शेयर बाजारों को बड़े बूस्टर डोज की जरूरत, इन उपायों से मार्केट को लग सकते हैं पंख

भारत की इकोनॉमी मजबूत है, लेकिन शेयर बाजारों पर इसका असर नहीं दिख रहा है। कम्प्लीट सर्किल के मैनेजिंग पार्टनर एवं चीफ इनवेस्टमेंट अफसर गुरमीत चड्ढ़ा का कहना है कि सरकार को शेयर बाजारों के सेंटीमेंट में सुधार के लिए टैक्स घटाने के साथ ही रिफॉर्म्स करना चाहिए। उन्होंने इस बारे में कुछ कदम उठाने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि कई डेटा भारतीय अर्थव्यवस्था में मजूबती का संकेत देते हैं। इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही (जून तिमाही) में निफ्टी 50 की रेवेन्यू ग्रोथ 20 फीसदी से ज्यादा रही है। टैक्स बाद प्रॉफिट (PAT) 21 फीसदी बढ़ा है। सितंबर में ऑटो सेल्स रिकॉर्ड 25.4 लाख यूनिट्स पर पहुंच गई। कमर्शियसल व्हीकल्स की रिटेल बिक्री पहली बार एक लाख यूनिट्स पहुंच गई। इससे इकोनॉमी में आर्थिक गतिविधियां मजबूत रहने का पता चलता है।

इकोनॉमी की मजबूत स्थिति के बावजूद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली ने शेयर बाजारों पर दबाव बढ़ाया है। डेरिवेटिव्स ट्रेड का एक बड़ा हिस्सा आर्बिट्रॉज ट्रेड पर निर्भर है, जिसमें तेजी से कमी आ रही है। आज निफ्टी खरीदने और फ्यूचर में बेचने पुर 15-16 रुपये का लॉस हो रहा है। उधर, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में उछाल है। जियोपॉलिटिकल टेंशन हाई लेवल पर है।

चड्ढ़ा के मुताबिक, हिस्टोरिकल ट्रेंड से पता चलता है कि टैक्स घटाने का शेयर बाजारों पर पॉजिटिव असर पड़ता है। जीएसटी, कॉर्पोरेट टैक्स और इनकम टैक्स में कमी के बाद ऐसा देखने को मिला है। ऐसे में शेयर बाजारों के सेटीमेंट को बेहतर बनाने के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को घटाकर पिछले साल के बजट के लेवल पर लाया जा सकता है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस (LTCG) में भी कमी की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि डिविडेंड और बायबैक पर टैक्स के नियम अभी काफी जटिल हैं। मौजूदा नियम की वजह से प्रमोटर्स को शेयर ऑफलोड करने को मजबूर होना पड़ता है। इससे मार्केट में शेयरों की सप्लाई जरूरत से ज्यादा हो जाती है। अगर डिविडेंड और बायबैक के टैक्स के नियमों में बदलाव किया जाता है तो शेयरों के सप्लाई का दबाव घटेगा। उन्होंने रेगुलेटरी चेंजेज को भी चरणबद्ध तरीके से लागू करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि अगस्त में कैश मार्केट में एडजस्टमेंट के लिए 3:15 से 3:30 का समय तय किया गया। इसका खराब असर प्राइस डिस्कवरी पर पड़ा है। इश्योरेंस में रिफॉर्म्स जरूरी है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की जरूरत है। इससे सिस्टम को अचानक झटका नहीं लगेगा।

शेयर बाजार में आ सकती है 50% तक तेजी, प्रशांत जैन ने कहा-अगले कुछ हफ्तों में निवेश के बड़े मौके

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का दौर खत्म होने जा रहा है। यह उन इनवेस्टर्स के लिए शेयरों में निवेश का सही वक्त है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं। दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने यह कहा है। उन्होंने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सितंबर तिमाही के लेटर में कई महत्वपूर्ण बताई है।

दिसंबर मध्य तक FIIs की बिकवाली सुस्त पड़ जाएगी

प्रशांत जैन (Prashant Jain) को इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल में भारतीय शेयर बाजारों का रिटर्न 40-50 फीसदी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में हल्की गिरावट के आसार दिख रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाजार में बिकवाली के बारे में उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य तक इसमें कमी आ सकती है।

