Silver Gold Price Today : एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में सोने-चांदी के भाव में नरमी, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Silver Gold Price Today : मंगलवार को एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और रिटेल महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं। इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.3% गिरकर 4,126.84 डॉलर प्रति औंस पर दिख रहा है। वहीं, दिसंबर की डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% गिरकर 4,146.00 डॉलर पर दिख रहा है।

निवेशकों का फोकस अब यूएस फेड की 27-28 अक्टूबर की नीति बैठक और अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स’ (PCE) डेटा पर है। यूएस फेड 2% महंगाई दर का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसलिए वह इस डेटा पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए है।

यूएस फेड ने सितंबर में अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में कर दिया था। CME के ​​’फेडवॉच टूल’ के मुताबिक ट्रेडर्स का मानना ​​है कि इस बात की 83% संभावना है कि केंद्रीय बैंक अगले हफ्ते दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा,जबकि दिसंबर में दरों के बढ़ने की उम्मीद 94% बनी हुई है।

इस बीच बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने कहा है कि रिटेल महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य के काफी करीब है। ग्लोबल स्तर पर AI की भारी मांग और टाइट जॉब मार्केट के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिलते हैं।

आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरों का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इससे सोना (बुलियन) अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है, जबकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

जियोपोलिटिकल फ्रंट की बात करें तो यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रा, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए हैं।

दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो, स्पॉट सिल्वर 0.7% गिरकर 56.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लैटिनम 1,639.65 डॉलर पर सपाट दिख रहा है। जबकि, पैलेडियम 0.7% गिरकर 1,112.08 डॉलर पर आ गया है।

एक्सपर्ट्स की राय

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता का कहना है कि अगले 2-3 के नजरिए से सोने को लेकर आम राय यही है कि इसकी कीमतें बढ़ेंगी। इस अवधि के दौरान महंगाई और ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि,ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं।

विकास गुप्ता का मानना है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हो सकते हैं,लेकिन साथ ही ऐसे बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो उसी समय सोना बेचें,जिससे सोने की कीमतें नियंत्रण में बनी रह सकती है।

भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि,फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए,ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है,लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि भारत में दशहरा मनाया जा रहा है और इस समय 24-कैरेट सोना लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले महीने यह अपने रिकॉर्ड हाई से 6% से ज्यादा नीचे आया है। इस त्योहारी सीजन में जो बदलाव आया है वह सोने के प्रति भारतीय परिवारों के लगाव में नहीं,बल्कि इसे खरीदने के तरीके में है। भारतीय अपने त्योहारी बजट को तो स्टेबल रख रहे हैं,भले ही इसके लिए उन्हें कम वजन वाले आभूषण खरीदने पड़ें।

साथ ही लोग सोने के सिक्कों,बार और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में अधिक निवेश कर रहे हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी खरीदारी अब केवल गहने खरीदने तक सीमित न रहकर, संपत्ति को सुरक्षित रखने के एक व्यवस्थित तरीके में बदल रही है। आगे चलकर, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल नहीं आने देंगी,जिससे निकट भविष्य में सोने की कीमत में 5% तक की उतार-चढ़ाव वाली रेंज बनी रहने की संभावना है। इस दशहरे पर,खरीदार कीमतों में आई हालिया गिरावट को किसी चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि खरीदारी शुरू करने के एक अच्छे मौके के तौर पर देख रहे हैं।

 

 

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में 1% से ज्यादा की तेजी, जानिए इनमें आज क्या हो कमाई की रणनीति

Silver Gold Price Today : एमसीएक्स पर सोने का अक्टूबर वायदा 1,904 रुपए यानी 1.30 फीसदी की बढ़त के साथ 148,021 रुपए पर दिख रहा है। वहीं, सिल्वर का दिसंबर वायदा 2,544 रुपए यानी 1.11 फीसदी की बढ़त के साथ 226,190 रुपए पर दिख रहा है। केडिया एडवाइजरी का कहना है कि आज सोने की ट्रेडिंग रेंज 147470-151880 है। महंगाई उम्मीद से कम रहने के कारण सोने की कीमतों में बढ़त हुई है। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। US का हेडलाइन PCE प्राइस इंडेक्स महीने-दर-महीने 0.3% बढ़ा है, जबकि खाने-पीने की चीज़ों और एनर्जी को छोड़कर कोर PCE में 0.2% की बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को आने वाली सरकारी रोज़गार रिपोर्ट में पेरोल में 90,000 की बढ़ोतरी दिखने की उम्मीद है। जुलाई में हांगकांग के ज़रिए चीन का नेट गोल्ड इंपोर्ट जून के मुकाबले लगभग 11% और साल-दर-साल आधार पर 28% बढ़ा है।

केडिया एडवाइजरी की MCX गोल्ड दिसंबर फ्यूचर्स में 150000 रुपए के आसपास, 151000 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 148500-147500 रुपए के टारगेट को लिए खरीदारी की सलाह है।

