Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए ठीक-ठाक संकेत नजर आ रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में हल्की बढ़त है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 1800 करोड़ की बिकवाली हुई है। डाओ फ्यूचर्स में भी हल्की बढ़त है। उधर कल US इंडेक्स मिले-जुले रहे। लेकिन एशिया में कमजोर कारोबार होता दिख रहा है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

अनुमान के आसपास रहे HCL टेक के नतीजे

दूसरी तिमाही में HLC टेक के नतीजे अनुमान के आसपास रहे। रेवेन्यू में तीन तो मुनाफे में 11% की बढ़त दिखी। मार्जिन का आंकड़ा उम्मीद से अच्छा रहा। Advanced AI से रेवेन्यू 29% बढ़कर 219 मिलियन डॉलर पर रही। कंपनी ने पूरे कारोबारी साल के लिए रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस का लोअर रेंज 1%-4% से बढ़ाकर 2.5%-4% कर दिया है।

RBL Bank के Q2 नतीजे अच्छे

दूसरी तिमाही में RBL Bank ने अच्छे नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का मुनाफा करीब तीन गुना हो गया है। ब्याज से होने वाली कमाई में 37 परसेंट का उछाल आया है। एसेट क्वालिटी में भी सुधार दिखा है।

ICICI प्रू लाइफ, टाटा एलेक्सी के नतीजे आज

आज वायदा में शामिल ICICI प्रूडेंशियल लाइफ और Tata elxsi के नतीजे आएंगे। दूसरी तिमाही में ICICI Pru life का annual premium equivalent यानी APE 18% बढ़ सकता है। वहीं VNB मार्जिन में भी सुधार दिख सकता है। वहीं टाटा Tata elxsi के मुनाफे में तीन परसेंट तो रेवेन्यू में दो परसेंट की बढ़त संभव है।

TVS ग्रुप में पारिवारिक विवाद

TVS ग्रुप में उत्तराधिकार प्लान पर विवाद शुरू हो गया है। परिवार ओनरशिप और मैनेजमेंट के अधिकारों पर आमने-सामने है। मां मल्लिका श्रीनिवासन और बेटी लक्ष्मी वेणु ने सेटलमेंट का प्रस्ताव खारिज करते हुए कहा है कि 2024 का फैमिली MOU कोई आर्थिक समझौता नहीं है। परिवार की सभी संपत्तियां कोई एक आदमी नहीं बांट सकता।

23 महीने के ऊपरी स्तर पर रिटेल महंगाई

रिटेल महंगाई 23 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई है। सितंबर में CPI महंगाई 4.83% से बढ़कर 5.54% पर रही है। खाने-पीने की चीजों के साथ ग्रामीण और शहरी महंगाई में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है।

कच्चे तेल में उबाल, 106 डॉलर के करीब

जियो पॉलिटिकल संकट गहराने से कच्चे तेल में उबाल आया है। इसके भाव 106 डॉलर पर पहुंच गए हैं। रुस के यूक्रेन के एनर्जी इंफ्रा पर हमले से कीमतों में उछाल आया है। हॉर्मूज संकट और हूती-सऊदी के बीच घमासान ने भी सेंटिमेंट खराब किए हैं।

मार्केट ओवरव्यू

पिछले सेशन में रिकवरी के बाद,12 अक्टूबर को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क पर फिर से बिकवाली का दबाव दिखा। IT, FMCG और फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट के बीच निफ्टी 22,300 के स्तर की ओर फिसल गया। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 547.65 अंक या 0.76 प्रतिशत गिरकर 71,924.68 पर और निफ्टी 157.10 अंक या 0.70 प्रतिशत गिरकर 22,363.35 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी बढ़त के साथ 22,415.50 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था,जो घरेलू इक्विटी बाजार के लिए सकारात्मक शुरुआत का संकेत है।

एशियाई बाजार

इस साल मार्केट के सबसे चर्चित सेक्टर में से एक,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों पर नतीजों के सीज़न से पहले फिर से दबाव बना है,जिससे एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट आई है।

