Silver Prices: चांदी में रिकॉर्ड हाई से 46% की गिरावट, जेपी मॉर्गन ने कीमतों के लिए अनुमान घटाया

Silver Prices: चांदी में निवेश करने वालों को पिछले कुछ महीनों में बड़ा झटका लगा है। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3,84,632 प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन 19 अक्टूबर तक यह गिरकर ₹2,08,380 प्रति किलो रह गई। यानी रिकॉर्ड हाई से करीब 45.8% की गिरावट आई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी दबाव में है। मंगलवार को इसकी कीमत करीब 56.50 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। जनवरी के 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से यह करीब 54% नीचे है।

चांदी की कीमतों पर दबाव क्यों?

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। वहीं, अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ है और बॉन्ड यील्ड भी ऊंची बनी हुई है। इससे बाजार को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रख सकते हैं। चांदी पर इसका दबाव पड़ रहा है, क्योंकि इससे नियमित ब्याज आय नहीं होती।

चांदी का भाव कितना गिर सकता है?

J.P. Morgan Global Research को उम्मीद है कि 2026 की चौथी तिमाही में चांदी करीब 63 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर सकती है। बैंक ने 2026 के लिए औसत भाव का अनुमान 84 डॉलर से घटाकर 70 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। 2027 के लिए उसका अनुमान 63 डॉलर प्रति औंस है।

Bloomberg Intelligence के कमोडिटी रणनीतिकार माइक मैकग्लोन ने भी गिरावट की आशंका जताई है। Kitco के मुताबिक, उनके अनुसार चांदी निकट भविष्य में 50 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकती है। लंबे समय तक इसका भाव 50 से 84 डॉलर के दायरे में रह सकता है।

तेल, डॉलर और अमेरिकी ब्याज दरों पर नजर

मंगलवार को ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। मध्य पूर्व और पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव ने तेल की कीमतों को सहारा दिया। महंगा तेल महंगाई बढ़ा सकता है। इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरें ऊंची रखने या बढ़ाने की आशंका बढ़ती है।

बाजार को उम्मीद है कि फेड 27-28 अक्टूबर की बैठक में दरें नहीं बदलेगा। हालांकि, दिसंबर में ब्याज दर बढ़ने की आशंका भी बढ़ी है। आने वाले अमेरिकी CPI और PPI आंकड़े इस दिशा में अहम होंगे। महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा रहे, तो चांदी पर दबाव बढ़ सकता है।

भारतीय निवेशकों को क्या करना चाहिए?

मई में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से घरेलू चांदी की कीमतों को कुछ सहारा मिला है। लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार की गिरावट पूरी तरह नहीं रुक सकती।

चांदी में आगे भी उतार-चढ़ाव रह सकता है। निवेशकों को कच्चे तेल, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कीमत गिरने को सस्ता खरीदने का संकेत न मानें। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणों में खरीदारी करने से समय चुनने का जोखिम कुछ कम हो सकता है।

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

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Stocks to Watch: 19 अक्टूबर को Axis Bank, Yes Bank, HDFC Bank, RailTel, Zen Tech समेत इन शेयरों पर नजर, दिख सकती है बड़ी उठापटक

सोमवार, 19 अक्टूबर को कई शेयर फोकस में रहने वाले हैं। लिस्ट में एक्सिस बैंक, HDFC Bank, यस बैंक, IDBI Bank, रेलटेल, जेन टेक्नोलोजिज, वेदांता जैसे कई नाम शामिल हैं। इन शेयरों में बड़ी उठापटक दिख सकती है। वजह हैं- तिमाही नतीजे, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, आदि। इसके अलावा सोमवार को एक शेयर एक्स-स्टॉक स्प्लिट ट्रेड करने वाला है। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज इन कंपनियों के तिमाही नतीजे

बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज, भंसाली इंजीनियरिंग पॉलीमर्स, HFCL, हिंदुस्तान जिंक, जस्ट डायल, डेल्टा कॉर्प, एलीवेट कैंपस, पिरामल फाइनेंस, SML महिंद्रा, वरमोरा ग्रैनिटो, शोभा, तत्व चिंतन फार्मा केम और वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीस

इन शेयरों पर रहेगी खास नजर

ICICI Bank: Q2 (जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही) में स्टैंडअलोन बेसिस पर मुनाफा सालाना आधार पर 20.1% बढ़कर 14,843 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 17.7% बढ़कर 25,338.7 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA घटकर 1.20% हो गया, नेट NPA घटकर 0.30% हो गया।

Axis Bank: Q2 में स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा 7,003.28 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे से 37.59 प्रतिशत ज्यादा है। शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 15,371.4 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.36 प्रतिशत दर्ज किया गया। ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 1.16 प्रतिशत रहा। नेट NPA रेशियो भी कम होकर 0.35 प्रतिशत हो गया।

Yes Bank: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 65% बढ़कर 1,080 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 22.7% बढ़कर 2,822 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA 1.2% और नेट NPA 0.2% दर्ज किया गया।

HDFC Bank: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 4.7% बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 9.7% बढ़कर 34,619.2 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA घटकर 1.11% और नेट NPA घटकर 0.37% हो गया।

