Stock Market Fall: 7 वजह, Sensex लाल, Nifty आया 22500 के नीचे, IT Sector की कोशिश फेल

Stock Market Fall: ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे शेयर मार्केट को रेपो रेट में बढ़ोतरी ने और झटका दिया। इसके आसार पहले से ही थे लेकिन आरबीआई ने महंगाई के अपने आउटलुक को भी बढ़ाया तो इससे मार्केट पर दबाव बढ़ाया। इंट्रा-डे में आज सेंसेक्स 384 प्वाइंट्स टूट गया तो निफ्टी भी फिसलकर 22500 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी बिकवाली का खासा दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में आधे-आधे फीसदी से अधिक की गिरावट है।

अभी की बात करें तो फिलहाल 09:40 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 339.85 प्वाइंट्स यानी 0.47% की गिरावट के साथ 72298.85 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 113.05 प्वाइंट्स यानी 0.50% की गिरावट के साथ 22,490.00 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 384.47 प्वाइंट्स गिरकर 72,254.23 और निफ्टी भी 127.30 प्वाइंट्स टूटकर 22,475.75 तक आ गया था।

Stock Market Fall: ये है वजह

बॉन्ड यील्ड में उछाल

लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड में फिर से बढ़ोतरी शुरू होने से महंगाई और बढ़ते कर्ज को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं हैं। इसने पूरे एशियाई मार्केट में दबाव बना दिया, जिसकी आंच घरेलू स्टॉक मार्केट में भी महसूस हुई।

कच्चे तेल में उबाल

खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने पश्चिमी एशिया से सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ा दी हैं। इस चिंता के बीच ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $102 के पार पहुंचा तो इसकी आंच में मार्केट झुलस गया।

विदेशी निवेशकों की लगातार नवें दिन बिकवाली

FIIs ने लगातार नवें कारोबारी दिन बुधवार 8 अक्टूबर को ₹6,121.37 करोड़ के नेट शेयर बेचे। इससे बाजार में दबाव बना हुआ है।

Sensex की एक्सपायरी

आज सेंसेक्स के डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स यानी F&O (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस) की वीकली एक्सपायरी है, जिसका असर मार्केट पर दिख रहा है।

Repo Rate में बढ़ोतरी पर मेटल-रियल्टी सेक्टर में दबाव

आरबीआई ने रेपो रेट में लंबे समय बाद फिर से बढ़ोतरी की और इसे 5.25% से बढ़ाकर 5.50% किया तो लगातार दूसरे दिन इसकी आंच ऑटो, मेटल और रियल्टी सेक्टर में महसूस हुई। मेटल और रियल्टी सेक्टर के निफ्टी इंडेक्स तो 1-1% से अधिक टूट गए तो निफ्टी ऑटो आधे फीसदी से अधिक कमजोर हुआ है। बैंकिंग और फार्मा सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव है। वहीं निफ्टी आईटी में 1% से अधिक बढ़त है।

महंगाई बढ़ने की आशंका

आरबीआई ने ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया है तो महंगाई के भी अनुमान को बढ़ा दिया, जिससे मार्केट पर दबाव बढ़ा। महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

टेक्निकल आउटलुक

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर का कहना है कि रेपो रेट में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की आशंकाओं ने मार्केट पर दबाव बनाया है। उनका कहना है कि जब FII का निवेश स्थिर नहीं हो जाता या US ट्रेजरी यील्ड कम नहीं हो जाती,तब तक घरेलू इक्विटी में और बिकवाली का जोखिम बना रह सकता है। पोनमुडी के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,750-22,800 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस जोन है। अगर निफ्टी लगातार 22,800 के ऊपर बना रहता है तो ही यह 23,000 की तरफ रिकवरी में मदद कर सकता है। नीचे की तरफ 22,500 तत्काल सपोर्ट लेवल है। अगर यह लेवल टूटता है तो इंडेक्स 22,400-22,200 तक जा सकता है। जब तक निफ्टी 22,800 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक शॉर्ट-टर्म टेक्निकल आउटलुक में सावधानी बरतने की जरूरत है।

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RBI MPC: तेजी से बढ़ रही ग्रोथ, आरबीआई की सख्ती, शेयर दबाव में, अब आगे क्या?

केंद्रीय बैंक आरबीआई (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की और इसे 5.5% कर दिया। मार्केट को इसने हैरान नहीं किया, क्योंकि इसकी उम्मीद पहले से ही थी। हालांकि कुछ और बातें ऐसी रही, जिसने मार्केट का ध्यान अपनी तरफ खींचा। आरबीआई ने ग्रोथ का अनुमान तेजी से बढ़ाया तो दूसरी तरफ महंगाई का भी अनुमान बढ़ाया है और साथ ही अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग कर दिया है। आरबीआई ने इस वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया तो महंगाई का अनुमान भी 5% से बढ़ाकर 5.2% किया।

मार्केट में मिला-जुला रुझान

आरबीआई के रुझान से मार्केट को मिला-जुला संकेत मिला। जीडीपी अपग्रेड निश्चित रूप से कंपनियों की कमाई के लिए अच्छी बात है लेकिन महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी और मौद्रिक नीतियों की सख्ती से यह संकेत मिला कि दरों में आगे भी बढ़ोतरी की संभावना है। आरबीआई गवर्नर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं।

