Stock Market Outlook: ‘शेयर बाजार में निवेश का सही मौका’, राजेश कोठारी ने कहा- 3 साल में मिल सकता है तगड़ा रिटर्न

Stock Market Outlook: AlfAccurate Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश कोठारी का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अगले 3 से 5 साल में अच्छा रिटर्न दे सकता है। इसके पीछे कंपनियों की कमाई में सुधार, अर्थव्यवस्था की मजबूती और शेयरों की वाजिब वैल्यूएशन जैसे कारण हैं।

CNBC-TV18 को दिए इंटरव्यू में कोठारी ने कहा कि अब इक्विटी में निवेश बढ़ाने का समय है। निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप, तीनों तरह के शेयरों में मौके तलाशने चाहिए। पिछले दो साल में बाजार से खास रिटर्न नहीं मिला है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा है।

अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा

कोठारी के मुताबिक, महंगे कच्चे तेल और ऊंची ब्याज दरों की चिंताओं के बावजूद भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत है। नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 17-18%, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 20% और पर्सनल लोन में 16% की बढ़ोतरी इसका संकेत है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्रियल क्रेडिट ग्रोथ 2011 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंची है।

खपत, सरकार का कैपिटल एक्सपेंडिचर और निर्यात में सुधार भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं। कंपनियों की कमाई में भी सुधार दिख रहा है। साथ ही, बाजार की वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत P/E रेशियो से नीचे है।

FII की बिकवाली हर कंपनी के लिए खतरे का संकेत नहीं

कोठारी ने कहा कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को सिर्फ भारत से उनकी नाराजगी के तौर पर नहीं देखना चाहिए। निवेशकों को नेट खरीद-बिक्री के बजाय कुल खरीद और बिक्री पर भी नजर डालनी चाहिए।

उनके मुताबिक, विदेशी निवेशक उन कंपनियों से पैसा निकाल रहे हैं, जो उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं। इसलिए बिकवाली का कारण कई बार देश के बजाय किसी खास कंपनी का कमजोर प्रदर्शन होता है।

इन सेक्टरों में दिख रहे हैं मौके

कोठारी को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS), एयरोस्पेस, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट एंड मैन्युफैक्चरिंग (CDMO) और ऑटो एंसिलरी कंपनियों में संभावनाएं दिख रही हैं। EMS सेक्टर को सरकार की PLI स्कीम और भारतीय कंपनियों की बढ़ती उत्पादन क्षमता से मदद मिल रही है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज भी उनकी पसंद में शामिल हैं। मजबूत क्रेडिट ग्रोथ, बेहतर एसेट क्वालिटी और नियंत्रित क्रेडिट लागत से इस सेक्टर को फायदा मिल सकता है। उन्हें स्पेशियलिटी केमिकल्स, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी और ट्रैवल, मीडिया व डिजिटल एडवर्टाइजिंग प्लेटफॉर्म कारोबार में भी अवसर दिखते हैं।

हर शेयर में तेजी की उम्मीद न करें

कोठारी ने स्टॉक चुनते समय सावधानी बरतने की सलाह दी। उनके मुताबिक, पिछले पांच साल में कोई भी लार्जकैप कंपनी हर साल 20% की ग्रोथ दर्ज नहीं कर पाई। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी करीब 8% ही लगातार इतनी ग्रोथ हासिल कर पाईं।

उन्होंने कहा कि कई प्लेटफॉर्म कंपनियां अब कर्ज-मुक्त हो चुकी हैं। इससे कारोबार को लंबे समय तक आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

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Personal Loan EMI: ₹5 लाख का लोन जल्दी चुकाने से ₹69000 का ब्याज बचेगा, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेना काफी आसान है, लेकिन उसका ब्याज जेब पर भारी पड़ सकता है। खासकर तब, जब लोन की अवधि लंबी हो। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर आपके पास पैसा आ जाए तो लोन को जल्दी खत्म करना कितना फायदेमंद है?

इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपने 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन लिया है। ब्याज दर 12% सालाना है और लोन की अवधि 5 साल यानी 60 महीने है।

5 साल तक चलाया तो कितना ब्याज देंगे?

5 लाख रुपये के इस लोन पर 12% ब्याज के हिसाब से आपकी EMI करीब 11,122 रुपये बनेगी। आप 60 महीने तक यह EMI चुकाते हैं तो बैंक को कुल करीब 6.67 लाख रुपये देने होंगे।

यानी 5 लाख रुपये की मूल रकम के ऊपर करीब 1.67 लाख रुपये सिर्फ ब्याज के रूप में चला जाएगा।

3 साल में लोन खत्म किया तो क्या होगा?

अब मान लीजिए आप इसी 5 लाख रुपये के लोन को 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने का फैसला करते हैं। इस स्थिति में आपकी EMI बढ़कर करीब 16,607 रुपये हो जाएगी

हालांकि, लोन की अवधि कम होने से कुल ब्याज काफी घट जाएगा। 36 महीने में आप बैंक को करीब 5.98 लाख रुपये चुकाएंगे। इसमें ब्याज करीब 97,858 रुपये होगा। यानी 5 साल की जगह 3 साल में लोन खत्म करने पर करीब 69,476 रुपये का ब्याज बच सकता है।

लोन की अवधिEMIकुल ब्याज
5 सालकरीब ₹11,122करीब ₹1.67 लाख
3 सालकरीब ₹16,607करीब ₹97,858
ब्याज में बचत—करीब ₹69,476

लेकिन EMI बढ़ाना हर किसी के लिए सही नहीं

यहां एक बात समझना जरूरी है। लोन जल्दी खत्म करने का मतलब है कि आपको हर महीने ज्यादा रकम EMI में लगानी होगी। इसलिए फैसला सिर्फ ब्याज बचत देखकर नहीं करना चाहिए।

