Barapullah flyover jam: बारापुला फेज-III फ्लाईओवर पर क्यों लग रहा है भारी जाम? अब नए सिरे से डिजाइन पर होगा काम

Barapullah Phase-III flyover traffic jam: राजधानी दिल्ली में गाड़ी चलाने वाले हाल ही में खुले बारापुल्ला फ़ेज़-III एलिवेटेड कॉरिडोर की तरफ न जाएं, क्योंकि सनडायल पार्क मर्जर पॉइंट और सराय काले खां के पास भारी जाम की सूचना है। फ्लाईओवर के तीन लेन वाले हिस्से को दो लेन वाले मौजूदा कॉरिडोर से जोड़ने वाले मर्जर पॉइंट पर कई दिनों से बहुत ज्यादा जाम की समस्या हो रही है। ट्रैफिक पुलिस ने इस डिजाइन को लेकर PWD विभाग से तुरंत बदलाव करने की मांग की है। तीन लेन वाला बारापुला फेज-III फ्लाईओवर सुंदरियाल पार्क के पास दो लेन वाले रूट में मिल रहा है। जबकि दो अन्य तीन लेन वाले रास्तों का ट्रैफिक भी इसी जगह आकर मिल रहा है, जिससे जाम की समस्या बढ़ रही है।

जंक्शन को फिर से डिजाइन करने का सुझाव

अधिकारियों ने बताया कि जाम की समस्या को कम करने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने इस जंक्शन को फिर से डिजाइन करने का सुझाव दिया है। ट्रैफिक पुलिस ने लोक निर्माण विभाग (PWD) से फेज-तीन फ्लाईओवर के मौजूदा बारापुला मार्ग से जुड़ने वाले स्थान में तत्काल बदलाव करने को कहा है। पुलिस का कहना है कि जंक्शन का तीखा और अचानक बना डिजाइन व्यस्त मार्ग पर जाम की समस्या को और बढ़ा रहा है।

बारापुला फेज-तीन फ्लाईओवर को पिछले सप्ताह लोगों के लिए खोला गया था। लेकिन इसके खुलने के तुरंत बाद जुड़ने वाले नए मार्ग पर ट्रैफिक की स्थिति खराब हो गई। अधिकारियों ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल और सराय काले खां के बीच करीब आठ किलोमीटर की दूरी तय करने में वाहन चालकों को एक घंटे से अधिक समय लग रहा था।

ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी को भेजे पत्र में कहा कि इस व्यवस्था के कारण भारी जाम लग रहा है। पुलिस द्वारा कराए गए ड्रोन सर्वेक्षण में जंक्शन पर समस्या की स्थिति सामने आई, जहां सीमित सड़क चौड़ाई में कई दिशाओं से आ रहा ट्रैफिक एक ही स्थान पर मिल रहा है।

फ्लाईओवर पर हैं तीन लेन

फेज-तीन फ्लाईओवर पर तीन लेन हैं। इसी स्थान पर सुंदरियाल की ओर से सराय काले खां और रिंग रोड की तरफ आने वाला ट्रैफिक कॉरिडोर में मिलता हैं। इसके अलावा आश्रम और डीएनडी की ओर से आने वाला ट्रैफिक भी मौजूदा बारापुला गलियारे से मिलता है। पत्र में कहा गया है कि इससे ट्रैफिक अचानक एक-दूसरे में मिल जाता है और जंक्शन पर ट्रैफिक का मर्जर पॉइंट बन जाता है।

ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि नया फ्लाईओवर सुंदरियाल के पास मौजूदा फ्लाईओवर से सीधे और तीखे मोड़ के साथ जुड़ रहा है। जबकि यहां सहज घुमाव होना चाहिए था। ट्रैफिक पुलिस ने पीडब्ल्यूडी से फ्लाईओवर के जुड़ने वाले स्थान को फिर से डिजाइन करने को कहा है।

ये भी पढ़ें- El Nino Effect: रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान कर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मानसून और अल-नीनो पर चिंता वाली बात कही! रबी सीजन पर दी ये चेतावनी

गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर… स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति को गिफ्ट की गईं ये 3 स्पेशल इंडियन Cheese, जानिए क्या खास है इनमें

