Gold Jewellery Price: 18, 14 या 9 कैरेट की ज्वेलरी कितने में बनेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

Gold Jewellery Price: सोने का भाव लगातार ऊंचे स्तर पर बना है। ऐसे में जाहिर तौर पर नए गहने खरीदना काफी महंगा हो गया है। हालांकि, हर कैरेट के सोने की कीमत एक जैसी नहीं होती। सबसे महंगा 24 कैरेट का सोना होता है। लेकिन, इससे गहने नहीं बनते। गहने बनने की शुरुआत अधिकतम 22 कैरेट गोल्ड से होती है। महंगाई के चलते अब कम कैरेट गोल्ड की तरफ भी ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।

खुराना ज्वैलरी हाउस की सौम्या खुराना के मुताबिक, अब ज्वेलर्स ग्राहकों के लिए हल्के आभूषण पेश कर रहे हैं, जो सस्ते होते हैं। 18 कैरेट, 14 कैरेट और यहां तक ​​कि 9 कैरेट की ज्वेलरी भी मार्केट में आ रही हैं। इन्हें लोग खूब पसंद भी कर रहे हैं।

आइए जानते हैं कि 18, 14 और 9 कैरेट की गोल्ड ज्वेलरी बनवाने पर कितना खर्च होगा। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी IBJA के मुताबिक, 3 सितंबर को 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत ₹2,549 बढ़कर ₹1.54 लाख हो गई। इसी भाव के आधार पर 18 कैरेट, 14 कैरेट और 9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का कैलकुलेशन किया गया है।

18K, 14K और 9K में कितना सोना

18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 75% यानी 7.5 ग्राम शुद्ध सोना होता है। 14 कैरेट में यह मात्रा 58.5% यानी 5.85 ग्राम रहती है। वहीं 9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 37.5% यानी 3.75 ग्राम शुद्ध सोना होता है।

बची हुई मात्रा में दूसरी धातुएं मिलाई जाती हैं। इससे ज्वेलरी मजबूत बनती है। कम कैरेट का मतलब है कि गहने में सोने की मात्रा कम है। यही वजह है कि उसकी कीमत भी कम पड़ती है।

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18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

18 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी में 7.5 ग्राम शुद्ध सोना होता है। ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के भाव पर इस सोने की कीमत ₹1,15,500 बैठती है।

बाकी 2.5 ग्राम में दूसरी धातुएं होती हैं। चांदी और तांबे की कीमत जोड़ने पर ज्वेलरी की कुल धातु लागत ₹1,18,502 हो जाती है। 10% मेकिंग चार्ज और 3% GST के बाद कुल कीमत करीब ₹1,34,262 बैठती है।

14 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

14 कैरेट की ज्वेलरी में सोने की मात्रा घटकर 5.85 ग्राम रह जाती है। इसकी कीमत ₹90,090 होती है। हालांकि, बचे हुए 4.15 ग्राम में चांदी और तांबा मिलाया जाता है। इनकी कीमत भी ग्राहक को चुकानी होती है।

इन धातुओं की कीमत जोड़ने पर कुल धातु लागत ₹95,073 बैठती है। मेकिंग चार्ज और GST मिलाने के बाद 10 ग्राम 14 कैरेट ज्वेलरी की कीमत करीब ₹1,07,718 हो जाती है। यानी 18 कैरेट के मुकाबले करीब ₹26,500 की बचत।

9 कैरेट की 10 ग्राम ज्वेलरी का खर्च

9 कैरेट में सिर्फ 3.75 ग्राम शुद्ध सोना होता है। मौजूदा भाव पर इस सोने की कीमत ₹57,750 बैठती है। बाकी 6.25 ग्राम में दूसरी धातुएं होती हैं। चांदी और तांबे की कीमत मिलाकर कुल धातु लागत ₹65,254 हो जाती है।

इसके बाद ₹6,525 मेकिंग चार्ज और 3% GST जुड़ता है। इस तरह 10 ग्राम 9 कैरेट ज्वेलरी करीब ₹73,933 में तैयार होती है। यानी 18 कैरेट के मुकाबले करीब ₹60,000 कम खर्च आता है।

एक नजर में 10 ग्राम ज्वेलरी का पूरा हिसाब

खर्च का हिसाब18 कैरेट14 कैरेट9 कैरेट
शुद्ध सोना7.5 ग्राम5.85 ग्राम3.75 ग्राम
सोने की कीमत₹1,15,500₹90,090₹57,750
दूसरी धातुओं की कीमत₹3,002₹4,983₹7,504
कुल धातु लागत₹1,18,502₹95,073₹65,254
मेकिंग चार्ज₹11,850₹9,507₹6,525
GST₹3,910₹3,137₹2,153
कुल कीमत₹1,34,262₹1,07,718₹73,933

