Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

Rajni Raman Sharma: सृजन का एक सुनहरा सितारा अस्त हुआ

Rajni Raman Sharma

इंदौर। जनवादी लेखक संघ, इंदौर के अध्यक्ष रजनी रमण शर्मा का आज तड़के उनके पैतृक शहर बीकानेर में निधन हो गया। वे साहित्य और रंगकर्म के जाने-माने मर्मज्ञ थे। मूलतः राजस्थान के निवासी होने के बावजूद उनके हृदय में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की संस्कृति एक साथ धड़कती थी।

 

साहित्य क्षेत्र में 'तुम्हारे आस-पास' (उपन्यास), अनेक कविताओं और आलेखों के साथ-साथ आकाशवाणी के राजस्थान, दिल्ली तथा मध्य प्रदेश केंद्रों से ब्रज भाषा में लिखे उनके साहित्य का प्रसारण होता रहा। इसके अतिरिक्त, इन राज्यों के आकाशवाणी और दूरदर्शन केंद्रों के विभिन्न कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण रही। साहित्य अकादमियों से लेकर देश की कई प्रतिष्ठित संस्थाओं के मंचों पर एक कुशल संचालक और सहभागी के रूप में उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। उनकी आवाज़ में एक खास किस्म का जादू और कसक थी, जो श्रोताओं को बाँधकर रखती थी।

 

रजनी रमण जी ने घासीराम कोतवाल, मशीन, जुलूस, पूस की एक रात, सुन लड़की दबे पाँव आते हैं सभी मौसम, थैंक यू मिस्टर ग्लाड, शम्बूक की हत्या, हम रोशनी बाँटते हैं, भस्मासुर अभी जिंदा है, अंधेर नगरी, मेघदूत, ढोला-मारू, हाउस ऑफ मैड, आमार सोनार बांग्ला, रक्तदीप और नया युग जैसे लगभग तीन दर्जन नाटकों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। उनके अभिनय को न केवल व्यापक सराहना मिली, बल्कि उन्हें कई 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता' (बेस्ट एक्टर) के पुरस्कारों से भी नवाजा गया।

 

उनके द्वारा निर्देशित नृत्य-नाटिका 'मेघदूत', 'श्री कृष्ण पारिजातम्' और 'तोड़ो राव' में उनकी विलक्षण रंग-दृष्टि दर्शकों को हतप्रभ कर देती थी। अफ़सर हुसैन और अलका जी जैसे दिग्गज रंगकर्मियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले रजनी रमण जी को राजस्थान संगीत नाटक अकादमी द्वारा भी सम्मानित किया गया था। वे नाटक लेखन, अभिनय, तकनीकी निर्देशन, मंच सज्जा और प्रकाश व्यवस्था—रंगमंच की हर विधा में प्रवीण थे। उन्होंने जिस भी क्षेत्र में कार्य किया, वहाँ अपनी अमिट छाप छोड़ी।

 

वर्ष 2013 से वे जनवादी लेखक संघ, इंदौर के अध्यक्ष पद पर आसीन थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अनवरत 150 मासिक रचना-पाठों का सफल आयोजन कराया और इंदौर इकाई को देश की सबसे सक्रिय इकाइयों में से एक के रूप में स्थापित किया।

 

जनवादी लेखक संघ, इंदौर की ओर से उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि!

Gold- Silver Price Today: सोना ₹1.63 लाख के नीचे, चांदी ₹2600 हुई सस्ती, क्या यह है खरीदारी का सही समय

Gold- Silver Price Today: भारत में सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। मंगलवार को स्पॉट मार्केट में मांग घटने की वजह से फ्यूचर्स ट्रेड में सोने की कीमतें 500 रुपये गिरकर 1,62,933 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गईं। 595 लॉट का कारोबार हुआ। जानकारों का मानना ​​है कि सोने-चांदी की कीमतों में यह गिरावट स्पॉट मार्केट में कमजोर मांग के कारण आई है।