अगले कुछ हफ्तों में शेयर बाजारों में एंट्री का गोल्डन मौका

उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य के बाद मार्केट्स में रिकवरी शुरू होगी। इसलिए अगले कुछ हफ्ते या महीने शेयर बाजारों में एंट्री का शानदार मौका हो सकता है। पिछले करीब दो सालों से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दिखी है। सितंबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच Nifty 12.4 फीसदी गिरा है। इस दौरान विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने 58 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। हालांकि, FY25 और FY26 में इकोनॉमी की ग्रोथ करीब 7.5 फीसदी रही।

इन वजहों से भारतीय बाजार का प्रदर्शन रहा खराब

भारतीय शेयर बाजारों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा है। इनमें जियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिकी टैरिफ, गोल्ड के आयात में उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी शामिल हैं। साथ ही फॉरेन इनवेस्टर्स की दिलचस्पी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों से जुड़ी स्टॉक्स में बढ़ी है। इससे विदेशी निवेश उन बाजारों में गया है, जिनमें ऐसी कंपनियां मौजूद हैं।

विदेशी निवेशकों ने AI स्टॉक्स में पैसे लगाने में दिखाई दिलचस्पी

AI और सेमीकंडक्टर सुपरसाइकिल में भारत की मौजूदगी ना के बराबर है। इसलिए विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसा निकाल एआई और सेमीकंडक्टर्स वाले बाजारों में लगाए हैं। इस वजह से अमेरिका और कई उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। भारतीय शेयर बाजारों में हालिया बिकवाली की वजह अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड है। यह 5 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इससे अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश का आकर्षण बढ़ा है।

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हर दो साल गिरने के बाद शेयर बाजारों में आती है बड़ी तेजी

3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि हर दो सालों में 15 फीसदी गिरावट के बाद के अगले तीन सालों में शेयर बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। इस दौरान बाजार ने कम से कम 20 फीसदी रिटर्न दिए हैं। कई शेयरों का रिटर्न तो 50 फीसदी या इससे ज्यादा रहा है। हालांकि, यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे भी ऐसा होगा। यह सिर्फ एक ट्रेंड है।

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Gold Price Slips: सोने की फिसलन जारी, ये फैसले आने से पहले दिख रहा दबाव

Gold Price Slips: सोने की चमक आज सोमवार को फीकी पड़ी। लगातार तीन हफ्ते टूटने के बाद इस हफ्ते की शुरुआत भी गोल्ड के लिए लाल रही। कच्चे तेल में उबाल ने महंगाई की रफ्तार को लेकर चिंताए बढ़ाई तो इस बात के आसार बढ़े कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। इसने गोल्ड पर दबाव बढ़ाया और इसके भाव नीचे आए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की इसी हफ्ते नीतिगत बैठक है। इस बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने के आसार पर स्पॉट गोल्ड 0.3% गिरकर प्रति औंस $4,334.31 पर आ गया। वहीं यूएस गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.8% फिसलकर $4,375.00 पर आ गया। बाकी मेटल्स की बात करें तो स्पॉट सिल्वर भी 0.7% गिरकर प्रति औंस $64.02 पर आ गया तो प्लेटिनम प्रति औंस $1,796.90 पर स्थिर रहा तो पैलेडियम हल्के बदलाव के साथ $1,298.80 पर आ गया।

ब्याज दरें बढ़ने के आसार और कच्चे तेल के उबाल पर दबाव

अमेरिका में पिछले महीने अगस्त में खुदरा महंगाई की रफ्तार चार महीने में सबसे अधिक रही, जिससे इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। CME FedWatch टूल के अनुसार ट्रेडर्स का मानना है कि मंगलवार और बुधवार को होने वाली सेंट्रल बैंक की पॉलिसी मीटिंग में अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार लगभग 86.5% हैं, जो पिछले हफ्ते महंगाई के आंकड़े आने से पहले लगभग 67% थी। इसके अलावा यह आसार भी है कि बैंक ऑफ जापान शुक्रवार को ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