IDBI Bank: Q2 में स्टैंडअलोन मुनाफा सालाना आधार पर 39 प्रतिशत घटकर 2205.45 करोड़ रुपये रहा। शुद्ध ब्याज आय सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़कर 4,228 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA रेशियो घटकर 2.12 प्रतिशत और नेट NPA रेशियो घटकर 0.17 प्रतिशत पर आ गया।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफे में 21.1% का उछाल आया और यह 1,468.9 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 26.3% बढ़कर 4,145.2 करोड़ रुपये हो गई। ग्रॉस NPA रेशियो 2.39% और नेट NPA रेशियो 0.31% रहा।

पंजाब नेशनल बैंक: Q2 में सालाना आधार पर स्टैंडअलोन मुनाफा 12.8% बढ़कर 5,532.2 करोड़ रुपये हो गया। नेट इंटरेस्ट इनकम 10.8% बढ़कर 11,601.3 करोड़ रुपये रही। ग्रॉस NPA रेशियो 2.55% और नेट NPA रेशियो 0.25% दर्ज किया गया।

अर्बन कंपनी: Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड घाटा बढ़कर 182.5 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 41.4% बढ़कर 537.3 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के बोर्ड ने इक्विटी और कनव​र्टिबल सिक्योरिटीज के जरिए 2,500 करोड़ रुपये तक जुटाने को मंजूरी दी है।

LTM: Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड मुनाफा 0.2% घटकर 1,397.9 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 13.6% बढ़कर 11,807.6 करोड़ रुपये हो गया। LTM ने प्रति शेयर 25 रुपये का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है।

ले ट्रैवेन्यूज टेक्नोलॉजी (Ixigo): Q2 में सालाना आधार पर कंसोलिडेटेड मुनाफा 61.3 करोड़ रुपये रहा, जबकि एक साल पहले कंपनी 3.2 करोड़ रुपये के घाटे में थी। रेवेन्यू 12.9% बढ़कर 320.96 करोड़ रुपये हो गया।

RailTel: कंपनी को रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB), सिकंदराबाद से 167.52 करोड़ रुपये का ‘लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस’ (LoA) मिला है। यह RRB भर्ती प्रक्रिया के परीक्षा-पूर्व और परीक्षा-बाद के चरणों के लिए AM-RMS सेवाएं प्रदान करने से संबंधित है। इसके अलावा RailTel को ‘हेल्थ इंश्योरेंस TPA ऑफ इंडिया’ से 18.99 करोड़ रुपये का परचेज ऑर्डर मिला है। इसके तहत कंपनी 3 साल की अवधि के लिए IT इंफ्रास्ट्रक्चर और साइबर सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराएगी।

Zen Technologies: यह कॉग्निट सिमेंटिक्स प्राइवेट लिमिटेड (CSPL) में 51.98 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। कंपनी के बोर्ड ने 17 अक्टूबर की मीटिंग में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। उसी दिन कंपनी ने शेयर परचेज एग्रीमेंट, शेयर सब्सक्रिप्शन एग्रीमेंट और शेयरहोल्डर्स एग्रीमेंट कर लिया। डील पूरी होने के बाद कॉग्निट सिमेंटिक्स, जेन टेक की सब्सिडियरी बन जाएगी। यह खरीद फुली डाइल्यूटेड बेसिस पर 135.15 करोड़ रुपये में होगी।

GPT इंफ्राप्रोजेक्ट्स: कंपनी को वेस्टर्न रेलवे के भावनगर डिवीजन के ‘चीफ सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर’ (CSTE) से 149.5 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। साथ ही, वेस्टर्न रेलवे के ही रतलाम डिवीजन से सिग्नलिंग कार्यों के लिए 134.11 करोड़ रुपये का एक और वर्क ऑर्डर मिला है।

ACME Solar Holdings: कंपनी की सब्सिडियरी, ‘एक्मे ग्रीनटेक ट्वेंटी’ ने ‘सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ (SECI) के साथ एक ‘पावर परचेज एग्रीमेंट’ किया है। यह समझौता FDRE ट्रेंच IX के तहत 300 MW के ‘अश्योर्ड पीक पावर प्रोजेक्ट’ के लिए है, जिसमें टैरिफ 6 रुपये प्रति यूनिट तय किया गया है।

LCC Projects: कंपनी को गुजरात सरकार से एक इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कॉन्ट्रैक्ट के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ टेंडर’ मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट में मच्छु-I बांध से त्रिवेणी थंगा जलाशय और वांकानेर व चोटिला तालुका के विभिन्न गांवों तक पानी की आपूर्ति करना शामिल है। इस कॉन्ट्रैक्ट में 10 वर्षों तक प्रोजेक्ट के संचालन और रखरखाव का काम भी शामिल है। कॉन्ट्रैक्ट की कुल अनुमानित वैल्यू 151.57 करोड़ रुपये है।

Vedanta: कंपनी ने ‘वेदांता जिंक इंटरनेशनल’ (VZI) के तहत ‘गाम्सबर्ग प्रोजेक्ट’ के दूसरे चरण में लगभग 60 करोड़ डॉलर का निवेश करने की घोषणा की है। इसके जरिए दक्षिण अफ्रीका में कंपनी की सालाना जिंक उत्पादन क्षमता दोगुनी होकर 5 लाख टन हो जाएगी।

ग्लोबल सेटअप क्या बिगाड़ेगा खेल या बाजार दिखाएगा अपनी चाल, जानें गिफ्ट निफ्टी से कैसे मिल रहे संकेत

RBL Bank: बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से ‘एमिरेट्स NBD बैंक PJSC’ की सभी भारतीय शाखाओं को RBL बैंक में विलय करने की मंजूरी मिल गई है। यह विलय 1 दिसंबर, 2026 से प्रभावी होगा।

पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया: कंपनी को ‘बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर’ (BOOT) मॉडल पर 765 kV GIS पुणे वेस्ट ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट लगाने के लिए सफल बोलीदाता घोषित किया गया है। इसके लिए वार्षिक ट्रांसमिशन शुल्क 199.55 करोड़ रुपये तय किया गया है। इस प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के पुणे वेस्ट में एक नया 765/400 kV गैस-इंसुलेटेड स्विचगियर (GIS) सबस्टेशन लगाना शामिल है। इसके अलावा, इसमें पूरे महाराष्ट्र में 765 kV और 400 kV ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण और उनसे जुड़े बे (bays) का काम भी शामिल है।

स्टॉक स्प्लिट के लिए यह शेयर करेगा एक्स-ट्रेड

जटाशंकर इंडस्ट्रीज

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IDBI Bank Q2 Results: सितंबर तिमाही में मुनाफा 39% घटकर ₹2205 करोड़, NII में 29% का इजाफा

IDBI Bank ने जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। तिमाही के दौरान बैंक का शुद्ध स्टैंडअलोन मुनाफा सालाना आधार पर 39 प्रतिशत घटकर 2205.45 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 3627.36 करोड़ रुपये था। कुल इनकम लगभग 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 9865.12 करोड़ रुपये हो गई। सितंबर 2025 तिमाही में यह 9593.64 करोड़ रुपये थी।

बैंक ने शेयर बाजारों को बताया है कि सितंबर 2026 तिमाही में उसकी शुद्ध ब्याज आय (NII) सालाना आधार पर 28.7 प्रतिशत बढ़कर 4,227 करोड़ रुपये हो गई। एक साल पहले यह 3,285 करोड़ रुपये थी। ऑपरेटिंग प्रॉफिट घटकर 2892.51 करोड़ रुपये रह गया, जो सितंबर 2025 तिमाही में 3,522.78 करोड़ रुपये था। शुद्ध ब्याज मार्जिन बढ़कर 4.11 प्रतिशत हो गया, जो एक एक साल पहले 3.71 प्रतिशत था।

NPA का हाल

सितंबर 2026 तिमाही में IDBI Bank का ग्रॉस NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) रेशियो 2.12 प्रतिशत रहा। एक साल पहले यह 2 65 प्रतिशत था। नेट NPA रेशियो भी सालाना आधार पर कम होकर 0.17 प्रतिशत पर आ गया। सितंबर 2025 तिमाही में यह 0.21 प्रतिशत था। एसेट्स पर रिटर्न घटकर 1.83 प्रतिशत रह गया, जो सितंबर 2025 तिमाही में 3.55 प्रतिशत था।

Axis Bank Q2 Results: सितंबर तिमाही में मुनाफा 38% बढ़ा, NII में 12% का इजाफा; NPA घटा

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Axis Bank Q2 Results: सितंबर तिमाही में मुनाफा 38% बढ़ा, NII में 12% का इजाफा; NPA घटा

प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक का ​जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही में स्टैंडअलोन बेसिस पर शुद्ध मुनाफा 7,003.28 करोड़ रुपये रहा। यह एक साल पहले के मुनाफे 5,089.64 करोड़ रुपये से 37.59 प्रतिशत ज्यादा है। बैंक की कुल इनकम 14 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 42,949.32 करोड़ रुपये हो गई। सितंबर 2025 तिमाही में यह 37,594.81 करोड़ रुपये थी।

एक्सिस बैंक ने 17 अक्टूबर को तिमाही और छमाही (अप्रैल-सितंबर 2026) नतीजे जारी किए हैं। बैंक ने शेयर बाजारों को बताया कि सितंबर 2026 तिमाही में उसकी शुद्ध ब्याज आय (NII) सालाना आधार पर 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 15,371.4 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.36 प्रतिशत दर्ज किया गया। ऑपरेटिंग प्रॉफिट 11,083 करोड़ रुपये रहा, जो सितंबर 2025 तिमाही में 10,412.53 करोड़ रुपये रहा था।

एसेट क्वालिटी में सुधार

सितंबर 2026 तिमाही में एक्सिस बैंक की एसेट क्वालिटी में सुधार देखा गया। एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, ग्रॉस NPA (Non-Performing Assets) रेशियो घटकर 1.16 प्रतिशत रहा। एक साल पहले यह 1.46 प्रतिशत और एक तिमाही पहले 1.28 प्रतिशत था। नेट NPA रेशियो भी कम होकर 0.35 प्रतिशत हो गया, जो जून 2026 तिमाही में 0.39 प्रतिशत और सितंबर 2025 तिमाही में 0.44 प्रतिशत था।

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डिपॉजिट और एडवांसेज

सितंबर 2026 तिमाही में एक्सिस बैंक के कुल डिपॉजिट सालाना आधार पर 20.6 प्रतिशत बढ़कर 14.52 लाख करोड़ रुपये के रहे। एक साल पहले ये 12 करोड़ रुपये के थे। एडवांसेज 23 प्रतिशत बढ़कर 13.73 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गए। सितंबर 2025 तिमाही में ये 11.16 करोड़ रुपये के थे।