वहीं फ्यूचर्स ट्रेड में चांदी की कीमतें 903 रुपये गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम हो गईं, क्योंकि ट्रेडर्स ने अपनी पोजीशन कम कर दीं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर, सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के कॉन्ट्रैक्ट्स 903 रुपये या 0.37 प्रतिशत गिरकर 2,43,317 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गए, जिसमें 1,702 लॉट का कारोबार हुआ।

ग्लोबल स्तर पर, न्यूयॉर्क में सोने के फ्यूचर्स 0.23 प्रतिशत गिरकर 4,641.42 डॉलर प्रति औंस हो गए।न्यूयॉर्क में चांदी 1.04 प्रतिशत गिरकर 68.22 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।

गिरावट की क्या है वजह 

डॉलर इंडेक्स लगातार तीन सेशन से बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जिससे सोने की चमक फीकी पड़ रही है। महंगाई और बढ़ते अमेरिकी कर्ज की चिंताओं के कारण लंबी अवधि के बॉन्ड में बिकवाली हुई, जिससे अमेरिकी 10-वर्षीय और 30-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई।

बाजार की नजरें बुधवार को आने वाले US पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर हैं, जो US फेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है। साथ ही, शुक्रवार को जैक्सन होल सिम्पोजियम में चेयरमैन केविन वॉर्श के पहले भाषण पर भी नजरें टिकी हैं, जिससे ब्याज दरों की चाल के बारे में संकेत मिल सकते हैं।

क्या है निवेश का सही समय

VT मार्केट्स के ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशन्स लीड रॉस मैक्सवेल ने कहा कि अगस्त में चांदी की कीमतों में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई है। इसकी वजहें हैं – ब्याज दरों को लेकर कम होती उम्मीदें, कमज़ोर USD, कीमती धातुओं की फिर से बढ़ती मांग और सरकारी कर्ज़ व महंगाई को लेकर बढ़ती चिंताएं। चांदी को मज़बूत इंडस्ट्रियल डिमांड (खासकर रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे टेक्नोलॉजी सेक्टर से) का भी फ़ायदा मिल रहा है, और सप्लाई से जुड़ी दिक्कतें भी इसे और सहारा दे रही हैं।

हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि सोने के मुकाबले चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव ज़्यादा होता है।

जिन निवेशकों के पास पहले से चांदी है, उनके लिए इसे बनाए रखना एक अच्छा फ़ैसला हो सकता है, खासकर अगर यह उनके डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो का हिस्सा है। लेकिन नए निवेशकों के लिए, महीने भर में हुई लगभग 20% की तेज़ी के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। इतनी ज़बरदस्त तेज़ी के बाद एक ही बार में खरीदने के बजाय, डॉलर कॉस्ट एवरेजिंग स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते हुए धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर हो सकता है।

निवेशकों को तभी बेचने के बारे में सोचना चाहिए जब उनके निवेश का आधार (investment thesis) बदल गया हो या पोर्टफोलियो में चांदी का हिस्सा ज़रूरत से ज़्यादा हो गया हो।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Price Today: विदेश में 3 महीने के हाई के करीब पहुंचा सोना, जैक्सन होल से पहले फेड के कदम पर बाजार की नजर

Gold Price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतें 3 महीने के उच्चतम स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। ट्रेडर्स बॉन्ड मार्केट में US ट्रेजरी के आने वाले कदमों का आकलन कर रहे हैं। यह आकलन एक अप्रत्याशित दखल के बाद हो रहा है जिसने फिस्कल पॉलिसी (राजकोषीय नीति) को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं।

COMEX गोल्ड में 1% यानी 46.90 की बड़ी बढ़त हुई और यह पिछले क्लोज 4,710.10 से बढ़कर 4,744.70 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, COMEX सिल्वर 1.26% या 0.861 बढ़कर 69.455 पर पहुंच गई, जबकि पिछला क्लोज 68.96 था।