स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन तीन दिवसीय भारत दौरे पर है। इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में राष्ट्रपति गाइ परमेलिन से मुलाकात की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति भारत में बनी एक खास चीज (Cheese) गिफ्ट की है। ये तीनों खास चीजें(Cheese) गुलमर्ग, कोणार्क और येऊर है। स्विट्जरलैंड अपनी बेहतरीन चीज की कई किस्मों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है।

वहीं भारत भी अब चीज बनाने के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है। इन खास भारतीय चीजों के जरिए देश की समृद्ध और तेजी से बढ़ती चीज बनाने की परंपरा की झलक मिलती है। आइए जानते हैं क्या खास है इन तीनों चीज में

गुलमर्ग, फ्रेंच-स्टाइल ब्री

गुलमर्ग की फ्रेंच-स्टाइल ब्री चीज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास पहचान बनाई है। यह दिल के आकार की नरम और क्रीमी चीज है, जिसे पाश्चुराइज्ड गाय के दूध से तैयार किया जाता है। इसके ऊपर सफेद रंग की परत होती है और इसका स्वाद हल्का मिट्टी और मशरूम जैसा लगता है। इस चीज को 2026 में आयोजित मुंडियाल डो क्वेजो डो ब्रासिल प्रतियोगिता में सुपर गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

कोणार्क, फ्रेंच टॉम-स्टाइल चीज

कोणार्क फ्रेंच टॉम-स्टाइल चीज अपनी खास बनावट और स्वाद के लिए जानी जाती है। इसका छिलका प्राकृतिक और थोड़ा पारंपरिक (देहाती) अंदाज का होता है। ये चीज अंदर से यह नरम होती है। वहीं इसका स्वाद हल्के मिट्टी और नमक जैसा होता है और अंत में नींबू जैसी ताजगी महसूस होती है। इस चीज ने 2023 में नॉर्वे में हुए वर्ल्ड चीज अवॉर्ड्स में गोल्ड और 2025 में स्विट्जरलैंड में सिल्वर मेडल हासिल किया था।

येऊर, माउंटेन-स्टाइल चीज

येऊर एक माउंटेन-स्टाइल चीज़ है, जिसे स्विस ग्रुयेरे चीज़ से प्रेरणा लेकर बनाया गया है। इसे करीब 8-9 महीने तक तैयार किया जाता है, जिससे इसमें हल्का मीठा, नट्स जैसा और जड़ी-बूटियों वाला स्वाद आता है। इसके छिलके को गुलाब की पंखुड़ियों और सौंफ से सजाया जाता है, जो इसे अलग पहचान देता है। ये चीज आसानी से पिघल जाती है, इसलिए इसे फोंडू और ग्रिल की गई डिशेज में इस्तेमाल किया जा सकता है।

El Nino Impact: अक्टूबर में क्यों झुलस रही मुंबई-दिल्ली? क्या अल-नीनो है बढ़ती गर्मी की वजह, जानें

El Nino Impact: अक्टूबर में क्यों झुलस रही मुंबई-दिल्ली? क्या अल-नीनो है बढ़ती गर्मी की वजह, जानें

देश के कई हिस्सों से मानसून की विदाई हो चुकी है। वहीं दक्षिण भारत के कई राज्यों में अभी भी भारी बारिश का दौर जारी है। वहीं उत्तर भारत और दक्षिण-पश्चिम से मानसून की विदाई के बाद कुछ जगहों पर जमकर गर्मी पड़ रही है। मानसून की विदाई के बाद मुंबई और आसपास के इलाकों में अक्टूबर की गर्मी ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं देश की राजधानी दिल्ली का भी ऐसा ही हाल है। दिल्ली में मानसून की विदाई के बाद के उमस भरी गर्मी ने लोगों को काफी परेशान किया है। वहीं आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली की हवा भी खराब श्रेणी में पहुंच सकती है। आइए जानते हैं क्या अक्टूबर में पड़ रही इस गर्मी के पीछे अल-नीनो वजह है

