खत्म हुआ मार्केट में गिरावट का दौर! इस कारण मैक्वेरी को है भरोसा, लगाया इन सेक्टर पर दांव

Market Outlook: मैक्वेरी कैपिटल के एमडी और भारत में इक्विटी हेड संदीप भाटिया का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल अपनी रेंज के निचले स्तर पर हैं। इसके अलावा उनका यह भी मानना है कि मार्केट को झटका देने वाली जितनी भी खबरें हैं, और जो भी दबाव है, उसका खराब दौर अब निश्चित रूप से पीछे छूट चुका है। संदीप के मुताबिक कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी टैरिफ का रिस्क बना हुआ है तो भारत और अमेरिका में ब्याज दरें अभी भी मार्केट के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। इसके अलावा भारत को अभी तक हार्डवेयर और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े थीम में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी का पूरा फायदा नहीं मिला है। इन चिंताओं के बावजूद उनका मानना है कि भारतीय कंपनियों के सितंबर 2026 तिमाही के रिजल्ट उम्मीद से बेहतर रह सकते हैं।

बैंकिंग सेक्टर

किस सेक्टर के कंपनियों के कारोबारी नतीजे धमाकेदार रह सकते हैं, इसे लेकर संदीप ने कोई अनुमान तो नहीं बताया लेकिन यह जरूर कहा कि बैंकिंग सेक्टर में आउटलुक सुधर रहा है। बैंकिंग सेक्टर उन सेक्टर्स में शुमार है, जिनमें सबसे अधिक दबाव दिखा है लेकिन अब संदीप को उम्मीद है कि अगले दो साल में बैंकों के मार्जिन में सुधार होगा और उनके शेयरों की वैल्यूएशन फिर से बढ़ सकती है, हालांकि नियर टर्म में कमाई पर कुछ दबाव रह सकता है। उनका कहना है कि साल 2027 और साल 2028 में यानी अगले दो वर्षों में बैंकों की कमाई अच्छी रहेगी।

फाइनेंशियल सेक्टर

संदीप भाटिया को फाइनेंशियल सेविंग्स में बड़ा मौका दिख रहा है। उनका अनुमान है कि देश की वित्तीय बचत $50 हजार करोड़ से अधिक है, जोकि और बढ़ सकता है। संदीप का मानना है कि एमसीएक्स, बीएसई और एनएसई को इस रुझान से फायदा हो सकता है।

कंज्यूमर और ऑटो सेक्टर

संदीप भाटिया को उम्मीद है कि कंज्यूमर-ड्यूरेबल कंजम्प्शन से अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने हुंडई इंडिया, मारुति सुजुकी इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी ऑटो कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि फेस्टिवल सीजन के दौरान गाड़ियों की बिक्री जबरदस्त रही है।

पावर और एनर्जी सेक्टर

संदीप भाटिया की पावर और एनर्जी स्पेस में दिलचस्पी बनी हुई है। रिन्यूएबल एनर्जी स्पेस में उन्हें क्लीन मैक्स एंवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस तो पावर इक्विपमेंट और ट्रांसमिशन कंपनियों में हिताची एनर्जी इंडिया पसंद है। उनका कहना है कि यह मौका सिर्फ एआई से जुड़ी बिजली की मांग की वजह से नहीं बन रहा है, बल्कि देश में मजबूत इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ से भी इसे बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आईटी सेक्टर

वैल्यूएशन आकर्षक होने के बावजूद संदीप आईटी सेक्टर को लेकर सतर्क हैं और अभी इस सेक्टर में निवेश करने से बच रहे हैं। संदीप का मानना है कि जब तक एआई के असर को लेकर अधिक स्पष्टता नहीं आती, तब तक दबाव बना रहेगा।

इंश्योरेंस सेक्टर

संदीप भाटिया का कहना है कि इंश्योरेंस सेक्टर के लिए नियमों में बदलाव बड़ी चिंता बनी हुई है। फिलहाल वह पॉलिसीबाजार की पीबी फिनटेक को लेकर सतर्क हैं और इस सेक्टर पर कोई फैसला लेने से पहले बीमा नियामक IRDA की ड्राफ्ट सिफारिशों के फाइनल होने का इंतजार करना चाहते हैं।

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PB Fintech Share Price: पॉलिसीबाजार की पेरेंट का शेयर लगातार 6ठे दिन गिरा, ​​7% तक टूटकर 52 वीक के नए लो पर

Policybazaar प्लेटफॉर्म की पेरेंट कंपनी PB Fintech के शेयरों में गुरुवार को लगातार छठे दिन गिरावट है। बीएसई पर शेयर पिछले बंद भाव से 7 प्रतिशत तक टूटकर 988.30 रुपये के लो तक गया। यह शेयर का 52 सप्ताह का नया निचला स्तर है। कंपनी का मार्केट कैप घटकर 46200 करोड़ रुपये पर आ गया है। पीबी फिनटेक के शेयर में 24 सितंबर से लगातार गिरावट आ रही है। इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर नया ड्राफ्ट आने के बाद शेयर में जबरदस्त बिकवाली का सिलसिला शुरू हुआ और अभी तक जारी है। माना जा रहा है कि कमीशन को लेकर ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित कटौती से PB Fintech को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि इन टेक-रेट पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकल पाएगी।

इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) ने कुछ स्ट्रक्चरल सुधारों का प्रस्ताव दिया है। इनका मकसद इंश्योरेंस की लागत कम करना, उन लोगों तक कवरेज पहुंचाना जिन्हें अभी तक यह सुविधा नहीं मिली है, और इस सेक्टर को टिकाऊ विकास की राह पर वापस लाना है। एक दिन पहले सामने आया था कि ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने पीबी फिनटेक के शेयर के लिए टारगेट प्राइस 2310 रुपये से घटाकर 1085 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। लेकिन आउटपरफॉर्म रेटिंग बरकरार रखी है।

IRDAI का ड्राफ्ट आने के बाद बर्नस्टीन ने अपने नोट में लिखा कि कमीशन में प्रस्तावित कटौती बहुत बुरी है और ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित ‘टेक रेट’ से PB Fintech का यूनिट-इकोनॉमिक्स बिगड़ जाएगा। कम जनरल इंश्योरेंस टेक रेट पीबी फिनटेक की मौजूदा लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं। IRDAI के ड्राफ्ट पेपर में कोटेशन (Rates) बनाने के लिए कॉन्टैक्ट डिटेल्स इकट्ठा करने पर साफ तौर पर रोक लगाई गई है। बर्नस्टीन के अनुसार, PB Fintech के लिए यह कस्टमर बनाने का एक अहम जरिया है।

PB Fintech के लिए दूसरे ब्रोकरेज की रेटिंग

पीबी फिनटेक के शेयर के लिए HSBC ने रेटिंग घटाकर होल्ड कर दी है। टारगेट प्राइस 2,100 रुपये से घटाकर 1,150 रुपये प्रति शेयर कर दिया है। मोतीलाल ओसवाल ने 1,150 रुपये के टारगेट के साथ न्यूट्रल रेटिंग बरकरार रखी है। मैक्वेरी ने शेयर की रेटिंग आउटपरफॉर्म से घटाकर न्यूट्रल कर दी है। टारगेट प्राइस 1,150 रुपये प्रति शेयर दिया है।

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PB Fintech के शेयर में पिछले 5 दिनों में 43 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। शेयर अकेले 24 सितंबर को 36 प्रतिशत नीचे आया था। शेयर की फेस वैल्यू 2 रुपये है। यह BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक पब्लिक शेयरहोल्डर्स के पास 99.86 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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Policybazaar के टारगेट में 53% की कटौती, इस कारण कुछ ही दिनों में बदली की स्ट्रैटेजी

PB Fintech Share Price: पॉलिसीबाजार (Policybazaar) की पैरेंट कंपनी पीबी फिनटेक के शेयरों का टारगेट प्राइस ब्रोकरेज फर्म बर्न्स्टीन ने ₹2310 से घटाकर ₹1085 किया तो इसकी बिकवाली और बढ़ गई। खास बात ये है कि कुछ ही दिनों पहले बर्न्स्टीन ने इसकी रेटिंग और टारगेट को बरकरार रखा था और अब जो टारगेट फिक्स किया है, एक कारोबारी दिन पहले यह इसके नीचे बंद हुआ था। फिलहाल बीएसई पर यह 1.39% की गिरावट के साथ ₹1069.00 के भाव पर है। इंट्रा-डे में यह 2.96% टूटकर एक साल के रिकॉर्ड निचले स्तर ₹1,052.00 तक आ गया था।

लगातार पांचवे कारोबारी दिन आज इसके शेयर टूटे हैं। बीमा नियामक IRDAI ने बीमा पॉलिसी से जुड़े नियमों में बदलाव का जो ड्राफ्ट पेश किया है, उससे पॉलिसीबाजार को तगड़ा शॉक लगा और 24 सितंबर को एक ही दिन में रिकॉर्ड 36% टूट गया। पिछले साल 9 दिसंबर 2025 को यह एक साल के हाई ₹1,963.00 पर था।

Policybazaar के टारगेट प्राइस में क्यों की कटौती

बर्न्स्टीन ने पॉलिसीबाजार के पीबी फिनटेक की आउटपरफॉर्म रेटिंग बनाए रखी, लेकिन टारगेट प्राइस में 53% की कटौती कर दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कमीशन में कटौती का प्रस्ताव अनुमान से अधिक सख्त है और प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत कम जनरल इंश्योरेंस टेक रेट पीबी फिनटेक की मौजूदा लागत को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं।

इससे पहले इस हफ्ते की शुरुआत में बर्न्स्टीन ने प्रस्तावित नियमों के बड़े असर को ध्यान में रखते हुए भी ₹2,310 का टारगेट बनाए रखा था लेकिन ब्रोकरेज फर्म ने दोबारा रिव्यू किया और इसमें 53% की तेज कटौती कर दी। ब्रोकरेज फर्म को पॉलिसीबाजार के लिए आगे का रास्ता मुश्किल दिख रहा है। बर्न्स्टीन का कहना है कि पॉलिसीबाजार को अपने जनरल इंश्योरेंस बिजनेस के कुछ हिस्सों को कम करना पड़ सकता है या लाइफ इंश्योरेंस की तरफ बढ़ना पड़ सकता है क्योंकि वह प्रस्तावित कमीशन कैप के हिसाब से खुद को ढाल रहा है। ब्रोकरेज फर्म को इसके पॉइंट-ऑफ-सेल-पर्सन (POSP) बिजनेस के कम होने के आसार दिख रहे हैं क्योंकि आर्थिक तौर पर यह फायदेमंद हो रहा है।

ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि हेल्थ इंश्योरेंस में फंडामेंटल तौर पर अधिक बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। कंपनी को डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन में कमी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अंडरराइटिंग इकनॉमिक्स जैसे वैकल्पिक मॉडल खोजने पड़ सकते हैं।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है नुकसान कम करने के तरीके तो हैं, लेकिन उनके असर का अंदाजा लगाना मुश्किल है। बर्न्स्टीन को अभी भी पीबी फिनटेक के लिए लॉन्ग टर्म ग्रोथ और वैल्यू-क्रिएशन का मौका दिख रहा है, लेकिन एनालिस्ट्स का कहना है कि अगले 18 महीने कंपनी के लिए अहम हो सकते हैं, जिसमें कई तरह के नतीजे सामने आ सकते हैं।

बाकी ब्रोकरेजेज का क्या है रुझान

इरडा ने हेल्थ, मोटर और लाइफ इंश्योरेंस के डिस्ट्रीब्यूशन कमीशन में बड़े बदलावों का प्रस्ताव दिया। इन प्रस्तावों पर पॉलिसीबाजार के शेयर ढेर हो गए। निवेशकों को इस बात की चिंता हुई कि इन प्रस्तावों से कमीशन की कम दरें पॉलिसीबाजार की टेक रेट्स यानी कमाई की दर काफी कम हो सकती हैं और कंपनी को लागत कम करने या अपने बिजनेस मिक्स में बदलाव करने के लिए मजबूर कर सकती हैं।

इसे देखते हुए कई ब्रोकरेजेज फर्मों ने इसके शेयरों को लेकर अपने नजरिए में बदलाव किया है। एचएसबीसी ने इसकी रेटिंग को घटाकर होल्ड कर दी और टारगेट प्राइस भी ₹2,100 से घटाकर ₹1,150 कर दिया, जबकि मोतीलाल ओसवाल ने ₹1,150 के टारगेट के साथ न्यूट्रल रेटिंग बनाए रखा है।

₹3000 करोड़ का निवेश और हैदरबाद में दो प्रोजेक्ट पूरा, दोहरे सपोर्ट पर इस स्टॉक का जोश हाई

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IRDAI New Rules: पॉलिसीधारकों की बल्ले-बल्ले, डिस्ट्रीब्यूटर्स को झटका! जानिए IRDAI के नए प्रस्ताव से आपको कैसे होगा फायदा

IRDAI Commission & Expense Cap Impact: देश में बीमा सेक्टर तेजी से बढ़ा है, लेकिन जिस रफ्तार से लोगों की जेब से प्रीमियम का पैसा निकला है, उस रफ्तार से असली बीमा कवरेज का विस्तार नहीं हुआ है। दूसरी ओर, बीमा बेचने का खर्च और बिचौलियों का कमीशन इतनी तेजी से बढ़ा है कि यह सवाल उठने लगा था कि क्या ग्राहकों को उनके प्रीमियम का सही मूल्य मिल रहा है या नहीं?

इसी समस्या से निपटने के लिए भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स पर एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है। नियामक ने बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च (EoM) को घटाने के लिए 5 साल का रोडमैप प्रस्तावित किया है, साथ ही एजेंटों और कॉर्पोरेट एजेंटों के भारी-भरकम कमीशन पर नकेल कसने की तैयारी की है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि IRDAI के इन कड़े प्रस्तावों से इंश्योरेंस सेक्टर पर क्या असर पड़ेगा, क्यों पॉलिसीधारकों को इसका सीधा फायदा मिलेगा और कंपनियों-बिचौलियों के लिए यह कितना बड़ा झटका है।

क्यों पड़ी सुधारों की जरूरत?

IRDAI के आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि पिछले एक दशक में भारत में इंश्योरेंस की पैठ में कोई खास सुधार नहीं हुआ है:

पॉलिसी की संख्या जस की तस: वित्त वर्ष 2016 में देश में करीब 266 लाख नई इंडिविजुअल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसियां बिकी थीं, जो वित्त वर्ष 2025 में मामूली बढ़कर केवल 270 लाख हो पाईं। कुल इन-फोर्स पॉलिसियां भी 3,270 लाख के आसपास ही स्थिर बनी हुई हैं।

जीडीपी के बराबर ही ग्रोथ: देश की जीडीपी ग्रोथ दर पिछले 10 सालों में औसतन 10% रही है। इसी अवधि में लाइफ इंश्योरेंस 10% और जनरल इंश्योरेंस बिजनेस 13% की दर से बढ़ा है। यानी बढ़ती आमदनी के बावजूद इंश्योरेंस सेक्टर अर्थव्यवस्था से आगे निकलने में नाकाम रहा है।

2047 तक ‘सबके लिए बीमा’ का लक्ष्य काफी दूर: जनरल इंश्योरेंस में पॉलिसियों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन ‘2047 तक सबके लिए बीमा’ के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के हिसाब से यह रफ्तार काफी धीमी है।

बिजनेस का खर्च और कमीशन में भारी उछाल

जहां एक तरफ ग्राहकों की संख्या नहीं बढ़ रही थी, वहीं दूसरी तरफ बीमा कंपनियों और उनके एजेंटों के खर्च आसमान छू रहे थे:

