MC Poll : रुपये के 94 रुपये प्रति डॉलर पर वापस आने की संभावना कम, कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड में बढ़त से बना रहेगा दबाव

MC Poll : सोमवार को भारतीय रुपया 95 पैसे मजबूत होकर 95.78 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ है। शुक्रवार को यह 96.73 पर बंद हुआ था। यह 2 अप्रैल, 2026 के बाद से एक दिन में आई सबसे बड़ी बढ़त है। HDFC सिक्योरिटीज में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार का कहना है किसफॉरेक्स मार्केट में सट्टेबाजी को रोकने और उतार-चढ़ाव को काबू में रखने के लिए RBI के खास उपायों की वजह से एशियाई देशों की करेंसी के मुकाबले भारतीय रुपया सबसे मजबूत रहा। सप्लाई की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद से कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट ने भी बाजार के सेंटीमेंट को सपोर्ट दिया। हालांकि, शुरुआती बढ़त के बाद करेंसी पर दबाव बना रहा, क्योंकि घरेलू शेयर बाजार में कमजोरी और विदेशी फंड की लगातार निकासी जारी रही।

आने वाले समय में, स्पॉट USDINR 95.30 के लेवल की ओर बढ़ सकता है, लेकिन मीडियम से लॉन्ग टर्म का ट्रेंड डॉलर के फ्लो, ट्रेड बैलेंस, ब्याज दरों के अंतर और बदलते जियोपॉलिटिकल हालात पर निर्भर करेगा।

क्या कहता है रुपए पर मनीकंट्रोल का पोल?

इस बीच मनीकंट्रोल के एक पोल से यह निष्कर्ष निकल कर आया है कि आने वाले समय में रुपये के 94 रुपये प्रति डॉलर पर आने की संभावना कम है, क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी लेवल पर है। रुपये की वैल्यू पर दबाव देखने को मिल सकता है।

मनीकंट्रोल के एक सर्वे में 14 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी और करेंसी स्ट्रैटेजी के हेड्स ने कहा है कि 2026 के आखिर तक रुपया प्रति डॉलर 95-96 रुपये के स्तर पर पहुंच सकता है। उन सभी को उम्मीद है कि RBI दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में पॉलिसी रेट में 25 बेसिस पॉइंट की और बढ़ोतरी करेगा।

मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई में आई रुकावटों की वजह से, ब्रेंट क्रूड की कीमतें दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से लगातार $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं।

12 अक्टूबर को रुपये में 100 पैसे की ज़बरदस्त तेज़ी आई और यह 95.76 रुपये प्रति डॉलर पर ट्रेड करता दिखा। इससे पहले कल यह 96.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने वीकेंड पर करेंसी को मज़बूत करने के लिए कुछ उपाय घोषित किए थे, जिसके बाद यह सुधार देखने को मिला। बता दें कि कैलेंडर ईयर 2026 में रुपया 7 प्रतिशत से ज़्यादा और FY27 में अब तक लगभग 3.5 प्रतिशत कमज़ोर हो चुका है।

इन उपायों में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए एक खास सुविधा शामिल है, जिसके तहत RBI तय बैंकों के ज़रिए डॉलर बेचेगा। साथ ही इसमें कंपनियों पर रद्द किए गए फॉरेन एक्सचेंज डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक करने पर रोक जैसे उपाय भी शामिल हैं।

बाज़ार जानकारों का कहना है कि आरबीआई के इन उपायों से रुपये में कोई बड़ी या स्थायी बढ़त होने की संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बढ़त एक शॉर्ट टर्म उछाल से ज्यादा कुछ नहीं है।

OCBC बैंक की सीनियर इकोनॉमिस्ट लावण्या वेंकटेश्वरन का कहना है कि ये उपाय करेंसी की वैल्यू को गिरने से रोकने के लिए एक अस्थायी समाधान ही हैं। RBI हमें इसके लिए बुनियादी बातों पर भी ध्यान देना होगा, क्योंकि भारत तेल का नेट आयातक है। निकट भविष्य में डॉलर इंडेक्स में लगातार बढ़ोतरी हो सकती है, इसलिए RBI को सतर्क रहना होगा।