मुंबई में पड़ेगी और गर्मी

News18 की रिपोर्ट के अनुसार, मौसम विभाग ने बताया कि पिछले दो दिनों में महाराष्ट्र के कई इलाकों में अधिकतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है। IMD के मौसमी अनुमान में भी अक्टूबर के दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा गर्मी रहने की संभावना जताई गई है। ऐसे में महाराष्ट्र में भी इस महीने तापमान सामान्य से ऊपर रहने की आशंका है। इसकी वजह से लोगों को गर्म मौसम का सामना करना पड़ सकता है। लोगों को तेज गर्मी और मौसम में होने वाले बदलाव को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मुंबई में गर्मी का असर लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला और तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के करीब रहा।

दिल्ली में बारिश का अलर्ट

दिल्ली में मानसून की विदाई के बाद से उमस भरी गर्मी से लोग काफी परेशान है। वहीं इसी बीच दिल्ली के लोगों के लिए अच्छी खबर है। आईएमडी ने दिल्ली में 6 अक्टूबर को बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान मूसलाधार बारिश हो सकती है। 6 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस पहुंचेगा तो न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस तक रहने की चेतावनी है। बारिश होने से लोगों को उमस भर्मी से राहत मिलेगी।

क्यों बढ़ा मुंबई का तापमान

रिपोर्ट के मुताबिक, IMD की वैज्ञानिक सुषमा नायर ने बताया कि मुंबई में बढ़ी गर्मी के पीछे कई मौसम संबंधी कारण हैं। उनके अनुसार, मानसून की विदाई, समुद्र से आने वाली हवाओं के देर से चलने और मुंबई के आसपास बने एंटी-साइक्लोनिक सिस्टम की वजह से तापमान में बढ़ोतरी हुई है। इन स्थितियों के कारण शहर में सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा गर्मी महसूस की जा रही है। मुंबई से मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को हो गई, जो इस सदी में दूसरी सबसे जल्दी वापसी है। मानसून के कमजोर पड़ने, बादल कम होने और हवाओं के रुख में बदलाव से मुंबई और कोंकण में गर्मी बढ़ गई है।

अल-नीनो है वजह?

IMD के अनुमान के अनुसार, नवंबर और दिसंबर के दौरान प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति और मजबूत हो सकती है। इसका असर आने वाले समय के मौसम पर पड़ सकता है और तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है। वही इस बार सर्दी भी अपेक्षाकृत कम ठंडी रह सकती है। लेकिन, मौसम एक्सपर्ट के मुताबिक, फिलहाल मुंबई में बढ़ी गर्मी का सीधा कारण एल नीनो नहीं है। मौजूदा तापमान में बढ़ोतरी मुख्य रूप से मानसून की विदाई और स्थानीय मौसम की परिस्थितियों की वजह से हुई है।

बेंगलुरु की तर्ज पर रांची में बनेगी 100 एकड़ की टेक सिटी, फर्स्ट फेज में क्रिएट होगी 77000 जॉब्स, जानिए क्या है ये मेगा प्लान

El Nino effect: अल नीनो बढ़ा सकता है भारत का फूड बिल! चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों ने दिए महंगाई के संकेत

El Nino effect: भारत में खाद्य कीमतों को लेकर आने वाले महीनों में दबाव बढ़ने की आशंका है। देश की रोजमर्रा की खपत वाली प्रमुख खाद्य वस्तुओं में चावल, अरहर दाल और खाद्य तेलों की कीमतों में अलग-अलग रफ्तार से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में भारत El Nino की बढ़ती निगरानी के दौर में प्रवेश कर रहा है, जिससे अगर मौसम प्रतिकूल रहता है तो फसल उत्पादन और कमोडिटी सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं है कि हाल में खाद्य कीमतों में आई तेजी सीधे El Nino की वजह से है। फिलहाल कीमतों की दिशा घरेलू उत्पादन, सरकारी नीतियों, भंडार और वैश्विक कमोडिटी बाजार जैसे कई कारकों पर निर्भर है।

सरकार ने El Nino को बताया जोखिम का कारण

केंद्र सरकार ने अपनी अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट में El Nino को निगरानी योग्य कारक बताया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि लंबे समय तक El Nino की स्थिति रहने पर मानसून कमजोर या असमान हो सकता है। इसका असर फसल उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि El Nino और कृषि उत्पादन के बीच सीधा और एक-से-एक संबंध नहीं माना जा सकता।