ऊंचा कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस: लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों का कॉस्ट ऑफ डूइंग बिजनेस (CoDB) 18% से 39% तक पहुंच गया है (LIC और SBI Life को छोड़कर, जिनका CoDB 10-12% है)। जनरल इंश्योरेंस में यह 20% से 48% के बीच है।

कमीशन में 125% से 173% का उछाल: वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच कॉर्पोरेट एजेंटों (जैसे- बैंक और ऑनलाइन एग्रीगेटर्स) के जरिए आने वाला नया प्रीमियम 28% बढ़ा, लेकिन उनका कुल कमीशन और पेआउट 125% बढ़ गया! जनरल इंश्योरेंस ब्रोकर्स का प्रीमियम 37% बढ़ा, जबकि उनका कमीशन 173% तक उछल गया।

30-60% एक्स्ट्रा रिवॉर्ड्स: बेस कमीशन के अलावा ब्रोकर्स और एजेंटों को 30% से 60% तक का अतिरिक्त इंसेंटिव/रिवॉर्ड दिया जा रहा था, जिसका पूरा बोझ सीधे ग्राहकों के प्रीमियम पर पड़ रहा था।

IRDAI का नया फॉर्मूला: कितना घटेगा कंपनियों का खर्च?

IRDAI ने कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च की सीमा घटाने का 5 साल का रोडमैप तैयार किया है:

लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां: मौजूदा 30% की सीमा को घटाकर 2 साल के अंदर 15% और 5 साल के अंदर 12.5% पर लाना होगा।

जनरल इंश्योरेंस कंपनियां: मौजूदा सीमा को घटाकर 2 साल में 25% और 5 साल में 20% तक सीमित करना होगा।

प्रीमियम पेइंग टर्म के हिसाब से तय होगा कमीशन

ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि अब पॉलिसी की अवधि के हिसाब से पहले साल का कमीशन फिक्स करने का प्रस्ताव है:

5 साल से कम पीपीटी (PPT): एजेंसियों के लिए अधिकतम कमीशन 5% और एजेंटों के लिए 6.25%।

5 साल का पीपीटी: एजेंसियों के लिए 10% और एजेंटों के लिए 12.5%।

6 से 8 साल का पीपीटी: एजेंसियों के लिए 14% और एजेंटों के लिए 17.5%।

10 साल या उससे अधिक का पीपीटी: एजेंसियों के लिए अधिकतम 20% और एजेंटों के लिए 25% तय होगा।

कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटर्स पर असर: क्यों मची भगदड़?

कमीशन और ऑपरेटिंग खर्चों पर नकेल कसने के प्रस्तावों से इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा।

शेयरों में भारी गिरावट: इस प्रस्ताव के सामने आते ही पीबी फिनटेक (पॉलिसीबाजार) और टर्टलमिंट जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म्स के शेयरों व वैल्यूएशन में 35% से ज्यादा का भारी क्रैश दर्ज किया गया।

एजेंटों का उत्साह घट सकता है: आईआईएफएल (IIFL) की रिपोर्ट के अनुसार, कमीशन घटने से डिस्ट्रीब्यूटर्स का रुझान कम हो सकता है, जिससे नए बिजनेस वॉल्यूम और फ्रेश कैपिटल इनफ्लो पर अल्पकालिक असर देखने को मिल सकता है।

पॉलिसीधारकों को कैसे मिलेगा सीधा फायदा?

भले ही यह प्रस्ताव कंपनियों और एजेंटों के मार्जिन के लिए झटका हो, लेकिन आम ग्राहकों के लिए यह एक बहुत बड़ा वरदान साबित हो सकता है:

कम प्रीमियम और बेहतर रिटर्न: जब डिस्ट्रीब्यूशन और मैनेजमेंट कॉस्ट घटेगा, तो सेविंग्स पॉलिसियों (जैसे- एंडोमेंट या यूलिप) में ग्राहकों के प्रीमियम का बड़ा हिस्सा सीधे इन्वेस्टमेंट में जाएगा। इससे मैच्योरिटी पर ज्यादा रिटर्न मिलेगा।

सस्ती हो सकती हैं पॉलिसियां: ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होने से कंपनियां इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के दाम यानी प्रीमियम रेट्स घटा सकती हैं।

क्लेम और सर्विस पर फोकस बढ़ेगा: अभी तक एजेंटों का ध्यान केवल नई पॉलिसी बेचने पर रहता था। IRDAI का जोर अब पॉलिसी पर्सिस्टेंसी, बेहतर सलाह और सुचारू क्लेम सेटलमेंट पर है।

शिकायतों में कमी: जनरल इंश्योरेंस में ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल पर दर्ज शिकायतें FY23 में 78,347 से बढ़कर FY25 में 1,37,361 हो गई थीं, जिनमें से 69% शिकायतें केवल क्लेम से जुड़ी थीं। खर्चों पर लगाम लगने से कंपनियां क्लेम सर्विसिंग पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगी।

Stocks to Watch: 25 सितंबर को Nykaa, PB Fintech, ESDS Software Solution समेत इन शेयरों में बड़े उतार-चढ़ाव के आसार

