Bond Investment: PB Money पर खरीद सकेंगे बॉन्ड्स, मिल गया SEBI से लाइसेंस

पीबी मनी (PB Money) को मार्केट रेगुलेटर सेबी से ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर (OBPP) के रूप में काम करने का लाइसेंस मिल गया है। यह पैसाबाजार (Paisabazaar) के साथ रणनीतिक साझेदारी वाला एक निवेश प्लेटफॉर्म है। अब इसे ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म का लाइसेंस मिला है तो कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों को बॉन्ड में निवेश करने की सुविधा दे सकेगी। बॉन्ड्स फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं, जिसमें उनके टर्म्स के आधार पर ब्याज मिलता है। हालांकि इसमें हर मामले में रिटर्न की गारंटी नहीं होती है बल्कि कुछ रिस्क भी होते हैं। इसमें निवेशकों को बॉन्ड इश्यू करने वाले यानी इश्यूअर के डिफॉल्ट होने, मार्केट में ब्याज दरों में बदलाव और लिक्विडिटी से जुड़ी चिंताओं जैसे रिस्क हैं।

PB Money को लाइसेंस का क्या है मतलब?

कंपनी ने 14 अक्टूबर को जो बयान जारी किया है, उसके मुताबिक सेबी से लाइसेंस मिलने के बाद पीबी मनी बॉन्ड इंवेस्टमेंट के पूरे प्रोसेस को ऑपरेट कर सकेगी। इससे कंपनी निवेशकों का रजिस्ट्रेशनस केवाईसी वेरिफिकेशन, बॉन्ड डिस्कवरी, ऑर्डर प्लेसमेंट, पेमेंट कोऑर्डिनेशन, और पोस्ट-इंवेस्टमेंट सर्विसिंग ऑफर कर सकेगी। साथ ही निवेशक प्लेटफॉर्म पर यील्ड यानी रिटर्न, क्रेडिट रेटिंग और इंवेस्टमेंट अमाउंट जैसे मानकों के आधार पर बॉन्ड तलाश सकेंगे। इससे उन्हें उपलब्ध विकल्पों की तुलना करने में मदद मिलेगी।

कब से शुरू कर सकेंगे बॉन्ड्स में निवेश

घरेलू स्टॉक मार्केट में लिस्टेड पीबी फिनटेक (PB Fintech) की पैसाबाजार के निवेश प्लेटफॉर्म पीबी मनी को बॉन्ड प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करने का लाइसेंस मिला है। पीबी मनी के डायरेक्टर और पैसाबाजार के सीईओ संतोष अग्रवाल का कहना है कि इस लाइसेंस से बॉन्ड्स में निवेश आसान होगा और खुदरा निवेशकों की फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स तक पहुंच बढ़ेगी। कंपनी को यह लाइसेंस ऐसे समय में मिला है जब पीबी मनी डिजिटल माध्यमों से अपने निवेश विकल्पों का विस्तार करने की योजना बना रही है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि इस लाइसेंस के तहत प्लेटफॉर्म पर निवेश की सुविधा कब से शुरू होगी, या शुरुआत में कौन-से बॉन्ड उपलब्ध होंगे।

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Market Technicals : LKP सिक्योरिटीज के रूपक डे से जानें कैसी रह सकती है बाजार की चाल, क्या हो कमाई की रणनीति

Market Technicals : 14 अक्टूबर को निफ्टी में 99 अंक यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22,623 पर बंद हुआ,जबकि बैंक निफ्टी 165 अंक यानी 0.30 प्रतिशत गिरकर 55,316 पर आ गया। बेंचमार्क सूचकांकों में कमजोरी के बावजूद, NSE पर मार्केट ब्रेड्थ पॉजिटिव रही। यहां 1,421 शेयरों में गिरावट के मुकाबले लगभग 1,850 शेयरों में तेजी देखी गई। अब सवाल यह है कि आज कैसी रह सकती है बाजार की चाल और इंडेक्स में क्या हो कमाई की रणनीति। इस अपनी राय साझा कर रहे हैं LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे।