दक्षिण कोरिया और जापान में शेयरों में गिरावट के कारण MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.9% गिर गया है और अगस्त के मध्य के बाद से अपने सबसे निचले स्तर पर बंद होने की राह पर है।

AI ट्रेड का पैमाना माने जाने वाले कोस्पी इंडेक्स में 4.8% तक की गिरावट आई है और यह जुलाई के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर बंद होने की राह पर है,क्योंकि चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों SK Hynix Inc. और Samsung Electronics Co. के शेयरों में 5% से ज़्यादा की गिरावट आई। टोक्यो में ट्रेडर्स के लंबे वीकेंड के बाद लौटने पर निक्केई 225 इंडेक्स में 2% की गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को नैस्डैक कंपोजिट गिरावट के साथ बंद हुआ। इसकी वजह सऊदी अरब के एक एयरपोर्ट पर हमले के बाद तेल की कीमतों में लगभग $2 प्रति बैरल की बढ़ोतरी रही।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 195.60 अंक या 0.38% बढ़कर 51,850.55 पर बंद हुआ। S&P 500 में 4.30 अंक या 0.06% की गिरावट आई और यह 7,807.24 पर बंद हुआ,जबकि नैस्डैक कंपोजिट 120.27 अंक या 0.44% गिर कर बंद हुआ।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

12 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट सेलर बने रहे और उन्होंने 1,700 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा देना जारी रखा और सेशन के दौरान 3,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर खरीदे।

 

 

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RBI Repo Rate Hike : आरबीआई गवर्नर ने कहा, ब्याज दरों में आगे भी कटौती की संभावना नहीं, इसमें अभी और बढ़ोतरी की संभावना

RBI Repo Rate Hike : भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने बुधवार को कहा कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक का अगला नीतिगत कदम या तो ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकता है या फिर दरों को बरकरार रखा जा सकता है। यह बदलाव महंगाई तथा अन्य आर्थिक स्थितियों में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा।

यह गाइडेंस तब आया है जब मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट को 5.25% से 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है और अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के रुख को ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है।

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि निकट भविष्य में “रेट में कटौती की कोई संभावना नहीं है” और आगे की पॉलिसी में हालात के हिसाब से या तो रेट बढ़ाए जाएंगे या फिर उन्हें जस का तस रखा जाएगा।

अक्टूबर में रेपो रेट में की गई यह बढ़ोतरी फरवरी 2023 के बाद RBI की ओर से रेपो रेट में पहली बढ़ोतरी है। उस समय MPC ने पॉलिसी रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 6.50% कर दिया गया था।

रुख में इस बदलाव का समर्थन MPC के छह में से चार सदस्यों ने किया, जबकि दो सदस्यों ने ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग'(सोच-समझकर सख्ती) की ओर बढ़ने के खिलाफ वोट दिया।

रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद, स्टैंडिंग डिपॉज़िट फैसिलिटी रेट को 5.25% पर एडजस्ट किया गया है, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट और बैंक रेट को बढ़ाकर 5.75% कर दिया गया है।

महंगाई बढ़ने का डर रहा हावी

संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि महंगाई का आउटलुक अब वैसा अनुकूल नहीं है जैसा पिछले साल था। कीमतों के दबाव को देखते हुए MPC मॉनेटरी पॉलिसी में बदलाव की जरूरत का आकलन कर रही है।

RBI ने FY27 के लिए कोर महंगाई का अनुमान 4.3% से बढ़ाकर 4.4% कर दिया है। मल्होत्रा ​​ने कहा कि FY27 की अगली तीन तिमाहियों में CPI महंगाई (रिटेल महंगाई) औसतन 5.8% रहने की उम्मीद है।

RBI गवर्नर ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी को सप्लाई शॉक के ‘सेकंड-राउंड’ असर (यानी सप्लाई में अचानक बदलाव से होने वाले बाद के असर) पर नजर रखनी होगी, भले ही शुरुआती सप्लाई-साइड महंगाई के असर से इन्हें अलग करना मुश्किल हो।