लगातार महंगाई और मजबूत आर्थिक ग्रोथ के कारण केंद्रीय बैंकों के ब्याज दरें बढ़ाने के आसार बढ़े हैं। इस बीच कच्चा तेल उबल रहा है और पश्चिमी एशिया में तनाव कम होने के संकेत बहुत कम मिल रहे हैं। आमतौर पर सोने को इनफ्लेशन हेज के तौर पर देखा जाता है लेकिन ब्याज दरें बढ़ती है तो सोने जैसे एसेट्स का आकर्षण कम हो जाता है क्योंकि इस पर कोई ब्याज नहीं मिलता है। कच्चे तेल की बात करें सोमवार को यह 2% से अधिक उछल पड़ा और प्रति बैरल ब्रेंट क्रूड $107 के पार पहुंच गया।

Gold को लेकर क्या कहना है जानकारों का

केसीएम ट्रेड के चीफ मार्केट एनालिस्ट टिम वाटरर (Tim Waterer) का कहना है कि गोल्ड के लिए फिलहाल मार्केट का माहौल अच्छा नहीं हैं। टिम के मुताबिक एनर्जी की बढ़ती कीमतें के साथ-साथ अमेरिकी फेड और बैंक ऑफ जापान की बैठकों से पहले ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ते आसार इस पर दबाव डाल रही हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के चलते निचले स्तर पर खरीदारी भी दिख सकती है।

Bond Market में कोहराम, अमेरिका में 5% के करीब पहुंची यील्ड, जापान में 28 साल का टूटा रिकॉर्ड

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Gold Outlook: गोल्ड ₹1.53 लाख पर, क्या यह ₹1.60 लाख का लेवल पार करेगा? जानिए आगे कैसी रह सकती है चाल

Gold Outlook: सोने में गुरुवार यानी 3 सितंबर को रिकवरी दिखी। डॉलर में कमजोरी और महंगे क्रूड की वजह से महंगाई बढ़ने की चिंता कम होने से सोने को सपोर्ट मिला। शुरुआती कारोबार में कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1.30 फीसदी चढ़कर 4,472.10 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इधर, भारत में भी कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दिखी।

MCX में गोल्ड में तेजी 

MCX में गोल्ड फ्यूचर्स 1.05 फीसदी यानी 1,595 रुपये चढ़कर 1,53,997 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। एनालिस्ट्स का कहना है कि अब एमसीएक्स पर गोल्ड फ्यूचर्स के लिए 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लेवल महत्वपूर्ण दिख रहा है। उधर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की मीटिंग करीब आ रही है। ऐसे में इनवेस्टर्स की नजरें फेड के फैसले पर टिकी हैं।

1.60 लाख का लेवल अहम 

बोनांजा में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव के मुताबिक, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का लेवल अहम है। उन्होंने कहा कि हाल में आई तेजी और फिर करेक्शन के बाद 1.60 लाख के लेवल को ब्रेकआउट लेवल माना जा सकता है। अगर गोल्ड 1.60 लाख के लेवल को पार करने के बाद टिका रहता है तो इससे यह संकेत मिलेगा कि गोल्ड में आए करेक्शन की वजह मुख्यत: मुनाफावसूली थी।

तेजी में गोल्ड 1.65 लाख तक जा सकता है

1.60 लाख के लेवल के पार गोल्ड के टिके रहने पर इसके 1.65-1.70 लाख तक जाने का रास्ता खुल जाएगा। यादव ने कहा, “इससे पहले के टेक्निकल एसेसमेंट में भी 1.58-1.60 लाख के लेवल को ब्रेकआउट जोन बताया गया था। इसका मतलब है कि 1.65-1.70 लाख संभावित अगला टारगेट हो सकता है। गिरावट की स्थिति में 1.52-1.50 पर सोने को अहम सपोर्ट मिलेगा।”

केंद्रीय बैंकों की खरादीरी से गोल्ड को सपोर्ट

यादव ने बताया कि जब कभी गोल्ड ब्रेकआउट देता है तो इसका कनफर्मेशन जरूरी हो जाता है। मौजूदा लेवल पर ऐसा नहीं दिख रहा। हालांकि, दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक सोना खरीद रहे हैं, जिससे इसे सपोर्ट मिल रहा है। गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि केंद्रीय बैंक 2026 में हर महीने करीब 50 टन सोना खरीद रहे हैं। उसने साल के अंत तक गोल्ड की कीमतों के लिए 4,900 डॉलर प्रति औंस का अनुमान जताया है।