Axis Bank शेयर में सोमवार को आ सकती है तेजी

तिमाही नतीजे सामने आने के बाद एक्सिस बैंक के शेयर में सोमवार, 19 अक्टूबर को तेजी देखने को मिल सकती है। शुक्रवार को BSE पर शेयर 1286.45 रुपये पर बंद हुआ। बैंक का मार्केट कैप 4 लाख करोड़ रुपये है। शेयर 2 सप्ताह में 6 प्रतिशत चढ़ा है। BSE पर 52 सप्ताह का एडजस्टेड हाई 1,418.30 रुपये और एडजस्टेड लो 1,150.50 रुपये है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Outlook: शॉर्ट टर्म में इस कारण अहम रहेगी सोने-चांदी चाल, एक्सपर्ट्स से जानिए क्या त्योहारों में बढ़ेंगे दाम

Gold Silver Outlook: सोने और चांदी की कीमतों में 13 अक्टूबर को स्थिरता देखने को मिली। अमेरिका के महंगाई के अहम आंकड़ों से पहले अमेरिकी डॉलर, ब्याज दरों की उम्मीदों और कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर के सोने के वायदा (futures) का भाव ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम था, जिसमें 0.01% की गिरावट आई। दिसंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा का कारोबार ₹2.22 लाख प्रति किलोग्राम पर हुआ, जिसमें 0.05% की गिरावट देखी गई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है क्योंकि बाज़ार अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर फिर से विचार कर रहे हैं। हालांकि ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी की उम्मीदें कम होने से बुलियन (सोने-चांदी) को सहारा मिल सकता है, लेकिन बॉन्ड यील्ड का बढ़ना और डॉलर का मजबूत होना अभी भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़त हो रही है, हालांकि मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता आगे की बढ़त को सीमित कर सकती है।

उन्होंने कहा कि निवेशक महंगाई और फेड के अगले नीतिगत कदमों के बारे में नए संकेतों के लिए अमेरिका के कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़ों का इंतज़ार कर रहे हैं।

कीमतों में उतार-चढ़ाव क्यों?

सोने और चांदी से कोई ब्याज आय नहीं मिलती है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है या बाज़ार को उम्मीद होती है कि ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी, तो निवेशक ब्याज देने वाली संपत्तियों को ज़्यादा आकर्षक मान सकते हैं, जिससे बुलियन की कीमतों पर दबाव पड़ता है। इसके विपरीत, डॉलर का कमजोर होना और ब्याज दरों के कम रहने की उम्मीदें कीमती धातुओं को सहारा दे सकती हैं।

वेंचुरा (Ventura) में कमोडिटी हेड एन एस रामास्वामी ने कहा कि सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, क्योंकि कमजोर पेरोल आंकड़ों के बाद बाज़ार में अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि साल के आखिर में और 2027 की पहली छमाही में ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदें कीमतों पर असर डाल सकती हैं।

जियोपॉलिटिकल तनाव भी ऊर्जा की कीमतों पर असर डालकर बुलियन को प्रभावित कर रहे हैं। रामास्वामी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई की चिंताओं और ऊंची ब्याज दरों की उम्मीदों को और बढ़ा सकती हैं, जिससे सोने के लिए निकट भविष्य में चुनौतीपूर्ण माहौल बन सकता है। ब्रिकवर्क रेटिंग्स में रिसर्च हेड, राजीव शरण ने कहा कि सोने की कीमतों पर सिर्फ़ जियोपॉलिटिकल घटनाओं के बजाय कच्चे तेल और अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का ज़्यादा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कीमतों में और गिरावट आने पर त्योहारों के मौसम से पहले खरीदारी बढ़ सकती है।

निवेशकों को आगे किस चीज़ पर नजर रखनी चाहिए?

अमेरिकी महंगाई के आंकड़े बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों के लिए निकट भविष्य में एक अहम कारक हैं। उम्मीद से ज़्यादा महंगाई से ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो सकती हैं, जबकि कम महंगाई के आंकड़े मॉनेटरी टाइटनिंग (मौद्रिक सख्ती) की चिंताओं को कम करके कीमतों को सहारा दे सकते हैं।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने कहा कि सोने और चांदी के लिए निकट भविष्य का आउटलुक सतर्कता वाला बना हुआ है। उन्होंने अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और महंगाई के आंकड़ों को नज़र रखने के लिए अहम कारक बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि करेंसी में उतार-चढ़ाव भी घरेलू बुलियन की कीमतों पर असर डालते हैं क्योंकि भारत अपना ज़्यादातर सोना और चांदी आयात करता है।

भारतीय खरीदारों के लिए, कमज़ोर रुपया आयातित बुलियन को महंगा बना सकता है, भले ही अंतरराष्ट्रीय कीमतें स्थिर हों या गिर रही हों। घरेलू कीमतें आयात शुल्क और स्थानीय मांग से भी प्रभावित होती हैं।

क्या त्योहारों का मौसम सोने को मिलेगा सहारा

धनतेरस और दिवाली से पहले गहनों की खरीदारी से घरेलू सोने की मांग को सहारा मिल सकता है, हालांकि रिटेल खरीदारी से कीमतों में तुरंत बढ़ोतरी हो ज़रूरी नहीं है।

रामास्वामी को उम्मीद है कि दिवाली से पहले सोना ₹1.50 लाख से ₹1.65 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में ट्रेड करेगा, और त्योहारों की मांग के पीक समय के बाद इसमें कंसोलिडेशन (स्थिरता) हो सकता है। यह बाज़ार का एक अनुमानित आउटलुक है, न कि कीमतों की गारंटी वाली रेंज।