ट्रेजरी द्वारा लॉन्ग-टर्म सरकारी कर्ज की बायबैक (वापसी खरीद) बढ़ाने के बाद लगातार चार सेशन में 7% से अधिक की बढ़त के साथ बुलियन की कीमत $4,680 प्रति औंस के करीब पहुंच गई है।

इस अप्रत्याशित कदम ने कर्ज लेने की बढ़ती लागत को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं और डॉलर पर दबाव डाला है। जिससे सोना (जिसकी कीमत डॉलर में तय होती है) कई खरीदारों के लिए सस्ता हो गया है।

ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने महंगे कर्ज की बायबैक को और बढ़ाने की अपनी तैयारी का संकेत दिया है, हालांकि सोमवार को उन्होंने कोई अतिरिक्त संकेत नहीं दिया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इन्वेस्टर्स को उम्मीद है कि केविन वॉर्श शुक्रवार को सालाना जैक्सन होल कॉन्फ्रेंस में सेंट्रल बैंक के चेयरमैन के तौर पर लगातार बनी हुई महंगाई पर फेडरल रिजर्व को कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इस पर अपना नजरिया स्पष्ट करेंगे।

US कर्ज की लागत को मैनेज करने के हालिया कदमों ने महंगाई और डॉलर की कमजोरी को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इससे उस ‘डीबेसमेंट नैरेटिव’ (मुद्रा के मूल्य में गिरावट की धारणा) की वापसी का संकेत मिलता है, जिसने 2025 में सोने की जबरदस्त तेजी में योगदान दिया था।

सोने की इस उल्लेखनीय रिकवरी ने धातु को महत्वपूर्ण 200-दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर पहुंचा दिया है, जिसे अक्सर तेजी का संकेत (बुलिश टेक्निकल इंडिकेटर) माना जाता है।

बढ़ते ग्लोबल ट्रेड टेंशन (व्यापारिक तनाव) से इस धातु की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) वाली खासियत को भी चुनौती मिल रही है। US ने ईरान को अलग-थलग करने की रणनीति के तहत उसके साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई की धमकी दी है। इसके अलावा, पिछले हफ्ते बातचीत विफल होने के बाद दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कनाडा के साथ व्यापारिक संघर्ष की ओर बढ़ रही है।

 

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Gold Price Today: 5 महीने के हाई पर सोना, दिल्ली में ₹1.64 लाख के पार; चांदी ₹3500 उछली

Gold Price Today: दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार, 24 अगस्त को सोने की कीमत 5 महीने से ज्यादा के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई। 24 कैरेट वाला सोना ₹900 बढ़कर ₹1,64,400 प्रति 10 ग्राम हो गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,63,500 प्रति 10 ग्राम था।

5 महीने के हाई पर सोना

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, सोना आखिरी बार इस स्तर के आसपास 9 मार्च को था। उस समय इसका भाव ₹1,64,300 प्रति 10 ग्राम था।

सोने में तेजी के पीछे वैश्विक बाजार में मजबूत संकेत और सुरक्षित निवेश की मांग को अहम वजह माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।

चांदी भी लगातार तीसरे दिन चढ़ी

चांदी की कीमत में भी सोमवार को तेजी रही। यह लगातार तीसरा कारोबारी सत्र था, जब चांदी महंगी हुई। इसकी कीमत ₹3,500 बढ़कर ₹2,53,500 प्रति किलो हो गई।

पिछले सत्र में चांदी ₹2,50,000 प्रति किलो पर बंद हुई थी। यह स्तर आखिरी बार 17 अप्रैल को देखा गया था, जब चांदी ₹2,53,000 प्रति किलो पर थी।

कमजोर डॉलर से मिला सोने को सहारा

Lemonn Markets Desk के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि घरेलू बाजार में सोने की तेजी के पीछे कमजोर अमेरिकी डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग बड़ी वजह रही। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों का रुझान सुरक्षित एसेट्स की तरफ बढ़ा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत बढ़ी। स्पॉट गोल्ड 42.45 डॉलर यानी करीब 1% बढ़कर 4,646.54 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं चांदी करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर स्थिर रही।