निफ्टी पर रणनीति

रूपक डे ने कहा कि 30-मिनट के चार्ट पर निफ्टी को 200SMA के स्तर पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा, जिसके बाद इसमें भारी गिरावट देखी गई। 30-मिनट के चार्ट पर RSI अभी भी ‘बेयरिश क्रॉसओवर’ की स्थिति में है। इसके अलावा, डेली RSI में ‘हिडन नेगेटिव डाइवर्जेंस’ बना है, जो बाजार में अंदरूनी कमजोरी का संकेत देता है।

हालांकि हालिया रिकवरी अच्छी रही है और इसमें मुख्य रूप से बैंकिंग और IT सेक्टर का योगदान रहा है,लेकिन निफ्टी या किसी अन्य प्रमुख इंडेक्स ने अभी तक किसी ‘रिवर्सल’ (रुझान में बदलाव) की पुष्टि नहीं की है। इसलिए, हम मौजूदा तेजी को एक ‘रिलीफ रैली’ (राहत भरी तेजी) के रूप में ही देख रहे हैं, न कि किसी लंबे समय तक चलने वाले ‘अपट्रेंड’ (तेजी के दौर) की शुरुआत के रूप में।

ऊपर की तरफ, 22,650 और 22,800 के स्तर पर रेजिस्टेंस है। नीचे की तरफ,22,500 पर तत्काल सपोर्ट है। यदि यह स्तर टूटता है,तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है,जिससे बाजार में तेज गिरावट आ सकती है।

अहम रेजिस्टेंस: 22,850, 23,000

अहम सपोर्ट: 22,500, 22,300

रणनीति: 19 अक्टूबर की एक्सपायरी वाली निफ्टी 22,500 PE को लगभग 90 रुपये पर खरीदें। इसमें 60 रुपये का स्टॉप-लॉस और 140 रुपये का टारगेट रखें।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

रूपक डे का कहना है कि डेली चार्ट पर बैंकिंग इंडेक्स बैंक निफ्टी को 20EMA के स्तर पर रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा और यह थोड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। आवरली चार्ट पर RSI में ‘बेयरिश क्रॉसओवर’ हुआ है, जो तेजी के रुझान के कमजोर पड़ने का शुरुआती संकेत है। इसके अलावा,आवरली चार्ट पर इंडेक्स अभी भी 200SMA के नीचे ट्रेड कर रहा है, जिससे पता चलता है कि निकट अवधि का रुझान दबाव में बना हुआ है।

बैंक निफ्टी के लिए 55,200 के स्तर पर तत्काल सपोर्ट मौजूद है। अगर इंडेक्स इस स्तर के नीचे टूटता है, तो इससे नई बिकवाली का दबाव बन सकता है, जिससे इंडेक्स 54,900 और 54,400 के स्तर तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, 55,800 के स्तर पर रेजिस्टेंस है।

अहम रेजिस्टेंस: 55,800

अहम सपोर्ट: 54,900, 54,400

रणनीति: बैंक निफ्टी अक्टूबर 54,900 PE को लगभग 400 रुपये पर खरीदें। इसमें 300 रुपये का स्टॉप-लॉस और 560 रुपये का टारगेट रखें।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Suzlon Energy Share Price: ये 6 बातें तय करेंगी शेयरों की चाल, समझ लें सुजलॉन में निवेश से पहले

Suzlon Energy Share Price: 8 अक्टूबर को एक साल के निचले स्तर पर आने के बाद से विंट टर्बाईन बनाने वाली सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने शानदार वापसी की है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल के बुलिश रुझान से इसे और सपोर्ट मिला और यह 3% से अधिक उछल पड़ा। मोतीलाल ओसवाल ने ₹65 के टारगेट प्राइस के साथ इसकी खरीदारी की रेटिंग को बरकरार रखा है। ओवरऑल इसे कवर करने वाले 12 एनालिस्ट्स में से 10 ने इसे खरीदारी और 2 ने होल्ड रेटिंग दी है। किसी भी एनालिस्ट ने इसे बेचने की सलाह नहीं दी है। अब शेयरों की बात करें तो फिलहाल बीएसई पर यह 1.84% की बढ़त के साथ ₹38.27 पर है। इंट्रा-डे में यह 3.14% उछलकर ₹38.76 तक पहुंच गया था।