वैसे मार्केट पहले से ही कमजोर है। पिछले महीने सितंबर में निफ्टी 6.1% गिरकर 22,620 तक आ गया था, जोकि मार्च के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट थी तो सेंसेक्स 5.8% गिरकर 72,480 पर आ गया। साथ ही अक्टूबर में एंट्री करते ही इसने लगातार आठ हफ्तों की लगातार गिरावट दिखाई, जो 25 वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट रही। आरबीआई के 5 अगस्त के पॉलिसी पॉज के बाद इंडेक्स लगभग 7.5% गिर चुका है।

अब आगे क्या

आरबीआई ने अपने आउटलुक से यह संकेत दिया है कि इसका फोकस फिलहाल इनफ्लेशन पर है। वैसे भी जून 2026 तिमाही में भारतीय इकॉनमी 7.8% की रफ्तार से बढ़ी थी जोकि आरबीआई के पहले के अनुमान 7% से अधिक रही। अब आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष 2027 के लिए ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 7.1% कर दिया। इसका मतलब है कि कंपनियों की मांग और रेवेन्यू की ग्रोथ मजबूत रह सकती है।

अब सबसे बड़ी परीक्षा सितंबर तिमाही के नतीजे को लेकर है। निफ्टी 50 की कंपनियों से रेवेन्यू और मुनाफे में सालाना करीब 20% के ग्रोथ की उम्मीद है। हालांकि तेल और कच्चे माल की लागत में उछाल से रेवेन्यू में बढ़ोतरी का पूरा फायदा प्रॉफिट में नहीं बदल सकता है और कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि ऑपरेटिंग मार्जिन में सालाना आधार पर सितंबर तिमाही में 100-150 बीपीएस की गिरावट आ सकती है।

ऐसे में असली सवाल ये रहेगा कि कंपनियां बढ़ती लागत को कितना सोख सकती है और ईबीआईटीडीए मार्जिन कितना बचा सकती हैं। सितंबर तिमाही के कारोबारी नतीजे पर तो मार्केट की नजर रहेगी ही लेकिन इसके अलावा आगे यह भी देखना होगा कि मैनेजमेंट की कमेंट्री क्या रहती है, क्या कंपनियों के पास प्राइसिंग पावर है, और वित्त वर्ष 2027 में डिमांड कैसी रहती है।

फिलहाल तो इस समय सबसे बड़ा रिस्क कच्चा तेल भी है। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड उछलकर प्रति बैरल $101 के पार चला गया क्योंकि इससे इनफ्लेशन, करंट अकाउंट, रुपये और कॉरपोरेट मार्जिन- चारों पर दबाव पड़ता है। दूसरी तरफ अमेरिका और भारत में बॉल्ड यील्ड ऊंची है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय मार्केट में निवेश का क्रेज फीका पड़ सकता है। अमेरिका में 10-साल का ट्रेजरी यील्ड उछलकर करीब 5.3% और भारत में 10-साल का गवर्नमेंट बॉन्ड यील्ड 7.2% पर पहुंच गया। इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है। DIIs की खरीदारी और एसआईपी फ्लो ने एक जरूरी सहारा दिया है, लेकिन यूएस यील्ड में बढ़ोतरी, कमजोर रुपए और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से विदेशी पैसे की तेजी से वापसी मुश्किल हो गई है।

कंक्लूजन

बाजार का समीकरण बदल चुका है। 7.1% GDP ग्रोथ से कमाई का निचला स्तर तय होता है तो महंगाई की 5.2% की रफ्तार और 5.5% रेपो रेट से वैल्यूएशन रीरेटिंग की ऊपरी सीमा तय होती है। सितंबर में निफ्टी पहले ही लगभग 6% और अगस्त की पॉलिसी के बाद से लगभग 8% गिर चुका है, इसलिए अगला दौर इस बात पर निर्भर करेगा कि क्या कंपनी की कमाई उम्मीदों से बेहतर हो सकती है। फिलहाल आरबीआई ने सस्ते कर्ज की संभावना खत्म कर दी है तो इक्विटी को बड़े बदलाव की जरूरत है। खास बात ये है कि भारत का ग्रोथ इंजन बना हुआ है लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, कई वर्षों के हाई लेवल के करीब ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और मार्जिन पर दबाव से कंपनियों की मजबूत कमाई के बावजूद शेयरों का जोश फीका हो सकता है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Repo Rate में बढ़ोतरी पर Nifty Bank में 500 प्वाइंट्स की रिकवरी, इस कारण ग्रीन

Nifty Bank jumps after Repo Rate Hike: केंद्रीय बैंक RBI ने रेपो रेट में उम्मीद के मुताबिक ही 25 बेसिस प्वाइंट्स यानी 0.25% पर्सेंटेज प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की तो बैंकिंग स्टॉक चमक उठे। आज 7 अक्टूबर को रेपो रेट में बढ़ोतरी पर बैंक निफ्टी दिन के निचले स्तर से 500 प्वाइंट्स से अधिक रिकवर हुए। आरबीआई ने अपने नीतिगत रुझान को बदलकर कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी सोच-समझकर सख्ती कर दिया है। रेपो रेट को आरबीआई ने 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दिया है तो वित्त वर्ष 2027 की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को भी बढ़ाया है।

Repo Rate में बढ़ोतरी का मार्केट पर सेक्टरवाइज क्या असर

बैंक निफ्टी फिलहाल 10:28 AM पर 0.17% की बढ़त के साथ 55,222.20 पर है। शुरुआती कारोबार में यह 492.20 प्वाइंट्स टूटकर 54,636.20 तक आ गया था। रेपो रेट हाइक के बाद इसने तेजी से रिकवरी की और ग्रीन जोन में आ गया। वहीं दूसरी तरफ रेपो रेट में बढ़ोतरी से ऑटोमोबाइल्स और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों पर दबाव आ गया।

