Bank Holiday: कल शनिवार को इस राज्य में बंद रहेंगे बैंक, जानिए RBI ने क्यों दी है 17 अक्टूबर की छुट्टी

Bank Holiday 17th October: अक्टूबर के महीने में त्योहारों का सिलसिला लगातार जारी है। त्योहारी सीजन के इस दौर में बैंक शाखाओं में कामकाज के लिए जाने से पहले आपको छुट्टियों की पूरी लिस्ट जरूर पता होनी चाहिए। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की बैंक हॉलिडे की ऑफिशियल लिस्ट के मुताबिक दुर्गा पूजा और महा सप्तमी जैसे पावन पर्वों के चलते देश के कुछ खास राज्यों में बैंक बंद रहने वाले हैं। अगर आपको इस सप्ताह या शनिवार-रविवार के दौरान बैंक शाखा में जाकर चेक क्लियरेंस, ड्राफ्ट बनवाने या दूसरे जरूरी फाइनेंशियल काम करने हैं तो घर से निकलने से पहले छुट्टियों का यह पूरा शेड्यूल चेक कर लें।

17 अक्टूबर को महा सप्तमी पर इस राज्य में बंद रहेंगे बैंक

आरबीआई की हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक कल यानी 17 अक्टूबर को ‘महा सप्तमी’ के पावन अवसर पर अगरतला, त्रिपुरा में बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे। हालांकि बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए डिजिटल बैंकिंग सेवाएं हमेशा की तरह पूरी तरह सुचारू रहेंगी। बाकी भारत के लिए यह महीने का तीसरा शनिवार है और बैंक खुले रहेंगे।

इसके अगले दिन यानी 18 अक्टूबर को रविवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे। इसके तुरंत बाद अगले हफ्ते की शुरुआत में 19 और 20 अक्टूबर को महा अष्टमी, महा नवमी और विजयादशमी (दशहरा) के उपलक्ष्य में पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, ओडिशा, बिहार, झारखंड, असम, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश समेत देश के अधिकांश राज्यों में बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

अक्टूबर महीने में बैंक छुट्टियों की पूरी लिस्ट

अक्टूबर महीने के बचे हुए दिनों में विभिन्न त्योहारों और राष्ट्रीय छुट्टियों की वजह से बैंकों का शेड्यूल कुछ इस तरह रहेगा-

17 अक्टूबर: महा सप्तमी के अवसर पर त्रिपुरा राज्य में बैंक बंद रहेंगे।

18 अक्टूबर: रविवार की साप्ताहिक छुट्टी की वजह से पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे।

19 अक्टूबर: महा अष्टमी और महा नवमी के उपलक्ष्य में पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में अवकाश रहेगा।

20 अक्टूबर: विजयादशमी (दशहरा) के पावन पर्व पर लगभग पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे। (गंगटोक और इम्फाल को छोड़कर)।

21 अक्टूबर: दुर्गा पूजा / विजया दशमी- अगरतला, बेंगलुरु, गंगटोक, गुवाहाटी, कोच्चि, कोलकाता और तिरुवनंतपुरम।

22–23 अक्टूबर: दुर्गा पूजा / दसैन- सिर्फ गंगटोक (सिक्किम)।

24 अक्टूबर: महीने के चौथे शनिवार की साप्ताहिक छुट्टी के कारण देश भर में बैंक बंद रहेंगे।

25 अक्टूबर: रविवार का साप्ताहिक अवकाश होने के कारण पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे।

26 अक्टूबर: महर्षि वाल्मीकि जयंती और लक्ष्मी पूजा के अवसर पर पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में बैंक अवकाश रहेगा।

29 अक्टूबर: करवा चौथ पर सिर्फ शिमला में लोकल छुट्टी।

31 अक्टूबर: सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती और करवा चौथ के मौके पर गुजरात और हिमाचल प्रदेश सहित कुछ क्षेत्रों में बैंक बंद रहेंगे।

बैंक बंद रहने पर भी चालू रहेंगी डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं

छुट्टियों के दौरान बैंक शाखाएं बंद रहने से ग्राहकों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। बैंक की सभी डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। ग्राहक इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई के माध्यम से पैसों का लेन-देन कर सकेंगे। इसके अलावा कैश विड्रॉल और बैलेंस इंक्वायरी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए देश भर के सभी एटीएम चौबीस घंटे काम करते रहेंगे।

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यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला टला

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने यूपीआई के जरिए होने वाले डिजिटल लेन देन पर शुल्क लगाने का फैसला टाल दिया है। दो हजार रुपए से ज्यादा के लेनदेन पर 0.40 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला 15 अक्टूबर से लागू होने वाला था। लेकिन देश भर में हो रहे विरोध की वजह से सरकार ने इस फैसले के अमल पर दिवाली तक रोक लगा दिया है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी एनपीसीआई ने त्योहारी सीजन को देखते हुए इसे टालने का फैसला लिया है।