जियोपॉलिटिकल टेंशन का भी गोल्ड पर असर

जियोपॉलिटिकल टेंशन बने रहने से भी गोल्ड को सपोर्ट मिल रहा है। गोल्ड को सुरक्षित निवेश का सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। भारतीय निवेशकों के लिए रुयये का लेवल भी एक बड़ा मसला है। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड कंसॉलिडेशन जारी रहता है तो भी रुपये में कमजोरी से एमसीएक्स गोल्ड को सपोर्ट मिल सकता है।

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इनवेस्टर्स की नजरें फेडरल रिजर्व के फैसले पर

यादव ने कहा कि गोल्ड के लिए शॉर्ट टर्म में सबसे बड़ा रिस्क अमेरिका में इंटरेस्ट रेट को लेकर फेड का फैसला, डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड है। फेड चेयरमैन के हालिया रुख से यह साफ हो गया है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक की पॉलिसी सख्त होगी। इससे यील्ड में उछाल दिखा है और डॉलर में मजबूती आई है। इससे गोल्ड पर कुछ समय के लिए दबाव बन सकता है।

MCX पर सोना ₹1.61 लाख के पार, चांदी ₹2.50 लाख के करीब ,जानें आगे तेजी रहेगी जारी या फिर होगा प्रॉफिट-बुकिंग का दौर शुरू

Gold Silver Price: शुक्रवार को घरेलू फ्यूचर्स मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह अंतराष्ट्रीय बाज़ार में बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों में तेज़ उछाल थी, जो कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर इनकी लगातार मांग के कारण हुआ।

एक्सचेंज की वेबसाइट पर मौजूद ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोपहर 4:55 बजे सोना फ्यूचर्स ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी फ्यूचर्स ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे। ये कीमतें क्रमशः 5 अक्टूबर के सोने और 4 सितंबर के चांदी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए हैं।

यह तेज़ी तब आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें लगभग तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे यह धातु लगातार तीसरे हफ़्ते बढ़त की ओर अग्रसर है। इस साल जनवरी में, भारत में सोने की कीमत ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि चांदी की कीमत ₹4.25 लाख प्रति किलोग्राम तक उछल गई थी।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर उम्मीदों ने बुलियन की कीमतों को सहारा दिया है। चॉइस ब्रोकिंग की पिंकी यादव के अनुसार, COMEX पर बढ़त के अनुरूप MCX पर कीमतें ऊंचे स्तर पर खुलीं। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज ने अस्थिरता को बढ़ावा दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि तेल की बढ़ती कीमतों (जो ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी हैं) ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जबकि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को और सहारा दिया है।

कमज़ोर डॉलर से बुलियन को सहारा

अमेरिकी डॉलर यहां एक अहम कारक रहा है। डॉलर इंडेक्स 98.8 के आसपास बना हुआ था और साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा था।चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर के कमज़ोर होने से अन्य करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए ये सस्ती हो जाती हैं, जिससे मांग बढ़ सकती है और कीमतें ऊपर जा सकती हैं।

रॉयटर्स के अनुसार, गोल्डसिल्वर सेंट्रल के ब्रायन लैन ने कहा कि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को व्यापक रूप से सहारा दिया है, साथ ही यील्ड में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है।

ट्रेजरी बायबैक से अनिश्चितता

अमेरिकी ट्रेजरी डेट मैनेजमेंट (कर्ज प्रबंधन) एक और कारक है जिस पर बाज़ार की पैनी नज़र है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि सरकार ट्रेजरी सिक्योरिटीज की रीपरचेज (वापसी खरीद) को और बढ़ा सकती है। उन्होंने पहले ही अगले तिमाही में लंबी अवधि के कर्ज की बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम $4 बिलियन तक दोगुना करने की योजना का संकेत दिया था।

इस कदम से बाजार में उतार-चढ़ाव आया है और यील्ड, दरों और कर्ज की व्यापक स्थिति पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है।

OCBC के क्रिस्टोफर वोंग ने रॉयटर्स को बताया कि अब ध्यान इस बात पर होगा कि क्या यह कदम टिकाऊ है या नहीं। अमेरिकी डेटा और 27-29 अगस्त को होने वाला जैक्सन होल सिम्पोजियम डॉलर और यील्ड की दिशा तय कर सकते हैं।

फेड की दरे अहम

सोने के आउटलुक के लिए फेड की दरों की उम्मीदें अहम बनी हुई हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार में इस बात की 67% संभावना है कि फेड अगले महीने दरों को स्थिर रखेगा, जबकि दरों में बढ़ोतरी की संभावना 33% है।

