मेरी बेटी बोझ नहीं है, ऑटिस्टिक होने के बावजूद, वो सबसे प्यारी बड़ी बहन है | Autistic Daughter

मेरी बेटी बोझ नहीं है, ऑटिस्टिक होने के बावजूद, वो सबसे प्यारी बड़ी बहन है | Autistic Daughter

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #जिसे दुनिया ने बोझ समझा, आज वही अपनी छोटी बहन की सबसे सुरक्षित जगह है। ❤️
16 साल की ऑटिस्टिक रिद्धिमा बोल नहीं सकतीं, लेकिन अपने प्यार से हर दिन बहुत कुछ कहती हैं।
आज रिद्धिमा अपनी छोटी बहन आध्विका का वैसे ही ख्याल रखती हैं, जैसे कोई बड़ी बहन रखती है—उसे गोद में लेना, उसके चोट लगने पर उसके साथ रोना और हर दिन उसके घर लौटने का इंतज़ार करना।
जिस बच्ची को कभी लोगों ने श्राप कहा था, आज वही अपनी छोटी बहन की सबसे सुरक्षित जगह है। ❤️
उनकी कहानी याद दिलाती है—किसी बच्चे की काबिलियत उसकी कमियों से नहीं, उसके प्यार और हौसले से पहचानी जानी चाहिए।
@addu_dadyprincess

[16-Year-Old Autistic Girl Riddhima and Her Sister Story, A Non-Verbal Girl Shares A Beautiful Bond With Her Younger Sister, Autism Never Defines A Child’s Ability] thebetterindiahindi #hindi

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CJP नेता अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत, बॉन्ड की शर्त के बाद अब आंदोलन का क्या होगा?

CJP नेता अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत, बॉन्ड की शर्त के बाद अब आंदोलन का क्या होगा?

Abhijit Dipke Cockroach Janata Party

Abhijeet Dipke Conditional Bail: कनॉट प्लेस में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SME) कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। दिल्ली पुलिस द्वारा शांति भंग करने के आरोप में की गई कार्रवाई के बाद कोर्ट ने उन्हें शांति बनाए रखने का बॉन्ड भरने की शर्त पर जमानत दे दी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दिपके द्वारा बॉन्ड भरने के बाद सीजेपी का आंदोलन ठंडा पड़ जाएगा। 

 

शर्त के मुताबिक, दिपके को एक बॉन्ड भरना होगा जिसमें उल्लेख है कि वे ऐसी कोई गतिविधि नहीं करेंगे जिससे शांति भंग होने की आशंका हो। दिपके को 50 हजार रुपए का मुचलका भी भरना होगा। जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। इससे पहले सीजेपी ने दिपके की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए थे। दिपके की हिरासत से पहले सीजेपी के दो सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका को भी गिरफ्तार किया गया था।  ALSO READ: Abhijeet Dipke : दिल्ली में तिरंगा यात्रा पर अड़े CJP प्रमुख अभिजीत दीपके को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

कानूनी प्रक्रिया और गिरफ्तारी का आधार

दिल्ली पुलिस के अनुसार, दिपके को पहले कनॉट प्लेस में मार्च से पूर्व एहतियातन हिरासत में लिया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के तहत प्राथमिक औपचारिकताएं पूरी की गईं। तत्पश्चात, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत शांति भंग करने का नया मामला दर्ज कर उन्हें आधिकारिक रूप से गिरफ्तार किया गया। शनिवार को एसईएम कोर्ट में पेशी के बाद अदालत ने उन्हें सशर्त जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया। ALSO READ: CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा, अभिजीत दीपके बोले- 50-100 रुपए देकर बाहर कीजिए, लहरा दो तिरंगा को लेकर बताया प्लान

पहले भी लिया गया था हिरासत में

उल्लेखनीय है कि 10 अक्टूबर को भी दिल्ली एयरपोर्ट पर दिपके को हिरासत में लिया गया था और शांति भंग करने का मामला दर्ज किया गया था। उस दौरान उनसे एक साल की अवधि तक शांति बनाए रखने के मुचलके (Bond) पर हस्ताक्षर कराए गए थे। शुक्रवार को पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत करीब 150 प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिया था। दीपके को जाफरपुर कलां थाने ले जाया गया था।

कनॉट प्लेस और मंडी हाउस में भारी विरोध-प्रदर्शन

पुलिस की कार्रवाई के बावजूद कनॉट प्लेस के इनर सर्कल और मंडी हाउस में छात्रों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का भारी जमावड़ा देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने कनॉट प्लेस में मार्च निकाला, बीच-बीच में ‘जय हिंद’ के नारे लगाए और राष्ट्रगान गाया। आइसा (AISA) और एसएफआई (SFI) के सदस्यों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने तथा निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए अधिनियम को वापस लेने की मांग की।