मल्होत्रा ​​ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी आंशिक रूप से ऐसे ‘सेकंड-राउंड’ असर को रोककर काम करती है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ब्याज दरों में बदलाव का असर इकॉनमी तक पहुंचने में समय लगता है।

दरें बढ़ाने का फैसला कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में फिर से आई अस्थिरता के माहौल में लिया गया है। बैठक से पहले, एनर्जी की बढ़ती लागत, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और घरेलू स्तर पर बढ़ती महंगाई के दबाव के कारण ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें मज़बूत हो गई थीं। अगस्त में रिटेल महंगाई दर 4.82% रही, जो लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के मीडियम टर्म टारगेट से ज्यादा है।

संजय मल्होत्रा ​​ने आगे कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते टकराव ने ग्लोबल इकोनॉमिक सेंटीमेंट को कमजोर किया है और फाइनेंशियल मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ाया है। उन्होंने ग्लोबल ट्रेड को लेकर बनी अनिश्चितता की ओर भी इशारा किया और कहा कि ग्लोबल महंगाई में तेजी से बढ़ोतरी की आशंका है। उन्होंने कहा कि सख्त मॉनेटरी पॉलिसी और जारी संघर्षों से ग्लोबल इकोनॉमी के लिए जोखिम पैदा हो रहे हैं।

 

 

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RBI MPC Meeting: फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ सकता है रेपो रेट, महंगाई बनी बड़ी वजह

RBI MPC Meeting: RBI की 21 लगातार MPC बैठकों में ब्याज दर नहीं बढ़ी है। अब 7 अक्टूबर की बैठक में तस्वीर बदल सकती है। माना जा रहा है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगा।

फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार होगा, जब RBI रेपो रेट बढ़ाएगा। हालांकि, बाजार में इसकी उम्मीद पहले से बनी हुई है। इसलिए असली नजर इस बात पर होगी कि RBI आगे कितनी बढ़ोतरी के संकेत देता है।

आगे कितनी बढ़ सकती हैं दरें?

Moneycontrol के 19 एक्सपर्ट्स के पोल में 15 ने 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। वहीं, चार एक्सपर्ट्स को दरों में कोई बदलाव की उम्मीद है।

IDFC First Bank की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता के मुताबिक, फरवरी तक रेपो रेट में कुल करीब 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में पहली बढ़ोतरी के बाद RBI का अगला इशारा बाजार के लिए ज्यादा अहम होगा।

महंगाई बढ़ने की चिंता

महंगाई RBI के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। पिछली समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5% रखा था।

अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई। जुलाई में यह 4.45% थी। अब कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से महंगाई पर और दबाव आ सकता है।

GDP ग्रोथ मजबूत, लेकिन आगे चुनौती

भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। इससे RBI को महंगाई पर फोकस करने की थोड़ी गुंजाइश मिलती है।

अधिकांश एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि RBI FY27 के लिए 6.7% GDP ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखेगा। हालांकि, महंगा कच्चा तेल और दुनिया में बढ़ती ब्याज दरें दूसरी छमाही में परेशानी बढ़ा सकती हैं।

बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा पैसा

बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त पैसा भी RBI के लिए बड़ा मुद्दा है। सितंबर में लिक्विडिटी सरप्लस करीब 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

अब यह घटकर करीब 4-6 लाख करोड़ रुपये रह गया है। 6 अक्टूबर को बैंकिंग सिस्टम में करीब 5.03 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लिक्विडिटी थी। RBI इसे कम करने के लिए OMO बिक्री और VRRR जैसे कदम उठा रहा है।

कच्चा तेल और रुपया भी चिंता

RBI के सामने बाहरी मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड हाल में करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी 5.2% तक चली गई। रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। वहीं, भारत की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.2% के ऊपर पहुंच गई है।