ICICI डायरेक्ट की राय है कि मज़बूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड के दबाव में, स्पॉट गोल्ड के $4,200 के लेवल के पास रुकावट का सामना करने और $4,100 की ओर गिरने की उम्मीद है। एनर्जी की वजह से लगातार बनी हुई महंगाई और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना है। इसके अलावा,अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में बहुत कम प्रगति होने से तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी और बड़े सेंट्रल बैंकों को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

दूसरी ओर सेंट्रल बैंको की भारी खरीदारी और ETF में बेहतर निवेश से बुलियन की कीमतों को सहारा मिलेगा। इस बीच,शुक्रवार को आने वाली US जॉब रिपोर्ट पर सबकी नजरें होंगी,जिससे US लेबर मार्केट की मजबूती के बारे में और साफ जानकारी मिल सकती है।

MCX गोल्ड दिसंबर के लिए ₹152,000 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख रहा है। इसके ₹148,000-₹147,000 के लेवल तक गिरने की उम्मीद है। MCX सिल्वर दिसंबर के ₹221,000 और ₹228,000 के लेवल के बीच बने रहने की उम्मीद है। अगर यह ₹221,000 से नीचे जाता है,तो इसमें ₹218,000 के लेवल तक गिरावट आ सकती है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में दिख रही तेजी, जानिए इनमें आज क्या हो कमाई की रणनीति

Silver Gold Price Today : घरेलू बाजार में सोने-चांदी में आज बढ़त के साथ कारोबार होता दिख रहा है। 11.25 बजे के आसपास एमसीएक्स पर गोल्ड का अक्टूबर वायदा 1,018 रुपए यानी 0.70 फीसदी की बढ़त के साथ 147,250 रुपए पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी का दिसंबर वायदा 915 रुपए यानी 0.41 फीसदी की तेजी के साथ 226,365 रुपए पर नजर आ रहा था। अमेरिका और ईरान के बीच जारी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता के चलते आज भारत के रिटेल मार्केट में सोने की कीमत बढ़ गई है।

उधर बुधवार को इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में गिरावट आई और मंथली लॉस की ओर बढ़ता दिख रहा है। ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों का असर मार्केट सेंटीमेंट पर पड़ा है। साथ ही,इन्वेस्टर्स फेडरल रिजर्व के अगले पॉलिसी फैसले के बारे में अंदाजा लगाने के लिए US के महंगाई के आंकड़ों पर नजरें बनाए हुए हैं। इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 0.2% गिरकर $4,170.63 प्रति औंस पर आ गया और इस महीने अब तक इसमें 6% से ज़्यादा की गिरावट आई है।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि MCX पर अक्टूबर का गोल्ड फ्यूचर्स 29 सितंबर को ₹1,46,247 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ,जो ₹557 या 0.38% कम था। 28 सितंबर को इस कॉन्ट्रैक्ट में 2.7% की गिरावट आई थी। मंगलवार के कारोबार में दिसंबर कॉन्ट्रैक्ट का गोल्ड लगभग ₹1,48,766 पर था। दिसंबर का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट लगभग ₹2,25,945 पर था,जिसमें 0.91% की गिरावट आई थी। यह गिरावट काफी तेज़ रही है। सोना सितंबर के मध्य में लगभग ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम से गिरकर लगभग ₹1.46 लाख पर आ गया है।

उन्होंने आगे कहा कि यूएस फेड के हालिया बयानों से कुछ राहत मिली है। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट जॉन विलियम्स ने कहा है कि ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की कोई जल्दबाजी नहीं है। नतीजतन, बाज़ार ने अक्टूबर में दरों की बढ़ोतरी की संभावना को पहले के लगभग 70% से घटाकर लगभग 50% कर दिया है। भारतीय निवेशकों के लिए सोने-चांदी में उतार-चढ़ाव ज़्यादा रहने की संभावना है। रुपया भी अहम होगा क्योंकि करेंसी की कमजोरी घरेलू बाजार में सोने-चांदी की कीमतों को सहारा दे सकती है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं Kedia Advisory के अजय केडिया। आज इनकी गोल्ड और सिल्वर में खरीदारी की सलाह है। गोल्ड में इनकी 147000 रुपए के आसपास, 146000 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 150000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं,सिल्वर में इनकी 224000 रुपए के आसपास, 222000 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 228000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

 

Silver Price Today: चांदी की कीमतें हुई सस्ती, खरीदारी से पहले जानें आज 10 प्रमुख शहरों के ताजा रेट

 

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Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में कमजोरी, जानिए कमोडिटी मार्केट में आज कहां हो सकती है कमाई

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में आज कमजोरी देखने को मिल रही है। 11.15 बजे के आसपास एमसीएक्स पर गोल्ड का अक्तूबर वायदा 524 रुपए यानी 0.34 फीसदी की कमजोरी के साथ 152,580 पर नजर आ रहा था। वहीं, चांदी का दिसंबर वायदा 1,667.00 रुपए यानी 0.70 फीसदी की कमजोरी के साथ 237,820 के लेवल पर नजर आ रहा था। US फेडरल रिजर्व (Fed) का सख्त रुख को सोने-चांदी (जिससे कोई ब्याज नहीं मिलता) पर दबाव डालने वाला एक मुख्य कारण माना जा रहा है।