VT मार्केट्स के प्रिंसिपल एनालिस्ट डैनियल मुंडे ने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में साप्ताहिक निवेश से पता चलता है कि कुछ निवेशक कीमतों में गिरावट का इस्तेमाल अपनी पोजीशन बनाने और अनिश्चितता से बचाव (हेजिंग) के लिए कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि महंगाई के मज़बूत आंकड़े और ब्याज दरें बढ़ने की नई उम्मीदें रिकवरी को धीमा कर सकती हैं।

निवेशकों के लिए, शॉर्ट-टर्म रिबाउंड (अल्पकालिक उछाल) और दिशा में लगातार बदलाव के बीच का अंतर समझना ज़रूरी है। डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, महंगाई के आंकड़े, कच्चा तेल और निवेश का प्रवाह यह तय करने में मदद करेंगे कि सोना और चांदी रिकवर कर सकते हैं या दबाव में रहेंगे।

 

Gold- Silver price: सोना ₹1.50 लाख के नीचे, चांदी हुई सस्ती, अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Post Office Scheme: पोस्ट ऑफिस की इस स्कीम में करें ₹6,000 मंथली निवेश, 5 साल बाद मिलंगे इतने लाख

Post Office RD Scheme: अगर आप शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव, गिरावट और जोखिम से दूर रहकर हर महीने एक निश्चित बचत करना चाहते हैं, तो पोस्ट ऑफिस की रिकरिंग डिपॉजिट (RD) योजना आपके लिए एक बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है। इस सरकारी बचत योजना में आपको एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करने की जरूरत नहीं होती, बल्कि आप हर महीने छोटी-छोटी किस्तें जमा करके भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार कर सकते हैं।

क्यों खास है पोस्ट ऑफिस की आरडी स्कीम

सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न: यह योजना केंद्र सरकार द्वारा समर्थित है, इसलिए इसमें आपका पैसा 100% सुरक्षित रहता है और बाजार के जोखिम का कोई असर नहीं पड़ता।

आसान निवेश सीमा: इसमें न्यूनतम ₹100 प्रति माह से खाता खोला जा सकता है। अधिकतम निवेश की कोई तय सीमा नहीं है।

तय समय सीमा: पोस्ट ऑफिस RD योजना की आधिकारिक अवधि 5 साल (60 महीने) होती है।

आकर्षक ब्याज दर: वर्तमान में इस योजना पर 6.7% सालाना ब्याज (तिमाही चक्रवृद्धि) के आधार पर रिटर्न दिया जा रहा है।

₹6,000 हर महीने जमा करने पर कितना मिलेगा?

मान लीजिए आप अपनी मासिक कमाई या सैलरी से हर महीने ₹6,000 की बचत करते हैं और इसे पोस्ट ऑफिस की आरडी स्कीम में जमा करते हैं। 5 साल पूरे होने पर आपकी मैच्योरिटी राशि का पूरा गणित इस प्रकार होगा:

  • मासिक किस्त: ₹6,000
  • निवेश की अवधि: 5 साल (60 महीने)
  • कुल जमा पूंजी: ₹3,60,000
  • अनुमानित ब्याज आय (6.7%): ₹68,185 (लगभग ₹68 हजार)
  • मैच्योरिटी पर मिलने वाली कुल रकम: ₹4,28,185 (लगभग ₹4.28 लाख)

(नोट: यह अनुमानित गणना लागू 6.7% ब्याज दर पर आधारित है। मैच्योरिटी के समय लागू ब्याज दरों और डाकघर के आधिकारिक नियमों के अनुसार मिलने वाली राशि में आंशिक बदलाव संभव है।)

निवेश करने से पहले इन महत्वपूर्ण नियमों पर दें ध्यान

समय पर किस्त जमा करना अनिवार्य: आरडी में हर महीने तय तारीख तक किस्त जमा करनी होती है। किस्त जमा करने में देरी होने पर नियमों के मुताबिक पेनाल्टी या जुर्माना लग सकता है।

समय से पहले निकासी: अगर आपको अवधि पूरी होने से पहले पैसों की सख्त जरूरत पड़ती है, तो खाता खोलने के 3 साल पूरे होने के बाद इसे बंद कराने की सुविधा मिलती है, लेकिन इससे ब्याज दर पर असर पड़ सकता है।

टैक्स नियम: पोस्ट ऑफिस आरडी में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स-फ्री नहीं होता है। लागू आयकर नियमों के अनुसार ब्याज आय पर टैक्स चुकाना पड़ सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FD Rates Hike: सीनियर सिटीजन्स को FD पर मिल रहा 8.50% तक ब्याज, जानें ₹10 लाख फिक्स करने पर कितनी होगी कमाई

FD Rate Hike: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने बुधवार, 7 अक्टूबर को अपनी बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत से 5.50 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के बाद बैंकों द्वारा अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में संशोधन करने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ बैंक आरबीआई की नीति घोषणा के कुछ दिनों के भीतर अपनी एफडी दरों में संशोधन कर सकते हैं, जबकि अन्य को ऐसा करने में कई हफ्ते लग सकते हैं।

यह समय काफी हद तक प्रत्येक बैंक की फंडिंग आवश्यकताओं और लिक्विडिटी की स्थिति पर निर्भर करता है। विभिन्न बैंकों की दरों की तुलना करना और सही अवधि चुनना जोखिम को कम रखते हुए ब्याज आय को अधिकतम करने में मदद कर सकता है।

विभिन्न बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों को मिल रही उच्चतम FD ब्याज दरें

