Silver Gold Price Today : एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में सोने-चांदी के भाव में नरमी, जानिए आगे कैसी रह सकती है इनकी चाल

Silver Gold Price Today : मंगलवार को एशियाई बाजारों के शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में गिरावट आई है। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीति और रिटेल महंगाई के आंकड़ों पर नजर रखे हुए हैं। इससे ब्याज दरों की आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। फिलहाल हाजिर सोना (स्पॉट गोल्ड) 0.3% गिरकर 4,126.84 डॉलर प्रति औंस पर दिख रहा है। वहीं, दिसंबर की डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% गिरकर 4,146.00 डॉलर पर दिख रहा है।

निवेशकों का फोकस अब यूएस फेड की 27-28 अक्टूबर की नीति बैठक और अगले हफ्ते आने वाले अमेरिकी ‘पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स’ (PCE) डेटा पर है। यूएस फेड 2% महंगाई दर का लक्ष्य लेकर चल रहा है, इसलिए वह इस डेटा पर बहुत बारीकी से नजर रखे हुए है।

यूएस फेड ने सितंबर में अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 3.75%-4.00% की रेंज में कर दिया था। CME के ​​’फेडवॉच टूल’ के मुताबिक ट्रेडर्स का मानना ​​है कि इस बात की 83% संभावना है कि केंद्रीय बैंक अगले हफ्ते दरों में कोई खास बदलाव नहीं करेगा,जबकि दिसंबर में दरों के बढ़ने की उम्मीद 94% बनी हुई है।

इस बीच बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने कहा है कि रिटेल महंगाई दर केंद्रीय बैंक के 2% के लक्ष्य के काफी करीब है। ग्लोबल स्तर पर AI की भारी मांग और टाइट जॉब मार्केट के कारण महंगाई का दबाव बढ़ रहा है, जिससे ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावना के संकेत मिलते हैं।

आमतौर पर, ऊंची ब्याज दरों का असर सोने की कीमतों पर पड़ता है क्योंकि इससे सोना (बुलियन) अपने पास रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ बढ़ जाती है, जबकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।

जियोपोलिटिकल फ्रंट की बात करें तो यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रा, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों पर कई हमले किए हैं।

दूसरी कीमती धातुओं की बात करें तो, स्पॉट सिल्वर 0.7% गिरकर 56.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। वहीं, प्लैटिनम 1,639.65 डॉलर पर सपाट दिख रहा है। जबकि, पैलेडियम 0.7% गिरकर 1,112.08 डॉलर पर आ गया है।

एक्सपर्ट्स की राय

स्मॉलकेस मैनेजर और ओमनीसाइंस कैपिटल के सीईओ विकास गुप्ता का कहना है कि अगले 2-3 के नजरिए से सोने को लेकर आम राय यही है कि इसकी कीमतें बढ़ेंगी। इस अवधि के दौरान महंगाई और ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी होगी। हालांकि,ये दोनों चीजें एक साथ नहीं हो सकतीं।

विकास गुप्ता का मानना है कि केंद्रीय बैंक सोने के बड़े खरीदार हो सकते हैं,लेकिन साथ ही ऐसे बड़े विक्रेता भी हो सकते हैं जो उसी समय सोना बेचें,जिससे सोने की कीमतें नियंत्रण में बनी रह सकती है।

भारत में त्योहारों और शादियों का सीजन आने वाला है। आमतौर पर इससे सोने की कीमतें बढ़ती हैं। हालांकि,फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना को देखते हुए,ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमतें दबाव में रह सकती हैं। भारत में त्योहारों के दौरान सोने की कीमतों में थोड़ी तेजी आ सकती है,लेकिन उसके बाद कीमतें स्थिर रहने की संभावना है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स में हेड ऑफ रिसर्च,राजीव शरण का कहना है कि भारत में दशहरा मनाया जा रहा है और इस समय 24-कैरेट सोना लगभग 1.48 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले महीने यह अपने रिकॉर्ड हाई से 6% से ज्यादा नीचे आया है। इस त्योहारी सीजन में जो बदलाव आया है वह सोने के प्रति भारतीय परिवारों के लगाव में नहीं,बल्कि इसे खरीदने के तरीके में है। भारतीय अपने त्योहारी बजट को तो स्टेबल रख रहे हैं,भले ही इसके लिए उन्हें कम वजन वाले आभूषण खरीदने पड़ें।

साथ ही लोग सोने के सिक्कों,बार और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में अधिक निवेश कर रहे हैं। यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी खरीदारी अब केवल गहने खरीदने तक सीमित न रहकर, संपत्ति को सुरक्षित रखने के एक व्यवस्थित तरीके में बदल रही है। आगे चलकर, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें सोने की कीमतों में बहुत तेज उछाल नहीं आने देंगी,जिससे निकट भविष्य में सोने की कीमत में 5% तक की उतार-चढ़ाव वाली रेंज बनी रहने की संभावना है। इस दशहरे पर,खरीदार कीमतों में आई हालिया गिरावट को किसी चेतावनी के रूप में नहीं, बल्कि खरीदारी शुरू करने के एक अच्छे मौके के तौर पर देख रहे हैं।

 

 

Gold Price Today: सोने में गिरावट पर लगा ब्रेक, दशहरा पर 24 और 22 कैरेट दोनों का भाव चढ़ा

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold ETF FoF में अब नहीं डाल सकेंगे पैसे! आज से बदल गई ये चीजें

