Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना लगातार दूसरे दिन चढ़ा, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 4 सितंबर को सोने में लगातार दूसरे दिन तेजी आई। यह 1,400 रुपये चढ़कर 1,60,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली।

चांदी की कीमत 2,40,500 रुपये पर स्थिर

दिल्ली सर्राफा बाजार में चांदी की कीमतें 2,40,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बनी रहीं। ट्रेडर्स का कहना है कि सोने में तेजी की वजह घरेलू बाजार में इसकी अच्छी खरीदारी है। हालांकि, अमेरिका में नॉन-फॉर्म पेरोल्स डेटा आने से पहले इनवेस्टर्स सावधानी बरत रहे हैं। इस डेटा का असर सोने और चांदी की कीमतों पर पड़ सकता है।

रिकॉर्ड ऊंचाई से 40 फीसदी गिरी है चांदी

सोने और चांदी की कीमतें इस साल जनवरी के आखिर में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थीं। उसके बाद दोनों में तेज गिरावट दिखी। चांदी की कीमत जनवरी में 4 लाख रुपये के पार हो गई थी। तब से यह करीब 40 फीसदी गिर चुकी है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड सिद्धार्थ खेमका ने कहा, “इनवेस्टमेंट डिमांड कमजोर है, जिससे डीलर इनवेंट्रीज को लेकर चिंता पैदा होती है।”

कमजोर डिमांड से चांदी पर बढ़ सकता है दबाव 

उन्होंने कहा कि अगर डिमांड नहीं बढ़ती है तो भारतीय डीलरों की तरफ से दिए गए करीब 2,000 टन सिल्वर के आने से इनवेंट्री पर दबाव और बढ़ सकता है। सिल्वर का इस्तेमाल कई इंडस्ट्रीज में भी होता है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल शामिल हैं। इसके अलावा इसमें इनवेस्टमेंट डिमांड भी होती है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में गिरावट आई। सोना हल्की गिरावट के साथ 4,465 डॉलर प्रति औंस था, जबकि चांदी 0.38 फीसदी गिरकर 66.72 डॉलर प्रति औंस थी। एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा कि अगस्त की नॉन-फॉर्म पेरोल रिपोर्ट से पहले ट्रेडर्स सावधानी बरत रहे हैं। इससे सोने और चांदी की कीमतें सीमित दायरे में बनी हुई हैं।

यह भी पढ़ें: Gold Price: सोने की तेजी पर लगा ब्रेक! जानें आज कितना है 10 ग्राम सोने का भाव और आगे कैसी रह सकती है चाल?

अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा पर करीबी नजर

अगले हफ्ते अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा आने वाले हैं। इसका असर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर पड़ेगा। फेड 16 सितंबर को अपनी पॉलिसी पेश करेगा। अगर इनफ्लेशन में इजाफा होता है तो वह इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान कर सकता है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श पहले ही संकेत दे चुके हैं कि उनका फोकस इनफ्लेशन को काबू करने पर है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो इसका खराब असर सोने पर पड़ेगा।

MCX में हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट, जानिए क्या वजह

कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर 4 सितंबर को सोने और चांदी में गिरावट दिखी। शाम 4:15 गोल्ड फ्यूचर्स 0.34 फीसदी यानी 531 रुपये गिरकर 1,55,244 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 0.31 फीसदी यानी 734 रुपये गिरकर 2,35,320 रुपये पर चल रहा था।

विदेश में भी सोने और चांदी में गिरावट 

कमोडिटीज के जानकारों का कहना है कि अमेरिका में नॉन-फॉर्म पेरोल्स के डेटा आने से पहले बाजार में सावधानी बरती जा रही है। सोने और चांदी के फ्यूचर्स पर रुपये में मजबूती का भी असर पड़ा। विदेश में भी सोने और चांदी में गिरावट दिखी। सोना मामूली 0.02 फीसदी की गिरावट के साथ 4,472.12 डॉलर प्रति औंस पर था। सिल्वर 0.22 फीसदी की कमजोरी के साथ 66.80 डॉलर प्रति औंस था।

इस हफ्ते सोने में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में रिसर्च एनालिस्ट वेदिका नार्वेकर ने कहा कि उतार-चढ़ाव वाले इस हफ्ते में सोना 4,480 डॉलर के आसपास बना हुआ है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने आक्रामक रुख के संकेत दिए हैं। डॉलर में कमजोरी से सोने को सपोर्ट मिला है।