एनपीसीआई ने कहा है कि इसे दिवाली के तुरंत बाद लगाया जाएगा, हालांकि अभी तारीख नहीं बताई है। गौरतलब है कि सरकार ने पिछले महीने फैसला किया था कि अगर ग्राहक दुकानदार को दो हजार रुपए से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट करता है, तो दुकानदार को कुल रकम पर 0.4 फीसदी एमडीआर शुल्क देना होगा। हालांकि दो लोगों के बीच नकद लेनदेन को इस शुल्क से अलग रखा गया था।

यह भी बताया गया था कि 75 हजार रुपए या उससे ज्यादा का भुगतान करने पर अधिकतम तीन सौ रुपए का फिक्स्ड चार्ज लगेगा। इसके साथ ही रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस या ईंधन पर दो हजार रुपए से ज्यादा के भुगतान पर पांच रुपए  का फिक्स्ड चार्ज तय किया गया था। बताया जा रहा है कि दशहरा औऱ दिवाली के दौरान देश भर के बाजारों में कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, गहने और सामानों की भारी बिक्री होती है। ऐसे में डिजिटल पेमेंट बढ़ जाता है।

कारोबारी संगठनों और पेमेंट कंपनियों का मानना था कि त्योहारों के बीच नया नियम लागू करने से दुकानों पर पेमेंट में रुकावट आ सकती है। व्यापारी संगठनों ने इसका खुल कर विरोध किया और यह भी कहा कि नकद लेनदेन बढ़ने पर छापेमारी की कार्रवाई तेज हो सकती है। तभी व्यापारियों के विरोध की वजह से एनपीसीआई ने दिवाली तक इस फैसले को आगे बढ़ा दिया है।

पाकिस्तान में ट्रेन पटरी से उतरी चार यात्रियों की मौत, 30 घायल

पाकिस्तान में पंजाब प्रांत के शेर शाह में एक यात्री ट्रेन के पटरी से उतरने से कम से कम चार लोगों की मौत हो गई और 30 लोग घायल हो गए। स्पुतनिक ने यह जानकारी दी। यह दुर्घटना मंगलवार तड़के हुई जब ट्रेन कराची से पेशावर जा रही थी और पटरी से उतर गई।

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बचाव कर्मियों ने ट्रेन की 14 बोगियों से चारों शव बरामद किए और घायलों को बाहर निकालकर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।

राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने इस दुर्घटना पर शोक व्यक्त किया और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही।

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यूपीआई भुगतान पर दिवाली तक किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने व्यापारियों के लिए दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को दिवाली के बाद के लिए टाल दिया है। पहले के निर्णय के अनुसार, यह शुल्क 15 अक्टूबर से लागू किया जाना था।

एनपीसीआई ने मंगलवार को एक विज्ञप्ति में कहा कि उसकी यूपीआई एवं सेवा संचालन समिति ने त्योहारी मौसम को देखते हुए आज यह निर्णय लिया कि व्यक्ति से दुकानदार को (पी2एम) यूपीआई के जरिये किए जाने वाले चुनिंदा भुगतानों पर एमडीआर दिवाली के बाद लागू किया जाएगा। इसको लागू करने की तिथि बाद में अलग से तय की जाएगी।

गौरतलब है कि एनपीसीआई ने गत 15 सितंबर को घोषणा की थी कि यूपीआई के जरिये 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा जो 15 अक्टूबर से लागू होगा।रुपे डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन और 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं लगाया जा सकेगा।

वित्त मंत्रालय ने उस समय इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा था कि व्यक्तिगत यूपीआई खातों से मर्चेंट खातों में भुगतान पर 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। अधिकतम एमडीआर 300 रुपये होगा।

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इसी तरह अनिवार्य सेवाओं जैसे रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि क्षेत्र में बीज, खाद आदि के लिए पांच रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का सपाट शुल्क तय किया गया है। पूंजी बाजार से संबंधित लेनदेन जैसे म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति और स्टॉक ब्रोकर तथा डीलरों के लिए एमडीआर की दर 0.02 प्रतिशत तय की गई है। इसमें भी अधिकतम शुल्क 300 रुपये होगी।

सरकार यह भी स्पष्ट कर चुकी है कि व्यक्तिगत से व्यक्तिगत यूपीआई खातों में लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। यूपीआई से हर महीने एक लाख रुपये तक का लेनदेन करने वाले छोटे व्यापारियों को भी एमडीआर के दायरे से बाहर रखा गया है।

यूपीआई पर लगने वाले एमडीआर में से 40 प्रतिशत उस बैंक को जाएगा जिसमें भुगतान करने वाले ग्राहक का खाता है। भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी का जिस बैंक में खाता है या वह जिस भुगतान गेटवे का इस्तेमाल कर रहा है उसे 30 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। यूपीआई ऐप को 20 प्रतिशत और यूपीआई ऐप के बैंकिंग साझेदार को शुल्क में 10 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि इसमें सरकार या रिजर्व बैंक को एक भी पैसा नहीं मिलेगा।

सरकार ने कहा है कि यूपीआई से होने वाले 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजेक्शन 2,000 रुपये या इससे से कम मूल्य के होते हैं और इसलिए ये शुल्क के दायरे से बाहर रहेंगे।