चूंकि सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ऊंची दरों के कारण ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में इसकी अपील आमतौर पर कम हो जाती है। लेकिन पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता, साथ ही यील्ड और डॉलर में बदलाव, सोने की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) अपील को बढ़ा सकते हैं।

जियोपॉलिटिकल टेंशन से ‘सेफ-हेवन’ की मांग में बढ़त

भू-राजनीतिक जोखिम भी इसे बढ़ावा दे रहे हैं। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाएगा। तेल की आपूर्ति पर इसके असर की चिंता ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे महंगाई की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

ऐसी अनिश्चितता निवेशकों को सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर ले जाती है। यादव ने कहा कि मजबूत निवेश मांग और चीनी केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी के कारण पूंजी सुरक्षित धातुओं की ओर बढ़ी है।

केंद्रीय बैंक की खरीदारी अभी भी एक अहम आधार

केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग सोने के लिए एक बड़ा संरचनात्मक आधार बनी हुई है, क्योंकि देश अपने रिजर्व में विविधता ला रहे हैं। यादव ने जुलाई में ग्लोबल गोल्ड ETF में आए निवेश और केंद्रीय बैंकों की जारी खरीदारी की ओर भी इशारा किया, जो ज्वैलरी और रिटेल निवेश के अलावा मांग बढ़ाने वाले अन्य कारक हैं।

चांदी की कीमतों में भी तेजी

चांदी भी इस तेजी में शामिल हो गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतें 1.8% बढ़कर लगभग $69.31 प्रति औंस हो गई हैं। प्लैटिनम 2.6% बढ़कर $1,875.75 और पैलेडियम 1.7% बढ़कर $1,356.59 हो गया।

चांदी पर भी सोने की तरह ही कई मैक्रो-इकोनॉमिक कारकों का असर पड़ता है – जिसमें डॉलर की कमजोरी और दरों को लेकर बदलती उम्मीदें शामिल हैं – लेकिन इसकी औद्योगिक मांग के कारण इसकी कीमतों में स्वतंत्र रूप से भी बदलाव हो सकता है। हाल की तेज़ी से MCX पर चांदी की कीमत ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई है, जिससे यह ₹2.50 लाख के स्तर के बहुत करीब आ गई है।

सोने और चांदी के लिए आगे क्या होगा?

निकट भविष्य में इनकी चाल डॉलर, ट्रेजरी यील्ड, अमेरिका से आने वाले डेटा और फेड के संकेतों पर निर्भर करेगी, जिसमें जैक्सन होल पर खास नज़र रहेगी।

भारतीय निवेशकों के लिए रुपया-डॉलर का रेट भी मायने रखता है। अगर रुपया कमज़ोर होता है, तो डॉलर में कीमत वाली चीज़ें देश में महंगी हो जाती हैं, भले ही ग्लोबल कीमतें स्थिर रहें। इस तेज़ी की वजह से भारत में फिजिकल डिमांड पर कुछ असर पड़ा है, क्योंकि ऊंची कीमतों के कारण रिटेल खरीदार पीछे हट रहे हैं, जबकि चीन में डिमांड तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई है।

MCX पर सोना ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर है। अब सवाल यह है कि क्या ये ग्लोबल हालात तेज़ी को बनाए रख पाएंगे या फिर इससे मुनाफावसूली (प्रॉफिट-बुकिंग) का नया दौर शुरू हो जाएगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Nifty 50 लगातार सातवें दिन गिरा, क्या यह 24000 के नीचे चला जाएगा? जानिए एक्सपर्ट्स के जवाब

निफ्टी में लगातार सातवें सत्र गिरावट आई। बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन का असर शेयर बाजारों पर पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगातार 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई है। इससे दुनियाभर में महंगाई के पैर पसारने का डर बढ़ गया है। बीते 7 सत्रों में निफ्टी 2.1 फीसदी गिरा है। बीएसई सेंसेक्स में बीते 7 सत्रों में से 6 में गिरावट आई है। वह भी इस दौरान 2.1 फीसदी गिरा है।

