Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी; IDBI Bank, HDB Financial और OM Power समेत 15 स्टॉक्स फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों में भारी बिकवाली के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू स्टॉक मार्केट में भी हल्की गिरावट के साथ शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 10.50 प्वाइंट्स यानी 0.05% की फिसलन के साथ 22,612.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 14 अक्टूबर को सेंसेक्स (Sensex) 251.89 प्वाइंट्स यानी 0.34% की गिरावट के साथ 72,781.89 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 99.25 प्वाइंट्स यानी 0.44% की फिसलन के साथ 22,622.70 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

ICICI Lombard General Insurance Company Q2 (YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर आईसीआईसीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी का मुनाफा 15.47% बढ़कर ₹946.4 करोड़, प्रीमियम से नेट कमाई 17.7% उछलकर ₹6,651.87 करोड़ और टोटल इनकम 19.2% बढ़कर ₹7,843.7 करोड़ पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान बीमा कंपनी का अंडरराइटिंग लॉस भी ₹178.36 करोड़ से ₹318.38 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही बोर्ड ने हर शेयर पर ₹7 के अंतरिम डिविडेंड को भी मंजूरी दी है।

HDB Financial Services Q2 (YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज का मुनाफा 34.2% बढ़कर ₹780.2 करोड़ और प्रीमियम से नेट कमाई 15.6% उछलकर ₹2,533.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Bajaj Consumer Care Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर बजाज कंज्यूमर केयर का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 65.9% बढ़कर ₹70.2 करोड़ और रेवेन्यू 25.5% उछलकर ₹332.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Tata Technologies Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टाटा टेक्नोलॉजीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 3.6% बढ़कर ₹171.44 करोड़ और रेवेन्यू 28.4% उछलकर ₹1698.8 करोड़ पर पहुंच गया।

Ceat Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर सिएट का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 39.8% फिसलकर ₹112 करोड़ पर आ गया लेकिन रेवेन्यू 26.2% उछलकर ₹4,762 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान कंपनी जीरो से ₹13 करोड़ के एक्सपेश्नल लॉस में आ गई, जो कि वालंटरी रिटायरमेंट स्कीम से जुड़ा है।

Mangalore Refinery and Petrochemicals Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 203% बढ़कर ₹1900.8 करोड़ और रेवेन्यू (एक्साइज ड्यूटी छोड़कर) 43.6% उछलकर ₹32,516.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Hathway Cable and Datacom Q2 (Consolidated YoY)

सितंबर 2026 तिमाही में सालाना आधार पर हाथवे केबल एंड डेटाकॉम का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 44.3% बढ़कर ₹10.16 करोड़ और रेवेन्यू 5.7% उछलकर ₹567.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Reliance Industries

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सब्सिडियरी जियो प्लेटफॉर्म्स का ₹30,187.6 करोड़ का आईपीओ पब्लिक सब्सक्रिप्शन के लिए 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा। इस आईपीओ के लिए प्राइस बैंड प्रति शेयक ₹1,065–₹1,119 फिक्स किया है। इस इश्यू के तहत 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे। इसमें ₹500 करोड़ के शेयर तो जियो प्लेटफॉर्म्स के एलिजिबल एंप्लॉयीज और ₹2500 करोड़ के शेयर रिलायंस इंडस्ट्रीज के एलिजिबल शेयरहोल्डर्स के लिए आरक्षित हैं।

IDBI Bank

फेयरफैक्स फाइेंशियल होल्डिंग्स की कनाडा इंक को आईडीबीआई बैंक खरीदने की मंजूरी मिल गई है। सरकार और एलआईसी इसमें कुल मिलाकर 60.72% हिस्सेदारी ₹52,878 करोड़ में बेच रही है। सरकार बैंक में अपनी 30.48% और एलआईसी 30.24% हिस्सेदारी बेच रही है। कनाडा इंक इसे प्रति शेयर ₹81 के भाव पर खरीद रही है। सौदे के बाद सरकार की बैंक में 15% और एलआईसी के पास 19% हिस्सेदारी रह जाएगी।

Dr Reddy’s Laboratories

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में डॉ रेड्डीज की एफटीओ-9 मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी की PAI (प्री-अप्रूवल इंस्पेक्शन) पूरी कर ली है। 8-9 अक्टूबर की जां के बाद तीन ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी हुआ है।

Enviro Infra Engineers

एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स की सब्सिडियरी सुयोग ऊर्जा को एरी एनर्जी एलएलपी से ₹228 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) मिला है। इस प्रोजेक्ट में महाराष्ट्र के लातूर में 100 MW के अजनी विंड पावर प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट के लिए EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) टर्न्की काम शामिल हैं।

