Brent Crude 111 डॉलर के करीब पहुंचा, एशियाई शेयर बाजारों में तेज गिरावट

क्रूड ऑयल की कीमतों में 20 अक्तूबर को जोरदार तेजी दिखी। ब्रेंट क्रूड 1.39 फीसदी की तेजी के साथ 111.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 1.78 फीसदी चढ़कर 100 डॉलर के पार निकल गया। यह क्रूड ऑयल का बीते 5 महीनों का सबसे हाई लेवल है। क्रूड की यह तेजी न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों को बड़ी चोट पहुंचा सकती है।

20 मई के बाद पहली बार क्रूड 111 डॉलर पर

क्रूड ऑयल की कीमतों में नई तेजी की वजह सऊदी अरब में इंफ्रास्ट्रक्चर पर हूती विद्रोहियों के हमले हैं। गल्फ में भी ऑयल टैंकर्स सहित जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया है। 20 मई के बाद पहली बार क्रूड का भाव इस लेवल पर पहुंचा है। हालांकि, फरवरी के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रही हैं।

ब्रेंट क्रूड में जल्द ज्यादा नरमी का अनुमान नहीं 

ING के एनालिस्ट्स ने मंगलवार को अपनी रिपोर्ट में क्रूड की कीमतों के आउटलुक के बारे में बताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि क्रूड की कीमतों को मौजूदा लेवल पर सपोर्ट मिल रहा है। स्थिति नाजुक बनी हुई है, जिससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बढ़ा है। हालांकि, क्रूड की सप्लाई जारी है, जिससे रिस्क प्रीमियम में धीर-धीरे कमी आ सकती है। लेकिन, फिलहाल कीमतों में नरमी आने के संकेत नहीं हैं।

गल्फ में लगातार हमलों का क्रूड की सप्लाई पर असर

केपलर (kpler) ने अपनी रिपोर्ट में सोमवार को बताया था कि बीते दो हफ्तों में कम से कम 18 जहाजों पर हमलों की खबर है। इससे क्रूड पर रिस्क प्रीमियम बना हुआ है। इधर, हूती विद्रोहियों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने सऊदी अरब में एनर्जी, एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ ही सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अरामको की साइट को भी निशाना बनाया गया है।

हूती विद्रियों का सऊदी अरब के इंफ्रा पर हमला जारी

हूती विद्रोहियों ने सोमवार को यमन में सुरक्षा बलों के एक प्रशिक्षण शिविर को निशान बनाया, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए। इन नए हमलों से मध्यपूर्व में अस्थिरता का खतरा बढ़ा है। साथ ही इसका असर एनर्जी की सप्लाई पर पड़ रहा है। इस वजह से पिछले कई दिनों से ब्रेंट क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

अमेरिका डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौते को मजबूर

उधर, अमेरिका में क्रूड ऑयल का रिजर्व पिछले हफ्ते गिरने का अनुमान है। अमेरिका में पहले से ही ऑयल खासकर डीजल की कीमतें काफी ऊपर चल रही हैं। इससे अमेरिका को डीजल की सप्लाई के लिए रूस से समझौता करना पड़ा है। लेकिन, इससे ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। क्रूड में उछाल सिर्फ अमेरिका के लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खराब खबर है।

भारत सहित दुनियाभर में महंगाई के बेकाबू होने का खतरा

महंगे क्रूड की वजह से दुनियाभर में महंगाई बेकाबू हो सकती है। इससे केंद्रीय बैंकों को इंटरेस्ट रेट में बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने पिछले महीने इंटरेस्ट रेट में 25 बीपीएस की वृद्धि की थी। इस महीने की 28 तारीख को फेड की पॉलिसी आने वाली है। महंगाई को काबू में करने के लिए फेड एक बार फिर इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इधर, भारत में इस महीने की शुरुआत में RBI ने रेपो रेट रेट 0.25 फीसदी बढ़ाया था। अनुमान है कि केंद्रीय बैंक दिसंबर में एक बार फिर रेपो रेट बढ़ा सकता है।

20 अक्टूबर को एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

क्रूड में उछाल का असर 20 अक्तूबर को शेयर बाजारों पर देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार दशहरा के मौके पर बंद हैं। लेकिन, दूसरे एशियाई बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। जापान का निक्केई 1.63 फीसदी नीचे चल रहा था। सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स 0.25 फीसदी गिरकर चल रहा था। हैंगसेंग में 1.38 फीसदी की गिरावट दिखी। ताइवान का सूचकांक 1.14 फीसदी नीचे चल रहा था। दक्षिण कोरिया के बाजार कोस्पी में 3.88 फीसदी की गिरावट दिखी।