अब महंगाई पर होगी नजर

विश्लेषकों के मुताबिक सोने की अगली चाल सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव से तय नहीं होगी। अब महंगाई और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Kotak Securities की AVP Commodity Research कायनात चेनवाला के मुताबिक, ईरान तनाव के कारण अगर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो फेडरल रिजर्व के सामने महंगाई को लेकर चुनौती बढ़ सकती है। बाजार यह देखेगा कि फेड इस बढ़ोतरी को अस्थायी मानता है या इससे महंगाई का बड़ा जोखिम पैदा होता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Gold Price Today: सोना ₹600 उछलकर ₹1.56 लाख के पार, कमजोर डॉलर से बढ़ी चमक

Gold Price Today: कमजोर अमेरिकी डॉलर और ग्लोबल बाजार में तेजी के चलते सोमवार को सोने की कीमतों में जोरदार उछाल आया। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट वाला सोना ₹600 चढ़कर ₹1,56,800 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुक्रवार को इसका भाव ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम था।

वहीं, चांदी की कीमत में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में ₹2,40,000 प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

सोने के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?

HDFC Securities के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटी) सौमिल गांधी के मुताबिक, अमेरिका के कमजोर आर्थिक आंकड़ों के बाद फेडरल रिजर्व के सख्त रुख की उम्मीद कम हुई है। इससे डॉलर पर दबाव बढ़ा और सोने की मांग को सहारा मिला।

पिछले हफ्ते अमेरिका में महंगाई, रोजगार और रिटेल सेल्स के आंकड़े उम्मीद से नरम रहे। इससे बाजार को लगने लगा कि फेड जल्द ब्याज दरें बढ़ाने से बच सकता है।

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ग्लोबल बाजार में भी तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना मजबूत रहा। स्पॉट गोल्ड करीब 0.5% बढ़कर 4,398 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया। वहीं, चांदी 1% से ज्यादा चढ़कर 65.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

Mirae Asset ShareKhan के हेड ऑफ कमोडिटीज प्रवीण सिंह का कहना है कि कमजोर डॉलर और कच्चे तेल की सीमित कीमतें फिलहाल सोने को सहारा दे रही हैं।

इस हफ्ते किन बातों पर रहेगी नजर?

जियोपॉलिटिकल मोर्चे पर अमेरिका-ईरान तनाव अब भी बाजार की नजर में है। हालांकि, इस हफ्ते निवेशकों की सबसे बड़ी नजर अमेरिकी फेड की FOMC बैठक के मिनट्स पर रहेगी।

LKP Securities के VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, फेड के मिनट्स से ब्याज दरों के अगले संकेत मिल सकते हैं। इससे सोने की कीमतों की अगली दिशा तय होने में मदद मिलेगी।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर,

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मजदूरों ने जमीन खोदी तो मिलीं 49 सोने की ईंटें, खजाने की कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

बेल्जियम में सीवर सिस्टम बनाने के लिए जमीन की खुदाई कर रहे निर्माण मजदूरों के साथ कुछ ऐसा हुआ, जिसकी उन्होंने शायद कल्पना भी नहीं की होगी। खुदाई के दौरान जमीन के नीचे से अचानक बड़ी मात्रा में सोना बरामद हुआ और देखते ही देखते पूरा निर्माण स्थल हैरानी का केंद्र बन गया। मजदूरों को वहां सोने की ईंटें और सिक्के मिले, जिनकी कुल अनुमानित कीमत करीब 98 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में खजाना सामने आने के बाद मामले की सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सोने को अपने कब्जे में लिया और उसकी गिनती व जांच के बाद सुरक्षित सरकारी खजाने में रखवा दिया।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में मजदूरों को यकीन ही नहीं हुआ कि जमीन के नीचे इतना कीमती खजाना छिपा हो सकता है। अब हर किसी के मन में सवाल है कि आखिर करोड़ों का यह सोना वहां पहुंचा कैसे?

