड ने अभी तक RBI को कोई नाम नहीं भेजा है।

जगदीशन के सामने क्या संभावनाएं?

पहले की रिपोर्टों के मुताबिक, इस पद को लेकर चार संभावनाएं हैं। जगदीशन को फिर से तीन साल का कार्यकाल मिल सकता है। उन्हें इससे छोटा कार्यकाल भी दिया जा सकता है। बैंक बोर्ड किसी दूसरे आंतरिक उम्मीदवार का नाम भी भेज सकता है।

इसके अलावा किसी बाहरी उम्मीदवार के नाम पर भी विचार हो सकता है। यानी फिलहाल यह तय नहीं है कि अक्टूबर के बाद HDFC Bank की कमान किसके हाथ में होगी।

AT-1 बॉन्ड मामले पर भी बात

RBI गवर्नर और राजीव कुमार की बातचीत सिर्फ सीईओ की नियुक्ति तक सीमित नहीं रही। सूत्रों के मुताबिक, AT-1 बॉन्ड की मिस-सेलिंग से जुड़े मामले पर भी चर्चा हुई।

कुछ नाराज बॉन्डधारक इस मामले को लेकर बहरीन में कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। RBI इस मामले को लेकर भी बैंक की स्थिति समझना चाहता है।

कुछ महीनों में बदला बैंक का नेतृत्व

HDFC Bank में पिछले कुछ महीनों में नेतृत्व स्तर पर काफी बदलाव हुए हैं। पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने मार्च में अचानक बोर्ड छोड़ दिया था।

इसके बाद नॉन-एग्जीक्यूटिव बोर्ड सदस्य केकी मिस्त्री को अंतरिम चेयरमैन बनाया गया। करीब तीन महीने की तलाश के बाद राजीव कुमार को नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन चुना गया। उन्हें पहले अतिरिक्त निदेशक बनाया गया था। RBI की मंजूरी के बाद 15 जुलाई को उन्होंने चेयरमैन का पद संभाला।

HDFC Bank का शेयर बुधवार को 0.02% की मामूली गिरावट के साथ 727.35 रुपये पर बंद हुआ। हालांकि, पिछले 1 साल में यह 25.28% टूट चुका है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी बैंक को निवेशकों का भरोसा फिर से जीतने के लिए सिर्फ पुराने विवादों को बंद करना काफी नहीं होगा। कॉरपोरेट गवर्नेंस के जानकारों का कहना है कि बैंक को अपनी गवर्नेंस, आंतरिक प्रक्रियाओं और बोर्ड की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना होगा। उनका मानना है कि निवेशक अब सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि बैंक के काम करने के तरीके को भी देख रहे हैं।

मामला क्या है?

यह चर्चा MSRDC डिपॉजिट मामले के बाद तेज हुई है। बैंक के बोर्ड ने इस मामले की आंतरिक जांच पूरी की। जांच में CEO शशिधर जगदीशन समेत कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर आर्थिक जुर्माना और चेतावनी जारी की गई।

हालांकि, बोर्ड ने यह भी माना कि मामले में किसी तरह की निजी कमाई, गलत मंशा या नियमों के उल्लंघन के सबूत नहीं मिले। इसके बाद बोर्ड ने जगदीशन की दोबारा नियुक्ति की सिफारिश भी की।

एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

Institutional Investor Advisory Services (IiAS) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित टंडन का कहना है कि किसी एक मामले का निपटारा कर देना ही काफी नहीं है। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या बैंक ने हाल के गवर्नेंस विवादों से सबक लिया है। क्या बोर्ड की निगरानी पहले से मजबूत हुई है। क्या आंतरिक कंट्रोल बेहतर हुए हैं। उनके मुताबिक गवर्नेंस में सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि उन तक पहुंचने की प्रक्रिया भी उतनी ही अहम होती है।

पुराने मामलों पर भी उठे सवाल

अमित टंडन का कहना है कि इस मामले को अकेले नहीं देखा जाना चाहिए। इसे पूर्व स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और हाल के दूसरे गवर्नेंस विवादों के साथ जोड़कर देखना होगा। उनका मानना है कि अब बैंक की सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों को यह भरोसा दिलाना है कि उसकी गवर्नेंस सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

बोर्ड का संदेश क्या है?

अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेख का कहना है कि बोर्ड की स्वतंत्र जांच से साफ हुआ कि यह मामला नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि गवर्नेंस और कारोबारी पहुंच का था। इसलिए बोर्ड ने CEO की दोबारा नियुक्ति की सिफारिश की। हालांकि, अंतिम फैसला RBI को लेना है।

आगे बैंक के लिए क्या चुनौती?

अश्विन पारेख का मानना है कि CEO, CFO और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों पर जुर्माना लगाना अपने आप में बड़ा कदम है। इससे बोर्ड ने साफ संदेश दिया है कि जवाबदेही तय की जाएगी।

वहीं, अमित टंडन का कहना है कि अब बहस सजा की मात्रा पर नहीं होनी चाहिए। असली फोकस इस बात पर होना चाहिए कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए बैंक अपनी गवर्नेंस को कितना मजबूत बनाता है।

HDFC बैंक के शेयरों का हाल

देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक के शेयर मंगलवार को 0.38% गिरकर 736.75 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 21.01% गिरा है। वहीं, एक साल में यह 26.64% टूटा है। 5 साल की बात करें, तो निवेशकों को सिर्फ 3.30% रिटर्न मिला है। बैंक का मार्केट कैप 5.64 हजार करोड़ रुपये है।

Q1 Results: प्राइवेट बैंक का मुनाफा 25% बढ़ा, NPA घटा; शेयर 11% उछला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

HDFC Bank के सीईओ की बैसिक सैलरी ₹3.31 करोड़, बैठक में शामिल होने पर नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर को ₹1.20 करोड़

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े लेंडर एचडीएफसी बैंक की एनुअल रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि बैंक के एमडी और सीईओ समेत इसके एगीक्यूटिव्स और नॉन-एग्जीक्यूटिव्स डायरेक्टर्स की वित्त वर्ष 2026 में कितनी कमाई हुई। इसमें सैलरी, एलाउंसेज, परफॉरमेंस बोनस, रिटायरमेंट बेनेफिट्स, स्टॉक ऑप्शंस और सिटिंग फीस शामिल हैं। स्टॉक ऑप्शंस एंप्लॉयीज को दिया जाने वाला एक्स्ट्रा बेनेफिट है जिसके तहत एंप्लॉयी को कंपनी के शेयर भविष्य में एक तय कीमत यानी एक्सरसाइज प्राइस पर खरीदने का हक मिलता है।

HDFC Bank के टॉप एग्जीक्यूटिव्स की FY26 में कितनी कमाई

पहले बैंक के सीईओ शशिधर जगदीशन की बात करें तो उन्हें वित्त वर्ष 2025-26 में ₹3.31 करोड़ की बेसिक सैलरी, ₹3.63 करोड़ भत्ते और अन्य सुविधाओं के रूप में, ₹39.70 लाख पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन और ₹49.64 लाख सुपरएन्युएशन बेनेफिट्स के रूप में मिले। इसके अलावा उन्हें ₹7.29 करोड़ का परफॉरमेंस बोनस मिला और वित्त वर्ष 2026 के दौरान 4,28,405 स्टॉक ऑप्शंस भी एलॉट हुए।

एचडीएफसी बैंक के डिप्टी एमडी कैजाद भरूचा को ₹3.60 करोड़ की बेसिक सैलरी और ₹4 करोड़ भत्ते और अन्य सुविधाएं मिलीं। उन्हें ₹43.16 लाख पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन और ₹53.95 लाख सुपरएन्युएशन बेनेफिट्स भी मिला तो उनका परफॉरमेंस बोनस ₹8.57 करोड़ रहा। कैजाद भरूचा को 6,23,651 स्टॉक ऑप्शंस मिले, जो बैंक के सभी पूर्णकालिक डायरेक्टर्स में सबसे अधिक था।

बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर वी श्रीनिवास रंगन को ₹4.03 करोड़ की बेसिक सैलरी, ₹2.98 करोड़ भत्ते और अन्य सुविधाएं, ₹48.32 लाख पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन और ₹60.40 लाख सुपरएन्युएशन बेनेफिट्स मिले। इसके अलावा उन्हें ₹3.18 करोड़ का परफॉरमेंस बोनस मिला तथा वित्त वर्ष 2026 में 2,93,538 स्टॉक ऑप्शंस एलॉट हुए।

बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर भावेश जावेरी का कार्यकाल 18 अप्रैल 2026 को समाप्त हो चुका है। उन्हें वित्त वर्ष 2026 में ₹2.02 करोड़ की बेसिक सैलरी, ₹2.53 करोड़ भत्ते और अन्य सुविधाएं, ₹24.26 लाख पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन और ₹30.33 लाख सुपरएन्युएशन बेनेफिट्स मिला। उन्हें ₹2.02 करोड़ का परफॉरमेंस बोनस भी मिला और 1,38,542 स्टॉक ऑप्शंस मिला। बैंक की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक परफॉरमेंस बोनस में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और ग्रुप हेड के रूप में उनके परफॉरमेंस के लिए नकद बोनस भी शामिल था।

नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स में सबसे अधिक संदीप पारेख को ₹1.20 करोड़ की सिटिंग फीस मिली। इसके बाद एमडी रंगनाथ को ₹96 लाख, रेणु कर्नाड को ₹83 लाख, हर्ष कुमार भनवाला ₹79 लाख, लिली वडेरा को ₹69 लाख, अतनु चक्रवर्ती को ₹59 लाख, सुनीता महेश्वरी को ₹45 लाख, संतोष केशवन को ₹40 लाख और अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री को ₹35 लाख की सिटिंग फीस मिली। सिटिंग फीस के अलावा पार्ट-टाइम चेयरमैन को छोड़कर सभी नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स को आरबीआई के कॉरपोरेट गवर्नेंस फ्रेमवर्क के हिसाब से ₹30 लाख का फिक्स्ड पारिश्रमिक भी मिला।

पार्ट टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती को ₹30 लाख की बजाय ₹48.25 लाख का फिक्स्ड पारिश्रमिक मिला। बैंक की सालाना रिपोर्ट के हिसाब से आरबीआई ने पूरे वित्तीय वर्ष के लिए उन्हें ₹50 लाख के फिक्स्ड पारिश्रमिक को मंजूरी दी थी लेकिन चूंकि चक्रवर्ती ने 18 मार्च 2026 को इस्तीफा दे दिया था, इसलिए उन्हें प्रो-राटा बेसिस यानी अनुपातिक आधार पर ₹48.25 लाख का पेमेंट मिला। बोर्ड और कमेटी की बैठकों में हिस्सा लेने के लिए मिले ₹59 लाख के सिटिंग फीस को जोड़कर वित्त वर्ष 2026 में उन्हें ₹1.07 करोड़ मिले। इसके अलावा इस्तीफे की तारीख तक उन्हें आधिकारिक और व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए एक कार भी दी गई थी।

सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 30 मार्च 2026 को फिर से स्वतंत्र निदेशक के तौर पर चुनी गईं सुनीता माहेश्वरी को वित्त वर्ष 2026 के दौरान आनुपातिक आधार पर निश्चित पारिश्रमिक मिला। बैंक के अनुसार उनके कार्यकाल के बाकी अवधि का पारिश्रमिक शेयरहोल्डर्स और आरबीआई की मंजूरी के हिसाब से अगले वित्तीय वर्ष यानी FY2027 में दिया जाएगा।

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