शेयर बाजार में आ सकती है 50% तक तेजी, प्रशांत जैन ने कहा-अगले कुछ हफ्तों में निवेश के बड़े मौके

भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का दौर खत्म होने जा रहा है। यह उन इनवेस्टर्स के लिए शेयरों में निवेश का सही वक्त है, जो मध्यम और लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं। दिग्गज फंड मैनेजर प्रशांत जैन ने यह कहा है। उन्होंने 3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स के सितंबर तिमाही के लेटर में कई महत्वपूर्ण बताई है।

दिसंबर मध्य तक FIIs की बिकवाली सुस्त पड़ जाएगी

प्रशांत जैन (Prashant Jain) को इनवेस्टमेंट का कई दशकों का अनुभव है। उन्होंने कहा है कि अगले तीन साल में भारतीय शेयर बाजारों का रिटर्न 40-50 फीसदी रह सकता है। शॉर्ट टर्म में बाजार में हल्की गिरावट के आसार दिख रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की भारतीय बाजार में बिकवाली के बारे में उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य तक इसमें कमी आ सकती है।

अगले कुछ हफ्तों में शेयर बाजारों में एंट्री का गोल्डन मौका

उन्होंने कहा कि दिसंबर के मध्य के बाद मार्केट्स में रिकवरी शुरू होगी। इसलिए अगले कुछ हफ्ते या महीने शेयर बाजारों में एंट्री का शानदार मौका हो सकता है। पिछले करीब दो सालों से भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट दिखी है। सितंबर 2024 से सितंबर 2026 के बीच Nifty 12.4 फीसदी गिरा है। इस दौरान विदेशी निवेशकों यानी FIIs ने 58 अरब डॉलर से ज्यादा के शेयर बेचे हैं। हालांकि, FY25 और FY26 में इकोनॉमी की ग्रोथ करीब 7.5 फीसदी रही।

इन वजहों से भारतीय बाजार का प्रदर्शन रहा खराब

भारतीय शेयर बाजारों पर कई फैक्टर्स का असर पड़ा है। इनमें जियोपॉलिटिकल टेंशन, अमेरिकी टैरिफ, गोल्ड के आयात में उछाल और क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी शामिल हैं। साथ ही फॉरेन इनवेस्टर्स की दिलचस्पी आर्टफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर कंपनियों से जुड़ी स्टॉक्स में बढ़ी है। इससे विदेशी निवेश उन बाजारों में गया है, जिनमें ऐसी कंपनियां मौजूद हैं।

विदेशी निवेशकों ने AI स्टॉक्स में पैसे लगाने में दिखाई दिलचस्पी

AI और सेमीकंडक्टर सुपरसाइकिल में भारत की मौजूदगी ना के बराबर है। इसलिए विदेशी निवेशकों ने भारत से पैसा निकाल एआई और सेमीकंडक्टर्स वाले बाजारों में लगाए हैं। इस वजह से अमेरिका और कई उभरते बाजारों के मुकाबले भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन खराब रहा है। भारतीय शेयर बाजारों में हालिया बिकवाली की वजह अमेरिकी में 10 साल के बॉन्ड्स की बढ़ती यील्ड है। यह 5 फीसदी के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। इससे अमेरिकी बॉन्ड्स में निवेश का आकर्षण बढ़ा है।

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हर दो साल गिरने के बाद शेयर बाजारों में आती है बड़ी तेजी

3पी इनवेस्टमेंट मैनेजर्स ने अपनी स्टडी में पाया है कि हर दो सालों में 15 फीसदी गिरावट के बाद के अगले तीन सालों में शेयर बाजारों में अच्छी तेजी देखने को मिली है। इस दौरान बाजार ने कम से कम 20 फीसदी रिटर्न दिए हैं। कई शेयरों का रिटर्न तो 50 फीसदी या इससे ज्यादा रहा है। हालांकि, यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आगे भी ऐसा होगा। यह सिर्फ एक ट्रेंड है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Nifty ने 52 हफ्ते का निचला स्तर तोड़ा, पूरे एशिया के शेयर बाजारों में कोहराम, सिंगापुर में सबसे ज्यादा गिरावट

शेयर बाजारों में गुरुवार यानी 8 अक्टूबर को कोहराम मच गया। भारत सहित एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट देखने को मिली। बाजार का सेंटिमेंट कमजोर था। लेकिन, अचानक इतनी बड़ी गिरावट की उम्मीद किसी ने नहीं की थी। अचानक मंदड़ियों ने बाजार को पूरी तरह से अपनी गिरफ्त में ले लिया।

