Stock Markets Holiday: 2 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बीएसई और एनएसई में नहीं होगा कारोबार

Stock Markets Holiday: शेयर बाजारों में शुक्रवार यानी 2 अक्तूबर को कारोबार नहीं होगा। बीएसई और एनएसई दोनों बंद रहेंगे। इसकी वजह यह है कि 2 अक्तूबर को गांधी जयंती है। इस मौके पर राष्ट्रीय अवकाश होता है। इसका मतलब है कि सभी सरकारी ऑफिसेज, प्राइवेट ऑफिसेज, आरबीआई, बैंक आदि में छुट्टी होती है।

तीन दिन बाद बीएसई और एनएसई 5 अक्तूबर को खुलेंगे

प्राइवेट बैंक, सरकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, कोऑपरेटिव बैंक और विदेशी बैंकों की भी सभी शाखाएं बंद रहेंगी। चूंकि, शेयर बाजारों में हर हफ्ते सिर्फ पांच दिन कारोबार होता है, जिससे इस बार गुरुवार यानी 1 अक्तूबर इस हफ्ते का अंतिम कारोबारी दिन था। अब शेयर बाजार यानी BSE और NSE 5 अक्तूबर को खुलेंगे।

कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में भी 2 अक्तूबर को रहेगी छुट्टी

कमोडिटी एक्सचेंज MCX भी गांधी जयंती के मौके पर बंद रहेगा। कमोडिटी एक्सचेंज में सुबह और शाम दोनों ही सत्रों में कारोबार नहीं होगा। इसका मतलब है कि एमसीएक्स में भी कारोबार की शुरुआत 5 अक्तूबर यानी सोमवार को होगी। उस दिन दोनों ही सत्रों में एक्सचेंज में सामान्य कामकाज होगा।

20 अक्तूबर को भी दशहरा के मौके पर बंद रहेंगे शेयर बाजार 

शेयर बाजार इस महीने दशहरा के मौके पर भी बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि 20 अक्तूबर यानी मंगलवार को भी बीएसई और एनएसई में कारोबार नहीं होगा। 2 अक्तूबर को बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों में छुट्टी होने से चेक की क्लियरिंग भी नहीं होगी। हालांकि, नेट बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। बैंकों के एटीएम भी छुट्टी के दिन खुले रहेंगे।

हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन भी शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

शेयर बाजारों में 1 अक्तूबर को भी गिरावट देखने को मिली। Sensex 0.8 फीसदी यानी 570 अंक गिरकर 71,909 पर बंद हुआ। Nifty 0.9 फीसदी यानी 198 अंक गिरकर 22,421 पर क्लोज हुआ। आईटी छोड़कर निफ्टी के सभी सेक्टर सूचकांकों में गिरावट आई। ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी गिरा। इसमें बजाज ऑटो में 6 फीसदी गिरावट का बड़ा हाथ रहा। M&M का शेयर भी 2.4 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

Delhivery Q1 Profit: डेल्हीवरी का प्रॉफिट 65% घटकर 32 करोड़ रहा, रेवेन्यू 28% बढ़ा

Delhivery Q1 Profit: डेल्हीवरी ने 8 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 65 फीसदी घटकर 31.9 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 91 करोड़ रुपये था। गुरुग्राम की कंपनी का मार्च तिमाही में 72.3 करोड़ रुपये प्रॉफिट था।

लेबर की कमी की वजह से प्रॉफिट घटा

Delhivery के प्रॉफिट में गिरावट की वजह लेबर की कमी रही। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 2,930.7 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में रेवेन्यू 2,294 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 2,850 करोड़ रुपये था।

क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से कॉस्ट बढ़ी

कंपनी ने शेयरहोल्डर्स को भेजे लेटर में लिखा है, “पहली तिमाही में स्थितियां चैलेंजिंग रहीं। लेबर की उपलब्धता कम रही। जियोपॉलिटिकल टेंशन और लेबर कोड्स से जुड़ी चुनौतियों की वजह से हमें नेटवर्क सर्विस क्वालिटी को मेंटेन करने के लिए काफी कदम उठाने पड़े।” मध्यपूर्व में टेंशन से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गईं, जिसका असर फ्यूल कॉस्ट पर पड़ा।