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तीन महीने में सुजलॉन एनर्जी के शेयर 31% नीचे आए। इस गिरावट के साथ अब यह वित्त वर्ष 2028 की प्रति शेयर कमाई (EPS) के मुकाबले 17.5 गुना पर है जोकि इसके एक साल के औसत फारवर्ड P/E से करीब 20% डिस्काउंट पर है। ऐसे में सुजलॉन का शेयरों का वैल्यूएशन काफी आकर्षक हो गया। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक सुजलॉन की कमाई वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में अधिक होती रही है और कंपनी के सालाना EBITDA में इसकी 60-65% हिस्सेदारी रहती है। ऐसे में इस बार भी वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में ऐसी ही मजबूती के आसार हैं क्योंकि डिलीवरी पहली छमाही में 1.2 गीगावाट से बढ़कर दूसरी छमाही में 2.1 गीगावाट पहुंच सकती है।

जून तिमाही के आखिरी में सुजलॉन एनर्जी की ऑर्डर बुक 5.9 GW थी, जिससे वित्त वर्ष 2028 की तीसरी तिमाही तक डिलीवरी की तस्वीर साफ दिख रही है। ब्रोकरेज फर्म को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-2028 के दौरान सुजलॉन एनर्जी का EBITDA सालाना 22% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़ेगा।

इस वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में देश की विंड कैपेसिटी 3 गीगावाट बढ़ी और ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक अब तक दूसरी छमाही में पहली की तुलना में डेढ़ गुना इंस्टॉलेशन होता रहा है तो इस बार दूसरी छमाही में करीब 4.5 गीगावाट के इंस्टॉलेशन की उम्मीद है जोकि सुजलॉन जैसी विंड टर्बाईन बनाने वाली कंपनियों के लिए पॉजिटिव है। सरकार ने इस वित्त वर्ष 2027 में 7.5–8 GW नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ने का लक्ष्य तय किया हुआ है।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि शाम के समय बिजली की बढ़ती मांग से विंड-सोलर हाइब्रिड और FDRE (फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी) प्रोजेक्ट्स के जरिए विंड कैपेसिटी बढ़ोतरी को सपोर्ट मिल सकता है और यह सुजलॉन एनर्जी के लिए पॉजिटिव है।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन एनर्जी को तीन वजहों- DevCo को अच्छे रिस्पांस, निर्यात और पुराने टर्बाईनों को बदलने के मौके से मजबूत सपोर्ट मिल सकता है। डेवको मॉडल की बात करें तो इस वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में ही 600 MW से अधिक के ऑर्डर मिले, जो कुल ऑर्डर का 60% हिस्सा हैं।

मोतीलाल ओसवाल के मुताबिक सुजलॉन को सरकार के स्थानीय प्रोत्साहन से मजबूत सपोर्ट मिल रहा है।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

सुजलॉन एनर्जी के शेयरों ने निवेशकों को तगड़ा शॉक दिया है। पिछले साल 6 नवंबर, 2025 को बीएसई पर यह ₹61.45 के भाव पर था, जो इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 11 महीने में यह 40.93% टूटकर 8 अक्टूबर 2026 को यह एक साल के निचले स्तर ₹36.30 पर आ गया।

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Jio IPO: कम हो रहा कर्ज का बोझ, आईपीओ से पहले तेजी से हो रहा कैश जेनेरेट

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ लाने की तैयारियों में जुटी है। उससे पहले कंपनी की सेहत काफी मजबूत हुई है और यह अधिक नगदी जेनेरेट कर रही है तो कर्ज पर इसकी अपनी निर्भरता भी कम हो रही है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का नेट लेवरेज रेश्यो वित्त वर्ष 2024 में 0.88 गुना से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 0.36 गुना रह गया। इससे कंपनी को वित्तीय फैसले लेने में अधिक सहूलियत मिली है। जियो का लक्ष्य अपनी मुनाफे वाली ग्रोथ को आगे बढ़ाने का है। आईपीओ के तहत नए शेयर जारी करके जुटाए गए पैसों का इस्तेमाल कंपनी रिलायंस जियो इंफोकॉम का कर्ज हल्का करने और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों में करेगी।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