कोटक नियो में करेंसी और कमोडिटी रिसर्च के हेड अनिंद्य बनर्जी का कहना है कि रुपये की कीमत में 94 रुपये प्रति डॉलर से ज़्यादा की बढ़त के लिए तेल की कीमतों में लंबे समय तक गिरावट और कैपिटल फ्लो में सुधार की जरूरत होगी।

MC INR Poll

समय से पहले रेट हाइक की कोई संभावना नहीं, दिसंबर में 25 bps की बढ़ोतरी की उम्मीद

बाजार जानकारों ने अक्टूबर और दिसंबर में मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की दो समीक्षाओं के बीच ऑफ-साइकिल (समय से पहले) रेट हाइक की संभावना को भी खारिज कर दिया है।

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि RBI दिसंबर की बैठक में ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है, हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी भी हो सकती है। बाजार जानकारों के मुताबिक, कुल मिलाकर FY27 के आखिर तक ब्याज दरें 5.75 प्रतिशत तक पहुंच सकती हैं।

एलारा कैपिटल की चीफ इकोनॉमिस्ट गरिमा कपूर ने कहा कि RBI की तरफ से पॉलिसी मीटिंग के अलावा किसी और समय ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीद नहीं है। लेकिन दिसंबर 2026 में 50 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व अपनी अगली दो पॉलिसी मीटिंग्स में कम से कम दो बार और ब्याज दरें बढ़ाएगा। RBI के पास फैसले लेने की गुंजाइश कम हो रही है, जिससे उसे रुपये को बचाने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।

US बॉन्ड यील्ड के 6 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना कम

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि बेंचमार्क 10-ईयर US ट्रेज़री यील्ड के 6 प्रतिशत के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने की संभावना कम है। इससे संकेत मिलता है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी को लेकर बाजार का रुख बहुत ज्यादा सख्त नहीं हो सकता।

 

Dollar Vs Rupee : रुपये को संभालने के लिए RBI के उठाए बड़े कदम, जानिए ये कितना करेंगे काम

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Repo Rate में बढ़ोतरी पर Nifty Bank में 500 प्वाइंट्स की रिकवरी, इस कारण ग्रीन

Nifty Bank jumps after Repo Rate Hike: केंद्रीय बैंक RBI ने रेपो रेट में उम्मीद के मुताबिक ही 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी 0.25% पर्सेंटेज प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की तो बैंकिंग स्टॉक चमक उठे। आज 7 अक्टूबर को रेपो रेट में बढ़ोतरी पर बैंक निफ्टी दिन के निचले स्तर से 500 प्वाइंट्स से अधिक रिकवर हुए। आरबीआई ने अपने नीतिगत रुझान को बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी सोच-समझकर सख्ती कर दिया है। रेपो रेट को आरबीआई ने 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है तो वित्त वर्ष 2027 की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी बढ़ाया है।

Repo Rate में बढ़ोतरी का मार्केट पर सेक्टरवाइज क्या असर

बैंक निफ्टी फिलहाल 10:28 AM पर 0.17% की बढ़त के साथ 55,222.20 पर है। शुरुआती कारोबार में यह 492.20 प्वाइंट्स टूटकर 54,636.20 तक आ गया था। रेपो रेट हाइक के बाद इसने तेजी से रिकवरी की और ग्रीन जोन में आ गया। वहीं दूसरी तरफ रेपो रेट में बढ़ोतरी से ऑटोमोबाइल्स और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों पर दबाव आ गया।

बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ने का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोन की दरें और जमा पर लागत कितनी तेजी से एडजस्ट होती हैं, और साथ ही क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार क्या रहती है। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक तुरंत एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) बढ़ा देते हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि नियर टर्म में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। इससे संकेत मिला कि आने वाले नीतिगत बैठक में या तो इसे बढ़ाने का फैसला होगा या फिर इसे स्थिर रखा जाएगा।

