Gold outlook: सोने-चांदी की कीमतों में तेजी क्या फेस्टिव सीजन में बढ़ाएगी मांग या सुस्त रहेगा बाजार, जानें एक्सपर्ट की राय

Gold outlook:  घरेलू मार्केट में सोने-चांदी की कीमतों में गुरुवार 1 अक्टूबर को तेजी देखने को मिली। अमेरिकी ब्याज दरों पर बाजार के नजरिए और भारत में आने वाले त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन को देखते हुए इन दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में इजाफा हुआ। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, दिसंबर के सोने के वायदा सौदे 0.51% बढ़कर ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहे थे, जबकि दिसंबर के चांदी के वायदा सौदे 0.40% बढ़कर ₹2.24 लाख प्रति किलोग्राम पर थे।

हाल के दिनों में सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (yields) में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने से जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और महंगाई की चिंताओं से मिलने वाला सहारा बेअसर हो गया है।

वेंचुरा में कमोडिटी प्रमुख एनएस रामास्वामी ने कहा कि सोना अभी इन विपरीत ताकतों के बीच फंसा हुआ है, जिसमें ऊंची यील्ड से बिना रिटर्न (non-yielding) वाली संपत्ति को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों पर फैसला और आने वाले अमेरिकी पेरोल डेटा सोने की निकट भविष्य की चाल के लिए महत्वपूर्ण हैं। रामास्वामी के अनुसार, सोने ने ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से मिलने वाला प्रीमियम कुछ हद तक खो दिया है, लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीद और गोल्ड ETF में निवेश के प्रवाह से इसे संरचनात्मक समर्थन मिल रहा है।

कीमतों में हालिया गिरावट (correction) ने फिजिकल डिमांड (असली सोने की मांग) पर भी ध्यान खींचा है, क्योंकि भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह का मुख्य सीजन शुरू हो रहा है।

त्योहारी सीजन में 15-20% बढ़ सकती है खरीदारी

कामा ज्वैलरी के एमडी कॉलिन शाह ने कहा कि धनतेरस और दिवाली के दौरान त्योहारों की मांग ऐतिहासिक रूप से काफी मजबूत रही है क्योंकि सोना खरीदने से सांस्कृतिक महत्व जुड़ा होता है। हालांकि, ऊंची कीमतों के कारण उपभोक्ता सोने की खरीद की मात्रा में बदलाव कर सकते हैं।

शाह के अनुसार, उपभोक्ता हल्की और आधुनिक डिजाइन वाली ज्वैलरी की ओर बढ़ रहे हैं जो उनके तय घरेलू बजट में फिट बैठती है। उन्होंने पुराने सोने के बदले नया सोना लेने (exchange) के बढ़ते चलन पर भी जोर दिया, जिससे खरीदार अपनी मौजूदा ज्वैलरी को रीसाइकिल करके नई ज्वैलरी ले सकते हैं।

शादी-ब्याह से जुड़ी खरीदारी से भी मांग को सपोर्ट मिलने की उम्मीद है। शाह ने औसत खरीद मूल्य (ticket size) ₹1.5 लाख से ₹3 लाख के बीच बताया और उम्मीद जताई कि त्योहारों के मुख्य सीजन के दौरान इसमें 15-20% की बढ़ोतरी हो सकती है, जैसा कि पिछले साल हुआ था।

चांदी पर क्या बनाए रणनीति

इस बीच, हालिया गिरावट के बाद चांदी की कीमतों में भी सुधार हुआ है। रिद्धि-सिद्धि बुलियन लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी ने कहा कि डॉलर के मजबूत होने और ट्रेजरी यील्ड बढ़ने से सोने और चांदी पर दबाव पड़ा है।

चांदी की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव बना हुआ है, क्योंकि इसकी कीमत पर निवेश की मांग और औद्योगिक इस्तेमाल, दोनों का असर पड़ता है।

भारतीय खरीदारों के लिए रुपये की चाल भी अहम रहेगी। लेमन (Lemonn) के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि रुपया कमजोर होने से घरेलू कमोडिटी की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, भले ही ग्लोबल कीमतें बदल रही हों।