एनपीसीआई देश में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए उत्तरदायी एक शीर्ष संस्था है। इसकी स्थापना भारतीय रिजर्व बैंक और बैंकों के फोरम भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के जरिये की गई है। यह संस्था प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से खुदरा भुगतान प्रणालियों में नवाचार लाने, परिचालन में अधिक दक्षता प्राप्त करने तथा भुगतान प्रणालियों की पहुंच को व्यापक बनाने पर केंद्रित है।

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UPI पर MDR चार्ज लागू होने की 15 अक्टूबर की तारीख टली, नए डेट को लेकर आया अब ये बड़ा अपडेट

UPI MDR Date Extended: देशभर के करोड़ों UPI यूजर्स और दुकानदारों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। त्योहारी सीजन की खरीदारी के बीच 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले यूपीआई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नए नियमों को दिवाली के बाद तक के लिए आगे बढ़ा दिया गया है।

उद्योग जगत, मर्चेंट बॉडीज, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट एग्रीगेटरों द्वारा नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और वित्त मंत्रालय के सामने उठाई गई चिंताओं के बाद इस डेडलाइन को बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया गया है।

क्यों बढ़ाई गई MDR लागू करने की तारीख?

पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा P2M ट्रांजैक्शंस पर 0.4% MDR चार्ज लगाने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन जैसे-जैसे इसकी डेडलाइन (15 अक्टूबर) पास आ रही थी, बाजार में कई बड़ी व्यावहारिक और तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही थीं:

त्योहारी सीजन का असर: दशहरा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के दौरान देश में सबसे ज्यादा खुदरा कारोबार होता है। ऐसे में अचानक MDR लागू होने से व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत का बोझ पड़ता, जिसके त्योहारी खरीदारी के दौरान महंगाई के रूप में ग्राहकों की जेब पर असर पड़ने की पूरी आशंका थी।

कैटेगिरी और तकनीकी भ्रम: कार्ड्स के मुकाबले UPI का ढांचा काफी अलग है। इसमें यूटिलिटी बिल, लोन रीपेमेंट (ऑटो-डेबिट फेल होने पर मैन्युअल पेमेंट) और कैपिटल मार्केट (शेयर बाजार/ब्रोकिंग अकाउंट में फंड ट्रांसफर) जैसे ट्रांजैक्शन्स के लिए अलग-अलग नियम तय किए गए हैं, जिन्हें लेकर पेमेंट कंपनियों और मर्चेंट्स में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी।

कैपिटल मार्केट और लोन रीपेमेंट का पेंच: ब्रोकिंग और कैपिटल मार्केट एसोसिएशन ने भी सेबी के सामने यह बात रखी थी कि ट्रेडिंग अकाउंट में पैसे डालना पर्सन-टू-पर्सन (P2P) जैसा ही है, जिस पर अतिरिक्त MDR लादना सही नहीं है। इन सभी तकनीकी और सिस्टम अपग्रेड से जुड़ी अड़चनों को दूर करने के लिए उद्योग जगत ने इसे आगे बढ़ाने की मांग की थी।

अब क्या रहेगा मौजूदा नियम?

अब जब तक नई डेडलाइन नहीं आती, तब तक यूपीआई के जरिए होने वाले सभी सामान्य मर्चेंट पेमेंट और रोजमर्रा के लेनदेन पहले की तरह ही पूरी तरह सुरक्षित और बिना किसी अतिरिक्त MDR चार्ज के जारी रहेंगे। इसके साथ छोटे दुकानदारों, स्ट्रीट वेंडर्स और आम ग्राहकों को त्योहारी सीजन के दौरान किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है।

सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई, कई नेता हिरासत में

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित अन्य मांगों में शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं माकपा के एमए बेबी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बार्डर सहित कई इलाकों में पहरा सख्त करते हुए कई जगह पर बैरिकेडिंग लगा दी और सुबह से ही यातायात पर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गईं।

वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और स्थिति पर निगरानी रखने के लिए प्रमुख चौराहों पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में यातायात जाम और रूट डायवर्जन की चेतावनी देते हुए एडवाइजरी जारी की। पुलिस की सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जगह जगह पहुंचे। इनमें मिंटो ब्रिज, दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रभावित चौराहों और मार्गों में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोल चक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग, रेल भवन गोल चक्कर, गोल डाकखाना और विंडसर प्लेस शामिल हैं।

पुलिस ने सीजेपी संस्थापक सर्वश्री दीपके, दास और रांका को राष्ट्रीय राजधानी में तब हिरासत में ले लिया जब वे मुंबई से यहां आए हवाई जहाज से उतरने वाले थे। दिल्ली पुलिस ने उनको विमान के भीतर से अपनी हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद पार्टी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

