EPFO से यूपीआई-एटीएम से पैसे निकालने की सुविधा इस महीने हो जाएगी शुरू, लेकिन टैक्स के नियम क्या होंगे?

ईपीएफओ के करीब 8 करोड़ सब्सक्राइबर्स इस महीने के आखिर तक यूपीआई और एटीएम से पैसे निकाल सकेंगे। इससे पैसे निकालने के लिए मुश्किल प्रक्रिया से सब्सक्राइबर्स को छुटकारा मिल जाएगा। ईपीएफओ एक डेडिकेटेड ऐप लॉन्च करने जा रहा है। यह बैंक सब्सक्राइबर्स के बैंक अकाउंट से लिंक्ड होगा। यह भीम और दूसरे यूपीआई प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर काम करेगा।

सब्सक्राइबर्स 75 फीसदी तक पैसे निकाल सकेंगे

ईपीएफओ की यह नई सुविधा शुरू हो जाने के बाद सब्सक्राइबर्स अपने पीएफ में जमा 75 फीसदी तक पैसे निकाल सेकेंगे। अभी ईपीएफओ बुक्स में करीब 30 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं। लेकिन, एक्टिव कंट्रिब्यूशन वाले मेंबर्स की संख्या करीब 7.5 करोड़ है। ईपीएफओ करीब 26 लाख करोड़ रुपये के फंड का प्रबंधन करता है।

पैसे निकालने से पहले टैक्स के नियमों की समझ जरूरी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि एटीएम और यूपीआई से पैसे निकालने की सुविधा से सब्सक्राइबर्स को काफी आसानी हो जाएगी। लेकिन, उन्हें टैक्स के नियमों का भी ध्यान रखना होगा। टैक्स के नियमों को समझे बगैर एटीएम या यूपीआई से ईपीएफ का पैसा निकालने पर सब्सक्राइबर को मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है।

नौकरी 5 साल से कम तो विड्रॉल पर चुकाना होगा टैक्स 

टैक्स के नियम के मुताबिक, अगर किसी सब्सक्राइबर की नौकरी के लगातार 5 साल पूरे हो गए हैं तो पीएफ के पैसे निकालने पर उसे टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं है। दिक्कत उन लोगों को होती है, जो नौकरी के 5 साल पूरे होने के पहले पीएफ से पैसे निकालते हैं।

एंप्लॉयी के टैक्स-स्लैब के हिसाब से चुकाना होगा टैक्स

अगर कोई सब्सक्राइबर नौकरी 5 साल पूरे होने से पहले पैसे निकालता है तो पूरा अमाउंट इनकम माना जाता है। फिर इस पर एंप्लॉयी के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। इसमें एंप्लॉयर का कंट्रिब्यूशन, एक्युमलेटेड इंटरेस्ट और एंप्लॉयी के हिस्से का कंट्रिब्यूशन होता है, जिस पर उसने सेक्शन 80सी के तहत डिडक्शन क्लेम किया होता है। इसका मतलब है कि पहले मिला टैक्स बेनेफिट रिवर्स हो जाता है।

ज्यादा इनकम तो चुकाना होगा विड्रॉल पर ज्यादा टैक्स

इसे एक उदाहरण की मदद से समझा जा सकता है। मान लीजिए कोई व्यक्ति 4 साल की नौकरी के बाद पीएफ से पैसे निकालता है। विड्रॉल के समय ईपीएफओ 10 फीसदी टीडीएस डिडक्ट करेगा। इसका मतलब है कि 50,000 रुपये डिडक्ट हो जाएंगे। यह तब होगा जब ईपीएफओ के पास एंप्लॉयी के पैन की डिटेल होगी। यह डिडक्शन फाइनल टैक्स नहीं है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि पैन की डिटेल ईपीएफओ के पास नहीं होने पर टीडीएस का रेट 34.60 फीसदी लागू होता है।

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टीडीएस का पैसा कुल टैक्स लायबिलिटी में एडजस्ट होगा

जब एंप्लॉयी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करता है तो 5 लाख रुपये का पूरा अमाउंट उसकी सालाना इनकम में जुड़ जाती है। अगर एंप्लॉयी 20 फीसदी टैक्स ब्रैकेच में आता है तो पीएफ से निकाले गए पैसे पर 1 लाख रुपये का टैक्स बनता है। चूंकि, 50,000 टीडीएस पहले काटा जा चुका है, जिससे आपको सिर्फ बाकी 50,000 रुपये टैक्स का पेमेंट करना होगा। अगर एंप्लॉयी 30 फीसदी टैक्स स्लैब में है तो कुल टैक्स 1.5 रुपये बनेगा। इसका मतलब है कि एंप्लॉयी को बाकी 1 लाख रुपये का टैक्स चुकाना होगा।

EPFO Interest Rate: पीएफ धारकों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने 8.25% ब्याज दर को दी मंजूरी, इसी महीने खाते में आएगा पैसा

EPFO Interest Rate: पीएफ धारकों की बल्ले-बल्ले! सरकार ने 8.25% ब्याज दर को दी मंजूरी, इसी महीने खाते में आएगा पैसा

EPFO Interest Rate: देश के 7 करोड़ से ज्यादा नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) जमा पर 8.25 फीसदी की ब्याज दर को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। सूत्रों के मुताबिक, यह ब्याज इसी महीने यानी जून 2026 के अंत तक अंशधारकों के खातों में क्रेडिट किया जा सकता है।

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) द्वारा तय की गई ब्याज दर को वित्त मंत्रालय की हरी झंडी मिलने के बाद ही खातों में डालता है, जो कि अब मिल चुकी है।

वित्त मंत्रालय से मिली फाइनल हरी झंडी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने ईपीएफओ (EPFO) के शीर्ष निर्णय लेने वाले निकाय ‘सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज’ द्वारा तय की गई 8.25% ब्याज दर पर अपनी सहमति दे दी है।

इससे पहले, 2 मार्च 2026 को केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई CBT की बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर को 8.25% पर रखने का फैसला लिया गया था। इसके बाद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेजा गया था, क्योंकि भारत सरकार ही ईपीएफ की गारंटर होती है।

नए इकोसिस्टम से तुरंत क्रेडिट होगा ब्याज

श्रम मंत्रालय के निर्देश पर ईपीएफओ इसी महीने 2025-26 के लिए तय ब्याज राशि अंशधारकों के खातों में ट्रांसफर करने की तैयारी में है। राहत की बात यह है कि EPFO द्वारा विकसित किए गए नए इकोसिस्टम के तहत, जैसे ही ब्याज ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू होगी, पैसा तुरंत सब्सक्राइबर्स के खातों में दिखने लगेगा।

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लगातार तीसरे साल 8.25% ब्याज बरकरार

यह लगातार तीसरा साल है जब ईपीएफओ ने अपनी ब्याज दर को 8.25% पर बरकरार रखा है:

पिछले साल फरवरी, 2025 में भी EPFO ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 8.25% ब्याज दर को बनाए रखा था।

साल 2024 में ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए इसे 8.15% से मामूली बढ़ाकर 8.25% किया था।

मार्च 2022 में, EPFO ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए ब्याज दर को घटाकर 8.10% कर दिया था, जो 1977-78 (जब दर 8% थी) के बाद से सबसे कम थी। इसके बाद से दरों में सुधार हुआ और अब यह लगातार तीसरे साल 8.25% पर बनी हुई है।