बैंकों पर ब्याज दरें बढ़ने का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोन की दरें और जमा पर लागत कितनी तेजी से एडजस्ट होती हैं, और साथ ही क्रेडिट ग्रोथ की रफ्तार क्या रहती है। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक तुरंत एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR) बढ़ा देते हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का कहना है कि नियर टर्म में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। इससे संकेत मिला कि आने वाले नीतिगत बैठक में या तो इसे बढ़ाने का फैसला होगा या फिर इसे स्थिर रखा जाएगा।

क्या हुआ RBI MPC मीटिंग में

आरबीआई ने फरवरी 2023 के बाद से पहले एकमत होकर रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला किया। हालांकि रुख को लेकर अलग-अलग राय दिखी। कमेटी ने अपना रुख न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग किया है, जिसके पक्ष में चार तो विरोध में दो सदस्यों ने वोट किया। साथ ही आरबीआई गवर्नर ने आने वाली बैठकों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी या इसकी स्थिरता के संकेत दिए।

आरबीआई को उम्मीद है कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी, लेकिन महंगाई का खतरा बढ़ गया है। आरबीआई गवर्नर के मुताबिक दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में तेजी बनी रहेगी लेकिन पहली तिमाही की तुलना में रफ्तार धीमी होगी।

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को पहले के 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया। दूसरी तिमाही (Q2) के लिए ग्रोथ का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7.2% और तीसरी तिमाही (Q3) के लिए 6.5% से बढ़ाकर 6.9% कर दिया तो चौथी तिमाही (Q4) के लिए अनुमान 6.8% पर ही बरकरार रखा। हालांकि अगले वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के ग्रोथ अनुमान को 7.3% से घटाकर 7.1% कर दिया है।

महंगाई को लेकर आरबीआई ने कमजोर मॉनसून, अल-नीनो की स्थिति और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से पैदा होने वाले सप्लाई-साइड रिस्क की तरफ इशारा किया। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई यानी CPI के अनुमान को 5% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया। दूसरी तिमाही के अनुमान को 4.7% से बढ़ाकर 4.9%, तीसरी तिमाही के लिए 5.9% से 6% और चौथी तिमाही के लिए 5.5% से 5.7% कर दिया। वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही के लिए भी अनुमान 5.3% से बढ़ाकर 5.6% कर दिया गया है।

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RBI ने 25 बीपीएस बढ़ाया रेपो रेट

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI Repo Rate Hike : आरबीआई गवर्नर ने कहा, ब्याज दरों में आगे भी कटौती की संभावना नहीं, इसमें अभी और बढ़ोतरी की संभावना

RBI Repo Rate Hike : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को कहा कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक का अगला नीतिगत कदम या तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकता है या फिर दरों को बरकरार रखा जा सकता है। यह बदलाव महंगाई तथा अन्य आर्थिक स्थितियों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

यह गाइडेंस तब आया है जब मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट को 5.25% से 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है और अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि निकट भविष्य में “रेट में कटौती की कोई संभावना नहीं है” और आगे की पॉलिसी में हालात के हिसाब से या तो रेट बढ़ाए जाएंगे या फिर उन्हें जस का तस रखा जाएगा।

अक्टूबर में रेपो रेट में की गई यह बढ़ोतरी फरवरी 2023 के बाद RBI की ओर से रेपो रेट में पहली बढ़ोतरी है। उस समय MPC ने पॉलिसी रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.50% कर दिया गया था।

रुख में इस बदलाव का समर्थन MPC के छह में से चार सदस्यों ने किया, जबकि दो सदस्यों ने ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग'(सोच-समझकर सख्ती) की ओर बढ़ने के खिलाफ वोट दिया।

रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद, स्टैंडिंग डिपॉज़िट फैसिलिटी रेट को 5.25% पर एडजस्ट किया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट को बढ़ाकर 5.75% कर दिया गया है।

महंगाई बढ़ने का डर रहा हावी

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई का आउटलुक अब वैसा अनुकूल नहीं है जैसा पिछले साल था। कीमतों के दबाव को देखते हुए MPC मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत का आकलन कर रही है।

RBI ने FY27 के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.3% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि FY27 की अगली तीन तिमाहियों में CPI महंगाई (रिटेल महंगाई) औसतन 5.8% रहने की उम्मीद है।

RBI गवर्नर ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी को सप्लाई शॉक के ‘सेकंड-राउंड’ असर (यानी सप्लाई में अचानक बदलाव से होने वाले बाद के असर) पर नजर रखनी होगी, भले ही शुरुआती सप्लाई-साइड महंगाई के असर से इन्हें अलग करना मुश्किल हो।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी आंशिक रूप से ऐसे ‘सेकंड-राउंड’ असर को रोककर काम करती है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ब्याज दरों में बदलाव का असर इकॉनमी तक पहुंचने में समय लगता है।

दरें बढ़ाने का फैसला कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में फिर से आई अस्थिरता के माहौल में लिया गया है। बैठक से पहले, एनर्जी की बढ़ती लागत, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई के दबाव के कारण ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो गई थीं। अगस्त में रिटेल महंगाई दर 4.82% रही, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मीडियम टर्म टारगेट से ज्यादा है।

संजय मल्होत्रा ​​ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव ने ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट को कमजोर किया है और फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है। उन्होंने ग्लोबल ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता की ओर भी इशारा किया और कहा कि ग्लोबल महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका है। उन्होंने कहा कि सख्त मॉनेटरी पॉलिसी और जारी संघर्षों से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।