9 कैरेट ज्वेलरी का बढ़ता चलन

बाजार में 9 कैरेट ज्वेलरी का चलन बढ़ रहा है। खासकर युवा ग्राहक हल्के और रोज पहनने वाले गहनों के लिए इसे देख रहे हैं। 14 कैरेट और 18 कैरेट ज्वेलरी भी हीरे और दूसरे रत्नों वाले डिजाइन में खूब इस्तेमाल होती है।

हालांकि, शादी-ब्याह के पारंपरिक गहनों के लिए भारत में 22 कैरेट गोल्ड की मांग अभी भी सबसे ज्यादा रहती है। लेकिन सोने के रिकॉर्ड भाव के बीच कम कैरेट की ज्वेलरी अब ग्राहकों के लिए सस्ता विकल्प बन रही है।

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Janmashtami 2026: ‘बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया का करें यशोदा मैया…’, इन हिंदी गानों के साथ मनाए जन्माष्टमी

Janmashtami 2026: पूरे देश में जन्माष्टमी धूम धाम से मनाई जा रही है। इस खास मौके पर देशभर के मंदिरों को और घरों को झाकी के साथ सजाया जाता है। दही हांडी आयोजित होती है। इस दौरान बॉलीवुड के कई मशहूर सुनने को मिलते हैं। ऐसे में हम आपके लिए बॉलीवुड गानों की लिस्ट लाए हैं, जो भगवान कृष्ण के इस त्योहार का मजा बढ़ा देंगे।

बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया…

फिल्म ‘अमर प्रेम’ का गाना ‘बड़ा नटखट है रे कृष्ण कन्हैया..’ दिल को छूता है। इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया है, आनंद बक्शी से इसके बोल लिखे हैं। जबकि आर.डी. बर्मन का संगीत है। जन्माष्टमी के खास मौके पर सोशल मीडिया पर भी ये खूब ट्रेंड होता है।

गो गो गोविंदा

जबरदस्त बीट्स और जोश भरी कोरियोग्राफ़ी वाला यह सुपरहिट गाना, जिसमें प्रभु देवा और सोनाक्षी सिन्हा हैं, पारंपरिक दही-हंडी सेलिब्रेशन के कॉम्पिटिशन वाले जोश, खुशी और असली उत्साह को बखूबी दिखाता है।

राधा कैसे न जले

ए.आर. रहमान का ये गाना यह सदाबहार गाना राधा और भगवान कृष्ण के बीच की चंचल, रोमांटिक नोक-झोंक और हल्की-फुल्की जलन को बहुत खूबसूरती से दिखाता है, जो इसे किसी भी त्योहार की शाम के लिए एक ज़रूरी और शानदार गाना बनाता है।

‘वो किसना है’

बांसुरी की दिल को छू लेने वाली धुन और सुखविंदर सिंह की दमदार आवाज़ से सजी यह शानदार गाना भगवान कृष्ण के बारे में बताता है। यह आपकी प्लेलिस्ट में एक गहरा और उत्साह बढ़ाने वाला आध्यात्मिक एहसास जोड़ता है।

राधे-राधे

तेज लोक संगीत की धुनों और जोश भरे आधुनिक रिदम वाला यह एनर्जेटिक गाना मथुरा और गोकुल की जीवंत गलियों से प्रेरित है। यह गाना घर पर होने वाले जश्न में हर किसी को थिरकने पर मजबूर कर देगा।

मच गया शोर

अमिताभ बच्चन अभिनीत यह सदाबहार रेट्रो गाना, त्योहारों के दौरान होने वाले मेल-जोल, खुशी-खुशी गाए जाने वाले गीतों और सड़कों पर होने वाले उत्सव के उस जादुई माहौल को दर्शाता है, जिसने पीढ़ियों से भारतीय त्योहारों की पहचान बनाई है।

मैया यशोदा

यह प्यारा ग्रुप डांस गाना मैया यशोदा से नटखट शिकायतों के ज़रिए छोटे कान्हा की शरारतों भरी बचपन की हरकतों को खूबसूरती से दिखाता है। यह आपके त्योहार के माहौल में अपनापन, परिवार का जुड़ाव और भारतीय संस्कृति की क्लासिक खूबसूरती लाता है।

