HDFC Bank Share Price: MD और CEO पर नए ऐलान से दिखी 3% तक तेजी, अब ब्रोकरेज का क्या है नजरिया

HDFC Bank के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) शशिधर जगदीशन अपना कार्यकाल (टर्म) खत्म होने के बाद फिर से नियुक्ति नहीं चाहते हैं। उनका टर्म 26 अक्टूबर 2026 को खत्म हो रहा है। इस ऐलान के बाद 31 अगस्त को दिन में बैंक के शेयर में करीब 3 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। बीएसई पर शेयर 739.50 रुपये के हाई तक गया। कई ब्रोकरेज फर्मों ने मैनेजमेंट में संभावित बदलाव को लेकर सकारात्मक रुख बरकरार रखा है। लेकिन नए CEO की नियुक्ति को लेकर निकट भविष्य की अनिश्चितता के कारण सावधान भी हैं।

HDFC Bank ने नए MD और CEO की तलाश शुरू कर दी है। कहा है कि उसका बोर्ड उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया में तेजी लाएगा। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंक को उम्मीद है कि वह जगदीशन के 26 अक्टूबर को रिटायर होने से पहले ही अपने नए CEO की नियुक्ति कर लेगा। HDFC Bank के नए MD और CEO के रोल के लिए इंटरनल और एक्सटर्नल दोनों तरह के कैंडिडेट्स पर विचार किया जा रहा है।

HDFC Bank स्टॉक पर ब्रोकरेज की राय

ब्रोकरेज फर्मों के रुख की बात करें तो HDFC Bank पर कवरेज करने वाले एनालिस्ट्स इस डेवलपमेंट को लेकर बंटे हुए हैं। बर्नस्टीन ने बैंक के स्टॉक के लिए ‘आउटपरफॉर्म’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर तय किया है। ब्रोकरेज लीडरशिप में बदलाव को सकारात्मक मानता है। उसका कहना है कि नया CEO बैंक की कहानी को नए सिरे से पेश करने का स्वाभाविक मौका दे सकता है।

जेपी मॉर्गन ने भी स्टॉक पर अपनी ‘ओवरवेट’ रेटिंग बरकरार रखी है। टारगेट प्राइस 990 रुपये तय किया है। ब्रोकरेज का कहना है कि इस घटनाक्रम का असर निकट भविष्य में स्टॉक पर पड़ सकता है, लेकिन समय पर उत्तराधिकार की प्रक्रिया पूरी होने से नेतृत्व को लेकर बनी अनिश्चितता कम हो सकती है। निवेशकों का भरोसा बहाल करने के लिए नेट इंटरेस्ट इनकम (शुद्ध ब्याज आय) में बढ़ोतरी का फिर से शुरू होना काफी मायने रखता है है।

एक्सिस कैपिटल ने ‘बाय’ कॉल के साथ 1,030 रुपये का टारगेट प्राइस बरकरार रखा है। ब्रोकरेज का कहना है कि जगदीशन के फैसले से दूसरे कार्यकाल के छोटा होने की आशंका खत्म हो गई है। नए उत्तराधिकारी को पूरे 3 साल का कार्यकाल मिल सकता है।

IIFL, जेफरीज, ICICI सिक्योरिटीज की क्या राय

IIFL ने जगदीशन के फैसले को न्यूट्रल से थोड़ा पॉजिटिव बताया है। तर्क है कि इससे रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर अगला कार्यकाल छोटा होने का जोखिम खत्म हो जाता है। हालांकि कैजाद भरूचा एक संभावित इंटरनल कैंडिडेट (अंदरूनी उम्मीदवार) हो सकते हैं, लेकिन IIFL का कहना है कि कार्यकाल की पाबंदियों के कारण उन्हें काम करने के लिए कम समय मिल सकता है। भरूचा का HDFC Bank के बोर्ड में फुल-टाइम डायरेक्टर के तौर पर 15 साल का कार्यकाल 2029 में खत्म होगा। इसके चलते उन्हें टॉप पोजिशन पर बहुत कम मौका मिलेगा। कहा जा रहा है कि यह उनके नाम पर विचार करने में रुकावट बन सकता है। IIFL के मुताबिक, इसके उलट कोई भरोसेमंद बाहरी उम्मीदवार लीडरशिप में एक नई शुरुआत और लंबा कार्यकाल दे सकता है।