आगे चलकर, कीमती धातुओं की कीमतें US में ब्याज दरों के आउटलुक, ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और जियोपॉलिटिकल हालात के प्रति संवेदनशील बनी रह सकती हैं, जबकि भारत में धनतेरस, दिवाली और शादी-ब्याह का सीजन फिजिकल डिमांड को सहारा दे सकता है।

Silver Price Today: अक्टूबर के पहले दिन चांदी हुई महंगी, खरीदारी से पहले जानें आज 10 प्रमुख शहरों के ताजा रेट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

iPhone Duo vs Investment: ₹4.49 लाख का फोन खरीदना सही या इसी पैसे को निवेश करना? समझिए पूरा हिसाब

iPhone Duo vs Investment: अमेरिकी टेक कंपनी Apple का iPhone Duo 2TB भारत में ₹4.49 लाख का है। इतनी कीमत में यह फोन लग्जरी खरीदारी की कैटेगरी में आता है। ऐसे में सवाल सिर्फ ये नहीं कि आप इसे खरीद सकते हैं या नहीं। सवाल ये भी है कि अगर यही ₹4.49 लाख निवेश कर दिए जाएं, तो आगे कितनी रकम बन सकती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फैसला सिर्फ फोन की कीमत देखकर नहीं करना चाहिए। आपकी आमदनी, बचत, निवेश और दूसरे खर्च भी देखने होंगे। साथ ही ये भी देखना होगा कि इस पैसे को खर्च करने की निवेश करने की सूरत क्या रहेगी।

क्या ₹4.49 लाख का iPhone खरीदना सही है?

₹4.49 लाख का स्मार्टफोन खर्च है। इसे निवेश नहीं माना जा सकता। इसलिए खरीदारी तभी ठीक है, जब यह पैसा आपकी अतिरिक्त आय से आ रहा हो। इससे आपके दूसरे वित्तीय लक्ष्य भी प्रभावित नहीं होने चाहिए।

MidasX के को-फाउंडर और CIS अनिल गुप्ता ने कहा, ‘वेल्थ क्रिएशन के नजरिए से ₹4.49 लाख का प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदना कंजम्पशन डिसीजन है, निवेश का फैसला नहीं।’ उनके मुताबिक, सवाल सिर्फ फोन की कीमत का नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि अगर यही ₹4.49 लाख कहीं निवेश किए जाते, तो आगे कितनी रकम बन सकती थी।

गुप्ता का कहना है कि इंडेक्स फंड में लगाया पैसा समय के साथ बढ़ सकता है। वहीं फोन खरीदते ही उसकी वैल्यू कम होने लगती है। अगर आपके पास पहले से इमरजेंसी फंड है। पर्याप्त इंश्योरेंस है। लंबे समय के निवेश भी चल रहे हैं। तब इसे लाइफस्टाइल खर्च माना जा सकता है।

कम कीमत का फोन लेकर बाकी पैसा लगाएं?

Capwise Financial Services के फाउंडर और CEO नरेश बियानी के मुताबिक, फैसला सिर्फ फोन और इंडेक्स फंड के बीच नहीं होना चाहिए। आप कम कीमत का फोन भी खरीद सकते हैं। बची रकम को निवेश किया जा सकता है।

लोन लेकर फोन खरीद रहे हैं तो मामला और अहम हो जाता है। Anand Rathi Wealth के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष श्रीवास्तव के मुताबिक, ₹4.5 लाख के फोन पर दो साल की EMI करीब ₹18,000-19,000 महीने हो सकती है। अगर ये आपकी इनहैंड सैलरी के 5-10% से ज्यादा है और पहले से दूसरी EMI चल रही है, तो ये बड़ा बोझ बन सकता है।

₹4.49 लाख निवेश करने पर कितनी रकम बन सकती है?

