Daily Voice: बाजार में अभी डिफेंसिव नजरिया बनाए रखने की जरूरत, लंबी अवधि में इंश्योरेंस सेक्टर दिखाएगा कमाल

Daily Voice : कोर महंगाई की चाल को देखते हुए 2027 की शुरुआत में फेड फंड्स रेट में एक और बढ़ोतरी संभव है,लेकिन लंबे समय तक सख्ती का दौर चलने की उम्मीद नहीं है। भारत की आर्थिक विकास दर 6.5% से 7% के बीच स्थिर रहेगी। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। इंश्योरेंस सेक्टर में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जबरदस्त ग्रोथ की संभावना दिख रही है। मिडिल क्लास की बढ़ती खपत,मददगार रेगुलेटरी सुधार और डिजिटल इनोवेशन से इस सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। ये बातें वॉटरफ़ील्ड एडवाइज़र्स के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर और इक्विटीज़ हेड विपुल भोवर ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं।

क्या आप US ट्रेज़री मार्केट को ग्लोबल मार्केट के लिए एक बड़ा जोखिम मानते हैं?

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यूएस का बॉन्ड मार्केट,ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम की नींव है। इस मार्केट में होने वाले स्ट्रक्चरल बदलाव आज ग्लोबल मार्केट पर असर डालने वाले सबसे अहम मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर हैं। जब “रिस्क-फ्री” US सॉवरेन डेट से अच्छा रिटर्न मिलता है तो यह ग्लोबल एसेट एलोकेशन की रणनीतियों को पूरी तरह से बदल देता है।

ट्रेजरी यील्ड के बढ़ने से ग्लोबल इक्विटी मल्टीपल्स पर दबाव पड़ता है और दुनिया भर की कंपनियों के लिए कर्ज लेने की लागत बढ़ जाती है। इसके कारण प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकते हैं,कैपिटल एक्सपेंडिचर में रुकावट आ सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

क्या अमेरिका की वित्तीय स्थिति टिकाऊ नहीं लगती?

इस पर उन्होंने आगे कहा कि जरूरी खर्च और ब्याज पर होने वाले भारी खर्च(जो इस साल 1 ​​लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो गए हैं) में लगातार बढ़ोतरी से एक ढांचागत असंतुलन पैदा हो रहा है। अगर बड़े नीतिगत सुधार नहीं किए गए तो कर्ज का यह बढ़ता बोझ प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को घटा सकता है और भविष्य में आर्थिक मजबूती में बाधा डाल सकता है।

कांग्रेसनल बजट ऑफिस का अनुमान है कि 2026 में फ़ेडरल घाटा लगभग 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा,जो अमेरिका की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 6 प्रतिशत है। इसके चलते अमेरिकी जनता पर मौजूद कर्ज GDP के 100 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा।

क्या आपको उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक US फ़ेडरल रिज़र्व दो और बार ब्याज दरें बढ़ाएगा और उसके बाद अगले साल की पहली तिमाही में एक और बढ़ोतरी करेगा?

सितंबर 2026 में चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में फ़ेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की,जिससे ये दरें 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत की रेंज में आ गईं। ‘डॉट प्लॉट’ से पता चला कि FOMC के 18 में से 16 सदस्यों को उम्मीद है कि इस साल कम से कम एक बार और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होगी,हालांकि सिर्फ़ चार सदस्यों को दो और बार बढ़ोतरी की उम्मीद है।

एनर्जी की बढ़ती लागत की वजह से आई महंगाई इस सख्ती को सही ठहराती है। कोर महंगाई के ट्रेंड को देखते हुए 2027 की शुरुआत में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है,लेकिन लंबे समय तक सख्ती का दौर चलने की उम्मीद नहीं है। इसलिए,हालांकि इस साल एक और बढ़ोतरी की संभावना है,लेकिन दो और बार बढ़ोतरी होने की संभावना कम है।

क्या आपको लगता है कि भारत की विकास दर 6.5 से 7 प्रतिशत के आसपास स्टेबल हो जाएगी?

भारत की आर्थिक विकास दर के 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच स्टेबल होने की उम्मीद है। IMF ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत GDP विकास दर का अनुमान लगाया है। महामारी के बाद के असर, सरकारी खर्च और रुकी हुई मांग की वजह से भारत में विकास दर 7.8 प्रतिशत के करीब रही है, लेकिन बेस इफ़ेक्ट के कम होने और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव व ऊंची ब्याज दरों जैसी ग्लोबल चुनौतियों के कारण इतनी ऊंची दरें शायद लंबे समय तक बनी न रह पाएं। हालांकि, 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

अमेरिकी डॉलर में बढ़ोतरी के अहम कारण क्या हैं?

अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज पर ज़्यादा यील्ड (रिटर्न) मुख्य रूप से महंगाई के दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित होती है, जो ग्लोबल इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करती हैं। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल अस्थिरता बढ़ने से जोखिम से बचने वाले निवेशक अमेरिकी डॉलर से मिलने वाली सुरक्षा और लिक्विडिटी की ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा,अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी विदेशी निवेश और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाला खर्च डॉलर की मांग को और बढ़ा रहा है। दूसरे G10 देशों की तुलना में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मज़बूती, डॉलर की स्थिति को दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी के तौर पर और मजबूत कर रही है।

क्या आप इक्विटी को लेकर इसलिए सतर्क हैं कि तेल की कीमतें ज़्यादा हैं और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ रही हैं या आपकी इस सोच के पीछे कोई और भी वजह है?

तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगाई की चिंताएं भी हैं। ऐसे में,मौजूदा महंगे वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए बाजार में अभी तुरंत पॉजिटिव असर डालने वाली कोई वजह नहीं दिख रही है। ऐसे में जब तक अर्निंग्स की साफ तस्वीर नहीं दिखती या वैल्यूएशन में जरूरी टाइम करेक्शन नहीं होता,तब तक डिफेंसिव रुख अपनाना ही बेहतर है।

क्या आपको भारत में भी ब्याज दरें बढ़ाने का दौर शुरू होता दिख रहा है?

उम्मीद है कि भारत में ब्याज दरें बढ़ाने का दौर अक्टूबर 2026 में मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक से शुरू होगा। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने फरवरी 2023 से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा है, लेकिन घरेलू और ग्लोबल स्तर पर बढ़ते दबावों के कारण इसमें बदलाव की जरूरत है।

कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने और रुपये की कीमत घटने की वजह से खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। ग्लोबल फाइनेंशियल हालात के खराब होने के साथ,अर्थशास्त्रियों को दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे दर बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगी और सख्ती का एक नया दौर शुरू हो जाएगा।

क्या आपको लगता है कि मौजूदा स्तरों पर इंश्योरेंस सेक्टर में खरीदारी का मौका है?

भारत में इंश्योरेंस मार्केट की पहुंच अभी भी काफी कम है और 2026 से 2030 के बीच सालाना प्रीमियम ग्रोथ के 6.9 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। मिडिल क्लास की बढ़ती खपत,मददगार रेगुलेटरी सुधार और डिजिटल इनोवेशन की वजह से यह सेक्टर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जबरदस्त ग्रोथ की संभावना रखता है।

 

Market Next Week : मिड और स्मॉल कैप्स में लगातार चौथे हफ्ते दिखी गिरावट, जानिए अगले हफ्ते कैसी रह सकती है बाजार की चाल

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Global Market :एशिया बाजारों में मिला-जुला कारोबार, जापान 1% ऊपर, क्रूड के साथ US बॉन्ड यील्ड की टेंशन कायम

Asian Market Today: ग्लोबल संकेत कमजोर से मिले-जुले रहे। शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार मिले-जुले रहे। निवेशक ट्रंप-शी की बैठक, अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव, तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड की बिकवाली पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

वॉल स्ट्रीट में बॉन्ड की भारी बिकवाली के दबाव के बावजूद, शुरुआती कारोबार में इस क्षेत्र के शेयरों में 0.2% से ज़्यादा की बढ़त हुई। हैंग सेंग फ्यूचर्स 0.3% गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 1.05% चढ़ा और टोपिक्स में 1.15% की बढ़त हुई। दक्षिण कोरिया का कोस्पी लगातार दूसरे दिन ‘चूसोक’ (Chuseok) त्योहार के कारण बंद रहा। ताइवान का इंडेक्स और चीनी बाज़ार भी ‘मिड-ऑटम’ त्योहारों के कारण बंद रहे।

जापानी येन डॉलर के मुकाबले 158.78 पर काफी हद तक स्थिर रहा, और ऑफशोर युआन 6.7162 पर सपाट रहा।

इस बीच भारतीय बाजारों में हल्की शुरुआत के संकेत मिले, जिसमें GIFT निफ्टी ने नेगेटिव ज़ोन में शुरुआत का संकेत दिया। यह गुरुवार के खराब सत्र के बाद हुआ, जब निफ्टी 7 अप्रैल, 2026 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया था।