शुक्रवार, 25 सितंबर को कई शेयरों पर फोकस रहेगा। लिस्ट में नाइका, पीबी फिनटेक, व्हील्स इंडिया, आइनॉक्स ग्रीन एनर्जी, पर्पल स्टाइल लैब्स जैसे कई नाम शामिल हैं। इन शेयरों में बड़ी उठापटक दिख सकती है। वजह हैं- तिमाही नतीजे, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, आदि। इसके अलावा शुक्रवार को SME सेगमेंट में एक कंपनी की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 4 कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड और 2 कंपनियों के शेयर एक्स-स्प्लिट ट्रेड करने वाले हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

इन शेयरों पर रहेगी नजर

ESDS Software Solution: अप्रैल-जून 2026 तिमाही (Q1) में कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 14% बढ़कर 29.3 करोड़ रुपये हो गया। रेवेन्यू 7.3% बढ़कर 133.7 करोड़ रुपये हो गया।

Purple Style Labs: Q1 में कंसोलिडेटेड घाटा सालाना आधार पर कम होकर 88.1 करोड़ रह गया। रेवेन्यू 13% बढ़कर 119.4 करोड़ रुपये हो गया।

PB Fintech: Policybazaar प्लेटफॉर्म की पेरेंट कंपनी का शेयर 24 सितंबर को 36 प्रतिशत टूटा था। बंपर बिकवाली की वजह रही इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDAI का डिस्ट्रीब्यूशन सुधारों पर नया ड्राफ्ट और उसके बाद बर्नस्टीन का व्यू। बर्नस्टीन का मानना है कि कमीशन को लेकर ड्राफ्ट पेपर में प्रस्तावित कटौती से PB Fintech को सबसे ज्यादा नुकसान होगा, क्योंकि इन टेक-रेट पर कॉल सेंटर की लागत नहीं निकल पाएगी। इस शेयर पर शुक्रवार को भी नजर रहेगी।

Wheels India: कंपनी का क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) 24 सितंबर को खुल गया। फ्लोर प्राइस ₹2,197.10 प्रति शेयर है।

Inox Green Energy Services: कंपनी ने 24 सितंबर को अपना QIP लॉन्च किया। फ्लोर प्राइस ₹174.36 प्रति शेयर तय किया गया है।

FSN E-Commerce Ventures (Nykaa): नाइका और L’Oréal के कॉर्पोरेट वेंचर कैपिटल फंड, BOLD (बिजनेस अपॉर्चुनिटीज फॉर L’Oréal डेवलपमेंट) ने तेजी से बढ़ रहे भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर ब्रांड्स की अगली पीढ़ी में मिलकर निवेश करने के लिए एक सहयोग की घोषणा की है।

Waaree Energies: कंपनी की सब्सिडियरी, Waaree Clean Energy Solutions ने भारत के स्पेशिएलिटी गैस बिजनेस में उतरने की घोषणा की है। इसका मकसद देश की सेमीकंडक्टर और सोलर सेल बनाने वाली कंपनियों के लिए वन-स्टॉप सप्लायर बनना है।

LCC Projects: कंपनी राजस्थान के गंगधार में छोटी कालीसिंध और चाहुरनी नदियों पर सोलर पावर वाले स्प्रिंकलर सिस्टम पर बेस्ड ‘छोटी कालीसिंध मीडियम इरिगेशन प्रोजेक्ट’ के लिए L-1 बिडर (सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी) के तौर पर उभरी है। इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित कीमत 653.34 करोड़ रुपये है।

Dr Lal PathLabs: कंपनी के बोर्ड ने SN Genelab में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा शेयरधारकों से खरीदने को मंजूरी दे दी है। डील ₹168 करोड़ तक की होगी। इस अधिग्रहण के बाद SN Genelab, डॉ. लाल पैथलैब्स की सब्सिडियरी बन जाएगी। ट्रांजेक्शन के 30 नवंबर, 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।

JSW Cement: कंपनी को बेलागावी ऑडिट कमिश्नरेट के एडिशनल कमिश्नर (सेंट्रल टैक्स) से एक ‘कारण बताओ नोटिस’ मिला है। यह नोटिस गलत क्लासिफिकेशन के कारण GST के कथित तौर पर कम भुगतान से संबंधित है। इसके चलते, डिपार्टमेंट ने अप्रैल 2022 से मार्च 2024 की अवधि के लिए 229.85 करोड़ रुपये के GST की मांग की है, जिसमें लागू ब्याज और 10 प्रतिशत जुर्माना भी शामिल है।

इस बीच, JSW स्टील और JSW सीमेंट द्वारा प्रमोटेड JSW वन प्लेटफॉर्म्स ने IPO के जरिए 3,054 करोड़ रुपये तक जुटाने के लिए SEBI, BSE और एनएसई के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है।

L&T Technology Services: कंपनी ने इंडस्ट्रियल AI में ग्लोबल लीडर, कॉग्नाइट (Cognite) के साथ एक स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की घोषणा की है। इसका मकसद एसेट-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज के लिए जॉइंट इंडस्ट्रियल AI और डेटा सॉल्यूशन विकसित करना और उन्हें उपलब्ध कराना है।

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बल्क और ब्लॉक डील्स

PB Fintech: HDFC म्यूचुअल फंड ने लगभग 320.6 करोड़ रुपये के 25 लाख शेयर खरीदे।

Brainbees Solutions (FirstCry): प्री-IPO निवेशक न्यूक्वेस्ट एशिया इनवेस्टमेंट्स ने लगभग 202 करोड़ रुपये के 1.15 करोड़ शेयर बेचे। वहीं गोल्डमैन सैक्स ने लगभग 119 करोड़ रुपये के 68 लाख शेयर खरीदे।