अगर आपकी आमदनी स्थिर है और 16-17 हजार रुपये की EMI आसानी से संभाल सकते हैं, तो छोटी अवधि वाला लोन ब्याज के लिहाज से बेहतर हो सकता है। वहीं, अगर ज्यादा EMI से आपका बाकी खर्च या इमरजेंसी फंड प्रभावित होता है, तो जल्दबाजी ठीक नहीं होगी।

दूसरे चार्ज का ध्यान रखना भी जरूरी

अगर आप पर्सनल लोन को समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो बैंक या NBFC के प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्जेज भी जरूर देख लें। इन चार्ज की वजह से वास्तविक बचत अलग हो सकती है।

इस उदाहरण में 12% ब्याज दर और बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के हिसाब से 5 लाख रुपये का लोन 5 साल की जगह 3 साल में खत्म करने पर करीब 69 हजार रुपये का ब्याज बचता है। यानी सिर्फ लोन जल्दी खत्म करने से ही आपकी जेब में अच्छी-खासी रकम बच सकती है।

Home loan EMI : RBI ने 0.25% बढ़ाया रेपो रेट, जानें आपके होम लोन पर क्या होगा इसका असर

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

RBI MPC Meeting Live: आज होगा रेपो रेट पर बड़ा ऐलान! जानिए होम लोन EMI, FD और आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर

RBI Monetary Policy Committee Live Updates: देश के करोड़ों आम लोगों, होम लोन ग्राहकों और निवेशकों की निगाहें आज, 7 अक्टूबर सुबह 10 बजे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर के ऐलान पर टिकी हुई है। महंगाई के बढ़ते दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये के बीच आज केंद्रीय बैंक अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करने जा रहा है।

वैसे बाजार के अधिकांश विशेषज्ञों और रॉयटर्स के पोल में शामिल 60% से अधिक इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आज रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25% (25 बेसिस पॉइंट) की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो रेपो रेट वर्तमान 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगी।

होम लोन EMI पर कितना पड़ेगा असर?

अगर आज आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो फ्लोटिंग रेट पर होम लोन लेने वाले ग्राहकों की जेब पर असर पड़ना तय है:

बढ़ेगी EMI या लोन की अवधि: रेपो रेट बढ़ते ही बैंकों की फंडिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिसे बैंक सीधे ग्राहकों पर डालेंगे। यदि आपका ₹50 लाख का होम लोन लंबे समय के लिए चल रहा है, तो 0.25% की बढ़ोतरी से बैंक या तो आपकी मासिक EMI बढ़ा देंगे या लोन की समयावधि को लंबा कर देंगे।

क्या करें उधारकर्ता?:  तुरंत पूरा लोन चुकाने की हड़बड़ी न करें। पहले अपने लोन की मौजूदा ब्याज दर, शेष अवधि, बैंक के स्प्रेड की जांच करें और जरूरत पड़ने पर दूसरे बैंक में बैलेंस ट्रांसफर के विकल्प पर विचार करें।

पर्सनल और कार लोन भी हो सकते हैं महंगे

होम लोन ही नहीं, बल्कि नए पर्सनल लोन, व्हीकल लोन और अन्य क्रेडिट प्रोडक्ट्स की दरें भी धीरे-धीरे बढ़ सकती हैं। चूंकि पर्सनल लोन की दरें पहले से ही ऊंची होती हैं, इसलिए इस समय नया असुरक्षित कर्ज सोच-समझकर ही लें।

फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के निवेशकों के लिए खुशखबरी

दरों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा फायदा बचत करने वालों को मिलेगा। कर्ज की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बैंक नए डिपॉजिट आकर्षित करने के लिए FD पर मिलने वाले ब्याज में बढ़ोतरी करेंगे। वैसे आपकी पहले से चल रही फिक्स्ड डिपॉजिट पर पुरानी दर ही लागू रहेगी। फायदा केवल नई FD कराने या पुरानी FD को रिन्यू करने पर ही मिलेगा।

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरें

सेविंग्स अकाउंट की ब्याज दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है, क्योंकि ये दरें प्रत्येक बैंक की लिक्विडिटी और प्रतिस्पर्धात्मक नीतियों पर निर्भर करती हैं।

आरबीआई क्यों ले सकता है दरें बढ़ाने का फैसला?

महंगाई: अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई, जो आरबीआई के 4% के लक्ष्य से लगातार तीसरे महीने ऊपर है।

कच्चा तेल और रुपया: पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल के दाम ऊंचे हैं और रुपया कमजोर हो रहा है, जिससे आयात महंगा हो रहा है।

मजबूत GDP ग्रोथ: चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जो आर्थिक मजबूती को दर्शाती है और आरबीआई को महंगाई पर ध्यान केंद्रित करने का मौका देती है।

RBI की नई पॉलिसी के पल पल के अपडेट के लिए जुगए रहें मनीकंट्रोल के आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी के नए ऐलानों के लिए बने इस स्पेशल लाइव ब्लॉग से।

RBI Repo Rate Hike: रेपो रेट बढ़ा तो आपकी EMI कितनी बढ़ जाएगी? समझिए होम और पर्सनल लोन का पूरा कैलकुलेशन

RBI Repo Rate Hike: RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) 7 अक्टूबर को अपनी नई मौद्रिक नीति का ऐलान करेगी। इसके बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। कई इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट से 50 बेसिस पॉइंट का इजाफा हो सकता है।

जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर सिर्फ बैंकिंग सिस्टम तक सीमित नहीं रहता। इसका असर आपके होम लोन की EMI पर भी पड़ सकता है। खासकर तब, जब आपका लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर चल रहा हो।