कार, बाइक चलाने वालों को बड़ा झटका, इस कंपनी ने बढ़ाई पेट्रोल और डीजल की कीमतें

कार और बाइक चलाने वाले लोगों को यह खबर झटका देने वाली है। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। यह वृद्धि तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। कंपनी ने पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 5 रुपये बढ़ाई है, जबकि डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 रुपये बढ़ाई है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताई ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रिटेल कीमतों में बढ़ते फर्क को कम करने के लिए कंपनी ने यह कदम उठाया है।

ब्रेंट क्रूड फिर से लगातार 100 डॉलर से ऊपर 

बीते कुछ हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में फिर से उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर से ऊपर बना हुआ है। इससे पेट्रोल और डीजल अपने पेट्रोल पंप्स से बेचने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। Nayara Energy देश की सबसे प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स है। देशभर में इसके 7,108 पेट्रोल पंप्स हैं। इस वृद्धि के बारे में ईमेल से पूछ गए सवालों के जवाब कंपनी ने नहीं दिए।

इस साल मार्च में नायरा ने सबसे पहले बढ़ाए थे प्राइस

इस साल फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतों में तेज उछाल आया था। तब सबसे पहले नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थी। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 3 रुपये का इजाफा किया था। इससे इसके आउटलेट्स पर पेट्रोल की कीमत बढ़कर 100.71 रुपये और डीजल की कीमत 91.31 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई थी।

सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी बढ़ाए थे प्राइस

नायरा एनर्जी के पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने के बाद सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें मई में बढ़ाना शुरू किया था। मई के आखिर तक पेट्रोल की कीमतें प्रति लीटर 7.5 रुपये तक बढ़ गई थी। चौथी बार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। तब पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 2.61 और डीजल की कीमत प्रति लीटर 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई थी।

नायरा ने जुलाई में पेट्रोल-डीजल की कीमतें घटाई थीं

नायरा एनर्जी ने बाद में पेट्रोल और डीजल की कीमतें घटा दी थी। उसने 1 जलाई को पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 5 रुपये और डीजल की कीमत प्रति लीटर 3 रुपये घटा दी थी। तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में नरमी आई थी। हालांकि, अभी पेट्रोल और डीजल की रिटेल सेल्स में सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का दबदबा है। हालांकि, अभी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने मई के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई है।

ऑयल कंपनियों को रोजाना हो रहा बड़ा नुकसान 

पिछले महीने रेटिंग एजेंसी इकरा ने बताया था कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सितंबर में उन्हें पेट्रोल पर प्रति लीटर 8 रुपये और डीजल पर प्रति लीटर 9 रुपये का लॉस हो रहा था। इससे सितंबर में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर उन्हें रोजाना करीब 530 करोड़ रुपये का लॉस हो रहा था।

Crude Oil: गोल्डमैन सैक्स ने ब्रेंट क्रूड के 120 डॉलर पर जाने का जताया अनुमान, ऐसा हुआ तो मचेगी बड़ी तबाही

क्रूड ऑयल की कीमतें घटने का नाम नहीं ले रही हैं। 8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड 1.49 फीसदी उछाल के साथ 98.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड 2.72 फीसदी उछाल के साथ 93.97 डॉलर प्रति बैरल चल रहा था। 7 सितंबर को भी क्रूड में तेजी दिखी थी। जुलाई के बाद क्रूड़ की कीमतें सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह अच्छी खबर नहीं है, जो अपनी जरूरत का ज्यादा हिस्सा इंपोर्ट करता है।

4 मई को ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर पर पहुंच गया था

गोल्डमैन सैक्स ने क्रूड के 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच जाने का अनुमान जताया है। दिग्गज अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंकिंग फर्म ने कहा है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ऑयल टैंकर्स पर हमले नहीं रुकते हैं तो क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। 28 मार्च को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से क्रूड की कीमतों में उछाल दिखा है। 4 मई को भाव 114 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते में रुकावटें बढ़ रहीं

गोल्डमैन सैक्स में कमोडिटीज रिसर्च के को-हेड Daan Struyven ने कहा, “पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम से यह संकेत मिलता है कि जहाजों की आवाजाही के लिहाज से रुकावटें बढ़ रही हैं।” अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर मामला फंसा हुआ है। सामान्य दिनों में इस रास्ते दुनिया का करीब 20 फीसदी ऑयल गुजरता है। लेकिन, अमेरिका और ईरान की लड़ाई की वजह से इस रास्ते ऑयल की सप्लाई नाममात्र की रह गई है।

महंगा क्रूड भारत के लिए बढ़ा सकता है मुसीबत

8 सितंबर को ब्रेंट क्रूड 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब बढ़ता दिखा। अगर यह 100 डॉलर पार करता है तो 23 जुलाई के बाद ऐसा पहली बार होगा। अमेरिका और ईरान के बीच जिस तरह से टकराव बना हुआ है, उससे क्रूड के 100 डॉलर पर पहुंच जाने के आसार दिखते हैं। ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर के पार जाना भारत के लिए खराब है। भारत क्रूड की करीब 85 फीसदी जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है। क्रूड महंगा होने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है।