Bond Investment: PB Money पर खरीद सकेंगे बॉन्ड्स, मिल गया SEBI से लाइसेंस

पीबी मनी (PB Money) को मार्केट रेगुलेटर सेबी से ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर (OBPP) के रूप में काम करने का लाइसेंस मिल गया है। यह पैसाबाजार (Paisabazaar) के साथ रणनीतिक साझेदारी वाला एक निवेश प्लेटफॉर्म है। अब इसे ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म का लाइसेंस मिला है तो कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए निवेशकों को बॉन्ड में निवेश करने की सुविधा दे सकेगी। बॉन्ड्स फिक्स्ड-इनकम इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं, जिसमें उनके टर्म्स के आधार पर ब्याज मिलता है। हालांकि इसमें हर मामले में रिटर्न की गारंटी नहीं होती है बल्कि कुछ रिस्क भी होते हैं। इसमें निवेशकों को बॉन्ड इश्यू करने वाले यानी इश्यूअर के डिफॉल्ट होने, मार्केट में ब्याज दरों में बदलाव और लिक्विडिटी से जुड़ी चिंताओं जैसे रिस्क हैं।

PB Money को लाइसेंस का क्या है मतलब?

कंपनी ने 14 अक्टूबर को जो बयान जारी किया है, उसके मुताबिक सेबी से लाइसेंस मिलने के बाद पीबी मनी बॉन्ड इंवेस्टमेंट के पूरे प्रोसेस को ऑपरेट कर सकेगी। इससे कंपनी निवेशकों का रजिस्ट्रेशनस केवाईसी वेरिफिकेशन, बॉन्ड डिस्कवरी, ऑर्डर प्लेसमेंट, पेमेंट कोऑर्डिनेशन, और पोस्ट-इंवेस्टमेंट सर्विसिंग ऑफर कर सकेगी। साथ ही निवेशक प्लेटफॉर्म पर यील्ड यानी रिटर्न, क्रेडिट रेटिंग और इंवेस्टमेंट अमाउंट जैसे मानकों के आधार पर बॉन्ड तलाश सकेंगे। इससे उन्हें उपलब्ध विकल्पों की तुलना करने में मदद मिलेगी।

कब से शुरू कर सकेंगे बॉन्ड्स में निवेश

घरेलू स्टॉक मार्केट में लिस्टेड पीबी फिनटेक (PB Fintech) की पैसाबाजार के निवेश प्लेटफॉर्म पीबी मनी को बॉन्ड प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करने का लाइसेंस मिला है। पीबी मनी के डायरेक्टर और पैसाबाजार के सीईओ संतोष अग्रवाल का कहना है कि इस लाइसेंस से बॉन्ड्स में निवेश आसान होगा और खुदरा निवेशकों की फिक्स्ड-इनकम प्रोडक्ट्स तक पहुंच बढ़ेगी। कंपनी को यह लाइसेंस ऐसे समय में मिला है जब पीबी मनी डिजिटल माध्यमों से अपने निवेश विकल्पों का विस्तार करने की योजना बना रही है। हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि इस लाइसेंस के तहत प्लेटफॉर्म पर निवेश की सुविधा कब से शुरू होगी, या शुरुआत में कौन-से बॉन्ड उपलब्ध होंगे।

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Stock Market: ‘जीडीपी मजबूत, फिर भी क्यों टूट रहा शेयर बाजार?’ हर्ष गोयनका ने बताईं ये 7 बड़ी वजहें!

Indian Stock Market Crash Reasons: भारतीय अर्थव्यवस्था जहां एक तरफ मजबूत जीडीपी ग्रोथ और बेहतरीन फंडामेंटल्स के साथ दुनिया में चमक रही है, वहीं दूसरी ओर घरेलू शेयर बाजार में लगातार बिकवाली और गिरावट का दौर जारी है। निवेशक इस बात से हैरान हैं कि जब देश की इकोनॉमी मजबूत है, तो शेयर बाजार लाल निशान में क्यों कारोबार कर रहा है?

इस बड़े विरोधाभास पर मशहूर उद्योगपति और आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भले ही हमारी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अफसोस की बात यह है कि ग्लोबल लिक्विडिटी भारत से निकलकर दूसरे बाजारों की ओर बह रही है। गोयनका ने भारतीय शेयर बाजार में आ रही इस गिरावट के पीछे ये 7 प्रमुख कारण गिनाए हैं।

1. विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशक लगातार अपना पैसा बाहर निकाल रहे हैं। एशियाई और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अन्य उभरते बाजारों में बेहतर अवसरों के कारण FIIs भारतीय इक्विटी से लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार पर भारी दबाव बन रहा है।

2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

अमेरिका में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड में लगातार इजाफा हो रहा है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों के लिए बिना जोखिम के अमेरिका में ही बेहतर रिटर्न मिलने लगता है। इसी वजह से वे भारत जैसे उभरते जोखिम भरे बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करने लगते हैं।