फेड के अपडेटेड इकोनॉमिक प्रोजेक्शन से पता चलता है कि इस साल कम से कम एक और बार ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद है। इसके अलावा, बोस्टन फेड की प्रेसिडेंट सुसान कॉलिन्स और सेंट लुइस फेड के प्रेसिडेंट अल्बर्टो मुसालेम ने पॉलिसी को और सख्त करने का खुलकर समर्थन किया है। उनका मानना है कि कमोडिटी की कीमतों में अचानक उछाल के कारण महंगाई का जोखिम अभी भी बना हुआ है।

उधर भारतीय बाजार में सोने की कीमत ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम से ऊपर बनी हुई है और ₹1,42,000 से ₹1,35,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास एक मजबूत आधार बना रही है। बाजार जानकारों के मुताबिक,भारत में सोने की कीमतों में बड़ी बढ़त की उम्मीद है। इसकी वजह त्योहारों का मौसम है,जिससे फिजिकल सोने की मांग बढ़ रही है। उनका कहना है कि जियोपॉलिटिकल तनाव,बढ़ती फिजिकल मांग और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में अस्थिरता जैसे अहम कारण दुनिया भर में सोने की कीमतों को बढ़ा सकते हैं। जेफरीज के फाइनेंशियल एनालिस्ट क्रिस वुड सोने को लेकर काफी पॉजिटिव हैं। उनका मानना ​​है कि लंबे समय में सोने की कीमतें 10,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। सोने की कीमत का $10,000 प्रति औंस तक पहुंचने का मतलब है कि भारतीय बाजार में इसकी कीमत ₹3 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर सकती है।

दूसरी कमोडिटीज पर एक नजर

एमसीएक्स पर कॉपर का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 2.10 रुपए यानी 0.15 फीसदी की बढ़त के साथ 1,414.55 रुपए पर और क्रूड ऑयर का अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट 139 रुपए यानी 1.57 फीसदी की बढ़त के साथ 8,974 रुपए पर दिख रहा है। वहीं, नैचुरल गैस का सितंबर कॉन्ट्रैक्ट 0.40 रुपए यानी 0.15 फीसदी की बढ़त के साथ 273.40 रुपए पर कारोबार कर रहा है।

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल

कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं Prithvi Finmart के मनोज कुमार जैन। इनको आज GOLD MINI और NICKEL में कमाई के मौके दिख रहे हैं। GOLD MINI अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट में इनकी 152800 रुपए के आसपास, 152200 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 154000 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, NICKEL अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट में इनकी 1590 रुपए के आसपास,1578 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ, 1612 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।

 

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Gold Rate Today : कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं Prithvi Finmart के मनोज कुमार जैन। इनको आज GOLD MINI और NICKEL में कमाई के मौके दिख रहे हैं

Gold vs silver: फेड की ब्याज दर में बढ़ोतरी, डॉलर और जियोपॉलिटिकल रिस्क का कीमतों पर असर क्यों

Gold Silver Price: सोने-चांदी की कीमतों में शुक्रवार, 18 सितंबर को अलग-अलग रुझान देखने को मिला। बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी और भविष्य में ब्याज दरों की दिशा के बारे में दिए गए संकेतों के असर का आकलन करता नजर आया। यहीं कारण है कि 18 सितंबर की ताजा कीमतों के अनुसार, COMEX पर सोना 0.26% गिरकर $4,388.20 प्रति औंस पर था, जबकि COMEX चांदी 0.18% बढ़कर $66.215 प्रति औंस पर थी।

कीमतों में यह उतार-चढ़ाव फेड के बेंचमार्क रेट को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाने के फैसले के बाद कीमती धातुओं के लिए अस्थिर सत्र के बाद आया है। अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें और ट्रेजरी यील्ड आमतौर पर सोना और चांदी जैसी बिना ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव डालती हैं, जबकि मजबूत अमेरिकी डॉलर विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत वाली कीमती धातुओं को महंगा बना सकता है।

आखिर क्यों फेड की पॉलिसी को लेकर संवेदनशील रहता है सोना?

VT मार्केट्स के मार्केट एनालिस्ट रुचिट ठाकुर ने कहा कि फेड की ओर से ब्याज दरों को 4% तक बढ़ाना और बढ़ती महंगाई व मजबूत आर्थिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करना शॉर्ट टर्म में अमेरिकी डॉलर और ट्रेजरी यील्ड को सपोर्ट करता है। इससे सोना और चांदी पर दबाव पड़ सकता है क्योंकि ऊंची यील्ड उन संपत्तियों को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) बढ़ा देती है जिनसे कोई ब्याज नहीं मिलता।

उन्होंने बताया कि फेड के फैसले के तुरंत बाद सोने में 1% से ज्यादा और चांदी में करीब 1.7% की गिरावट आई। हालांकि, उन्होंने स्थिति के दूसरे पहलू की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि ग्रोथ, ट्रेड, फिस्कल पॉलिसी और जियोपॉलिटिक्स को लेकर लगातार बनी अनिश्चितता कीमती धातुओं के लिए ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) की मांग को सपोर्ट कर सकती है।

