Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹3600 उछला, चांदी 3000 रुपये फिसली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 8 अक्टूबर को सोने में जोरदार तेजी देखने को मिली। यह 3,600 रुपये के उछाल के साथ 1,52,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। 7 अक्टूबर को दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 1,48,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। हालांकि, चांदी की कीमतों में 8 अक्टूबर को बड़ी गिरावट देखने को मिली।

फेस्टिव सीजन से पहले सोने में बढ़ी दिलचस्पी

इससे पहले लगातार दो सत्रों में सोने में गिरावट आई थी। ट्रेडर्स का कहना है कि फेस्टिवल सीजन से पहले सोने में रिटेलर्स और ज्वेलर्स की दिलचस्पी बढ़ी है, जिससे इसकी कीमतों को मजबूती मिली। ट्रेडर्स ने बताया कि ज्वेलर्स आम तौर पर फेस्टिव सीजन से पहले रॉ मैटेरियल के रूप में सोने का स्टॉक बढ़ाते हैं। त्योहारों के दौरान सोने की मांग बढ़ती है।

डॉलर में मजबूती और महंगे क्रूड से सोने में ज्यादा तेजी नहीं

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म लेमन के रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि सोने की कीमतें दो महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गई थीं। अब इसमें रिकवरी दिखी है। हालांकि, क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतें और डॉलर में मजबूती से सोने में तेजी सीमित बनी हुई है। चांदी की चाल सोने से उल्टी रही। यह 3000 रुपये गिरकर 2.24 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी, चांदी में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में 0.32 फीसदी की तेजी दिखी। यह 4,125 डॉलर प्रति औंस था। सिल्वर करीब एक फीसदी गिरकर 59.15 डॉलर प्रति औंस था। आनंदराठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड में स्थिरता रही। इससे पहले के सत्र में यह 9 हफ्ते के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

क्रूड की कीमतें 105 डॉलर प्रति बैरल पर 

उन्होंने कहा कि सोने में तेजी दिखी है, लेकिन क्रूड की कीमतें अब भी हाई लेवल पर बनी हुई हैं। खबरों के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने पेंटागन को ईरानी ठिकानों पर हमलों के विकल्पों पर विचार करने को कहा है। ये हमले अमेरिका में मिड-टर्म इलेक्शंस से पहले हो सकते हैं। उधर, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड हाई लेवल पर बनी हुई है।

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इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर

इस साल की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव और बढ़ गया।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना 1.50 लाख रुपये से नीचे आया, चांदी में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 29 सितंबर को सोने की कीमतें गिरकर 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे आ गई। बीते दो महीने में पहली बार ऐसा हुआ। इसकी वजह लोकल बाजार में कमजोर मांग और डॉलर में मजबूती है। चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

31 जुलाई के बाद पहली बार सोना 1.5 लाख से नीचे

दिल्ली में सोना 1,400 रुपये गिरकर 1,48,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले 31 जुलाई को सोने का भाव 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे था। तब सोने का भाव 1,48,300 रुपये प्रति 10 ग्राम था। चांदी का भाव बगैर किसी बदलाव के 2.32 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रहा। हालांकि, 28 सितंबर को चांदी में 5,000 रुपये की गिरावट आई थी।

सितंबर में ग्लोबल प्रेशर की वजह से सोने में तेज गिरावट

चॉइस ब्रोकिंग की एनालिस्ट पिंकी यादव ने कहा, “सितंबर में सोने में तेज गिरावट आई है। ग्लोबल प्रेशर की वजह से यह गिरकर 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है।” हालांकि, 29 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में हल्की मजबूती दिखी। लेकिन, इससे पहले के सत्र में सोना 4 फीसदी गिरा था।

क्रूड की कीमतें लगातार ऊंची बने रहने से महंगाई बढ़ने का डर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव कम होने के संकेत नहीं दिख रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिड-टर्म इलेक्शंस के बाद ईरान पर बड़े हमले की धमकी दी है। इस वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें हाई लेवल पर बनी हुई है। क्रूड के हाई लेवल पर बने रहने से महंगाई बढ़ने का डर है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के चेयरमैन केविन वॉर्श कह चुके हैं कि उनका फोकस फिलहाल महंगाई को काबू में करने पर होगा।