मान लीजिए आपने 20 साल के लिए 8.5% ब्याज दर पर होम लोन लिया है। अब ब्याज दर 0.50% बढ़कर 9% हो जाती है। ऐसे में आपकी EMI कितनी बढ़ेगी? 10 लाख से लेकर 50 लाख रुपये तक के लोन पर इसका सीधा हिसाब समझिए।

10 लाख रुपये के लोन पर असर

10 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज और 20 साल की अवधि में EMI करीब ₹8,678 बैठती है। ब्याज दर 9% होने पर यही EMI करीब ₹8,997 हो जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹319 ज्यादा देने होंगे। रकम बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन लंबे समय तक यही बढ़ी हुई EMI चलती है तो कुल भुगतान पर इसका असर बढ़ जाता है।

20 लाख रुपये का लोन

20 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹17,356 है। ब्याज दर 9% होने पर यह बढ़कर करीब ₹17,995 हो जाएगी। मतलब हर महीने करीब ₹638 का अतिरिक्त बोझ। अगर घर का बजट पहले से EMI के हिसाब से सेट है, तो इतनी बढ़ोतरी भी महीने के खर्च में महसूस होती है।

30 लाख रुपये का लोन

30 लाख रुपये के होम लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹26,035 बनती है। ब्याज दर बढ़कर 9% होने पर EMI करीब ₹26,992 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹957 ज्यादा। बड़े लोन में ब्याज दर का छोटा बदलाव भी EMI में साफ दिखाई देने लगता है।

40 लाख रुपये के लोन पर कितनी बढ़ेगी EMI?

40 लाख रुपये के लोन पर 8.5% की दर से EMI करीब ₹34,713 है। 9% ब्याज होने पर यह करीब ₹35,989 हो जाएगी। इसका मतलब है कि हर महीने करीब ₹1,276 अतिरिक्त देने होंगे। साल भर में देखें तो EMI का यह अंतर करीब ₹15,300 बैठता है।

50 लाख रुपये के लोन पर असर सबसे ज्यादा

50 लाख रुपये के लोन पर 8.5% ब्याज की EMI करीब ₹43,391 है। अगर ब्याज दर 9% हो जाती है तो EMI करीब ₹44,986 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹1,595 ज्यादा। साल भर में यह अतिरिक्त बोझ करीब ₹19,100 हो जाता है।

होम लोन: 8.5% से 9% होने पर EMI का असर

लोन की रकम8.5% पर EMI9% पर EMIहर महीने बढ़ोतरी
सालाना अतिरिक्त बोझ

₹10 लाख₹8,678₹8,997₹319₹3,828
₹20 लाख₹17,356₹17,995₹638₹7,656
₹30 लाख₹26,035₹26,992₹957₹11,484
₹40 लाख₹34,713₹35,989₹1,276₹15,312
₹50 लाख₹43,391₹44,986₹1,595₹19,140

यह कैलकुलेशन 20 साल की लोन अवधि में 8.5% से 9% ब्याज दर होने पर किया गया है। वास्तविक EMI आपके बैंक, लोन की बाकी अवधि और ब्याज रीसेट के नियमों के हिसाब से अलग हो सकती है।

5 लाख रुपये के पर्सनल लोन पर भी असर

पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर होम लोन से ज्यादा होती है। मान लीजिए 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन 5 साल के लिए 12% ब्याज पर लिया गया है। इसकी EMI करीब ₹11,122 होगी।

लेकिन, अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद पर्सनल लोन महंगा होता और ब्याज दर बढ़कर 12.5% हो जाती है तो नए लोन की EMI करीब ₹11,249 पहुंच जाएगी। यानी हर महीने करीब ₹127 ज्यादा देने होंगे।

रेपो रेट बढ़ने पर EMI ही बढ़ेगी?

होम लोन में यह जरूरी नहीं। ब्याज दर बढ़ने के बाद बैंक और ग्राहकों के पास EMI बढ़ाने या लोन की अवधि बढ़ाने जैसे विकल्प होते हैं। कुछ मामलों में दोनों में बदलाव किया जा सकता है।

अगर बैंक EMI को ज्यादा नहीं बढ़ाता है, तो लोन चुकाने की अवधि बढ़ सकती है। दूसरी तरफ EMI बढ़ाने पर हर महीने जेब से ज्यादा पैसा जाएगा, लेकिन लोन की अवधि को ज्यादा बढ़ने से रोका जा सकता है।

रेपो रेट का असर आपकी जेब पर कैसे ?

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को पैसा देता है। जब इसमें बदलाव होता है तो बैंकों की फंडिंग लागत पर असर पड़ सकता है। इसके बाद बैंक अपने लोन की ब्याज दरों में बदलाव कर सकते हैं।

हालांकि, रेपो रेट में 25 या 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि हर बैंक आपकी ब्याज दर भी बिल्कुल उतनी ही बढ़ा देगा। आपके लोन का बेंचमार्क, बैंक का स्प्रेड और रीसेट नियम भी महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए अगर आपका फ्लोटिंग रेट वाला बड़ा होम लोन चल रहा है, तो RBI की हर रेपो रेट बैठक आपके लिए मायने रखती है। ब्याज दर में छोटा बदलाव भी 15 से 20 साल के लोन में बड़ा फर्क पैदा कर सकता है।

RBI MPC Meet: आपकी होम और कार लोन की EMI बढ़ेगी या घटेगी? कल 10 बजे RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा करेंगे बड़ा ऐलान

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ट्रिपल मर्डर से पहले AI पर क्या सर्च कर रहा था टेक कर्मचारी? सामने आई हिस्ट्री