गुरुवार को भारतीय शेयरों पर ग्लोबल उथल-पुथल का सबसे ज़्यादा असर पड़ा, क्योंकि US बॉन्ड यील्ड में उछाल, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मजबूत होने से बाज़ार नीचे आ गया। 10-साल का US ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.13% हो गया, जो जुलाई 2007 के बाद सबसे ऊंचा स्तर है, जबकि US-ईरान संघर्ष को लेकर नई चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमत फिर से $106 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई।

मजबूत US डॉलर, जो 101 के पार चला गया, ने भारतीय रुपये और मेटल शेयरों पर और दबाव डाला।

IRDAI के ड्राफ्ट डिस्ट्रीब्यूशन नियमों के कारण भारी बिकवाली से बैंकिंग और इंश्योरेंस शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट आई। PB फिनटेक 32% और टर्टलमिंट 20% गिर गए, जबकि एक्सिस बैंक और इंडसइंड बैंक में से प्रत्येक में लगभग 5% की गिरावट आई। मंथली एक्सपायरी से जुड़ी अस्थिरता और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली ने गिरावट को और बढ़ा दिया।

क्रूड में दबाव

इस बीच, तेल बाजार के दबाव के पीछे एक मुख्य कारण बना रहा। ब्रेंट क्रूड लगातार दूसरे सत्र में बढ़कर $106.60 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जिससे इस साल इसकी बढ़त 75% से ज़्यादा हो गई। हालांकि, शुक्रवार को कुछ राहत मिली क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 0.5% गिर गई। यह गिरावट उन खबरों के बीच आई जिनमें कहा गया था कि अमेरिका और ईरान के बातचीत करने वाले एक ऐसे चरणबद्ध समझौते पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत तेहरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज’ को फिर से खोल देगा और बदले में वाशिंगटन ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटा लेगा। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड की कीमत 0.8% गिरकर $93.87 प्रति बैरल हो गई।

उम्मीद है कि आने वाले समय में बाजार तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड पर ध्यान केंद्रित रखेंगे, क्योंकि स्वैप्स में अब अगले साल के दौरान US फेड द्वारा तीन बार और ‘क्वार्टर-पॉइंट’ (0.25%) की बढ़ोतरी की पूरी तरह से उम्मीद की जा रही है।

अमेरिका-ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से दो साल की US ट्रेजरी यील्ड में 150 बेसिस पॉइंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि इसी अवधि में 30 साल की यील्ड में 80 बेसिस पॉइंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

PB Fintech Stock Crash: एक दिन में 34% तक टूटा स्टॉक, 20% सर्किट लिमिट के बावजूद इतनी बड़ी गिरावट कैसे आई?

PB Fintech Stock Crash: फिनटेक कंपनी PB Fintech के शेयर में 24 सितंबर को भारी बिकवाली देखने को मिली। शेयर पिछले बंद भाव ₹1,886.30 से गिरकर ₹1,244.50 तक आ गया। यानी एक ही दिन में शेयर करीब 34.02% टूट गया। अब सवाल है कि जब शेयर पर अधिकतम 20% की सर्किट लिमिट होती है तो इतनी बड़ी गिरावट कैसे आई?

PB Fintech शेयर क्रैश होने की वजह

आज शेयर में बड़ी गिरावट की वजह IRDAI का एक प्रस्ताव है। इसके लागू होने पर इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है। Share.Market by PhonePe के मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन के मुताबिक, IRDAI ने इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के कमीशन की लिमिट तय करने का प्रस्ताव रखा है।

जैन का कहना है कि इसके लागू होने पर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी पर कमीशन घटकर 15-20% रह सकता है। टर्म लाइफ इंश्योरेंस पर यह 25% हो सकता है। इसका सीधा असर PB Fintech जैसी इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों पर पड़ेगा। PB Fintech अपने प्लेटफॉर्म Policybazaar के जरिए इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के डिस्ट्रिब्यूशन बिजनेस में है।

20% सर्किट के बावजूद कैसे गिरा?

यहां एक बात समझना जरूरी है। F&O में उपलब्ध शेयरों पर सामान्य तौर पर 20% का फिक्स्ड डेली प्राइस बैंड नहीं होता। NSE ऐसे शेयरों में गलत कीमत पर ऑर्डर जाने से रोकने के लिए शुरुआत में 10% का डायनेमिक ऑपरेटिंग रेंज रखता है।

अगर शेयर की कीमत इस रेंज के करीब पहुंचती है और बाजार में लगातार एकतरफा मूवमेंट बना रहता है, तो एक्सचेंज तय शर्तों के तहत इस रेंज को आगे फ्लेक्स कर सकता है। इसके बाद शेयर को नई रेंज में ट्रेड करने की जगह मिल जाती है।

डायनेमिक बैंड क्या होता है?