इधर आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज और करेंसी की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि 17 सितंबर को सोने की कीमतों में रिकवरी मुख्य रूप से फेड के फैसले के बाद बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी के बाद उनमें आई नरमी से जुड़ी थी, न कि सोने से जुड़े फंडामेंटल्स में किसी बदलाव से।

नार्वेकर के अनुसार, 2026 के अंत तक फेड का अनुमानित ब्याज दर आउटलुक 3.8% से बढ़कर 4.1% हो गया, जिससे संकेत मिलता है कि बाजारों को भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना को ध्यान में रखना पड़ सकता है। इसलिए उन्हें उम्मीद है कि सोने की कीमत एक बड़े दायरे में बनी रहेगी, क्योंकि ऊंचे यील्ड और मजबूत डॉलर की वजह से शॉर्ट टर्म में इसमें लगातार बढ़ोतरी की गुंजाइश कम है।

आखिर कीमतों को कहां से मिल रहा है सहारा

ऊंची ब्याज दरों के दबाव के मुकाबले जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता एक अहम कारक बनी हुई है। ठाकुर ने कहा कि ग्रोथ, ट्रेड, फिस्कल पॉलिसी और जियोपॉलिटिकल तनाव को लेकर अनिश्चितता रिस्क वाले एसेट्स में भरोसा कम कर सकती है और सोने जैसे सुरक्षित एसेट्स की मांग बढ़ा सकती है।

तेल की कीमतें भी एक ऐसा कारक हैं जिन पर बाजार की नजर है। शुक्रवार (18 सितंबर) की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग $103.77 प्रति बैरल थी, जबकि WTI की कीमत $100.88 के आसपास थी। दोनों बेंचमार्क में लगभग 1% की गिरावट आई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वेस्ट एशिया में जारी तनाव के बीच सप्लाई में रुकावट की चिंताओं को सऊदी क्रूड को ले जाने के वैकल्पिक तरीकों की उम्मीदों से कुछ हद तक कम किया जा रहा था।

सोने के लिए, लगातार जियोपॉलिटिकल जोखिम इस धातु की मांग को ‘स्टोर ऑफ वैल्यू’ (मूल्य संचय) के तौर पर सहारा दे सकते हैं, भले ही ऊंची ब्याज दरें दबाव बना रही हों।

कामा ज्वैलरी के MD कॉलिन शाह ने कहा कि फेड का ‘लंबे समय तक ऊंची दरें बनाए रखने’ का रुख डॉलर को सहारा देकर और बिना यील्ड वाले एसेट्स को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) बढ़ाकर सोने के लिए निकट भविष्य में मुश्किलें पैदा कर सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि महंगाई की ऊंची उम्मीदें और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं ‘स्टोर ऑफ वैल्यू’ के तौर पर और मैक्रो-इकोनॉमिक व जियोपॉलिटिकल जोखिमों से बचाव (हेज) के तौर पर सोने की भूमिका को सहारा देती रहती हैं।

भारतीय सोने की कीमतों पर इसका क्या असर होगा

घरेलू सोने की कीमतें रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट से भी प्रभावित होती हैं क्योंकि भारत अपनी ज्यादातर bullion (सोना-चांदी) का आयात करता है। रुपये के कमजोर होने से सोने की घरेलू कीमत बढ़ सकती है, भले ही अंतरराष्ट्रीय कीमतें दबाव में हों।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने 17 सितंबर को इस अंतर पर प्रकाश डाला। जहां फेड के फैसले के बाद विदेशी स्पॉट गोल्ड में गिरावट आई थी, वहीं अक्टूबर डिलीवरी के लिए MCX गोल्ड 1.29% बढ़कर ₹1.52 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था, जबकि दिसंबर की चांदी 1.27% बढ़कर ₹2.35 लाख प्रति किलोग्राम पर थी।

HDFC सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने घरेलू सोने में गिरावट का कारण आंशिक रूप से कमजोर मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रात भर आई कमजोरी को बताया।

सोना बनाम चांदी: इनकी चाल में अंतर क्यों हो सकता है

सोना आमतौर पर मॉनेटरी पॉलिसी, रियल यील्ड, करेंसी और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) की मांग से अधिक निकटता से जुड़ा होता है। चांदी, जिसे कीमती धातु भी माना जाता है, उसका औद्योगिक उपयोग में बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए, इसकी कीमत निवेश की मांग और औद्योगिक गतिविधियों की उम्मीदों, दोनों के आधार पर बदल सकती है।

इसका मतलब है कि ‘हॉकिश’ फेड (सख्त मौद्रिक नीति वाला फेडरल रिजर्व) ऊंची यील्ड और मजबूत डॉलर के जरिए दोनों धातुओं पर दबाव डाल सकता है, जबकि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और औद्योगिक मांग की उम्मीदों में बदलाव उन्हें अलग-अलग दिशाओं में ले जा सकते हैं।

इसलिए, भारतीय निवेशकों को केवल वैश्विक बुलियन कीमतों को देखने के बजाय सोने और चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों, रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट और घरेलू मांग की स्थितियों पर एक साथ विचार करना चाहिए।