बेंगलुरु के KR पुरा इलाके के सीगेहल्ली में जून में हुए ट्रिपल मर्डर केस की जांच में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पुलिस को 25 साल के टेक कर्मचारी जे. केनेथ के लैपटॉप से AI पर की गई कई सर्च मिली हैं। ये सर्च उन सवालों से जुड़ी थीं, जिनसे किसी पर हमला करने के तरीके की जानकारी मिल सकती है।

लोकल 18 के रिपोर्टर आफरीन हुसैन की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सर्च 22 जून को हुई घटना से पहले की गई थीं। इसी दिन केनेथ पर अपनी लिव-इन पार्टनर श्वेता के माता-पिता और बहन पर हमला करने का आरोप है।

केनेथ ने AI पर सर्च किये ये सवाल

• किचन नाइफ से हमला करने के तरीके

• सिरके और मिर्च पाउडर से किसी की आंखों को नुकसान पहुंचाने के सवाल

• तीन लोगों के घुटने तोड़ने से जुड़ी जानकारी

• घर में घुसे तीन चोरों को काबू करने के तरीके

• खतरनाक हथियारों के बारे में जानकारी

पुलिस को इन सर्च के अलावा बैंक से आने वाली लोन की कॉल और दिवालिया होने से जुड़ी जानकारी भी मिली है।

चार्जशीट के मुताबिक, श्वेता ने केनेथ की मदद के लिए करीब 52 लाख रुपये का लोन लिया था। इसमें बिजनेस लोन, पर्सनल लोन और दोस्तों-रिश्तेदारों से लिया पैसा शामिल था। किस्तें नहीं चुकने पर बैंक ने उसके माता-पिता के घर नोटिस भेजा। इसके बाद परिवार को कर्ज के बारे में पता चला और श्वेता के पिता ने केनेथ से पैसों को लेकर सवाल किया।

पैसों के विवाद के बाद हुआ हमला

आरोप है कि 22 जून की रात सीगेहल्ली के साई ग्रीन अपार्टमेंट में विवाद बढ़ गया। इसी दौरान सोमसुंदर, उनकी पत्नी मुथुलक्ष्मी और 20 साल की बेटी सुप्रिया पर हमला किया गया।

सोमसुंदर घायल होने के बाद किसी तरह सीढ़ियों तक पहुंचे। उन्होंने गार्ड और वहां मौजूद लोगों को बताया कि केनेथ उनकी पत्नी और बेटी पर हमला कर रहा है। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई। मुथुलक्ष्मी और सुप्रिया की भी जान चली गई।

घटनास्थल से मिले ये अहम सबूत

जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल से सिरके और मिर्च पाउडर की एक बोतल भी मिली। इसे जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजा गया है।

पुलिस के मुताबिक, केनेथ AI का काफी इस्तेमाल करता था और उसे एक दोस्त की तरह मानता था। लैपटॉप की जांच और Google सर्च हिस्ट्री से ये जानकारी मिली है। पुलिस अभी यह पता कर रही है कि AI ने उसके सवालों के क्या जवाब दिए थे।

इस मामले में पुलिस ने कोर्ट में 2,085 पेज की चार्जशीट दाखिल की है। इसमें श्वेता का बयान भी है। श्वेता ने बताया कि केनेथ ने उसके माता-पिता और बहन पर हमला किया था और वह उस समय वहीं मौजूद थी।

FD तोड़ने पर कितना नुकसान होता है, क्या आपको ऐसा करना चाहिए? समझिए पूरा हिसाब

FD premature withdrawal: FD यानी फिक्स्ड डिपॉजिट को सुरक्षित निवेश में गिना जाता है। लेकिन जरूरत पड़ने पर अगर FD की मैच्योरिटी से पहले पैसा निकाल लिया जाए, तो मिलने वाला ब्याज उम्मीद से कम हो सकता है। बैंक प्रीमैच्योर क्लोजर पर पेनल्टी भी लगा सकते हैं। इसलिए FD तोड़ने से पहले यह समझना जरूरी है कि असल में कितना नुकसान हो सकता है।

FD तोड़ने पर क्या होता है?

मान लीजिए आपने ₹5 लाख की FD 3 साल के लिए 7% सालाना ब्याज पर कराई। लेकिन किसी जरूरी खर्च के लिए आपको 1 साल बाद ही पैसा निकालना पड़ गया।

अगर FD पूरी 3 साल चलती, तो आपको 7% की दर से ब्याज मिलता। लेकिन 1 साल में तोड़ने पर बैंक जरूरी नहीं कि पूरे 7% की दर से ब्याज दे। बैंक अक्सर उस अवधि के लिए लागू FD रेट के आधार पर ब्याज की गणना करता है और उसके ऊपर प्रीमैच्योर क्लोजर चार्ज भी लगा सकता है।

आसान उदाहरण से समझिए

अगर आपका बैंक 1 साल की FD पर 6% ब्याज दे रहा है और समय से पहले FD तोड़ने पर 1% की पेनल्टी लगती है। ऐसे में प्रभावी ब्याज दर 5% हो सकती है। ₹5 लाख पर 7% के हिसाब से एक साल का ब्याज करीब ₹35,000 बनता।

लेकिन 5% के हिसाब से ब्याज करीब ₹25,000 होगा। यानी इस उदाहरण में करीब ₹10,000 का ब्याज अंतर हो सकता है। वास्तविक रकम बैंक की FD की शर्तों और उस समय लागू ब्याज दर पर निर्भर करेगी।

FD तोड़ने पर क्या-क्या नुकसान हो सकता है?

मामलापूरी अवधि तक FD रखने पर
समय से पहले FD तोड़ने पर

निवेश₹5 लाख₹5 लाख
मूल FD अवधि3 साल1 साल में बंद
FD रेट7%
लागू अवधि की दर देखी जाएगी

अनुमानित 1 साल का ब्याज₹35,000
उदाहरण में ₹25,000

संभावित ब्याज अंतर—₹10,000
प्रीमैच्योर क्लोजर चार्जनहींबैंक के नियम के अनुसार
कुल फायदाज्यादाकम

क्या हर स्थिति में FD तोड़ना गलत है?