इसे आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए किसी शेयर का पिछला बंद भाव ₹500 है और उस पर 20% का लोअर सर्किट है। सामान्य स्थिति में शेयर ₹400 तक गिर सकता है। ₹400 पर पहुंचने के बाद ट्रेडिंग रुक जाएगी।

लेकिन डायनेमिक प्राइस बैंड वाले शेयर में मामला अलग है। यहां शुरुआती ऑपरेटिंग रेंज 10% हो सकती है। अगर शेयर लगातार नीचे जाता है और तय शर्तें पूरी होती हैं, तो एक्सचेंज इस रेंज को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा सकता है। NSE के नियमों में शुरुआती दो फ्लेक्सिंग के दौरान रेंज 5-5% बढ़ाने का प्रावधान है। इसके बाद भी तय प्रक्रिया के तहत फ्लेक्सिंग जारी रह सकती है।

इसे यूं समझिए कि सामान्य सर्किट एक दीवार जैसा है। वहां पहुंचते ही शेयर उस सीमा से आगे नहीं जा सकता। डायनेमिक ऑपरेटिंग रेंज में एक्सचेंज के नियमों के तहत यह सीमा आगे बढ़ाई जा सकती है, ताकि तेज एकतरफा मूवमेंट के दौरान ट्रेडिंग जारी रह सके।

PB Fintech में कैसे बढ़ी गिरावट?

PB Fintech में भी शेयर के नीचे जाने के साथ ऑपरेटिंग रेंज फ्लेक्स होती गई। इससे शेयर को पहले से नीचे के स्तरों पर ट्रेड करने की जगह मिलती गई।

इस तरह शेयर एक ही छलांग में 34% नीचे नहीं गया। गिरावट अलग-अलग चरणों में बढ़ी। आखिर में शेयर ₹1,244.50 तक पहुंच गया।

PB Fintech का शेयर 34% क्रैश, क्या मौजूदा प्राइस पर निवेश करने से होगी मोटी कमाई?

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market Insight : बाजार में हालात पलटे, इंश्योरेंस सेक्टर में होगा बड़ा एक्सीडेंट, ऑटो और रियल्टी शेयरों में भी गिरावट का डर

Market Insight : बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में हालात पलट गए हैं। कल अच्छी क्लोजिंग के बावजूद हमने लॉन्ग लेकर जाने से मना किया था। नजरिया यही था कि ट्रेड लेकर जाना जुआ खेलने जैसा होगा। परसों के आउटसाइड डे के बाद कल इनसाइड डे बना था। अगर गिफ्ट निफ्टी सही है तो आज हम 23,250-23,300 पर खुलेंगे। 23,100-23,150 का जोन बाजार के लिए लक्ष्मण रेखा है। आज इंश्योरेंस सेक्टर में बड़ा एक्सीडेंट होगा। IRDAI का कंसल्टेशन पेपर उम्मीद से एकदम उल्टा आया है।

बाजार: आज के संकेत

बॉन्ड यील्ड से कोहराम मच गया है। 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.135% पर आ गई है। जुलाई 2007 के बाद 10 साल की यील्ड सबसे ज्यादा ऊंचाई पर है।इसमें 7 अप्रैल 2025 के बाद एक-दिन की सबसे बड़ी तेजी आई है। 2 साल की यील्ड 4.947% पर पहुंच गई है। मई 2024 के बाद सबसे ऊंची 2 साल की यील्ड दिखी है। 30 साल की यील्ड 5.398% पर पहुंच गई है। 30 साल की यील्ड जून 2007 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर है।

यील्ड में तेजी के कारण

US के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI के आंकड़े मजबूत रहे हैं। सर्विसेज PMI 5 साल के हाई पर पहुंच गई है। S&P Global सितंबर सर्विसेज PMI 58.7 पर है। अगस्त में सर्विसेज PMI 56.5 पर थी। मैन्युफैक्चरिंग PMI 56.7 पर, 4 साल के हाई पर है। यह कोरोना के बाद 2015 से सबसे तेज उछाल है।

अभी और बढ़ेगी ब्याज दर?