Gold Investment: कुछ म्यूचुअल फंड हाउसेज ने अस्थायी तौर पर गोल्ड ईटीएफ फंड ऑफ फंड्स (FoFs) में नए निवेश पर अस्थायी तौर पर रोक लगा दी है। यह रोक आज 16 अक्टूबर से ही लागू हो चुकी है। आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, एचडीएफसी म्यूचुअल फंड, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, इनवेस्को इंडिया म्यूचुअल फंड, डीएसपी म्यूचुअल फंड, टाटा म्यूचुअल फंड और श्रीराम म्यूचुअल फंड जैसे कई फंड हाउसों ने निवेशकों को नोटिस जारी कर के इसकी जानकारी भेज दी है। इस पाबंदी के बाद अब ये इन म्यूचुअल फंड्स के पास गोल्ड ईटीएफ FoF में नया एकमुश्त निवेश नहीं कर सकेंगे, नई एसआईपी नहीं शुरू कर सकेंगे और न ही मौजूदा एसआईपी में टॉप अप कर सकेंगे। कुछ में तो स्विच-इन ट्रांजैक्शन और नए सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान (STP) रजिस्ट्रेशन पर भी रोक लगाई गई है।

क्या है इन नोटिसों में

श्रीराम म्यूचुअल फंड ने नोटिस में कहा कि यह रोक सेबी के के निर्देशों के तहत लगाई गई हैं, जिसे AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के जरिए सूचित किया गया है। हालांकि कोई वजह नहीं बताई गई है। फंड हाउस का कहना है कि 16 अक्टूबर से नए एकमुश्त निवेश, नए एसआईपी रजिस्ट्रेशन और मौजूदा एसआईपी में निवेश की राशि बढ़ाने यानी स्टेप-अप की मंजूरी नहीं होगी।

डीएसपी म्यूचुअल फंड ने 15 अक्टूबर के अपने नोटिस में कहा है कि 15 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे के कट-ऑफ समय के बाद के सभी एप्लीकेशन खारिज हो सकते हैं और पैसा निवेशकों को वापस कर दिया जाएगा।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, यूटीआई म्यूचुअल फंड और एचडीएफसी म्यूचुअल फंड समेत कई बड़े भारतीय म्यूचुअल फंडों ने गोल्ड ईडीएफ में बल्क सब्सक्रिप्शन यानी एक साथ भारी निवेश रोकने के लिए नोटिस जारी किए हैं।

दशहरा-दिवाली से ठीक पहले रोक

गोल्ड ईटीएफ एफओएफ में निवेश पर रोक दशहरा और दिवाली से ठीक पहले लगाई गई हैं, जब आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है। गोल्ड ईटीएफ एफओएफ म्यूचुअल फंड की वह स्कीम है, जिसका पैसा गोल्ड ईटीएफ में लगाया जाता है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल त्योहारी सीजन के दौरान गोल्ड और सिल्वर ETF में निवेश बढ़ा था, क्योंकि स्टॉक मार्केट से कमजोर रिटर्न मिलने के कारण सोने-चांदी का क्रेज बढ़ गया। वहीं इस साल मांग थोड़ी सुस्त पड़ी और भारत में सोने का आयात अगस्त के $230 करोड़ से घटकर सितंबर में $180 करोड़ रह गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI ETF: आज से खुला SBI का नया डिफेंस ETF, जानिए NFO, निवेश राशि और जोखिम की पूरी डिटेल

SBI BSE India Defence ETF: डिफेंस सेक्टर में निवेश की बढ़ती दिलचस्पी के बीच एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अपने नए इंडेक्स-ट्रैकिंग फंड ‘SBI BSE India Defence ETF’ के लॉन्च की घोषणा की है। इस NFO में निवेश की शुरुआत आज, 13 अक्टूबर 2026 से हो चुकी है और निवेशक 19 अक्टूबर 2026 तक इसमें सब्स्क्रिप्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यह एक ओपन-एंडेड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) है, जो मुख्य रूप से BSE India Defence Index को ट्रैक करेगा और ट्रैकिंग एरर के अधीन रहते हुए इंडेक्स के समान टोटल रिटर्न देने का लक्ष्य रखेगा।

कैसा होगा एसेट एलोकेशन?

एसबीआई म्यूचुअल फंड द्वारा जारी स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट के मुताबिक, फंड का एसेट एलोकेशन इस प्रकार रहेगा:

95% से 100% हिस्सा: बीएसई इंडिया डिफेंस इंडेक्स में शामिल रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के सिक्योरिटीज/शेयरों में निवेश किया जाएगा।

0% से 5% हिस्सा: सरकारी प्रतिभूतियों, स्टेट डेवलपमेंट लोन्स, ट्रेजरी बिल्स, ट्राई-पार्टी रेपो और लिक्विड म्यूचुअल फंड यूनिट्स में लगाया जाएगा।

निवेश की शर्तें और फंड मैनेजर

यह एक पैसिवली मैनेज्ड फंड है। इसमें फंड मैनेजर एक्टिवली स्टॉक सिलेक्शन करने के बजाय सीधे इंडेक्स की कंपनियों में आनुपातिक निवेश करेगा। इस स्कीम के फंड मैनेजर वायरल छड़वा है। वे दिसंबर 2020 से एसबीआई म्यूचुअल फंड से जुड़े हुए हैं और कई पैसिव स्कीम्स की देखरेख करते हैं।

एक ही सेक्टर में केंद्रित होने के कारण इस फंड का रिस्क मीटर ‘वेरी हाई’ श्रेणी में रखा गया है। निवेशकों पर रक्षा क्षेत्र और संबंधित कंपनियों के शेयर उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ेगा।

NFO की मुख्य बातें

पैरामीटर विवरण
फंड का नाम SBI BSE India Defence ETF
स्कीम का प्रकारओपन-एंडेड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF)
अंडरलाइंग इंडेक्सBSE India Defence Index
एनएफओ की तारीख13 अक्टूबर 2026 से 19 अक्टूबर 2026
ऑफर प्राइस₹10.00 प्रति यूनिट
न्यूनतम निवेश₹5,000 (इसके बाद ₹1,000 के गुणक में)
फंड मैनेजरवायरल छड़वा
रिस्क रेटिंगवेरी हाई

निवेशकों के लिए क्या है खास?