Sedemac Mechatronics: एक ही ब्लॉक डील में लगभग 1,469 करोड़ रुपये के 48.8 लाख शेयरों का लेन-देन हुआ। A91 एमर्जिंग फंड II और एक्सपोन्शिया कैपिटल से जुड़े फंड्स सहित प्राइवेट इक्विटी निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचा। खरीदारों में सिंगापुर सरकार (GIC) और मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर जैसे सॉवरेन फंड्स के साथ-साथ T रो प्राइस, अमांसा होल्डिंग्स और SBI, ICICI प्रूडेंशियल, एक्सिस, आदित्य बिड़ला सन लाइफ और इनवेस्टको सहित कई घरेलू म्यूचुअल फंड्स शामिल थे।

BlueStone Jewellery and Lifestyle: ब्लूस्टोन ज्वेलरी के लगभग 61.98 लाख शेयरों का लेन-देन 513.01 करोड़ रुपये में हुआ। बजाज लाइफ इंश्योरेंस, कुवैत इनवेस्टमेंट अथॉरिटी FD F238, सिटीग्रुप, गोल्डमैन सैक्स, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, मिरे एसेट म्यूचुअल फंड, बंधन म्यूचुअल फंड और SBI लाइफ इंश्योरेंस ने Accel और 360 ONE WAM से BlueStone के शेयर खरीदे।

SME लिस्टिंग

Axiom Gas Engineering

ये स्टॉक करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी

LGT ग्लोबल हॉस्पिटैलिटी

A D S डायग्नोस्टिक्स

नोबल पॉलिमर्स

ये शेयर करेंगे एक्स-स्प्लिट ट्रेड

नेच्युराइट एग्रो प्रोडक्ट्स

मिडवेस्ट एनर्जी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शेयर बाजार में 1,248 अंक की भारी गिरावट

नई दिल्ली। गुरुवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट हुई। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न की खबरों ने निवेशकों को चिंता में डाला है। गुरुवार, 24 सितंबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक 1,248 अंक यानी 1.67 फीसदी गिरकर 73,581 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 384 अंक यानी 1.64 फीसदी की गिरावट रही। ये 23,063 पर आ गया।

गुरुवार को बैंकिंग, मेटल और ऑटो शेयर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। बताया जा रहा है कि कच्चे तेल के दाम सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने और ईरान व अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज की खाड़ी बंद होने को लेकर चिंता से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का डर है। सो, तेल महंगा होने से हर चीज की महंगाई बढ़ेगी। इस चिंता में शेयर बाजार लगातार टूट रहा है।

इसके अलावा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है। पिछले 10 साल में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.11 फीसदी पर पहुंच गई है जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। गौरतलब है कि जब निवेशक बॉन्ड बेचते हैं तो बॉन्ड की कीमत घटती है और यील्ड यानी रिटर्न बढ़ जाती है। यह रिटर्न बढ़ने से डॉलर में निवेश ज्यादा आकर्षक हो जाता है, जिससे विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका में लगाने लगते हैं।

दूसरी ओर बीमा नियामक संस्था आईआरडीएआई के प्रस्तावित बदलावों से बीमा कंपनियों की कमाई घट सकती है। इसका असर बीमा, बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर दिखा। बीमा कंपनी पीबी फिनटेक करीब 10 फीसदी तक गिर गया, जबकि एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व भी दबाव में रहे। भारतीय शेयर बाजार में आई तेज बिकवाली से निवेशकों की संपत्ति चार लाख करोड़ रुपए घट गई है।

Stocks to Watch: 25 सितंबर को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, PB फिनटेक से वारी एनर्जीज तक शामिल

Stocks to Watch: शेयर बाजार में 25 सितंबर को कई स्टॉक्स खबरों के चलते फोकस में रहेंगे। PB Fintech के शेयर 36% तक टूटने के बाद IRDAI के प्रस्ताव पर नजर है। वहीं Waaree Energies, Sterlite Technologies और Wheels India से भी अहम अपडेट आए हैं।

PB Fintech

फिनटेक कंपनी PB Fintech के शेयर गुरुवार को 36% तक टूट गए। इसकी वजह IRDAI के इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन से जुड़े बड़े बदलावों का प्रस्ताव है। कंपनी ने एनालिस्ट कॉल में कहा कि नए नियमों का जनरल इंश्योरेंस बिजनेस के रेवेन्यू पर गंभीर असर पड़ सकता है। एजेंट कमीशन और नई भर्तियों की रफ्तार को लेकर भी चिंता जताई गई।

Waaree Energies

सोलर और रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Waaree Energies की सब्सिडियरी Waaree Clean Energy Solutions ने स्पेशलिटी गैस बिजनेस में एंट्री की है। कंपनी भारत में सेमीकंडक्टर और सोलर सेल बनाने वाली कंपनियों को अल्ट्रा-हाई प्योरिटी गैस और केमिकल्स सप्लाई करेगी।