अमेरिका में नॉन-फॉर्म पेरोल्स डेटा का असर सोने पर पड़ेगा

उन्होंने कहा कि ग्लोबल मनी मैनेजर्स बीते कुछ हफ्तों से गोल्ड में पोजीशन बना रहे हैं। गोल्ड ईटीएफ में भी दिलचस्पी बनी हुई है। लेमन में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि नॉन-फॉर्म पेरोल्स रिपोर्ट का असर डॉलर, बॉन्ड यील्ड और सोने और चांदी पर पड़ सकता है। इधर, 3 सितंबर को रुपये में 0.5 फीसदी मजबूती आई। डॉलर के मुकाबले यह 94.48 के लेवल पर बंद हुआ।

क्रूड की ऊंची कीमतों ने भी बुलियन पर बढ़ाया दबाव 

गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स पर क्रूड की ऊंची कीमतों का भी असर पड़ रहा है। ब्रेट क्रूड 95 डॉलर से ऊपर है, जबकि WTI क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार है। इस हफ्ते क्रूड करीब 10 फीसदी चढ़ा है। क्रूड के हाई लेवल पर बने रहने से महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ेगा। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

यह भी पढ़ें: Gold Price: सोने की तेजी पर लगा ब्रेक! जानें आज कितना है 10 ग्राम सोने का भाव और आगे कैसी रह सकती है चाल?

फेडरल रिजर्व की पॉलिसी पर टिकीं निगाहें

इनवेस्टर्स की नजरें फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी है। फेड 16 सितंबर को अपनी पॉलिसी का ऐलान करेगा। इससे पहले अमेरिका में इनफ्लेशन के डेटा आएंगे। अगर इनफ्लेशन में कमी नहीं दिखती है तो फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स का इजाफा कर सकता है। इसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ेगा।

MCX पर सोना ₹1.61 लाख के पार, चांदी ₹2.50 लाख के करीब ,जानें आगे तेजी रहेगी जारी या फिर होगा प्रॉफिट-बुकिंग का दौर शुरू

Gold Silver Price: शुक्रवार को घरेलू फ्यूचर्स मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी हुई। इसकी वजह अंतराष्ट्रीय बाज़ार में बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों में तेज़ उछाल थी, जो कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर इनकी लगातार मांग के कारण हुआ।

एक्सचेंज की वेबसाइट पर मौजूद ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोपहर 4:55 बजे सोना फ्यूचर्स ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी फ्यूचर्स ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रहे थे। ये कीमतें क्रमशः 5 अक्टूबर के सोने और 4 सितंबर के चांदी फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए हैं।

यह तेज़ी तब आई है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमतें लगभग तीन महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे यह धातु लगातार तीसरे हफ़्ते बढ़त की ओर अग्रसर है। इस साल जनवरी में, भारत में सोने की कीमत ₹1.8 लाख प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, जबकि चांदी की कीमत ₹4.25 लाख प्रति किलोग्राम तक उछल गई थी।

सोने और चांदी की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?

कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उतार-चढ़ाव, सुरक्षित निवेश के तौर पर मांग और अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर उम्मीदों ने बुलियन की कीमतों को सहारा दिया है। चॉइस ब्रोकिंग की पिंकी यादव के अनुसार, COMEX पर बढ़त के अनुरूप MCX पर कीमतें ऊंचे स्तर पर खुलीं। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक और बढ़ते राष्ट्रीय कर्ज ने अस्थिरता को बढ़ावा दिया।

उन्होंने यह भी बताया कि तेल की बढ़ती कीमतों (जो ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी हैं) ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जबकि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को और सहारा दिया है।

कमज़ोर डॉलर से बुलियन को सहारा

अमेरिकी डॉलर यहां एक अहम कारक रहा है। डॉलर इंडेक्स 98.8 के आसपास बना हुआ था और साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ रहा था।चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने और चांदी की कीमत डॉलर में तय होती है, इसलिए डॉलर के कमज़ोर होने से अन्य करेंसी रखने वाले खरीदारों के लिए ये सस्ती हो जाती हैं, जिससे मांग बढ़ सकती है और कीमतें ऊपर जा सकती हैं।

रॉयटर्स के अनुसार, गोल्डसिल्वर सेंट्रल के ब्रायन लैन ने कहा कि डॉलर की कमज़ोरी ने कीमती धातुओं को व्यापक रूप से सहारा दिया है, साथ ही यील्ड में भी उल्लेखनीय बदलाव आया है।

ट्रेजरी बायबैक से अनिश्चितता

अमेरिकी ट्रेजरी डेट मैनेजमेंट (कर्ज प्रबंधन) एक और कारक है जिस पर बाज़ार की पैनी नज़र है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि सरकार ट्रेजरी सिक्योरिटीज की रीपरचेज (वापसी खरीद) को और बढ़ा सकती है। उन्होंने पहले ही अगले तिमाही में लंबी अवधि के कर्ज की बायबैक को प्रति ऑपरेशन कम से कम $4 बिलियन तक दोगुना करने की योजना का संकेत दिया था।