यानी इस बार बाजार सिर्फ 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी नहीं देखेगा। असली सवाल यह होगा कि RBI आगे कितनी दरें बढ़ा सकता है और महंगाई, ग्रोथ और रुपये के बीच संतुलन कैसे बनाएगा।

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RBI Repo Rate Hike: आपकी लोन EMI बढ़ सकती है, इकोनॉमिस्ट बोले- अब ब्याज दर बढ़ाएगा RBI

RBI Repo Rate Hike: पिछले कुछ हफ्तों से ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चर्चा तेज हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और दुनिया में चल रही भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में महंगाई को लेकर चिंता बढ़ रही है।

इसका असर आम आदमी की जेब पर भी पड़ सकता है। अगर RBI ब्याज दरें बढ़ाता है, तो खासकर फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन और दूसरे लोन की EMI बढ़ सकती है। यानी आने वाले समय में लोन लेना महंगा हो सकता है और पुराने लोन की EMI पर भी असर पड़ सकता है।

RBI कब बढ़ा सकता है ब्याज दर?

Moneycontrol ने 9 अर्थशास्त्रियों और ट्रेजरी प्रमुखों के बीच रायशुमारी कराई। ज्यादातर एक्सपर्ट्स ने दिसंबर तक ब्याज दर बढ़ने का अनुमान जताया है। कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि RBI अक्टूबर की पॉलिसी समीक्षा में ही पहली 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके बाद फरवरी 2027 में 25 बेसिस प्वाइंट की एक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट बढ़कर 5.75 प्रतिशत हो जाएगा।

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा, ‘अगर अगली MPC बैठक तक कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के संकेत मिलते हैं, तो इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। ऐसे में ब्याज दर बढ़ाने का फैसला दिसंबर के बजाय अक्टूबर में ही हो सकता है।’

महंगा हो सकता है आपका लोन

अगर RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो इसका असर बैंकों की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। इसका मतलब यह है कि फ्लोटिंग रेट पर चल रहे होम लोन जैसे कर्ज की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।

नए होम लोन और दूसरे फ्लोटिंग रेट वाले लोन पर भी ब्याज ज्यादा हो सकता है। इसलिए अगर आप आने वाले महीनों में घर खरीदने या बड़ा लोन लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो ब्याज दरों पर नजर रखना जरूरी होगा। हालांकि, EMI में कितना बदलाव होगा, यह बैंक की ब्याज दर, आपके बकाया लोन और बाकी अवधि पर निर्भर करेगा।

महंगाई ने बढ़ाई चिंता

महंगाई भी RBI के लिए चिंता का विषय बन रही है। अगस्त में CPI महंगाई दर 4.82 प्रतिशत रही। जुलाई में यह 4.45 प्रतिशत थी। बढ़ोतरी की बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों और ईंधन की महंगाई रही।

अभी महंगाई RBI की 2 से 6 प्रतिशत की तय सीमा में है। लेकिन चिंता यह है कि अगर कच्चा तेल महंगा बना रहा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इसका असर बाकी चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

SBI के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि CPI महंगाई 6.5 प्रतिशत के स्तर को पार कर सकती है। हालांकि, 2027 की शुरुआत में इसके 6 प्रतिशत से नीचे आने की उम्मीद है। उनका मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें निकट भविष्य में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रह सकती हैं।

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Retail Inflation: 8 महीने के हाई पर महंगाई, खाने-पीने की चीजों के भाव ने बढ़ाई परेशानी

Retail Inflation: खुदरा महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई। जुलाई में यह 4.45% थी। खाने-पीने की चीजों के महंगे होने से लोगों के घर का बजट प्रभावित हुआ है। महंगाई अब RBI के 4% के लक्ष्य से भी ऊपर है।

लगातार तीसरे महीने RBI के लक्ष्य से ऊपर

CPI यानी खुदरा महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही। मई में यह 3.93% थी। जून में 4.38% और जुलाई में 4.45% हो गई। अगस्त का 4.82% आंकड़ा 2024 बेस ईयर वाली नई CPI सीरीज में आठ महीने का सबसे ऊंचा स्तर है।

RBI के लिए क्यों अहम है ये आंकड़ा?