मान लीजिए ₹4.49 लाख को एकमुश्त इंडेक्स फंड में लगाया गया। 11% CAGR मानने पर यह रकम 10 साल में करीब ₹12.7 लाख हो सकती है। 15 साल में करीब ₹21.5 लाख और 20 साल में करीब ₹36.2 लाख हो सकती है।

अगर Diversified Equity Fund में 13% CAGR मानें, तो यही रकम 10 साल में करीब ₹15.25 लाख हो सकती है। 15 साल में करीब ₹28.1 लाख और 20 साल में करीब ₹51.8 लाख हो सकती है।

ब्रोकिंग फर्म आनंद राठी के मुताबिक, Nifty 50 ने लंबे समय में करीब 10-11% रिटर्न दिया है। Diversified Equity Funds एक्टिव मैनेजमेंट के जरिए ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं।

खरीदने से पहले इन बातों पर गौर करें

सबसे पहले देखें कि ₹4.49 लाख आपकी सरप्लस रकम है या बचत का हिस्सा। नरेश बियानी ने इसे मासिक खर्च के हिसाब से देखने की भी सलाह दी है। तीन साल में इस खर्च को बांटें तो यह करीब ₹12,500 महीने बैठता है।

मनीष श्रीवास्तव के मुताबिक, बड़ी खरीदारी से पहले 6-8 महीने का इमरजेंसी फंड होना चाहिए। हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस भी पर्याप्त होना चाहिए। हाई-इंटरेस्ट कर्ज नहीं होना चाहिए। वित्तीय लक्ष्यों के लिए निवेश भी चलता रहना चाहिए। उनके मुताबिक, आपकी कुल मासिक EMI और फिक्स्ड खर्च आपकी आय के 40-50% से ज्यादा नहीं होने चाहिए।

आईफोन डुओ खरीदें या फिर निवेश करें?

Rupyaapaisa.com के फाउंडर और MD मुकेश पांडे के मुताबिक, अगर फोन खरीदने के बाद भी पर्याप्त खर्च करने लायक रकम बचती है। और इससे जरूरी वित्तीय लक्ष्य प्रभावित नहीं होते, तो खरीदारी की जा सकती है। लेकिन अगर ₹4.49 लाख आपकी बचत का बड़ा हिस्सा है, तो पैसा निवेश करना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

आखिर में फैसला आपकी जेब और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। अगर फोन सरप्लस इनकम से खरीदा जा रहा है, तो यह जरूरी नहीं कि फैसला गलत हो। लेकिन अगर इसके लिए निवेश रोकना पड़ रहा है या इमरजेंसी फंड खत्म हो रहा है, तो ₹4.49 लाख की Opportunity Cost काफी बड़ी हो सकती है।

Personal Loan EMI: ₹5 लाख का पर्सनल लोन लेने पर कितना ब्याज देना होगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Price: सोना ₹1.50 लाख पर, चांदी ₹8000 चढ़ी, एक्सपर्ट्स से जानें आगे कहां तक जाएगी कीमतें

Gold Silver Price: भारत में सोने-चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला है। कीमतों में यह तेजी नई खरीदारी, मज़बूत ग्लोबल ट्रेंड के कारण आई है। साथ ही उम्मीद थी कि महंगाई का दबाव कम होने से US फ़ेडरल रिजर्व को ब्याज दरें घटाने के लिए ज़्यादा गुंजाइश मिल सकती है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के फ़्यूचर्स ₹2,188 या 0.85% बढ़कर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए। ट्रेडिंग वॉल्यूम 1,283 लॉट रहा।चांदी की कीमतों में भी तेज़ी आई। MCX पर सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के फ़्यूचर्स ₹8000 या 3.54% बढ़कर ₹2.33 लाख प्रति किलोग्राम हो गए, और 2,943 लॉट का कारोबार हुआ। इंटरनेशनल मार्केट में, चांदी के फ़्यूचर्स 3.44% बढ़कर $61.66 प्रति औंस हो गए।

जानकारों का मानना ​​है कि बाज़ार में हिस्सा लेने वालों द्वारा नई पोज़िशन बनाने की वजह से यह बढ़ोतरी हुई। ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ़्यूचर्स 1.13% बढ़कर $4,287.50 प्रति औंस हो गए।

