Brent Crude 111 डॉलर के करीब पहुंचा, एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट

क्रूड ऑयल की कीमतों में 20 अक्तूबर को जोरदार तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 1.39 फीसदी की तेजी के साथ 111.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.78 फीसदी चढ़कर 100 डॉलर के पार निकल गया। यह क्रूड ऑयल का बीते 5 महीनों का सबसे हाई लेवल है। क्रूड की यह तेजी न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों को बड़ी चोट पहुंचा सकती है।

20 मई के बाद पहली बार क्रूड 111 डॉलर पर

क्रूड ऑयल की कीमतों में नई तेजी की वजह सऊदी अरब में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती विद्रोहियों के हमले हैं। गल्फ में भी ऑयल टैंकर्स सहित जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है। 20 मई के बाद पहली बार क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। हालांकि, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रही हैं।

ब्रेंट क्रूड में जल्द ज्यादा नरमी का अनुमान नहीं 

ING के एनालिस्ट्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में क्रूड की कीमतों के आउटलुक के बारे में बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों को मौजूदा लेवल पर सपोर्ट मिल रहा है। स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बढ़ा है। हालांकि, क्रूड की सप्लाई जारी है, जिससे रिस्क प्रीमियम में धीर-धीरे कमी आ सकती है। लेकिन, फिलहाल कीमतों में नरमी आने के संकेत नहीं हैं।

गल्फ में लगातार हमलों का क्रूड की सप्लाई पर असर

केपलर (kpler) ने अपनी रिपोर्ट में सोमवार को बताया था कि बीते दो हफ्तों में कम से कम 18 जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बना हुआ है। इधर, हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब में एनर्जी, एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अरामको की साइट को भी निशाना बनाया गया है।

हूती विद्रियों का सऊदी अरब के इंफ्रा पर हमला जारी

हूती विद्रोहियों ने सोमवार को यमन में सुरक्षा बलों के एक प्रशिक्षण शिविर को निशान बनाया, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन नए हमलों से मध्यपूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ा है। साथ ही इसका असर एनर्जी की सप्लाई पर पड़ रहा है। इस वजह से पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

अमेरिका डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौते को मजबूर

उधर, अमेरिका में क्रूड ऑयल का रिजर्व पिछले हफ्ते गिरने का अनुमान है। अमेरिका में पहले से ही ऑयल खासकर डीजल की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं। इससे अमेरिका को डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौता करना पड़ा है। लेकिन, इससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्रूड में उछाल सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खराब खबर है।

भारत सहित दुनियाभर में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा

महंगे क्रूड की वजह से दुनियाभर में महंगाई बेकाबू हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों को इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि की थी। इस महीने की 28 तारीख को फेड की पॉलिसी आने वाली है। महंगाई को काबू में करने के लिए फेड एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इधर, भारत में इस महीने की शुरुआत में RBI ने रेपो रेट रेट 0.25 फीसदी बढ़ाया था। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है।

20 अक्टूबर को एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

क्रूड में उछाल का असर 20 अक्तूबर को शेयर बाजारों पर देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार दशहरा के मौके पर बंद हैं। लेकिन, दूसरे एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 1.63 फीसदी नीचे चल रहा था। सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स 0.25 फीसदी गिरकर चल रहा था। हैंगसेंग में 1.38 फीसदी की गिरावट दिखी। ताइवान का सूचकांक 1.14 फीसदी नीचे चल रहा था। दक्षिण कोरिया के बाजार कोस्पी में 3.88 फीसदी की गिरावट दिखी।

4 वजहों से Sensex में 766 प्वाइंट्स की रिकवरी, 25 सितंबर के बाद Nifty फिर 23100 के पार