 

 

RBI Policy : RBI ने वित्त वर्ष 2027 के GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुमान भी बढ़े

RBI Policy : RBI ने वित्त वर्ष 2027 के GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% किया, दूसरी और तीसरी तिमाही के अनुमान भी बढ़े

RBI Policy : RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने 7 अक्टूबर को घोषणा की कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपनी वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। साथ ही, दूसरी और तीसरी तिमाही के ग्रोथ अनुमान भी बढ़ाए गए हैं। सेंट्रल बैंक ने Q2FY27 के ग्रोथ का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत और Q3FY27 के ग्रोथ अनुमान 6.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया है। उसने Q4FY27 के ग्रोथ अनुमान को 6.8 प्रतिशत पर ही बनाए रखा गया है। हालांकि, Q1FY28 के लिए RBI ने ग्रोथ का अनुमान 7.3 प्रतिशत से घटाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है।

मार्च 2027 में खत्म होने वाले फाइनेंशियल ईयर के लिए पूरे साल का नया अनुमान, पहले के अनुमान से 0.4 प्रतिशत ज़्यादा है। संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि घरेलू आर्थिक ग्रोथ मजबूत स्तर पर है और मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी को उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था मज़बूत बनी रहेगी। गवर्नर ने कहा कि पहली तिमाही में ग्रोथ की वजह प्राइवेट खपत रही। लोगों की खर्च करने की इच्छा (डिस्क्रीशनरी स्पेंडिंग) से लगातार मिल रहे सपोर्ट के कारण खपत का स्तर काफी हद तक मजबूत बना रहा।

उन्होंने आगे कहा कि हाई-फ़्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स से पता चलता है कि दूसरी तिमाही में भी आर्थिक गतिविधि की रफ़्तार बनी रही, हालांकि पहली तिमाही की तुलना में इसमें थोड़ी कमी आई। उन्होंने कहा कि लागत के दबाव के बावजूद मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियां बनी रहीं।

भारत की विकास दर के अनुमान में ऐसे समय में बढ़ोतरी हुई है जब ग्लोबल इकोनॉमी कमजोर है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल वैश्विक विकास दर धीमी रहने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के फिर से बढ़ने से ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट खराब हो गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में अस्थिरता बढ़ा दी है। ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण ग्लोबल सेंटीमेंट में घबराहट बनी हुई है और युद्ध तथा सख्त नीतियों से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।

बता दें कि आज MPC ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत से 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया और अपने पॉलिसी रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। चार सदस्यों ने इस बदलाव का समर्थन किया, जबकि दो ने इसका विरोध किया।

इस पर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई का आउटलुक पिछले साल के मुकाबले कम अनुकूल है। इसी लिए कमिटी ने पॉलिसी रेट में बदलाव करना ज़रूरी समझा। RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई दर 4.4 प्रतिशत और वित्त वर्ष की बाकी तीन तिमाहियों में कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन (खुदरा महंगाई दर) औसतन 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

 

 

RBI MPC Meeting Live: RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट: महंगे होंगे लोन और बढ़ेगी EMI, लेकिन मजबूत FDI और FD ब्याज दरों से मिलेगी राहत

Stocks to Watch: RBI के ऐलान का इंतजार; इंट्रा-डे में 4 लिस्टिंग्स और Titan, Ola Electric और Apollo Tyres समेत 24 शेयर फोकस में

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से कमजोर रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 69.50 प्वाइंट्स यानी 0.31% की गिरावट के साथ 22,704.50 पर है। चूंकि आज आरबीआई की मौद्रिक नीतियों का ऐलान होना है और रेपो रेट (Repo Rate) पर फैसला सामने आएगा तो इसके चलते मार्केट में तेज उठा-पटक दिख सकती है। कई इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट से 50 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है।

एक कारोबारी दिन पहले 06 अक्टूबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स 685.34 प्वाइंट्स यानी 0.95% की बढ़त के साथ 73,067.81 और निफ्टी भी 220.35 प्वाइंट्स यानी 0.98% की मजबूती के साथ 22,776.10 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Asset Reconstruction Company India Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 14.6% बढ़कर ₹59.1 करोड़ और रेवेन्यू 115.4% उछलकर ₹234.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Glass Wall Systems Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ग्लास वाल सिस्टम्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 7.7% गिरकर ₹17.3 करोड़ पर आ गया लेकिन इसी दौरान रेवेन्यू 35.8% उछलकर ₹107.4 करोड़ पर पहुंच गया।

Kanohar Electricals Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर कनोहर इलेक्ट्रिकल्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 140% बढ़कर ₹27.3 करोड़ और रेवेन्यू 103.5% उछलकर ₹137.1 करोड़ पर पहुंच गया।

Karamtara Engineering Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर करमतारा इंजीनियरिंग का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 45.3% बढ़कर ₹87.4 करोड़ और रेवेन्यू 72.3% उछलकर ₹1,580.9 करोड़ पर पहुंच गया।

Titan Company Q2 (YoY)

सितंबर तिमाही में टाइटन कंपनी का घरेलू बिजनेस सालाना 22%, इंटरनेशनल बिजनेस 97%, कंज्यूमर बिजनेस 25%, वॉच बिजनेस 30%, आईकेयर सेगमेंट 28%, एमर्जिंग बिजनेस 21% और ज्वैलरी बिजनेस 21% की रफ्तार से बढ़ा। सितंबर तिमाही में टाटइन ने अपने नेटवर्क में 77 घरेलू और 1 इंटरनेशनल स्टोर जोड़े और इसके साथ ही इसके कुल 3758 स्टोर हो गए।