कीमतों में तेजी क्यों

कीमती धातुओं में हालिया तेज़ी की वजह US ट्रेज़री यील्ड में कमी, महंगाई का दबाव कम होने की उम्मीद, डॉलर का कमज़ोर होना और कीमती धातुओं की लगातार मांग है।

स्मॉलकेस मैनेजर और क्वांटस रिसर्च के MD और CEO कार्तिक जोनागदला ने कहा कि COMEX गोल्ड फ़्यूचर्स 3 अगस्त को लगभग $4,090 प्रति औंस से बढ़कर 7 अगस्त को लगभग $4,350 हो गए।उन्होंने इस बदलाव का कुछ हद तक कारण महंगाई के जोखिमों का दोबारा आकलन बताया। ब्रेंट क्रूड 31 जुलाई को लगभग $90.12 प्रति बैरल से गिरकर लगभग $83.3 पर आ गया, जबकि US 10-वर्षीय ट्रेज़री यील्ड भी हाल के स्तरों से नीचे आ गई, हालांकि बाद में यील्ड में कुछ सुधार हुआ।

आमतौर पर बॉन्ड यील्ड गिरने से सोने को फ़ायदा होता है क्योंकि सोने जैसी बिना यील्ड वाली संपत्ति रखने की अवसर लागत (opportunity cost) कम हो जाती है। कमज़ोर डॉलर भी दूसरी करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए डॉलर में कीमत तय होने वाले सोने को सस्ता बना सकता है।

ये आंकड़े हैं अहम

निवेशक फ़ेडरल रिज़र्व के अगले पॉलिसी कदम के संकेत पाने के लिए US के आर्थिक डेटा पर भी नज़र रखे हुए हैं। कमज़ोर लेबर मार्केट से ब्याज दरें कम होने की उम्मीदें बढ़ सकती हैं, जो आम तौर पर सोने के लिए अच्छा होता है।

आगे कहां जा सकते है कीमतें

VT मार्केट्स के सीनियर मार्केट एनालिस्ट – APAC, जस्टिन खू ने कहा कि सोने में हालिया तेज़ी सिर्फ़ ‘सेफ़-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) की मांग के कारण नहीं थी, बल्कि तेल की गिरती कीमतें, US लेबर मार्केट का कमज़ोर डेटा, कम ट्रेजरी यील्ड और जियोपॉलिटिकल रिस्क में बदलाव जैसे कई कारणों से आई थी।

हाल ही में गोल्ड फ़्यूचर्स $4,300 प्रति औंस के स्तर से ऊपर चले गए थे, जबकि चांदी भी कई हफ़्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी।ग्लोबल कीमती धातुओं के लिए अगला बड़ा ट्रिगर US नॉन-फ़ार्म पेरोल रिपोर्ट हो सकती है। नौकरियों के आंकड़ों में नरमी से मॉनेटरी ईज़िंग (ब्याज दरों में कटौती या आसान नीति) की उम्मीदें बढ़ सकती हैं, जबकि उम्मीद से बेहतर डेटा यील्ड और डॉलर को ऊपर ले जा सकता है और सोने पर दबाव डाल सकता है।

जोनागाडला ने कहा कि $4,300 का स्तर सोने के लिए एक अहम टेस्ट है। अगर यह इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तो धातु $4,350-$4,400 की रेंज में रह सकती है, जबकि $4,200 से नीचे गिरने पर प्रॉफ़िट-बुकिंग का संकेत मिल सकता है।

हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतें समीकरण का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, आयात से जुड़ी लागत और घरेलू मांग भी स्थानीय सोने की कीमतों पर असर डालती हैं।

US डॉलर के मुकाबले रुपया ₹95.22 के आसपास होने के कारण, करेंसी में उतार-चढ़ाव अंतरराष्ट्रीय बुलियन कीमतों में बदलाव को बढ़ा या कम कर सकता है।

Gold Silver price Today: सोने की कीमतों में मामूली बढ़त, चांदी 1.5% उछली, इन अहम आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver price Today: 7 हफ्ते के हाई पर पहुंचा सोना, चांदी भी चढ़ी, बुलियन में तेजी की क्या है वजह?