नहीं। अगर अचानक मेडिकल खर्च आ गया है, नौकरी चली गई है या कोई जरूरी भुगतान करना है, तो FD तोड़ना समझदारी हो सकती है। खासकर तब, जब दूसरा विकल्प महंगा पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया हो।

मान लीजिए FD तोड़ने से आपको ब्याज में ₹10,000 का नुकसान हो रहा है, लेकिन पैसा न होने पर आपको 15-20% ब्याज वाला कर्ज लेना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में FD तोड़ना ज्यादा सस्ता पड़ सकता है।

FD तोड़ने से पहले 6 बातों का ध्यान रखें

  • FD पूरी होने में कितना समय बचा है, इसे जरूर देखना चाहिए। अगर कम समय बचा है, तो FD तोड़ने से बचा जा सकता है।
  • FD आज तोड़ने पर बैंक आपको कुल कितनी रकम देगा, पहले यह पता करें।
  • FD की तय ब्याज दर और समय से पहले निकालने पर मिलने वाली ब्याज दर की तुलना भी करनी चाहिए।
  • बैंक FD समय से पहले तोड़ने पर कितना चार्ज काटेगा, इसकी जानकारी लें।
  • अगर जरूरत कम रकम की है, तो पूरी FD तोड़ने के बजाय दूसरे विकल्प देखें।
  • FD तोड़ने के बजाय FD पर लोन, ओवरड्राफ्ट या दूसरी बचत का इस्तेमाल करना कितना महंगा पड़ेगा, इसकी तुलना भी कर लें।

FD तोड़ने के बजाय लोन लेना बेहतर हो सकता है?

कुछ मामलों में बैंक FD के बदले लोन या ओवरड्राफ्ट की सुविधा देते हैं। इसमें FD को पूरी तरह बंद करने की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए अगर आपको थोड़े समय के लिए पैसे चाहिए, तो FD तोड़ने के साथ इस विकल्प की लागत भी देख लेनी चाहिए।

मसलन, आपकी ₹5 लाख की FD है और आपको सिर्फ ₹1 लाख की जरूरत है। ऐसी स्थिति में पूरी FD तोड़ने के बजाय FD के बदले मिलने वाले लोन या ओवरड्राफ्ट की ब्याज लागत देखना ज्यादा समझदारी हो सकती है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

CIBIL स्कोर 750 होने के बाद भी लोन रिजेक्ट क्यों हो जाता है? ये 5 बड़े कारण जान लीजिए

आपका CIBIL स्कोर 750 है। आपने समय पर पुराने लोन चुकाए हैं। Credit Card का बिल भी समय पर भरते हैं। फिर भी बैंक ने नया लोन देने से मना कर दिया। ऐसा होना संभव है। दरअसल, बैंक सिर्फ CIBIL स्कोर देखकर लोन नहीं देता। वह आपकी पूरी आर्थिक स्थिति देखता है।

कमाई के मुकाबले EMI ज्यादा

मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी 60,000 रुपये है और पहले से 35,000 रुपये की EMI जा रही है। अब आपको किसी काम के लिए नया लोन चाहिए। CIBIL स्कोर 780 होने के बावजूद बैंक यह देखेगा कि नई EMI जुड़ने के बाद आपके पास घर का खर्च चलाने के लिए कितना पैसा बचेगा। बोझ ज्यादा लगा तो लोन रिजेक्ट हो सकता है।

ऐसे में नया लोन लेने से पहले अपनी मौजूदा EMI का बोझ कम करने की कोशिश करें। अगर कोई छोटा कर्ज बाकी है और उसे चुकाना मुमकिन है, तो पहले उसे खत्म करना बेहतर हो सकता है।

जरूरत से ज्यादा लोन मांगना

कई बार समस्या CIBIL स्कोर में नहीं, लोन की रकम में होती है। जैसे कि आपकी सैलरी 70,000 रुपये है। और आप 30 लाख रुपये का पर्सनल लोन मांग रहे हैं। बैंक को लग सकता है कि इस रकम की EMI आपकी कमाई के हिसाब से ज्यादा पड़ रही है।

इसलिए जितनी जरूरत है, उतने लोन के लिए आवेदन करें। लोन की रकम कम होने पर EMI भी कम होगी। इससे आपकी लोन चुकाने की क्षमता बेहतर दिख सकती है।

क्रेडिट कार्ड पर लगातार भारी खर्च

क्रेडिट कार्ड का बिल समय पर भरने से आपका CIBIL स्कोर अच्छा रह सकता है। लेकिन बैंक यह भी देखता है कि आप कार्ड का इस्तेमाल कितना कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, अगर कार्ड की लिमिट 2 लाख रुपये है और आप हर महीने करीब 1.5 लाख रुपये खर्च कर रहे हैं, तो बैंक मान सकता है कि आप लोन पर ज्यादा निर्भर हैं।

ऐसे में क्रेडिट कार्ड की लिमिट का हमेशा 30% से कम खर्च करने की कोशिश करें। बिल समय पर भरें और कार्ड की पूरी लिमिट के आसपास लगातार खर्च करने से बचें।

कई बैंकों में एक साथ आवेदन

लोन नहीं मिला तो दूसरे बैंक में आवेदन कर दिया। वहां भी नहीं मिला तो तीसरे बैंक में कोशिश कर ली। इस तरह कम समय में कई जगह आवेदन करना ठीक नहीं माना जाता। हर बार बैंक आपकी क्रेडिट रिपोर्ट देख सकता है और इसकी इंक्वायरी रिपोर्ट में दर्ज हो सकती है।