Share Market Rally: वैल्यू बाइंग और आईटी सेक्टर में खरीदारी के दम पर शुरुआती उठा-पटक से उबरते हुए सेंसेक्स और निफ्टी ने निचले स्तर से शानदार रिकवरी की। दिन के निचले स्तर से सेंसेक्स 766 प्वाइंट्स ऊपर चढ़ा तो निफ्टी भी फिर 23100 के पार पहुंच गया। इससे पहले निफ्टी ने आखिरी बार 25 सितंबर को 23100 का लेवल छुआ था और इसी के पार बंद भी हुआ था। ब्रोडर लेवल पर भी तेज रिकवरी हुई है। निफ्टी मिडकैप 100 आधे फीसदी की गिरावट से उबरते हुए फ्लैट हो गया तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 आधे फीसदी की गिरावट से रिकवर होते हुए ग्रीन जोन में पहुंच गया।

अब घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो फिलहाल 10:39 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 398.14 प्वाइंट्स यानी 0.54% की बढ़त के साथ 74,713,75 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 131.35 प्वाइंट्स यानी 0.57% के उछाल के साथ 23,128.70 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से 765.79 प्वाइंट्स रिकवर होकर 74,778.78 और निफ्टी दिन के निचले स्तर से 236.05 प्वाइंट्स उबरते हुए 23,149.85 तक पहुंच गया। इससे पहले सेंसेक्स 302.62 प्वाइंट्स गिरकर 74,012.99 और निफ्टी 83.55 प्वाइंट्स फिसलकर 22,913.80 तक आ गया।

Share Market Rally: ये है वजह

वैल्यू बाइंग

मार्केट में शुरुआती गिरावट का निवेशकों ने फायदा उठाते हुए खरीदारी की, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला।

IT Sector ने खींच लिया ऊपर

आईटी सेक्टर ने मार्केट को आज शानदार तरीके से सपोर्ट दिया और निफ्टी आईटी फिलहाल 3% से अधिक मजबूत है। साथ ही बैंकिंग शेयरों ने भी शानदार वापसी की और मार्केट को सपोर्ट किया। निफ्टी पीएसयू बैंक शुरुआती गिरावट से उबरते हुए आधे फीसदी से अधिक मजबूत हुआ और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी बढ़त है। निफ्टी मेटल तो 1% से अधिक ऊपर चढ़ गया और निफ्टी फार्मा भी ग्रीन है। हालांकि निफ्टी एफएमसीजी अभी भी आधे फीसदी कमजोर है।

कच्चे तेल में गिरावट

सैंक्शन लगे देशों से तेल की सप्लाई पर अमेरिकी प्रतिबंधों के ढील की संभावना पर कच्चा तेल नरम पड़ा, जिससे मार्केट को सपोर्ट मिला। ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड फिसलकर प्रति बैरल $105 के करीब आ गया।

टेक्निकल रीजन

एनालिस्ट्स के मुताबिक जब तक निफ्टी 22,900 के ऊपर है, मार्केट में तेजी की गुंजाइश रहेगी। बजाज ब्रोकरिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि निफ्टी अब 23000-23100 के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर टिकता है तो यह 23500 की तरफ बढ़ सकता है। वहीं अगर इस रेजिस्टेंस के ऊपर निफ्टी टिक नहीं पाता है तो 22,500-23,100 की रेंज में कंसालिडेशन दिख सकता है। पबित्रों के मुताबिक जब तक निफ्टी 22,500 के पार है, नियर टर्म में इसमें पुलबैक रैली आ सकती है।

कोटक नियो के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का कहना है कि इंट्रा-डे में मार्केट आउटलुक पॉजिटिव है और गिरावट पर खरीदारी तो रैली पर सेलिंग की स्ट्रैटेजी अपनाई जा सकती है। श्रीकांत का कहना है कि निफ्टी/सेंसेक्स के लिए नीचे की तरफ 22,875/74,000 और 22,800/73,700 अहम सपोर्ट जोन हैं तो दूसरी तरफ ऊपर की तरफ 23,100–23,200/74,500–74,800 अहम रेजिस्टेंस एरिया हैं। हालांकि श्रीकांत का यह भी कहना है कि अगर मार्केट 22,800/73,700 के नीचे आता है तो सेंटिमेंट बदल सकता है और ट्रेडर्स अपनी लॉन्ग पोजिशन से बाहर निकल सकते हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोना ₹900 रुपये गिरा, चांदी की कीमतों में बदलाव नहीं