Gold Silver price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी देखने को मिली। वहीं चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। जियोपॉलिटिकल चिंताओं में कमी, कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और गिरती ट्रेज़री यील्ड जैसे कारणों ने सोने-चांदी की मांग को बढ़ावा दिया। COMEX पर, सोने के फ़्यूचर्स 1.3% बढ़कर $4,361.30 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के फ़्यूचर्स 0.65% बढ़कर $62.695 प्रति औंस हो गए। स्पॉट मार्केट में, सोना $4,285.84 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया, जो 18 जून के बाद का उच्चतम स्तर है।

यह हालिया बढ़ोतरी पिछले सत्र में बुलियन (सोना-चांदी) में फरवरी के बाद की सबसे बड़ी एक-दिवसीय बढ़त के बाद हुई है।

कीमतों में बढ़त क्यों

कमजोर डॉलर से सस्ता होता है सोना

प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर कमज़ोर हुआ, जिससे डॉलर-मूल्य वाली कमोडिटीज जैसे सोना और चांदी विदेशी खरीदारों के लिए अधिक किफायती हो गई। कमजोर डॉलर आमतौर पर वैश्विक बाज़ारों में बुलियन की मांग को समर्थन देता है।

बॉन्ड यील्ड में गिरावट

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी कमी आई, जिससे सोने जैसी बिना यील्ड (ब्याज) वाली संपत्तियों को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) कम हो गई। जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो निवेशक अक्सर कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाते हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदें

बाजारों में तब आशावाद देखा गया जब रिपोर्टों से संकेत मिला कि राजनयिक प्रयासों से पश्चिम एशिया में कोई समाधान निकल सकता है, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर चर्चा भी शामिल है। तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल की कीमतों को नीचे धकेल दिया।

कच्चे तेल की कम कीमतें ऊर्जा-जनित महंगाई के डर को भी कम करती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो जाती हैं। इससे सोने के लिए एक अनुकूल माहौल बनता है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें चर्चा में

निजी पेरोल डेटा के उम्मीद से कमजोर रहने और लेबर मार्केट में कुछ नरमी के संकेत मिलने के बाद निवेशक अमेरिकी मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण का भी पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।

बाजार पार्टिसिपेट अब शुक्रवार (7 अगस्त) को आने वाली अमेरिकी नॉन-फ़ार्म पेरोल रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। कमजोर जॉब्स रिपोर्ट ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को मजबूत कर सकती है, जिससे सोने को और समर्थन मिलेगा। इसके विपरीत, उम्मीद से मज़बूत रोज़गार डेटा सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों को फिर से जगाकर बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

चांदी का क्या हाल है?

चांदी भी मजबूत बनी रही, जिसे उन्हीं मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों का समर्थन मिला जिनसे सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। कम बॉन्ड यील्ड और डॉलर के कमजोर होने से फायदा मिलने के अलावा, चांदी को एक कीमती और इंडस्ट्रियल मेटल, दोनों तरह की भूमिकाओं से भी सपोर्ट मिल रहा है।

निवेशकों की नजरें आने वाले US के आर्थिक डेटा और सेंट्रल बैंक की उम्मीदों पर टिकी हैं, इसलिए आने वाले समय में सोने और चांदी, दोनों में उतार-चढ़ाव के बने रहने की संभावना है।

सोना ₹2,000 से ज्यादा चढ़ा, चांदी 4 हफ्ते के हाई पर पहुंची, इंडियन कंज्यूमर के लिए इस तेजी का क्या है मतलब!