अगर आप डिफेंस क्षेत्र की कंपनियों के प्रदर्शन का सीधा फायदा उठाना चाहते हैं और किसी एक शेयर में जोखिम लेने के बजाय पूरे इंडेक्स में डायवर्सिफाइड निवेश की तलाश में हैं, तो यह ETF एक विकल्प हो सकता है। वैसे चूंकि यह एक थीमैटिक/सेक्टोरल फंड है, इसलिए इसमें सामान्य डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स की तुलना में जोखिम अधिक रहता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

लाल मार्केट में इक्विटी म्यूचु्अल फंडों पर निवेशकों का दांव, SIP में आया रिकॉर्ड निवेश, Gold ETF की बढ़ी चमक

Mutual Fund Data: शेयर मार्केट में मचे तूफान के बीच पिछले महीने सितंबर में इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा। हालांकि डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी से ओवरऑल म्यूचुअल फंड में निवेश निगेटिव रहा। म्यूचुअल फंड बॉडी AMFI (एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया) के लेटेस्ट आंकड़ों से यह बात सामने आई है। पिछले महीने सितंबर में इक्विटी फंड्स में निवेश करीब ₹9000 करोड़ बढ़ गया तो डेट फंड्स से निकासी मासिक आधार पर तीन गुना से अधिक बढ़ गई। वहीं सितंबर में SIP में कॉन्ट्रिब्यूशन रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया लेकिन खातों की संख्या में कमी आई।

Equity Funds में सबसे अधिक क्रेज दिखा SmallCap Funds का

अगस्त महीने में इक्विटी फंडों में निवेश लगभग 19% बढ़ा था और फिर सितंबर महीने में नेट इनफ्लो में और बढ़ोतरी हुई। मासिक आधार पर ₹8,977.93 करोड़ की बढ़ोतरी मासिक निवेश में बड़ी तेजी है। AMFI के आंकड़ों के हिसाब से पिछले महीने इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹38,306.55 करोड़ का निवेश आया जोकि अगस्त महीने में ₹29,328.62 करोड़ के निवेश की तुलना में करीब 31% अधिक रहा।

कैटेगरीवाइज बात करें तो सबसे अधिक ₹9,038.57 करोड़ का निवेश स्मॉल-कैप फंडों में आया। इसके बाद मिड-कैप फंडों में ₹7,834.84 करोड़ का निवेश हुआ। इन दोनों में कुल ₹16,873.41 करोड़ का निवेश आया, जो सभी इक्विटी फंडों में हुए कुल निवेश का लगभग 44% है।

सितंबर महीने में फ्लेक्सी-कैप फंडों में भी निवेश बढ़कर ₹6,701.80 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹5,059.42 करोड़ था।

लॉर्ज-कैप फंड के भी निवेशक सितंबर में लौटे और लगातार दो महीने तक शुद्ध निकासी के बाद सितंबर में निकासी से अधिक निवेश किया। लॉर्ज कैप फंडों में पिछले महीने ₹859.47 करोड़ का शुद्ध निवेश आया।

इक्विटी इनफ्लो में उछाल के बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड्स का AUM सितंबर में घटकर ₹37.54 लाख करोड़ रह गई। अगस्त में यह ₹39.21 लाख करोड़ थी यानी इसमें लगभग 4.3% की गिरावट आई।

डेट फंडों से ताबड़तोड़ निकासी

सितंबर में डेट म्यूचुअल फंडों में सबसे बड़ा बदलाव दिखा। इन फंडों से शुद्ध निकासी बढ़कर ₹1.83 लाख करोड़ हो गई, जबकि अगस्त में यह ₹8,127 करोड़ थी।

सबसे अधिक निकासी लिक्विड फंडों से हुई। सितंबर में इनसे ₹95,743.20 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹19,934.29 करोड़ का निवेश आया था। सितंबर में मनी मार्केट फंडों से भी ₹50,846.21 करोड़ की निकासी हुई, जबकि अगस्त में इन फंडों में ₹11,734.71 करोड़ का निवेश आया था। इन दोनों फंडों से कुल मिलाकर से लगभग ₹1.47 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी हुई और इन्होंने डेट फंडों पर ओवरऑल दबाव डाला।

डेट फंड्स का एयूएम मासिक आधार पर अगस्त में ₹19.33 लाख करोड़ से 8.8% फिसलकर सितंबर में ₹17.64 लाख करोड़ पर आ गया।

हाइब्रिड फंड्स हुआ निगेटिव, ईटीएफ इनफ्लो में उछाल

पिछले महीने सितंबर में हाइब्रिड म्यूचुअल फंडों में भी काफी बदलाव देखने को मिला। पिछले महीने इससे ₹456.68 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई, जबकि अगस्त में इसमें ₹10,045.34 करोड़ का शुद्ध निवेश आया था। इसकी बड़ी वजह ऑर्बिट्रेज फंड्स रहे, जिनसे सितंबर महीने में ₹3,956.38 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में इनमें ₹3,789.02 करोड़ का निवेश आया था।

पिछले महीने बैलेंस्ड-एडवांटेज फंडों से भी ₹912.43 करोड़ की निकासी हुई। वहीं मल्टी-एसेट एलोकेशन फंडों में निवेश का सिलसिला जारी रहा और इनमें ₹3,666.98 करोड़ आए।

पिछले महीने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में ₹15,501.40 करोड़ का निवेश आया, जो अगस्त के ₹10,160.87 करोड़ से लगभग 53% अधिक है।

सितंबर महीने में गोल्ड ईटीएफ में निवेश लगभग 71% बढ़कर ₹4,450.61 करोड़ हो गया, जबकि अगस्त में यह ₹2,596.70 करोड़ था तो सिल्वर ETF में भी इस दौरान निवेश भी ₹9,959.96 करोड़ से बढ़कर ₹1,974.32 करोड़ हो गया।