सिंचाई, सरकारी खरीद, खाद्यान्न भंडार और जरूरत पड़ने पर आयात जैसे उपाय मौसम के झटकों का असर कम कर सकते हैं। भारत में किसी मौसम संबंधी घटना का असर केवल बारिश पर निर्भर नहीं करता। फसल की स्थिति, जलाशयों में पानी, सरकारी स्टॉक, खरीद व्यवस्था और आयात की क्षमता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

चावल और दालों की कीमतों में भारी तेजी

सरकार के मूल्य निगरानी आंकड़ों के मुताबिक, चावल की कीमत पिछले साल की तुलना में बढ़ी है। 29 सितंबर को थोक चावल की कीमत करीब ₹4,185 प्रति क्विंटल थी, जो एक साल पहले के मुकाबले लगभग 8.5 फीसदी अधिक है। खुदरा बाजार में भी चावल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दालों में भी अलग-अलग किस्मों की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।

अरहर या तूर दाल सितंबर के अंत में ₹125 प्रति किलो से अधिक पर बिक रही थी। अब इसकी कीमत करीब 8 फीसदी सालाना बढ़ी थी। उड़द की कीमत भी ऊपर रही। जबकि मूंग, मसूर और चना में साल-दर-साल अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, इन मौजूदा कीमतों को सीधे El Nino का असर मानना सही नहीं होगा। असली जोखिम आने वाले महीनों में सामने आ सकता है, खासकर अगर बारिश का पैटर्न या फसल उत्पादन प्रभावित होता है।

खाद्य तेलों की कीमतें बनीं चुनौती

खाद्य तेल भारत के लिए अलग तरह की चुनौती हैं, क्योंकि देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर काफी निर्भर है। वैश्विक कीमतों के असर को कम करने के लिए सरकार ने हाल में आयात शुल्क में कटौती की है। 24 सितंबर से कच्चे सोयाबीन और कच्चे पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10% से घटाकर 5% की गई।

  • कच्चे सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी शून्य कर दी गई।
  • रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 32.5% से घटाकर 27.5% की गई।
  • रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर ड्यूटी 22.5% कर दी गई।
  • सरकार के मुताबिक, कम आयात शुल्क से खाद्य तेलों की लैंडेड कॉस्ट घट सकती है, जिससे खुदरा कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। साथ ही घरेलू रिफाइनिंग को भी समर्थन मिल सकता है।
  • वित्त मंत्रालय की अगस्त रिपोर्ट में वैश्विक वेजिटेबल ऑयल कीमतों को महंगाई के संभावित जोखिमों में शामिल किया गया था। इसका एक कारण यह भी है कि पाम, सोयाबीन और रेपसीड जैसे तेलों का इस्तेमाल तेजी से बायोफ्यूल उत्पादन में हो रहा है।

El Nino से क्या बदलेगा?

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के अंत तक El Nino के बहुत मजबूत स्थिति में पहुंचने का अनुमान जताया गया है। El Nino प्रशांत क्षेत्र से काफी दूर तक बारिश और तापमान के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। हालांकि इसका असर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग होता है।

भारत के लिए सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि El Nino कितना मजबूत होगा। बल्कि यह है कि यह भारतीय मानसून, फसल चक्र और मौजूदा खाद्य-सप्लाई व्यवस्था के साथ किस तरह इंटरेक्ट करता है। WMO ने जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए पहले से मिलने वाले मौसम पूर्वानुमानों के महत्व पर भी जोर दिया है। संगठन की ताजा चेतावनी में गर्मी, बाढ़ और सूखे के साथ खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले व्यापक असर का उल्लेख किया गया है।

सरकार के पास कई विकल्प मौजूद

भारत के पास खाद्य आपूर्ति को संभालने के लिए कई नीतिगत विकल्प मौजूद हैं। सरकारी खरीद और खाद्यान्न भंडार प्रमुख वस्तुओं की कमी के दौरान कीमतों को कंट्रोल करने में मदद कर सकते हैं। जरूरत पड़ने पर आयात के जरिए घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाई जा सकती है। खाद्य तेलों पर हालिया आयात शुल्क कटौती इसका एक उदाहरण है कि सरकार व्यापार नीति के जरिए घरेलू कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