एक्सपेंसेज साल दर साल आधार पर 29 फीसदी बढ़ा

जून तिमाही में कंपनी का एक्सपेंसेज साल दर साल आधार पर 29 फीसदी बढ़कर 3,011.6 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 2,326.6 करोड़ रुपये और मार्च तिमाही में 2,851.1 करोड़ रुपये था। कंपनी ने कहा है कि लेबर से जुड़ी चुनौतियों के चलते लेवर कॉस्ट बढ़ गई। कंपनी ने प्रॉपरायटरी जीआईएस डेटा को नए रेवेन्यू में कनवर्ट करने के लिए Delhivery Maps लॉन्च किए।

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इस साल 18 फीसदी चढ़ा है डेल्हीवरी का शेयर 

Delhivery का शेयर 7 अगस्त को एनएसई में 1.90 फीसदी की तेजी के साथ 472.40 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर करीब 18 फीसदी चढ़ा है। डेल्हीवर का आईपीओ मई 2022 में आया था। यह आईपीओ 487 करोड़ रुपये का था। कंपनी ने प्रति शेयर 487 रुपये के भाव पर इनवेस्टर्स को शेयर एलॉट किए थे। इसका मतलब है कि बीते चार सालों में इस शेयर ने कोई रिटर्न नहीं दिया है।

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क्रिस वुड ने लॉर्जकैप स्टॉक्स में तेजी की जताई उम्मीद, कहा- यह सोने में फिर से निवेश शुरू करने का सही वक्त

जेफरीज में इक्विटी स्ट्रेटेजी के ग्लोबल हेड क्रिस वुड का मानना है कि लंबी अवधि में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन अच्छा रहेगा। उनका यह भी कहना है कि लंबे समय तक मिडकैप शेयरों के बेहतर प्रदर्शन के बाद अब लार्जकैप स्टॉक्स की बारी है। मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर नलिन मेहता को दिए इंटरव्यू में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार के बारे में कई अहम बातें बताईं।

गोल्ड में निवेश शुरू करने की सलाह

वुड ने कहा कि मिडकैप स्टॉक्स की अर्निंग्स ग्रोथ और रिटर्न स्ट्रॉन्ग रहे हैं। अब ब्लूचिप स्टॉक्स का रफ्तार पकड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने इनवेस्टर्स को हालिया कंसॉलिडेशन (सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव) के बाद सोने में निवेश शुरू करने की भी सलाह दी। गोल्ड की कीमतें इस साल जनवरी की आखिर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद कीमतों में तेज गिरावट आई।

मिडकैप की अर्निंग्स ग्रोथ लार्जकैप से ज्यादा

उन्होंने कहा, “रुपये में निवेश करने वाले इनवेस्टर्स के लिए पिछले साल भारतीय शेयर बाजारों का कुल रिटर्न बहुत खराब नहीं रहा। इंडियन मार्केट में मिडकैप स्टॉक्स को लेकर मेरी राय सबसे ज्यादा पॉजिटिव रही है। उनकी अर्निंग्स ग्रोथ ब्लूचिप शेयरों के मुकाबले ज्यादा रही है।”

अब लार्जकैप स्टॉक्स में दिख सकती है तेजी

लंबी अवधि में भारतीय बाजारों के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताते हुए वुड ने कहा कि मिडकैप शेयरों के शानदार प्रदर्शन से यह संकेत मिलता है कि अब लार्जकैप स्टॉक्स में तेजी दिख सकती है। उनका मानना है कि पिछले 18 महीनों में इंडियन मार्केट्स में लार्जकैप शेयरों में स्ट्रॉन्ग थीम का अभाव रहा है। इंडिया में रिवर्स AI ट्रेड देखने को मिला है। इंडिया में एक सेक्टर है, जिसे एआई से बड़ा खतरा है। वह सेक्टर आईटी है।

मध्यपूर्व में लड़ाई से सोने में उछाल नहीं आया

सोने के बारे में वुड ने कहा कि हाल में ऊंचे लेवल से गिरने के बाद सोने की कीमतें अब ऐसे लेवल पर आ गई है, जिस पर इसमें निवेश बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा, “ईरान वॉर शुरू होने पर गोल्ड की कीमत ने नया हाई नहीं बनाया। यह मेरे लिए एक संकेत था कि गोल्ड की कीमतें फिलहाल अपने पीक पर पहुंच गई हैं और हम कंसॉलिडेशन के दौर में प्रवेश कर चुके हैं।”

डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड की वजह से सोना अट्रैक्टिव