इंडेक्स फंडों की बात करें तो अगस्त महीने में इसमें ₹787.49 करोड़ का निवेश आया था, जबति पिछले महीने इससे ₹3,614.03 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई थी।

विदेशी बाजारों में निवेश करने वाले ओवरसीज फंडों से निकासी जारी रही। सितंबर में इनसे ₹159.18 करोड़ निकाले गए, जबकि अगस्त में निकासी ₹72.19 करोड़ थी।

सितंबर महीने में लाइफ साइकिल फंडों में ₹143.75 करोड़ और सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीमों में ₹373.90 करोड़ का निवेश आया।

SIP में निवेश पहुंचा रिकॉर्ड हाई पर

सितंबर में मासिक SIP कॉन्ट्रिब्यूशन बढ़कर ₹32,490 करोड़ के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया। अगस्त में यह ₹32,297 करोड़ था। इस बढ़ोतरी के साथ सितंबर 2026 में एसआईपी का एयूएम ₹17.86 लाख करोड़ हो गया। हालांकि एक खास बात ये है कि सितंबर में लगभग 63 लाख नए एसआईपी रजिस्टर हुए, जबकि 73 लाख एसआईपी या तो मेच्योर हो गए या उन्हें बंद कर दिया गया। सितंबर की शुरुआत से लेकर आखिरी तक एसआईपी अकाउंट्स की संख्या 10.75 करोड़ से 10.06 करोड़ पर आ गई।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Price: MCX पर सोने-चांदी में बढ़त, क्या आज की तेजी हालिया गिरावट को करेगी खत्म, एक्सपर्ट्स से जानें अब क्या करें निवेश

Gold Silver Price: घरेलू वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई तेजी, US ट्रेजरी यील्ड में कमी और कमजोर डॉलर से कीमतों को सपोर्ट मिला है । हालांकि, महंगाई की चिंताएं और US फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर नजरिया निवेशकों के लिए अहम बातें बनी हुई हैं।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1,690 या 1.13% बढ़कर ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम हो गया। दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स ₹3,626 या 1.64% बढ़कर ₹2.24 लाख प्रति किलोग्राम हो गया।

PTI के अनुसार, इंटरनेशनल बाजारों में गोल्ड फ्यूचर्स 1.43% बढ़कर $4,191.51 प्रति औंस हो गया, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स 2.16% बढ़कर $60.44 प्रति औंस हो गया।

कीमतों में तेजी क्यों?

शुक्रवार को US ट्रेजरी यील्ड में कमी और डॉलर में गिरावट से कीमती धातुओं को सहारा मिला। सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता है, इसलिए जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो यह कम आकर्षक होता है और जब यील्ड कम होती है तो यह अधिक आकर्षक हो जाता है।

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज और करेंसी की रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि US में 30 साल के ट्रेजरी बॉन्ड की नीलामी से लॉन्ग-टर्म यील्ड ऊंचे स्तरों से नीचे आ गई, जिससे सोने की कीमतों को राहत मिली।

उन्होंने ईरान पर संभावित हमले को टालने और बातचीत को प्रोडक्टिव बताने के बारे में US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद तेल की कीमतों में नरमी का भी जिक्र किया। तेल की कीमतें बुलियन मार्केट के लिए मायने रखती हैं क्योंकि एनर्जी की लागत महंगाई की उम्मीदों और ब्याज दरों के फैसलों पर असर डाल सकती है।

निवेश की मांग से भी अतिरिक्त सहारा मिला है। नार्वेकर ने कहा कि इस हफ्ते ग्लोबल गोल्ड ETF होल्डिंग्स में 0.3% की बढ़ोतरी हुई, जिससे उनकी बढ़त लगातार 12वें हफ्ते भी जारी रह सकती है। सेंट्रल बैंक की खरीदारी से भी सहारा मिला है।

क्या सोना अपनी रिकवरी बनाए पाएगा?

सोना $4,100 प्रति औंस के स्तर से सुधरा है, जिसे नार्वेकर ने एक अहम सपोर्ट लेवल बताया था। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि अगर महंगाई की चिंताएं बनी रहती हैं, तो यह तेजी कम समय के लिए हो सकती है। उन्होंने $4,220 प्रति औंस (जो घरेलू स्तर पर लगभग ₹1,52,000 के बराबर है) के आसपास तुरंत रेजिस्टेंस और $4,300 प्रति औंस (या लगभग ₹1,55,400) के पास मज़बूत रेजिस्टेंस की पहचान की।

VT मार्केट्स के सीनियर मार्केट एनालिस्ट (APAC) जस्टिन खू ने कहा कि सितंबर की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग के मिनट्स से पता चला है कि 18 में से 16 अधिकारियों को उम्मीद थी कि 2026 में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होगी, ताकि महंगाई को फेडरल रिज़र्व के 2% के लक्ष्य से लगातार ऊपर जाने से रोका जा सके।

हालांकि, खू ने कहा कि उम्मीद से कम पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) महंगाई और कमज़ोर रोज़गार डेटा ने अक्टूबर में तुरंत ब्याज दरें बढ़ने की संभावना को कम कर दिया है। 14 अक्टूबर को आने वाली सितंबर की US कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) रिपोर्ट से महंगाई और फेड के अगले कदम के बारे में और संकेत मिलेंगे।

ब्याज दरें बढ़ने से सोने पर दबाव पड़ सकता है क्योंकि इससे बिना रिटर्न देने वाली एसेट को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसलिए, निवेशक महंगाई के डेटा और बॉन्ड यील्ड पर नज़र रखेंगे ताकि यह पता चल सके कि शुक्रवार की रिकवरी जारी रह सकती है या नहीं।