अगस्त का महंगाई आंकड़ा RBI की अगली पॉलिसी बैठक से पहले आया आखिरी रिटेल इन्फ्लेशन डेटा है। Monetary Policy Committee यानी MPC की बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक होगी। सितंबर की महंगाई का आंकड़ा 12 अक्टूबर को आएगा।

अगस्त की बैठक में MPC ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा था। पॉलिसी रुख भी न्यूट्रल रखा गया था। अब आगे के फैसले में महंगाई और आर्थिक ग्रोथ दोनों पर नजर रहेगी।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई चिंता

अगस्त में खाने-पीने की चीजें जुलाई के मुकाबले और महंगी हुईं। Consumer Food Price Index यानी CFPI आधारित फूड इन्फ्लेशन 5.95% रहा। जुलाई में यह 5.52% था। गांवों में फूड इन्फ्लेशन 6.13% और शहरों में 5.64% रहा।

गांवों में महंगाई ज्यादा रही

ग्रामीण इलाकों में भी महंगाई बढ़ी है। अगस्त में ग्रामीण CPI महंगाई 5.23% रही। जुलाई में यह 4.84% थी। शहरी महंगाई भी 3.96% से बढ़कर 4.31% हो गई।

प्याज, लहसुन और अदरक ने बढ़ाई मुश्किल

खाने-पीने की चीजों में भी महंगाई का असर अलग-अलग रहा। प्याज की कीमतों में एक साल में 48.27% की बढ़ोतरी हुई। जुलाई में यह 22.54% थी। लहसुन की महंगाई 43.60% रही। अदरक की महंगाई तो 73.82% तक पहुंच गई।

हालांकि कुछ सब्जियों ने राहत दी। टमाटर की कीमतें सालाना आधार पर 31.09% कम रहीं। आलू भी 13.14% सस्ता रहा।

सर्विसेज भी हुईं महंगी

महंगाई का दबाव सिर्फ खाने की चीजों तक सीमित नहीं रहा। अगस्त में रेस्टोरेंट और एकोमोडेशन सर्विसेज की महंगाई 8.38% रही। ट्रांसपोर्ट से जुड़ी महंगाई 4.60% रही। पर्सनल केयर, सोशल प्रोटेक्शन और दूसरी वस्तुओं एवं सेवाओं की कैटेगरी में महंगाई 15.17% रही।

सोने-चांदी की कीमतों का भी असर

कीमती धातुओं की बढ़ती कीमतों ने भी कुछ कैटेगरी में महंगाई बढ़ाई। चांदी की ज्वेलरी की महंगाई 107.11% रही। वहीं सोना, हीरा और प्लेटिनम ज्वेलरी की कीमतें एक साल पहले के मुकाबले 35.53% ज्यादा रहीं।

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Retail Inflation : लगातार चौथे महीने महंगाई बढ़ी, रिटेल इंफ्लेशन जुलाई में 4.45% हुई; RBI के लिए बढ़ेगी मुश्किल

Retail Inflation : रिटेल महंगाई जुलाई में लगातार चौथे महीने बढ़ी है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई सालाना आधार पर बढ़कर 4.45% हो गई। जून में यह 4.38% थी। खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका बड़ा कारण रही।

जुलाई में महंगाई लगातार दूसरे महीने RBI के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही। अप्रैल में महंगाई 3.48% थी। इसके बाद मई में 3.93%, जून में 4.38% और जुलाई में 4.45% हो गई। यानी अप्रैल से अब तक महंगाई करीब 1 प्रतिशत अंक बढ़ चुकी है।

खाने-पीने की चीजों ने बढ़ाई महंगाई

जुलाई में Consumer Food Price Index (CFPI) आधारित महंगाई 5.52% रही। जून में यह 5.32% थी। ग्रामीण इलाकों में खाने-पीने की महंगाई ज्यादा रही। यहां यह 5.79% रही। शहरी इलाकों में यह 5.05% थी।