क्या हुआ RBI MPC मीटिंग में

आरबीआई ने फरवरी 2023 के बाद से पहले एकमत होकर रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला किया। हालांकि रुख को लेकर अलग-अलग राय दिखी। कमेटी ने अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग किया है, जिसके पक्ष में चार तो विरोध में दो सदस्यों ने वोट किया। साथ ही आरबीआई गवर्नर ने आने वाली बैठकों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी या इसकी स्थिरता के संकेत दिए।

आरबीआई को उम्मीद है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी, लेकिन महंगाई का खतरा बढ़ गया है। आरबीआई गवर्नर के मुताबिक दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी बनी रहेगी लेकिन पहली तिमाही की तुलना में रफ्तार धीमी होगी।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया। दूसरी तिमाही (Q2) के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7.2% और तीसरी तिमाही (Q3) के लिए 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया तो चौथी तिमाही (Q4) के लिए अनुमान 6.8% पर ही बरकरार रखा। हालांकि अगले वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के ग्रोथ अनुमान को 7.3% से घटाकर 7.1% कर दिया है।

महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

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Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, कमजोर हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update:  आज का मिड-वीक सेशन निफ्टी बुल्स के लिए इस हफ़्ते का सबसे अहम सेशन हो सकता है, क्योंकि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया कुछ ही घंटों में अपनी मॉनेटरी पॉलिसी का फ़ैसला सुनाने वाला है। हालांकि आम राय यही है कि सेंट्रल बैंक ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा, लेकिन बाज़ार की नज़र उनके रुख, ग्रोथ और महंगाई के अनुमानों के साथ-साथ आगे के रास्ते पर गवर्नर की टिप्पणी पर भी होगी।

निफ्टी में राहत वाली तेज़ी (रिलीफ़ रैली) लगातार दूसरे दिन भी जारी है और बुल्स उम्मीद करेंगे कि अगर ब्याज दरें बढ़ती भी हैं, तो बढ़ोतरी कम हो और रेट हाइक का साइकल भी छोटा रहे। मंगलवार के सेशन के बाद निफ्टी 22,800 के आस-पास है और तेल की कीमतें स्थिर होने के कारण, बुल्स चाहेंगे कि वे इस लेवल के ऊपर जाएं और टिके रहें, ताकि 23,000 के मार्क को फिर से हासिल करने का रास्ता खुल सके।

आज बैंक, NBFC और रियल एस्टेट जैसे रेट-सेंसिटिव सेक्टर फ़ोकस में रहेंगे। बिज़नेस अपडेट्स भी आ रहे हैं और टाइटन, उत्कर्ष SFB जैसे स्टॉक्स पर इनका असर दिख रहा है। निफ्टी बैंक के लिए ऊपर की तरफ़ 55,500 के लेवल पर नज़र रखें, जबकि 54,750 का ज़ोन सपोर्ट का काम कर सकता है। निफ्टी को 22,500 पर सपोर्ट मिल सकता है।

Kotak Mahindra Bank share price: Q2 अपडेट के बाद शेयर 4% चढ़ा, एनालिस्ट हुए बुलिश, ₹540 तक जा सकता है शेयर

Kotak Mahindra Bank share price: प्राइवेट बैंक कोटक महिंद्रा बैंक ( Kotak Mahindra Bank) के शेयर में मंगलवार 6 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। शेयर इंट्राडे में 4 फीसदी की छलांग लगाता नजर आया। शेयर में यह तेजी बैंक के दूसरे तिमाही के मजबूत बिजनेस अपडेट के बाद ब्रोकरेज फर्मों के बुलिश नजरिए के बाद देखने को मिला। एक तरफ गोल्डमैन सैक्स शेयर का टारगेट प्राइस बढ़ा दिया है तो वहीं दूसरी तरफ सिटी ने अपना बुलिश नजरिया बनाए रखा।

कोटक महिंद्रा बैंक के नेट एडवांसेज (EOP – पीरियड के आखिर में) पिछले साल के मुकाबले 24.7% बढ़कर ₹5.77 लाख करोड़ हो गए।दूसरी तिमाही में इसके करंट अकाउंट सेविंग्स अकाउंट (CASA) डिपॉजिट (EOP) 11.3% बढ़कर ₹2.39 लाख करोड़ हो गए।वहीं, इसके डिपॉजिट पिछले साल के मुकाबले 23.2% बढ़कर ₹6.51 लाख करोड़ हो गए।