1. स्मॉल फाइनेंस बैंक

  • इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50% तक
  • ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50% तक
  • सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50% तक
  • जना स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30% तक
  • उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30% तक
  • शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25% तक
  • उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25% तक
  • एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक: 7.90% तक
  • स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक: 7.75% तक

2. प्राइवेट सेक्टर के बैंक

  • डीसीबी बैंक: 8.00% तक
  • बंधन बैंक: 7.95% तक
  • एसबीएम बैंक इंडिया: 7.80% तक
  • एक्सिस बैंक: 7.25% तक
  • कोटक महिंद्रा बैंक: 7.15% तक
  • एचडीएफसी बैंक: 7.10% तक
  • आईसीआईसीआई बैंक: 7.10% तक
  • आईडीबीआई बैंक: 7.05% तक

3. सरकारी बैंक

  • बैंक ऑफ इंडिया: 7.45% तक
  • बैंक ऑफ बड़ौदा: 7.25% तक
  • इंडियन ओवरसीज बैंक: 7.10% तक
  • पंजाब नेशनल बैंक: 7.10% तक
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI): 7.05% तक
  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: 7.05% तक

4. विदेशी बैंक

  • स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक: 7.10% तक
  • ड्यूश बैंक: 7.00% तक
  • एचएसबीसी बैंक: 6.00% तक

₹10 लाख की FD पर 3 और 5 साल में कितनी होगी कमाई?

अगर आप ₹10 लाख की राशि को 3 साल या 5 साल की अवधि के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) करते हैं, तो 8.5%, 8% और 7.5% की ब्याज दरों पर मिलने वाला कुल ब्याज और मैच्योरिटी अमाउंट काफी आकर्षक हो जाता है।

3 साल की अवधि के लिए ₹10 लाख का निवेश करने पर 8.5% ब्याज दर के हिसाब से आपको करीब ₹2,77,289 का ब्याज मिलेगा। अगर ब्याज दर 8% है, तो कुल ब्याज ₹2,59,712 होगा, और 7.5% की दर पर 3 साल में आपको ₹2,42,297 का ब्याज प्राप्त होगा।

वही अगर आप लंबे समय यानी 5 साल के लिए ₹10 लाख फिक्स करते हैं, तो कंपाउंडिंग का फायदा और ज्यादा बढ़कर मिलता है। 8.5% की उच्चतम ब्याज दर पर 5 साल में आपको सीधे ₹5,03,656 का ब्याज मिलेगा, जिससे आपका पैसा बढ़कर ₹15,03,656 हो जाएगा। 8% ब्याज दर पर 5 साल का कुल ब्याज ₹4,69,328 (कुल मैच्योरिटी: ₹14,69,328) बनता है, जबकि 7.5% की दर पर 5 साल में ₹4,35,629 की कमाई ब्याज से होगी (कुल मैच्योरिटी: ₹14,35,629)।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इन 5 सरकारी योजनाओं में करें निवेश, पैसा सुरक्षित रहेगा और ब्याज भी मिलेगा; समझिए पूरा कैलकुलेशन

Small Savings Schemes: पैसा निवेश करने के लिए हर किसी को शेयर बाजार का जोखिम पसंद नहीं होता। खासकर जब बात बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट या भविष्य के लिए जमा की गई रकम की हो।

ऐसे निवेशकों के लिए सरकार की कई स्मॉल सेविंग स्कीमें हैं। इनमें पैसा तय नियमों के तहत लगाया जाता है और ब्याज दर सरकार तय करती है। PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी योजनाएं इसी कैटेगरी में आती हैं।

1. PPF

PPF यानी Public Provident Fund लंबे समय के निवेश के लिए है। इसका मैच्योरिटी पीरियड 15 साल है। इसमें हर महीने ₹5,000 जमा करते हैं तो साल में ₹60,000 निवेश होगा। 15 साल में आपकी कुल जमा रकम ₹9 लाख होगी।

मौजूदा 7.1% ब्याज दर को मानें तो 15 साल बाद यह रकम मोटे तौर पर ₹16 लाख के आसपास हो सकती है। यानी करीब ₹7 लाख ब्याज से जुड़ सकते हैं। असल रकम जमा करने की तारीख और उस समय लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी। PPF की ब्याज दर सरकार समय-समय पर तय करती है।

2. सुकन्या समृद्धि योजना

अगर बेटी के भविष्य के लिए पैसा जमा करना है तो सुकन्या समृद्धि योजना एक विकल्प है। मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। इसमें हर महीने ₹3,000 जमा करने पर सालाना ₹36,000 निवेश होगा। 15 साल में कुल जमा रकम ₹5.40 लाख होगी।

अगर मौजूदा ब्याज दर के आसपास रिटर्न बना रहता है, तो 21 साल की मैच्योरिटी अवधि में यह रकम करीब ₹17 लाख तक पहुंच सकती है। यहां ध्यान रखें कि सुकन्या की ब्याज दर भी समय-समय पर बदल सकती है। इसलिए इसे एक अनुमान के तौर पर देखें।

3. सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम

60 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए SCSS यानी Senior Citizens Savings Scheme है। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहने वालों के लिए यह विकल्प देखा जा सकता है।

मौजूदा ब्याज दर 8.2% है। ऐसे में अगर कोई ₹10 लाख जमा करता है तो सालाना ब्याज करीब ₹82,000 बैठेगा। ब्याज तिमाही आधार पर मिलता है, यानी करीब ₹20,500 हर तिमाही। 5 साल में कुल ब्याज करीब ₹4.10 लाख बनता है, अगर पूरी अवधि में यही दर बनी रहे।

4. नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट

NSC यानी National Savings Certificate उन लोगों के लिए है जो एक तय अवधि के लिए पैसा लगाकर ब्याज कमाना चाहते हैं। मौजूदा ब्याज दर 7.7% है और इसकी अवधि 5 साल है।

अगर आप ₹5 लाख NSC में लगाते हैं तो 5 साल बाद रकम करीब ₹7.23 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹2.23 लाख ब्याज से जुड़ेंगे। NSC का ब्याज सालाना कंपाउंड होता है।

5. किसान विकास पत्र

KVP यानी Kisan Vikas Patra में निवेश रकम तय अवधि में दोगुनी होती है। मौजूदा ब्याज दर 7.5% है और इस दर पर रकम 115 महीने यानी करीब 9 साल 7 महीने में दोगुनी होती है।

इस हिसाब से अगर आप ₹3 लाख KVP में लगाते हैं तो मैच्योरिटी पर रकम करीब ₹6 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹3 लाख का ब्याज मिलेगा। KVP में मैच्योरिटी अवधि उस समय लागू दर के आधार पर तय होती है।

किसके लिए कौन सी स्कीम?

अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि का है तो PPF पर विचार किया जा सकता है। बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना देख सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद नियमित ब्याज आय चाहिए तो SCSS पर नजर डाल सकते हैं।

वहीं तय अवधि के लिए रकम लगानी है तो NSC या KVP जैसे विकल्प आजमाए जा सकते हैं। इन योजनाओं में बाजार के रोजाना उतार-चढ़ाव का असर सीधे आपके निवेश पर नहीं पड़ता।

Retirement Planning: ₹1 करोड़ का रिटायरमेंट फंड कितने साल चलेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

नोट: इन सभी छोटी बचत योजनाओं की मौजूदा दरें जुलाई से सितंबर 2026 की तिमाही के लिए लागू हैं।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

EPF Investment: रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम के लिए EPF का पैसा कहां लगाएं? समझिए पूरा हिसाब

EPF Investment: रिटायरमेंट के समय EPF में 50 लाख रुपये जमा हैं तो सवाल सिर्फ यह नहीं है कि पैसा कहां रखा जाए। असली सवाल यह है कि इस रकम से हर महीने खर्च कैसे चले और पैसा जल्दी खत्म भी न हो।

रिटायरमेंट के बाद सैलरी बंद हो जाती है। इसलिए EPF की रकम को अलग-अलग निवेश में बांटकर नियमित इनकम और लंबी अवधि की ग्रोथ का संतुलन बनाया जा सकता है।

50 लाख रुपये को कैसे बांटें?

Master Capital Services की वेल्थ मैनेजमेंट AVP आकांक्षा शुक्ला के मुताबिक, रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में फिक्स्ड इनकम, डेट, इक्विटी और इमरजेंसी फंड का संतुलन रखा जा सकता है।

50 लाख रुपये के कॉर्पस का एक उदाहरण लें तो करीब 45% रकम यानी 22.50 लाख रुपये फिक्स्ड इनकम वाले विकल्पों में रखी जा सकती है। 32.5% यानी 16.25 लाख रुपये डेट में और 17.5% यानी 8.75 लाख रुपये इक्विटी में रखे जा सकते हैं। बाकी 2.50 लाख रुपये इमरजेंसी फंड के तौर पर रखे जा सकते हैं।

निवेशहिस्सारकम
फिक्स्ड इनकम45%₹22.50 लाख
डेट निवेश32.50%₹16.25 लाख
इक्विटी17.50%₹8.75 लाख
इमरजेंसी फंड5%₹2.50 लाख
कुल100%₹50 लाख

यह सिर्फ उदाहरण है। आप अपनी उम्र, मासिक खर्च, पेंशन और जोखिम क्षमता के हिसाब से इसमें बदलाव कर सकते हैं।

फिक्स्ड इनकम से कितनी कमाई?

22.50 लाख रुपये का हिस्सा SCSS, बैंक FD जैसे फिक्स्ड इनकम विकल्पों में रखा जा सकता है। अगर इस हिस्से पर करीब 7% सालाना ब्याज मिलता है, तो साल भर में लगभग 1.57 लाख रुपये की ब्याज आय बनती है।

यानी इस हिस्से से करीब 13,000 रुपये महीने की इनकम मिल सकती है।

डेट निवेश क्यों जरूरी है?

16.25 लाख रुपये डेट निवेश में रखने का मकसद पोर्टफोलियो को स्थिर रखना और जरूरत के समय पैसा उपलब्ध कराना है। डेट म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प इसमें मदद कर सकते हैं।

अगर इस हिस्से से लंबे समय में करीब 6.5% सालाना रिटर्न मिलता है, तो सालाना लगभग 1.06 लाख रुपये की ग्रोथ बन सकती है।

इक्विटी में भी रखें कुछ पैसा

रिटायरमेंट के बाद पूरा पैसा सुरक्षित निवेश में रखने से महंगाई का असर बढ़ सकता है। इसलिए 50 लाख रुपये के इस उदाहरण में 8.75 लाख रुपये इक्विटी के लिए रखे गए हैं।

इस रकम को लार्ज-कैप, इंडेक्स या हाइब्रिड फंड जैसे विकल्पों में लगाया जा सकता है। यहां मकसद हर साल ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं है। मकसद यह है कि लंबे समय में कॉर्पस पर महंगाई का असर कम हो। मान लीजिए इस हिस्से से लंबे समय में औसतन 10% रिटर्न मिलता है। तब साल भर में करीब 87,500 रुपये की ग्रोथ हो सकती है।

हर महीने कितनी रकम निकाल सकते हैं?