चांदी की दाल पर

90 के दशक के जोशीले डांस म्यूज़िक वाले इस मज़ेदार और चंचल गाने से प्लेलिस्ट में एक हल्की-फुल्की और शरारती रौनक आ जाती है। यह गाना कृष्ण के मशहूर शरारती अंदाज़ को बॉलीवुड के मज़ेदार और एंटरटेनिंग रूप में पेश करता है।

कान्हा सो जा ज़रा

ज़बरदस्त एनर्जी वाले डांस गानों के बीच एक सुकून देने वाला बदलाव पेश करने वाला यह शानदार और बेहतरीन ढंग से रचा गया लोरी-नुमा गीत, एक शांत और सुकून भरा माहौल बनाता है। यह देर रात मंदिर की प्रार्थनाओं और आधी रात की दिव्य आरती की रस्मों के लिए एकदम सही है।

Gold Price: 2026 के अंत तक कहां पहुंच सकता है सोना? Goldman Sachs ने $4900 का टारगेट दिया

Gold Price: सोने की कीमत में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में गोल्ड तीन महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद तेज बिकवाली हुई। शुक्रवार को कीमत 3% से ज्यादा टूट गई।

अब सवाल है कि आगे सोना किस दिशा में जाएगा। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा करीब 4,550 डॉलर के स्तर से लगभग 8% ज्यादा है।

भारत में कितना महंगा हो सकता है सोना

भारत में सोने की मौजूदा कीमत ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अंतरराष्ट्रीय कीमत में Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक करीब 8% बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में घरेलू कीमत भी मोटे तौर पर ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।

हालांकि, भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क और टैक्स भी भाव को प्रभावित करेंगे।

केंद्रीय बैंकों की खरीद बड़ा सपोर्ट

Goldman Sachs को सोने की कीमत में आगे भी मजबूती की उम्मीद है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। Goldman Sachs Research के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। 2022 से पहले यह औसत सिर्फ 17 टन प्रति माह था।

जून 2026 में खरीदारी और तेज हुई। तीन महीने के सीजनली एडजस्टेड आधार पर यह आंकड़ा 100 टन प्रति माह तक पहुंच गया। इससे पहले यह 66 टन था। जून में चीन का केंद्रीय बैंक सबसे बड़ा पहचाना जा सकने वाला खरीदार रहा।

2026 में काफी उतार-चढ़ाव आया

इस साल सोने की चाल काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। 29 जनवरी को गोल्ड 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। जुलाई के मध्य में यह 4,000 डॉलर से नीचे फिसल गया।

हालांकि, जुलाई के निचले स्तर से सोना करीब 15% चढ़ चुका है। Goldman Sachs को बाकी बचे साल में भी तेजी की उम्मीद है।

ब्याज दरें तय करेंगी आगे की चाल

सोने की कीमत पर ब्याज दरों का बड़ा असर पड़ता है। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव बनता है। यही वजह है कि अमेरिकी फेड प्रमुख केविन वॉर्श के बयान के बाद गोल्ड में तेज गिरावट आई।

Goldman Sachs का मानना है कि आगे फेड से जुड़ा दबाव कम हो सकता है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी आने पर फेड इस साल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। ऐसा हुआ तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है।

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Gold Outlook: क्या सोना और चांदी खरीदने का यह सही समय है? जानिए एक्सपर्ट्स की राय

Gold Outlook: सोने की कीमत में $4,600 प्रति औंस से ऊपर की तेजी ने निवेशकों के मन में फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है। क्या हालिया गिरावट (करेक्शन) के बाद सोना और चांदी में दोबारा निवेश करने का यह सही समय है? ऐसा करने के पक्ष में राय मजबूत हो रही है। वैलम कैपिटल की अगस्त मैक्रो ग्रिड चार्टबुक के अनुसार, अगस्त में सोने से 9% रिटर्न मिला, जो व्यापक इक्विटी मार्केट के रिटर्न का लगभग 5 गुना है, जबकि गोल्ड माइनर्स (सोना निकालने वाली कंपनियों) को 21% का फ़ायदा हुआ। वैलम कैपिटल ने अपनी हालिया रिपोर्ट में निवेशकों को सोना और चांदी “फिर से खरीदने” (reload) का सुझाव दिया है। उनका तर्क है कि कीमतों में आई गिरावट से कीमती धातुओं के प्रति सकारात्मक नजरिए (थीसिस) पर कोई असर नहीं पड़ा है।

इस हालिया तेजी में US ट्रेज़री यील्ड में गिरावट और डॉलर के कमजोर होने से मदद मिली है। ऐसा तब हुआ जब US ट्रेज़री ने लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की ज़्यादा खरीद की घोषणा की। कम यील्ड से सोना रखने की ‘अपॉर्च्यूनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है, जबकि राजकोषीय चिंताओं के कारण करेंसी की वैल्यू घटने (करेंसी-डिबेसमेंट) की बहस फिर से शुरू हो गई है।

वैलम कैपिटल का नजरिया सकारात्मक क्यों है?