चांदी में निवेश के लिए किन बातों का रखें ध्यान

शुक्रवार को चांदी की कीमतों में भी तेज़ी आई, लेकिन इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा हो सकता है क्योंकि यह मेटल निवेश की मांग और औद्योगिक इस्तेमाल, दोनों से प्रभावित होता है।

Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने ₹2.19 लाख–₹2.20 लाख प्रति किलोग्राम को एक अहम सपोर्ट ज़ोन और ₹2.24 लाख को चांदी के रिकवर करने के लिए पहला ज़रूरी लेवल बताया। शुक्रवार की तेज़ी ने कॉन्ट्रैक्ट को उस लेवल से ऊपर पहुंचा दिया।

गुरुवार (8 अक्टूबर) को कीमतों में इंट्राडे के दौरान जो तेज़ी से उतार-चढ़ाव देखे गए, वे भी अस्थिरता के जोखिम को दिखाते हैं। रिकवरी के दौरान चांदी में तेज़ी से उछाल आ सकता है, लेकिन निवेशकों को उतनी ही तेज़ी से गिरावट की संभावना को भी ध्यान में रखना चाहिए।

रुपये का घरेलू कीमतों पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत में सोने और चांदी की कीमतें न केवल अंतरराष्ट्रीय दरों पर, बल्कि रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट पर भी निर्भर करती हैं। रुपया कमज़ोर होने से डॉलर में कीमत वाली चीज़ों को आयात करने की लागत बढ़ जाती है और इससे घरेलू कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि रुपये की कमजोरी से इम्पोर्ट की गई चीज़ों की घरेलू लागत बढ़ रही है। 9 अक्टूबर के उनके मार्केट अपडेट में यह भी बताया गया कि डॉलर की मजबूती में कमी कीमती धातुओं के लिए मददगार साबित हो रही है, जबकि तेल बाज़ार में अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

अब निवेशकों को क्या करना चाहिए?

सिर्फ़ शुक्रवार की बढ़त से यह साबित नहीं होता कि बुलियन (सोने-चांदी) में हालिया कमजोरी खत्म हो गई है। सोने के लिए, अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर बने रहना और नार्वेकर द्वारा बताए गए रेजिस्टेंस लेवल को पार करना ज़रूरी होगा। चांदी में निवेश करने वालों को इसके सपोर्ट ज़ोन और कीमतों में होने वाले बड़े उतार-चढ़ाव पर खास ध्यान देना चाहिए।

जो लोग योजना बनाकर फिजिकल सोना खरीद रहे हैं, वे एक ही ट्रेडिंग सेशन के आधार पर फैसला लेने के बजाय समय के साथ-साथ खरीदारी करने पर विचार कर सकते हैं। जो निवेशक गोल्ड और सिल्वर ETF का इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें अपने पोर्टफोलियो एलोकेशन, निवेश की अवधि और उतार-चढ़ाव सहने की क्षमता का आकलन करना चाहिए।

Silver Price Today: ₹2700 और महंगी हुई चांदी, खरीदारी से पहले जानें आपके अपने शहर का ताजा भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Correction: सोने की कीमत इस साल 26% गिरी, अब खरीदारी का मौका? Tata MF ने बताई पूरी रणनीति

Gold Price Correction: भारत में त्योहारी और शादी का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में सोने की कीमतों पर निवेशकों की नजर है। 2026 के शिखर से सोने के भाव में करीब 26% की गिरावट आ चुकी है। Tata Asset Management का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट खरीदारी का बेहतर मौका दे सकती है।

हालांकि, Tata MF ने जल्दबाजी में निवेश करने से बचने को कहा है। फंड हाउस का मानना है कि सोने में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए छोटी अवधि की तेजी या गिरावट देखकर फैसला लेना ठीक नहीं होगा।

2026 के शिखर से करीब 26% नीचे आया सोना

Tata MF के अक्टूबर 2026 के मार्केट आउटलुक के मुताबिक, सोना जनवरी के करीब 5,595 डॉलर प्रति औंस के शिखर से गिरकर लगभग 4,138 डॉलर पर आ गया है। यानी इसमें करीब 26% की गिरावट आई है।

फंड हाउस के मुताबिक, इस गिरावट की बड़ी वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और मजबूत अमेरिकी डॉलर है। Tata MF का कहना है कि सोने की बुनियादी कहानी में कोई बड़ी कमजोरी नहीं आई है।

सेंट्रल बैंकों की खरीद बनी बड़ी ताकत

लंबी अवधि में सोने के पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर सेंट्रल बैंकों की खरीद है। Tata MF के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में सेंट्रल बैंकों ने 289 टन सोना खरीदा।

पूरे 2026 में यह खरीद 700 से 900 टन के बीच रह सकती है। 2022 से पहले इसका सालाना औसत करीब 400-500 टन था। यानी सेंट्रल बैंकों की सोने में दिलचस्पी पहले के मुकाबले काफी बढ़ी है।

Tata MF के मुताबिक, खासकर उभरते बाजारों के सेंट्रल बैंक अपने रिजर्व में अमेरिकी डॉलर वाली संपत्तियों की हिस्सेदारी घटा रहे हैं। इसके लिए वे सोने को एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।

चीन से भी सोने को मिल रहा सहारा

चीन भी सोने की मांग का बड़ा जरिया बना हुआ है। Tata MF के मुताबिक, 2026 में चीन का गोल्ड इंपोर्ट 1,000 टन के पार पहुंच चुका है। यह 2025 में पूरे साल हुए आयात से भी ज्यादा है।

रिटेल मांग, गोल्ड ETF में निवेश और सेंट्रल बैंक की खरीद से चीन के फिजिकल गोल्ड मार्केट को सहारा मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और अमेरिका-चीन की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी सोने की मांग बढ़ा सकती है।