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अन्य ब्रोकरेज ने इस बदलाव को लेकर ज्यादा सावधानी भरा रुख अपनाया है। जेफरीज ने ‘बाय’ रेटिंग तो बनाए रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस को 1,050 रुपये से घटाकर 880 रुपये कर दिया है। FY27-29 के लिए कमाई के अनुमानों में भी 3-3 प्रतिशत की कटौती की है। ब्रोकरेज का मानना है कि नेतृत्व में बदलाव से बैंक के रेवेन्यू की रफ्तार, खासकर डिपॉजिट जुटाने और फीस से होने वाली आय पर असर पड़ सकता है। साथ ही बढ़ती अनिश्चितता से बैंक की कॉस्ट ऑफ इक्विटी बढ़ सकती है और वैल्यूएशन पर दबाव पड़ सकता है।

जेफरीज का कहना है कि इन सबके बावजूद HDFC Bank की वैल्यूएशन इतनी ज्यादा नहीं है कि रेटिंग घटाई जाए। ICICI सिक्योरिटीज ने भी अपनी ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखी है, लेकिन टारगेट प्राइस 1,020 रुपये से घटाकर 920 रुपये प्रति शेयर कर दिया है।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Amagi Media Labs Share Price: ब्लॉक डील में बिके ₹600 करोड़ के शेयर, कीमत 9% तक चढ़ी

अमागी मीडिया लैब्स के शेयरों में 21 अगस्त को दिन में 8.69 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर 627 रुपये के हाई तक गया। ऐसी खबर है कि एक ब्लॉक डील में Trudy Holdings, AVP I Fund और Accel ने कंपनी में 600 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। शेयरों की यह संख्या कंपनी की लगभग 5 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। इस ब्लॉक डील के तहत फ्लोर प्राइस 550 रुपये प्रति शेयर रहा।

अमागी मीडिया लैब्स एक क्लाउड-बेस्ड सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) कंपनी है। यह भारत को लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए एक अहम मार्केट मानती है। कंपनी को उम्मीद है कि आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस (AI) उसके अगले ग्रोथ फेज का अहम हिस्सा बनेगा। Amagi ने AI-बेस्ड पहलों में निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है और हाल ही में अपने पहले AI कस्टमर की घोषणा की है। यह जेनरेटिव AI इंफ्रास्ट्रक्चर में शुरुआती कदम का संकेत है।

कंपनी को उम्मीद है कि समय के साथ भारत का योगदान काफी बढ़ेगा, क्योंकि क्लाउड का इस्तेमाल और स्ट्रीमिंग की खपत बढ़ रही है, हालांकि US अभी भी उसका सबसे बड़ा मार्केट बना हुआ है। US से अभी Amagi को लगभग 73 प्रतिशत रेवेन्यू मिलता है।

शेयर 3 महीनों में 50 प्रतिशत मजबूत

अमागी मीडिया लैब्स जनवरी 2026 में शेयर बाजारों में लिस्ट हुई थी। इसका IPO 1,788.62 करोड़ रुपये का था। कंपनी का मार्केट कैप 13100 करोड़ रुपये से ज्यादा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 14.92 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। शेयर 6 महीनों में 45 प्रतिशत और 3 महीनों में 50 प्रतिशत चढ़ा है। शेयर का BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 726 रुपये और एडजस्टेड लो 310.75 रुपये है।

SBI Cards के शेयर में आएगी 34% तक गिरावट! बर्नस्टीन ने घटाया टारगेट प्राइस

कंपनी की वित्तीय सेहत

अमागी मीडिया लैब्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 275.64 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 22.97 करोड़ रुपये रहा। वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का स्टैंडअलोन रेवेन्यू 949.23 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। शुद्ध मुनाफा 26.45 करोड़ रुपये रहा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Cards के शेयर में आएगी 34% तक गिरावट! बर्नस्टीन ने घटाया टारगेट प्राइस

SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज लिमिटेड के शेयरों में 21 अगस्त को गिरावट है। दिन में शेयर की कीमत बीएसई पर पिछले बंद भाव से 1.4 प्रतिशत तक टूटकर 637 रुपये के लो तक गई। दरअसल ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने शेयर के लिए प्राइस टारगेट 610 रुपये से घटाकर 430 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। हालांकि ‘अंडरपरफॉर्म’ रेटिंग को बरकरार रखा है। नया टारगेट शेयर के पिछले क्लोजिंग प्राइस से 33 प्रतिशत कम है।