फर्म ने अपनी हालिया रिपोर्ट में सेंट्रल बैंकों की मांग में भारी बढ़ोतरी की ओर इशारा किया है। सेंट्रल बैंकों ने 2026 की दूसरी तिमाही में 288.9 टन सोना खरीदा, जो तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 411% ज़्यादा है। यह तब हुआ जब वेस्टर्न ETF से 44.8 टन सोने की निकासी हुई और ज्वेलरी की मांग में 17% की गिरावट आई।

वहीं, कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सप्लाई में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। वैलम के अनुसार, माइन प्रोडक्शन (खदानों से उत्पादन) में सिर्फ़ 2% की बढ़ोतरी हुई, रीसाइकल किए गए सोने में 6% की गिरावट आई और कुल सप्लाई स्थिर रही।

फर्म का यह भी तर्क है कि जैसे-जैसे ग्लोबल डेट (वैश्विक कर्ज) बढ़ रहा है, करेंसी की वैल्यू घटने के खिलाफ बचाव (हेज) के तौर पर सोने की भूमिका और महत्वपूर्ण होती जा रही है। उनका अनुमान है कि जमीन के ऊपर मौजूद सोने की कुल कीमत लगभग $31 ट्रिलियन है, जबकि प्रमुख सेंट्रल बैंकों की मनी सप्लाई $102 ट्रिलियन और ग्लोबल डेट लगभग $350 ट्रिलियन है।

फर्म का कहना है कि चांदी भी इस सकारात्मक नजरिए को और मजबूत करती है। 2021 से 2026 के बीच, चांदी में 263% और सोने में 164% की की बढ़ोतरी हुई। फिर भी, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो लगभग 69 गुना बना हुआ है, जो इसके लंबे समय के औसत (मीडियन) 45-50 गुना से ज़्यादा है।

सोने-चांदी के तेजी के पीछे आंख बंद कर ना करें भरोसा

लेकिन हर कोई इस स्थिति को एक ही नजरिए से नहीं देखता। YES सिक्योरिटीज में इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ रिसर्च के स्ट्रैटेजिस्ट हितेश जैन ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा है कि वे इस नए कदम को अलग नजरिए से देखते हैं। वे इसे सोने के लिए स्ट्रक्चरल बदलाव के बजाय एक टैक्टिकल राहत मानते हैं।

US ट्रेजरी के लॉन्ग-एंड बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम दोगुना करके $4 बिलियन करने के फैसले से लॉन्ग-टर्म यील्ड कम हुई है, जिससे सोने को थोड़े समय के लिए बढ़ावा मिला है। लेकिन जैन का तर्क है कि इस दखल से US की मूल फिस्कल समस्या हल नहीं होती क्योंकि बायबैक की गई सिक्योरिटीज की जगह नए इश्यू ले लेंगे।

उनकी बड़ी चिंता ग्लोबल कैपेक्स (कैपिटल एक्सपेंडिचर) साइकिल है। सरकारें और कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, सेमीकंडक्टर, एनर्जी और रीशोरिंग के लिए कैपिटल जुटाने की होड़ में हैं, जिससे कैपिटल की लागत स्ट्रक्चरल रूप से ज़्यादा बनी रह सकती है। जैन ने कहा, “अगले तीन से पांच वर्षों में , हमें उम्मीद है कि सोना इक्विटी और इंडस्ट्रियल मेटल्स के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन करेगा।”

सतर्क हैं भारतीय निवेशक

घरेलू निवेश का ट्रेंड भी बताता है कि निवेशक आंख बंद करके सोने की तेजी के पीछे नहीं भाग रहे हैं। वैलम (Vallum) के अनुसार, जुलाई में प्रेशियस-मेटल फंड में निवेश घटकर ₹4,084 करोड़ रह गया, जो जून में ₹8,680 करोड़ था। वहीं, जून में ₹65,530 करोड़ की निकासी के बाद जुलाई में मनी-मार्केट फंड में ₹1.40 लाख करोड़ का निवेश हुआ। जनवरी 2025 और जनवरी 2026 के बीच, भारतीय रिटेल निवेशकों ने गोल्ड फंड और ETF में लगभग ₹93,000 करोड़ का निवेश किया, जिसमें अकेले जनवरी में रिकॉर्ड ₹33,837 करोड़ का निवेश हुआ।