US का बढ़ता कर्ज भी सोने के पक्ष में

Tata MF ने बढ़ते अमेरिकी कर्ज और फिस्कल डेफिसिट को भी सोने के लिए लंबी अवधि का पॉजिटिव फैक्टर बताया है। US सरकार का कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है।

वहीं, फिस्कल डेफिसिट GDP के करीब 6-7% पर है। फंड हाउस के मुताबिक, कर्ज की स्थिरता और डॉलर की खरीद क्षमता को लेकर चिंता बढ़ती है तो सोना निवेशकों के लिए वैल्यू स्टोर के तौर पर और आकर्षक हो सकता है।

एक साथ पैसा लगाने के बजाय धीरे-धीरे खरीदारी

लंबी अवधि में सोने पर Tata MF का रुख सकारात्मक है। लेकिन हाल की तेजी और गिरावट को देखते हुए फंड हाउस ने सावधानी बरतने को कहा है। सोने में आगे भी तेज कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।

इसलिए Tata MF एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश को बेहतर मानता है। यानी बाजार का निचला स्तर पकड़ने की कोशिश करने के बजाय अलग-अलग समय पर थोड़ा-थोड़ा निवेश किया जाए।

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Gold outlook: सोने-चांदी की कीमतों में तेजी क्या फेस्टिव सीजन में बढ़ाएगी मांग या सुस्त रहेगा बाजार, जानें एक्सपर्ट की राय

Gold outlook:  घरेलू मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में गुरुवार 1 अक्टूबर को तेजी देखने को मिली। अमेरिकी ब्याज दरों पर बाजार के नजरिए और भारत में आने वाले त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन को देखते हुए इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में इजाफा हुआ। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर के सोने के वायदा सौदे 0.51% बढ़कर ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे, जबकि दिसंबर के चांदी के वायदा सौदे 0.40% बढ़कर ₹2.24 लाख प्रति किलोग्राम पर थे।

हाल के दिनों में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (yields) में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और महंगाई की चिंताओं से मिलने वाला सहारा बेअसर हो गया है।

वेंचुरा में कमोडिटी प्रमुख एनएस रामास्वामी ने कहा कि सोना अभी इन विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है, जिसमें ऊंची यील्ड से बिना रिटर्न (non-yielding) वाली संपत्ति को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर फैसला और आने वाले अमेरिकी पेरोल डेटा सोने की निकट भविष्य की चाल के लिए महत्वपूर्ण हैं। रामास्वामी के अनुसार, सोने ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से मिलने वाला प्रीमियम कुछ हद तक खो दिया है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीद और गोल्ड ETF में निवेश के प्रवाह से इसे संरचनात्मक समर्थन मिल रहा है।

कीमतों में हालिया गिरावट (correction) ने फिजिकल डिमांड (असली सोने की मांग) पर भी ध्यान खींचा है, क्योंकि भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह का मुख्य सीजन शुरू हो रहा है।

त्योहारी सीजन में 15-20% बढ़ सकती है खरीदारी

कामा ज्वैलरी के एमडी कॉलिन शाह ने कहा कि धनतेरस और दिवाली के दौरान त्योहारों की मांग ऐतिहासिक रूप से काफी मजबूत रही है क्योंकि सोना खरीदने से सांस्कृतिक महत्व जुड़ा होता है। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ता सोने की खरीद की मात्रा में बदलाव कर सकते हैं।

शाह के अनुसार, उपभोक्ता हल्की और आधुनिक डिजाइन वाली ज्वैलरी की ओर बढ़ रहे हैं जो उनके तय घरेलू बजट में फिट बैठती है। उन्होंने पुराने सोने के बदले नया सोना लेने (exchange) के बढ़ते चलन पर भी जोर दिया, जिससे खरीदार अपनी मौजूदा ज्वैलरी को रीसाइकिल करके नई ज्वैलरी ले सकते हैं।

शादी-ब्याह से जुड़ी खरीदारी से भी मांग को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। शाह ने औसत खरीद मूल्य (ticket size) ₹1.5 लाख से ₹3 लाख के बीच बताया और उम्मीद जताई कि त्योहारों के मुख्य सीजन के दौरान इसमें 15-20% की बढ़ोतरी हो सकती है, जैसा कि पिछले साल हुआ था।

चांदी पर क्या बनाए रणनीति

इस बीच, हालिया गिरावट के बाद चांदी की कीमतों में भी सुधार हुआ है। रिद्धि-सिद्धि बुलियन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि डॉलर के मजबूत होने और ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से सोने और चांदी पर दबाव पड़ा है।

चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव बना हुआ है, क्योंकि इसकी कीमत पर निवेश की मांग और औद्योगिक इस्तेमाल, दोनों का असर पड़ता है।

भारतीय खरीदारों के लिए रुपये की चाल भी अहम रहेगी। लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि रुपया कमजोर होने से घरेलू कमोडिटी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, भले ही ग्लोबल कीमतें बदल रही हों।

आगे चलकर, कीमती धातुओं की कीमतें US में ब्याज दरों के आउटलुक, ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और जियोपॉलिटिकल हालात के प्रति संवेदनशील बनी रह सकती हैं, जबकि भारत में धनतेरस, दिवाली और शादी-ब्याह का सीजन फिजिकल डिमांड को सहारा दे सकता है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Gold Price Today : MCX पर सोने-चांदी में 1% से ज्यादा की तेजी, जानिए इनमें आज क्या हो कमाई की रणनीति