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में 23 सितंबर को सोने में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई। यह 900 रुपये गिरकर 1,54,000 रुपये पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में गिरावट का असर इसकी घरेलू कीमतों पर पड़ा। हालांकि, चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

डॉलर इंडेक्स में मजबूती से सोने पर दबाव

एक्सपर्ट्स का कहना है कि दिल्ली में सोने की कीमतों पर डॉलर में मजबूती का भी असर पड़ा। चांदी दिल्ली सर्राफा बाजार में 2.42 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर अपरिवर्तित रही। एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी ने कहा, “बुधवार को सोने में कमजोरी दिखी, जिसकी वजह हायर लेवल पर ट्रेडर्स की मुनाफावसूली है।”

ज्यादा कीमत की वजह से गणेश चतुर्थी पर सेल्स घटी

उन्होंने कहा कि बुधवार को डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.85 पर पहुंच गया, जिसका निगेटिव असर सोने की कीमतों पर पड़ा। पिछले कुछ सत्रों में सोने में गिरावट आई है, लेकिन एक साल पहले के मुकाबले इसकी कीमतें काफी ज्यादा हैं। चॉइस वेल्थ के अक्षत गर्ग ने कहा कि गणेश चुतर्थी पर सोने की सेल्स (वॉल्यूम में) 15 फीसदी कम रही। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि सोने में लोगों की दिलचस्पी घटी है।

एक साल पहले के मुकाबले सोना 60% महंगा

गर्ग ने कहा कि एक साल पहले के मुकाबले घरेलू बाजार में सोने की कीमतें करीब 60 फीसदी चढ़ी हैं। एक साल पहले सोने का भाव करीब 98,000 रुपये प्रति 10 ग्राम था। हालांकि, कीमतें बढ़ने का असर लोगों की खरीदारी के तरीके पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सोने की मौजूदा कीमत पर किसी परिवार के लिए अच्छे वजन का नेकलेस खरीदना आसान नहीं रह गया है। इसलिए लोग या तो हल्के वजन वाली ज्वेलरी खरीद रहे हैं या पुरानी ज्वेलरी को एक्सचेंज कर नई ज्वेलरी ले रहे हैं।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में बड़ी गिरावट 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में बड़ी गिरावट आई। सोना 1.64 फीसदी गिरकर 4,292 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी 3.35 फीसदी गिरकर 64.79 डॉलर प्रति औंस पर आ गई है। इसकी वजह क्रूड में उछाल हो सकता है। ब्रेंट क्रूड का भाव एक बार फिर 2 फीसदी चढ़कर 101 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया।

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी, $102 के नीचे आया; सऊदी अरब की पाइपलाइन से मिली राहत

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में 17 सितंबर को भी गिरावट जारी रही। संकेत हैं कि मध्य पूर्व में सप्लाई पर बना दबाव अब कुछ कम हो सकता है। इसकी बड़ी वजह सऊदी अरब की एक अहम पाइपलाइन का कुछ हिस्सा फिर से चालू होना है।

Brent crude $102 प्रति बैरल से नीचे आ गया। बुधवार को भी इसमें 2.7% की गिरावट आई थी। सऊदी अरब अगले कुछ दिनों में अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की करीब आधी क्षमता बहाल करने की कोशिश कर रहा है।

ड्रोन हमलों के बाद पिछले हफ्ते इस पाइपलाइन को बंद कर दिया गया था। अब इसे धीरे-धीरे शुरू करने की तैयारी है। सऊदी अरब ने एशियाई रिफाइनरों को ज्यादा तेल भी बेचा है। इसकी डिलीवरी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के ठीक बाहर की जगहों पर की जा रही है।