जो निवेशक फिर से निवेश करना चाहते हैं। उनके लिए एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि रियल यील्ड, डॉलर, फिस्कल पॉलिसी और सेंट्रल बैंक की खरीदारी मुख्य संकेतक बने रहेंगे।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में लगातार दूसरे दिन गिरा सोना, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में लगातार दूसरे गिरावट आई। इसकी कीमत 800 रुपये गिरकर 1,65,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं हुआ। इसकी कीमत 2,50,500 रुपये प्रति किलग्राम पर बनी रही। हालांकि, 28 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है। इस मौके पर गोल्ड और सिल्वर ज्वेलरी की खरीदारी बढ़ती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का पड़ा असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों का असर घरेलू बाजार में सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर भी सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ा। बीते दो दिनों में सोने की कीमतें 1,400 रुपये गिर चुकी है। 25 अगस्त को सोने का भाव 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

बुलियन मार्केट की नजरें फेड चेयरमैन की स्पीच पर

बुलियन मार्केट की नजरें अब अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच पर लगी हैं। वह जैक्सन होल में 28 अगस्त को यह स्पीच देने वाले हैं। इससे फेड की मॉनेटरी पॉलिसी के बारे में कुछ संकेत मिल सकते हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि इनफ्लेशन और इंटरेस्ट रेट्स को लेकर फेड की पॉलिसी का असर पहले डॉलर और बॉन्ड यील्ड पर पड़ेगा। फिर सोने कीमतों पर पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट 

27 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड और स्पॉट सिल्वर में गिरावट दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.12 फीसदी गिरकर 4,588 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सिल्वर 0.11 फीसदी की कमजोरी के साथ 67 डॉलर प्रति औंस पर था। हालांकि, क्रूड ऑयल की कीमतें अब भी 87 डॉलर प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने को लेकर बातचीत के बावजूद ब्रेंट क्रूड में ज्यादा गिरावट नहीं आई है।

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इस हफ्ते की शुरुआत में तीन महीने की ऊंचाई पर पहुंचा था सोना

इस हफ्ते की शुरुआत में सोने की कीमतें तीन महीने के सबसे लेवल पर पहुंच गई थीं। इस तेजी में डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड का हाथ था। पिछले हफ्ते अमेरिकी सरकार ने बॉन्ड बायबैक प्रोग्राम का ऐलान किया था। लेकिन, इससे बॉन्ड यील्ड में तेजी पर थोड़े समय के लिए लगाम लगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेड चेयरमैन वॉर्श शुक्रवार को अपने भाषण में फिर से इनफ्लेशन कंट्रोल पर फोकस बढ़ा सकते हैं।

सोना सस्ता होने वाला है! 15% से घटकर 6% हो सकती है इंपोर्ट ड्यूटी, जानिए कितनी गिरेंगी कीमतें

Gold Import Duty Cut Impact: भारतीय सर्राफा बाजार और सोना खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। सरकार सोने पर लगने वाली कस्टम इंपोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% करने पर विचार कर रही है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो देश में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।

गौरतलब है कि मई 2026 में सरकार ने विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15% कर दिया था। स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के विश्लेषकों के अनुसार, इस ड्यूटी में कटौती का सीधा असर घरेलू बाजार में सोने के भाव, तस्करी और आगामी त्योहारी-शादियों के सीजन में ज्वेलरी की मांग पर पड़ेगा।

15% से 6% ड्यूटी हुई तो कितनी गिरेंगी कीमतें?

भारत अपनी सोने की जरूरतों को पूरा करने के लिए सालाना 700 से 800 टन सोना विदेशों से आयात करता है। जब इंपोर्ट ड्यूटी 15% होती है, तो यह घरेलू बाजार में सोने के लिए एक न्यूनतम मूल्य तय कर देती है।

अगर ड्यूटी 9% घटकर 6% पर आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारतीय बाजार के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा। इससे स्थानीय सर्राफा बाजारों में सोने के लैंडेड कॉस्ट में सीधी कमी आएगी, जिसका फायदा सीधे रिटेल खरीदारों को मिलेगा।

दिल्ली में 24 कैरेट सोने की मौजूदा कीमत ₹1,63,890 प्रति 10 ग्राम पर अगर इंपोर्ट ड्यूटी 15% से घटकर 6% यानी 9% की सीधी कटौती होती है, तो इसके भाव में सीधे ₹14,750 की बड़ी गिरावट आएगी और यह घटकर लगभग ₹1,49,140 प्रति 10 ग्राम पर आ जाएगा। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव ₹1,50,240 प्रति 10 ग्राम से ₹13,522 सस्ता होकर करीब ₹1,36,718 प्रति 10 ग्राम हो जाएगा।