फेड गवर्नर माइकल बार की हॉकिस चेतावनी आई है। उन्होंने कहा है कि महंगाई को समय पर नीचे लाने के लिए पॉलिसी में बदलाव जरूरी है। टिकाऊ ग्रोथ और ज्यादा रोजगार के लिए प्राइस स्टेबिलिटी अहम है। CME फेडवॉच टूल के मुताबिक Oct में 0.25% बढ़ोतरी की संभावना 70% है। पहले 0.25% बढ़ोतरी की संभावना 55% ही थी।

बॉन्ड की कमजोर नीलामी

5 साल के ट्रेजरी नोट की नीलामी में डिमांड कमजोर रही है। ऑप्शन 5.033% यील्ड पर पूरा हुआ। 6 ऑप्शन का औसत यील्ड 4.186% रहा।

कच्चे तेल में फिर तेजी

ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान के UNGA में भाषण के बाद कच्चे तेल में तेजी आई। ब्रेंट $102 के ऊपर है। WTI भी $91/बैरल के पार चला गया है। UK मैरीटाइम एजेंसी का दावा है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में एक कार्गो जहाज में आग लगी है।

पॉलिटिको की रिपोर्ट है कि US डीजल एक्सपोर्ट पर रोक लगा सकता है। प्रशासन रोक के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। 90 दिनों के लिए एक्सपोर्ट पर रोक की योजना है। अमेरिका के एनर्जी सेक्रेटरी हैं क्रिस राइट ने कहा है कि पूरा बैन नहीं होगा,कुछ पाबंदियों पर विचार किया जा रहा है। एक्सपर्ट्स की चेतावनी है कि डीजल एक्सपोर्ट पर रोक का फैसला गलत होगा। इससे US में रिटेल गैसोलीन महंगा हो सकता है।

ट्रंप पर बरसे मसूद पेजेशकियान

UNGA में ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियान ने सख्त रुख दिखाया। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन की इजाजत नहीं। सबसे पहले प्रतिबंध और नेवल ब्लॉकेड हटना जरूरी है। अब तक हॉर्मुज से सभी ने फायदा उठाया है। लेकिन ईरान प्रतिबंध झेले,ये मंजूर नहीं है। किसी भी हाल में बल की भाषा स्वीकार नहीं है।

पेजेशकियान ने कहा कि ईरान की एटॉमिक हथियार बनाने में दिलचस्पी नहीं है। लेकिन विकास के लिए न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी जरूरी है। न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी विकसित करना ईरान का अधिकार है। किसी भी सूरत में अपना अधिकारी नहीं छोड़ेंगे। प्रोग्राम से जुड़े सवाल युद्ध के मैदान पर हल नहीं होंगे। पेजेशकियान ने आगे कहा कि स्ट्रेट से अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड तुरंत हटे। ईरानी एसेट्स को अनफ्रीज करना जरूरी है। सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना भी जरूरी है।

आज का एक्सीडेंट: PB Fintech

IRDAI का कंसल्टेशन पेपर उम्मीद से एकदम उल्टा है। PB Fintech आज 10% नीचे खुल सकता है और हो सकता है उसके बाद और भी गिरे। बाजार की उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब कंसल्टेशन पेपर आया है।

इस कंसल्टेशन पेपर का सबसे ज्यादा असर PB Fintech, Turtlemint, Max Fin, HDFC Life, LTF, IndusInd Bank और IDFC First Bank पर पड़ेगा। वहीं, LIC और SBI Life पर इसका सबसे कम असर होगा।

आज कहां लगाएं दांव?

PB फिनटेक आज का एक्सीडेंट होगा। बाकी इंश्योरेंस शेयरों में भी आज गिरावट संभव है। ONGC और OIL में आज वापस रिकवरी आ सकती है। इंटरग्लोब और एशियन पेंट्स पर क्रूड में रैली का असर दिख सकता है। मुथूट,मणप्पुरम में आज सोने में गिरावट और NBFCs में दबाव का असर दिख सकता है। चांदी में गिरावट से हिंदुस्तान जिंक में दबाव संभव है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती से मेटल शेयरों में गिरावट आ सकती है। बैंक और NBFCs में आज दबाव संभव है। लार्जकैप IT शेयरों में भी आज गिरावट का खतरा है। ऑटो और रियल्टी शेयरों में आज बड़ी गिरावट की आशंका है।

NSE की लिस्टिंग

NSE की लिस्टिंग शायद बहुत ज्यादा प्रीमियम पर ना हो। प्री-IPO निवेशकों का लॉक इन है लेकिन करीब 15,000 करोड़ के फ्लोट पर नहीं हैं। कुछ चुनिंदा AIFs पर लॉक इन लागू नहीं है। NSE में आज AIF की सप्लाई आएगी। 1 महीने के बाद एंकर निवेशकों की सप्लाई आएगी और 6 महीने बाद प्री-IPO निवेशकों की सप्लाई आएगी। NSE में डिमांड भी मजबूत रह सकती है। MSCI शायद फास्ट ट्रैक पर NSE को शामिल करे।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 23,300-23,350 पर और सबसे अहम सपोर्ट 23,100-23,150 पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,400-23,450 पर और बड़ा रजिस्टेंस 23,500-23,550 पर है। 200 पॉइंट नीचे खुलने के बाद थोड़ा रुकें। आज देखना होगा 23,100-23,150 बचता है या नहीं।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