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अमेरिका में एक बार फिर बढ़ सकता है इंटरेस्ट रेट 

माना जा रहा है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व अगले महीने के आखिर में इंटरेस्ट रेट एक बार फिर बढ़ा सकता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर सोने की चमक घटती है। इधर, डॉलर में मजबूती जारी है। इन दोनों वजहों से सोने पर दबाव बना रह सकता है। डॉलर के मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है।

Iran-US War Update: ‘ईरान में लोग मर रहे हैं, पैसे के लिए खोलना चाहता है होर्मुज’; ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने किया पलटवार

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (26 सितंबर) को दावा किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना चाहता है, क्योंकि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते उसके पास पैसे नहीं आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने खुद ही अपने लिए मुश्किल खड़ी कर ली है। मीडिया रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना चाहते हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसे नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपना पैसा होर्मुज से मिलता है। इसलिए उन्होंने खुद को ही मात दे दी।”

ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से पूरी दुनिया के लिए परेशानी पैदा हुई। लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अब तक की सबसे बड़ी नाकेबंदी लागू कर दी। उन्होंने इसे ‘स्टील की दीवार’ बताते हुए कहा कि इसके कारण ईरान के पास अब धन का प्रवाह नहीं हो रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सोचा था कि जलडमरूमध्य बंद करने से दुनिया के लिए समस्या खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जवाब में जलडमरूमध्य को ईरान के लिए बंद कर दिया। जबकि अन्य देशों को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

ईरान के शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकराया

ट्रंप की यह टिप्पणी एक दिन बाद आई, जब उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने कतर के मध्यस्थों के जरिए ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव की घोषणा इसी सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान की थी। इसके बाद ईरान ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष का समाधान केवल कूटनीति के जरिए ही संभव है। तेहरान ने यह भी कहा कि वह अभी अपने प्रस्ताव पर अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

क्या था ईरान का प्रस्ताव?

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है, तेहरान तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देगा। साथ ही अगर सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू होता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ट्रंप द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने की बात अभी आधिकारिक तौर पर तेहरान तक नहीं पहुंची है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ।

इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। इसके बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।

जयशंकर ने रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

रूस और ईरान से तेल एवं गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध से संबंधित एक नए कानून पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर रूस और ईरान के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान और रूस के अपने समकक्षों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय मुद्दों और ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की।

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ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी भाग लिया था।

Nifty और Sensex में 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट, क्रूड में उछाल से सहमा बाजार

भारतीय शेयर बाजारों में 24 सितंबर को बीते 10 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का बड़ा हाथ है। ब्रेंट क्रूड का प्राइस गुरुवार को उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। इसका असर शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।

इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयर क्रैश

सबसे ज्यादा गिरावट फाइनेंशियल खासकर इंश्योरेंस और इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयरों में आई। इसकी वजह इंश्योरेंस सेक्टर के रेगुलेटर आईआरडीएआई का एक प्रस्ताव है, जिसके लागू होने पर इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री पर मिलने वाला कमीशन कम हो जाएगा। इसका सीधा असर बीपी फिनटेक जैसी कंपनियों की कमाई पर पड़ेगा। पीबी फिनटेक का शेयर 36 फीसदी क्रैश कर गया।

सेंसेक्स, निफ्टी में 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट

निफ्टी 1.64 फीसदी यानी 383 अंक गिरकर 23,063 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.67 फीसदी यानी 1,247 अंक लुढ़कर 73,580 अंक पर क्लोज हुआ। दोनों ही सूचकांकों में 8 जुलाई के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 2.4 फीसदी चढ़कर 105 डॉलर के पार जाने की वजह ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान का संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में दिया गया भाषण है। 23 सितंबर को उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा।