Interarch Building Solutions

प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग सॉल्यूशन कंपनी Interarch Building Solutions ने आंध्र प्रदेश के अट्टीवरम में नई हेवी स्ट्रक्चरल स्टील मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी शुरू की है। इसकी शुरुआती क्षमता 24,000 मीट्रिक टन सालाना है। इससे कंपनी की कॉम्प्लेक्स और हेवी स्टील स्ट्रक्चर बनाने की क्षमता बढ़ेगी।

Dr Lal PathLabs

डायग्नोस्टिक सर्विस कंपनी Dr Lal PathLabs ने SN Genelab में 70% हिस्सेदारी खरीदने को मंजूरी दी है। यह सौदा कैश में अधिकतम ₹168 करोड़ का है। इसके अलावा कंपनी को प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम ₹31.5 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ सकता है।

JSW Cement

सीमेंट कंपनी JSW Cement को सेंट्रल टैक्स विभाग की ओर से ₹229.85 करोड़ की GST डिमांड का शो-कॉज नोटिस मिला है। बेलगावी ऑडिट कमिश्नरेट ने यह नोटिस जारी किया है। इसमें लागू ब्याज और 10% पेनल्टी का भी प्रस्ताव है।

Inox Green Energy

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Inox Green Energy का QIP गुरुवार को खुल गया है। इसके लिए फ्लोर प्राइस ₹174.36 प्रति शेयर तय किया गया है। कंपनी इस फ्लोर प्राइस पर 5% तक की छूट भी दे सकती है।

Sterlite Technologies

टेलीकॉम और ऑप्टिकल फाइबर कंपनी Sterlite Technologies ने अपने Neuralis डेटा सेंटर प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में रेडीमेड फाइबर ऑप्टिक केबल की नई रेंज जोड़ी है। इन केबल्स में 48 से लेकर 6,912 तक ऑप्टिकल फाइबर हो सकते हैं। कंपनी के मुताबिक, ये प्रोडक्ट डेटा सेंटर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।

Inox Green Energy Services

रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी Inox Green Energy Services का QIP खुल गया है। कंपनी ने इसके लिए ₹174.36 प्रति शेयर का फ्लोर प्राइस तय किया है। QIP के जरिए कंपनी संस्थागत निवेशकों से फंड जुटाएगी।

Wheels India

ऑटोमोबाइल कंपोनेंट कंपनी Wheels India Ltd ने गुरुवार, 24 सितंबर को ₹250 करोड़ का QIP लॉन्च किया है। कंपनी ने इसका इंडिकेटिव इश्यू प्राइस ₹2,088 प्रति शेयर रखा है। इस पर निवेशकों को अधिकतम 4.3% तक की छूट मिल सकती है।

M&M Financial Services

NBFC कंपनी M&M Financial Services प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए ₹2,000 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCDs) जारी करने की तैयारी में है। इससे कंपनी को फंड जुटाने में मदद मिलेगी।

LCC

इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी LCC राजस्थान में ₹653.34 करोड़ के सिंचाई प्रोजेक्ट के लिए L-1 बिडर बनी है। यानी टेंडर में कंपनी ने सबसे कम बोली लगाई है। अब प्रोजेक्ट से जुड़ी आगे की प्रक्रिया पर बाजार की नजर रहेगी।

Transport Corporation of India

लॉजिस्टिक्स कंपनी Transport Corporation of India का बोर्ड 29 सितंबर को शेयर बायबैक के प्रस्ताव पर विचार करेगा। बोर्ड बैठक में बायबैक से जुड़े प्रस्ताव पर फैसला लिया जा सकता है।

Stock in Focus: 1 साल में 568% का मल्टीबैगर रिटर्न, अब डेटा सेंटर के लिए पेश की केबल की नई रेंज

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty और Sensex में 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट, क्रूड में उछाल से सहमा बाजार

भारतीय शेयर बाजारों में 24 सितंबर को बीते 10 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का बड़ा हाथ है। ब्रेंट क्रूड का प्राइस गुरुवार को उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। इसका असर शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।

इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयर क्रैश

सबसे ज्यादा गिरावट फाइनेंशियल खासकर इंश्योरेंस और इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयरों में आई। इसकी वजह इंश्योरेंस सेक्टर के रेगुलेटर आईआरडीएआई का एक प्रस्ताव है, जिसके लागू होने पर इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री पर मिलने वाला कमीशन कम हो जाएगा। इसका सीधा असर बीपी फिनटेक जैसी कंपनियों की कमाई पर पड़ेगा। पीबी फिनटेक का शेयर 36 फीसदी क्रैश कर गया।

सेंसेक्स, निफ्टी में 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट

निफ्टी 1.64 फीसदी यानी 383 अंक गिरकर 23,063 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.67 फीसदी यानी 1,247 अंक लुढ़कर 73,580 अंक पर क्लोज हुआ। दोनों ही सूचकांकों में 8 जुलाई के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 2.4 फीसदी चढ़कर 105 डॉलर के पार जाने की वजह ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान का संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में दिया गया भाषण है। 23 सितंबर को उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा।

क्रूड की ऊंची कीमतें बढ़ा सकती हैं महंगाई

ईरान के राष्ट्रपति के भाषण से यह साफ हो गया है कि मध्यपूर्व का संकट जल्द खत्म होने नहीं जा रहा है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिशें जारी हैं। अगर मध्यपूर्व की यह क्राइसिस जल्द खत्म नहीं होती है तो क्रूड ऑयल की कीमत लंबे समय तक हाई बनी रह सकती है। इसका सीधा असर दुनियाभर में इनफ्लेशन पर पड़ेगा। इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व सहित दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका असर कंपनियों के पूंजीगत निवेश पर पड़ेगा।