जियो प्लेटफॉर्म्स का यह आईपीओ ऐसे समय में आ रहा है, जब इसका फोकस नेटवर्क का विस्तार करने और नए ग्राहक जोड़ने से हटकर पिछले एक दशक में बनाए गए इंफ्रास्ट्रक्चर से अधिक कमाई करने पर है। इसका मतलब हुआ कि कंपनी अपने मौजूदा ग्राहकों से कमाई बढ़ाने के साथ-साथ मोबाइल कनेक्टिविटी के अलावा दूसरे कारोबारों को भी डेवलप करने पर फोकस कर रही है।

एंबिट कैपिटल रिसर्च के एनालिस्ट विवेकानंद एस का कहना है कि आईपीओ से जियो की वित्तीय सेहत मजबूत होने की उम्मीद है क्योंकि इसके कैपिटल स्ट्रक्चर अधिक कंजर्वेटिव हो जाएगा। उनका कहना है कि अब अगले चरण की ग्रोथ में कंपनी का फोकस कमाई बढ़ाने पर होगा तो कैपिटल एक्सपेंडिचर पर अधिक कंट्रोल दिख सकता है।

कैसी है Jio Platforms की सेहत

जियो प्लेटफॉर्म्स के कारोबारी सेहत की बात करें तो ऑपरेशंस से इसका रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 में ₹1.10 लाख करोड़ से वित्त वर्ष 2026 में ₹1.47 लाख करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी का शुद्ध मुनाफा भी ₹21,423 करोड़ से बढ़कर ₹30,049 करोड़ हो गया। साथ ही अहम बात ये है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर के बाद कंपनी की नगदी वित्त वर्ष 2024 में ₹1,449 करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹42,071 करोड़ हो गई, जिससे इसके सामने भविष्य में निवेश करने और कर्ज हल्का करने की गुंजाइश बढ़ी है।

इस दौरान कंपनी का ARPU यानी प्रति यूजर औसतन मंथली रेवेन्यू ₹181.7 से ₹214 पर पहुंच गया तो प्रति यूजर मासिक डेटा खपत 28.7 GB से बढ़कर 42.3 GB हो गई। विवेकानंद का कहना है कि ग्राहक अनलिमिटेड डेटा और सस्ती सेवाओं का भरपूर फायदा उठा रहे हैं, जिससे कंपनी को कस्टमर सरप्लस के रूप में काफी फायदा मिल रहा है।

जियो ने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़े निवेश और आक्रामक प्राइसिंग के जरिए देश के मोबाइल मार्केट को बदल दिया, जिससे कॉम्पिटिटर्स को भी ऐसा ही करना पड़ा। हालांकि अब टेलीकॉम इंडस्ट्री को अपनी सर्विस से ज्यादा रेवेन्यू कमाने की जरूरत है। कंपनी ने मोबाइल सर्विस के अलावा एक एंड-टू-एंड 5जी स्टैक डेवलप किया है जिसमें कोर नेटवर्क टेक्नोलॉजी, रेडियो इक्विपमेंट और नेटवर्क सॉफ्टवेयर शामिल हैं। मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी यूनिट्स ने 6,817 पेटेंट एप्लीकेशन फाइल किए थे, जिनमें से 1,009 को वैश्विक मंजूरी मिल चुकी थी। जियो ने अपना प्री-6G स्टैक और Giga MIMO रेडियो भी डेवलप किया है, जिसे कंपनी ने पिछले हफ्ते नई दिल्ली में इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिखाया था।

जियो अपने होम ब्रॉडबैंड बिजनेस का भी विस्तार कर रही है। आईपीओ के ड्राफ्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के आखिरी तक उसके पास 2.71 करोड़ फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कस्टमर थे, जिससे उसका मार्केट शेयर 42.6% हो गया।

कंपनी की योजना पार्टनरशिप और मैनेज्ड-सर्विस अरेंजमेंट के जरिए अपनी खास नेटवर्क टेक्नोलॉजी को विदेशी टेलीकॉम ऑपरेटर्स तक पहुंचाने की भी है। इसके सफल होने पर भारतीय ऑपरेशन्स के अलावा कंपनी के लिए रेवेन्यू का एक और जरिया बन सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