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Gold Price Today: यूएस ट्रेजरी यील्ड में बढ़त से गिरा सोने के भाव, क्या आगे भी कीमतों पर दिखेगा कोई असर

Silver Gold Price Today:  सोने की कीमतें आज 30 जुलाई को गिर गई है। सोने की कीमतों में यह दबाव अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त के कारण आई। साथ ही बाजार फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की महंगाई से निपटने संबंधी टिप्पणियों का आकलन कर रहे थे क्योंकि इस हफ्ते सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था।

पिछले सत्र में सोने की कीमतें 2% बढ़ने के बाद, 0445 GMT पर स्पॉट गोल्ड 0.4% गिरकर $4,048.39 प्रति औंस पर आ गया। अगस्त डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.3% बढ़कर $4,045.70 हो गया। बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट पर यील्ड बढ़ने से बुलियन (सोना) रखने की अवसर लागत (opportunity cost) बढ़ गई।

ANZ की एनालिस्ट सोनी कुमारी ने कहा, “यील्ड दर की उम्मीदों का नतीजा होती है और अगर बाजार को उम्मीद है कि महंगाई का डर ऊंची दरों में बदल जाएगा, तो यील्ड भी ऊंची होगी,” और इससे सोने पर दबाव पड़ रहा है।

बुधवार को बंटे हुए फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, जबकि वॉर्श ने महंगाई को काबू में लाने के लिए सेंट्रल बैंक की प्रतिबद्धता दोहराई है, जिससे बाजार इसके अगले नीतिगत कदम को लेकर अनिश्चितता में है। हालांकि सोने को महंगाई से बचाव (हेज) के तौर पर देखा जाता है, लेकिन ऊंची ब्याज दरों वाले माहौल में बिना रिटर्न (non-yielding) वाली संपत्ति के तौर पर इसका आकर्षण कम हो जाता है।

CME ग्रुप के FedWatch टूल के अनुसार, बाजार अभी भी सितंबर में दरें बढ़ने की 65% संभावना मानकर चल रहे हैं, हालांकि नीतिगत फैसले से पहले यह संभावना लगभग 81% थी। निवेशक जून के अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) डेटा का भी इंतजार कर रहे हैं, जो 1230 GMT पर आने वाला है।

जियोपॉलिटिकल मोर्चे पर, अमेरिकी सेना ने कहा कि बुधवार को अमेरिका ने ईरान में नए हमले किए, जिससे पांच महीने से चल रहा युद्ध और तेज हो गया है। यह युद्ध पहले ही अपने मुख्य मोर्चों से आगे बढ़कर क्षेत्र के अन्य देशों को भी अपनी चपेट में ले रहा था। गुरुवार को तेल की कीमतों में हुई कुछ बढ़त कम हो गई क्योंकि तेल टैंकर मध्य पूर्व से बाहर निकल रहे थे।

TD सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स ने एक नोट में कहा, “पीली धातु (सोना) के दाम वापस $3,900 प्रति औंस के स्तर पर आ सकते हैं, क्योंकि गर्मियों के दौरान तेल की कीमतों में और बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है।” स्पॉट सिल्वर की कीमत 0.6% गिरकर $57.30 प्रति औंस हो गई और प्लैटिनम 1.1% गिरकर $1,593.77 पर आ गया। पैलेडियम की कीमत 0.6% बढ़कर $1,253.25 हो गई।

Silver Price Today: चांदी हुई और भी सस्ती, खरीदारी से पहले जानें आपके अपने शहर का ताजा रेट

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price : मिडिल ईस्ट तनाव और फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका के बीच सोने की चाल सपाट,जानिए क्या हो निवेश रणनीति

Gold Price : सोमवार को सोने की कीमतों में मामूली गिरावट आई है। निवेशकों की नजरें मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव पर लगी है। मिडिल ईस्ट का संकट गहराने से तेल की कीमतें बढ़ गईं हैं। साथ ही,अमेरिकी फेडरल रिजर्व के एक और पॉलिसी मेकर ने संकेत दिया है कि बढ़ती महंगाई के दबाव से निपटने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल हाजिर बाजार में सोने का भाव 0.3% गिरकर 4,004.63 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गया है। अगस्त डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.2% गिरकर 4,008.70 डॉलर पर आ गया है।