श्री दीपके ने एक पूर्व रिकार्डेड मैसेज से यह जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व की हिरासत के बावजूद यह प्रदर्शन जारी रहेगा तथा श्री कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने की मांग पर आंदोलन पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ाया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई कि श्री दीपके की दादी का निधन हो गया। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि नेताओं की इस तरह की गई हिरासत कार्यकर्ताओं के हौसलों को नहीं डिगा सकती और यह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक निर्णायक संघर्ष है।

बयान में कहा गया जब राज्य सत्ता लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का सहारा लेती है, तो लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को स्वयं कमान संभालनी होगी । इसके अलावा खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह एक संयुक्त अभियान के तहत दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम के एक आवासीय फ्लैट से चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। श्री राठी ऐसे वीडियोज के लिए जाने जाते हैं जिनमें केंद्र सरकार की कठोर आलोचना की जाती है।

इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए मध्य दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। निर्धारित प्रदर्शन स्थल के पास एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बसों में भरकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया। सुरक्षा उपायों के तहत दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए अब तक हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के इस प्रदर्शन की अनुमति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि पार्टी द्वारा प्रस्तुत सूचना कोई औपचारिक आवेदन नहीं थी, क्योंकि नियमों के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने और राजधानी की ओर प्रदर्शनकारियों के आने को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाई हैं, बाजारों और मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के आदेश दिए हैं तथा शहर में आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है। दिल्ली के लोकप्रिय दिल्ली हाट से छात्रों की भीड़ का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही वामपंथी छात्र नेता नेहा बोरा को भी “सरफ़रोशी की तमन्ना” कविता गाते हुए देर दोपहर हिरासत में ले लिया गया।

ममता बनर्जी और उनके सांसदों और समर्थकों का एक समूह प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण हिरासत में लिए जाने से पहले अपने साउथ एवेन्यू स्थित आवास के बाहर तख्तियां लेकर धरने पर बैठा था। ममता बनर्जी ने एक पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय संवाददाताओं से कहा देश में क्या चल रहा है, सबको पता है । दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को विपक्ष पर अपना हमला तेज करते हुए राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं पर देश में तनाव भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सरकार उनके द्वारा अशांति भड़काने के प्रयासों से सख्ती से निपटेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता बार-बार की चुनावी हार के बाद हताश होकर काम कर रहे हैं और चेतावनी दी कि पार्टी तथा उसके समर्थक उनके इन प्रयासों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा भारत सरकार आपके द्वारा तनाव पैदा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से सख्ती से निपटेगी । कांग्रेस ने सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी को “किले” में तब्दील करने का आरोप लगाया, जिसके तहत पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा राष्ट्रीय राजधानी को एक किले में बदल दिया गया है, जहाँ हर तरफ सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात हैं ।कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार से सवाल करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबायी जा रही है और देश को ‘खामोश लोकतंत्र’ में बदला जा रहा है।

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श्री खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं, यूट्यूबरों और कंटेंट क्रिएटरों सहित सरकार से सवाल करने वाले सभी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कायरता आज पूरी तरह सामने आ गयी है। हिरासत, गिरफ्तारियां, जेल, लाठियां और पैलेट भी भारत के लोगों को रोक नहीं सकते। स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही युवा देश की नियति तय करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं । कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी एकजुट विपक्ष के साथ मिलकर इस तानाशाही शासन के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ती रहेगी। भारत की आजादी के लिए खून बहाने वाली कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने की कोशिश सरकार की बड़ी भूल साबित होगी।

श्री यादव ने ‘एक्स’ पर कहा किसी के रोकने से नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा । उन्होंने कहा कि देश की युवा ऊर्जा उनके साथ है। भाजपा सरकार अगर यह समझ रही है कि वह ताकत के बल पर जनता को रोक लेगी, तो यह उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। श्री यादव ने कहा कि ‘जंतर-मंतर’ अब केवल एक जगह का नाम नहीं, बल्कि नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। पुलिस ने सुबह ही जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेताओं समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में माकपा महासचिव एमए बेबी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, केरलम के पूर्व वित्त मंत्री केएन. बालगोपाल, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, मणिकंतन वी. गोविंदान, श्रीमती, वृंदा करात, के के शैलजा और पी राजीव शामिल हैं।

श्रीमती करात ने फेसबुक पेज पर लिखा मोदी और उनकी सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के लोग उठ खड़े हुए हैं और वे उन्हें रोक नहीं सकते। दिल्ली का दिल उसके सभी लोगों का है। ये दबाने वाले तरीके हमें नहीं रोक पाएंगे! चलो जंतर-मंतर की ओर!”