सीवर बनाने के लिए खोदी जमीन, निकल आया सोना

यह हैरान करने वाला मामला बेल्जियम के Dendermonde इलाके का है, जो राजधानी ब्रुसेल्स से करीब 18 मील उत्तर में स्थित है। यहां निर्माण कार्य के दौरान मजदूर जमीन की खुदाई कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें भारी मात्रा में सोना दिखाई दिया। स्थानीय पुलिस के अनुसार, खुदाई में “बड़ी मात्रा में सोना” बरामद हुआ। अचानक सामने आए इस खजाने ने काम कर रहे मजदूरों को कुछ पल के लिए सकते में डाल दिया।

49 सोने की ईंटें और सिक्कों से भरी बाल्टी

पुलिस द्वारा साझा की गई तस्वीरों में मेज पर 49 सोने की ईंटें रखी नजर आईं। इसके अलावा एक बाल्टी में बड़ी संख्या में सोने के सिक्के भी दिखाई दिए। पूरे खजाने की अनुमानित कीमत करीब 90 लाख यूरो यानी 98 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। इतनी बड़ी रकम का सोना एक साथ मिलने की खबर ने इलाके में भी हलचल मचा दी।

मजदूरों को पहले यकीन ही नहीं हुआ

खजाना मिलने के बाद पुलिस को इसकी सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और सोने को अपने कब्जे में ले लिया। बरामद खजाने की सूची तैयार करने के बाद उसे कड़ी सुरक्षा वाले सरकारी खजाने में सुरक्षित रख दिया गया। 18 वर्षीय छात्र और निर्माण मजदूर Kobe ने बेल्जियम के VRT को बताया कि शुरुआत में मजदूरों को अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हो रहा था।

जमीन के नीचे छिपा था इतना बड़ा राज

आमतौर पर निर्माण कार्य के दौरान जमीन से पत्थर, मिट्टी या पुरानी चीजें मिलने की उम्मीद होती है, लेकिन करोड़ों रुपये का सोना मिलना बेहद असाधारण घटना है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह सोना वहां कैसे पहुंचा और इसे जमीन के नीचे किसने छिपाया था। इस अनोखी खोज ने एक साधारण निर्माण स्थल को अचानक करोड़ों के खजाने की कहानी में बदल दिया है।

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Gold Silver Price: 2 महीने के हाई पर पहुंचने के बाद सोना हुआ और भी महंगा, चांदी फिसली

Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में गुरुवार (13 अगस्त) की शुरुआती ट्रेडिंग में सोने की कीमतों में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, जबकि चांदी की कीमत में गिरावट आई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बाजार महंगाई के ताजा आंकड़ों के बाद अमेरिकी ब्याज दरों के भविष्य पर विचार कर रहे थे। COMEX पर सोना $4,473.40 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जो पिछली क्लोजिंग से $5.90 या 0.13% अधिक था। इस मेटल ने दिन के दौरान $4,509.10 प्रति औंस का उच्चतम और $4,456.50 प्रति औंस का निचला स्तर छुआ।

COMEX पर चांदी की कीमत $65.58 प्रति औंस थी, जिसमें $0.12 या 0.18% की गिरावट आई। सेशन के दौरान इसकी कीमत $66.45 और $65.22 प्रति औंस के बीच रही।

ये ताजा बदलाव बुधवार यानी 12 अगस्त को सोने की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद आए हैं। उस दिन जुलाई के अमेरिकी महंगाई के आंकड़े उम्मीद के मुताबिक आने के बाद सोना दो महीने से अधिक समय के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था।

बुधवार (12 अगस्त) को स्पॉट गोल्ड 0.9% बढ़कर $4,406.64 प्रति औंस हो गया, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.6% बढ़कर $4,467.50 प्रति औंस पर बंद हुआ। जून में 0.4% की गिरावट के बाद जुलाई में अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में 0.1% की बढ़ोतरी हुई। यह आंकड़ा बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था और इससे निकट भविष्य में सख्त मौद्रिक नीति की ओर बढ़ने की उम्मीदें कम हो गईं।