(नोट: यह कटौती केवल सोने की बेस कीमत पर आधारित है, ज्वैलरी के कुल बिल में 3% जीएसटी और मेकिंग चार्ज के हिसाब से अतिरिक्त राहत भी मिलेगी।)

तस्करी पर लगेगी लगाम, वैध मार्केट को बढ़ावा

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हाई इंपोर्ट ड्यूटी (15%) का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि इससे सोने की तस्करी और अवैध रास्तों से आने वाले सोने को बढ़ावा मिलता है। ड्यूटी 6% होने से वैध तरीके से आयात किए गए सोने और अवैध सोने के बीच का रेट गैप खत्म हो जाएगा। इससे बुलियन ट्रेडर्स और ज्वेलर्स औपचारिक चैनलों के जरिए सोना खरीदने के लिए प्रोत्साहित होंगे, जिससे सरकार के राजस्व संग्रह में भी सुधार होगा।

शादियों के सीजन में ज्वेलरी डिमांड में आएगा उछाल

भारतीय संस्कृति में शादी-ब्याह और त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। सोने के दाम घटने से मध्यम वर्गीय परिवारों और रिटेल खरीदारों का बजट सुधरेगा, जिससे ज्वेलरी की मांग में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

सर्राफा कारोबारी और रिटेल ज्वेलर्स नई आयात लागत के हिसाब से अपने मेकिंग चार्जेस और फाइनल रिटेल प्राइस में तेजी से बदलाव करेंगे। विशेषकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में इसका असर सबसे तेज दिखेगा।

निवेशकों के लिए क्या है सलाह?

स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट के अनुसार, सोने में निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों और ट्रेडर्स को इस नीतिगत बदलाव पर नजर रखनी चाहिए:

फिजिकल गोल्ड बनाम Gold ETF: ड्यूटी घटने से फिजिकल गोल्ड के प्रीमियम में कमी आएगी, जिससे Gold ETFs और गोल्ड फंड्स में निवेश करना अधिक फायदेमंद और सुरक्षित विकल्प बन सकता है।

ज्वेलरी और माइंडिंग स्टॉक्स: सोने के दाम घटने और बिक्री बढ़ने से प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों और गोल्ड-लिंक्ड शेयरों के मार्जिन और प्रदर्शन में सुधार हो सकता है।

सरकार की ओर से आधिकारिक ऐलान होते ही सर्राफा बाजार में सोने की नई दरें लागू हो जाएंगी। अगर आप त्योहारी सीजन या शादियों के लिए सोने की खरीदारी या गोल्ड ETF में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो ड्यूटी में संभावित कटौती के इस फैसले पर करीबी नजर बनाए रखना समझदारी होगी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

Rajni Raman Sharma

इंदौर। जनवादी लेखक संघ, इंदौर के अध्यक्ष रजनी रमण शर्मा का आज तड़के उनके पैतृक शहर बीकानेर में निधन हो गया। वे साहित्य और रंगकर्म के जाने-माने मर्मज्ञ थे। मूलतः राजस्थान के निवासी होने के बावजूद उनके हृदय में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की संस्कृति एक साथ धड़कती थी।

 

साहित्य क्षेत्र में 'तुम्हारे आस-पास' (उपन्यास), अनेक कविताओं और आलेखों के साथ-साथ आकाशवाणी के राजस्थान, दिल्ली तथा मध्य प्रदेश केंद्रों से ब्रज भाषा में लिखे उनके साहित्य का प्रसारण होता रहा। इसके अतिरिक्त, इन राज्यों के आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण रही। साहित्य अकादमियों से लेकर देश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के मंचों पर एक कुशल संचालक और सहभागी के रूप में उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी आवाज़ में एक खास किस्म का जादू और कसक थी, जो श्रोताओं को बाँधकर रखती थी।

 

रजनी रमण जी ने घासीराम कोतवाल, मशीन, जुलूस, पूस की एक रात, सुन लड़की दबे पाँव आते हैं सभी मौसम, थैंक यू मिस्टर ग्लाड, शम्बूक की हत्या, हम रोशनी बाँटते हैं, भस्मासुर अभी जिंदा है, अंधेर नगरी, मेघदूत, ढोला-मारू, हाउस ऑफ मैड, आमार सोनार बांग्ला, रक्तदीप और नया युग जैसे लगभग तीन दर्जन नाटकों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। उनके अभिनय को न केवल व्यापक सराहना मिली, बल्कि उन्हें कई 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' (बेस्ट एक्टर) के पुरस्कारों से भी नवाजा गया।