क्रूड की ऊंची कीमतें बढ़ा सकती हैं महंगाई

ईरान के राष्ट्रपति के भाषण से यह साफ हो गया है कि मध्यपूर्व का संकट जल्द खत्म होने नहीं जा रहा है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिशें जारी हैं। अगर मध्यपूर्व की यह क्राइसिस जल्द खत्म नहीं होती है तो क्रूड ऑयल की कीमत लंबे समय तक हाई बनी रह सकती है। इसका सीधा असर दुनियाभर में इनफ्लेशन पर पड़ेगा। इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व सहित दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका असर कंपनियों के पूंजीगत निवेश पर पड़ेगा।

निफ्टी के 23500 से नीचे रहने तक बेयरिश ट्रेंड बना रहेगा

एक्सिस डायरेक्ट में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमंग गोर ने कहा, “भारत के लिए क्रूड की कीमतें काफी अहम हैं। कुछ समय तक 100 डॉलर से नीचे जाने के बाद फिर से क्रूड में उछाल दिख रहा है। इससे क्रूड की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर बाजार की रिकवरी पर पड़ा है।” उन्होंने कहा कि निफ्टी जब तक 23,500 से नीचे बना रहता है, मार्केट का ट्रेंड बेयरिश बना रहेगा।

इन कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट 

24 सितंबर को सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस (6.16 फीसदी), बजाज फिनसर्व (5.87 फीसदी), चोलामंडलम इनवेस्ट (5.20 फीसदी), एक्सिस बैंक (4.56 फीसदी), बजाज फिनसर्व (4.56 फीसदी), टाटा कैपिटल (3.94 फीसदी) और अदाणी एंटरप्राइजेज शामिल रहे।

भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर को ट्रंप ने दिया बंपर सपोर्ट! ईरान के समुद्री रास्ते को बाईपास करने की बनाई रणनीति

India-Middle East-Europe Corridor: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को अपना मजबूत समर्थन देने का ऐलान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के इतर जीसीसी (GCC) और अरब देशों के नेताओं के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध और व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों के बीच मिडिल ईस्ट के ऊर्जा ढांचे को ईरान के नियंत्रण वाले रास्तों और चेकपॉइंट्स से दूर ले जाने की सख्त जरूरत है। इसी रणनीति के तहत उनके प्रशासन ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर को बढ़ावा देने का फैसला किया है ताकि तेल और ऊर्जा संसाधनों को पाइपलाइनों या अन्य सुरक्षित माध्यमों से बाहर निकाला जा सके।

व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बीच ऊर्जा ढांचे को शिफ्ट करने की जरूरत

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने बैठक में कहा कि पड़ोसी देशों में व्यापारिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व के ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर को ईरानी नियंत्रण वाले रास्तों से दूर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि ईरान के आतंकवादी हमलों ने हमें यह दिखाया है कि मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे को ईरानी चेकपॉइंट्स से दूर ले जाना कितना जरूरी है। यही वजह है कि मेरा प्रशासन भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर और तेल बाहर निकालने के अन्य जरियों, चाहे वह पाइपलाइन हों या कुछ और, का पुरजोर समर्थन करता है।

क्षेत्र को सुरक्षित और समृद्ध बनाने पर जोर

जीसीसी और अरब नेताओं की मौजूदगी में अमेरिकी राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह क्षेत्र दशकों पुरानी चुनौतियों से उबरने के बेहद करीब है। उन्होंने बैठक में मौजूद नेताओं को अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी और साझेदार बताया। ट्रंप ने कहा कि एक साथ मिलकर हम उन चुनौतियों पर विजय पाने की दहलीज पर हैं, जिन्होंने दशकों से इस क्षेत्र को परेशान कर रखा है। मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाने के हमारे प्रयासों को जारी रखने के लिए अमेरिका के कुछ सबसे महान और करीबी दोस्तों, सहयोगियों और साझेदारों के साथ यहां मौजूद होना मेरे लिए सम्मान की बात है।

क्या है भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC)?