सोमवार को लगातार नौवें दिन अमेरिकी सेना द्वारा ईरान पर हमले के बाद तेल की कीमतों में 3% से अधिक की तेजी आई है। फिर से शुरू हुई लड़ाई में मरने वाले अमेरिकी सैनिकों संख्या बढ़कर तीन हो गई है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होने वाली शिपिंग को लेकर चिंताएं बढ़ गईं हैं।

गोल्डसिल्वर सेंट्रल के मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रायन लैन का कहना है कि युद्ध अभी भी जारी है। ऐसे में बाजार की फोकस तेल की बढ़ती कीमतों पर बना हुआ है, जिससे महंगाई बढ़ सकती है और सोने पर दबाव बना हुआ है। हालांकि,गोल्ड के लिए 4,000 डॉलर का स्तर काफी अहम रहा है और यह दिखाता है कि जब भी गोल्ड स्तर से नीचे गिरता है तो उसे सपोर्ट मिलता है।

तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने के डर और ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहने की आशंका को मजबूत कर रही हैं। हालांकि सोने को आमतौर पर महंगाई से बचाव (हेज) के रूप में देखा जाता है,लेकिन ऊंची ब्याज दरें बिना रिटर्न देने वाली संपत्ति (non-yielding asset) में बने रहने की अवसर लागत (opportunity cost) को बढ़ा देती हैं।

क्लीवलैंड फेड की प्रेसिडेंट बेथ हैमैक ने उन पॉलिसी मेकर्स का सपोर्ट किया है जिनका तर्क है कि महंगाई में बढ़त को रोकने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने की जरूरत हो सकती है। ऐसे में 29 जुलाई को फेड की अगली बैठक में इस मुद्दे पर तीखी बहस की संभावना दिख रही है।

CME फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स अब दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की 82% संभावना देख रहे हैं, जबकि पिछले सप्ताह यह 73% थी। OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग की राय है कि लंबे समय के नजरिए से वे सोने को लेकर अधिक सतर्क है और 3,886 डॉलर के अहम लेवल पर नजर रखे हुए हैं। अगर यह स्तर नीचे की ओर टूटता है,तो सोने में और कमजोरी आ सकती है और यह 3,500 डॉलर की गिर सकता है।

वहीं दूसरी ओर,स्पॉट सिल्वर की प्राइस 1.3% बढ़कर 56.61 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। जबकि प्लेटिनम 0.3% गिरकर 1,587.20 डॉलर पर आ गया गया है। पैलेडियम 0.3% घटकर 1,243.99 डॉलर पर पहुंच गया है।

पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन का कहना है कि आज के सेशन में सोने के लिए 3,989 डॉलर और 3,945 डॉलर पर सपोर्ट है,जबकि 4,040 डॉलर और 4,074 डॉलरप्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है। वहीं,चांदी के लिए 55.50 डॉलर और 54.40 डॉलर पर सपोर्ट है और 57.50 डॉलर और 58.80 डॉलर प्रति औंस पर रेजिस्टेंस है।

मनोज कुमार जैन का सुझाव है कि लॉन्ग-टर्म निवेशक बाजार में इस गिरावट के दौरान SIP मोड में सोना और चांदी जमा कर सकते हैं,लेकिन ट्रेडर्स को लॉन्ग पोजीशन में क्लोजिंग के आधार पर सोने के लिए 1,39,650 रुपए और चांदी के लिए 2,14,000 रुपए पर स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए और हर बढ़त पर मुनाफा बुक करना चाहिए।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Viral Video: ’74 लाख खर्च हुए, फिर भी…’ IIM से पढ़ाई करने के लिए युवक ने छोड़ी सरकारी नौकरी, कहानी हुई वायरल