बैंक निफ्टी पर पहला सपोर्ट 56,000-56,200 पर और क्रिटिकल सपोर्ट 55,500-55,800 पर है। फिलहाल रजिस्टेंस की बात करना बेमानी है।

 

Trading Plan: बाजार के दायरे में रहने की उम्मीद, SBI सिक्योरिटीज के सुदीप शाह से जानें आज के लिए ट्रेडिंग रणनीति

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Trading plan :ये बाजार पोजीशन लेकर जाने वाला नहीं, अपनी पोजिशन्स समेटें और सोमवार को नया नजरिया लेंगे

Trading plan :बाजार फिर ऊपरी स्तरों पर फिर अटक गया है। रिलांयस के सपोर्ट के बावजूद निफ्टी 24000 पार करने में संघर्ष कर रहा है। बैंक निफ्टी भी 58000 के जोन पर फंसा हुआ है। ब्रॉडर मार्केट में सुस्ती है। कच्चा तेल 95 डॉलर प्रति बैरल पर बरकरार,हालांकि इंडिया VIX 3 परसेंट नीचे है। केबल इंडस्ट्री में आदित्या बिड़ला ग्रुप की एंट्री से दूसरे कंपनियों के शेयरों को जोर का झटका लगा है। KEI, पॉलीकैब और हैवेल्स में 5-8 परसेंट की तेज गिरावट आई है। तीनों शेयर वायदा के टॉप लूजर्स में शामिल हैं।

आज डिफेंस शेयर दम दिखा रहे हैं। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स करीब एक परसेंट ऊपर है। GE एयरोस्पेस से 3 इंजन की डिलिवरी मिलने और गोल्डमैन सैक्स की बुलिश रिपोर्ट से HAL भागा है। यह शेयर करीब 4 परसेंट उछलकर वायदा के टॉप गेनर्स में शुमार है। कोचिन शिपयार्ड और गार्डनरीच में भी तेजी आई है। फाइनेंशियल और कैपिटल मार्केट शेयरों में भी खरीदारी आई है। दोनों इंडेक्स करीब एक परसेंट मजबूत हुए हैं। साथ ही चुनिंदा तेल-गैस, मेटल, सरकारी और प्राइवेट बैंकों में भी रौनक है। लेकिन फार्मा, रियल्टी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में दबाव है।

बाजार: फिर वही कहानी

सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में रैली आई लेकिन ऊपरी स्तरों पर नहीं टिका। निफ्टी, बैंक निफ्टी फिर से रजिस्टेंस जोन में आ कर रुके अच्छी बात ये कि दोनों अभी भी ग्रीन में हैं। मिडकैप, स्मॉलकैप में आज अंडरपरफॉर्मेंस है। केबल & वायर शेयरों में बड़ी गिरावट है। कैपिटल मार्केट शेयरों में बड़ी तेजी। रिलायंस ने बुल्स के लिए लीडरशिप ली है। इंश्योरेंस शेयरों में अच्छी तेजी है। NSE के IPO से जुड़े शेयरों में भी तेजी है। चुनिंदा ऑटो शेयरों में आज भी कमजोरी

बाजार: अब क्या?

बाजार वापस दायरे में फंस गया है। बाजार के पास चलने के ट्रिगर्स नहीं हैं। ग्लोबल संकेत अच्छे हैं, लेकिन कच्चे तेल की तेजी ने कैप लगा दिया है। बड़ी तेजी के लिए कच्चे तेल का गिरना जरूरी है। बाजार में अभी भी रैली फेल होने पर बेच कर पैसा बना है। लेकिन अच्छी बात ये है कि बाजार गिरने को तैयार नहीं है जब तक 23,800 बचा है, बाजार में शायद ज्यादा गिरावट शायद ना हो। लेकिन 23,800 टूटा तो बड़ी गिरावट का रिस्क होगा। बैंक निफ्टी बार-बार 57,800 टेस्ट कर रहा है। अगर 57,800-58,000 पार हुआ तो बड़ा पॉजिटिव होगा।

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी के लिए 23,800-23,850 पर सपोर्ट और 24,000-24,050 पर रेजिस्टेंस है। वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 57,300-57,500 पर सपोर्ट और 57,800-58,000 पर रेजिस्टेंस हैं।