क्या है स्टॉक पर गोल्डमैन सैक्स की राय

गोल्डमैन सैक्स ने बैंक को “Buy रेटिंग दी है और इसके टारगेट प्राइस को बढ़ाकर ₹540 प्रति शेयर कर दिया है। यह पिछले क्लोजिंग प्राइस से 29.8% की बढ़त का संकेत देता है। ब्रोकरेज का कहना है कि FCNR(B) फ्लो जुटाने के मामले में बैंक का दूसरी तिमाही का प्रदर्शन शानदार रहा। इसका ऑर्गेनिक लोन ग्रोथ पिछले साल की 15% की दर से बढ़कर 19% हो गया।

गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि मजबूत FCNR(B) फ्लो की वजह से बैंक का डिपॉजिट ग्रोथ शानदार रहा। बैंक के पास लीडरशिप को लेकर बेहतर स्पष्टता है, रेट साइकिल के निचले स्तर पर मजबूत लिक्विडिटी स्थिति है, और सस्ती वैल्यूएशन के बीच अनसिक्योर्ड लोन की वजह से लोन ग्रोथ में तेजी की संभावना है।

बैंक की प्रॉफिटेबिलिटी और कमाई में सुधार के साथ, ब्रोकरेज को उम्मीद है कि स्टॉक मौजूदा स्तरों से कंपाउंड होगा और री-रेट भी होगा।बैंक ने उम्मीद से बेहतर डिपॉजिट फ्लो और बड़ी व तेज़ रेट हाइक साइकिल को ध्यान में रखते हुए अपनी कमाई का अनुमान बढ़ाया है।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, 19% की अर्निंग्स पर शेयर (EPS) ग्रोथ के आधार पर वित्त वर्ष 2028 के प्राइस-टू-अर्निंग्स रेशियो के 15 गुना पर कोटक की वैल्यूएशन “बहुत आकर्षक” है।

सिटी की राय

ब्रोकरेज ने कोटक महिंद्रा बैंक पर Buy की रेटिंग दी है और इसके लिए ₹465 प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से 11.8% की बढ़त का संकेत देती है। ब्रोकरेज ने कहा कि कंपनी ने दूसरी तिमाही में बैलेंस शीट मोमेंटम में ज़बरदस्त तेज़ी दिखाई है। FCNR(B) डिपॉजिट जुटाने से पहले से ही मज़बूत क्रमिक बढ़ोतरी (sequential accretion) को और बढ़ावा मिला है।

सिटी ने कहा कि इसके ग्रॉस एडवांसेज में पिछले साल के मुकाबले 24.7% और पिछली तिमाही के मुकाबले 12.7% की बढ़ोतरी हुई, जो क्रमशः 20.9% और 9.2% के अनुमान से काफी ज़्यादा थी।

ब्रोकरेज ने कहा कि FCNR(B)-लिंक्ड एक्सपोज़र में $1.68 बिलियन के लेवरेज्ड इम्पैक्ट को हटाने के बाद भी, बैंक के कोर एडवांसेज में पिछले साल के मुकाबले 21.6% और क्रमिक आधार पर 9.5% की बढ़ोतरी हुई। यह भी ब्रोकरेज के अनुमान से काफी बेहतर था। सिटी ने इस बेहतर प्रदर्शन का श्रेय कॉर्पोरेट बैंकिंग, SME, LAP और MFI सेगमेंट में लगातार मज़बूती को दिया। कोटक महिंद्रा बैंक के औसत नेट एडवांसेज (कर्ज) सालाना आधार पर 22.1% और तिमाही आधार पर 10.5% बढ़े। इसके EOP डिपॉजिट में पिछले साल के मुकाबले 23.2% और पिछली तिमाही के मुकाबले 13.7% की बढ़ोतरी हुई, जो सिटी (Citi) के क्रमशः 20% और 10.8% के अनुमान से कहीं ज़्यादा है।