इस कदम से बाजार में उतार-चढ़ाव आया है और यील्ड, दरों और कर्ज की व्यापक स्थिति पर नया ध्यान केंद्रित हुआ है।

OCBC के क्रिस्टोफर वोंग ने रॉयटर्स को बताया कि अब ध्यान इस बात पर होगा कि क्या यह कदम टिकाऊ है या नहीं। अमेरिकी डेटा और 27-29 अगस्त को होने वाला जैक्सन होल सिम्पोजियम डॉलर और यील्ड की दिशा तय कर सकते हैं।

फेड की दरे अहम

सोने के आउटलुक के लिए फेड की दरों की उम्मीदें अहम बनी हुई हैं। CME फेडवॉच टूल के अनुसार, बाजार में इस बात की 67% संभावना है कि फेड अगले महीने दरों को स्थिर रखेगा, जबकि दरों में बढ़ोतरी की संभावना 33% है।

चूंकि सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता है, इसलिए ऊंची दरों के कारण ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में इसकी अपील आमतौर पर कम हो जाती है। लेकिन पॉलिसी को लेकर अनिश्चितता, साथ ही यील्ड और डॉलर में बदलाव, सोने की ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) अपील को बढ़ा सकते हैं।

जियोपॉलिटिकल टेंशन से ‘सेफ-हेवन’ की मांग में बढ़त

भू-राजनीतिक जोखिम भी इसे बढ़ावा दे रहे हैं। बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ईरान पर अब तक के सबसे कड़े प्रतिबंध लगाएगा। तेल की आपूर्ति पर इसके असर की चिंता ने कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ा दिया है, जिससे महंगाई की चिंताएं भी बढ़ गई हैं।

ऐसी अनिश्चितता निवेशकों को सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर ले जाती है। यादव ने कहा कि मजबूत निवेश मांग और चीनी केंद्रीय बैंक की लगातार खरीदारी के कारण पूंजी सुरक्षित धातुओं की ओर बढ़ी है।

केंद्रीय बैंक की खरीदारी अभी भी एक अहम आधार

केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग सोने के लिए एक बड़ा संरचनात्मक आधार बनी हुई है, क्योंकि देश अपने रिजर्व में विविधता ला रहे हैं। यादव ने जुलाई में ग्लोबल गोल्ड ETF में आए निवेश और केंद्रीय बैंकों की जारी खरीदारी की ओर भी इशारा किया, जो ज्वैलरी और रिटेल निवेश के अलावा मांग बढ़ाने वाले अन्य कारक हैं।

चांदी की कीमतों में भी तेजी

चांदी भी इस तेजी में शामिल हो गई है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्पॉट कीमतें 1.8% बढ़कर लगभग $69.31 प्रति औंस हो गई हैं। प्लैटिनम 2.6% बढ़कर $1,875.75 और पैलेडियम 1.7% बढ़कर $1,356.59 हो गया।

चांदी पर भी सोने की तरह ही कई मैक्रो-इकोनॉमिक कारकों का असर पड़ता है – जिसमें डॉलर की कमजोरी और दरों को लेकर बदलती उम्मीदें शामिल हैं – लेकिन इसकी औद्योगिक मांग के कारण इसकी कीमतों में स्वतंत्र रूप से भी बदलाव हो सकता है। हाल की तेज़ी से MCX पर चांदी की कीमत ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम तक पहुँच गई है, जिससे यह ₹2.50 लाख के स्तर के बहुत करीब आ गई है।

सोने और चांदी के लिए आगे क्या होगा?

निकट भविष्य में इनकी चाल डॉलर, ट्रेजरी यील्ड, अमेरिका से आने वाले डेटा और फेड के संकेतों पर निर्भर करेगी, जिसमें जैक्सन होल पर खास नज़र रहेगी।

भारतीय निवेशकों के लिए रुपया-डॉलर का रेट भी मायने रखता है। अगर रुपया कमज़ोर होता है, तो डॉलर में कीमत वाली चीज़ें देश में महंगी हो जाती हैं, भले ही ग्लोबल कीमतें स्थिर रहें। इस तेज़ी की वजह से भारत में फिजिकल डिमांड पर कुछ असर पड़ा है, क्योंकि ऊंची कीमतों के कारण रिटेल खरीदार पीछे हट रहे हैं, जबकि चीन में डिमांड तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई है।

MCX पर सोना ₹1,61,405 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2,46,400 प्रति किलोग्राम पर है। अब सवाल यह है कि क्या ये ग्लोबल हालात तेज़ी को बनाए रख पाएंगे या फिर इससे मुनाफावसूली (प्रॉफिट-बुकिंग) का नया दौर शुरू हो जाएगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।