वुड ने कहा, “हम इस ट्रेडिंग रेंज के निचले स्तर पर हैं। मेरा मानना है कि लोगों को फिर से सोने में निवेश शुरू करना चाहिए। लंबी अवधि में सोने को पसंद करने की वजह यह है कि मैं अब भी डॉलर डिबेसमेंट ट्रेड पर भरोसा करता हूं। “

(नलिन मेहता मनीकंट्रोल के मैनेजिंग एडिटर और नेटवर्क18 में चीफ एआई ऑफिसर-एडिटोरियल ऑपरेशंस हैं। नलिन ‘द न्यू बीजेपी: मोदी एंड द मेकिंग ऑफ द वर्ल्ड्स लार्जेस्ट पॉलिटिकल पार्टी’ किताब के लेखक हैं।)

Gold-Silver in Jun Quarter: सोने के लिए दस साल की सबसे कमजोर तिमाही, चार वर्षों में सबसे तेज फिसल रही चांदी

Gold and Silver News: यह तिमाही खत्म होने में अब कुछ ही दिन बचे हैं और सोने-चांदी की जैसी चाल है, उस हिसाब से जून 2026 तिमाही इनके लिए झटका साबित हो रहा है। यह निगेटिव जोन में एंट्री करने जा रहा है और इसके साथ ही लगातार पांच तिमाहियों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट जाएगा। गोल्ड की हालत तो और खराब है क्योंकि यह दस साल की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट की तरफ बढ़ रहा है, तो चांदी की चमक चार साल में सबसे अधिक फीकी होने वाली है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सोने और चांदी की लगातार गिरावट अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के हाई लेवल पर बने रहने और फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को लेकर बदलते रुझान के चलते है। चूंकि सोना और चांदी पर कोई ब्याज नहीं मिलता तो लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों का माहौल इन्हें अमेरिकी ट्रेजरी जैसे निश्चित आय वाले निवेश विकल्पों की तुलना में कम आकर्षक बना देता है।

कितना फीका हुआ सोना-चांदी?

जून तिमाही में अब तक गोल्ड के भाव 12% नीचे आ चुके हैं जो दिसंबर 2016 के बाद इसकी सबसे बड़ी तिमाही गिरावट है। वहीं चांदी 17.6% फिसल चुकी है, जो जून 2022 के बाद इसकी सबसे तेज गिरावट है। हालांकि अगर रिकॉर्ड हाई से तुलना करें तो स्थिति और भी गंभीर दिखाई देती है। गोल्ड प्रति औंस (28.35 ग्राम) $5,417 के रिकॉर्ड हाई से 24% नीचे आ चुका है तो 28 जनवरी को प्रति औंस $117 के रिकॉर्ड हाई से चांदी लगभग 47% गिर चुकी है।

सोने-चांदी की यह गिरावट पिछले दो साल में ताबड़तोड़ तेजी के बाद आई है। साल 2024 में 28% और साल 2025 में 65% की बढ़त के बाद, जनवरी और मार्च 2026 के बीच सोने की कीमत में 10% की तेजी आई तो दूसरी तरफ साल 2024 में 22% और साल 2025 में 148% चढ़ने के बाद जनवरी और फरवरी 2026 में चांदी की कीमत 28% बढ़ी।

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कब तक बना रहेगा दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने सोने-चांदी पर दबाव डाला था लेकिन यह दबाव तब भी जारी रहा, जब इनके बीच शांति समझौता हो गया। पश्चिमी एशिया में युद्ध ने तेल की कीमतों में आग लगा दी थी और सख्त मौद्रिक नीतियों के आसार बढ़ा दिए। अब अमेरिकी फेड ने मौद्रिक नीतियों की हालिया बैठक के बाद नए चेयरमैन केविन वार्श ने फिलहाल ब्याज दरों में किसी बढ़ोतरी का ऐलान तो नहीं किया लेकिन इस साल एक बार दर बढ़ाने के संकेत दिए। इसने निवेशकों की चिंता बढ़ी दी और अमेरिका-ईरान के समझौते के पॉजिटिव इफेक्ट को फीका कर दिया। अमेरिकी फेड के मौद्रिक नीतियों के कमेटी की हालिया बैठक के बाद से डॉलर इंडेक्स 1% से अधिक मजबूत हो चुका है।

एक्सिस डायरेक्ट के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज) देवेया गागलानी (Deveya Gaglani) का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन कम होने और कच्चे तेल की फिसलन के बावजूद अमेरिकी फेड के सख्त रुख, हाई इनफ्लेशन और डॉलर इंडेक्स में तेज उछाल के कारण बुलियन यानी सोना-चांदी पर दबाव बना हुआ है। डॉलर इंडेक्स हाल ही में एक साल के हाई लेवल पर पहुंच गया। देवेया के अनुसार जब तक डॉलर $100 से ऊपर बना रहेगा, तब तक सोने और चांदी पर दबाव बना रहा सकता है।