Apollo Tyres

कंपनी के बाहर नए मौकों की तलाश में अपोलो टायर्स के सीएफओ गौरव कुमार ने कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 6 अक्टूबर से प्रभावी हुआ।

Mahindra Lifespace Developers

महिंद्रा लाइफस्पेस ने पुणे के बानेर एनेक्स में महिंद्रा रिवेंजा नाम का एक रेजिडेंशियल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है, जिसकी कुल ग्रॉस डेवलपमेंट वैल्यू (GDV) लगभग ₹3,500 करोड़ है।

ABB India

एबीबी इंडिया के बोर्ड ने सुनील कुमार मुनागा को कंपनी का सीएफओ बनाने की मंजूरी दे दी है, जो 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगी। अभी सुनील कुमार मुनागा कंपनी के वाइस प्रेसिडेंट और बिजनेस एरिया कंट्रोलर (इलेक्ट्रिफिकेशन) हैं।

Ola Electric Mobility

ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के बोर्ड की बैठक 7 अक्टूबर को है, जिसमें ₹1000 करोड़ के राइट्स इश्यू से जुड़े कई मामलों पर चर्चा होगी।

Asian Paints

नतीजे के साथ-साथ एशियन पेंट्स बोर्ड की बैठक में अंतरिम डिविडेंड के भी प्रस्ताव पर विचार करने वाली है। इसकी रिकॉर्ड डेट 4 नवंबर तय की गई है।

Adani Ports and Special Economic Zone

अदाणी पोर्ट्स ने ओडिशा के पारादीप पोर्ट पर दो ड्राई बल्क बर्थ के डेवलपमेंट और ऑपरेशन के लिए एक पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी पारादीप महानदी टर्मिनल बनाई है।

HCL Technologies

एचसीएल ग्रुप ने ₹500 करोड़ के प्लान के साथ एचसीएल आईटी सिटी के विस्तार का ऐलान किया है। इसमें 9.5 लाख स्क्वेयर फीट तक का नया एरिया तैयार होगा, जिसमें 4,500 टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल्स के लिए जगह होगी। इसके अलावा एचसीएलटेक ने ऐलान किया है कि FY27 के दौरान उसके लिटमस (LITMUS) प्रोग्राम के जरिए उत्तर प्रदेश के 1,000 छात्रों को AI और उससे जुड़ी टेक्नोलॉजी में ट्रेनिंग दी जाएगी।

JSW Cement

जेएसडब्ल्यू सीमेंट ने राजस्थान के नागौर में 1.00 MTPA की एक और सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट शुरू की है। इसके साथ ही कंपनी की कुल सीमेंट ग्राइंडिंग क्षमता बढ़कर 25.10 MTPA हो गई है, जबकि क्लिंकर बनाने की इसकी कुल क्षमता 9.74 MTPA है, जिसमें इसके जॉइंट वेंचर JSW सीमेंट FZC की क्लिंकर क्षमता भी शामिल है।

Godrej Consumer Products

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की सब्सिडियरी गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स इंडोनेशिया ने केंडल स्पेशल इकोनॉमिक जोन में अपनी नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के पहले चरण का उद्घाटन किया। कंपनी ने इंडोनेशिया में अपनी मैन्युफैक्चरिंग स्थिति को मजबूत करने के लिए केंडल में लगभग ₹250 करोड़ का निवेश किया है।

Marsons

मार्सन्स और न्यूयॉर्क की प्राइवेट इक्विटी फर्म क्लीनहिल पार्टनर्स ने अमेरिका और कनाडा में ट्रांसफॉर्मर के डिस्ट्रीब्यूशन, सर्विसिंग और मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स को तेज करने के लिए एक जॉइंट वेंचर बनाने की योजना का ऐलान किया है।

Mphasis

एमफेसिस ने सोशल सिक्योरिटी स्कॉटलैंड के साथ 3.54 करोड़ पाउंड का एग्रीमेंट किया है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कंपनी सोशल सिक्योरिटी स्कॉटलैंड के बेनिफिट्स मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म को मैनेज और मेंटेन करेगी।

Shadowfax Technologies

टीपीजी की न्यूक्वेस्ट एशिया फंड IV (सिंगापुर) ने ₹114.8 करोड़ में शैडोफैक्स टेक के 40 लाख शेयर (0.68% हिस्सेदारी) प्रति शेयर र्287 के भाव पर बेच दिए। इसके साथ ही इसने शैडोफैक्स में अपनी हिस्सेदारी 4.86 पर्सेंटेज प्वाइंट्स (यानी 2.85 करोड़ इक्विटी शेयर) कम कर दी है। जून 2026 तक कंपनी में इसकी हिस्सेदारी 11.53% थी।

Satin Creditcare Network

कैम्ब्रिज की MIT (मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) ने सैटिन क्रेडिटकेयर नेटवर्क के 14.54 लाख शेयर (1.31% हिस्सेदारी) ₹30.31 करोड़ में प्रति शेयर ₹208.36 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक सैटिन क्रेडिटकेयर में MIT की हिस्सेदारी 1.81% थी।

One Mobikwik Systems

हर ग्लोबल कैपिटल मास्टर फंड I ने वन मोबिक्विक सिस्टम्स के 4.31 लाख शेयर (0.54% हिस्सेदारी) ₹9.83 करोड़ प्रति शेयर ₹227.86 के भाव पर खरीदे। वहीं बजाज लाइफ इंश्योरेंस ने मोबिक्विक के 7 लाख शेयर (0.88% हिस्सेदारी) ₹236.49 के भाव पर ₹16.55 करोड़ में बेच दिए। जून 2026 तक बजाज लाइफ इंश्योरेंस की कंपनी में 2.69% हिस्सेदारी थी।