इन सूचकांकों में सबसे ज्यादा गिरावट

19 अगस्त को निफ्टी आईटी का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा। इसने बाजार को कुछ सहारा दिया है। सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी मीडिया, एनर्जी और एफएमसीजी इंडेक्स में आई। इससे निफ्टी 50 इंडेक्स 0.32 फीसदी गिरकर 24,078 पर क्लोज हुआ। सेंसेक्स भी 0.42 फीसदी गिरकर 76,909 अंक पर आ गया।

बीते 12 सत्रों से निफ्टी में कंसॉलिडेशन

एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी बीते 12 सत्रों से कंसॉलिडेशन में रहा है। अब इसके लिए अगला सपोर्ट 24,000-23,800 पर है। कोटक सिक्योरिटीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, “इंट्राडे में मार्केट का टेक्स्चर कमजोर है। लेकिन, अगर निफ्टी एक बार 24,150 के लेवल को तोड़ देता है तो पुलबैक रेली से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद निफ्टी 24,300-24,350 तक जा सकता है।”

24000 के नीचे जाने पर बिकवाली बढ़ेगी

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरावट की स्थिति में अगर यह 24,000 के नीचे जाता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है। फिर यह गिरकर 23,900-23,850 तक जा सकता है। एसबीआई सिक्योरिटीज के सुदीप शाह ने भी कहा कि शेयर बाजारों में रिस्क लेने की क्षमता घटी है। निफ्टी में लगातार बिकवाली का दबाव दिख रहा है।

क्रूड ऑयल की कीमतों का सेंटीमेंट पर असर

उन्होंने कहा कि शेयर बाजार के सेंटीमेंट पर सबसे ज्यादा असर क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का पड़ रहा है। क्रूड में उछाल की वजह यह है कि मध्यपूर्व में टेंशन कम होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है। इस वजह से ब्रेंट क्रूड उछलकर तीन महीनों के हाई पर पहुंच गया है। यह 92 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है।

मध्यपूर्व में टेंशन कम होने के फिलहाल संकेत नहीं 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अगस्त को कहा कि ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला है। लेकिन, ईरान का दावा इसके उलट है। उसने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही नहीं हो रही है। दोनों पक्षों के दावा में विरोधाभास है। इससे यह संकेत मिलता है कि बीते छह महीनों से जारी यह लड़ाई जारी रह सकता है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने और चांदी की कीमतों को लगे पंख, सिर्फ 7 सत्र में ₹12400 चढ़ा गोल्ड

Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी के लिए 12 अगस्त यानी बुधवार खास रहा। दिल्ली सर्राफा बाजार में दोनों कीमती मेटल्स की कीमतों में पंख लग गए। खास बात यह रही कि सोने में लगातार 7वें दिन तेजी जारी रही। सोने का भाव 2,600 रुपये चढ़कर 1,59,800 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

सिर्फ 7 सत्रों में सोने में 12400 रुपये की तेजी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में तेजी का असर इसकी घरेलू कीमतों पर पड़ा। इसके अलावा सोने में अच्छी खरीदारी भी दिखी। बीते सात सत्रों में सोने का भाव करीब 8.4 फीसदी यानी 12,400 रुपये चढ़ा है। चांदी में भी आज 4000 रुपये का उछाल दिखा। इससे भाव 2,46,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।

क्रूड ऑयल में तेजी के बावजूद बुलियन में उछाल 

लेमन मार्केट डेस्क में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि अमेरिका में इनफ्लेशन का डेटा आने से पहले निवेशकों की दिलचस्पी सोने में बढ़ी है। सोने को निवेश का सबसे सुरक्षित माध्यम माना जाता है। उधर, पश्चिम एशिया में जियोपॉलिटिकल टेंशन बना हुआ है। क्रूड का भाव हाई लेवल पर बना हुआ है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में तेजी है।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी से बुलियन को सपोर्ट

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है। डॉलर में भी स्थिरता है। इससे बुलियन की कीमतों को सपोर्ट मिला है। बाजार की नजरें अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। आज देर रात डेटा आएंगे। इधर, भारत में रिटेल इनफ्लेशन में लगातार चौथे हफ्ते इजाफा हुआ है।

इनवेस्टर्स की नजरें अमेरिका में इनफ्लेशन डेटा पर 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में जबर्दस्त तेजी दिखी। स्पॉट गोल्ड 1.19 फीसदी चढ़कर 4,422.14 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। स्पॉट सिल्वर 2.19 फीसदी के उछाल के साथ 66.12 डॉलर प्रति औंस पर था। हालांकि, ब्रेंट क्रूड का भाव अब भी 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेज गिरावट के बाद सोने और चांदी में अच्छी रिकवरी जारी है। इस साल जनवरी के आखिर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद बुलियन में तेज गिरावट आई थी।

Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में तनाव कायम, छठे दिन भी जारी तेजी, $90 के करीब पहुंचा भाव

Crude Oil Price Today:  बुधवार को तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अनिश्चितता और दो जहाजों पर हमलों के कारण मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की आशंका बढ़ गई। इंडस्ट्री के डेटा में US में कच्चे तेल के स्टॉक में बढ़ोतरी के संकेत मिलने के बावजूद कीमतों में यह उछाल आया।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 72 सेंट या 0.81% बढ़कर $89.63 प्रति बैरल हो गया, जिससे लगातार छठे दिन इसमें तेज़ी बनी रही, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 71 सेंट या 0.85% बढ़कर $83.91 पर पहुंच गया, समें पिछले चार ट्रेडिंग सेशन में 11% की बढ़त हुई है।

पिछले सेशन में दोनों बेंचमार्क $1 से ज़्यादा की बढ़त के साथ बंद हुए थे और 31 जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे क्लोजिंग लेवल पर पहुंच गए थे। सोमवार को कीमतों में लगभग 5% का उछाल आया था, क्योंकि US-Iran के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर उम्मीदें कम हो गई थीं।

आज कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी की क्या वजह है?

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि US और ईरान ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ (Strait of Hormuz) को लेकर किसी तरह के समझौते के करीब हैं। अल जज़ीरा ने कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के हवाले से बताया कि इस अहम समुद्री रास्ते को लेकर ईरान और ओमान के बीच अलग-अलग बातचीत में भी काफी प्रगति हुई है।

इस अहम शिपिंग रूट को फिर से खोलने की कोशिशों से जुड़ी घटनाओं का तेल की कीमतों पर गहरा असर पड़ रहा है। फ्यूचर्स की कीमतें बार-बार बदल रही हैं – कभी जल्द समझौते की उम्मीद तो कभी बातचीत की गति धीमी पड़ने की चिंता। क्षेत्रीय तनाव अभी भी बना हुआ है, खासकर तब से जब US नेवी के एक हेलीकॉप्टर ने पनामा के झंडे वाले एक कार्गो जहाज पर दो हेलफायर मिसाइलें दागीं; बताया जा रहा है कि यह जहाज ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था।

स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से होने वाली शिपिंग एक्टिविटी में भारी गिरावट आई है, हालांकि कुछ कच्चा तेल अभी भी फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से बाहर जा रहा है और कई टैंकर अपने ट्रांसपोंडर बंद करके चल रहे हैं। US के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि US सेना की मदद से इस जलडमरूमध्य (strait) से हर दिन लगभग 9 मिलियन बैरल तेल आ-जा रहा है।

इस साल कच्चे तेल की कीमतों में 40% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जबकि कुछ रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों में और भी तेज़ी से उछाल आया है। रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण आई रुकावटों का असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ा है। US एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन की ‘शॉर्ट-टर्म एनर्जी आउटलुक’ रिपोर्ट के अनुसार, US को उम्मीद है कि ईरान के साथ चल रहे टकराव की वजह से 2027 के आखिर तक तेल की सप्लाई में हर दिन औसतन 6,00,000 बैरल की रुकावट आएगी।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा कि “हालात शांति की ओर बढ़ रहे हैं,” हालांकि उन्होंने इस बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं दी। पाकिस्तान इस टकराव को खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहा है। उनके ये बयान US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के प्रति सख़्त रुख अपनाने के बाद आए हैं।

 

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Delhivery Q1 Profit: डेल्हीवरी का प्रॉफिट 65% घटकर 32 करोड़ रहा, रेवेन्यू 28% बढ़ा

Delhivery Q1 Profit: डेल्हीवरी ने 8 अगस्त को जून तिमाही के नतीजों का ऐलान किया। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 65 फीसदी घटकर 31.9 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 91 करोड़ रुपये था। गुरुग्राम की कंपनी का मार्च तिमाही में 72.3 करोड़ रुपये प्रॉफिट था।