केरलम भवन से बाहर निकलते ही पुलिस ने वामपंथी नेताओं को जंतर-मंतर की ओर मार्च करने से रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। शुरुआत में पुलिस ने श्री विजयन, श्री ब्रिटास और श्री केएन बालगोपाल को छोड़कर अन्य नेताओं को हिरासत में लिया था लेकिन जब ये तीनों नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस हुई और पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बात करते हुए श्री विजयन ने इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों से उनकी सरकार चुनने का अधिकार छीना जा रहा है और 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार के इशारे पर किया है और सरकार अब उन्हें बचाने के लिए गैर-कानूनी तरीके अपना रही है लेकिन यह विरोध आज खत्म नहीं होगा। श्री विजयन ने कहा कि भारत देश कोई पुलिस राज्य नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक देश है और सत्ताधारी दल के मन में लोकतंत्र के प्रति कोई सम्मान न होने के कारण ऐसी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, सांसद जॉन ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने और उनकी हिरासत की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं सहित वरिष्ठ और युवा वकीलों की कथित हिरासत का मुद्दा उठाया है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दिए गए एक ज्ञापन में एसोसिएशन ने हस्तक्षेप की मांग करते हुए हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, बिना किसी कानूनी आधार के रोके गए वकीलों को तत्काल कानूनी सहायता प्रदान करने, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।आप विधायक कुलदीप कुमार ने आज दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को पुलिस मोदी सरकार के आदेश पर हिरासत में लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच रही थी और इसी दौरान पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।

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यूपीआई पेमेंट के लिए अब मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं

यूपीआई के माध्यम से भुगतान के लिए आने वाले समय में जेब से मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं रह जाएगी, मोबाइल जेब में ही रहेगा और जियो एआई ग्लास से क्यूआर कोड स्कैन भुगतान हो जाएगा।

जियो ने यहां यशोभूमि में चल रहे इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में ऐसा ही एक भविष्योन्मुखी उत्पाद दिखाया। कंपनी ने अपनी पर्सनल एआई वियरेबल रेंज में कैमरा ग्लास, ऑडियो ग्लास और ईयरफोन दिखाए हैं। इनमें स्कैन एंड पे, एआई वॉयस असिस्टेंट, लाइव ट्रांसलेशन, एआई नोट टेकिंग और लाइव क्रिकेट कमेंट्री जैसे फीचर्स हैं। ये एक से अधिक भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं।

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स्कैन एंड पे की मदद से कैमरा ग्लास यूपीआई क्यूआर कोड स्कैन करेगा, यूजर वॉयस कमांड देगा और पुष्टि के बाद भुगतान हो जाएगा। यूपीआई सर्किल के जरिये एक बार में पांच हजार रुपये तक का भुगतान किया जा सकता है। इसकी मासिक सीमा 15 हजार रुपये है।

कंपनी की कोशिश एआई को मोबाइल स्क्रीन और की-बोर्ड से निकालकर आवाज और रोजमर्रा के इस्तेमाल से जोड़ने की है।

जियो एआई ग्लास का दूसरा बड़ा इस्तेमाल लाइव ट्रांसलेशन है। अलग-अलग भारतीय भाषाएं बोलने वाले दो लोग वियरेबल डिवाइस की मदद से एक-दूसरे की बात समझ सकेंगे। आप अपनी भाषा में बोलिए, सामने वाला अपनी भाषा में, दुभाषिए का काम एआई कर लेगा।

बैठकों में कोई जरूरी बात छूट न जाए, इसके लिए एआई नोट भी ले सकेगा। इस पर लाइव क्रिकेट कमेंट्री भी मिलेगी।

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देश भर के व्यापारी परेशान हैं

देश के कई हिस्सों में दो अक्टूबर को एक अलग किस्म का प्रदर्शन हुआ। एक तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पार्टियों का प्रदर्शन चल रहा था तो दूसरी ओर देश के व्यापारियों ने अलग प्रदर्शन किया। उन्होंने ‘नो यूपीआई डे’ मनाया। दुकान पर लगे स्कैनर को काले कपड़े से ढक दिया और सिर्फ नकद में कारोबार किया। व्यापारी यूपीआई ट्रांजेक्शन पर शुल्क लगाने का विरोध कर रहे थे। हालांकि कुछ व्यापारी संगठनों ने अपने को इससे अलग कर लिया फिर भी यह व्यापक विरोध था। अब व्यापारियों को अलग किस्म की चिंता परेशान कर रही है। उनको लग रहा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई बढ़ सकती है।

व्यापारी इस बात से परेशान हैं कि त्योहारों के सीजन में खरीद बढ़ेगी तो बड़ी संख्या में लोग नकदी खरीद करेंगे। इसका कारण यह है दो हजार रुपए से ज्यादा की खरीद पर शुल्क लगना है। शुल्क ग्राहक से नहीं लेना है। सो, व्यापारियों को समस्या है कि अगर यूपीआई से खरीद हुई तो पैसे देने होंगे और अगर नकद व्यापार हुआ तो फिर से वैट के जमाने की तरह छापे और जांच की प्रक्रिया बढ़ जाएगी। दोनों स्थितियों में व्यापारियों को नुकसान होना है। हालांकि इस बीच जीएसटी कौंसिल में एक बड़ा फैसला होने की संभावना है। सात अक्टूबर को जीएसटी कौंसिल की बैठक है, जिसमें जीएसटी कानून से गिरफ्तारी के प्रावधान को हटाया जा सकता है। ऐसा होता है तो इससे व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।

Bank Holiday: आज शुक्रवार को बंद रहेंगे बैंक, जानिए RBI ने क्यों दी है छुट्टी

Bank Holiday 2 October: आज शुक्रवार, 2 अक्टूबर को देशभर के सभी सरकारी, प्राइवेट, क्षेत्रीय और ग्रामीण बैंक बंद रहेंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की छुट्टियों की आधिकारिक सूची के अनुसार, 2 अक्टूबर को राष्ट्रीय अवकाश होने के कारण पूरे भारत में बैंकों में कामकाज नहीं होगा। अगर आपको आज बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके लिए बेहद काम की है।

क्यों बंद रहेंगे बैंक?