RMC Switchgears

ईओएफ-डायरेक्ट ने स्मार्ट मीटरिंग सिस्टम बनाने वाली कंपनी आरएमसी स्विचगियर्स के 86,750 इक्विटी शेयर (0.82% हिस्सेदारी) ₹1.7 करोड़ में प्रति शेयर ₹195.93 के भाव पर खरीदे। वहीं इंडिया इमर्जिंग जायंट्स फंड ने इतने ही शेयर प्रति शेयर ₹195.72 के भाव पर बेच दिए।

Black Opal Consultants, Papadmalji Agro Foods, Vans Electroengineerings, Green Asia Impex

पापड़मालजी एग्रो फूड्स और ग्रीन एशिया इंपेक्स के शेयर आज एनएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे तो ब्लैक ओपल कंसल्टैंट्स और वान्स इलेक्ट्रोइंजीनियरिंग्स के शेयरों की बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

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RBI MPC Meeting Live: आज होगा रेपो रेट पर बड़ा ऐलान! जानिए होम लोन EMI, FD और आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

RBI Monetary Policy Committee Live Updates: देश के करोड़ों आम लोगों, होम लोन ग्राहकों और निवेशकों की निगाहें आज, 7 अक्टूबर सुबह 10 बजे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के ऐलान पर टिकी हुई है। महंगाई के बढ़ते दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के बीच आज केंद्रीय बैंक अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करने जा रहा है।

वैसे बाजार के अधिकांश विशेषज्ञों और रॉयटर्स के पोल में शामिल 60% से अधिक इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आज रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो रेपो रेट वर्तमान 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगी।

होम लोन EMI पर कितना पड़ेगा असर?

अगर आज आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की जेब पर असर पड़ना तय है:

बढ़ेगी EMI या लोन की अवधि: रेपो रेट बढ़ते ही बैंकों की फंडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसे बैंक सीधे ग्राहकों पर डालेंगे। यदि आपका ₹50 लाख का होम लोन लंबे समय के लिए चल रहा है, तो 0.25% की बढ़ोतरी से बैंक या तो आपकी मासिक EMI बढ़ा देंगे या लोन की समयावधि को लंबा कर देंगे।

क्या करें उधारकर्ता?:  तुरंत पूरा लोन चुकाने की हड़बड़ी न करें। पहले अपने लोन की मौजूदा ब्याज दर, शेष अवधि, बैंक के स्प्रेड की जांच करें और जरूरत पड़ने पर दूसरे बैंक में बैलेंस ट्रांसफर के विकल्प पर विचार करें।

पर्सनल और कार लोन भी हो सकते हैं महंगे

होम लोन ही नहीं, बल्कि नए पर्सनल लोन, व्हीकल लोन और अन्य क्रेडिट प्रोडक्ट्स की दरें भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। चूंकि पर्सनल लोन की दरें पहले से ही ऊंची होती हैं, इसलिए इस समय नया असुरक्षित कर्ज सोच-समझकर ही लें।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के निवेशकों के लिए खुशखबरी

दरों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा फायदा बचत करने वालों को मिलेगा। कर्ज की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बैंक नए डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए FD पर मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी करेंगे। वैसे आपकी पहले से चल रही फिक्स्ड डिपॉजिट पर पुरानी दर ही लागू रहेगी। फायदा केवल नई FD कराने या पुरानी FD को रिन्यू करने पर ही मिलेगा।

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरें

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है, क्योंकि ये दरें प्रत्येक बैंक की लिक्विडिटी और प्रतिस्पर्धात्मक नीतियों पर निर्भर करती हैं।

आरबीआई क्यों ले सकता है दरें बढ़ाने का फैसला?

महंगाई: अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई, जो आरबीआई के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर है।

कच्चा तेल और रुपया: पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल के दाम ऊंचे हैं और रुपया कमजोर हो रहा है, जिससे आयात महंगा हो रहा है।

मजबूत GDP ग्रोथ: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जो आर्थिक मजबूती को दर्शाती है और आरबीआई को महंगाई पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देती है।

RBI की नई पॉलिसी के पल पल के अपडेट के लिए जुगए रहें मनीकंट्रोल के आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी के नए ऐलानों के लिए बने इस स्पेशल लाइव ब्लॉग से।

RBI Repo Rate Hike: रेपो रेट बढ़ा तो आपकी EMI कितनी बढ़ जाएगी? समझिए होम और पर्सनल लोन का पूरा कैलकुलेशन

RBI Repo Rate Hike: RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 7 अक्टूबर को अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी। इसके बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। कई इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट से 50 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है।

जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर सिर्फ बैंकिंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहता। इसका असर आपके होम लोन की EMI पर भी पड़ सकता है। खासकर तब, जब आपका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर चल रहा हो।

मान लीजिए आपने 20 साल के लिए 8.5% ब्याज दर पर होम लोन लिया है। अब ब्याज दर 0.50% बढ़कर 9% हो जाती है। ऐसे में आपकी EMI कितनी बढ़ेगी? 10 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक के लोन पर इसका सीधा हिसाब समझिए।

10 लाख रुपये के लोन पर असर

10 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज और 20 साल की अवधि में EMI करीब ₹8,678 बैठती है। ब्याज दर 9% होने पर यही EMI करीब ₹8,997 हो जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹319 ज्यादा देने होंगे। रकम बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन लंबे समय तक यही बढ़ी हुई EMI चलती है तो कुल भुगतान पर इसका असर बढ़ जाता है।