बर्नस्टीन का कहना है कि रिवॉल्वर्स लेड क्रेडिट कार्ड मॉडल में बड़ा ढांचागत बदलाव हो रहा है, और इस दबाव के कम होने या पलटने के बहुत कम संकेत हैं। इस मॉडल से अर्थ है एक ऐसा कार्ड बिजनेस, जिसमें ग्राहक बिल का कुछ हिस्सा चुकाकर बाकी रकम को आगे बढ़ाते रहते हैं और कंपनी को उस बकाया रकम पर ब्याज से कमाई होती है। चूंकि SBI Cards पूरी तरह से क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनी है, इसलिए उसे इस बदलाव का सबसे ज्यादा असर झेलना पड़ा है।

बर्नस्टीन को अभी भी रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो में और गिरावट से नुकसान का जोखिम दिख रहा है। इसके कारण क्रेडिट कॉस्ट में सुधार के बावजूद नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) और कमाई में बढ़ोतरी पर दबाव बना रह सकता है। ब्रोकरेज ने SBI कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज के लिए अर्निंग्स-प्रति-शेयर (EPS) अनुमानों को घटा दिया है।

SBI Cards का रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो घटकर 2.8 प्रतिशत

SBI कार्ड्स के मामले में रिवॉल्वर्स-टू-स्पेंड्स रेश्यो जून 2026 तिमाही में घटकर 2.8 प्रतिशत रह गया। बर्नस्टीन का कहना है कि इस गिरावट के कारण प्रति यूनिट खर्च पर होने वाले मुनाफे में भारी कमी आई है। अहम बात यह है कि रिवॉल्वर्स में आई गिरावट की भरपाई EMI लोन में बढ़ोतरी से नहीं हो पाई है। हालांकि SBI कार्ड्स ने कम ऑपरेटिंग खर्चों के जरिए कमाई पर पड़ने वाले असर को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन बर्नस्टीन का कहना है कि अब इसका असर फीस/नॉन-इंटरेस्ट इनकम-टू-स्पेंड्स रेश्यो पर पड़ने लगा है।

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शेयर 6 महीनों में 18 प्रतिशत कमजोर

SBI Cards का मार्केट कैप 61400 करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। यह BSE 200 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर 6 महीनों में 18 प्रतिशत और साल 2026 में अब तक 25 प्रतिशत नीचे आया है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 68.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। कंपनी का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर रेवेन्यू 5,040.55 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 664.44 करोड़ रुपये रहा। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान स्टैंडअलोन रेवेन्यू 19,899.63 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 2,166.71 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trent Stocks Crash: ट्रेंट का स्टॉक मार्केट खुलते ही क्रैश, जून तिमाही के अपडेट्स ने बाजार को किया निराश

Trent Stocks Crash: ट्रेंट का शेयर 7 जुलाई को बाजार खुलते ही क्रैश कर गया। इसकी वजह कंपनी का जून तिमाही का बिजनेस अपडेट्स हैं। यह बाजार की उम्मीद के मुकाबले कमजोर रहा। इसके बाद ब्रोकरेज ने कंपनी की ग्रोथ को लेकर अपने अनुमान में बदलाव किए। सुबह 10:17 बजे कंपनी का शेयर 11.09 फीसदी की गिरावट के साथ 2,973 रुपये पर चल रहा था। ट्रेंट टाटा समूह की कंपनी है।

जून तिमाही में उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन

Trent ने बताया है कि जून तिमाही में उसका स्टैंडएलोन रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 19 फीसदी बढ़ा है। इस दौरान के वेस्टसाइड और जूडियो फॉरमैट में इजाफा हुआ, लेकिन यह एनालिस्ट्स की उम्मीद से कम है। कंपनी के नए स्टोर की संख्या भी उम्मीद के मुकाबले कम रही। कंपनी का स्टैंडएलोन रेवेन्यू जून तिमाही में 5,666 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 4,781 करोड़ रुपये था।

नए स्टोर की संख्या भी एनालिस्ट्स की उम्मीद से कम

इस साल जून तिमाही के अंत में कंपनी के स्टोर की संख्या 1,312 थी। इसमें वेस्टसाइट के 301 आउटलेट्स, जूडियो के 982 आउलेट्स और दूसरे लाइफस्टाइल फॉरमैट्स के 29 स्टोर शामिल हैं। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि ट्रेंट का जून तिमाही का अपडेट उम्मीद के मुकाबले कमजोर हैं। रेवेन्यू भी उम्मीद से कम है। नए स्टोर की संख्या भी उम्मीद से कम है। नए स्टोर की संख्या के लिहाज से यह सबसे कमजोर तिमाही है।