Silver Price Today: सस्ती हुई चांदी, जानें 17 सितंबर को मुंबई से चेन्नई तक 1 किलो की कीमत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price:फेड के फैसले से पहले सोना-चांदी स्थिर, कच्चे तेल की कीमतों पर नजर

Gold Silver Price: बुधवार, 16 सितंबर को शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं, जबकि चांदी में बढ़त देखी गई क्योंकि निवेशक दिन में बाद में आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के पॉलिसी फैसले का इंतजार कर रहे थे। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत डॉलर का असर बुलियन (सोने-चांदी) पर बना रहा, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने महंगाई की चिंताओं को बनाए रखा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में, COMEX सोना $4,329.30 प्रति औंस पर था, जो पिछले बंद भाव $4,333.50 प्रति औंस से $3.50 या 0.08% कम था। कॉन्ट्रैक्ट ने दिन के दौरान $4,339.50 प्रति औंस का उच्चतम और $4,315.20 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।

वहीं, COMEX चांदी 0.59% बढ़कर $64.235 प्रति औंस हो गई, जबकि पिछला बंद भाव $64.185 प्रति औंस था। चांदी $64.480 प्रति औंस के उच्चतम और $63.940 प्रति औंस के निचले स्तर के बीच कारोबार करती रही।

घरेलू बाजार में, PTI द्वारा बताए गए स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, मंगलवार (15 सितंबर) को नई दिल्ली में सोने की कीमतें ₹1,000 गिरकर ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम हो गईं, जिससे यह कीमती धातु एक महीने से अधिक समय के अपने निचले स्तर पर आ गई।

हालांकि, चांदी की कीमत ₹2.34 लाख प्रति किलोग्राम (टैक्स सहित) पर स्थिर रही।

सोने में हालिया कमजोरी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतों में गिरावट के बाद आई। विश्लेषकों ने इस बदलाव का कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड को बताया।

अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड मंगलवार (15 सितंबर) को 5% के पार पहुंच गई, जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर था, हालांकि बुधवार को एशियाई कारोबार में इसमें थोड़ी नरमी आई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी सोने पर दबाव डाल सकती है क्योंकि इस कीमती धातु से कोई ब्याज आय नहीं होती है।

डॉलर इंडेक्स दो सप्ताह के उच्चतम स्तर के करीब कारोबार कर रहा था, जिससे डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने पर और दबाव पड़ा। साथ ही, पिछले सत्र में भारी बढ़त के बाद ब्रेंट क्रूड $108 प्रति बैरल के आसपास ऊंचे स्तर पर बना रहा, जिससे महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। अब बाज़ार की नज़रें फ़ेडरल रिज़र्व के पॉलिसी फ़ैसले और ब्याज दरों पर उसकी गाइडेंस पर टिकी हैं। फ़ेड के रेट आउटलुक में बदलाव डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर असर डाल सकते हैं, जिससे सेंट्रल बैंक की टिप्पणी बुलियन की कीमतों के लिए निकट भविष्य में एक अहम ट्रिगर बन जाती है।

कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में अगस्त में सोने का आयात सालाना आधार पर 57.75% घटकर 2.3 अरब डॉलर रह गया, जबकि चांदी का आयात 127% बढ़कर 1.02 अरब डॉलर हो गया। अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान सोने का आयात 3.38% बढ़कर 17.47 अरब डॉलर हो गया।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold-silver Price : कमोडिटी में मजबूत रैली कायम रहने की उम्मीद, सोने-चांदी में अभी भी 10% तेजी की गुंजाइश

Gold-silver Price : 360 ONE के प्रेसिडेंट और हेड-ब्रोकरेज,विरल शाह का कहना है कि अगर US बॉन्ड यील्ड में नरमी आती है तो अगले 6 से 8 महीनों में सोना और चांदी में मौजूदा स्तरों से 10% तक की तेजी आ सकती है। उनका मानना ​​है कि जियोपॉलिटिकल घटनाओं और हाई बॉन्ड यील्ड को लेकर US का रुख कीमती धातुओं को सपोर्ट करता रहेगा।

कमजोर डॉलर,US में कमजोर जॉब आंकड़ों और US ट्रेजरी विभाग की बॉन्ड-खरीद की घोषणा की वजह से सोने और चांदी की कीमतों में पहले ही जबरदस्त तेजी आ चुकी है। हालांकि,विरल शाह को लगता है कि सोने में 4,700–4,800 डॉलर और चांदी में 70–72 डॉलर के आस-पास कुछ टेक्निकल सेलिंग देखने को मिल सकती है। उन्हें उम्मीद है कि जैक्सन होल में फेडरल रिजर्व का बयान निकट भविष्य में के लिए एक अहम ट्रिगर साबित होगा।

डॉलर में कमजोरी से कमोडिटी को मिलेगा सपोर्ट

उन्होंने आगे कहा कि अगर डॉलर और कमजोर होता है तो कमोडिटीज को और फायदा मिल सकता है। डॉलर इंडेक्स के लिए 100-101 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख रहा है। उनका मानना ​​है कि डॉलर इंडेक्स के 97 की तरफ जाने से सोने,चांदी और बेस मेटल्स को सपोर्ट मिल सकता है।

कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत

प्रेशियस मेटल के अलावा,विरल शाह कॉपर और जिंक को लेकर भी पॉज़िटिव हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर्स और ग्लोबल इलेक्ट्रिफिकेशन की वजह से कॉपर में लगभग एक साल से स्ट्रक्चरल बुल ट्रेंड बना हुआ है। उन्हें कॉपर के फंडामेंटल्स मजबूत दिख रहे हैं। हालांकि उनका मानना ​​है कि कॉपर में अब तक की जोरदार बढ़त के बाद आगे और बढ़त का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।

जिंक और कॉपर को सप्लाई में तंगी से मिल रहा फायदा

जिंक पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि सप्लाई से जुड़ी चिंताओं,खासकर चीन में बाढ़ के कारण कम उत्पादन होने से जिंक को सपोर्ट मिल रहा है। इसके चलते लंदन मेटल एक्सचेंज पर इन्वेंट्री कम हो रही है और सप्लाई तंग है,जबकि इसकी मांग मज़बूत बनी हुई है। शाह को उम्मीद है कि जब तक सप्लाई मांग के बराबर नहीं हो जाती,तब तक कॉपर और जिंक दोनों को सपोर्ट मिलता रहेगा।

क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट मुमकिन

कच्चे तेल पर अपनी राय जाहिर करते हुए विरल शाह ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली तेल की सप्लाई बेहतर होती है और भू-राजनीतिक तनाव कम होता है,तो क्रूड की कीमतों में 7-8% की और गिरावट आ सकती है। हालांकि,उन्हें नहीं लगता कि यह लंबे समय तक बनी रहने वाली गिरावट होगी,क्योंकि तमाम देशों को आखिरकार अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को फिर से भरना ही होगा।

 

 

Gold Price : जेफरीज ने कहा भारत की ताकत उसके सोने में ही छिपी, गोल्ड पर लगाया बड़ा दांव

 

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Gold Price Today: अमेरिका के एक ऐलान से रॉकेट बना सोना! $4500 के पार पहुंची कीमतें, जानिए क्या अब और बढ़ेगा भाव

अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में सोने की कीमतों (Gold Prices) में जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। जून की शुरुआत के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4500 डॉलर प्रति औंस के पार बना हुआ है। COMEX गोल्ड 19 अगस्त को $4,571.80 प्रति औंस के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि गुरुवार को इसमें मामूली 0.05 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह $4,542.90 प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा था।

घरेलू बाजार की बात करें तो शुक्रवार (14:58 IST) को घरेलू MCX पर सोने की हाजिर कीमत करीब 156571 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रही। वहीं 5 अक्टूबर के कॉन्ट्रैक्ट के लिए MCX गोल्ड फ्यूचर्स 0.07 फीसदी की बढ़त के साथ 158729 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले बुधवार (19 अगस्त) को पीएम फिक्सिंग (PM Fixing) में LBMA स्पॉट गोल्ड की कीमत $4,460.70 प्रति औंस दर्ज की गई थी।

अमेरिकी खजाने के एक फैसले से क्यों आई तेजी?

सोने की कीमतों में इस तेज उछाल के पीछे यूएस ट्रेजरी का एक बड़ा फैसला है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लंबी अवधि की प्रतिभूतियों की बायबैक बढ़ाने के कदम ने बॉन्ड यील्ड को नीचे धकेल दिया और अमेरिकी डॉलर को कमजोर कर दिया। इससे सोने की कीमतों को पुश मिल गया।

अमेरिकी ट्रेजरी के इस कदम से 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड गिरकर क्रमशः 4.64 प्रतिशत और 5.18 प्रतिशत पर आ गई। इसके अलावा शुरुआती कारोबार में डॉलर में 0.76 फीसदी की गिरावट आई, जिससे सोने जैसे डॉलर डॉमिनेटेड असेट्स की डिमांड को मजबूत समर्थन मिला। बोनांजा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के मुताबिक जैसे ही यील्ड गिरी और डॉलर कमजोर हुआ बिना ब्याज वाले एसेट यानी सोने के लिए माहौल अच्छा हो गया। बाजार ने इसे दीर्घकालिक ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी को रोकने और बॉन्ड मार्केट के लंबे सिरे पर लिक्विडिटी में सुधार के प्रयास के रूप में देखा। इसके बाद यील्ड गिरी और डॉलर कमजोर हुआ, जिसने सोने के लिए एक बहुत ही अनुकूल स्थिति बनाई।

सिर्फ ट्रेजरी का फैसला नहीं, ये फैक्टर भी दे रहे सहारा

हालांकि, सोने में आई इस तेजी के पीछे सिर्फ अमेरिकी ट्रेजरी का ऐलान ही एकमात्र कारण नहीं है। वीटी मार्केट्स के मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, ट्रेजरी का ऐलान एक दिन की तेजी को एक्सप्लेन तो करता है, लेकिन सिर्फ यही एक फैक्टर नहीं है। रुचित ठाकुर के मुताबिक अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी रुख और मौद्रिक नीति को लेकर जताई जा रही उम्मीदें, लगातार बनी हुई जियोपॉलिटिरल अनिश्चितताएं और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की लगातार की जा रही मांग जैसे फैक्टर भी इसे सपोर्ट कर रहे हैं।

क्या निवेशकों को इस भाव पर खरीदना चाहिए सोना?