आपको आवेदन करने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दर, पात्रता और EMI देख लेनी चाहिए। फिर अपनी जरूरत के हिसाब से सही विकल्प चुनना चाहिए। ताकि कई जगह आवेदन करने की नौबत न आए।

CIBIL रिपोर्ट में गलती

यह भी हो सकता है कि आपका CIBIL स्कोर अच्छा हो, लेकिन रिपोर्ट में कोई गलत जानकारी दर्ज हो। जैसे कोई ऐसा लोन दिख रहा हो जो आपने लिया ही नहीं। पुराने लोन का भुगतान हो चुका हो, लेकिन रिपोर्ट में बकाया दिख रहा हो।

इसलिए लोन लेने से पहले अपनी CIBIL रिपोर्ट जरूर देख लें। कोई गड़बड़ी दिखे तो उसे ठीक कराने के लिए विवाद दर्ज करें। रिपोर्ट में गलत जानकारी रहने से आगे भी परेशानी हो सकती है।

सिर्फ 750 का स्कोर काफी नहीं

CIBIL स्कोर 750 या उससे ऊपर होना अच्छी क्रेडिट हिस्ट्री का संकेत हो सकता है। लेकिन बैंक के पास लोन मंजूर करने के लिए कई और पैमाने होते हैं। आपकी कमाई कितनी है, पहले से कितना कर्ज है और नई EMI आसानी से चुका पाएंगे या नहीं, ये बातें भी देखी जाती हैं।

इसलिए लोन लेने से पहले सिर्फ अपना CIBIL स्कोर मत देखिए। अपनी EMI, कुल कर्ज और Credit Card के इस्तेमाल पर भी नजर डालिए। कई बार यहीं पर वह वजह छिपी होती है, जिसकी वजह से अच्छा स्कोर होने के बावजूद लोन का आवेदन रिजेक्ट हो जाता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50000 चाहिए तो कहां और कितना करें निवेश, समझिए पूरा कैलकुलेशन

Retirement Planning: रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹50,000 चाहिए, तो सिर्फ आज की जरूरत देखकर निवेश करना काफी नहीं है। आज के ₹50,000 की कीमत 20-30 साल बाद उतनी नहीं रहेगी। महंगाई धीरे-धीरे आपके खर्च को बढ़ाती रहेगी।

इसे आसान तरीके से समझते हैं। मान लीजिए आपकी उम्र 30 साल है और आप 60 की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं। आज आपका महीने का खर्च ₹50,000 है। अगर अगले 30 साल तक औसत महंगाई 6% रहती है, तो 60 की उम्र में इसी खर्च के लिए करीब ₹2.87 लाख महीने चाहिए होंगे।

यानी रिटायरमेंट के लिए आपका लक्ष्य आज के ₹50,000 नहीं, बल्कि भविष्य का खर्च होना चाहिए। इसी आधार पर रिटायरमेंट फंड तैयार करना होगा।

रिटायरमेंट के लिए कितना पैसा चाहिए?

मान लेते हैं कि 60 की उम्र में रिटायर होने के बाद आपको करीब 30 साल तक इस पैसे से खर्च चलाना है। साथ ही निवेश से औसतन 8% सालाना रिटर्न मिलता है और महंगाई 6% रहती है। इस हिसाब से आपको करीब ₹7.4 करोड़ चाहिए होगा। इससे रिटायरमेंट के बाद बढ़ते खर्च को लंबे समय तक संभालने की गुंजाइश बनती है।

अगर आपको रिटायरमेंट के बाद पैसा 25 साल तक चाहिए, तो यह जरूरत करीब ₹6.4 करोड़ रह सकती है। यानी रिटायरमेंट की अवधि बढ़ने के साथ जरूरी कॉर्पस भी बढ़ता है।

₹7.4 करोड़ का फंड कैसे तैयार करें?

अब सवाल है कि 30 साल में ₹7.4 करोड़ कैसे जमा होंगे। इसके लिए SIP एक तरीका हो सकता है।

अगर औसतन 12% सालाना रिटर्न मानें, तो 30 साल तक करीब ₹21,200 महीने की SIP से ₹7.4 करोड़ के आसपास का कॉर्पस बन सकता है। हालांकि, SIP मार्केट से जुड़ा निवेश है, तो रिटर्न कम या ज्यादा हो सकता है।

अनुमानित सालाना रिटर्न
30 साल तक मासिक SIP

8%करीब ₹52,500
10%करीब ₹32,700
12%करीब ₹21,200

पैसा कहां निवेश करें?

30 साल का समय है, तो रिटायरमेंट के लिए सिर्फ एक ही निवेश विकल्प पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। इक्विटी म्यूचुअल फंड, EPF, NPS और डेट निवेश जैसे विकल्पों को अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के हिसाब से पोर्टफोलियो में शामिल किया जा सकता है।

लंबी अवधि में इक्विटी म्यूचुअल फंड कॉर्पस बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। वहीं EPF और NPS रिटायरमेंट के लिए अलग आधार तैयार कर सकते हैं। डेट वाले निवेश पोर्टफोलियो के अपेक्षाकृत स्थिर हिस्से के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

कितना पैसा कहां लगाना है, इसका कोई एक फॉर्मूला नहीं है। 30 साल की उम्र में जोखिम लेने की क्षमता और रिटायरमेंट के ठीक पहले की स्थिति अलग हो सकती है। इसलिए समय के साथ निवेश का तरीका भी बदलना पड़ सकता है।

रिटायरमेंट से 5 साल पहले क्या करें?

रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर पूरा पैसा ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले निवेश में रखना जोखिम बढ़ा सकता है। मान लीजिए रिटायरमेंट से ठीक पहले शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ गई। उसी समय अगर आपको खर्च के लिए निवेश बेचना पड़ा, तो कॉर्पस पर ज्यादा दबाव पड़ सकता है।

इसलिए रिटायरमेंट के करीब आने पर अगले कुछ साल के खर्च के लिए कम जोखिम वाले और आसानी से उपलब्ध निवेशों में पर्याप्त रकम रखने पर विचार किया जा सकता है। इससे बाजार में गिरावट के दौरान तुरंत इक्विटी बेचने की जरूरत कम हो सकती है।

इस बात पर भी गौर करना जरूरी

अगर आपके पास EPF, NPS, पेंशन, किराये की इनकम या कोई दूसरी नियमित कमाई है, तो पूरा ₹7.4 करोड़ का कॉर्पस अकेले आपको तैयार नहीं करना होगा। दूसरी इनकम से रिटायरमेंट के बाद होने वाले खर्च का कुछ हिस्सा पूरा हो सकता है।

वहीं, मेडिकल खर्च और लंबी रिटायरमेंट को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए सिर्फ एक लक्ष्य बनाकर निवेश शुरू करना काफी नहीं है। हर कुछ साल में अपनी इनकम, खर्च, महंगाई और निवेश की समीक्षा करते रहना चाहिए।

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन जल्दी खत्म करके ब्याज का पैसा बचाना चाहते हैं? ये 5 तरीके मदद करेंगे

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन जल्दी खत्म करके ब्याज का पैसा बचाना चाहते हैं? ये 5 तरीके करेंगे आपकी मदद

Personal Loan EMI: पर्सनल लोन लेते समय EMI देखकर लगता है कि हर महीने एक तय रकम जाती रहेगी। और कुछ साल बाद लोन खत्म हो जाएगा। लेकिन अगर ब्याज का बोझ कम करना है और कर्ज जल्दी खत्म करना है, तो छोटी-छोटी प्लानिंग काफी फर्क डाल सकती है।

मान लीजिए आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 12% सालाना ब्याज पर 5 साल के लिए लिया है। इस लोन की EMI करीब ₹11,122 होगी। 60 महीने तक यही EMI देने पर कुल भुगतान करीब ₹6.67 लाख होगा। यानी करीब ₹1.67 लाख ब्याज में जाएगा।

1. पार्ट-पेमेंट करके मूलधन घटाएं

पर्सनल लोन जल्दी खत्म करने का सबसे सीधा तरीका पार्ट-पेमेंट है। इसमें आप अपनी नियमित EMI के अलावा एकमुश्त रकम देकर लोन का मूलधन कम करते हैं। मूलधन जितना कम होगा, आगे लगने वाला ब्याज भी उतना ही कम होगा।

इसे ₹5 लाख के उदाहरण से समझें। अगर 12 EMI चुकाने के बाद आप ₹1 लाख का पार्ट-पेमेंट करते हैं, तो उस समय करीब ₹4.22 लाख का मूलधन बाकी रहेगा। ₹1 लाख जमा करने के बाद यह घटकर करीब ₹3.22 लाख रह जाएगा।

2. पार्ट-पेमेंट के बाद EMI समान रखें

पार्ट-पेमेंट के बाद बैंक से यह समझना जरूरी है कि नई EMI और टेन्योर क्या होगा। अगर बैंक आपकी EMI करीब ₹11,122 ही रखता है और टेन्योर कम करता है, तो लोन जल्दी खत्म होगा।

ऊपर के उदाहरण में ₹1 लाख पार्ट-पेमेंट के बाद बाकी रकम करीब 35 महीने में चुक सकती है। यानी 5 साल का पूरा लोन करीब 47 महीने में खत्म हो सकता है। इस स्थिति में कुल ब्याज करीब ₹1.22 लाख रह सकता है, यानी करीब ₹45,000 की ब्याज बचत हो सकती है।

3. बोनस और इंसेंटिव से कर्ज घटाएं

बोनस, इंसेंटिव या किसी दूसरी जगह से मिली एकमुश्त रकम को पूरा खर्च करने के बजाय उसका कुछ हिस्सा लोन के मूलधन में लगाया जा सकता है। इससे लोन की बकाया रकम सीधे कम होती है।

उदाहरण के लिए, अगर आपको ₹50,000 का बोनस मिलता है और बैंक पार्ट-पेमेंट की अनुमति देता है, तो यह रकम मूलधन घटाने में इस्तेमाल की जा सकती है। लोन जितना शुरुआती दौर में कम होगा, आगे के ब्याज पर उतना ज्यादा असर पड़ सकता है।

4. साल में एक बार अतिरिक्त रकम जमा करें

हर किसी के पास ₹1 लाख जैसी बड़ी रकम एक साथ नहीं होती। ऐसे में साल में एक बार अपनी क्षमता के मुताबिक अतिरिक्त रकम लोन में जमा की जा सकती है।

मान लीजिए ₹5 लाख के लोन की EMI ₹11,122 है। अगर आप साल में एक बार करीब एक EMI जितनी अतिरिक्त रकम पार्ट-पेमेंट के तौर पर जमा करते हैं, तो मूलधन सामान्य EMI की तुलना में तेजी से घटेगा। इससे लोन की अवधि और कुल ब्याज दोनों कम हो सकते हैं।

5. फोरक्लोजर से पहले चार्ज जरूर देखें

लोन जल्दी खत्म करने का मतलब हमेशा यह नहीं है कि तुरंत पूरा बकाया चुकाकर फोरक्लोजर कर दिया जाए। पहले बैंक की शर्तें देखना जरूरी है। कुछ पर्सनल लोन में समय से पहले भुगतान पर प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज लग सकता है।

मान लीजिए आपके लोन पर ₹40,000 का ब्याज बचना है, लेकिन फोरक्लोजर के लिए बड़ा चार्ज देना पड़ रहा है। ऐसे में पहले दोनों रकम की तुलना करनी चाहिए। साथ ही लोन चुकाने के बाद आपके पास इमरजेंसी के लिए पर्याप्त पैसा बच रहा है या नहीं, यह भी देखना जरूरी है।

ब्याज पर कितनी बचत होगी?