इस साल 70% से ज्यादा चढ़ा तेल

कच्चे तेल की कीमत इस साल 70% से ज्यादा बढ़ चुकी है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ा है। इसी दबाव को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरें बढ़ाईं। फेड ने आगे भी सख्ती के संकेत दिए हैं।

हालांकि, गुरुवार को तस्वीर थोड़ी बदली। शेयर बाजार में तेजी आई। दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और तेल की कीमतों में गिरावट रही।

मध्य पूर्व में खतरा अभी टला नहीं

तेल की सप्लाई को लेकर जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध से मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध भी जारी है।

ट्रेडर्स की नजर हूती लड़ाकों पर भी है। वे लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में मौजूद Bab el-Mandeb Strait की ओर बढ़ रहे हैं। इस बीच सऊदी अरब के तेल और शिपिंग से जुड़े ठिकानों पर हमले भी बढ़े हैं।

Yanbu से तेल की लोडिंग भी रुकी थी

इस हफ्ते की शुरुआत में तेल की कीमत करीब चार महीने के हाई पर पहुंच गई थी। शिपिंग इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब के Red Sea एक्सपोर्ट हब Yanbu से कच्चे तेल की लोडिंग रोक दी गई थी।

रियाद ने यूरोप के कुछ ग्राहकों की तेल डिलीवरी भी रद्द की थी। यह फैसला ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर हुए हमलों के बाद लिया गया। यही पाइपलाइन Yanbu तक कच्चा तेल पहुंचाती है।

पाइपलाइन लंबे समय बंद रही तो बड़ा असर

ट्रेडर्स के मुताबिक, अगर पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है तो दुनिया की करीब 4% तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

सऊदी अरब ने अभी यह नहीं बताया है कि पाइपलाइन पूरी तरह कब चालू होगी। हालांकि, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री Chris Wright ने मंगलवार को CNBC से कहा था कि अगले कुछ दिनों में इस पाइपलाइन से कच्चे तेल की सप्लाई फिर शुरू हो सकती है।

FII Selling: FII की बिकवाली नहीं रुक रही! बाजार चढ़ा, फिर भी ₹3209 करोड़ के शेयर बेचे

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SEBI चेयरमैन का बड़ा बयान, कहा-CAS का सिस्टम बना रहेगा, आगे लिक्विडिटी बढ़ेगी

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बारे में 10 सितंबर को बड़ी बात कही। उन्होंने कहा कि CAS की व्यवस्था जारी रहेगी और सेबी सिर्फ इस पर विचार कर रहा है कि क्या एफएंडओ सेटलमेंट प्राइस के लिए क्या कोई दूसरा तरीका हो सकता है।

अगस्त की शुरुआत में लागू हुआ था CAS

Closing Auction Session यानी CAS का सिस्टम पिछले महीने की शुरुआत में लागू हुआ था। इसके बाद बाजार के प्रमुख सूचकांकों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। मुंबई में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट से इतर पत्रकारों से बातचीत में पांडेय ने कहा, “MSCI ने यह माना है कि CAS के तहत हाल में हुई रीबैलेंसिंग में कोई दिक्कत नहीं आई। CAS लागू रहेगा। एक्सपायरी के दिन डेरिवेटिव्स के लिए CAS के तहत क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके पर फिर से विचार हो रहा है।”

CAS की शुरुआत में मुश्किल आती है

उन्होंने कहा कि कई देशों के शेयर बाजारों में CAS लागू करने के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। हर जगह शुरुआत में लिक्विडिटी को लेकर प्रॉब्लम आई है। आने वाले समय में लिक्विडिटी बढ़ेगी। सेबी चेयरमैन का यह बयान काफी अहम है, क्योंकि 10 सितंबर को CAS के दौरान निफ्टी 50 और बीएसई सेंसेक्स का इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस कुछ समय के लिए 1 फीसदी से ज्यादा उछल गया था।