प्री-CAS रणनीति

ये बाजार पोजीशन लेकर जाने वाला नहीं है। आज शाम को US का बेहद अहम Payroll डाटा आएगा। Payroll डाटा के बाद बॉन्ड यील्ड में बड़ा मूव आ सकता है। इसलिए अपनी पोजिशन्स समेटें और सोमवार को नया नजरिया लेंगे।

CAS पर CNBC-आवाज़: ट्रेडर्स के साथ

CAS पर CNBC-आवाज़ की मुहिम का असर देखने को मिला है। SEBI ने कहा है कि कैश मार्केट में CAS के नतीजों की समीक्षा जारी है। CAS में बदलाव का प्रस्ताव लाया जा सकता है। सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके बदल सकते हैं। F&O सेटलमेंट प्राइस के तरीके में बदलाव संभव है। एक हफ्ते के भीतर कंस्लटेशन पेपर ला सकते हैं।

CAS पर मुहिम, रिटेल ट्रेडर्स के सुझाव

सभी शेयरों की क्लोजिंग एक जैसी हो। यह 3:15 या 3:30 PM हो सकती है। कैश, फ्यूचर्स की अलग-अलग क्लोजिंग से भ्रम रहता है। प्राइस रेंज को ±3% की बजाय 0-0.3% तक छोटा करें। प्राइस रेंज छोटी होने से ऑक्शन रेंज भी घटेगी। इससे CAS में प्राइसिंग ज्यादा अच्छी तरह निकलेगी। छोटे प्राइस बैंड से बड़े प्राइस स्विंग से बचेंगे। इससे ऑप्शन राइटर्स का जोखिम भी घटेगा। वॉल्यूम बढ़ने तक रेंज को छोटा रखना अच्छा। डेली सेटलमेंट को 3:15 बजे ही किया जाए।

एक्सपायरी के दिन एक्सपायर होने वाले ऑप्शन को CAS से बाहर रखें। अगर आज एक्सपायरी है तो एक्सपायरी ENDING TIME पर ऑप्शन सेटल हों। CAS का उद्देश्य प्राइस डिस्कवरी हो, ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं। प्री-ओपन की तरह टर्मिनल पर CAS के भाव भी दिखें। ऑप्शंस एक्सपायरी को CAS से डीलिंक किया जाए। ऑप्शंस की एक्सपायरी 3:15 पर कर दी जाए। 3:25 से 3:28 के बीच HFTs को ऑर्डर कैंसिल करने से रोका जाए। पहले की तरह 3:30 तक सामान्य ट्रेडिंग हो, बाद में 10 मिनट का CAS हो। हर ब्रोकर के टर्मिनल पर इंडिकेटिव भाव दिखने चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Mantra : कोटक AMC की शिबानी कुरियन से जानें, शेयर बाजार के इस रोलर कोस्टर राइड में कहां बनेगा पैसा

Market Mantra : शेयर बाजार इस समय जोरदार रोलर कोस्टर राइड में हैं। ग्लोबल अनिश्चितता,तिमाही नतीजों और बाजार के वैल्यूएशन निवेश की रणनीति पर बड़ा असर डाल रहे हैं। ऐसे में दिग्गज फंड मैनेजर क्या नजरिया लेकर चल रहे हैं, अब आगे बाजार की दिशा क्या होगी? इन सब बातों को लेकर निवेशक कंफ्यूज है। ऐसे में निवेश को लेकर क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं? इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं कोटक महिंद्रा AMC की सीनियर फंड मैनेजर और इक्विटी रिसर्च हेड शिबानी कुरियन।

Q1 नतीजे बाजार के लिए करेंगे बड़े ट्रिगर का काम 

बाजार पर बात करते हुए शिबानी कुरियन ने कहा कि वेस्ट एशिया संकट के चलते बाजार में काफी उतार-चढ़ाव है। शॉर्ट टर्म में बाजार का रुख वेस्ट एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगी। Q1 अर्निंग्स सीजन से बाजार की रिकवरी को सपोर्ट मिलेगा। अब तक Q1 नतीजे ज्यादातर अनुमान से बेहतर रहे। Q1 नतीजे बाजार के लिए बड़ा ट्रिगर का काम करेंगे।

लार्जकैप प्राइवेट बैंकों के नतीजों से मिली निराशा

उन्होंने आगे कहा कि मिडकैप कंपनियों के नतीजे सुस्त रहे हैं। OMCs को छोड़कर सभी सेक्टर्स के मजबूत नतीजे आए हैं। स्मॉलकैप कंपनियों के नतीजे मिलेजुले रहे हैं। NBFCs, ऑटो और कैपिटल गुड्स में अनुमान से बेहतर नतीजे देखने को मिले हैं। लार्जकैप प्राइवेट बैंकों के नतीजों से निराशा मिली है। पिछले 2 साल के मुकाबले अर्निंग्स सीजन में सुधार की उम्मीद दिख रही है।