इसी वजह से आने वाले महीनों में भी महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ICRA के मुताबिक, अगस्त में रिटेल महंगाई 4.7% तक पहुंच सकती है।

गांवों में महंगाई का ज्यादा दबाव

ग्रामीण भारत में कुल रिटेल महंगाई जुलाई में 4.84% रही। जून में यह 4.74% थी। वहीं, शहरी महंगाई 3.93% से मामूली बढ़कर 3.96% हो गई। खाने-पीने की चीजों के अलावा कपड़े और जूते भी ग्रामीण इलाकों में ज्यादा महंगे हुए। ग्रामीण क्षेत्रों में इनकी महंगाई 3.97% रही। शहरी क्षेत्रों में यह 2.41% थी।

कुछ सेवाओं की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई। जुलाई में रेस्टोरेंट और होटल से जुड़ी सेवाओं की महंगाई 7.72% रही। ट्रांसपोर्ट की महंगाई 4.43% और पर्सनल केयर, सोशल प्रोटेक्शन, अन्य सेवाओं की महंगाई 14.77% रही।

अदरक, लहसुन और प्याज ने रुलाया

रसोई में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें जुलाई में काफी महंगी हुईं। अदरक की कीमतों में सालाना आधार पर 83.62% की बढ़ोतरी हुई। जून में यह 50.41% थी। लहसुन की महंगाई भी 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई। प्याज की कीमतें भी तेजी से बढ़ीं। प्याज की महंगाई जून के 4.73% से बढ़कर जुलाई में 22.54% हो गई।

हालांकि, कुछ सब्जियों ने राहत दी। जुलाई में टमाटर की कीमत सालाना आधार पर 4.59% घटी। जून में टमाटर 31.92% महंगा था। आलू की कीमत 16.56% और भिंडी की कीमत 5.52% घटी।

सोना-चांदी भी महंगे

महंगाई के आंकड़ों में कीमती धातुओं की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दिखी। जुलाई में चांदी के आभूषणों की कीमत सालाना आधार पर 109.84% बढ़ी। सोने, हीरे और प्लैटिनम के आभूषण भी महंगे हुए। इनकी कीमतों में क्रमशः 32.98% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

आगे ब्याज दरों पर क्या होगा?

महंगाई बढ़ने से RBI के लिए ब्याज दरों को लेकर फैसला थोड़ा मुश्किल हो सकता है। RBI ने हाल में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा था। कोटक महिंद्रा बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट उपासना भारद्वाज के मुताबिक, बारिश, कच्चे तेल की कीमत और इनपुट लागत पर नजर रखना जरूरी होगा। उनका मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही से महंगाई 5% के ऊपर जा सकती है।

ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर ने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में औसत CPI महंगाई करीब 5% रह सकती है। पश्चिम एशिया में तनाव और मानसून इसके लिए बड़े जोखिम हैं। अगर महंगाई का दबाव दूसरी चीजों तक भी फैलता है, तो दिसंबर 2026 की बैठक में RBI ब्याज दर बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

तेलंगाना में सबसे ज्यादा महंगाई

राज्यों की बात करें तो जुलाई में तेलंगाना में महंगाई सबसे ज्यादा 6.32% रही। इसके बाद आंध्र प्रदेश में 5.72% और तमिलनाडु में 5.44% रही। वहीं, मिजोरम में महंगाई सबसे कम 1.84% रही। मेघालय में यह 2.31% और त्रिपुरा में 2.32% रही। दिल्ली में भी महंगाई अपेक्षाकृत कम 2.68% रही।

कुल मिलाकर, जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि महंगाई का दबाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। अभी इसकी बड़ी वजह खाने-पीने की चीजें और कुछ सप्लाई से जुड़ी समस्याएं हैं। अगर यह दबाव आगे भी बना रहता है, तो इसका असर RBI की ब्याज दरों की अगली रणनीति पर पड़ सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।