सूचकांकों में उतार-चढ़ाव की समस्या

8 सितंबर को भी CAS के दौरान निफ्टी का इंडिकेटिव क्लोजिंग प्राइस 1.8 फीसदी तक गिर गया था, जबकि CAS से पहले 3:15 बजे निफ्टी 0.58 फीसदी गिरकर बंद हुआ था। पिछले हफ्ते भी सेबी ने कहा था कि वह डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट प्राइस तय करने के तरीके पर फिर से विचार करेगा। उसने कहा था कि उसे इस बारे में मार्केट पार्टिसिपेंट्स से फीडबैक मिले हैं। वह उन पर विचार करेगा।

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कई एशियाई देशों के शेयर बाजारों में CAS का सिस्टम

सेबी ने 3 अगस्त को CAS की शुरुआत की थी। इसका मकसद सिक्योरिटीज के क्लोजिंग प्राइसेज तय करना है। CAS कारोबार के आखिर में कुछ समय का एक ऑक्शन है, जिसमें किसी शेयर के ऑफिशियल प्राइस को तय करने के लिए बाय और सेल (buy and sell) ऑर्डर्स मैच कराए जाते हैं। यह व्यवस्था चीन, हांगकांग, ताइवना और दक्षिण कोरिया सहित कई एशियाई देशों के शेयर बाजारों में लागू है।

Brent Crude 105 डॉलर के पार पहुंचा, अमेरिका-ईरान में बढ़ते टेंशन का असर

क्रूड ऑयल की कीमतों में 10 सितंबर को भी तेजी जारी रही। ब्रेंट क्रूड का प्राइस 105 डॉलर पर पहुंच गया। इस साल 25 मई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ रहा है।

चीन की क्रूड की खरीदारी का भी कीमतों पर असर

क्रू्ड ऑयल की कीमतों में तेजी की कुछ दूसरी वजहें भी हैं। चीन ने फिर से क्रूड ऑयल की अच्छी खरीदारी शुरू कर दी है। उधर, सऊदी अरब ने कहा है कि उसके क्रूड के उत्पादन में तेज गिरावट आई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी युद्धपातों पर मिसाइल से हमले किए हैं। इससे हालात लगातार खराब होने की तरफ बढ़ रहे हैं।

WTI क्रूड की कीमतें भी 100 डॉलर के पार

भारतीय समय के मुताबिक, शाम 6:45 बजे ब्रेंट क्रूड का प्राइस 4 फीसदी उछलकर 105.41 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। WTI क्रूड भी 4.41 फीसदी उछाल के साथ 100 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ लड़ाई नवंबर में मिड टर्म इलेक्शंस के बाद खत्म होगी। इधर, ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिका हमले जारी रखता है तो वह जवाबी हमले करेगा।

अगस्त के लेवल से 30 फीसदी चढ़ चुका है क्रूड

अगस्त की शुरुआत के मुकाबले ब्रेंट क्रूड की कीमत 30 फीसदी चढ़ चुकी है। बताया जाता है कि सऊदी अरब में क्रूड का उत्पादन गिरकर इस साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इसकी वजह हूती विद्रोहियों की धमकी है, जिसमें कहा गया है कि वे सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों से गुजरने वाले ऑयल टैंकर्स को निशाना बनाएंगे।

चीन की खरीदारी पर निर्भर करेगी कीमतें 

एनालिस्ट्स का कहना है कि मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने की वजह से ब्रेंट फिर से 100 डॉलर के पार हो गया है, लेकिन इसका इस लेवल पर टिके रहना चीन के रुख पर निर्भर करेगा। चीन दुनिया में क्रूड ऑयल का सबसे बड़ा इंपोर्टर है। उसने हाल के कुछ महीनों में क्रूड की खरीदारी बढ़ाई है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ा है।

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क्रूड में उछाल भारत के लिए चिंता की बात

क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए चिंता की बात है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है। क्रूड महंगा होने का असर भारत के इंपोर्ट बिल पर पड़ता है। लंबे समय तक क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बने रहने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियां फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा सकती हैं। साथ ही सीएनजी और पीएनजी के दाम भी बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा।

Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार, भारत के लिए बढ़ेगी मुसीबत, शेयर बाजार पर भी असर

Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड का प्राइस आखिरकार 9 सितंबर को 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया। 24 जुलाई के बाद पहली बार ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार गया है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर पड़ रहा है। अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान मध्यपूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों के ठिकानों को निशाना बना रहा है।

अमेरिका का ईरान के 5 ऑयल टैंकर्स ध्वस्त करने का दावा

8 सितंबर को अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरान के पांच ऑयल टैंकर्स को ध्वस्त कर दिया है। उसने कहा कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमला किया था। इसके जवाब में उसने ईरानी ऑयल टैंकर्स को निशाना बनाया है। इससे मध्यपूर्व में एक बार फिर से स्थिति काफी गंभीर हो गई है।

ईरान  ने भी जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन पर किए हमलें

अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने जॉर्डन पर बैलेस्टिक मिसाइल से हमले किए हैं। उसने फारस की खाड़ी में दूसरे जहाजों को भी चेतावनी जारी की है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने IRGC को उद्धृत करते हुए कहा है कि कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के करीब स्थित सभी जहाजों के क्रू को अपने जहाज छोड़ देने चाहिए, क्योंकि उन्हें निशाना बनाया जाएगा।

क्रूड का भाव बीते 7 हफ्तों के सबसे ऊंचे लेवल पर 

क्रूड ऑयल की कीमतें बीते सात हफ्तों में सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई हैं। एक हफ्ते में क्रूड का भाव 4 फीसदी चढ़ा है। बीते एक महीने में यह 14 फीसदी चढ़ा है। इस साल यानी 2026 में क्रूड का भाव अब तक 64 फीसदी उछला है। इधर, इंडिया का क्रूड बास्केट 100 डॉलर के पार हो गया है। इससे सरकार पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

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क्रूड में उछाल से भारत के लिए बढ़ सकता है संकट 

भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी ऑयल इंपोर्ट करता है। इसका बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत आता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते सप्लाई बाधित होने से क्रूड की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं। क्रूड में उछाल से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा। इस साल अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से भारत में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी की कीमतें बढ़ाई हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने अपने लॉस कम करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई हैं।

शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा असर

क्रूड में उछाल का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ेगा। खासकर पेंट, टायर, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर इसका असर पड़ेगा। एविएशन कंपनियों पर भी इसका असर पड़ेगा। एटीएफ की कीमतें बढ़ने से उनका कुल खर्च बढ़ जाएगा। भारतीय शेयर बाजारों पर पहले से दबाव है। 9 सितंबर को लगातार तीसरे दिन बाजार में बड़ी गिरावट दिखी।

Crude Oil: गोल्डमैन सैक्स ने ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर पर जाने का जताया अनुमान, ऐसा हुआ तो मचेगी बड़ी तबाही

क्रूड ऑयल की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं। 8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 1.49 फीसदी उछाल के साथ 98.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.72 फीसदी उछाल के साथ 93.97 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। 7 सितंबर को भी क्रूड में तेजी दिखी थी। जुलाई के बाद क्रूड़ की कीमतें सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह अच्छी खबर नहीं है, जो अपनी जरूरत का ज्यादा हिस्सा इंपोर्ट करता है।

4 मई को ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर पर पहुंच गया था

गोल्डमैन सैक्स ने क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। दिग्गज अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऑयल टैंकर्स पर हमले नहीं रुकते हैं तो क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। 28 मार्च को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों में उछाल दिखा है। 4 मई को भाव 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते में रुकावटें बढ़ रहीं

गोल्डमैन सैक्स में कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड Daan Struyven ने कहा, “पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि जहाजों की आवाजाही के लिहाज से रुकावटें बढ़ रही हैं।” अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर मामला फंसा हुआ है। सामान्य दिनों में इस रास्ते दुनिया का करीब 20 फीसदी ऑयल गुजरता है। लेकिन, अमेरिका और ईरान की लड़ाई की वजह से इस रास्ते ऑयल की सप्लाई नाममात्र की रह गई है।