रिटायरमेंट में एक अहम सवाल यह है कि 50 लाख रुपये में से हर साल कितनी रकम निकाली जाए। स्वाति जैन के मुताबिक, 4 से 5% सालाना निकासी की रणनीति अपनाई जा सकती है।

50 लाख रुपये पर 4% की दर से सालाना करीब 2 लाख रुपये निकाले जा सकते हैं। यानी हर महीने लगभग 16,700 रुपये। अगर निकासी की दर 5% रखी जाए तो सालाना करीब 2.50 लाख रुपये निकलेंगे। इस हिसाब से मासिक रकम लगभग 20,800 रुपये होगी। इस तरह 50 लाख रुपये के कॉर्पस से करीब 16,700 से 20,800 रुपये महीने का शुरुआती कैश फ्लो बनाया जा सकता है।

1-2 साल का खर्च अलग रखें

रिटायरमेंट के बाद बाजार गिरने पर इक्विटी बेचकर खर्च निकालना नुकसानदायक हो सकता है। इससे बचने के लिए कुछ रकम अलग रखना जरूरी है। मान लीजिए आपका मासिक खर्च 20,000 रुपये है। ऐसे में एक साल का खर्च 2.40 लाख रुपये होगा। दो साल के खर्च के लिए करीब 4.80 लाख रुपये अलग रखे जा सकते हैं।

इस रकम को ऐसे विकल्प में रखा जा सकता है जहां पैसा आसानी से उपलब्ध हो। बाजार में बड़ी गिरावट आने पर रोजमर्रा के खर्च के लिए इक्विटी बेचने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

EPF पर ही निर्भर क्यों न रहें?

EPF रिटायरमेंट के लिए बड़ा कॉर्पस बनाने में मदद करता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद जरूरत बदल जाती है। हर महीने सैलरी की जगह अब निवेश से कैश फ्लो चाहिए।

Kustodian Life के फाउंडर कुणाल काबरा के मुताबिक, 58 साल की उम्र के बाद EPF में नया योगदान बंद हो जाता है और बैलेंस पर ब्याज मिलने की भी तय सीमा है। इसलिए रिटायरमेंट के बाद सिर्फ EPF पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग निवेशों से इनकम का इंतजाम करना जरूरी है।

Post Office FD: पोस्ट ऑफिस इस स्कीम में दे रहा 7.1% ब्याज! जानिए ₹3 लाख पर कमाई का गणित

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Silver Price:फेड के फैसले से पहले सोना-चांदी स्थिर, कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

Gold Silver Price: बुधवार, 16 सितंबर को शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं, जबकि चांदी में बढ़त देखी गई क्योंकि निवेशक दिन में बाद में आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले का इंतजार कर रहे थे। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर का असर बुलियन (सोने-चांदी) पर बना रहा, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बनाए रखा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, COMEX सोना $4,329.30 प्रति औंस पर था, जो पिछले बंद भाव $4,333.50 प्रति औंस से $3.50 या 0.08% कम था। कॉन्ट्रैक्ट ने दिन के दौरान $4,339.50 प्रति औंस का उच्चतम और $4,315.20 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।

वहीं, COMEX चांदी 0.59% बढ़कर $64.235 प्रति औंस हो गई, जबकि पिछला बंद भाव $64.185 प्रति औंस था। चांदी $64.480 प्रति औंस के उच्चतम और $63.940 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच कारोबार करती रही।

घरेलू बाजार में, PTI द्वारा बताए गए स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, मंगलवार (15 सितंबर) को नई दिल्ली में सोने की कीमतें ₹1,000 गिरकर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम हो गईं, जिससे यह कीमती धातु एक महीने से अधिक समय के अपने निचले स्तर पर आ गई।

हालांकि, चांदी की कीमत ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) पर स्थिर रही।

सोने में हालिया कमजोरी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतों में गिरावट के बाद आई। विश्लेषकों ने इस बदलाव का कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड को बताया।

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड मंगलवार (15 सितंबर) को 5% के पार पहुंच गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर था, हालांकि बुधवार को एशियाई कारोबार में इसमें थोड़ी नरमी आई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी सोने पर दबाव डाल सकती है क्योंकि इस कीमती धातु से कोई ब्याज आय नहीं होती है।

डॉलर इंडेक्स दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा था, जिससे डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने पर और दबाव पड़ा। साथ ही, पिछले सत्र में भारी बढ़त के बाद ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के आसपास ऊंचे स्तर पर बना रहा, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। अब बाज़ार की नज़रें फ़ेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले और ब्याज दरों पर उसकी गाइडेंस पर टिकी हैं। फ़ेड के रेट आउटलुक में बदलाव डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर असर डाल सकते हैं, जिससे सेंट्रल बैंक की टिप्पणी बुलियन की कीमतों के लिए निकट भविष्य में एक अहम ट्रिगर बन जाती है।

कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अगस्त में सोने का आयात सालाना आधार पर 57.75% घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि चांदी का आयात 127% बढ़कर 1.02 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान सोने का आयात 3.38% बढ़कर 17.47 अरब डॉलर हो गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।