3. क्रूड ऑयल की कीमतें $100 के पार

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी हैं। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। महंगे तेल से भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ता है और कॉर्पोरेट मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है।

4. भारतीय रुपये में रिकॉर्ड कमजोरी

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी निवेशकों की फंड निकासी के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार कमजोर हो रहा है। रुपये में गिरावट के कारण विदेशी निवेशकों को अपने निवेश पर करेंसी लॉस का डर रहता है, जिससे वे बिकवाली तेज कर देते हैं।

5. इंफ्लेशन और रेट-हाइक का डर

महंगे क्रूड ऑयल और सप्लाई चेन में रुकावटों की वजह से वैश्विक और घरेलू स्तर पर महंगाई दोबारा बढ़ने की आशंका गहरा गई है। इससे केंद्रीय बैंकों (जैसे- अमेरिकी फेडरल रिजर्व और RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती टलने या दोबारा दरें बढ़ाने का डर बाजार में बैठ गया है।

6. भारतीय शेयरों का वैल्यूएशन अभी भी ऊंचा

दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में भारतीय शेयर बाजार का वैल्यूएशन (P/E रेशियो) अब भी काफी प्रीमियम या महंगा बना हुआ है। जब बाजारों में अनिश्चितता होती है, तो निवेशक महंगे वैल्यूएशन वाले शेयरों से मुनाफा वसूलकर सस्ते बाजारों (जैसे- चीन या ब्राजील) की ओर रुख करते हैं।

7. वैश्विक स्तर पर रिस्क-ऑफ सेंटीमेंट

वैश्विक स्तर पर युद्ध के हालात, भू-राजनीतिक तनाव और बड़े आर्थिक संकटों के चलते ग्लोबल इन्वेस्टर्स जोखिम भरे संपत्तियों से दूर भाग रहे हैं। वे इक्विटी के बजाय सोना, कैश और अमेरिकी बॉन्ड जैसी सुरक्षित जगह पर अपनी पूंजी ट्रांसफर कर रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Sensex और Nifty में गिरावट की ये हैं तीन बड़ी वजहें, अक्तूबर 2024 के बाद पहली बार लगातार दो महीने गिरा बाजार

शेयर बाजारों में बीते 25 साल में इतनी लंबी गिरावट का सिलसिला दिखा है। यह 8वां हफ्ता है जब बाजार में गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट से इनवेस्टर्स में घबराहट है। म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में सिप के जरिए निवेश करने वाले लोगों को भी अपना पैसा डूबने की चिंता सता रही है।

दुनिया के दूसरे देशों में ज्यादा गिरावट नहीं आई

एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली, अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों ने बाजार पर दबाव बनाए रखा है। दुनिया के दूसरे शेयर बाजारों में इतनी गिरावट देखने को नहीं मिली है। अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन इस साल शानदार रहा है, जबकि अमेरिका की अर्थव्यवस्था दबाव में है। उस पर कर्ज का बोझ बढ़ रहा है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का असर

बजाज ब्रोकिंग और मोतीलाल ओसवाल ने भारतीय बाजार में लगातार गिरावट की कई वजहें बताई हैं। इनमें FIIs की सेलिंग और खराब ग्लोबल इनवायरमेंट सबसे ऊपर हैं। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी ने कहा, “बीते एक हफ्ते में विदेश संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में शुद्ध रूप से बिकवाली की है। एक्सचेंज के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक, उन्होंने इस दौरान 34970 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं।”

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने दिया बाजार को सहारा

उन्होंने कहा कि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगातार खरीदारी कर बाजार को बड़ी गिरावट से बचाया है। सितंबर में FIIs ने भारतीय बाजार में 44010 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं। इस दौरान DIIs ने 76030 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। डीआईआई की खरीदारी से बाजार को सहारा मिला है।

अमेरिका-ईरान में समझौते पर अनिश्चतिता ने बढ़ाया दबाव

मुखर्जी ने कहा कि अमेरिका में बढ़ती बॉन्ड यील्ड, ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें और FIIs की बिकवाली का लगातार बाजार के सेंटिमेंट पर असर पड़ रहा है। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी दिख रही है। इसका खराब असर बाजार पर पड़ रहा है।

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अक्टूबर 2024 के बाद पहली बार दिखी ऐसी गिरावट 

मोतीलाल ओसवाल ने कहा है कि सितंबर में निफ्टी 6.1 फीसदी गिरा है। यह निफ्टी में गिरावट का लगातार दूसरा महीना था। अक्तूबर 2024 के बाद पहली बार इस तरह की गिरावट दिखी है। 2026 में निफ्टी अब तक 13.4 फीसदी गिर चुका है। टेक्नोलॉजी, ऑटो, पीएसयू बैंक और कैपिटल गुड्स शेयरों में सितंबर में ज्यादा गिरावट आई। मार्केट की नजरें अब अगले हफ्ते पर लगी हैं।