20 लाख रुपये का लोन

20 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹17,356 है। ब्याज दर 9% होने पर यह बढ़कर करीब ₹17,995 हो जाएगी। मतलब हर महीने करीब ₹638 का अतिरिक्त बोझ। अगर घर का बजट पहले से EMI के हिसाब से सेट है, तो इतनी बढ़ोतरी भी महीने के खर्च में महसूस होती है।

30 लाख रुपये का लोन

30 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹26,035 बनती है। ब्याज दर बढ़कर 9% होने पर EMI करीब ₹26,992 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹957 ज्यादा। बड़े लोन में ब्याज दर का छोटा बदलाव भी EMI में साफ दिखाई देने लगता है।

40 लाख रुपये के लोन पर कितनी बढ़ेगी EMI?

40 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹34,713 है। 9% ब्याज होने पर यह करीब ₹35,989 हो जाएगी। इसका मतलब है कि हर महीने करीब ₹1,276 अतिरिक्त देने होंगे। साल भर में देखें तो EMI का यह अंतर करीब ₹15,300 बैठता है।

50 लाख रुपये के लोन पर असर सबसे ज्यादा

50 लाख रुपये के लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹43,391 है। अगर ब्याज दर 9% हो जाती है तो EMI करीब ₹44,986 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹1,595 ज्यादा। साल भर में यह अतिरिक्त बोझ करीब ₹19,100 हो जाता है।

होम लोन: 8.5% से 9% होने पर EMI का असर

लोन की रकम8.5% पर EMI9% पर EMIहर महीने बढ़ोतरी
सालाना अतिरिक्त बोझ

₹10 लाख₹8,678₹8,997₹319₹3,828
₹20 लाख₹17,356₹17,995₹638₹7,656
₹30 लाख₹26,035₹26,992₹957₹11,484
₹40 लाख₹34,713₹35,989₹1,276₹15,312
₹50 लाख₹43,391₹44,986₹1,595₹19,140

यह कैलकुलेशन 20 साल की लोन अवधि में 8.5% से 9% ब्याज दर होने पर किया गया है। वास्तविक EMI आपके बैंक, लोन की बाकी अवधि और ब्याज रीसेट के नियमों के हिसाब से अलग हो सकती है।

5 लाख रुपये के पर्सनल लोन पर भी असर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर होम लोन से ज्यादा होती है। मान लीजिए 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 12% ब्याज पर लिया गया है। इसकी EMI करीब ₹11,122 होगी।

लेकिन, अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद पर्सनल लोन महंगा होता और ब्याज दर बढ़कर 12.5% हो जाती है तो नए लोन की EMI करीब ₹11,249 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹127 ज्यादा देने होंगे।

रेपो रेट बढ़ने पर EMI ही बढ़ेगी?

होम लोन में यह जरूरी नहीं। ब्याज दर बढ़ने के बाद बैंक और ग्राहकों के पास EMI बढ़ाने या लोन की अवधि बढ़ाने जैसे विकल्प होते हैं। कुछ मामलों में दोनों में बदलाव किया जा सकता है।

अगर बैंक EMI को ज्यादा नहीं बढ़ाता है, तो लोन चुकाने की अवधि बढ़ सकती है। दूसरी तरफ EMI बढ़ाने पर हर महीने जेब से ज्यादा पैसा जाएगा, लेकिन लोन की अवधि को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है।

रेपो रेट का असर आपकी जेब पर कैसे ?

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा देता है। जब इसमें बदलाव होता है तो बैंकों की फंडिंग लागत पर असर पड़ सकता है। इसके बाद बैंक अपने लोन की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं।

हालांकि, रेपो रेट में 25 या 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर बैंक आपकी ब्याज दर भी बिल्कुल उतनी ही बढ़ा देगा। आपके लोन का बेंचमार्क, बैंक का स्प्रेड और रीसेट नियम भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए अगर आपका फ्लोटिंग रेट वाला बड़ा होम लोन चल रहा है, तो RBI की हर रेपो रेट बैठक आपके लिए मायने रखती है। ब्याज दर में छोटा बदलाव भी 15 से 20 साल के लोन में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

RBI MPC Meet: आपकी होम और कार लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी? कल 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे बड़ा ऐलान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

RBI Policy Big Update: जल्द महंगी होगी आपकी EMI? ब्रोकरेज फर्म्स का दावा- अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ा सकता है रिजर्व बैंक

RBI Policy Repo Rate Hike: कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, जिद्दी खुदरा महंगाई और वैश्विक केंद्रीय बैंकों के कड़े रुख के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के सामने एक जटिल आर्थिक चुनौती खड़ी हो गई है। वित्तीय बाजारों में अगले एक साल के भीतर ब्याज दरों में 125 बेसिस पॉइंट्स यानी 1.25% तक की बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।

हालांकि, दुनिया की दिग्गज ब्रोकरेज फर्मों और ग्लोबल इकोनॉमिक डेस्क के बीच इस बात को लेकर तीखे मतभेद हैं कि रिजर्व बैंक ब्याज दरें कितनी तेजी से और किस हद तक बढ़ाएगा।

आक्रामक रुख: बैंक ऑफ अमेरिका, एचएसबीसी और मॉर्गन स्टेनली

दिग्गज ब्रोकरेज फर्म्स BofA, HSBC और Morgan Stanley का मानना है कि आरबीआई को महंगाई और लिक्विडिटी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए जल्द से जल्द ब्याज दरें बढ़ानी होंगी।