$5.78 बिलियन के FCNR(B) डिपॉजिट को छोड़कर, इसके कोर डिपॉजिट में पिछले साल के मुकाबले 13.5% और पिछली तिमाही में 4.1% की बढ़ोतरी हुई।औसत डिपॉजिट में पिछले साल के मुकाबले 18.8% और पिछली तिमाही में 8.5% की बढ़ोतरी हुई।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Daily Voice: बाजार में अभी डिफेंसिव नजरिया बनाए रखने की जरूरत, लंबी अवधि में इंश्योरेंस सेक्टर दिखाएगा कमाल

Daily Voice : कोर महंगाई की चाल को देखते हुए 2027 की शुरुआत में फेड फंड्स रेट में एक और बढ़ोतरी संभव है,लेकिन लंबे समय तक सख्ती का दौर चलने की उम्मीद नहीं है। भारत की आर्थिक विकास दर 6.5% से 7% के बीच स्थिर रहेगी। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। इंश्योरेंस सेक्टर में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जबरदस्त ग्रोथ की संभावना दिख रही है। मिडिल क्लास की बढ़ती खपत,मददगार रेगुलेटरी सुधार और डिजिटल इनोवेशन से इस सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा। ये बातें वॉटरफ़ील्ड एडवाइज़र्स के एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर और इक्विटीज़ हेड विपुल भोवर ने मनीकंट्रोल के साथ हुई एक बातचीत में कही हैं।

क्या आप US ट्रेज़री मार्केट को ग्लोबल मार्केट के लिए एक बड़ा जोखिम मानते हैं?

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यूएस का बॉन्ड मार्केट,ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम की नींव है। इस मार्केट में होने वाले स्ट्रक्चरल बदलाव आज ग्लोबल मार्केट पर असर डालने वाले सबसे अहम मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर हैं। जब “रिस्क-फ्री” US सॉवरेन डेट से अच्छा रिटर्न मिलता है तो यह ग्लोबल एसेट एलोकेशन की रणनीतियों को पूरी तरह से बदल देता है।

ट्रेजरी यील्ड के बढ़ने से ग्लोबल इक्विटी मल्टीपल्स पर दबाव पड़ता है और दुनिया भर की कंपनियों के लिए कर्ज लेने की लागत बढ़ जाती है। इसके कारण प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकते हैं,कैपिटल एक्सपेंडिचर में रुकावट आ सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

क्या अमेरिका की वित्तीय स्थिति टिकाऊ नहीं लगती?

इस पर उन्होंने आगे कहा कि जरूरी खर्च और ब्याज पर होने वाले भारी खर्च(जो इस साल 1 ​​लाख करोड़ डॉलर से अधिक हो गए हैं) में लगातार बढ़ोतरी से एक ढांचागत असंतुलन पैदा हो रहा है। अगर बड़े नीतिगत सुधार नहीं किए गए तो कर्ज का यह बढ़ता बोझ प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को घटा सकता है और भविष्य में आर्थिक मजबूती में बाधा डाल सकता है।

कांग्रेसनल बजट ऑफिस का अनुमान है कि 2026 में फ़ेडरल घाटा लगभग 2 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंच जाएगा,जो अमेरिका की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 6 प्रतिशत है। इसके चलते अमेरिकी जनता पर मौजूद कर्ज GDP के 100 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा।

क्या आपको उम्मीद है कि इस साल के आखिर तक US फ़ेडरल रिज़र्व दो और बार ब्याज दरें बढ़ाएगा और उसके बाद अगले साल की पहली तिमाही में एक और बढ़ोतरी करेगा?

सितंबर 2026 में चेयरमैन केविन वॉर्श की अगुवाई में फ़ेडरल रिज़र्व ने ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की,जिससे ये दरें 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत की रेंज में आ गईं। ‘डॉट प्लॉट’ से पता चला कि FOMC के 18 में से 16 सदस्यों को उम्मीद है कि इस साल कम से कम एक बार और 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी होगी,हालांकि सिर्फ़ चार सदस्यों को दो और बार बढ़ोतरी की उम्मीद है।

एनर्जी की बढ़ती लागत की वजह से आई महंगाई इस सख्ती को सही ठहराती है। कोर महंगाई के ट्रेंड को देखते हुए 2027 की शुरुआत में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी हो सकती है,लेकिन लंबे समय तक सख्ती का दौर चलने की उम्मीद नहीं है। इसलिए,हालांकि इस साल एक और बढ़ोतरी की संभावना है,लेकिन दो और बार बढ़ोतरी होने की संभावना कम है।

क्या आपको लगता है कि भारत की विकास दर 6.5 से 7 प्रतिशत के आसपास स्टेबल हो जाएगी?

