क्या आप भी अपने डर, ट्रॉमा… असुरक्षाओं पर नहीं कर पा रहे काबू, ‘एटॉमिक हैबिट्स’ के राइटर जेम्स क्लियर का ये कोट आपकी भी कर सकता है मदद

जेम्स क्लियर ‘एटॉमिक हैबिट्स’ जैसी बेस्टसेलर किताब के लेखक हैं। वे एक जाने-माने लेखक, स्पीकर और प्रोडक्टिविटी एक्सपर्ट हैं। उन्हें हमेशा से रोज़ाना की छोटी-छोटी आदतें, इंसानी व्यवहार और लगातार खुद को बेहतर बनाने जैसे विषयों में गहरी दिलचस्पी रही है। अपनी रिसर्च और प्रैक्टिकल जानकारी के ज़रिए, उन्होंने दुनिया भर के लाखों पाठकों की रोज़मर्रा की दिनचर्या और सोच को बदलने में मदद की है।

उनकी बातों ने कई लोगों को ज़िंदगी में बेहतर रास्ता चुनने में मदद की है। एक बार उन्होंने कहा था- “खुद पर काबू पाओ। अपने डर, अपने ट्रॉमा, अपनी असुरक्षाओं और अपनी बुरी आदतों पर। तुम्हें मोटिवेशन, इंस्पिरेशन या ऐसी किसी बकवास चीज की जरूरत नहीं है। तुम्हें बस खुद के साथ बैठकर यह पूछना है कि ‘आखिर वो क्या चीज है, जो मुझे वो काम करने से रोक रही है, जो मुझे पता है कि मुझे करना चाहिए?’” सच में, यह एक ज़बरदस्त और बेबाक बात है। आइए समझते हैं कि इसका असल मतलब क्या है।

इस कोट (quote) का क्या मतलब है?

हममें से कई लोग कोई बड़ा कदम उठाने से पहले “सही समय,” बाहरी मदद, या सब कुछ एकदम सही होने का इंतज़ार करते हैं। लोगों में अक्सर बाहरी हालात को दोष देने की आदत होती है जब वे अपनी कमियों से पार नहीं पा पाते। जेम्स क्लियर का यह कोट लोगों को अपने डर, पुराने सदमे (trauma), अपनी सीमाओं और बुरी आदतों से उबरकर और मज़बूत बनने के लिए प्रेरित करता है। रास्ते में रुकावटें आने पर, क्लियर लोगों को सलाह देते हैं कि वे खुद के साथ समय बिताएं और ईमानदारी से सोचें कि आखिर कौन सी चीज़ उन्हें अपनी मुश्किलों से उबरने से रोक रही है।

संसाधनों या मौकों की कमी के मुकाबले, असफलता का डर, पुराना सदमा, खुद पर शक और आराम-पसंद आदतें हमें ज़्यादा रोकती हैं। मोटिवेशन (प्रेरणा) कुछ समय के लिए ही होता है और उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता। असली तरक्की तब होती है जब आप बाहरी प्रेरणा की तलाश छोड़कर खुद के साथ शांति से बैठते हैं, अपनी अंदरूनी रुकावटों को पहचानते हैं और अपने कामों की ज़िम्मेदारी खुद लेते हैं।

आज के समय में यह बात कितनी ज़रूरी है?

लोग अपने लक्ष्यों की ओर असल कदम उठाने के बजाय, लगातार ‘सेल्फ़-हेल्प’ कंटेंट, वीडियो और कोट्स देखते रहते हैं।

काम टालने का कारण अक्सर आलस नहीं होता; इसके पीछे आमतौर पर लोगों की राय का डर, परफेक्शन की चाहत या असफलता का डर होता है।

आज की डिजिटल ज़िंदगी में ध्यान भटकाने वाली चीज़ें बहुत हैं, जिससे मुश्किल भावनाओं का सामना करने के बजाय उनसे भागना आसान हो जाता है।

अनसुलझी असुरक्षाएं और पुराने अनुभव अक्सर काम और रिश्तों में ऐसी सोच के रूप में सामने आते हैं जो हमें आगे बढ़ने से रोकती है।

बहुत से लोग असली जोखिम लेने से बचने के लिए महीनों तक “प्लानिंग” करते रहते हैं या “सही पल” का इंतज़ार करते हैं।

इस बात से मिलने वाली सीख

किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए सबसे पहला कदम अपने ही मन के साथ चल रही लड़ाई को जीतना है।

काम करने से गति (मोमेंटम) बनती है; सिर्फ़ प्रेरणा पर निर्भर रहने से काम में निरंतरता नहीं रहती।

जब तक आप यह मानने को तैयार नहीं होते कि असल में आपको क्या चीज़ रोक रही है, तब तक आप समस्या को ठीक नहीं कर सकते।

बिना किसी रुकावट के अकेले बैठकर अपने विचारों पर सोचने से आपको अपनी असली रुकावटों का पता चलता है।

चाहे आपको कैसा भी महसूस हो, जो काम ज़रूरी है उसे करना ही तरक्की का सबसे अच्छा तरीका है।

Aston Martin reveals military-spec V12 Dreadnought 4×4 SUV

Aston Martin Dreadnought SUV front quarter

Aston Martin has revealed the Dreadnought as a military-spec 4×4 SUV with a V12 mill. It is a virtual vehicle made for Call of Duty: Modern Warfare 4, created in collaboration with the game’s developers and publishers. The Aston Martin Dreadnought has off-road-specific design elements inside and out, and its full-size model is being displayed to the public at the Fanatics Fest in New York till July 19.