Om Power Transmission

ओम पावर ट्रांसमिशन को उत्तर गुजरात विज कंपनी से ₹101.56 करोड़ के टर्न्की कॉन्ट्रैक्ट के लिए LoA (लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस) मिला है। इस कॉन्ट्रैक्ट में अंबाजी में मौजूदा इलेक्ट्रिकल लाइन नेटवर्क को अंडरग्राउंड केबल नेटवर्क में बदलने और उससे जुड़े अन्य काम हैं।

AceVector

ICICI सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप ने ऐसवेक्टर के 32.91 लाख शेयर (0.6% हिस्सेदारी) ₹8.6 करोड़ में प्रति शेयर ₹26.27 के भाव पर बेच दिए।

Devson Catalyst

इंडिया मैक्स इन्वेस्टमेंट फंड ने डेवसन कैटलिस्ट के 72,000 इक्विटी शेयर (0.53% हिस्सेदारी) ₹2.75 करोड़ में प्रति शेयर ₹382.50 के भाव पर बेच दिए। 15 जुलाई, 2026 तक डेवसन कैटलिस्ट में इंडिया मैक्स इन्वेस्टमेंट फंड की 2.41% हिस्सेदारी (3.27 लाख शेयर) थी।

Fine Line Circuits

वॉलफोर्ट फाइनेंशियल सर्विसेज ने फाइन लाइन सर्किट्स के 25,000 शेयर (0.52% हिस्सेदारी) ₹20.71 लाख में प्रति शेयर ₹82.87 के भाव पर खरीदे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nifty 4-5 महीने में 26000-26500 पर होगा, एक्सपर्ट ने किया बड़ा दावा

आप क्या शेयरों से निवेश निकालने या सिप बंद करने के बारे में सोच रहे हैं? यह गलती आपको जोरदार मुनाफा कमाने से रोक सकती है। ब्रोकरेज फर्म मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल ने निफ्टी के लिए 26,000-26,500 का टारगेट दिया है। उसका कहना है कि अगले 4-5 महीनों में निफ्टी नया ऑल-टाइम हाई बना सकता है। 13 अक्टूबर को निफ्टी 1.60 फीसदी चढ़कर 22,721 पर बंद हुआ।

भारत को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख बदलेगा

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के सीईओ गौरव भंडारी को उम्मीद है कि वैश्विक आर्थिक स्थितियां जल्द बदलेंगी। इसके बाद बाजार में रिकवरी शुरू होगी। उन्होंने अमेरिका में बॉन्ड यील्ड घटने, डॉलर में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी की उम्मीद जताई। इससे भारतीय बाजार में तेजी आएगी। ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के लिए जो टारगेट दिया है, उसका मतलब है कि सूचकांक करीब 17 फीसदी चढ़ सकता है।

अमेरिका में बॉन्ड यील्ड जल्द घटने की उम्मीद 

भंडारी का कहना है कि अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा लेवल पर लंबे समय तक नहीं रह सकती। अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड 5.35 फीसदी तक पहुंच गई है। इस साल यील्ड 110 बेसिस प्वाइंट्स उछली है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी यील्ड में गिरावट आने पर विदेशी निवेश भारतीय बाजार में आएगा। डॉलर के भी कमजोर होने की उम्मीद है। इन दोनों वजहों से विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव आएगा।

भारतीय बाजार में विदेशी निवेशकों की शॉर्ट पोजीशन

उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में फ्यूचर्स में काफी शॉर्ट पोजीशन बनाई है। वैश्विक स्थितियां बदलते ही उन्हें शॉर्ट कवरिंग करनी पड़ सकती है। उन्होंने निवेशकों को बाजार से दूरी बनाने की जगह अच्छी क्वालिटी के शेयरों में निवेश की सलाह दी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अपनी खरीदारी से बाजार को काफी सहारा दिया है। अगर आगे भारतीय बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख बदलता है तो बाजार में बड़ी तेजी दिख सकती है।

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बीते एक साल में निफ्टी करीब 10 फीसदी गिरा है

बीते एक साल में निफ्टी और सेंसेक्स में 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई है। इससे शेयरों में निवेश करने वाले लोग निराश हैं। म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीमों में निवेश करने वाले लोग भी मायूस हैं, क्योंकि उनका पैसा इस दौरान बढ़ने की जगह घटा है। बाजार में रिकवरी आने पर उन निवेशकों को बड़ा फायदा होगा, जिन्होंने गिरावट के बीच भी सिप से अपना निवेश जारी रखा है।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Rupee Falls: 99 तक गिर सकता है रुपया! Kotak Securities ने कहा- ये लेवल टूटा तो बढ़ेगी मुश्किल

Rupee Falls: रुपया जल्द ही डॉलर के मुकाबले 97 तक गिर सकता है। अगर 97 का स्तर टूट गया, तो यह 98.5 से 99 तक भी जा सकता है। यह अनुमान Kotak Securities के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी ने दिया है।