निफ्टी आईटी छोड़ सभी सूचकांक फिसले

Nifty 3:20 बजे 1.71 फीसदी यानी 387 अंक गिरकर 22,216 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.62 फीसदी यानी 1177 अंक गिरकर 71,461 अंक पर था। बैंक निफ्टी में भी 1.04 फीसदी की गिरावट आई। बाजार में गिरावट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि Nifty IT को छोड़ सभी सूचकांक लाल निशान में थे। लेकिन, सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी मेटल इंडेक्स में आई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट दिखी।

एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट 

आज की गिरावट के दायरे में पूरे एशियाई बाजार आ गए। सबसे ज्यादा गिरावट सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज के स्ट्रेट टाइम्स में देखने को मिला। यह 3.49 फीसदी फिसला। दक्षिण कोरिया शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक कोस्पी में 2.62 फीसदी की गिरावट आई। जापान के निक्केई, हांगकांग के हैंगसेंग और चीन के शंघाई कंपोजिट में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली। इससे यह संकेत मिलता है कि आज आई गिरावट किसी एक देश के शेयर बाजार तक सीमित नहीं है।

अमेरिकी शेयर बाजारों में 7 अक्टूबर को आई थी गिरावट 

अमेरिकी शेयर बाजारों में 7 अक्टूबर को गिरावट आई थी। इसका असर 8 अक्टूबर को भारत सहित दूसरे एशिया बाजारों पर दिखा। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पिछली मीटिंग के मिनट्स के आने से पता चलता है कि फेड इस महीने के आखिर में अपनी मीटिंग में इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का फैसला ले सकता है। इस वजह से बुधवार को अमेरिकी बाजार में गिरावट आई। इसके अलावा 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड हाई लेवल पर बनी हुई है।

क्रूड में 4 फीसदी से ज्यादा उछाल ने बाजार पर बढ़ाया दबाव 

क्रूड की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिली है। ब्रेंट क्रूड 4 फीसदी से ज्यादा के उछाल के साथ 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया है। WTI क्रूड में भी 4 फीसदी से ज्यादा तेजी दिखी। इससे यह 91 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया। माना जा रहा है कि इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ेगी। महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ाना शुरू करेंगे। इससे लंबे समय तक इंटरेस्ट रेट हाई लेवल पर बना रह सकता है। इसका असर ग्रोथ पर पड़ सकता है।

शेयर बाजारों में बीते 25 सालों की सबसे लंबी गिरावट, लगातार 8वें हफ्ते गिरे बाजार

शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक 1 अक्तूबर को भी गिरकर बंद हुए। विदेशी फंडों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से तेजी का असर भी बाजार के सेंटिमेंट पर पड़ा। लगातार 8वां हफ्ता है, जब सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट आई है। बीते 25 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है। 1 अक्तूबर इस हफ्ते का अंतिम कारोबारी दिन है। 2 अक्तूबर को गांधी जयंती के मौके पर बाजार बंद हैं।

ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी फिसला 

Sensex 0.8 फीसदी यानी 570 अंक गिरकर 71,909 पर बंद हुआ। Nifty 0.9 फीसदी यानी 198 अंक गिरकर 22,421 पर क्लोज हुआ। आईटी छोड़कर निफ्टी के सभी सेक्टर सूचकांकों में गिरावट आई। ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी गिरा। इसमें बजाज ऑटो में 6 फीसदी गिरावट का बड़ा हाथ रहा। M&M का शेयर भी 2.4 फीसदी गिरकर बंद हुआ।

सिर्फ आईटी इंडेक्स में तेजी 

IT Index में 0.9 फीसदी तेजी आई। इसकी वजह अगस्त में अमेरिका में उम्मीद से कम इनफ्लेशन का डेटा है। इससे इस महीने के आखिर में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने की उम्मीद घटी है। कोटक महिंद्रा बैंक का शेयर 3 फीसदी चढ़ा। इसकी वजह यह है कि बैंक ने अनूप कुमार साहा को नया सीईओ नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल 3 साल के लिए होगा।

FIIs की बिकवाली ने बढ़ाया दबाव

बाजार में गिरावट में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली का बड़ा हाथ है। 30 सितंबर को लगातार पांचवें सत्र एफआईआई ने बिकवाली की। जियोजित इनवेस्टमार्ट्स के वीके विजय कुमार ने कहा कि बीते दो दिनों में एफआईआई की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इस दौरान उन्होंने कुल 20,128 करोड़ रुपये की बिकवाली की है। हालांकि, प्राइमरी मार्केट में वे निवेश कर रहे हैं।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड रिकॉर्ड ऊंचाई पर

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़कर 2002 के बाद के सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है। इससे न सिर्फ अमेरिका में बल्कि दुनियाभर में लोन लेना महंगा होगा। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड्स की यील्ड बढ़कर 5.33 फीसदी पहुंच गई। यह 2007 के बाद के सबसे हाई लेवल पर है। 30 साल की बॉन्ड यील्ड भी 2002 के बाद सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है।