2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। यह देश के तीन प्रमुख राष्ट्रीय अवकाशों में से एक है। इस अवसर पर आरबीआई के नियमों के तहत देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बैंक पूरी तरह से बंद रहते हैं।

अक्टूबर में छुट्टियों की भरमार

अक्टूबर का महीना त्योहारों से भरा हुआ है। दुर्गा पूजा, दशहरा और महालया जैसे बड़े त्योहारों के चलते अक्टूबर में अलग-अलग राज्यों में बैंकों की कई दिनों की छुट्टियां रहेंगी। आरबीआई द्वारा जारी अक्टूबर 2026 की छुट्टियों की लिस्ट:

  • 2 अक्टूबर (शुक्रवार): गांधी जयंती (पूरे भारत में बंद)
  • 10 अक्टूबर (शनिवार): महालया अमावस्या / दूसरा शनिवार (बेंगलुरु, कोलकाता और देशभर में)
  • 11 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 17 अक्टूबर (शनिवार): महा सप्तमी (अगरतला)
  • 18 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 19 अक्टूबर (सोमवार): महाष्टमी / महानवमी / दुर्गा पूजा (कोलकाता, पटना, गुवाहाटी, रांची आदि)
  • 20 अक्टूबर (मंगलवार): दशहरा – विजयादशमी (अधिकांश राज्यों में बंद)
  • 21-23 अक्टूबर (बुधवार से शुक्रवार): दुर्गा पूजा – दशैं / विजया दशमी (गंगटोक, कोलकाता, अगरतला आदि)
  • 24 अक्टूबर (शनिवार): चौथा शनिवार (पूरे भारत में बंद)
  • 25 अक्टूबर (रविवार): साप्ताहिक अवकाश (पूरे भारत में बंद)
  • 26 अक्टूबर (सोमवार): लक्ष्मी पूजा / महर्षि वाल्मीकि जयंती (शिमला, जम्मू, श्रीनगर, अगरतला)
  • 29 अक्टूबर (गुरुवार): करवा चौथ (शिमला)
  • 31 अक्टूबर (शनिवार): सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती (अहमदाबाद)

(नोट: राज्यों के स्थानीय त्योहारों के आधार पर बैंक छुट्टियों में अंतर हो सकता है।)

ऑनलाइन और डिजिटल सेवाएं रहेंगी चालू

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन में कोई परेशानी नहीं होगी। डिजिटल और ऑनलाइन सेवाएं 24/7 चालू रहेंगी। फंड ट्रांसफर (NEFT, RTGS, IMPS) की सुविधा सुचारू रूप से चलती रहेगी। Google Pay, PhonePe, Paytm जैसी यूपीआई सेवाओं के जरिए डिजिटल भुगतान सामान्य रूप से होगा। कैश निकालने या जमा करने के लिए एटीएम मशीनें चालू रहेंगी।

अगर आपको चेक क्लियरिंग या शाखा में जाकर कोई कैश डिपॉजिट/विड्रॉल जैसी सेवाएं लेनी हैं, तो इसके लिए अब आपको शनिवार, 3 अक्टूबर को बैंक खुलने का इंतजार करना होगा।

साहब अच्छे एक्टर नहीं!

कारण जो हो, साहब का विदेशियों के प्रति प्रेमिल झुकाव, और देसियों के प्रति रूखा बर्ताव बेढब है। फिर, बार-बार सीमित अंदाज, ऊँचे, हवाई दावे, वैज्ञानिकों विशेषज्ञों जैसे ऑडियेंस में भी घिसे-पिटे मुहावरे, उपदेश, आदि उन की समझ का भी सीमित दायरा दिखाता है। ऊँचे पद से वह थोड़ा ढँका जरूर रहा, पर छिपा नहीं है।

विदेशी नेताओं के साथ साहब के बेतकल्लुफ, याराना, गले-लिपट जैसे व्यवहार का इधर सोशल मीडिया में मजाक बना। इंदौर में एक कलाकार ने उसी अंदाज में राहुल गाँधी के गले से लिपट कर, नाटकीय हँस कर, राहुल की पीठ खूब थपथपाकर, आदि से उस का प्रदर्शन किया। साथ ही, उस ने ऑडियेंस में मानो किसी को देख ‘माँ को बिठाओ’ कहने का भी प्रहसन किया। आम सभाओं में साहब अक्सर किसी बच्चे, बूढ़े या बूढ़ी को नोटिस कर मानो ध्यान दिलाते हैं कि उन के लिए बच्चे-बुजुर्ग भी प्रेम दिखाने आते रहते हैं!

