Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स- निफ्टी जानिए 22 जून को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : शुक्रवार,19 जून को बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला थम गया। इसकी सबसे बड़ी वजह एक्सेंचर (Accenture) द्वारा अपने रेवेन्यू ग्रोथ आउटलुक में कटौती करने के फैसले के बाद आईटी शेयरों में आई भारी बिकवाली रही। कमजोर ग्लोबल संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की फिर से शुरू हुई बिकवाली और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों का सेंटीमेंट खराब किया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 607 अंक या 0.78% गिरकर 76,802.90 पर और निफ्टी 154.90 अंक या 0.64% गिरकर 24,013.10 पर बंद हुआ।

हालांकि,छोटे-मझोले शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.22% और 0.42% की बढ़त देखने को मिली। सेक्टोरल इंडेक्सों पर नजर डालें तो Nifty IT सबसे ज्यादा गिरा और इसमें 3.6% से ज्यादा की गिरावट आई। निफ्टी ऑटो, निफ्टी बैंक और निफ्टी ऑयल एंड गैस भी आज गिरावट के साथ बंद हुए। इसके विपरीत निफ्टी मीडिया, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी केमिकल्स बढ़त के साथ ट्रेड करते दिखे।

मार्केट व्यू

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के.विजयकुमार ने कहा कि मौजूदा मार्केट स्ट्रक्चर से पता चलता है कि गिरावट पर खरीदारी करना एक असरदार रणनीति हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और बेहतर होते मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मार्केट की अंदरूनी मजबूती को सहारा दे रहे हैं।

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एक्सिस डायरेक्ट में रिसर्च हेड राजेश पालवीय ने कहा कि जब तक निफ्टी 24,000 के अहम लेवल से ऊपर बना हुआ है तब तक मार्केट का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव रहेगा। उनके मुताबिक,24,000 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम करेगा,जबकि 24,250-24,400 का जोन एक अहम रेजिस्टेंस एरिया बना रहेगा। 24,400 के ऊपर एक मज़बूत ब्रेकआउट से नई तेजी और शॉर्ट कवरिंग आ सकती है। जिससे और ऊंचे लेवल तक जाने का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर,अगर यह लगातार 24,050 के नीचे बना रहता है तो 23,950 की तरफ प्रॉफिट बुकिंग हो सकती है और अगला सपोर्ट 23,850 के आसपास होगा। कुल मिलाकर,जब तक इंडेक्स 24,000 से ऊपर है,तब तक गिरावट पर खरीदारी (buy on dips)की रणनीति अपनानी चाहिए,क्योंकि मीडियम-टर्म में तेजी का ट्रेंड बना हुआ है।

बाजार जानकारों का कहना है कि तेजी का दौर (bullish momentum)वापस लाने के लिए निफ्टी का 23,900 के लेवल पर बने रहना जरूरी होगा। बजाज ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्रो मुखर्जी ने कहा,”निफ्टी के लिए 23,900-23,800 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम करेगा, क्योंकि यहीं पर 50-दिन का EMA और पिछले सोमवार के बुलिश गैप एरिया का ऊपरी बैंड मिल रहे हैं।

कोटक सिक्योरिटीज में इक्विटी रिसर्च के हेड श्रीकांत चौहान की राय है कि निफ्टी में 24,100 और 24,000 के बीच गिरावट आने पर खरीदारी करें और 23,900 पर स्टॉप लॉस रखें।

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इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक में बड़ी गिरावट से Nifty IT Index 5 फीसदी क्रैश, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी शेयरों में 19 जून को बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह रेवेन्यू ग्रोथ को लेकर एक्सेंचर का नया अनुमान है। उसने पूरे साल के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के अपने अनुमान को घटा दिया है। इससे आईटी सर्विसेज की डिमांड कमजोर रहने का संकेत मिलता है। इसका असर 19 जून को आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।

आईटी शेयरों पर बीते कुछ महीनों में बड़ा दबाव दिखा है। इसका असर म्यूचुअल फंडों की आईटी फोकस वाली स्कीमों पर भी पड़ा है। बीते एक साल में इन स्कीमों का रिटर्न निगेटिव रहा है। हालांकि, लंबी अवधि में प्रदर्शन अभी पॉजिटिव बना हुआ है। फ्रैंकलिन इंडिया टेक्नोलॉजी फंड का 3 सालों में सालाना रिटर्न 12.62 फीसदी रहा है।

एसबीआई टेक्नोलॉजी अपॉर्चुनिटीज फंड ने 5 सालों में सालाना 9.67 फीसदी रिटर्न दिया है। अगर आईटी फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स की कैटेगरी की बात की जाए तो बीते तीन सालों में इनका औसत रिटर्न करीब 5.4 फीसदी रहा है। इनमें क्वांट टेक फंड, मोतीलाल ओसवला डिजिटल इंडिया फंड, इनवेस्को इंडिया टेक्नोलॉजी फंड और एडलावाइज टेक्नोलॉजी फंड के अच्छे प्रदर्शन का हाथ है।

हालांकि, बीते छह महीनों में एवरेज रिटर्न करीब 15.4 फीसदी निगेटिव रहा है। इसकी वजह बीते महीनों में टेक्नोलॉजी शेयरों में आई बड़ी गिरावट है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिहाज से आईटी म्यूचुअल फंडों में निवेश का बड़ा मौका दिख रहा है।

वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च) क्रांति बाथिनी ने कहा का कि म्यूचुअल फंड की कोई स्कीम कितनी अट्रैक्टिव है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इनवेस्टर कितना रिस्क ले सकता है और वह कितने समय के लिए निवेश करना चाहता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आईटी-फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स को कंट्रेरियन अपॉर्चुनिटीज माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आईटी शेयरों की वैल्यूएशंस हिस्टोरिकल एवरेज के करीब आ गई हैं। इससे ये मध्यम और लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से अट्रैक्टिव हो गए है। उन्होंने कहा, “हालांकि, साइक्लिकल नेचर को देखते हुए निवेश एकमुश्त की जगह धीरे-धीरे सिस्टमैटिक ऐलोकेशन के जरिए होना चाहिए।”

इक्विरियल सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च एनालिस्ट) संदीप शाह ने कहा कि आईटी शेयरों में बड़े करेक्शन के बावजूद ऐसे शेयरों में निवेश किया जा सकता है, जिनकी ग्रोथ विजिबिलिटी अच्छी है। लार्जकैप आईटी शेयरों में इंफोसिस और टेक महिंद्रा का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। मिडकैप शेयरों में Mphasis, eClerx और KPIT Technologies के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर दिखते हैं।