अब किस बात पर रहेगी नजर

हाल ही में शिकागो फेडरल रिजर्व बैंक के प्रेसिडेंट ऑस्टन गूल्सबी (Austan Goolsbee) ने कहा था कि उन्हें महंगाई बढ़ने की रफ्तार को लेकर चिंता है और यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है है कि महंगाई बढ़ाने वाले सभी फैक्टर्स अस्थायी हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था लंबे समय से लक्ष्य से कहीं अधिक मुद्रास्फीति या इनफ्लेशन की समस्या से जूझ रही है और हाल के रुझान सही दिशा में नहीं हैं। अब कारोबारियों और निवेशकों की नजर गुरुवार को जारी होने वाले अमेरिकी पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) प्राइस इंडेक्स पर होगी, जिसके तेज होने के आसार हैं। इसका असर फेडरल रिजर्व की ब्याज दर करने वाली नीति पर दिख सकता है।

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इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक में बड़ी गिरावट से Nifty IT Index 5 फीसदी क्रैश, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी शेयरों में 19 जून को बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह रेवेन्यू ग्रोथ को लेकर एक्सेंचर का नया अनुमान है। उसने पूरे साल के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के अपने अनुमान को घटा दिया है। इससे आईटी सर्विसेज की डिमांड कमजोर रहने का संकेत मिलता है। इसका असर 19 जून को आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।

आईटी शेयरों पर बीते कुछ महीनों में बड़ा दबाव दिखा है। इसका असर म्यूचुअल फंडों की आईटी फोकस वाली स्कीमों पर भी पड़ा है। बीते एक साल में इन स्कीमों का रिटर्न निगेटिव रहा है। हालांकि, लंबी अवधि में प्रदर्शन अभी पॉजिटिव बना हुआ है। फ्रैंकलिन इंडिया टेक्नोलॉजी फंड का 3 सालों में सालाना रिटर्न 12.62 फीसदी रहा है।

एसबीआई टेक्नोलॉजी अपॉर्चुनिटीज फंड ने 5 सालों में सालाना 9.67 फीसदी रिटर्न दिया है। अगर आईटी फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स की कैटेगरी की बात की जाए तो बीते तीन सालों में इनका औसत रिटर्न करीब 5.4 फीसदी रहा है। इनमें क्वांट टेक फंड, मोतीलाल ओसवला डिजिटल इंडिया फंड, इनवेस्को इंडिया टेक्नोलॉजी फंड और एडलावाइज टेक्नोलॉजी फंड के अच्छे प्रदर्शन का हाथ है।

हालांकि, बीते छह महीनों में एवरेज रिटर्न करीब 15.4 फीसदी निगेटिव रहा है। इसकी वजह बीते महीनों में टेक्नोलॉजी शेयरों में आई बड़ी गिरावट है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिहाज से आईटी म्यूचुअल फंडों में निवेश का बड़ा मौका दिख रहा है।

वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च) क्रांति बाथिनी ने कहा का कि म्यूचुअल फंड की कोई स्कीम कितनी अट्रैक्टिव है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इनवेस्टर कितना रिस्क ले सकता है और वह कितने समय के लिए निवेश करना चाहता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आईटी-फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स को कंट्रेरियन अपॉर्चुनिटीज माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आईटी शेयरों की वैल्यूएशंस हिस्टोरिकल एवरेज के करीब आ गई हैं। इससे ये मध्यम और लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से अट्रैक्टिव हो गए है। उन्होंने कहा, “हालांकि, साइक्लिकल नेचर को देखते हुए निवेश एकमुश्त की जगह धीरे-धीरे सिस्टमैटिक ऐलोकेशन के जरिए होना चाहिए।”

इक्विरियल सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च एनालिस्ट) संदीप शाह ने कहा कि आईटी शेयरों में बड़े करेक्शन के बावजूद ऐसे शेयरों में निवेश किया जा सकता है, जिनकी ग्रोथ विजिबिलिटी अच्छी है। लार्जकैप आईटी शेयरों में इंफोसिस और टेक महिंद्रा का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। मिडकैप शेयरों में Mphasis, eClerx और KPIT Technologies के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर दिखते हैं।