भारत की आर्थिक विकास दर के 6.5 प्रतिशत से 7 प्रतिशत के बीच स्टेबल होने की उम्मीद है। IMF ने वित्त वर्ष 2026 और 2027 के लिए 6.5 प्रतिशत GDP विकास दर का अनुमान लगाया है। महामारी के बाद के असर, सरकारी खर्च और रुकी हुई मांग की वजह से भारत में विकास दर 7.8 प्रतिशत के करीब रही है, लेकिन बेस इफ़ेक्ट के कम होने और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव व ऊंची ब्याज दरों जैसी ग्लोबल चुनौतियों के कारण इतनी ऊंची दरें शायद लंबे समय तक बनी न रह पाएं। हालांकि, 6.5 से 7 प्रतिशत की विकास दर के साथ भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

अमेरिकी डॉलर में बढ़ोतरी के अहम कारण क्या हैं?

अमेरिकी ट्रेजरी सिक्योरिटीज पर ज़्यादा यील्ड (रिटर्न) मुख्य रूप से महंगाई के दबाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से प्रभावित होती है, जो ग्लोबल इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करती हैं। इसके अलावा, जियोपॉलिटिकल अस्थिरता बढ़ने से जोखिम से बचने वाले निवेशक अमेरिकी डॉलर से मिलने वाली सुरक्षा और लिक्विडिटी की ओर आकर्षित होते हैं। इसके अलावा,अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में भारी विदेशी निवेश और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होने वाला खर्च डॉलर की मांग को और बढ़ा रहा है। दूसरे G10 देशों की तुलना में अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मज़बूती, डॉलर की स्थिति को दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी के तौर पर और मजबूत कर रही है।

क्या आप इक्विटी को लेकर इसलिए सतर्क हैं कि तेल की कीमतें ज़्यादा हैं और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड बढ़ रही हैं या आपकी इस सोच के पीछे कोई और भी वजह है?

तेल की ऊंची कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगाई की चिंताएं भी हैं। ऐसे में,मौजूदा महंगे वैल्यूएशन को बनाए रखने के लिए बाजार में अभी तुरंत पॉजिटिव असर डालने वाली कोई वजह नहीं दिख रही है। ऐसे में जब तक अर्निंग्स की साफ तस्वीर नहीं दिखती या वैल्यूएशन में जरूरी टाइम करेक्शन नहीं होता,तब तक डिफेंसिव रुख अपनाना ही बेहतर है।

क्या आपको भारत में भी ब्याज दरें बढ़ाने का दौर शुरू होता दिख रहा है?

उम्मीद है कि भारत में ब्याज दरें बढ़ाने का दौर अक्टूबर 2026 में मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की बैठक से शुरू होगा। रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने फरवरी 2023 से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा है, लेकिन घरेलू और ग्लोबल स्तर पर बढ़ते दबावों के कारण इसमें बदलाव की जरूरत है।

कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर जाने और रुपये की कीमत घटने की वजह से खुदरा महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। ग्लोबल फाइनेंशियल हालात के खराब होने के साथ,अर्थशास्त्रियों को दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे दर बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगी और सख्ती का एक नया दौर शुरू हो जाएगा।

क्या आपको लगता है कि मौजूदा स्तरों पर इंश्योरेंस सेक्टर में खरीदारी का मौका है?

भारत में इंश्योरेंस मार्केट की पहुंच अभी भी काफी कम है और 2026 से 2030 के बीच सालाना प्रीमियम ग्रोथ के 6.9 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। मिडिल क्लास की बढ़ती खपत,मददगार रेगुलेटरी सुधार और डिजिटल इनोवेशन की वजह से यह सेक्टर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए जबरदस्त ग्रोथ की संभावना रखता है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।