भारत में सरकारी नौकरी को सबसे सुरक्षित और सम्मानजनक करियर माना जाता है। वहीं एक बार सरकारी नौकरी मिलने के बाद बहुत कम लोग इसे अपनी इच्छा से छोड़ने का फैसला करते हैं। इसी बीच एक युवक का पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। एक युवक ने बेहतर भविष्य और नए अवसरों की तलाश में सरकारी नौकरी छोड़कर आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ाई करने का रास्ता चुना। उसके मुताबिक ये फैसला उनके करियर को नई दिशा देगा और आगे चलकर अधिक बड़े मौके हासिल करने में मदद करेगा।

क्यों छोड़ी नौकरी

इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए पोस्ट में अमित सोनी ने बताया कि, आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए करने का फैसला उनके लिए आसान नहीं था। उनके मुताबिक, सरकारी नौकरी छोड़ने और पढ़ाई पूरी करने तक इस फैसले की कुल लागत करीब 74 लाख रुपये रही। उन्होंने बताया कि ये रकम कैसे बनी, लेकिन उनका मुताबिक, उन्हें अपने इस फैसले पर कोई पछतावा नहीं है और वह इसे अपने करियर के लिए सही मानते हैं। अमित सोनी पहले भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात थे

बताया पूरा खर्च

अमित सोनी ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा, “करीब 74 लाख रुपये। सरकारी नौकरी छोड़ने का फैसला मेरे लिए इतना महंगा पड़ा। जिस दिन मुझे आईआईएम अहमदाबाद में दाखिला मिला, उसी दिन मैंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया।” उन्होंने बताया कि इस रकम में एमबीए की पढ़ाई पर होने वाला खर्च भी शामिल है और वह आय भी, जिसे उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ने के कारण हासिल नहीं किया।

 

सोनी के अनुसार, आईआईएम अहमदाबाद के एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट प्रोग्राम फॉर एग्जीक्यूटिव्स (PGPX) की ट्यूशन फीस 37.10 लाख रुपये है। इसके अलावा, इंटरनेशनल इमर्शन प्रोग्राम पर करीब 4.5 लाख रुपये और पढ़ाई के दौरान रहने-खाने सहित अन्य खर्चों पर लगभग 2.5 लाख रुपये का खर्च आने का अनुमान है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने के बाद उन्हें 9.80 लाख रुपये रिजाइन बॉन्ड के रूप में जमा करने पड़े।

20 लाख का हुआ नुकसान

इसके अलावा, सोनी ने सरकारी नौकरी छोड़ने से होने वाले ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, आईआईएम अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान एक साल तक नौकरी नहीं करने की वजह से उन्हें वेतन और अन्य नौकरी से मिलने वाले लाभों के रूप में करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हुआ। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बावजूद सोनी का कहना है कि उन्हें अपने फैसले पर कभी पछतावा नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि नौकरी छोड़ते समय उनके पास कोई बैकअप प्लान नहीं था, सिर्फ अपने फैसले पर पूरा भरोसा था। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “सिर्फ विश्वास।” वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या ये फैसला सही था, तो उन्होंने जवाब दिया, “बिल्कुल, यह पूरी तरह इसके लायक था।”

क्यों लिया ये फैसला

सोनी ने कहा कि वह अपने इस फैसले को केवल पैसों के नजरिए से नहीं देखते। उनके मुताबिक, कुछ फैसलों की असली कीमत रुपये में नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले अनुभव और भविष्य में होने वाले बदलाव से तय होती है। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “कुछ निवेश की कीमत लाखों रुपये से नहीं, बल्कि इस बात से तय होती है कि आप आगे चलकर क्या बनते हैं। यूनिफॉर्म से बोर्डरूम तक का यह सफर मेरे जीवन का दूसरा चैप्टर है।” इससे पहले एक इंस्टाग्राम वीडियो में भी उन्होंने बताया था कि सरकारी नौकरी छोड़कर दोबारा पढ़ाई करने का फैसला उन्होंने आरामदायक जीवन नहीं, बल्कि अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए लिया था।

ChatGPT से दिनभर करती थी बातचीत! महिला की हुई मौत, परिवार ने OpenAI पर लगाए गंभीर आरोप