निफ्टी के 23500 से नीचे रहने तक बेयरिश ट्रेंड बना रहेगा

एक्सिस डायरेक्ट में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमंग गोर ने कहा, “भारत के लिए क्रूड की कीमतें काफी अहम हैं। कुछ समय तक 100 डॉलर से नीचे जाने के बाद फिर से क्रूड में उछाल दिख रहा है। इससे क्रूड की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर बाजार की रिकवरी पर पड़ा है।” उन्होंने कहा कि निफ्टी जब तक 23,500 से नीचे बना रहता है, मार्केट का ट्रेंड बेयरिश बना रहेगा।

इन कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट 

24 सितंबर को सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस (6.16 फीसदी), बजाज फिनसर्व (5.87 फीसदी), चोलामंडलम इनवेस्ट (5.20 फीसदी), एक्सिस बैंक (4.56 फीसदी), बजाज फिनसर्व (4.56 फीसदी), टाटा कैपिटल (3.94 फीसदी) और अदाणी एंटरप्राइजेज शामिल रहे।

PB Fintech Stock Crash: एक दिन में 34% तक टूटा स्टॉक, 20% सर्किट लिमिट के बावजूद इतनी बड़ी गिरावट कैसे आई?

PB Fintech Stock Crash: फिनटेक कंपनी PB Fintech के शेयर में 24 सितंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर पिछले बंद भाव ₹1,886.30 से गिरकर ₹1,244.50 तक आ गया। यानी एक ही दिन में शेयर करीब 34.02% टूट गया। अब सवाल है कि जब शेयर पर अधिकतम 20% की सर्किट लिमिट होती है तो इतनी बड़ी गिरावट कैसे आई?

PB Fintech शेयर क्रैश होने की वजह

आज शेयर में बड़ी गिरावट की वजह IRDAI का एक प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है। Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, IRDAI ने इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के कमीशन की लिमिट तय करने का प्रस्ताव रखा है।

जैन का कहना है कि इसके लागू होने पर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर कमीशन घटकर 15-20% रह सकता है। टर्म लाइफ इंश्योरेंस पर यह 25% हो सकता है। इसका सीधा असर PB Fintech जैसी इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों पर पड़ेगा। PB Fintech अपने प्लेटफॉर्म Policybazaar के जरिए इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के डिस्ट्रिब्यूशन बिजनेस में है।

20% सर्किट के बावजूद कैसे गिरा?

यहां एक बात समझना जरूरी है। F&O में उपलब्ध शेयरों पर सामान्य तौर पर 20% का फिक्स्ड डेली प्राइस बैंड नहीं होता। NSE ऐसे शेयरों में गलत कीमत पर ऑर्डर जाने से रोकने के लिए शुरुआत में 10% का डायनेमिक ऑपरेटिंग रेंज रखता है।

अगर शेयर की कीमत इस रेंज के करीब पहुंचती है और बाजार में लगातार एकतरफा मूवमेंट बना रहता है, तो एक्सचेंज तय शर्तों के तहत इस रेंज को आगे फ्लेक्स कर सकता है। इसके बाद शेयर को नई रेंज में ट्रेड करने की जगह मिल जाती है।

डायनेमिक बैंड क्या होता है?

इसे आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी शेयर का पिछला बंद भाव ₹500 है और उस पर 20% का लोअर सर्किट है। सामान्य स्थिति में शेयर ₹400 तक गिर सकता है। ₹400 पर पहुंचने के बाद ट्रेडिंग रुक जाएगी।

लेकिन डायनेमिक प्राइस बैंड वाले शेयर में मामला अलग है। यहां शुरुआती ऑपरेटिंग रेंज 10% हो सकती है। अगर शेयर लगातार नीचे जाता है और तय शर्तें पूरी होती हैं, तो एक्सचेंज इस रेंज को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा सकता है। NSE के नियमों में शुरुआती दो फ्लेक्सिंग के दौरान रेंज 5-5% बढ़ाने का प्रावधान है। इसके बाद भी तय प्रक्रिया के तहत फ्लेक्सिंग जारी रह सकती है।

इसे यूं समझिए कि सामान्य सर्किट एक दीवार जैसा है। वहां पहुंचते ही शेयर उस सीमा से आगे नहीं जा सकता। डायनेमिक ऑपरेटिंग रेंज में एक्सचेंज के नियमों के तहत यह सीमा आगे बढ़ाई जा सकती है, ताकि तेज एकतरफा मूवमेंट के दौरान ट्रेडिंग जारी रह सके।

PB Fintech में कैसे बढ़ी गिरावट?

PB Fintech में भी शेयर के नीचे जाने के साथ ऑपरेटिंग रेंज फ्लेक्स होती गई। इससे शेयर को पहले से नीचे के स्तरों पर ट्रेड करने की जगह मिलती गई।

इस तरह शेयर एक ही छलांग में 34% नीचे नहीं गया। गिरावट अलग-अलग चरणों में बढ़ी। आखिर में शेयर ₹1,244.50 तक पहुंच गया।

PB Fintech का शेयर 34% क्रैश, क्या मौजूदा प्राइस पर निवेश करने से होगी मोटी कमाई?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।