इस साल 4 बार बढ़ चुके हैं पेट्रोल-डीजल के दाम

अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 71 डॉलर पर था। इसका मतलब है कि यह उस लेवल से करीब 40 फीसदी ऊपर है। इससे पहले भारत में महंगे क्रूड की वजह ऑयल मार्केटिंग कंपनियों चार बार पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। अगर जल्द भाव नीचे नहीं आता है तो फिर से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और पीएनजी के दाम बढ़ा सकती हैं। इसका असर परिवारों के बजट पर पड़ेगा।

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महंगे क्रूड की वजह से महंगाई को मिलेगी हवा

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल का सीधा असर दूसरी चीजों और सर्विसेज की कीमतों पर पड़ता है। पहले से ही विमान किराया आसमान में चल रहा है। पिछले छह महीनों में दूध, और ब्रेड सहित रोजमर्रा की कई चीजों की कीमतें बढ़ी हैं। रेस्टॉरेंट्स में भी खाना महंगा हो गया है। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से लोगों के ऑफिस आने-जाने का खर्च बढ़ा है। पिछले कई महीनों से रिटेल इनफ्लेशन में लगातार इजाफा हो रहा है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो आरबीआई महंगाई को कंट्रोल में करने के लिए इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

मध्यपूर्व में टेंशन बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 94 डॉलर के पार, भारत के इंपोर्ट बिल में आ सकता है बड़ा उछाल

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने का असर 20 अगस्त को क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखा। ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 94 डॉलर को पार कर गई। डब्ल्यूटीआई क्रूड का भाव भी 87 डॉलर के पार हो गया। क्रूड में उछाल का असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी देखने को मिला।

ट्रंप के आक्रामक रुख से मध्यपूर्व में संकट गहराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि ईरान के खिलाफ ऐसे सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, जो अब तक किसी देश के खिलाफ नहीं लगाए गए हैं। उन्होंने ईरान की आर्थिक रूप से मदद करने वाले देशों को भी चेताया है। इधर, ईरान पर ट्रंप के रुख का कोई असर नहीं पड़ा है। इससे मध्यपूर्व में स्थिति गंभीर हो गई है।

लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल की कीमतो में उछाल

ट्रंप के ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख दिखाने से लगातार चौथे दिन क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी रही। भारतीय समय के मुताबिक, शाम 5 बजे ब्रेंट क्रूड का भाव 2.63 फीसदी के उछाल के साथ 94.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 3 फीसदी उछाल के साथ 86.92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

सीजफायर के बाद क्रूड ऑयल में आई थी नरमी

इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। इसके बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आया था। एक समय ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया था। जून में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के ऐलान से क्रूड में गिरावट आई थी। लेकिन, युद्धविराम की अवधि बीत जाने के बाद फिर से क्रूड में तेजी दिख रही है।

भारत 85 फीसदी क्रूड की जरूरत इंपोर्ट से पूरा करता है

क्रूड की कीमतों में उछाल भारत के लिए अच्छी खबर नहीं है। भारत अपनी जरूरत के करीब 85 फीसदी क्रूड का इंपोर्ट करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है। इसका सीधा असर भारत के व्यापार घाटा पर पड़ता है। डॉलर के मुकाबले तेज गिराव के बाद रुपये में स्थिरता दिख रही है। लेकिन, अगर क्रूड की कीमतें लंबे समय तक हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो फिर से रुपये पर दबाव दिख सकता है।

अप्रैल-जुलाई के बीच इंपोर्ट बिल में 56 फीसदी उछाल

अप्रैल-जुलाई के बीच भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 56.5 फीसदी बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि, वॉल्यूम में ज्यादा बदलाव नहीं आया। इसका मतलब है कि क्रूड की कीमतों में उछाल इंपोर्ट बिल बढ़ने का मुख्य कारण है। इस साल अप्रैल-जुलाई में भारत ने 8.19 करोड़ टुन क्रूड का आयात किया। एक साल पहले की समान अवधि में 8.15 करोड़ टन क्रूड का आयात हुआ था।

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां 4 बार बढ़ा चुकी हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

भारत सालाना 1.8-2 अरब बैरल क्रूड ऑयल का इंपोर्ट करता है। क्रूड की कीमतों में प्रति बैरल 1 डॉलर के इजाफा से देश का इंपोर्ट बिल एक साल में 2 अरब डॉलर तक बढ़ जाता है। जून में अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर से पहले क्रूड की कीमतों में उछाल की वजह से भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार बार बढ़ाई थीं। इसका सीधा असर लोगों के बजट पर पड़ा। इसके अलावा खाने-पीने की चीजों सहित दूसरी चीजें भी महंगी हुईं।