Silver Gold Price Today : एमसीएक्स पर सोने का अक्टूबर वायदा 1,904 रुपए यानी 1.30 फीसदी की बढ़त के साथ 148,021 रुपए पर दिख रहा है। वहीं, सिल्वर का दिसंबर वायदा 2,544 रुपए यानी 1.11 फीसदी की बढ़त के साथ 226,190 रुपए पर दिख रहा है। केडिया एडवाइजरी का कहना है कि आज सोने की ट्रेडिंग रेंज 147470-151880 है। महंगाई उम्मीद से कम रहने के कारण सोने की कीमतों में बढ़त हुई है। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। US का हेडलाइन PCE प्राइस इंडेक्स महीने-दर-महीने 0.3% बढ़ा है, जबकि खाने-पीने की चीज़ों और एनर्जी को छोड़कर कोर PCE में 0.2% की बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को आने वाली सरकारी रोज़गार रिपोर्ट में पेरोल में 90,000 की बढ़ोतरी दिखने की उम्मीद है। जुलाई में हांगकांग के ज़रिए चीन का नेट गोल्ड इंपोर्ट जून के मुकाबले लगभग 11% और साल-दर-साल आधार पर 28% बढ़ा है।

केडिया एडवाइजरी की MCX गोल्ड दिसंबर फ्यूचर्स में 150000 रुपए के आसपास, 151000 रुपए के स्टॉप-लॉस के साथ, 148500-147500 रुपए के टारगेट को लिए खरीदारी की सलाह है।

ICICI डायरेक्ट की राय है कि मज़बूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड के दबाव में, स्पॉट गोल्ड के $4,200 के लेवल के पास रुकावट का सामना करने और $4,100 की ओर गिरने की उम्मीद है। एनर्जी की वजह से लगातार बनी हुई महंगाई और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना है। इसके अलावा,अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में बहुत कम प्रगति होने से तेल की कीमतें ऊंची बनी रहेंगी और बड़े सेंट्रल बैंकों को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

दूसरी ओर सेंट्रल बैंको की भारी खरीदारी और ETF में बेहतर निवेश से बुलियन की कीमतों को सहारा मिलेगा। इस बीच,शुक्रवार को आने वाली US जॉब रिपोर्ट पर सबकी नजरें होंगी,जिससे US लेबर मार्केट की मजबूती के बारे में और साफ जानकारी मिल सकती है।

MCX गोल्ड दिसंबर के लिए ₹152,000 के आस-पास रेजिस्टेंस दिख रहा है। इसके ₹148,000-₹147,000 के लेवल तक गिरने की उम्मीद है। MCX सिल्वर दिसंबर के ₹221,000 और ₹228,000 के लेवल के बीच बने रहने की उम्मीद है। अगर यह ₹221,000 से नीचे जाता है,तो इसमें ₹218,000 के लेवल तक गिरावट आ सकती है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price Today: MCX पर सोना ₹1.47 लाख के नीचे फिसला, चांदी ₹2.25 लाख पर पहुंची

Gold Silver Price Today: मंगलवार, 29 सितंबर को सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा। MCX पर अक्टूबर का गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट 0.21% गिरकर ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। सोने की कीमतें सात हफ़्ते के निचले स्तर के आस-पास ट्रेड कर रही हैं क्योंकि बाजार को उम्मीद है कि US फ़ेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखेगा।

वहीं चांदी में भी जबरदस्त बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। MCX पर सिल्वर फ़्यूचर्स लगभग ₹2,25,220 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे हैं, जो पिछले हफ़्ते के मुकाबले करीब 6.29% कम है।

क्या होनी चाहिए अब रणनीति

रिद्धि-सिद्धि बुलियन्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, बाज़ार में फ़ेड द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की संभावना बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि CME फ़ेडवॉच के अनुसार, अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 72.5% है, जो पिछले हफ़्ते 57.6% थी।

US ट्रेज़री यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से सोने पर दबाव है, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई की चिंताएं बढ़ रही हैं। कोठारी ने कहा कि US-ईरान के बीच जारी तनाव और तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई और यील्ड को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने में थोड़ी रिकवरी हो रही है, लेकिन यह सात हफ़्ते के निचले स्तर के आस-पास ही बना हुआ है क्योंकि US में ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की उम्मीदों के कारण यील्ड ऊंची बनी हुई है।

गर्ग के अनुसार, स्पॉट गोल्ड की कीमत लगभग $4,130 प्रति औंस थी, जबकि डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट लगभग ₹96 प्रति US डॉलर था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और US यील्ड सोने और अन्य MCX कमोडिटीज़ के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं।

गर्ग ने कहा कि आने वाले US आर्थिक डेटा – जिसमें कंज्यूमर कॉन्फिडेंस, जॉब ओपनिंग्स, ADP एम्प्लॉयमेंट डेटा, PCE महंगाई और नॉन-फार्म पेरोल्स शामिल हैं – से फ़ेड की ब्याज दर की चाल और सोने में अगले कदम के बारे में और संकेत मिल सकते हैं।

चॉइस ब्रोकिंग की कमोडिटी फंडामेंटल एनालिस्ट पिंकी यादव के अनुसार, सितंबर में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट (करेक्शन) आई है और MCX पर सोना ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गया है। यादव ने इस गिरावट के लिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, US की सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की उम्मीदों, डॉलर के मजबूत होने, US ट्रेज़री यील्ड में बढ़ोतरी और भारतीय रुपये में कमजोरी को जिम्मेदार बताया। साथ ही, उन्होंने कहा कि सोने को सपोर्ट करने वाले लंबे समय के कारण अभी भी बने हुए हैं, जिनमें सेंट्रल बैंक की खरीदारी, ग्लोबल डिमांड और गोल्ड ETF के ज़रिए इन्वेस्टमेंट शामिल है।

कम समय के लिए, चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट (टेक्निकल रिसर्च) आमिर मकदा ने कहा कि सोने के लिए मुख्य MCX सपोर्ट लेवल ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम और ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम हैं, जबकि रेजिस्टेंस लेवल ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम है।