RBI MPC Meeting: फरवरी 2023 के बाद पहली बार बढ़ सकता है रेपो रेट, महंगाई बनी बड़ी वजह

RBI MPC Meeting: RBI की 21 लगातार MPC बैठकों में ब्याज दर नहीं बढ़ी है। अब 7 अक्टूबर की बैठक में तस्वीर बदल सकती है। माना जा रहा है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसा हुआ तो रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगा।

फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार होगा, जब RBI रेपो रेट बढ़ाएगा। हालांकि, बाजार में इसकी उम्मीद पहले से बनी हुई है। इसलिए असली नजर इस बात पर होगी कि RBI आगे कितनी बढ़ोतरी के संकेत देता है।

आगे कितनी बढ़ सकती हैं दरें?

Moneycontrol के 19 एक्सपर्ट्स के पोल में 15 ने 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। वहीं, चार एक्सपर्ट्स को दरों में कोई बदलाव की उम्मीद है।

IDFC First Bank की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेनगुप्ता के मुताबिक, फरवरी तक रेपो रेट में कुल करीब 75 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में पहली बढ़ोतरी के बाद RBI का अगला इशारा बाजार के लिए ज्यादा अहम होगा।

महंगाई बढ़ने की चिंता

महंगाई RBI के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। पिछली समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने FY27 के लिए CPI महंगाई का अनुमान 5% रखा था।

अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई। जुलाई में यह 4.45% थी। अब कच्चे तेल और दूसरी कमोडिटी की बढ़ती कीमतों से महंगाई पर और दबाव आ सकता है।

GDP ग्रोथ मजबूत, लेकिन आगे चुनौती

भारतीय अर्थव्यवस्था ने पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। इससे RBI को महंगाई पर फोकस करने की थोड़ी गुंजाइश मिलती है।

अधिकांश एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि RBI FY27 के लिए 6.7% GDP ग्रोथ का अनुमान बरकरार रखेगा। हालांकि, महंगा कच्चा तेल और दुनिया में बढ़ती ब्याज दरें दूसरी छमाही में परेशानी बढ़ा सकती हैं।

बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा पैसा

बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त पैसा भी RBI के लिए बड़ा मुद्दा है। सितंबर में लिक्विडिटी सरप्लस करीब 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था।

अब यह घटकर करीब 4-6 लाख करोड़ रुपये रह गया है। 6 अक्टूबर को बैंकिंग सिस्टम में करीब 5.03 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त लिक्विडिटी थी। RBI इसे कम करने के लिए OMO बिक्री और VRRR जैसे कदम उठा रहा है।

कच्चा तेल और रुपया भी चिंता

RBI के सामने बाहरी मोर्चे पर भी मुश्किलें बढ़ी हैं। ब्रेंट क्रूड हाल में करीब 107 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड भी 5.2% तक चली गई। रुपया 96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया है। वहीं, भारत की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7.2% के ऊपर पहुंच गई है।

यानी इस बार बाजार सिर्फ 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी नहीं देखेगा। असली सवाल यह होगा कि RBI आगे कितनी दरें बढ़ा सकता है और महंगाई, ग्रोथ और रुपये के बीच संतुलन कैसे बनाएगा।

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FD interest calculator: यहां FD पर मिल रहा 8.50% तक ब्याज, 5 लाख की FD 5 साल बाद कितनी होगी? समझिए पूरा हिसाब

FD interest calculator: शेयर बाजारों में गिरावट ने एक बार फिर निवेशकों को बैंक एफडी के बारे में सोचने को मजबूर कर दिया है। बैंक में पैसा रखना सुरक्षित है। रिटर्न की गारंटी है। निवेश करने के वक्त पता चल जाता है कि कुछ साल बाद निकालने पर पैसा कितना बढ़कर मिलेगा। अगर बात बात सीनियर सिटीजंस की हो तो सोने पर सुहागा। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर बैंक सीनियर सिटीजंस को सामान्य डिपॉजिटर्स से ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर करते है।