आगे के प्रदर्शन को लेकर एनालिस्ट्स की एक राय नहीं

आगे ट्रेंट के शेयरों के प्रदर्शन को लेकर एनालिस्ट्स की राय बंटी हुई है। कुछ एनालिस्ट्स का कहना है कि कंपनी का फोकस वेस्टसाइट और जूडियो के स्टोर की संख्या बढ़ाने पर बना हुआ है। इससे लंबी अवधि में कंपनी की ग्रोथ अच्छी रह सकती है। आगे मार्जिन में भी इम्प्रूवमेंट दिख सकता है। लेकिन, कुछ एनालिस्ट्स का कहना है कि वैल्यू-फैशन सेगमेंट में प्रतियोगिता बढ़ रही है। कंपनी के स्टोर्स की प्रोडक्टविटी भी कम है। इसका असर कंपनी की ग्रोथ पर पड़ सकता है।

एचएसबीसी को रेवेन्यू ग्रोथ 21 फीसदी रहने का अनुमान 

एचएसबीसी ने जून तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ करीब 21 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। बर्नस्टीन का मानना था कि वेस्टसाइड स्टोर्स की संख्या बढ़ाने से कंपनी की ग्रोथ पर पॉजिटिव असर पड़ सकता है। मार्च तिमाही में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 26 फीसदी बढ़ा था। बीते एक साल में कंपनी का शेयर करीब 19 फीसदी फिसला है।

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7 जुलाई को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में तेजी

7 जुलाई को शेयर बाजारों में तेजी दिखी। निफ्टी 0.22 फीसदी यानी 52 अंक चढ़कर 24,485 पर चल रहा था। सेंसेक्स भी 0.26 फीसदी यानी 206 अंक की तेजी के साथ 78,499 पर था। बैंक निफ्टी में भी 0.23 फीसदी की तेजी दिखी। मिडकैप शेयरों में कमजोरी दिखी। आज लगातार पांचवां दिन है, जब शेयर बाजारों में तेजी दिख रही है।

इस विदेशी ब्रोकरेज फर्म ने प्राइवेट बैंकों में घटाया निवेश, आईटी शेयरों को पोर्टफोलियो से किया बाहर

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का भारत के प्राइवेट बैंकों पर भरोसा घटा है। उसने अपने इंडिया मॉडल पोर्टफोलियो से निफ्टी आईटी इंडेक्स को हटा दिया है। उसने कहा है कि बाजार की रफ्तार बढ़ाने वाला कोई फैक्टर नहीं दिख रहा है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, इनफ्लेशन और मानसून से जुड़े रिस्क बाजार के लिए बड़े चैलेंज दिख रहे हैं।

शेयरों से कमाई के लिहाज से स्थितियां चुनौतीपूर्ण

Bernstein ने कहा है कि पश्चिम एशिया में चल रही लड़ाई को लेकर टेंशन कम हुआ है। क्रूड ऑयल की कीमतें भी काफी नीचे आ गई हैं। लेकिन, शेयर बाजार से कमाई के लिहाज से स्थितियां मुश्किल दिख रही हैं। कई बड़े सेक्टर बड़ी चुनौतियां का सामना कर रहे हैं। मौके मार्केट में सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों में हैं।

निफ्टी के लिए 26000 को टारगेट को बनाए रखा

बर्नस्टीन ने 1 जुलाई को जारी रिपोर्ट में ये बातें बताई हैं। उसने कहा है, “इंडिया में मार्केट के रिटर्न का आउटलुक अब भी मुश्किल दिख रहा है।” हालांकि, इस साल के अंत तक निफ्टी के 26,000 के टारगेट में उसने बदलाव नहीं किया है। इसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से निफ्ली करीब 8-9 फीसदी चढ़ सकता है।

पोर्टफोलियो से इन शेयरों को किया बाहर

ब्रोकरेज फर्म ने अपने पोर्टफोलियो में हाल में हुए बदलाव के तहत ICICI Bank, IndusInd Bank और निफ्टी आईटी इंडेक्स के शेयरों को बाहर कर दिया है। हालांकि, उसने Axis Bank और Zydus Life के शेयरों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि उसने फाइनेंशियल शेयरों में इस साल की शुरुआत में अपना निवेश घटाया था। इस सेक्टर को लेकर अब भी उसका एप्रोच सेलेक्टिव है।