मंच पर उन दोनों भंगिमाओं से तमाम उपस्थित लोग बिना बताए समझ गये कि किस की नकल हो रही है। वह इतना चर्चित हुआ कि अनेक केंद्रीय भाजपा नेताओं ने उस की निन्दा की। जबकि कलाकार ने साहब का नाम भी नहीं लिया था! सो ‘वह बात जिस का सारे फसाने में कहीं जिक्र न था’, वह भाजपा नेताओं को नागवार गुजरी। उन की नाराजगी से प्रहसन और चर्चित हुआ।

किन्तु प्रहसन सटीक था। यह दोनों स्थितियाँ — आए दिन विदेशी नेताओं के गले लटकना, और अपने को सबका चहेता बताना — इतनी बार देखी जा चुकी है कि लोग बोर हो गये हैं। एक तरह से यह लोगों की समझ का अपमान है कि वे इस का बनावटीपन नहीं समझे हैं।

फिर विदेशियों के साथ वह जबरन यारी दिखाना देश की छवि गिराता है। आखिर यूरोपीय, अमेरिकी नेता स्वयं गले नहीं चिपटते। वे प्रायः हाथ मिलाते और संयत रहते हैं। पर अपने साहब विदेशियों से बेतकल्लुफ दिखने को उतावले नजर आते हैं।

यह इसलिए भी शर्मनाक है क्योंकि यह उन का स्वभाव नहीं है। देसी बंधुओं के साथ साहब सीधे मुँह बात भी नहीं करते। किसी से मैत्री तो क्या, समान सहजता भी मुश्किल से बरतते हैं। दलीय सहयोगियों के प्रति उन का रूखा, मालिकाना सा व्यवहार दिखता है। मानो वे सब उनके हरकारे जैसे हों। अपनी भंगिमा ही नहीं, कई बार किसी को फटकारने, डपटने जैसे बयान देकर भी साहब ने दिखाया है कि वे किस को क्या समझते हैं!

यह दो विपरीत अदाएं बार-बार दिखना अच्छी एक्टिंग नहीं! साहब देसी-विदेशी, दोनों दर्शकों की संवेदना से अनजान लगते हैं। उन्हें आभास नहीं कि एक जगह असरानी दूसरी जगह गब्बर, बार-बार देखकर विदेशी और देसी दर्शक क्या सोचेंगे? यही कि एक्टर आत्ममुग्ध, अपने पर फिदा है! माने बैठा है कि एक ही एक्टिंग पर लोग सदैव ताली बजाएंगे।

इसी दुर्बलता पर इंदौर वाले प्रहसन ने ऊँगली रखी। लोग तुरत पहचान गये कि साहब की नकल हो रही है। क्योंकि उन्होंने वह मूल एक्टर द्वारा अभिनीत कई बार देखा हुआ है।

सो, बार-बार देश और विदेश में दो अंदाज दिखाने वाला एक्टर दुर्बल है।‌ निरंतर ऐसा विपरीत व्यवहार दिखाना आत्महीनता भी लग सकती है। विदेशियों के सामने अपने को हीन बनाना कि उन से अपनी निकटता दिखाने के लिए वह मरा जा रहा है। उसी हीनता का दूसरा पहलू देशी लोगों के सामने ऐंठना है। मानो, उसे अपनी महत्ता का भरोसा नहीं! ऊँचे पद पर आकर भी उसे भीतर शंका है कि दूसरे उसे छोटा तो नहीं समझ रहे? इसलिए वह अतिगंभीर मुद्रा बनाकर अपनी महत्ता जताता है।

आखिर, दोनों अवसर औपचारिक, सार्वजनिक व्यवहार के हैं।‌ देसी या विदेशी नेताओं के साथ, दोनों औपचारिक, आधिकारिक कार्यक्रम हैं। किसी को निजी कह कर सफाई देना कठिन है। अतः विदेशियों के साथ विगलित और देसियों के साथ रूखे, यह दोहरापन खटकता है। ऐसा व्यवहार सहज नहीं है।

क्या साहब को अपने पद, व्यक्तित्व, और काम — किसी पर स्वयं विश्वास नहीं है? विदेशियों के सामने गदगद होने, ओर देसियों के सामने ऐंठने में बनावट झलकती है। फिर, साहब की भाषा — अक्सर इतनी खोखली कि हैरत होती है! आखिर ‘भारत की ए.आई. में भारतीयता होनी चाहिए’ कहने का क्या अर्थ हुआ?