सोने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद नए और पुराने निवेशकों के लिए विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। वीटी मार्केट्स के रुचित ठाकुर का सुझाव है कि ऊंचे स्तरों पर तेजी का पीछा करना निवेशकों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। जो लोग पहले से सोने में निवेश कर चुके हैं, वो अपनी होल्डिंग को बनाए रखने पर विचार कर सकते हैं।

नए निवेशकों को एक बार में बड़ा दांव लगाने या तेज उछाल के तुरंत बाद अग्रेसिव इन्वेस्टमेंट करने की बजाय कीमतों में गिरावट आने पर धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की रणनीति अपनानी चाहिए।

आगे क्या ट्रैक करें?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने की आगे की चाल तय करने के लिए निवेशकों को आने वाले दिनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर इंडेक्स, फेडरल रिजर्व के संकेतों और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बारीक नजर रखनी होगी।

 

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Gold Silver Price Outlook: सोने से भी ज्यादा रिटर्न देने वाली है चांदी? जानिए एक्सपर्ट जोनाथन बैरट की क्या है राय

Gold Silver Price Outlook : कीमती धातुओं के बाजार में इंवेस्टमेंट को लेकर प्लान कर रहे निवेशकों के लिए एक जरूरी आउटलुक सामने आया है। कमोडिटी बाजार के एक्सपर्ट और ईटीओ मार्केट्स के CIO जोनाथन बैरट का मानना है कि आने वाले समय में चांदी का प्रदर्शन सोने से भी बेहतर रह सकता है। बैरट का अनुमान है कि चांदी आने वाले समय में 100 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी छू सकती है।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के मुताबिक जोनाथन बैरट ने सोने और तांबे को लेकर भी एक बेहद मजबूत और सकारात्मक आउटलुक पेश किया है। उनका मानना है कि अमेरिकी डॉलर में कमजोरी, चीन से बढ़ती मांग और ग्रीन टेक्नोलॉजी के तेजी से होते विस्तार के दम पर कमोडिटी बाजार में तेजी का नया दौर देखने को मिल सकता है।

100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है चांदी: एक्सपर्ट

जोनाथन बैरट का साफ कहना है कि चांदी कीमती धातुओं में सबसे बेहतर रिटर्न देने वाला मेटल साबित हो सकती है। उन्होंने सीएनबीसी टीवी 18 से बात करते हुए कहा कि,’मुझे लगता है कि चांदी ही निवेश के लिए सही जगह है।’उनके मुताबिक चांदी सबसे पहले 75 डॉलर प्रति औंस के स्तर को टारगेट करेगी। अगर अमेरिकी ट्रेजरी की लिक्विडिटी से जुड़ी पॉलिसी का सपोर्ट मिला तो चांदी की कीमतें 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं।

बैरट ने बताया कि चीन द्वारा सिल्वर ओर के आयात में साल-दर-साल आधार पर 62% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सौर पैनल जैसी ग्रीन टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन का दबदबा बढ़ रहा है और इस विस्तार के चलते चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड लगातार बनी रहेगी।

सोना भी छू सकता है 5000 डॉलर प्रति औंस का स्तर

सोने पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए बैरट ने कहा कि वे गोल्ड को लेकर भी काफी बुलिश हैं। उनका अनुमान है कि अगर मौजूदा नीतियां जारी रहती हैं तो सोना प्रति औंस 5000 डॉलर के ऐतिहासिक स्तर को पार कर सकता है। सोने और चांदी की इस तेजी के पीछे उन्होंने कई मैक्रो-इकोनॉमिक वजहें गिनाई हैं। उनके मुताबिक डॉलर इंडेक्स अभी 101 के आसपास है जिसके गिरकर 90 से 95 के स्तर तक आने की संभावना है। डॉलर में इस गिरावट से कीमती धातुओं को सीधा सहारा मिलेगा।

इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व से अलग अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और लिक्विडिटी बनाए रखने के उपायों का इस्तेमाल कर रही है। सीधे ब्याज दरों में बदलाव किए बिना लिक्विडिटी बढ़ाने की यह नीति डॉलर पर दबाव बनाए रखेगी, जो सोने-चांदी के लिए फायदेमंद है।

उनके मुताबिक अमेरिका पर लगातार बढ़ रहा कर्ज निवेशकों को सुरक्षित ठिकाने की ओर रुख करने पर मजबूर कर रहा है। निवेशक सोने और चांदी को वैल्यू के बेहतर एसेट के रूप में देखना जारी रखेंगे।

ETF की वापसी और शेयर बाजार से बुलियन में लौटेगा पैसा

जोनाथन बैरट का मानना है कि आने वाले दिनों में एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की ओर से कीमती धातुओं में फिर से खरीदारी देखने को मिलेगी। जैसे-जैसे निवेशकों को अमेरिकी ट्रेजरी की लिक्विडिटी नीतियों के जारी रहने का एहसास होगा इक्विटी बाजार से कुछ पूंजी वापस सोने और चांदी में शिफ्ट हो सकती है। इसके साथ ही अलग अलग देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही खरीदारी भी सोने-चांदी की कीमतों को सहारा देगी।