बाजार अब फेडरल रिजर्व की सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना कम मान रहे हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार, महंगाई के आंकड़ों से पहले दरें बढ़ने की संभावना 46% थी, जो अब घटकर लगभग 40% हो गई है।

आमतौर पर ब्याज दरें बढ़ने पर सोने पर दबाव पड़ता है क्योंकि अधिक यील्ड (रिटर्न) से नॉन-यील्डिंग एसेट (जिससे कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता) को रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट बढ़ जाती है। इसके विपरीत, कम या स्थिर दरों की उम्मीदें बुलियन की मांग को सहारा दे सकती हैं।

कमजोर अमेरिकी डॉलर ने भी सोने को कुछ सहारा दिया है। निवेशक अब महंगाई और ब्याज दरों के भविष्य के बारे में और संकेतों के लिए गुरुवार को आने वाले अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स पर नजर रखेंगे।

कीमती धातुओं के लिए भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी एक अन्य कारक बने हुए हैं। शिपिंग रूट को लेकर फिर से बढ़े तनाव और ईरान-समर्थक हूथी विद्रोहियों से जुड़े टकराव का असर तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, और इसके चलते महंगाई और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें भी प्रभावित हो सकती हैं।

बुधवार (12 अगस्त) को चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई। यह 1.3% बढ़कर $65.49 प्रति औंस पर पहुंच गई और 22 जून के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर को छू लिया।

 

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Gold Outlook: सोने में अगली तेजी में Gen Z का होगा बड़ा हाथ, जानिए WGC की रिपोर्ट क्या कहती है

Gold Outlook: गोल्ड के साथ रिश्ता बदल रहा है। इसमें जेनजी का बड़ा हाथ है। इस बारे में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की नई रिपोर्ट में बताया गया है। इसमें कहा गया है कि इंडिया में गोल्ड में अगली बड़ी तेजी में सिर्फ ज्वेलरी की खरीदारी नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी, डिजिटल फाइनेंस और न्यू-एज इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स का हाथ होगा।

गोल्ड में निवेश के तरीके में आ रहा है बदलाव

WGC की स्वर्णिम उड़ान 20247 में कई दिलचस्प बातें बताई गई हैं। यह रिपोर्ट तब आई है, जब सोने की कीमतों में पिछले कुछ सालों में बड़ी तेजी से लोगों की खरीदारी की आदत में बदलाव आ रहा है। हालांकि, अब भी भारत में लोग ज्वेलरी पर काफी पैसे खर्च कर रहे हैं।

भारत में लोगों के पास 31000 टन सोना

इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लोगों के पास 31,000 टन सोना है। इसकी कीमत करीब 315 लाख करोड़ रुपये (3.4 ट्रिलियन डॉलर) है। इसमें से ज्यादातर सोना घरों में बेकार पड़ा है। इस वजह से भारत में यह सबसे ज्यादा अंडरयूटिलाइज्ड एसेट है। हालांकि, इसके पीछे सोने को लेकर लोगों की पारंपरिक सोच है।

Gen Z गोल्ड को अलग नजरिए से देख रहे

WGC के मुताबिक, 1997 से 2012 के बीच जन्म लेने वाले लोग सोने को सिर्फ विरासत में मिले एसेट के रूप में नहीं देखते हैं। उनका जोर सोने की लिक्विडिटी और डिजिटल एक्सेस जैसी चीजों पर भी है। यही वजह है कि सिर्फ फिजिकल ज्वेलरी के बजाय वे डिजिटल गोल्ड और टेक्नोलॉजी आधारित इनवेस्टमेंट प्रोडक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