IT सेक्टर का आउटलुक अभी भी सुस्त

आईटी सेक्टर पर अपनी राय साझा करते हुए शिबानी कुरियन ने कहा कि IT सेक्टर का आउटलुक अभी भी सुस्त है। डिस्क्रिशनरी खर्च में कम सुधार देखने को मिला है। ज्यादातर IT कंपनियों ने ग्रोथ गाइडेंस घटाई है। AI और कंपिटीशन के चलते प्राइसिंग में दबाव देखने को मिल रहा है। IT कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ और आउटलुक कमजोर है। AI से वॉल्यूम ग्रोथ को सपोर्ट मिला है। मिडकैप IT में वैल्यूशन बेहतर दिख रहे हैं। उनके फोकस फंड में 25-30 शेयर हैं। कैपिटल गुड्स, हेल्थकेयर सेक्टर पर ओवरवेट हैं। फाइनेंशियल पर भी ओवरवेट हैं। लेकिन इंश्योरेंस स्पेस पर अंडरवेट हैं।

 

Experts View : आशीष चतुरमोहता से जानें, मौजूदा बाजार में क्या करें निवेशक, लंबे समय के लिए कहां लगाएं दांव?

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

इंश्योरेंस सेक्टर के लिए आईं दो बड़ी एक्सक्लूसिव खबरें, ICICI प्रू लाइफ और SBI लाइफ को बड़ी राहत संभव

इंश्योरेंस सेक्टर की 2 बड़ी एक्सक्लूसिव खबरें आई हैं। सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के आधार पर CNBC TV18 के यश जैन ने बताया कि पहली खबर ये है कि ICICI प्रू लाइफ को बड़ी राहत मिल सकती है। IRDAI से प्रूडेंशियल को प्रोमोटर के रूप में डी-क्लासिफाई करने की इजाजत से मिल सकती है। दूसरी खबर ये है कि IRDAI अनिवार्य ओपन आर्किटेक्चर के पक्ष में नहीं है जो कि SBI लाइफ के लिए राहत की बात है।

IRDAI से प्रूडेंशियल को राहत?

सूत्रों के मुताबिक ICICI प्रूडेंशियल को IRDAI से बड़ी राहत संभव है। प्रूडेंशियल को प्रोमोटर के रूप में डी-क्लासीफाई करने की इजाजत मिल सकती है। ICICI प्रूडेंशियल लाइफ में पूरा हिस्सा बनाए रखने की इजाजत भी संभव है। IRDAI प्रूडेंशियल की अर्जी पर सिर्फ प्रोसीजरल ऑब्जर्वेशन दे सकता है। डीक्लासिफिकेशन पर IRDAI से सितंबर अंत या अक्टूबर तक मंजूरी संभव है।

बता दें कि प्रूडेंशियल के लिए भारती लाइफ में हिस्सा खरीद पर IRDAI की मंजूरी जरूरी है। 75% हिस्सा खरीद के प्रूडेंशियल के फैसले पर IRDAI की मंजूरी जरूरी है। प्रूडेंशियल के ICICI प्रू लाइफ में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने और अधिग्रहण के लिए फंड का इंतजाम खुद करने की उम्मीद है। FY26 तक, प्रूडेंशियल के पास 7.7 अरब डॉलर कैश और कैश इक्विवेलेंट के तौर पर मौजूद थे। CNBC-TV18 ने प्रूडेंशियल और IRDAI को पत्र लिखा है। दोनों की ओर से जवाब का इंतजार है।

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SBI लाइफ को राहत

SBI लाइफ के लिए भी बड़ी राहत की खबर है। CNBC-TV18 को सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक सरकार ओपन आर्किटेक्चर को अनिवार्य नहीं कर सकती है। IRDAI भी अनिवार्य ओपन आर्किटेक्चर के पक्ष में नहीं है। IRDAI का कहना है कि ओपन आर्किटेक्चर से मिस-सेलिंग का खतरा बढ़ सकता है। ज्यादा विकल्प ग्राहकों को भ्रमित कर सकते हैं। क्लोज्ड मॉडल ज्यादा प्रभावी और जवाबदेह हैं। बता दें कि बैंकएश्योरेंस, बैंकों के जरिए बीमा पॉलिसी बेचने की व्यवस्था है। वहीं, ओपन आर्किटेक्चर इंश्योरेंस इंडस्ट्री में एक तरह का डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल है।

 

अपडेट जारी…………..