Rupee Falls: 99 तक गिर सकता है रुपया! Kotak Securities ने कहा- ये लेवल टूटा तो बढ़ेगी मुश्किल

Rupee Falls: रुपया जल्द ही डॉलर के मुकाबले 97 तक गिर सकता है। अगर 97 का स्तर टूट गया, तो यह 98.5 से 99 तक भी जा सकता है। यह अनुमान Kotak Securities के करेंसी, कमोडिटी और इंटरेस्ट रेट डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड अनिंद्य बनर्जी ने दिया है।

बनर्जी के मुताबिक रुपये पर कई तरफ से दबाव है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। इंपोर्ट महंगा हुआ है। ग्लोबल यील्ड भी ऊंची है। इन सबका असर रुपये पर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी मजबूत है। लेकिन ग्लोबल हालात रुपये के लिए मुश्किल पैदा कर रहे हैं।

FPI की बिकवाली से दबाव

इस महीने अब तक विदेशी निवेशक करीब 6.1 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच चुके हैं। बनर्जी के मुताबिक पिछले दो महीनों में आया करीब 90% विदेशी निवेश अब वापस निकल चुका है।

हाल में FCNR(B) के जरिए भी पैसा आया है। लेकिन इससे रुपये को तुरंत फायदा नहीं मिला। इसका बड़ा हिस्सा सीधे बाजार में जाने के बजाय RBI के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व में गया है।

अगर रुपये पर दबाव और बढ़ा, तो RBI बाजार में अपना दखल बढ़ा सकता है। बनर्जी के मुताबिक ग्लोबल दबाव के कारण रुपया कमजोर बना हुआ है। ऐसे में 97 का स्तर जल्द दिख सकता है। इसके टूटने पर रुपया और गिर सकता है।

कच्चा तेल भी बढ़ा रहा चिंता

बनर्जी का कहना है कि रुपये पर कच्चे तेल का दबाव भी है। इसे सिर्फ Brent के फ्यूचर्स भाव से नहीं समझना चाहिए। स्पॉट क्रूड, फ्रेट और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमत भी मायने रखती है।

डीजल और एविएशन फ्यूल की कीमतें भी ऊंची हैं। दुनियाभर में रिफाइनरी से जुड़ी दिक्कतों के कारण इनकी कीमतों पर दबाव है। इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ सकता है। महंगा ईंधन महंगाई बढ़ा सकता है। इससे कारोबार और आम लोगों की लागत भी बढ़ती है। इसका असर रुपये पर भी पड़ सकता है।

RBI बढ़ा सकता है ब्याज दर

बनर्जी को आने वाले महीनों में RBI से ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद है। उन्हें एक से ज्यादा रेट हाइक की संभावना दिखती है। दिसंबर में भी दर बढ़ सकती है।

हालांकि, उनका कहना है कि RBI सिर्फ अमेरिकी फेड के फैसले को देखकर दरें नहीं बढ़ाएगा। घरेलू महंगाई RBI के लिए ज्यादा अहम रहेगी। महंगाई को ध्यान में रखने के बाद पॉजिटिव रियल इंटरेस्ट रेट बनाए रखना भी RBI का फोकस रहेगा।

US बॉन्ड यील्ड भी परेशानी

अमेरिका में लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड तेजी से बढ़ी है। खासकर 10 साल और उससे ज्यादा अवधि वाले बॉन्ड पर दबाव है। इसे ग्लोबल मार्केट के लिए बड़ी चिंता माना जा रहा है।

बनर्जी के मुताबिक बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों की उधारी भी फंड की मांग बढ़ा रही है। इससे लंबी अवधि की यील्ड ऊंची रह सकती है।

जब तक कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतें कम नहीं होतीं, ग्लोबल यील्ड पर दबाव बना रह सकता है। लंबे समय तक ऊंची यील्ड और महंगी कमोडिटी से ग्लोबल ग्रोथ और वित्तीय बाजारों पर भी दबाव पड़ सकता है।

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FY27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान, अल नीनो और ईरान संकट से बढ़ सकता है जोखिम

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मौजूदा वित्त वर्ष FY27 में कुछ धीमी पड़ सकती है। India Ratings & Research (Ind-Ra) ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में FY27 के लिए GDP ग्रोथ 6.8% रहने का अनुमान जताया है। यह FY26 की 7.6% ग्रोथ से कम है। हालांकि यह एजेंसी के मई 2026 के 6.7% अनुमान से थोड़ा बेहतर है।

इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी FY27 के लिए अपना ग्रोथ अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर चुका है। Ind-Ra का कहना है कि घरेलू अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है, लेकिन कई बाहरी और घरेलू जोखिम आगे की रफ्तार को प्रभावित कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया संकट और अल नीनो सबसे बड़े जोखिम

रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगाई, रुपये की कमजोरी और अल नीनो का कृषि पर संभावित असर इस वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख जोखिम बने रहेंगे। एजेंसी का मानना है कि इन कारकों का असर खपत, निवेश और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।

कच्चे तेल के अनुमान में राहत

Ind-Ra ने FY27 के लिए कच्चे तेल का औसत भाव 95 डॉलर से घटाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है। एजेंसी के मुख्य अर्थशास्त्री और हेड-पब्लिक फाइनेंस देवेंद्र पंत के अनुसार, सस्ता कच्चा तेल भारत के लिए राहत भरा हो सकता है, क्योंकि इससे व्यापार घाटा (Trade Deficit) और चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) कम करने में मदद मिलेगी।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर अल नीनो की वजह से खाद्य महंगाई बढ़ती है, तो सस्ते तेल का पूरा फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिल पाएगा।

रुपये में कमजोरी की उम्मीद

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में डॉलर के मुकाबले रुपये का औसत विनिमय दर 93.98 रुपये प्रति डॉलर रह सकता है। यह मई के 94.28 रुपये के अनुमान से थोड़ा बेहतर है, लेकिन सालाना आधार पर करीब 6.4% की कमजोरी को दर्शाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FCNR (Bank) जमा और External Commercial Borrowings (ECB) के जरिए करीब 70 अरब डॉलर का पूंजी प्रवाह भारत में आ सकता है।

तिमाही-दर-तिमाही ग्रोथ का अनुमान

Ind-Ra ने FY27 की चारों तिमाहियों के लिए अलग-अलग GDP ग्रोथ का अनुमान भी जारी किया है। उसके और RBI के अनुमान में कुछ अंतर भी है।

तिमाहीInd-Ra का अनुमानRBI का अनुमान
अप्रैल-जून6.90%7.00%
जुलाई-सितंबर6.60%6.40%
अक्टूबर-दिसंबर6.70%6.50%
जनवरी-मार्च6.90%6.80%

महंगाई और चालू खाते के घाटे पर नजर

एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9% रह सकती है, जबकि FY26 में यह करीब 2% थी। इसी तरह चालू खाते का घाटा बढ़कर GDP का 1.5% हो सकता है, जो पिछले वित्त वर्ष में 0.6% था।

राजकोषीय घाटा हासिल करना आसान नहीं

Ind-Ra ने सरकार के FY27 के 4.3% राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को चुनौतीपूर्ण बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, LPG और उर्वरक सब्सिडी पर बढ़ता खर्च सरकार के लिए दबाव बना सकता है। हालांकि बेहतर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन और नॉन-टैक्स रेवेन्यू इस लक्ष्य को हासिल करने में कुछ राहत दे सकते हैं।

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