क्रूड ऑयल में तेजी से महंगाई बढ़ने का डर 

क्रूड ऑयल की कीमतों ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाने का काम किया है। 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बाद ब्रेंट क्रूड फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों में आग लगी हुई है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का डर बढ़ा है। महंगाई को काबू करने के लिए फेडरल रिजर्व सहित दुनिया के दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इससे लोन लेना महंगा हो जाएगा।

Sensex में इंट्रा-डे के निचले स्तर से 900 प्वाइंट्स की रिकवरी, 4 वजहों से Nifty फिर 24250 के पार

Share Market Sharp Recovery: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य हमले शुरू होने और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने शुरुआती कारोबार में आज मार्केट में हाहाकार मचा दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 700 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया था तो निफ्टी 24000 के लेवल तक आ गया था। हालांकि फिर मार्केट ने जोरदार वापसी की और निचले स्तर से सेंसेक्स 900 प्वाइंट्स से अधिक रिकवर हुआ और निफ्टी भी उछलकर 24250 के पार पहुंच गया। ब्रोडर लेवल पर भी मार्केट में अच्छी रौनक दिखी और आधे फीसदी से अधिक गिरावट से उबरते हुए निफ्टी स्मॉलकैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 लगभग फ्लैट हो गए।

फिलहाल 12:55 PM पर सेंसेक्स 141.17 प्वाइंट्स यानी 0.18% की बढ़त के साथ 77.710.56 और निफ्टी 23.80 प्वाइंट्स यानी 0.10% के उछाल के साथ 24,230.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 711.96 प्वाइंट्स टूटकर 76,857.43 तक आया था जिससे यह 931.86 प्वाइंट्स रिकवर होकर 77,789.29 तक पहुंच गया तो निफ्टी भी शुरुआती कारोबार में 206.70 प्वाइंट्स गिरकर 24,000.20 तक आया था जिससे 259.60 प्वाइंट्स रिकवर होकर यह 24,259.80 तक पहुंच गया।

Share Market Recovery: ये है वजह

वैल्यू बाइंग

शुरुआती गिरावट का फायदा उठाते हुए निवेशकों ने निचले स्तर पर खरीदारी शुरू की तो मार्केट मे तेजी से रिकवरी की। जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी वीके विजयकुमार का कहना है कि पश्चिमी एशिया में चल रहा संकट न्यू नॉर्मल बन चुका है लेकिन ऑयस मार्केट में जैसी स्थिति मार्च में थी, वैसा हाहाकार अभी नहीं है। वीके विजयकुमार का मानना है कि जब तक एक बैरल ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 के नीचे है, मार्केट पर अधिक असर पड़ने की आशंका नहीं है।

विदेशी निवेशकों की खरीदारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने शुक्रवार को ₹2,603.72 करोड़ के शेयरों की नेट खरीदारी की। इस महीने 10 जुलाई तक विदेशी निवेशकों ने सेकंडरी मार्केट में ₹5,155 करोड़ की नेट खरीदारी की। प्राइमरी मार्केट और अन्य में ₹10,001 करोड़ की खरीदारी को मिलाकर जुलाई में इस महीने अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय मार्केट में ₹15,156 करोड़ का निवेश किया। जियोजीत इंवेस्टमेंट्स के चीफ इंवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ वीके विजयकुमार का कहना है कि विदेशी निवेशकों की खरीदारी मार्केट के लिए पॉजिटिव है। उनका कहना है कि भारत के बेहतर होते मैक्रो-इकनॉमिक हालात और रुपये में स्थिरता ने विदेशी निवेशकों के मूड को बदला है चिप ट्रेड में कमजोरी और दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में विदेशी निवेशकों की भी भारत में उनका निवेश बढ़ा है।

आईटी स्टॉक्स में रौनक

शुरुआती कारोबार में जब मार्केट में कोहराम मचा हुआ था तो भी आईटी सेक्टर में शानदार रौनक थी। टीसीएस के उम्मीद से बेहतर कारोबारी नतीजे ने आईटी सेक्टर में रौनक बिखेर दी। निफ्टी आईटी आधे फीसदी से अधिक उछल पड़ा और इसके 10 में से 8 स्टॉक्स मजबूत हुए हैं। देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विसेज कंपनी टीसीएस के शेयर करीब 3% उछल पड़े।

अहम टेक्निकल सपोर्ट लेवल

निफ्टी ने 24000 के लेवल पर जाने के बाद वहां से फटाक से वापसी की। निफ्टी के लिए यह अहम टेक्निकल सपोर्ट जोन है। एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पालवीय (Rajesh Palviya) के मुताबिक निफ्टी के लिए 24000 तात्कालिक सपोर्ट लेवल है जो अगर टूटा तो यह 23,800 तक फिसल हो सकता है।

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