अगर आपने ₹5 लाख का पर्सनल लोन 12% ब्याज पर 5 साल के लिए लिया है, तो इसकी EMI करीब ₹11,122 होगी। पूरा लोन 5 साल तक चलने पर करीब ₹1.67 लाख ब्याज देना पड़ेगा।

अब मान लीजिए आपने 12 महीने तक EMI चुकाने के बाद ₹1 लाख का पार्ट-पेमेंट कर दिया। इससे आपका बकाया मूलधन करीब ₹4.22 लाख से घटकर ₹3.22 लाख रह जाएगा।

अगर इसके बाद भी आपकी EMI करीब ₹11,122 रहती है, तो लोन करीब 35 महीने में खत्म हो सकता है। यानी पूरा लोन करीब 47 महीने में खत्म हो जाएगा। इस तरह करीब ₹45,000 ब्याज बच सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Zerodha पर ट्रेडिंग शुरू की, 45 मिनट में कमाए ₹12 हजार; फिर ऐसी लगी लत कि माता-पिता की बचत गंवाकर ₹38 लाख के कर्ज में डूबा टेक्नीशियन

शेयर बाजार में जल्दी पैसा कमाने का सपना कई लोगों को ट्रेडिंग की ओर खींचता है। शुरुआत में अगर कुछ मुनाफा मिल जाए, तो बाजार से कमाई का भरोसा और बढ़ जाता है। लेकिन कई बार यही उत्साह धीरे-धीरे ऐसी आदत में बदल जाता है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। सोशल मीडिया यूजर Hemdharpan ने अपने 35 वर्षीय दोस्त की ऐसी ही कहानी साझा की है।

2 लाख की सैलरी और 14 लाख की बचत

Hemdharpan के मुताबिक, उनका दोस्त एक IT प्रोफेशनल था और करीब 2 लाख रुपये महीने कमाता था। उसके पास 14 लाख रुपये की बचत थी। शादीशुदा होने के साथ उसका एक बच्चा भी था। यानी नौकरी, कमाई और सेविंग के मामले में उसकी जिंदगी काफी स्थिर थी।

करीब दो साल पहले एक सहकर्मी ने उसे शेयर बाजार में ट्रेडिंग के बारे में बताया। यहीं से उसकी जिंदगी का एक नया दौर शुरू हुआ।

45 मिनट में 12 हजार का मुनाफा

कहानी के मुताबिक, सहकर्मी ने लंच के दौरान अपना Zerodha अकाउंट दिखाया। उसने Nifty options की इंट्राडे ट्रेडिंग से करीब 45 मिनट में 12 हजार रुपये कमाए थे। यह देखकर टेकie को भी लगा कि बाजार में कम समय देकर अच्छी कमाई की जा सकती है।

शुरुआत में उसे सफलता भी मिली। उसने करीब दो घंटे में 18 हजार रुपये कमाए। इस कमाई ने उसका उत्साह और बढ़ा दिया।

फिर शुरू हुआ नुकसान का सिलसिला

दूसरे महीने बाजार ने उसे बड़ा झटका दिया। उसने कुछ ही मिनटों में करीब 50 हजार रुपये गंवा दिए। पोस्ट के मुताबिक, उसने समय पर stop-loss नहीं लगाया और नुकसान को स्वीकार करने के बजाय उसे वापस पाने की कोशिश शुरू कर दी।

उसने परिवार की बचत से 1 लाख रुपये बाजार में लगा दिए। इसके बाद वह नुकसान की भरपाई के लिए लगातार ट्रेड करने लगा। बताया गया कि वह एक दिन में 30-40 ट्रेड तक करने लगा था।

बचत खत्म हुई तो लिया कर्ज

2024 में शुरू हुई ट्रेडिंग का असर 2025 के मध्य तक दिखने लगा। उसकी करीब 14 लाख रुपये की बचत खत्म हो गई, लेकिन ट्रेडिंग नहीं रुकी। पोस्ट के अनुसार, वह परिवार से ट्रेडिंग छिपाने लगा और काम के बीच भी बाजार पर नजर रखता था।

बचत खत्म होने के बाद उसने तीन बैंकों से पर्सनल लोन लिया। कथित तौर पर उसने इन पैसों के लिए घर की मरम्मत का कारण बताया। बाद में इंस्टेंट लोन ऐप्स से भी पैसे लिए।

38 लाख का नुकसान सामने आया

2025 के आखिर में जब रिकवरी एजेंट घर पहुंचने लगे, तब परिवार को पूरी स्थिति का पता चला। पोस्ट के मुताबिक, 14 लाख रुपये की बचत खत्म होने के अलावा उस पर करीब 24 लाख रुपये का कर्ज भी था। यानी कुल नुकसान करीब 38 लाख रुपये बताया गया।

इसका असर परिवार पर भी पड़ा। बच्चे की स्कूल फीस बाउंस होने की बात सामने आई और उसकी पत्नी बच्चे को लेकर मायके चली गई।

अब कर्ज से निकलने की कोशिश

Hemdharpan के अनुसार, अब वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में जुटा है। उसने कार बेच दी है और लोन को संभालने के लिए restructuring plan अपनाया है। यह कहानी सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक व्यक्ति के अनुभव पर आधारित है। इससे यह जरूर सामने आता है कि ट्रेडिंग में लगातार नुकसान की भरपाई करने की कोशिश आर्थिक जोखिम को तेजी से बढ़ा सकती है।

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