साल 2023 में अनावरित किए गए भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का उद्देश्य भारत, खाड़ी क्षेत्र और यूरोप के बीच व्यापारिक संपर्क को गति देना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मुख्य रूप से दो गलियारे शामिल हैं। पहला ईस्टर्न कॉरिडोर जो भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ता है। दूसरा नॉर्दर्न कॉरिडोर जो खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ता है। इस पूरे आर्थिक गलियारे में एक व्यापक रेलवे और शिप-रेल ट्रांजिट नेटवर्क शामिल होगा, जिसके साथ-साथ सड़क परिवहन के मार्ग भी विकसित किए जाएंगे।

ट्रंप की ईरान को चेतावनी: वित्तीय रूप से अलग-थलग किया, बर्बाद होने का समय दूर नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए अपने बयानों को दोहराते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को वित्तीय रूप से अलग-थलग कर दिया है और उम्मीद है कि वे जल्द ही सही कदम उठाएंगे। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि ‘एक समय ऐसा आएगा जब बहुत देर हो चुकी होगी, और हमारे पास उन्हें एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहने देने का मौका नहीं होगा। मैं ऐसा देखना चाहूंगा और मैं आपको बता सकता हूं कि इस टेबल के आसपास बैठे लोग भी यही देखना चाहेंगे।’

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Iran-US War Update: ईरान पर घातक हमले की तैयारी में अमेरिका? ट्रंप बोले- जल्द हो सकता है बहुत बड़ा फैसला, तेहरान ने युद्ध खत्म करने के लिए रखीं 7 शर्तें

Iran-US War Update: सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका जल्द ही ईरान पर घातक हमला करने पर विचार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन तेहरान के खिलाफ अपने अगले बड़े कदम पर गंभीरता से विचार कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह फिलहाल निर्णय लेने की स्थिति में हैं। ट्रंप ने कहा कि आने वाले समय में ‘बहुत बड़ी चीजें’ हो सकती हैं। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान ने अमेरिका के सामने युद्ध खत्म करने और बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए अपनी शर्तें रखी हैं।

ईरान ने ये मांगें मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई हैं। तेहरान का कहना है कि नई बातचीत तभी संभव होगी जब लड़ाई खत्म हो और उस पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटाए जाएं।

ईरान के खिलाफ तीन विकल्पों का जिक्र

‘फॉक्स न्यूज’ के साथ कथित बातचीत में ट्रंप ने ईरान को लेकर अमेरिका के सामने मौजूद कई विकल्पों का जिक्र किया। उन्होंने तीन संभावित रास्ते बताए। ईरान को पूरी तरह तबाह करना, उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर होने देना या फिर बातचीत के जरिए समझौते तक पहुंचना। ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, “मेरा सवाल है कि मैं पूरे देश को कब और अगर जरूरत पड़ी तो कब उड़ा दूं? उन्हें बेहतर होगा कि वे सही व्यवहार करें।” ट्रंप की इस टिप्पणी से संकेत मिलता है कि अमेरिका ईरान के साथ जारी संघर्ष में सैन्य और कूटनीतिक, दोनों विकल्पों पर विचार कर रहा है।

ईरान के राष्ट्रपति से मुलाकात को तैयार ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की संभावित न्यूयॉर्क यात्रा पर भी प्रतिक्रिया दी। पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका जाने वाले हैं। जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान पेजेशकियन से मुलाकात करेंगे, तो उन्होंने कहा कि वह संभवतः इसके लिए तैयार होंगे। ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी ‘तस्नीम’ के मुताबिक, पेजेशकियन वरिष्ठ ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ अमेरिका जाने और संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अन्य देशों के नेताओं से भी मुलाकात करने की तैयारी में हैं।

हूती विद्रोहियों से भी संपर्क में अमेरिका

ट्रंप ने यमन के हूती विद्रोहियों को लेकर भी बड़ी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका की हूती समूह के साथ बातचीत जारी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल में सऊदी अरब को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए गए थे। ट्रंप के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने अमेरिकी कर्मियों को निशाना नहीं बनाने पर सहमति जताई है।

ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए 7 शर्तें रखी हैं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ये शर्तें कतर के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाई गई हैं। ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने रविवार को इसकी पुष्टि की। इससे एक दिन पहले ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख मोहसिन रेजाई ने भी कहा था कि कतर ने तेहरान की मांगें अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। रेजाई ने अल जजीरा से बातचीत में बताया कि ईरान की मांगों में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करना, ईरान के फ्रीज किए गए धन को वापस करना और नौसैनिक नाकाबंदी हटाना शामिल है।

अमेरिका के सहयोगी देशों को ईरान की चेतावनी

इस बीच ईरान के केंद्रीय सैन्य कमान ने दावा किया है कि उसे ऐसी खुफिया जानकारी मिली है, जिसके मुताबिक अमेरिका तेहरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है। ईरान का आरोप है कि इस संभावित कार्रवाई में क्षेत्र के कई देश अमेरिका का समर्थन कर सकते हैं। ईरानी सेना ने अमेरिका का समर्थन करने वाले देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें इस मामले में ईरान की ओर से किसी तरह की नरमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। ईरानी सैन्य कमान ने ऐसे देशों को उस गतिविधि में शामिल पक्ष माना, जिसे उसने शरारत करार दिया।

बातचीत या सैन्य कार्रवाई…अमेरिका का अगला कदम क्या होगा?

ट्रंप के बयानों और ईरान की ओर से भेजी गई शर्तों से साफ है कि दोनों देशों के बीच तनाव के बीच कूटनीतिक रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। हालांकि, तेहरान ने बातचीत के लिए कई पूर्व शर्तें रखी हैं। जबकि ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई समेत कई विकल्प खुले रखने के संकेत दिए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि अमेरिका ईरान की सात शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। क्या दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटने के लिए कोई साझा आधार तलाश पाते हैं।

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Brent Crude 105 डॉलर के पार पहुंचा, अमेरिका-ईरान में बढ़ते टेंशन का असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में 10 सितंबर को भी तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड का प्राइस 105 डॉलर पर पहुंच गया। इस साल 25 मई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ रहा है।

चीन की क्रूड की खरीदारी का भी कीमतों पर असर

क्रू्ड ऑयल की कीमतों में तेजी की कुछ दूसरी वजहें भी हैं। चीन ने फिर से क्रूड ऑयल की अच्छी खरीदारी शुरू कर दी है। उधर, सऊदी अरब ने कहा है कि उसके क्रूड के उत्पादन में तेज गिरावट आई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी युद्धपातों पर मिसाइल से हमले किए हैं। इससे हालात लगातार खराब होने की तरफ बढ़ रहे हैं।

WTI क्रूड की कीमतें भी 100 डॉलर के पार

भारतीय समय के मुताबिक, शाम 6:45 बजे ब्रेंट क्रूड का प्राइस 4 फीसदी उछलकर 105.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। WTI क्रूड भी 4.41 फीसदी उछाल के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ लड़ाई नवंबर में मिड टर्म इलेक्शंस के बाद खत्म होगी। इधर, ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका हमले जारी रखता है तो वह जवाबी हमले करेगा।

अगस्त के लेवल से 30 फीसदी चढ़ चुका है क्रूड

अगस्त की शुरुआत के मुकाबले ब्रेंट क्रूड की कीमत 30 फीसदी चढ़ चुकी है। बताया जाता है कि सऊदी अरब में क्रूड का उत्पादन गिरकर इस साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसकी वजह हूती विद्रोहियों की धमकी है, जिसमें कहा गया है कि वे सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों से गुजरने वाले ऑयल टैंकर्स को निशाना बनाएंगे।

चीन की खरीदारी पर निर्भर करेगी कीमतें 

एनालिस्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने की वजह से ब्रेंट फिर से 100 डॉलर के पार हो गया है, लेकिन इसका इस लेवल पर टिके रहना चीन के रुख पर निर्भर करेगा। चीन दुनिया में क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा इंपोर्टर है। उसने हाल के कुछ महीनों में क्रूड की खरीदारी बढ़ाई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है।