महंगा क्रूड भारत के लिए बढ़ा सकता है मुसीबत

8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब बढ़ता दिखा। अगर यह 100 डॉलर पार करता है तो 23 जुलाई के बाद ऐसा पहली बार होगा। अमेरिका और ईरान के बीच जिस तरह से टकराव बना हुआ है, उससे क्रूड के 100 डॉलर पर पहुंच जाने के आसार दिखते हैं। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर के पार जाना भारत के लिए खराब है। भारत क्रूड की करीब 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है।

इस साल 4 बार बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 71 डॉलर पर था। इसका मतलब है कि यह उस लेवल से करीब 40 फीसदी ऊपर है। इससे पहले भारत में महंगे क्रूड की वजह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। अगर जल्द भाव नीचे नहीं आता है तो फिर से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी के दाम बढ़ा सकती हैं। इसका असर परिवारों के बजट पर पड़ेगा।

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महंगे क्रूड की वजह से महंगाई को मिलेगी हवा

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल का सीधा असर दूसरी चीजों और सर्विसेज की कीमतों पर पड़ता है। पहले से ही विमान किराया आसमान में चल रहा है। पिछले छह महीनों में दूध, और ब्रेड सहित रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। रेस्टॉरेंट्स में भी खाना महंगा हो गया है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से लोगों के ऑफिस आने-जाने का खर्च बढ़ा है। पिछले कई महीनों से रिटेल इनफ्लेशन में लगातार इजाफा हो रहा है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो आरबीआई महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

Crude Oil Price: ब्रेंट क्रूड 92 डॉलर के पार, इन कंपनियों के शेयर फिसले, ONGC और ऑयल इंडिया में उछाल

Crude Oil Price: क्रूट ऑयल की कीमतें फिर से चढ़ने लगी हैं। इसकी वजह मध्यपूर्व में बढ़ता तनाव है। करीब एक महीने बाद अमेरिका के हमले और ईरान के जवाबी हमले की खबर है। ब्रिटिश मेरिटाइम एजेंसी यूनाइटेड किंग्डम मेरिटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक ट्रैंकर पर हमले की खबर दी है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जोरदार हमले की धमकी दी है। इससे ब्रेंट क्रूड का प्राइस 1 सितंबर को 92 डॉलर के पार चला गया।

शेयरों पर दिखा क्रूड में उछाल का असर 

क्रूड में उछाल का असर शेयर बाजारों पर दिखा। क्रूड ऑयल का इस्तेमाल करने वाली कई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई। इनमें पेंट बनाने वाली कंपनियां, एयरलाइंस कंपनियां और टायर कंपनियां शामिल थी। कच्चे तेल की कीमतों के लगातार ऊंचे लेवल पर बने रहने से इन कंपनियों की प्रोडक्शन कॉस्ट बढ़ जाती है। इसका असर उनके मार्जिन पर पड़ता है।

एशियन पेंट्स का शेयर 3.42 फीसदी गिरा

Asian Paints के शेयरों में 1 सितंबर को बड़ी गिरावट दिखी। यह शेयर 3.42 फीसदी गिरकर 2,562 पर बंद हुआ। बर्जर पेंट्स का शेयर भी 1.28 फीसदी गिरकर 491.40 रुपये पर बंद हुआ। JSW Dulux का शेयर 0.46 फीसदी गिरा। Shalimar Paints का शेयर 1.05 फीसदी फिसला।