सवाल है कि अगर कोई सीनियर सिटीजंस बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट 5 लाख रुपये रखता है तो 5 साल बाद उसे कुल कितने पैसे मिलेंगे? इस सवाल का जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि आप पैसा किस बैंक में रखते हैं और उसका सालाना इंटरेस्ट रेट क्या है। स्मॉल फाइनेंस बैंकों का इंटरेस्ट रेट प्राइवेट सेक्टर और सरकारी बैंकों के इंटरेस्ट रेट से ज्यादा है। ऐसे में उनमें पैसा रखना फायदेमंद हैं। स्मॉल फाइनेंस बैंक में पैसा रखना पूरी तरह सुरक्षित है।

पैसाबाजार डॉट कॉम की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 5 साल की एफडी पर सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक का है।

नीचे अलग-अलग स्मॉल फाइनेंस बैंकों के पांच साल के इंटरेस्ट रेट्स दिए गए हैं।

Suryoday Small Finance Bank 5 साल के एफडी पर 8.5 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Jana Small Finance Bank 5 साल के एफडी पर 7.77 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

AU Small Finance Bank 5 साल के एफडी पर 7.25 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Equitas Small Finance Bank 5 साल के एफडी पर 7.50 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

ESAF Small Finance Bank 5 साल के एफडी पर 6.25 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Ujjivan Small Finance Bank 5 साल के एफडी पर 7.70 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

सरकारी बैंक भी 5 साल के फिक्स्ड डिपॉजिट पर अट्रैक्टिव इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहे हैं। सरकारी बैंकों के इंटरेस्ट रेट की जानकारी नीचे दी गई है।

Bank of Baroda सीनियर सिटीजंस को पांच साल के एफडी पर 6.90 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Bank of India सीनियर सिटीजंस को पांच साल के एफडी पर 6.75 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Bank of Maharashtra सीनियर सिटीजंस को पांच साल के एफडी पर 5.50 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Canara Bank सीनियर सिटीजंस को पांच साल के एफडी पर 6.75 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Central Bank of India सीनियर सिटीजंस को पांच साल के एफडी पर 6.50 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Indian Bank सीनियर सिटीजंस को पांच साल के एफडी पर 6.50 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

State Bank of India सीनियर सिटीजंस को पांच साल के एफडी पर 7.05 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Punjab National Bank सीनियर सिटीजंस को पांच साल के एफडी पर 6.45 इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

प्राइवेट बैंक 5 साल के एफडी पर सीनियर सिटीजंस को निम्नलिखित इंटरेस्ट रेट्स ऑफर कर रहे हैं:

Axis Bank 5 साल के एफडी पर 7.25 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Bandhan Bank 5 साल के एफडी पर 6.60 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

HDFC Bank 5 साल के एफडी पर 6.90 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Federal Bank 5 साल के एफडी पर 6.90 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

ICICI Bank 5 साल के एफडी पर 6.90 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

IDBI Bank 5 साल के एफडी पर 7.75 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

IDFC FIRST Bank 5 साल के एफडी पर 7.00 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

Kotak Mahindra Bank 5 साल के एफडी पर 7.75 फीसदी इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है।

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सीनियर सिटीजंस को 5 लाख के एफडी पर 5 साल बाद कितना मिलेगा?

सीनियर सिटीजंस अपनी सुविधा के हिसाब से बैंक का चुनाव कर सकते हैं। लेकिन, उन्हें सबसे ज्यादा रिटर्न सूर्योंदय स्मॉल फाइनेंस बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट करने पर मिलेगा। अगर वे 5 लाख रुपये 5 साल के लिए इस बैंक में डिपॉजिट करते हैं तो उन्हें एफडी मैच्योर करने पर 7,61,397 रुपये मिलेंगे। इसमें मूलधन का 5 लाख रुपये शामिल है। इसका मतलब है कि सीनियर सिटीजंस को 5 लाख रुपये पर पांच साल में कुल 2,61,397 रुपये इंटरेस्ट के रूप में मिलेंगे।

FD Monthly Income: ₹10 लाख की FD से हर महीने कितनी कमाई होगी? समझिए ब्याज का पूरा कैलकुलेशन

FD Monthly Income: अगर आपके पास ₹10 लाख की एकमुश्त रकम है और आप इससे हर महीने एक तय इनकम चाहते हैं, तो FD एक विकल्प हो सकती है। इसमें आपकी मूल रकम बैंक में जमा रहती है और उस पर ब्याज मिलता है।

लेकिन सवाल है कि ₹10 लाख की FD से हर महीने कितनी इनकम होगी? इसका जवाब ब्याज दर पर निर्भर करता है। दर जितनी ज्यादा होगी, हर महीने मिलने वाला ब्याज भी उतना ही ज्यादा होगा।

बैंक FD की ब्याज दरें किस रेंज में हैं?