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क्रूड में उछाल भारत के लिए चिंता की बात

क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता की बात है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। क्रूड महंगा होने का असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है। लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बने रहने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं। साथ ही सीएनजी और पीएनजी के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार तीसरे दिन गिरा, चांदी ₹2300 उछली

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 9 सितंबर को सोने में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। इसकी वजह लोकल मार्केट में सोने की कमजोर मांग बताई जा रही है। सोना 100 रुपये गिरकर 1,58,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी की कीमतों में उछाल दिखा। लगातार दूसरे चांदी की चमक बढ़ी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेजी दिखी।

चांदी में 2300 रुपये का उछाल

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी 2,300 रुपये चढ़कर 2,43,400 रुपये प्रति किलो ग्राम पर पहुंच गई। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में कमोडिटीज के सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “सोने की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं, क्योंकि अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा आने से पहले इनवेस्टर्स सावधानी बरत रहे हैं।”

क्रूड में उछाल ने बढ़ाई चिंता

उन्होंने कहा कि क्रूड ऑयल में लगातार उछाल ने चिंता बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि अगर क्रूड लंबे समय तक हाई लेवल पर बना रहता है तो महंगाई बढ़ेगी। इससे इंटरेस्ट रेट भी लंबे समय तक हाई लेवल पर बना रह सकता है। इसका खराब असर बुलियन की कीमतों पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक घट जाती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी में तेजी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी दिखी। यह 1 फीसदी चढ़कर 4,399.22 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी भी करीब 1 फीसदी की मजबूती के साथ 66.25 डॉलर प्रति औंस पर थी। अगले हफ्ते अमेरिकी केंद्रीय बैंक अपनी पॉलिसी का ऐलान करेगा। अगर 16 सितंबर को फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ाता है तो इसका खराब असर सोने पर पड़ेगा। अगर वह इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं करता है तो सोने की चमक बढ़ सकती है।

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11 सितंबर के अमेरिका में इनफ्लेशन डेटा पर नजर

अमेरिकी केंद्रीय बैंक के चेयरमैन केविन वॉर्श यह संकेत दे चुके हैं कि फिलहाल उनका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल करने पर है। हालांकि, वह अगस्त में इनफ्लेशन के डेटा को देखने के बाद ही इस बारे में फैसला लेंगे। 11 सितंबर को अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा आने वाले हैं।

Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार, भारत के लिए बढ़ेगी मुसीबत, शेयर बाजार पर भी असर

Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड का प्राइस आखिरकार 9 सितंबर को 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया। 24 जुलाई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ रहा है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान मध्यपूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बना रहा है।

अमेरिका का ईरान के 5 ऑयल टैंकर्स ध्वस्त करने का दावा

8 सितंबर को अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के पांच ऑयल टैंकर्स को ध्वस्त कर दिया है। उसने कहा कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमला किया था। इसके जवाब में उसने ईरानी ऑयल टैंकर्स को निशाना बनाया है। इससे मध्यपूर्व में एक बार फिर से स्थिति काफी गंभीर हो गई है।

ईरान  ने भी जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन पर किए हमलें

अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमले किए हैं। उसने फारस की खाड़ी में दूसरे जहाजों को भी चेतावनी जारी की है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने IRGC को उद्धृत करते हुए कहा है कि कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के करीब स्थित सभी जहाजों के क्रू को अपने जहाज छोड़ देने चाहिए, क्योंकि उन्हें निशाना बनाया जाएगा।

क्रूड का भाव बीते 7 हफ्तों के सबसे ऊंचे लेवल पर 

क्रूड ऑयल की कीमतें बीते सात हफ्तों में सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई हैं। एक हफ्ते में क्रूड का भाव 4 फीसदी चढ़ा है। बीते एक महीने में यह 14 फीसदी चढ़ा है। इस साल यानी 2026 में क्रूड का भाव अब तक 64 फीसदी उछला है। इधर, इंडिया का क्रूड बास्केट 100 डॉलर के पार हो गया है। इससे सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