ज्वेलर्स युवा खरीदारों को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि युवा इनवेस्टर्स गोल्ड में निवेश करने से पहले ऑनलाइन रिसर्च करते हैं। इस वजह से ज्वेलर्स इन नए कस्टमर्स को अट्रैक्ट करने के तरीके तलाश रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 2035 तक जेनजी की कंज्यूमर स्पेंडिंग करीब 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच सकती है। इसका असर भविष्य में इंडिया के गोल्ड मार्केट पर दिखेगा।

फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बना रहा गोल्ड

डब्ल्यूजीसी के मुताबिक, इंडिया में गोल्ड की डिमांड अब सिर्फ ज्वेलरी तक सीमित रहने वाली नहीं है। गोल्ड अब फाइनेंशियल ईकोसिस्टम का हिस्सा बन रहा है। इसमें गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम, रिसाइक्लिंग नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स, डिजिटल गोल्ड और बुलियन बैंकिंग का बड़ा हाथ हो सकता है। इस इंटिग्रेशन से घरों में पड़ा सोना भी इकोनॉमी का हिस्सा बन सकता है।

भारत का होकर भी ये अनोखा शहर, जो 16 अगस्त को मनाता है स्वतंत्रता दिवस!

भारत में हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। लेकिन एक ऐसा शहर भी है, जहां आज़ादी का जश्न 16 अगस्त को मनाने की परंपरा है। इसके पीछे चार वीर स्वतंत्रता सेनानियों का बलिदान जुड़ा है, जिन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी थी।

 

अनोखी परंपरा

जहां पूरा देश 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं बिहार के बक्सर जिले का डुमरांव 16 अगस्त को भी उतने ही उत्साह के साथ यह दिन मनाता है। यहां लोग झंडा फहराते हैं, शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और उनके बलिदान को याद करते हैं। यह परंपरा कई दशकों से लगातार निभाई जा रही है और आज भी पूरे सम्मान के साथ जारी है। उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हैं जिनके साहस और बलिदान ने आजादी की लड़ाई को नई ताकत दी।

 

ब्रिटिश शासन के कब्जा

साल 1942 में महात्मा गांधी ने ‘करो या मरो’ का नारा दिया था, जिसके बाद पूरे देश में भारत छोड़ो आंदोलन तेज हो गया। इसी आंदोलन के दौरान डुमरांव के हजारों लोग तिरंगा लेकर पुलिस थाने की ओर बढ़े। उनका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के कब्जे वाली इमारत पर तिरंगा फहराकर आजादी की लड़ाई में अपना योगदान देना था। इस आंदोलन में महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

 

वीरों का बलिदान

जब प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए, तो अंग्रेज पुलिस ने उन पर गोलियां चला दीं। इस गोलीबारी में कपिल मुनि, गोपाल कहार, रामदास सोनार और रामदास लोहार शहीद हो गए। कई अन्य लोग भी घायल हुए, लेकिन लोगों का हौसला नहीं टूटा। अपने साथियों के बलिदान के बावजूद आंदोलन जारी रहा और आखिरकार प्रदर्शनकारियों ने तिरंगा फहराकर अपने संकल्प को पूरा किया।

 

शहीद स्मारक

देश आजाद होने के बाद जिस पुलिस थाने में यह घटना हुई थी, उसे चारों शहीदों की याद में स्मारक में बदल दिया गया। यह स्मारक आज भी लोगों को आजादी की लड़ाई और उन वीरों के बलिदान की याद दिलाता है। हर साल 16 अगस्त को यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को नमन करते हैं। यह परंपरा हमें याद दिलाती है कि भारत की आजादी लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान का परिणाम है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

 

सरकारी सम्मान

डुमरांव की इस ऐतिहासिक परंपरा को समय के साथ सरकारी मान्यता भी मिली। बिहार सरकार ने वर्ष 2015 में 16 अगस्त को होने वाले इस आयोजन को आधिकारिक पहचान दी। इसके बाद इस दिन होने वाले कार्यक्रमों को और अधिक महत्व मिला। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शहीद स्मारक पर चारों वीरों की प्रतिमाओं का अनावरण किया, जिससे आने वाली पीढ़ियां भी उनके बलिदान को याद रख सकें।

Gold Silver price Today: 7 हफ्ते के हाई पर पहुंचा सोना, चांदी भी चढ़ी, बुलियन में तेजी की क्या है वजह?