इंडिगो के शेयर में आई 3.77 फीसदी गिरावट 

इंटरग्लोब एविएशन का शेयर 3.77 फीसदी गिरकर 5,036 रुपये पर बंद हुआ। स्पाइसजेट का शेयर 3.20 फीसदी की कमजोरी के साथ 9.99 रुपये पर क्लोज हुआ। एयरलाइंस कंपनियों की कुल ऑपरेशन कॉस्ट में एटीएफ की बड़ी हिस्सेदारी होती है। क्रूड ऑयल महंगा होने पर एटीएफ की कीमतें भी बढ़ जाती है। इससे एयरलाइंस कंपनियों का कुल खर्च बढ़ता है।

टायर बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव

टायर बनाने वाली कंपनियों में जेके टायर, गुडईयर इंडिया, सीएट के शेयरों में गिरावट आई। गुडईयर का शेयर 0.65 फीसदी गिरकर 738 रुपये पर बंद हुआ। Ceat का शेयर 0.058 फीसदी गिरकर 3,417 पर बंद हुआ। जेके टायर का शेयर 1.41 फीसदी गिरकर 373 रुपये पर बंद हुआ। टायर बनाने में क्रूड ऑयल का इस्तेमाल होता है।

IOCL, HPCL, BPCL के शेयर भी फिसले 

ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के शेयरों में भी 1 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) का शेयर 1.89 फीसदी गिरकर 136.50 रुपये पर बंद हुआ। बीपीसीएल का शेयर 2.38 फीसदी फिसला। HPCL का शेयर भी 0.93 फीसदी की गिरावट के साथ 362.35 रुपये पर क्लोज हुआ। कच्चा तेल महंगा होने से इन कंपनियों की कॉस्ट बढ़ जाती है।

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ONGC, Oil India के शेयरों में उछाल

तेल का उत्पादन करने वाली ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों के शेयरों में तेजी दिखी। ONGC का शेयर 2.02 फीसदी चढ़कर 236.49 रुपये पर बंद हुआ। Oil India का शेयर 1.31 फीसदी चढ़कर 489.50 रुपये पर पहुंच गया। क्रूड महंगा होने से अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा होता है।

Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड 4500 डॉलर के करीब, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी का असर गोल्ड पर दिखा है। 19 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड 4,571.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हालांकि, 20 अगस्त को इसमें थोड़ी नरमी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सवाल है कि लंबे समय बाद गोल्ड में आई तेजी पर निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड में आई तेजी

गोल्ड में तेजी की वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 4.64 पर आ गई है। 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.18 फीसदी पर आ गई है। इसका सीधा असर गोल्ड की कीमतों पर पड़ा है। डॉलर इंडेक्स में नरमी से भी गोल्ड को सपोर्ट मिला है।

कई देशों के केंद्रीय बैंक खरीद रहे हैं गोल्ड

बोनांजा में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव ने कहा, “बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी सोने के लिए फेवरेबल है। इससे लंबी अवधि के बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी।” हालांकि, गोल्ड में तेजी की वजह सिर्फ बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं है। सुरक्षित निवेश के लिए सोने में इनवेस्टमेंट बढ़ा है। दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोने में खरीदारी कर रहे हैं।

दिल्ली में गोल्ड की कीमतें तीन महीने की ऊंचाई पर 

20 अगस्त को दिल्ली सर्राफा बाजार में गोल्ड में जोरदार तेजी दिखी। यह 4,300 रुपये के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह घरेलू बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे हाई लेवल है। चांदी में भी अच्छी खरीदारी से तेजी देखने को मिली।

निवेशकों को फिलहाल क्या करना चाहिए

वीटी मार्केट्स में मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी के गोल्ड के लिए सपोर्टिव रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि निवेशकों के सोने में तेजी के पीछे भागने में रिस्क है। इनवेस्टर्स सोने में अपना निवेश जारी रख सकते हैं।

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गिरावट पर गोल्ड में खरीदारी की सलाह

उन्होंने कहा कि नए निवेशक सोने में गिरावट के मौके का इस्तेमाल निवेश के लिए कर सकते हैं। कीमतें हाई रहने पर उन्हें निवेश करने से बचने की सलाह है। आगे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ट्रेंड, फेडरल रिजर्व के संकेतों और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।