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क्रूड में उछाल से भारत के लिए बढ़ सकता है संकट 

भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी ऑयल इंपोर्ट करता है। इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत आता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते सप्लाई बाधित होने से क्रूड की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं। क्रूड में उछाल से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इस साल अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से भारत में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी की कीमतें बढ़ाई हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अपने लॉस कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई हैं।

शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा असर

क्रूड में उछाल का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा। खासकर पेंट, टायर, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर इसका असर पड़ेगा। एविएशन कंपनियों पर भी इसका असर पड़ेगा। एटीएफ की कीमतें बढ़ने से उनका कुल खर्च बढ़ जाएगा। भारतीय शेयर बाजारों पर पहले से दबाव है। 9 सितंबर को लगातार तीसरे दिन बाजार में बड़ी गिरावट दिखी।

Crude Oil: गोल्डमैन सैक्स ने ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर पर जाने का जताया अनुमान, ऐसा हुआ तो मचेगी बड़ी तबाही

क्रूड ऑयल की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं। 8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 1.49 फीसदी उछाल के साथ 98.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.72 फीसदी उछाल के साथ 93.97 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। 7 सितंबर को भी क्रूड में तेजी दिखी थी। जुलाई के बाद क्रूड़ की कीमतें सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह अच्छी खबर नहीं है, जो अपनी जरूरत का ज्यादा हिस्सा इंपोर्ट करता है।

4 मई को ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर पर पहुंच गया था

गोल्डमैन सैक्स ने क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। दिग्गज अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऑयल टैंकर्स पर हमले नहीं रुकते हैं तो क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। 28 मार्च को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों में उछाल दिखा है। 4 मई को भाव 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते में रुकावटें बढ़ रहीं

गोल्डमैन सैक्स में कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड Daan Struyven ने कहा, “पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि जहाजों की आवाजाही के लिहाज से रुकावटें बढ़ रही हैं।” अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर मामला फंसा हुआ है। सामान्य दिनों में इस रास्ते दुनिया का करीब 20 फीसदी ऑयल गुजरता है। लेकिन, अमेरिका और ईरान की लड़ाई की वजह से इस रास्ते ऑयल की सप्लाई नाममात्र की रह गई है।

महंगा क्रूड भारत के लिए बढ़ा सकता है मुसीबत

8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब बढ़ता दिखा। अगर यह 100 डॉलर पार करता है तो 23 जुलाई के बाद ऐसा पहली बार होगा। अमेरिका और ईरान के बीच जिस तरह से टकराव बना हुआ है, उससे क्रूड के 100 डॉलर पर पहुंच जाने के आसार दिखते हैं। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर के पार जाना भारत के लिए खराब है। भारत क्रूड की करीब 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है।

इस साल 4 बार बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 71 डॉलर पर था। इसका मतलब है कि यह उस लेवल से करीब 40 फीसदी ऊपर है। इससे पहले भारत में महंगे क्रूड की वजह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। अगर जल्द भाव नीचे नहीं आता है तो फिर से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी के दाम बढ़ा सकती हैं। इसका असर परिवारों के बजट पर पड़ेगा।

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महंगे क्रूड की वजह से महंगाई को मिलेगी हवा

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल का सीधा असर दूसरी चीजों और सर्विसेज की कीमतों पर पड़ता है। पहले से ही विमान किराया आसमान में चल रहा है। पिछले छह महीनों में दूध, और ब्रेड सहित रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। रेस्टॉरेंट्स में भी खाना महंगा हो गया है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से लोगों के ऑफिस आने-जाने का खर्च बढ़ा है। पिछले कई महीनों से रिटेल इनफ्लेशन में लगातार इजाफा हो रहा है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो आरबीआई महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।