Gold Silver price Today: इंटरनेशनल मार्केट में सोने की कीमतों में लगातार चौथे दिन तेजी देखने को मिली। वहीं चांदी की कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली। जियोपॉलिटिकल चिंताओं में कमी, कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और गिरती ट्रेज़री यील्ड जैसे कारणों ने सोने-चांदी की मांग को बढ़ावा दिया। COMEX पर, सोने के फ़्यूचर्स 1.3% बढ़कर $4,361.30 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के फ़्यूचर्स 0.65% बढ़कर $62.695 प्रति औंस हो गए। स्पॉट मार्केट में, सोना $4,285.84 प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गया, जो 18 जून के बाद का उच्चतम स्तर है।

यह हालिया बढ़ोतरी पिछले सत्र में बुलियन (सोना-चांदी) में फरवरी के बाद की सबसे बड़ी एक-दिवसीय बढ़त के बाद हुई है।

कीमतों में बढ़त क्यों

कमजोर डॉलर से सस्ता होता है सोना

प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर कमज़ोर हुआ, जिससे डॉलर-मूल्य वाली कमोडिटीज जैसे सोना और चांदी विदेशी खरीदारों के लिए अधिक किफायती हो गई। कमजोर डॉलर आमतौर पर वैश्विक बाज़ारों में बुलियन की मांग को समर्थन देता है।

बॉन्ड यील्ड में गिरावट

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में भी कमी आई, जिससे सोने जैसी बिना यील्ड (ब्याज) वाली संपत्तियों को रखने की अवसर लागत (opportunity cost) कम हो गई। जब बॉन्ड यील्ड गिरती है, तो निवेशक अक्सर कीमती धातुओं में निवेश बढ़ाते हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदें

बाजारों में तब आशावाद देखा गया जब रिपोर्टों से संकेत मिला कि राजनयिक प्रयासों से पश्चिम एशिया में कोई समाधान निकल सकता है, जिसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर चर्चा भी शामिल है। तनाव कम होने की उम्मीदों ने तेल की कीमतों को नीचे धकेल दिया।

कच्चे तेल की कम कीमतें ऊर्जा-जनित महंगाई के डर को भी कम करती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक रूप से ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो जाती हैं। इससे सोने के लिए एक अनुकूल माहौल बनता है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें चर्चा में

निजी पेरोल डेटा के उम्मीद से कमजोर रहने और लेबर मार्केट में कुछ नरमी के संकेत मिलने के बाद निवेशक अमेरिकी मौद्रिक नीति के दृष्टिकोण का भी पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।

बाजार पार्टिसिपेट अब शुक्रवार (7 अगस्त) को आने वाली अमेरिकी नॉन-फ़ार्म पेरोल रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहे हैं। कमजोर जॉब्स रिपोर्ट ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को मजबूत कर सकती है, जिससे सोने को और समर्थन मिलेगा। इसके विपरीत, उम्मीद से मज़बूत रोज़गार डेटा सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों को फिर से जगाकर बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

चांदी का क्या हाल है?

चांदी भी मजबूत बनी रही, जिसे उन्हीं मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों का समर्थन मिला जिनसे सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। कम बॉन्ड यील्ड और डॉलर के कमजोर होने से फायदा मिलने के अलावा, चांदी को एक कीमती और इंडस्ट्रियल मेटल, दोनों तरह की भूमिकाओं से भी सपोर्ट मिल रहा है।

निवेशकों की नजरें आने वाले US के आर्थिक डेटा और सेंट्रल बैंक की उम्मीदों पर टिकी हैं, इसलिए आने वाले समय में सोने और चांदी, दोनों में उतार-चढ़ाव के बने रहने की संभावना है।

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