प्राइवेट बैंकों में पहले जैसी ग्रोथ नहीं दिख रही

बड़े प्राइवेट बैंकों के बारे में बर्नस्टीन ने कहा है कि इनमें पहले की साइकिल जैसी ग्रोथ विजिबिलिटी और गवर्नेंस प्रीमियम नहीं दिख रहा। सरकारी बैंकों से प्रतियोगिता बढ़ रही है और शॉर्ट टर्म में रीरेटिंग की कोई संभावना नजर नहीं आ रही। उसने कहा है कि उसने इस साल खराब प्रदर्शन की वजह से आईसीआईसीआई बैंक और इंडसइंड को पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है।

डेटा सेंटर ईकोसिस्टम में दिख रहे मौके

शेयर बाजार के लिए स्थितियां चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद बर्नस्टीन के इंडिया पोर्टफोलियो ने इस साल 1.1 फीसदी रिटर्न दिया है। यह इस दौरान निफ्टी के 6.7 फीसदी के निगेटिव रिटर्न से बेहतर है। उसने कहा है कि बाजार की मौजूदा स्थितियों में सीमित मौके दिख रहे हैं। ये मौके डेटा सेंटर ईकोसिस्टम और इमर्जिंग मैन्युफैक्चरिंग थीम में दिख रहे हैं। ये मौके ज्यादातर स्मॉलकैप स्टॉक्स तक सीमित हैं, जिससे मार्केट के कुल रिटर्न पर इनका असर पड़ने की संभावना नहीं है।

Ambuja Cements Share Price: बर्नस्टीन ने इस सीमेंट स्टॉक की रेटिंग को किया अपग्रेड, जानें क्या है टारगेट प्राइस

Ambuja Cements Share Price: बर्नस्टीन ने गुरुवार, 2 जुलाई को अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड (Ambuja Cements Ltd) को उसकी पिछली रेटिंग “मार्केट परफॉर्म” से “आउटपरफॉर्म” में अपग्रेड किया। ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि भारत के दो सबसे बड़े सीमेंट प्रोड्यूसर के बीच वैल्यूएशन का अंतर अब टिकाऊ नहीं रहा। अपग्रेड के बावजूद, बर्नस्टीन ने अंबुजा सीमेंट्स पर अपना प्राइस टारगेट ₹542 प्रति शेयर से घटाकर ₹486 कर दिया, जिसका मतलब है कि मौजूदा लेवल से 16% की बढ़त की संभावना है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अंबुजा, अल्ट्राटेक सीमेंट के मुकाबले भारी डिस्काउंट पर ट्रेड कर रही है, भले ही यह कैपेसिटी के हिसाब से देश की दूसरी सबसे बड़ी सीमेंट प्रोड्यूसर बन गई है।

बर्नस्टीन के अनुसार, अल्ट्राटेक की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹3.6 लाख करोड़ है और इसकी सीमेंट कैपेसिटी 206 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) है, जबकि श्री सीमेंट की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹90,000 करोड़ है और इसकी कैपेसिटी 69 MTPA है। इसकी तुलना में, अंबुजा की एंटरप्राइज वैल्यू लगभग ₹1.2 लाख करोड़ है, जबकि इसकी कैपेसिटी 109 MTPA है।

ब्रोकरेज ने कहा कि अंबुजा की वैल्यू अभी लगभग एक नया ग्रीनफील्ड सीमेंट प्लांट बनाने की लागत के बराबर है, जो कंपनी के स्केल या कमाई की क्षमता को नहीं दिखाता है। बर्नस्टीन को उम्मीद है कि अंबुजा की चल रही कैपेसिटी बढ़ाने और ऑपरेशनल सुधारों से आगे चलकर अल्ट्राटेक और श्री सीमेंट दोनों के साथ प्रति टन EBITDA का अंतर कम करने में मदद मिलेगी।

ब्रोकरेज का मानना ​​है कि आने वाले सालों में मजबूत एग्जीक्यूशन से री-रेटिंग को बढ़ावा मिलना चाहिए क्योंकि कंपनी बड़ी कंपनियों के साथ प्रॉफिट का अंतर कम कर रही है।

अंबुजा सीमेंट्स पर 46 एनालिस्ट की कवरेज है, जिनमें से 33 ने स्टॉक पर “बाय” रेटिंग दी है, 10 ने “होल्ड” कहा है, जबकि तीन अन्य ने “सेल” रेटिंग दी है।

अंबुजा सीमेंट्स के शेयर अभी गुरुवार को 1.7% बढ़कर ₹426.5 पर ट्रेड कर रहे हैं। स्टॉक अपने 52-हफ़्ते के हाई ₹624 से 32% नीचे है। 2027 में अब तक स्टॉक 24% नीचे आ चुका है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।