बनर्जी के मुताबिक रुपये पर कई तरफ से दबाव है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। इंपोर्ट महंगा हुआ है। ग्लोबल यील्ड भी ऊंची है। इन सबका असर रुपये पर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत है। लेकिन ग्लोबल हालात रुपये के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं।

FPI की बिकवाली से दबाव

इस महीने अब तक विदेशी निवेशक करीब 6.1 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच चुके हैं। बनर्जी के मुताबिक पिछले दो महीनों में आया करीब 90% विदेशी निवेश अब वापस निकल चुका है।

हाल में FCNR(B) के जरिए भी पैसा आया है। लेकिन इससे रुपये को तुरंत फायदा नहीं मिला। इसका बड़ा हिस्सा सीधे बाजार में जाने के बजाय RBI के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में गया है।

अगर रुपये पर दबाव और बढ़ा, तो RBI बाजार में अपना दखल बढ़ा सकता है। बनर्जी के मुताबिक ग्लोबल दबाव के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है। ऐसे में 97 का स्तर जल्द दिख सकता है। इसके टूटने पर रुपया और गिर सकता है।

कच्चा तेल भी बढ़ा रहा चिंता

बनर्जी का कहना है कि रुपये पर कच्चे तेल का दबाव भी है। इसे सिर्फ Brent के फ्यूचर्स भाव से नहीं समझना चाहिए। स्पॉट क्रूड, फ्रेट और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमत भी मायने रखती है।

डीजल और एविएशन फ्यूल की कीमतें भी ऊंची हैं। दुनियाभर में रिफाइनरी से जुड़ी दिक्कतों के कारण इनकी कीमतों पर दबाव है। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है। महंगा ईंधन महंगाई बढ़ा सकता है। इससे कारोबार और आम लोगों की लागत भी बढ़ती है। इसका असर रुपये पर भी पड़ सकता है।

RBI बढ़ा सकता है ब्याज दर

बनर्जी को आने वाले महीनों में RBI से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद है। उन्हें एक से ज्यादा रेट हाइक की संभावना दिखती है। दिसंबर में भी दर बढ़ सकती है।

हालांकि, उनका कहना है कि RBI सिर्फ अमेरिकी फेड के फैसले को देखकर दरें नहीं बढ़ाएगा। घरेलू महंगाई RBI के लिए ज्यादा अहम रहेगी। महंगाई को ध्यान में रखने के बाद पॉजिटिव रियल इंटरेस्ट रेट बनाए रखना भी RBI का फोकस रहेगा।

US बॉन्ड यील्ड भी परेशानी

अमेरिका में लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड तेजी से बढ़ी है। खासकर 10 साल और उससे ज्यादा अवधि वाले बॉन्ड पर दबाव है। इसे ग्लोबल मार्केट के लिए बड़ी चिंता माना जा रहा है।

बनर्जी के मुताबिक बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों की उधारी भी फंड की मांग बढ़ा रही है। इससे लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रह सकती है।

जब तक कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतें कम नहीं होतीं, ग्लोबल यील्ड पर दबाव बना रह सकता है। लंबे समय तक ऊंची यील्ड और महंगी कमोडिटी से ग्लोबल ग्रोथ और वित्तीय बाजारों पर भी दबाव पड़ सकता है।

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Asian Market: ग्लोबल बाजारों में आज भी कोहराम, US मार्केट और एशिया कमजोर, US बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल

Asian Market Today: गुरुवार, 10 सितंबर को वॉल स्ट्रीट में बिकवाली के असर से एशियाई शेयरों में गिरावट आई। तेल की कीमतों में उछाल ने महंगाई की चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया और ट्रेजरी यील्ड को ऊपर धकेल दिया। शुरुआती कारोबार में MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स 0.3% गिर गया। जापान के निक्केई 225 में सबसे ज़्यादा 1.07% की गिरावट आई, जबकि टॉपिक्स (Topix) 0.53% नीचे आया।दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 0.56% गिरा और हैंग सेंग फ्यूचर्स में 0.9% की गिरावट के संकेत मिले।

एक दिन पहले 0.3% की बढ़त के बाद जापानी येन 153.57 प्रति डॉलर पर स्थिर रहा, जबकि ऑफशोर युआन 6.7056 प्रति डॉलर पर लगभग स्थिर रहा।

भारत में, GIFT निफ्टी 103 अंक से ज़्यादा नीचे था, जिससे संकेत मिलता है कि निफ्टी लाल निशान में खुल सकता है।