 

उनके द्वारा निर्देशित नृत्य-नाटिका 'मेघदूत', 'श्री कृष्ण पारिजातम्' और 'तोड़ो राव' में उनकी विलक्षण रंग-दृष्टि दर्शकों को हतप्रभ कर देती थी। अफ़सर हुसैन और अलका जी जैसे दिग्गज रंगकर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले रजनी रमण जी को राजस्थान संगीत नाटक अकादमी द्वारा भी सम्मानित किया गया था। वे नाटक लेखन, अभिनय, तकनीकी निर्देशन, मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था—रंगमंच की हर विधा में प्रवीण थे। उन्होंने जिस भी क्षेत्र में कार्य किया, वहाँ अपनी अमिट छाप छोड़ी।

 

वर्ष 2013 से वे जनवादी लेखक संघ, इंदौर के अध्यक्ष पद पर आसीन थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनवरत 150 मासिक रचना-पाठों का सफल आयोजन कराया और इंदौर इकाई को देश की सबसे सक्रिय इकाइयों में से एक के रूप में स्थापित किया।

 

जनवादी लेखक संघ, इंदौर की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि!

Gold- Silver Price Today: सोना ₹1.63 लाख के नीचे, चांदी ₹2600 हुई सस्ती, क्या यह है खरीदारी का सही समय

Gold- Silver Price Today: भारत में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मंगलवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 500 रुपये गिरकर 1,62,933 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। 595 लॉट का कारोबार हुआ। जानकारों का मानना ​​है कि सोने-चांदी की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है।

वहीं फ्यूचर्स ट्रेड में चांदी की कीमतें 903 रुपये गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, क्योंकि ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन कम कर दीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स 903 रुपये या 0.37 प्रतिशत गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, जिसमें 1,702 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स 0.23 प्रतिशत गिरकर 4,641.42 डॉलर प्रति औंस हो गए।न्यूयॉर्क में चांदी 1.04 प्रतिशत गिरकर 68.22 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

गिरावट की क्या है वजह 

डॉलर इंडेक्स लगातार तीन सेशन से बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे सोने की चमक फीकी पड़ रही है। महंगाई और बढ़ते अमेरिकी कर्ज की चिंताओं के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड में बिकवाली हुई, जिससे अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई।

बाजार की नजरें बुधवार को आने वाले US पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर हैं, जो US फेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है। साथ ही, शुक्रवार को जैक्सन होल सिम्पोजियम में चेयरमैन केविन वॉर्श के पहले भाषण पर भी नजरें टिकी हैं, जिससे ब्याज दरों की चाल के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

क्या है निवेश का सही समय

VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशन्स लीड रॉस मैक्सवेल ने कहा कि अगस्त में चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। इसकी वजहें हैं – ब्याज दरों को लेकर कम होती उम्मीदें, कमज़ोर USD, कीमती धातुओं की फिर से बढ़ती मांग और सरकारी कर्ज़ व महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं। चांदी को मज़बूत इंडस्ट्रियल डिमांड (खासकर रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे टेक्नोलॉजी सेक्टर से) का भी फ़ायदा मिल रहा है, और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी इसे और सहारा दे रही हैं।

हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

जिन निवेशकों के पास पहले से चांदी है, उनके लिए इसे बनाए रखना एक अच्छा फ़ैसला हो सकता है, खासकर अगर यह उनके डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो का हिस्सा है। लेकिन नए निवेशकों के लिए, महीने भर में हुई लगभग 20% की तेज़ी के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। इतनी ज़बरदस्त तेज़ी के बाद एक ही बार में खरीदने के बजाय, डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर हो सकता है।

निवेशकों को तभी बेचने के बारे में सोचना चाहिए जब उनके निवेश का आधार (investment thesis) बदल गया हो या पोर्टफोलियो में चांदी का हिस्सा ज़रूरत से ज़्यादा हो गया हो।

Silver Price Today: खरीदारी से पहले जानें क्या है आज का ताजा भाव, चेक करें 10 प्रमुख शहरों की लिस्ट

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: विदेश में 3 महीने के हाई के करीब पहुंचा सोना, जैक्सन होल से पहले फेड के कदम पर बाजार की नजर

Gold Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें 3 महीने के उच्चतम स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। ट्रेडर्स बॉन्ड मार्केट में US ट्रेजरी के आने वाले कदमों का आकलन कर रहे हैं। यह आकलन एक अप्रत्याशित दखल के बाद हो रहा है जिसने फिस्कल पॉलिसी (राजकोषीय नीति) को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।

