Bonus Share: 3 साल में पैसा हुआ डबल, अब हर शेयर पर 1 नया शेयर मिलेगा फ्री; रिकॉर्ड डेट 1 अक्टूबर

मैस्ट्रोस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम्स के शेयरहोल्डर्स को जल्द ही 1:1 के रेशियो में बोनस शेयर मिलने वाले हैं। इसका मतलब है कि शेयरहोल्डर्स को उनके पास मौजूद कंपनी के हर एक शेयर पर एक नया शेयर बोनस के तौर पर मिलेगा। रिकॉर्ड डेट 1 अक्टूबर 2026 है। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में दर्ज होंगे, वे बोनस शेयर के हकदार होंगे।

कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। बोनस शेयरों के अलॉटमेंट की तारीख 5 अक्टूबर है। इनमें ट्रेडिंग अगले दिन यानि कि 6 अक्टूबर से की जा सकेगी। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 63.90 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

मैस्ट्रोस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम्स मेडिकल इक्विपमेंट बनाने और टे​लीमेडिसिन के कारोबार में है। कंपनी के प्रोडक्ट्स और सर्विसेज की एडवांस्ड रेंज में पेशेंट मॉनिटर, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ, डिफिब्रिलेटर, पल्स ऑक्सीमीटर, फीटल मॉनिटर, स्ट्रेस टेस्ट सिस्टम आदि शामिल हैं।

Maestros Electronics का शेयर 6 महीने में 50 प्रतिशत मजबूत

मैस्ट्रोस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम्स के शेयरों में 28 सितंबर को दिन में लगभग 17 प्रतिशत तक की बढ़त दिखी। BSE पर शेयर ने 52 सप्ताह का नया हाई 205 रुपये क्रिएट किया। शेयर के लिए अपर प्राइस बैंड 210.70 रुपये और लोअर प्राइस बैंड 140.50 रुपये है। सर्किट लिमिट 20 प्रतिशत है। शेयर एक महीने में 26 प्रतिशत और 3 महीने में 40 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है। 6 महीनों में कीमत 50 प्रतिशत से ज्यादा मजबूत हुई है। शेयर 3 साल में निवेशकों का पैसा डबल कर चुका है। 5 साल में कीमत करीब 230 प्रतिशत बढ़ी है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

मैस्ट्रोस इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशंस सिस्टम्स का अप्रैल-जून 2026 तिमाही में रेवेन्यू 9.66 करोड़ रुपये रहा। इस बीच शुद्ध मुनाफा 1.53 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 2.77 करोड़ रुपये रही। पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान कंपनी का रेवेन्यू 39.18 करोड़ रुपये, शुद्ध मुनाफा 7.13 करोड़ रुपये और प्रति शेयर अर्निंग 12.93 करोड़ रुपये दर्ज की गई।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PB Fintech Stock Crash: एक दिन में 34% तक टूटा स्टॉक, 20% सर्किट लिमिट के बावजूद इतनी बड़ी गिरावट कैसे आई?

PB Fintech Stock Crash: फिनटेक कंपनी PB Fintech के शेयर में 24 सितंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर पिछले बंद भाव ₹1,886.30 से गिरकर ₹1,244.50 तक आ गया। यानी एक ही दिन में शेयर करीब 34.02% टूट गया। अब सवाल है कि जब शेयर पर अधिकतम 20% की सर्किट लिमिट होती है तो इतनी बड़ी गिरावट कैसे आई?

PB Fintech शेयर क्रैश होने की वजह

आज शेयर में बड़ी गिरावट की वजह IRDAI का एक प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है। Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, IRDAI ने इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के कमीशन की लिमिट तय करने का प्रस्ताव रखा है।

जैन का कहना है कि इसके लागू होने पर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर कमीशन घटकर 15-20% रह सकता है। टर्म लाइफ इंश्योरेंस पर यह 25% हो सकता है। इसका सीधा असर PB Fintech जैसी इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों पर पड़ेगा। PB Fintech अपने प्लेटफॉर्म Policybazaar के जरिए इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के डिस्ट्रिब्यूशन बिजनेस में है।

20% सर्किट के बावजूद कैसे गिरा?

यहां एक बात समझना जरूरी है। F&O में उपलब्ध शेयरों पर सामान्य तौर पर 20% का फिक्स्ड डेली प्राइस बैंड नहीं होता। NSE ऐसे शेयरों में गलत कीमत पर ऑर्डर जाने से रोकने के लिए शुरुआत में 10% का डायनेमिक ऑपरेटिंग रेंज रखता है।

अगर शेयर की कीमत इस रेंज के करीब पहुंचती है और बाजार में लगातार एकतरफा मूवमेंट बना रहता है, तो एक्सचेंज तय शर्तों के तहत इस रेंज को आगे फ्लेक्स कर सकता है। इसके बाद शेयर को नई रेंज में ट्रेड करने की जगह मिल जाती है।

डायनेमिक बैंड क्या होता है?

इसे आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी शेयर का पिछला बंद भाव ₹500 है और उस पर 20% का लोअर सर्किट है। सामान्य स्थिति में शेयर ₹400 तक गिर सकता है। ₹400 पर पहुंचने के बाद ट्रेडिंग रुक जाएगी।

लेकिन डायनेमिक प्राइस बैंड वाले शेयर में मामला अलग है। यहां शुरुआती ऑपरेटिंग रेंज 10% हो सकती है। अगर शेयर लगातार नीचे जाता है और तय शर्तें पूरी होती हैं, तो एक्सचेंज इस रेंज को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा सकता है। NSE के नियमों में शुरुआती दो फ्लेक्सिंग के दौरान रेंज 5-5% बढ़ाने का प्रावधान है। इसके बाद भी तय प्रक्रिया के तहत फ्लेक्सिंग जारी रह सकती है।

इसे यूं समझिए कि सामान्य सर्किट एक दीवार जैसा है। वहां पहुंचते ही शेयर उस सीमा से आगे नहीं जा सकता। डायनेमिक ऑपरेटिंग रेंज में एक्सचेंज के नियमों के तहत यह सीमा आगे बढ़ाई जा सकती है, ताकि तेज एकतरफा मूवमेंट के दौरान ट्रेडिंग जारी रह सके।

PB Fintech में कैसे बढ़ी गिरावट?

PB Fintech में भी शेयर के नीचे जाने के साथ ऑपरेटिंग रेंज फ्लेक्स होती गई। इससे शेयर को पहले से नीचे के स्तरों पर ट्रेड करने की जगह मिलती गई।

इस तरह शेयर एक ही छलांग में 34% नीचे नहीं गया। गिरावट अलग-अलग चरणों में बढ़ी। आखिर में शेयर ₹1,244.50 तक पहुंच गया।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।