लेबर की कमी की वजह से प्रॉफिट घटा

Delhivery के प्रॉफिट में गिरावट की वजह लेबर की कमी रही। जून तिमाही में ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल आधार पर 28 फीसदी बढ़कर 2,930.7 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में रेवेन्यू 2,294 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू 2,850 करोड़ रुपये था।

क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से कॉस्ट बढ़ी

कंपनी ने शेयरहोल्डर्स को भेजे लेटर में लिखा है, “पहली तिमाही में स्थितियां चैलेंजिंग रहीं। लेबर की उपलब्धता कम रही। जियोपॉलिटिकल टेंशन और लेबर कोड्स से जुड़ी चुनौतियों की वजह से हमें नेटवर्क सर्विस क्वालिटी को मेंटेन करने के लिए काफी कदम उठाने पड़े।” मध्यपूर्व में टेंशन से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ गईं, जिसका असर फ्यूल कॉस्ट पर पड़ा।

एक्सपेंसेज साल दर साल आधार पर 29 फीसदी बढ़ा

जून तिमाही में कंपनी का एक्सपेंसेज साल दर साल आधार पर 29 फीसदी बढ़कर 3,011.6 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 2,326.6 करोड़ रुपये और मार्च तिमाही में 2,851.1 करोड़ रुपये था। कंपनी ने कहा है कि लेबर से जुड़ी चुनौतियों के चलते लेवर कॉस्ट बढ़ गई। कंपनी ने प्रॉपरायटरी जीआईएस डेटा को नए रेवेन्यू में कनवर्ट करने के लिए Delhivery Maps लॉन्च किए।

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इस साल 18 फीसदी चढ़ा है डेल्हीवरी का शेयर 

Delhivery का शेयर 7 अगस्त को एनएसई में 1.90 फीसदी की तेजी के साथ 472.40 रुपये पर बंद हुआ। इस साल यह शेयर करीब 18 फीसदी चढ़ा है। डेल्हीवर का आईपीओ मई 2022 में आया था। यह आईपीओ 487 करोड़ रुपये का था। कंपनी ने प्रति शेयर 487 रुपये के भाव पर इनवेस्टर्स को शेयर एलॉट किए थे। इसका मतलब है कि बीते चार सालों में इस शेयर ने कोई रिटर्न नहीं दिया है।

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Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना 300 रुपये महंगा, चांदी की कीमतें स्थिर

दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में 31 जुलाई को 300 रुपये इजाफा हुआ। चांदी की कीमतें स्थिर रहीं। रिटेलर्स और ज्वेलर्सी की खरीदारी से सोने को सपोर्ट मिला। सोने की कीमत 1,48,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुईं। चांदी 2,24,700 रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही।

विदेश में सोने और चांदी में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 1.18 फीसदी गिरकर 4,055 डॉलर प्रति औंस था। चांदी भी 2 फीसदी की गिरावट के साथ 57.98 डॉलर प्रति औंस रही। कोटक सिक्योरिटीज की एवीपी (कमोडिटी रिसर्च) कायनात चेनवाला ने कहा, “गुरुवार रात के लेवल से कीमत में नरमी आई है। यह 4,060 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है। सिल्वर में भी नरमी दिखी है।”

सोने की कीमतों पर दबाव की दो वजहें 

एनालिस्ट्स के मुताबिक, क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी का असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने पर पड़ा है। हालांकि, फरवरी के बाद जुलाई पहला महीना है, जब सोने की कीमतें चढ़ी हैं। स्वतंत्र विश्लेषक रॉस नॉरमैन ने कहा, “सोना चढ़ने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अभी यह कंसॉलिडेशन फेज में है।”

सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ने पर दबाव में आएगा सोना

फेडरल रिजर्व ने 29 जुलाई को इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं किया। इससे सोने को थोड़ी राहत मिली है। लेकिन, माना जा रहा है कि फेड सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका निगेटिव असर सोने पर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक घट जाती है। क्रूड की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हुआ है।

क्रूड में तेजी से महंगाई का खतरा बढ़ रहा

महंगाई को काबू में करने के लिए फेड सहित दूसरे देशों के केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में जियोपॉलिटिकल टेंशन कम होता नहीं दिख रहा है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ रही हैं। 31 जुलाई को ब्रेंट क्रूड का भाव 1.76 फीसदी चढ़कर 88.37 डॉलर पर चल रहा था। क्रूड में तेजी जारी रहने पर सोने की कीमतों पर दबाव बना रहेगा