COMEX गोल्ड में 1% यानी 46.90 की बड़ी बढ़त हुई और यह पिछले क्लोज 4,710.10 से बढ़कर 4,744.70 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, COMEX सिल्वर 1.26% या 0.861 बढ़कर 69.455 पर पहुंच गई, जबकि पिछला क्लोज 68.96 था।

ट्रेजरी द्वारा लॉन्ग-टर्म सरकारी कर्ज की बायबैक (वापसी खरीद) बढ़ाने के बाद लगातार चार सेशन में 7% से अधिक की बढ़त के साथ बुलियन की कीमत $4,680 प्रति औंस के करीब पहुंच गई है।

इस अप्रत्याशित कदम ने कर्ज लेने की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और डॉलर पर दबाव डाला है। जिससे सोना (जिसकी कीमत डॉलर में तय होती है) कई खरीदारों के लिए सस्ता हो गया है।

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने महंगे कर्ज की बायबैक को और बढ़ाने की अपनी तैयारी का संकेत दिया है, हालांकि सोमवार को उन्होंने कोई अतिरिक्त संकेत नहीं दिया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि केविन वॉर्श शुक्रवार को सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल बैंक के चेयरमैन के तौर पर लगातार बनी हुई महंगाई पर फेडरल रिजर्व को कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इस पर अपना नजरिया स्पष्ट करेंगे।

US कर्ज की लागत को मैनेज करने के हालिया कदमों ने महंगाई और डॉलर की कमजोरी को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इससे उस ‘डीबेसमेंट नैरेटिव’ (मुद्रा के मूल्य में गिरावट की धारणा) की वापसी का संकेत मिलता है, जिसने 2025 में सोने की जबरदस्त तेजी में योगदान दिया था।

सोने की इस उल्लेखनीय रिकवरी ने धातु को महत्वपूर्ण 200-दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर पहुंचा दिया है, जिसे अक्सर तेजी का संकेत (बुलिश टेक्निकल इंडिकेटर) माना जाता है।

बढ़ते ग्लोबल ट्रेड टेंशन (व्यापारिक तनाव) से इस धातु की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) वाली खासियत को भी चुनौती मिल रही है। US ने ईरान को अलग-थलग करने की रणनीति के तहत उसके साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते बातचीत विफल होने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कनाडा के साथ व्यापारिक संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

 

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Gold Price Today: 5 महीने के हाई पर सोना, दिल्ली में ₹1.64 लाख के पार; चांदी ₹3500 उछली

Gold Price Today: दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार, 24 अगस्त को सोने की कीमत 5 महीने से ज्यादा के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। 24 कैरेट वाला सोना ₹900 बढ़कर ₹1,64,400 प्रति 10 ग्राम हो गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,63,500 प्रति 10 ग्राम था।

5 महीने के हाई पर सोना

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना आखिरी बार इस स्तर के आसपास 9 मार्च को था। उस समय इसका भाव ₹1,64,300 प्रति 10 ग्राम था।

सोने में तेजी के पीछे वैश्विक बाजार में मजबूत संकेत और सुरक्षित निवेश की मांग को अहम वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

चांदी भी लगातार तीसरे दिन चढ़ी

चांदी की कीमत में भी सोमवार को तेजी रही। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र था, जब चांदी महंगी हुई। इसकी कीमत ₹3,500 बढ़कर ₹2,53,500 प्रति किलो हो गई।

पिछले सत्र में चांदी ₹2,50,000 प्रति किलो पर बंद हुई थी। यह स्तर आखिरी बार 17 अप्रैल को देखा गया था, जब चांदी ₹2,53,000 प्रति किलो पर थी।

कमजोर डॉलर से मिला सोने को सहारा

Lemonn Markets Desk के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि घरेलू बाजार में सोने की तेजी के पीछे कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग बड़ी वजह रही। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित एसेट्स की तरफ बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत बढ़ी। स्पॉट गोल्ड 42.45 डॉलर यानी करीब 1% बढ़कर 4,646.54 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही।

अब महंगाई पर होगी नजर

विश्लेषकों के मुताबिक सोने की अगली चाल सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव से तय नहीं होगी। अब महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Kotak Securities की AVP Commodity Research कायनात चेनवाला के मुताबिक, ईरान तनाव के कारण अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। बाजार यह देखेगा कि फेड इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है या इससे महंगाई का बड़ा जोखिम पैदा होता है।

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