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तांबे पर भी बुलिश: स्ट्रक्चरल बुल मार्केट में बेस मेटल

सिर्फ कीमती धातुएं ही नहीं बल्कि बेस मेटल्स में जोनाथन बैरट तांबे पर भी पूरी तरह सकारात्मक हैं। वे कॉपर को एक स्ट्रक्चरल बुल मार्केट के रूप में देखते हैं। इसे चीन से बढ़ती मांग और ग्रीन इकोनॉमी की ओर दुनिया के बदलाव से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है। हाल के दिनों में अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद कॉपर की कीमतों में आई कुछ रुकावट या कंसोलिडेशन पर उन्होंने कहा कि यह हेल्दी पॉज है। माइंस से जुड़ी आपूर्ति की समस्याओं और स्ट्रक्चरल डेफिसिट यानी सप्लाई की कमी की वजह से कॉपर का लॉन्ग-टर्म तेजी का रुझान पूरी तरह से बरकरार है।

 

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Gold Silver price: भारत में सोना ₹1.53 लाख पर, चांदी 1.5% से ज्यादा लुढ़की, क्या आगे भी जारी रहेगा दबाव

Gold Silver price: घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट आई। कमज़ोर स्पॉट डिमांड और मार्केट में शामिल लोगों की बिकवाली का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा। यह गिरावट तब आई जब ग्लोबल स्तर पर कीमती धातुओं की कीमतों में मिला-जुला ट्रेंड देखा गया।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के फ्यूचर्स में ₹636 या 0.41% की गिरावट आई और यह ₹1.53 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। इस कॉन्ट्रैक्ट में 837 लॉट का बिज़नेस टर्नओवर दर्ज किया गया।सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के फ्यूचर्स में ₹4,023 या 1.73% की गिरावट आई और यह ₹2.28 लाख प्रति किलोग्राम हो गया, जिसमें 2,577 लॉट का बिज़नेस टर्नओवर हुआ।

दरअसल, घरेलू सोने की कीमतों में गिरावट की वजह कमज़ोर स्पॉट डिमांड थी, जबकि चांदी की कीमतें तब दबाव में आईं जब मार्केट में शामिल लोगों ने अपनी पोजीशन कम कर दीं।

घरेलू फ्यूचर्स मार्केट को इंटरनेशनल स्पॉट कीमतों से अलग भी देखा जाना चाहिए, क्योंकि डॉलर, US बॉन्ड यील्ड, ब्याज दरों की उम्मीदों और लोकल करेंसी में बदलाव के कारण दिन के दौरान इनमें अलग-अलग उतार-चढ़ाव हो सकते हैं।ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स 0.10% बढ़कर लगभग $4,338.74 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी 0.99% बढ़कर $62.74 प्रति औंस हो गई।

आगे क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, US ट्रेजरी यील्ड में कमी के कारण पिछले सेशन की गिरावट के बाद सोने में कुछ रिकवरी देखी गई। हालांकि, US फेडरल रिजर्व की मीटिंग के मिनट्स जारी होने से पहले निवेशक सतर्क रहे, क्योंकि इससे ब्याज दरों की भविष्य की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

कीमतों में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि सोने में ग्राहकों की दिलचस्पी में भारी कमी आई है। जब कीमतें ज़्यादा होती हैं, तो मांग छोटी खरीदारी की ओर भी बढ़ सकती है।

इंडियन एसोसिएशन फॉर गोल्ड एक्सीलेंस एंड स्टैंडर्ड्स (IAGES) के CEO कौशलेंद्र सिन्हा ने कहा कि ग्राहकों में सोने के प्रति अब भी काफी लगाव है, हालांकि कीमतें ज़्यादा होने के कारण खरीदार तेज़ी से हल्के वज़न और ट्रेंडी ज्वेलरी चुन रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ परिवार नया सोना खरीदने के बजाय अपनी मौजूदा ज्वेलरी को एक्सचेंज करने या उसे नया डिज़ाइन करवाने का विकल्प चुन रहे हैं। इससे ग्राहकों को अपनी मौजूदा होल्डिंग्स की वैल्यू का फ़ायदा उठाने में मदद मिलती है और उन्हें नया सोना कम खरीदना पड़ता है। त्योहारों और शादी-ब्याह का मौसम आने वाला है, ऐसे में घरेलू सोने के बाज़ार के लिए मांग एक अहम कारक हो सकती है। हालांकि, सोने और चांदी की कीमतों की दिशा ग्लोबल ब्याज दरों के अनुमान, US ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और रुपये की चाल पर भी निर्भर करेगी।

ग्राहकों के लिए, MCX फ्यूचर्स की कीमतें और रिटेल में गहनों की आखिरी कीमत एक जैसी नहीं होती हैं। सोने की रिटेल कीमतों में टैक्स, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर का मार्जिन जैसी चीजें भी शामिल होती हैं। इसी तरह, चांदी के दाम अलग-अलग शहरों में और फिजिकल व फ्यूचर्स मार्केट के बीच अलग-अलग हो सकते हैं।

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