बैंक ऑफ अमेरिका (BofA): BofA ने अपनी पिछली समयसीमा को पहले खिसकाते हुए अनुमान जताया है कि आरबीआई अक्टूबर में ही रेपो रेट बढ़ाना शुरू कर सकता है। BofA का मानना है कि इस पूरे चक्र में कुल 100 bps (1%) की बढ़ोतरी होगी और टर्मिनल रेपो रेट बढ़कर 6.25% तक पहुंच जाएगा।

मॉर्गन स्टेनली: मॉर्गन स्टेनली को भी अक्टूबर में 25 bps की बढ़ोतरी की उम्मीद है। उसका अनुमान है कि अप्रैल 2027 तक रेपो रेट बढ़कर 6.25% के स्तर पर आ जाएगा ताकि बाहरी आर्थिक स्थिरता बनी रहे।

एचएसबीसी का लिक्विडिटी पर जोर: एचएसबीसी ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी पर गंभीर चिंता जताई है। FCNR(B) डिपॉजिट जैसे स्पेशल विंडोज के जरिए भारी विदेशी मुद्रा प्रवाह से बैंकिंग सिस्टम में करीब ₹15 लाख करोड़ का लिक्विडिटी सरप्लस जमा हो गया है। एचएसबीसी का कहना है कि वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई को रेपो रेट बढ़ाने के साथ-साथ इस बहु-ट्रिलियन रुपये के सरप्लस को सिस्टम से बाहर निकालना होगा।

एक्सिस बैंक और एचएसबीसी का विश्लेषण: आरबीआई पहले से ही वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR), ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) सेल्स और फॉरेक्स इंटरवेंशन का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन इतनी बड़ी नकदी को बिना संभाले छोड़ने से महंगाई भड़कने का खतरा बना रहेगा।

नोमुरा का सीमित बढ़ोतरी का अनुमान

दूसरी ओर, जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा बाजार में चल रही इतनी आक्रामक बढ़ोतरी की संभावनाओं को खारिज करती है। नोमुरा का तर्क है कि भारत की कोर महंगाई दर ऐतिहासिक ऊंचाइयों से घटकर अब लगभग 3% के आसपास आ गई है और मजदूरी-कीमतों का कोई व्यापक दबाव नहीं दिख रहा है।

घरेलू वृद्धि की गति धीमी होने के संकेत को देखते हुए, नोमुरा का मानना है कि आरबीआई बहुत आक्रामक कदम नहीं उठाएगा। नोमुरा के अनुसार, आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 bps की दो छोटी बढ़ोतरी करके रेपो रेट को 5.75% तक ले जाएगा, जिसके बाद 2027 की शुरुआत से ही मौद्रिक सख्ती का दबाव कम होने लगेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI उम्मीद से ज्यादा बढ़ा सकता है इंटरेस्ट रेट, होम लोन और कार लोन होंगे महंगे

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) उम्मीद से ज्यादा इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का कहना है कि केंद्रीय बैंक इस साल दिसंबर तक इंटरेस्ट रेट 50 बेसिस प्वाइंट्स तक बढ़ा सकता है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी अगले हफ्ते आने वाली है। इसमें इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला हो सकता है।

आरबीआई 7 अक्टूबर को पेश करेगा मॉनेटरी पॉलिसी

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग 5 अक्तूबर को शुरू होगी। इसके नतीजे 7 अक्तूबर को आएंगे। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा बुधवार यानी 7 अक्तूबर को सुबह 10 बजे मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान करेंगे। नोमुरा के मुताबिक, RBI का रुख इंटरेस्ट रेट को लेकर अनुमान से ज्यादा आक्रामक हो सकता है। ज्यादातर एनालिस्ट्स का मानना है कि आरबीआई अगले साल तक इंटरेस्ट रेट करीब 125 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है।

इस साल दो बार रेपो रेट बढ़ने का अनुमान 

नोमुरा का कहना है कि आरबीआई अक्तूबर की मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट 25 बेसिस प्वाइंट्स और दिसंबर की पॉलिसी में फिर 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ा सकता है। इससे रेपो रेट बढ़कर 5.75 फीसदी पर पहुंच जाएगा। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक, आरबीआई का रुख शुरुआत में आक्रामक रह सकता है। इसकी वजह यह है कि फूड और एनर्जी की कीमतों में उछाल से अगले छह महीनों में इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ने का अनुमान है।

इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकने के लिए RBI बढ़ाएगा रेपो रेट

नोमुरा का कहना है कि आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने का मकसद सिर्फ इनफ्लेशन को बढ़ने से रोकना है। इसे इंटरेस्ट रेट को लेकर आरबीआई की सख्त नीति की साइकिल की शुरुआत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ब्रोकरेज फर्म ने FY27 में एवरेज सीपीआई इनफ्लेशन 5.2 फीसदी रहने का अनुमान जताया है। उसका यह भी कहना है कि FY28 में यह घटकर 4 फीसदी के आरबीआई के टारगेट तक आ जाएगा।

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क्रूड की कीमतों में उछाल से बढ़ रहा है इनफ्लेशन 

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतो में उछाल आया है। जून में क्रूड ऑयल की कीमतों में कुछ नरमी आई थी। लेकिन, फिर से कीमतें काफी बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चल रहा है। इसका सीधा असर इनफ्लेशन पर पड़ रहा है। बीते 3-4 महीनों से रिटेल इनफ्लेशन लगातार बढ़ा है। अमेरिका-ईरान की लड़ाई से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 71 डॉलर प्रति बैरल था।