क्षेत्रीय कमजोरी वॉल स्ट्रीट में आई तेज गिरावट के बाद देखी गई। S&P 500 में 0.5% की गिरावट आई, जिसमें इंडस्ट्रियल और कंज्यूमर-डिस्क्रिशनरी शेयरों पर बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर पड़ा। नैस्डैक 100 में 0.3% की गिरावट आई क्योंकि एनवीडिया, अमेज़न और अल्फाबेट जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने शेयरों पर दबाव और बढ़ा दिया। बुधवार को बढ़ने के बाद एशियाई घंटों में 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड स्थिर रही। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने 6 बिलियन डॉलर तक के लंबी अवधि के कर्ज को खरीदने की योजना का खुलासा किया था, जो कुछ निवेशकों की उम्मीद से कम राशि थी। महंगाई की चिंताओं से पहले से ही तनावपूर्ण माहौल पर इस निराशा का और असर पड़ा।

तेल की कीमतों ने सबसे बड़ा झटका दिया क्योंकि ब्रेंट क्रूड 0.5% बढ़कर 101.69 डॉलर पर पहुंच गया और बढ़त जारी रखते हुए 102 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1% बढ़कर 97.05 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने इस तेजी को बढ़ावा दिया, क्योंकि ट्रेडर्स ऊर्जा आपूर्ति में संभावित रुकावटों को लेकर चिंतित दिख रहे थे।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने इस उम्मीद को और बढ़ा दिया कि महंगाई को काबू में रखने के लिए फेडरल रिजर्व को ब्याज दरें और बढ़ानी पड़ेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता को कम करके आंका और कहा कि मिड-टर्म चुनाव के बाद यह टकराव खत्म हो जाएगा, जबकि तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे थे।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ईरानी इलाके और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले जारी रखता है, तो तेहरान अपने जवाबी हमलों को और तेज़ कर देगा।

अब बाज़ार की नज़र शुक्रवार को आने वाले अमेरिका के महंगाई के आंकड़ों पर होगी। ट्रेडर इस रिपोर्ट को ध्यान से देखेंगे ताकि यह अंदाज़ा लगाया जा सके कि क्या अमेरिकी फेडरल रिज़र्व सितंबर की बैठक में ब्याज दरें बढ़ाएगा या नहीं।

 

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Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड 4500 डॉलर के करीब, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

Gold Outlook: अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी का असर गोल्ड पर दिखा है। 19 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड 4,571.80 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हालांकि, 20 अगस्त को इसमें थोड़ी नरमी दिखी। स्पॉट गोल्ड 0.95 फीसदी गिरकर 4,475 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। सवाल है कि लंबे समय बाद गोल्ड में आई तेजी पर निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी से गोल्ड में आई तेजी

गोल्ड में तेजी की वजह अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी है। 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड गिरकर 4.64 पर आ गई है। 30 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड घटकर 5.18 फीसदी पर आ गई है। इसका सीधा असर गोल्ड की कीमतों पर पड़ा है। डॉलर इंडेक्स में नरमी से भी गोल्ड को सपोर्ट मिला है।

कई देशों के केंद्रीय बैंक खरीद रहे हैं गोल्ड

बोनांजा में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव ने कहा, “बॉन्ड यील्ड में नरमी और डॉलर में कमजोरी सोने के लिए फेवरेबल है। इससे लंबी अवधि के बॉन्ड मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी।” हालांकि, गोल्ड में तेजी की वजह सिर्फ बॉन्ड यील्ड में नरमी नहीं है। सुरक्षित निवेश के लिए सोने में इनवेस्टमेंट बढ़ा है। दुनिया के कई देशों के केंद्रीय बैंक भी सोने में खरीदारी कर रहे हैं।

दिल्ली में गोल्ड की कीमतें तीन महीने की ऊंचाई पर 

20 अगस्त को दिल्ली सर्राफा बाजार में गोल्ड में जोरदार तेजी दिखी। यह 4,300 रुपये के उछाल के साथ 1,62,300 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह घरेलू बाजार में सोने का तीन महीने का सबसे हाई लेवल है। चांदी में भी अच्छी खरीदारी से तेजी देखने को मिली।

निवेशकों को फिलहाल क्या करना चाहिए

वीटी मार्केट्स में मार्केट एनालिस्ट रुचित ठाकुर के मुताबिक, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका में मॉनेटरी पॉलिसी के गोल्ड के लिए सपोर्टिव रहने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि निवेशकों के सोने में तेजी के पीछे भागने में रिस्क है। इनवेस्टर्स सोने में अपना निवेश जारी रख सकते हैं।

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गिरावट पर गोल्ड में खरीदारी की सलाह

उन्होंने कहा कि नए निवेशक सोने में गिरावट के मौके का इस्तेमाल निवेश के लिए कर सकते हैं। कीमतें हाई रहने पर उन्हें निवेश करने से बचने की सलाह है। आगे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ट्रेंड, फेडरल रिजर्व के संकेतों और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट्स पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।