FD की दरें बैंक और अवधि के हिसाब से बदलती हैं। बड़े बैंकों में कई अवधियों पर ब्याज दर करीब 6% से 6.5% के आसपास है। वहीं कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक चुनिंदा अवधि में इससे ज्यादा ब्याज दे रहे हैं।

उदाहरण के लिए, SBI और HDFC Bank की कुछ FD अवधियों में दर करीब 6% से 6.5% के आसपास है। दूसरी तरफ AU Small Finance Bank और Jana Small Finance Bank जैसी संस्थाओं की कुछ अवधियों में दर 7% से 8% तक पहुंच रही है।

₹10 लाख की FD पर कितनी इनकम?

मान लीजिए आपको 6% ब्याज मिल रहा है। ऐसे में ₹10 लाख पर सालाना करीब ₹60,000 ब्याज बनेगा। यानी मासिक भुगतान के हिसाब से करीब ₹5,000 की इनकम होगी।

अगर ब्याज दर 7% है, तो सालाना ब्याज ₹70,000 होगा। इस हिसाब से हर महीने करीब ₹5,833 मिलेंगे। वहीं 8% ब्याज पर सालाना ₹80,000 और करीब ₹6,667 महीने की इनकम बनेगी।

FD पर ब्याजसालाना ब्याज
मंथली इनकम

6%₹60,000₹5,000
6.50%₹65,000₹5,417
7%₹70,000₹5,833
7.50%₹75,000₹6,250
8%₹80,000₹6,667

ये आंकड़े ₹10 लाख की रकम पर साधारण सालाना ब्याज के आधार पर हैं। वास्तविक भुगतान बैंक की FD स्कीम और ब्याज भुगतान के विकल्प के मुताबिक अलग हो सकता है।

हर महीने ब्याज चाहिए तो ऐसी FD चुनें

अगर आपका मकसद हर महीने खर्च के लिए रकम लेना है, तो ऐसी FD देखनी होगी जिसमें ब्याज का नियमित भुगतान मिलता हो। बैंक के विकल्प के हिसाब से ब्याज मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना लिया जा सकता है।

वहीं क्युमुलेटिव FD में ब्याज बीच में नहीं मिलता। वह FD की मूल रकम के साथ जुड़ता रहता है और मैच्योरिटी पर मिलता है। इसलिए मंथली इनकम के लिए नियमित ब्याज भुगतान वाली FD ज्यादा सही है।

₹10 लाख की मूल रकम का क्या होगा?

अगर आप सिर्फ FD का ब्याज निकालते हैं, तो मूल ₹10 लाख FD में बना रह सकता है। यानी ब्याज को हर महीने इनकम के तौर पर लिया जा सकता है और मूल रकम को मैच्योरिटी तक रखा जा सकता है।

हालांकि, FD समय से पहले तोड़ने पर बैंक के नियम लागू होते हैं। ऐसे में ब्याज की रकम पर असर पड़ सकता है। इसलिए FD करने से पहले प्रीमैच्योर विड्रॉल की शर्त देखना जरूरी है।

FD के ब्याज पर टैक्स भी लगेगा

FD से मिलने वाला ब्याज आपकी टैक्सेबल इनकम में शामिल होता है। इसलिए ₹5,833 या ₹6,667 महीने की रकम को टैक्स के बाद मिलने वाली इनकम नहीं माना जा सकता।

आपकी कुल आय और लागू इनकम टैक्स नियमों के हिसाब से टैक्स देनदारी तय होगी। इसलिए FD चुनते समय ब्याज दर के साथ टैक्स के बाद बचने वाली रकम भी देखनी चाहिए।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।