Silver Price Today: दूसरे दिन चांदी और भी हुई सस्ती, खरीदारी से पहले जानें आज 10 प्रमुख शहरों के ताजा रेट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Investment Mantra : मनीफ्रंट के मोहित गांग से जानें ग्लोबल इंन्वेस्टिंग क्यों है जरुरी, क्या हैं इसके तरीके

Investment Mantra : पिछले कुछ समय से भारतीय बाजार ने ग्लोबल मार्केट को अंडरपरफॉर्म किया है। यही वजह है कि इन दिनों ग्लोबल इंवेस्टिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है। अब सवाल है कि ग्लोबल इन्वेस्टिंग करना कैसे है। इसके क्या-क्या विकल्प मौजूद हैं। किन फंड्स के जरिए हम ग्लोबल मार्केट का एक्सपोजर ले सकते हैं। ग्लोबल इंवेस्टिंग के मौके और चुनौतियों पर खास चर्चा के लिए हमारे साथ हैं Moneyfront के को-फाउंडर & CEO मोहित गांग।

मोहित गांग की राय

पिछले 2 साल भारतीय बाजार का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है। 2 साल से US, यूरोप,एशियाई बाजारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। रुपए में गिरावट का भी असर इन्वेंस्ट पर पड़ रहा है। करेंसी हेजिंग मुश्किल होगी। रुपए में गिरावट से ग्लोबल इंवेस्टिंग में ज्यादा रिटर्न मिलता है। रुपया मजबूत होने पर विदेशी निवेश पर कम रिटर्न मिलता है। ऐसे में हमें 10-15 या फिर 25-30 फीसदी ग्लोबल एक्सपोजर रखना चाहिए

ग्लोबल इन्वेस्टिंग क्यों जरूरी और कैसे करें?

भारत का ग्लोबल मार्केट कैप में हिस्सा 3–4% है। सिर्फ घरेलू मार्केट में निवेश करने पर ज्यादा निर्भरता का रिस्क बढ़ता है। भारत में बिग टेक, AI और सेमीकंडक्टर में कम विकल्प हैं। इससे ग्लोबल लीडर कंपनियों की ग्रोथ स्टोरी में निवेश का मौका मिलता है। ग्लोबल इन्वेस्टिंग से इन सेक्टरों में तेजी का फायदा मिल सकता है। लंबी अवधि में रुपया हर साल 2–4% कमजोर होता है। ग्लोबल इन्वेस्टिंग से FX रिटर्न का फायदा मिलता है। इससे साइकिल डायवर्सिफिकेशन का भी फायदा मिलता है। US, चीन और यूरोप के बाजार भारत से अलग हैं। इससे पोर्टफोलियो में गिरावट कम होती है।

भारत में ग्लोबल इन्वेस्टिंग के विकल्प

हम इंटरनेशनल म्यूचुअल फंड्स और फीडर फंड्स के जरिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग कर सकते हैं। US फंड्स (Nasdaq, S&P 500) में भी निवेश किया जा सकता है। इंटरनेशनल ETFs में निवेश किया जा सकता है। इंडियन एक्सचेंज के जरिए Nasdaq 100 ETF और S&P 500 ETF में निवेश किया जा सकता है। IBKR, Vested, Viewtrade, Stockal जैसे ब्रोकर्स के जरिए डायरेक्ट ग्लोबल इन्वेस्टिंग भी हो सकती है। LRS के तहत $250,000/साल लिमिट तय है। मल्टी-एसेट फंड्स के जरिए भी ग्लोबल इन्वेस्टिंग हो सकती है। कुछ फंड्स में इंटरनेशनल इक्विटी का भी एक्सपोजर होता है। गिफ्ट सिटी के जरिए भी निवेश कर सकते हैं। AIFs और ऑफशोर फंड्स India में रजिस्टर्ड होते हैं। दिक्कत सिर्फ यह है कि RBI की लिमिट्स के चलते निवेश का फ्लो काफी सीमित है।

ग्लोबल इन्वेस्टिंग के फायदे

इससे बेहतर टैक्स एफिशिएंसी मिलती है। इंडियन कैपिटल गेन नहीं लगता। डॉलर में निवेश की सुविधा मिलती है। इससे ग्लोबल स्ट्रैटेजीज तक पहुंच मिलती है। गिफ्ट सिटी से नए फंड लॉन्च हो रहे हैं। HNIs/UHNIs क्लाइंट्स के लिए ग्लोबल इन्वेस्टिंग का गेटवे बन सकता है

निष्कर्ष

ग्लोबल इन्वेस्टिंग अब सिर्फ़ डाइवर्सिफ़िकेशन (अलग-अलग जगहों पर निवेश) नहीं, बल्कि जरूरत बन गई है। ओवरसीज़ मार्केट में अलग-अलग थीम्स में निवेश करने के लिए ‘गिफ़्ट सिटी’ का रास्ता सबसे अच्छा और टैक्स के लिहाज से फायदेमंद है। ब्रोकिंग ऐप्स के ज़रिए सीधे निवेश करने में कई दिक्कतें आ सकती हैं, जैसे कि US में एस्टेट टैक्स और डिविडेंड पर विदहोल्डिंग टैक्स। इसलिए निवेशकों को इस रास्ते को चुनने में ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।

भले ही रिडेम्पशन (निवेश भुनाने) पर आपको 0% टैक्स देना पड़े, फिर भी आपको इन ट्रांजैक्शन्स की जानकारी अपने भारतीय इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में देनी होगी। क्योंकि यह निवेश RBI की ‘लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम’ (LRS) के तहत विदेशी मुद्रा (USD) में किया जाता है, इसलिए कानूनी तौर पर आपको ‘शेड्यूल FA’ (विदेशी संपत्ति) के तहत इन यूनिट्स की जानकारी देनी होगी और रिडेम्पशन को ‘एग्ज़म्प्ट इनकम’ (टैक्स-मुक्त आय) के तौर पर दिखाना होगा।

 

 

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