  1. Under five metres in length and 2.1 metres wide, as per Autocar UK
  2. Powered by the Vanquish GT’s 824bhp twin-turbo V12 mill
  3. Will be Available in ‘DMZ’ and ‘Warzone’ modes in the game

The name ‘Dreadnought’ is inspired by the British Royal Navy’s HMS Dreadnought battleship from the early 1900s and literally translates to “one who fears nothing”.

Aston Martin Dreadnought: Exterior design

The 2-door SUV has chunky off-road-spec tyres and Valour-like rear design elements

The Chiltern Green-hued Aston Martin Dreadnought has an imposing design that features a plethora of rugged elements, including “military-grade armour-plating”. 

At the front, it gets horizontally stacked LED headlights that give it a futuristic look. The grille features a pixel-shaped design for the mesh LED fog lamps. These squared elements are also present on the front bumper, which sports two silver tow hooks and a silver skid plate that adds contrast.

In profile, it features huge dual-tone alloy wheels clad with chunky off-road spec tyres. It gets squared-off wheel arches and aggressive creases in profile. This 2-door SUV features flush-type door handles and camera-based outside rearview mirrors (ORVMs). The lower section of the door features black-and-silver cladding, as well as silver sidesteps to climb into the tall SUV.

At the rear, it gets Valour-like aerodynamic fins on the rear windscreen, multiple LED taillights, and a black strip with Aston Martin lettering. It also gets a quad-exhaust setup, silver two hooks and a silver skid plate for a more rugged and aggressive look.

As per Autocar UK, the Dreadnought SUV measures “just under five metres in length and 2.1 metres wide”. 

इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक में बड़ी गिरावट से Nifty IT Index 5 फीसदी क्रैश, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी शेयरों में 19 जून को बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह रेवेन्यू ग्रोथ को लेकर एक्सेंचर का नया अनुमान है। उसने पूरे साल के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के अपने अनुमान को घटा दिया है। इससे आईटी सर्विसेज की डिमांड कमजोर रहने का संकेत मिलता है। इसका असर 19 जून को आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।

आईटी शेयरों पर बीते कुछ महीनों में बड़ा दबाव दिखा है। इसका असर म्यूचुअल फंडों की आईटी फोकस वाली स्कीमों पर भी पड़ा है। बीते एक साल में इन स्कीमों का रिटर्न निगेटिव रहा है। हालांकि, लंबी अवधि में प्रदर्शन अभी पॉजिटिव बना हुआ है। फ्रैंकलिन इंडिया टेक्नोलॉजी फंड का 3 सालों में सालाना रिटर्न 12.62 फीसदी रहा है।

एसबीआई टेक्नोलॉजी अपॉर्चुनिटीज फंड ने 5 सालों में सालाना 9.67 फीसदी रिटर्न दिया है। अगर आईटी फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स की कैटेगरी की बात की जाए तो बीते तीन सालों में इनका औसत रिटर्न करीब 5.4 फीसदी रहा है। इनमें क्वांट टेक फंड, मोतीलाल ओसवला डिजिटल इंडिया फंड, इनवेस्को इंडिया टेक्नोलॉजी फंड और एडलावाइज टेक्नोलॉजी फंड के अच्छे प्रदर्शन का हाथ है।

हालांकि, बीते छह महीनों में एवरेज रिटर्न करीब 15.4 फीसदी निगेटिव रहा है। इसकी वजह बीते महीनों में टेक्नोलॉजी शेयरों में आई बड़ी गिरावट है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिहाज से आईटी म्यूचुअल फंडों में निवेश का बड़ा मौका दिख रहा है।

वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च) क्रांति बाथिनी ने कहा का कि म्यूचुअल फंड की कोई स्कीम कितनी अट्रैक्टिव है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इनवेस्टर कितना रिस्क ले सकता है और वह कितने समय के लिए निवेश करना चाहता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आईटी-फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स को कंट्रेरियन अपॉर्चुनिटीज माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आईटी शेयरों की वैल्यूएशंस हिस्टोरिकल एवरेज के करीब आ गई हैं। इससे ये मध्यम और लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से अट्रैक्टिव हो गए है। उन्होंने कहा, “हालांकि, साइक्लिकल नेचर को देखते हुए निवेश एकमुश्त की जगह धीरे-धीरे सिस्टमैटिक ऐलोकेशन के जरिए होना चाहिए।”

इक्विरियल सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च एनालिस्ट) संदीप शाह ने कहा कि आईटी शेयरों में बड़े करेक्शन के बावजूद ऐसे शेयरों में निवेश किया जा सकता है, जिनकी ग्रोथ विजिबिलिटी अच्छी है। लार्जकैप आईटी शेयरों में इंफोसिस और टेक महिंद्रा का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। मिडकैप शेयरों में Mphasis, eClerx और KPIT Technologies के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर दिखते हैं।