कारण जो हो, साहब का विदेशियों के प्रति प्रेमिल झुकाव, और देसियों के प्रति रूखा बर्ताव बेढब है। फिर, बार-बार सीमित अंदाज, ऊँचे, हवाई दावे, वैज्ञानिकों विशेषज्ञों जैसे ऑडियेंस में भी घिसे-पिटे मुहावरे, उपदेश, आदि उन की समझ का भी सीमित दायरा दिखाता है। ऊँचे पद से वह थोड़ा ढँका जरूर रहा, पर छिपा नहीं है।

कैमरे के सामने भी वे प्रायः उचित व्यवहार दिखाने में विफल रहते हैं। वह कैसा एक्टर होगा, जिसे यह भी नहीं मालूम कि किन के सामने कैसी मुख-मुद्रा रखनी उचित है? अपने से आयु में बड़े, और उस पर उपकार करने वाले वरिष्ठ नेता, जो उसे सार्वजनिक मंच पर हाथ जोड़ कर प्रणाम कर रहे हों, उन्हें अनदेखा कर बढ़ जाने का क्या मतलब है? उस से किसे क्या संदेश मिला? यह तो नौसिखिया एक्टिंग लगती है।

यह तब साफ झलकता है जब वही एक्टर विदेशियों के साथ लंगोटिया सा दिखना चाहे। वह भी जिद करके। कभी उसे झूला झुलाकर, कभी उसे जबरन सीढ़ी पर साथ बैठा कर, कभी उस के साथ ताली बजाते हुए चक्कर काटकर, तो कभी उस की बाँह खींचकर, कभी उसे ‘तू’ कहकर, आदि। सब कुछ कैमरे के सामने। यह नाटक एकतरफा है, क्योंकि दूसरा पक्ष सपाट रहता है। शिष्टाचारवश लाचार-सा, कि चलो करने दो जो कर रहा है। कुछ देर की बात है।

ऐसे दृश्य बार-बार देख कर संवेदनशील भारतीय लज्जा महसूस करते हैं कि उन का नेता विदेशियों के सामने छोटा बन रहा है! पर एक्टर की बेपरवाही दिखाती है कि वह इस के परिणामों से अनजान है! यह इस से स्पष्ट है कि अनेकानेक वर्षों में भारत को विदेशी शक्तियों से कोई लाभ के बदले हानि उठाने के उदाहरण अधिक दिखते हैं। यूपीआई पर टैक्स उसी की नवीनतम कड़ी लगती है।

देश के अंदर भी हेकड़ी, परनिंदा, और आडंबर की बुरी परंपरा फैली है। विशेषकर शिक्षा-संस्कृति क्षेत्र में। हर संस्था, संगठन प्रमुख अपने को खामखा विशिष्ट, ऊँचा दिखने और उपलब्धि दिखाने के लिए उसी तरह नाटकीय, कृत्रिम उपाय करता नजर आता है। जो अनुपयुक्त लगता है। पर प्रमुख मानो ‘साधारण’ दिखने की आशंका से ग्रस्त है! सो, अपने उत्तरदायित्व और उचित काम के बदले नाटकीयता और बनावट पर निर्भर है। मुख्यतः अपनी कुर्सी की आयु बढ़ाने की फिराक में है।

यह प्रवृत्ति साहब की देखा-देखी भी है, जो सब के ‘मॉडल’ बताए जाते रहे हैं। आखिर जब वह सब कुछ अगला चुनाव जीतने की दृष्टि से तय करते हैं, तो वही प्रवृत्ति नीचे बढ़ना स्वाभाविक है। प्रायः सब का चयन भी उसी भावना में होता है कि ‘अपने’ आदमी हैं। काम की योग्यता, गुणवत्ता नहीं — बल्कि ‘अपने’ प्रति वफादारी!

इस से शिक्षा-संस्कृति क्षेत्र की हुई और हो रही हानि अपरिमेय है। शैक्षिक संस्थानों में जातिवादी जहर फैलाना और फैलने देना उसी भावना में है। लाभ उठाने वाले भी बखूबी जानते हैं कि यह किसी समूह की हित-चिंता नहीं, बल्कि केवल ताउम्र कुर्सीनशीनी का मंसूबा है।

सो, यह सब हर हाल में निराशाजनक है। किसी सुविचारित नीति के बदले ओछी मानसिकता दिखाता है। विदेशियों के सामने झुकना, और देसियों के सामने ऐंठना एक ही दुर्बलता के दो रूप हैं। साहब के सहयोगियों ने कथित चिंतन-बैठक में इस पर विचार किया या नहीं, किन्तु किसी को उन्हें बताने की जरूरत है कि उन की एक्टिंग प्रभावहीन हो चुकी है।

समय रहते बदलें, वरना फिल्म के पूरे कास्ट, ताम-झाम को हानि उठानी पड़ सकती है। पिछली फिल्में जिस चेहरे के बल पर चली थी, उस में अब चमक नहीं है। इस भ्रम में रहना बेकार है कि विकल्प क्या है? लोग जब चिढ़ जाते हैं तब सिर्फ यह देखते हैं कि चिढ़ाने वाले को कौन हरा सकता है।

वैसे भी, अगर इतनी लंबी अवधि तक साहब-राज के बावजूद प्रजा इस हाल है कि उसे अपने ही देश का कोई अन्य नेता हानि पहुँचा सके — तो यह साहब की नाकारा उपलब्धि का बयान है। वह कैसा जनहितैषी शासक होगा जो प्रजा का हित अपनी अमरता से जोड़ दे?