RBI की भी रहेगी नजर

खाद्य कीमतों का असर देश की व्यापक महंगाई पर भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खपत वाली वस्तुओं की टोकरी में महंगाई का दबाव व्यापक हुआ है और करीब आधी वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर 4% या उससे अधिक बढ़ रही हैं, जबकि मार्च में यह हिस्सा करीब एक-तिहाई था। इसी अवधि में अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में करीब 8% की वृद्धि दर्ज की गई। ऐसे में RBI के लिए अहम सवाल यह होगा कि क्या मौसम से जुड़े बदलाव केवल कुछ खाद्य वस्तुओं तक सीमित रहते हैं या वे लगातार खाद्य महंगाई में बदलकर व्यापक कीमतों तक पहुंचते हैं।

अभी की तस्वीर क्या है?

फिलहाल भारत में खाद्य कीमतों की तस्वीर एकसमान तेजी वाली नहीं है। चावल और कुछ दालों की कीमतें पिछले साल की तुलना में ज्यादा हैं। जबकि खाद्य तेल वैश्विक सप्लाई और कीमतों से प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार ने खाद्य तेलों के आयात शुल्क में कटौती जैसे कदम उठाए हैं। अब आने वाले कुछ महीने यह तय करने में अहम होंगे कि El Nino सिर्फ मौसम से जुड़ा जोखिम बना रहता है या भारत के खाद्य बिल और महंगाई पर इसका स्पष्ट असर दिखाई देने लगता है।

ये भी पढ़ें- Bengal SIR Row: ‘आधार से लॉग-इन नहीं करेंगे…’; पश्चिम बंगाल में जजों के इनकार के बाद अटके SIR के हजारों मामले

कल का मौसम: 9 सितंबर को बिहार-झारखंड संग 9 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, तेज हवाओं के साथ बिजली गिरने का खतरा! IMD ने दी ये चेतावनी

IMD Heavy Rain Alert: देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में मानसूनी बारिश अपना पूरा रंग दिखा रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 9 सितंबरके मौसम को लेकर ताजा चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक बिहार, झारखंड और ओडिशा समेत देश के 9 प्रमुख राज्यों में अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। इसके साथ ही कई तटीय व मैदानी राज्यों में तेज तूफानी हवाएं चलने और बादलों की कड़क के साथ आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है।

बिहार, झारखंड और ओडिशा समेत 9 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 9 सितंबर को पूर्वी भारत से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों तक मानसूनी बादल जमकर बरसेंगे। आईएमडी के मुताबिक 9 सितंबर को बिहार, झारखंड, ओडिशा, गांगेय पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश की आशंका है।

बिजली कड़कने और 30 से 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

बारिश के साथ-साथ कई राज्यों में तेज हवाओं और बिजली गिरने से होने वाले नुकसान को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली चमकने की आशंका है।

रुपिरनुपरकुत

बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना और उप-हिमालयी व गांगेय पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30 से 40 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने और बिजली गिरने का अनुमान है। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों में बादलों की जोरदार गर्जना के साथ बिजली गिरने का खतरा जताया गया है।

आंध्र प्रदेश में तेज सतही हवाएं, केरल में उमस और गर्मी

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के राज्यों में मौसम के अलग-अलग रूप देखने को मिलेंगे। तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों में दिनभर तेज सतही हवाएं चलने का अनुमान है। इसके अलावा तटीय आंध्र प्रदेश, केरल और माहे के अलग-अलग हिस्सों में 9 सितंबर को मौसम काफी गर्म और अत्यधिक उमस भरा बना रहेगा।

ये भी पढ़ें- El Nino effect: अल नीनो का कहर! जानिए भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में लाखों लोगों के सामने इसने कैसे खड़ा कर दिया जल संकट

इसके अलावा मौसम विभाग ने अरब सागर के तटीय और खुले समुद्री क्षेत्रों में मौसम का मिजाज काफी खराब रहने की आशंका जताई गई है। सोमालिया और ओमान के तटवर्ती क्षेत्रों तथा उससे सटे पश्चिम-मध्य, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएंचल सकती हैं। हवाओं की रफ्तार बढ़कर 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। IMD ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न उतरने की सख्त सलाह दी है।

El Nino effect: अल नीनो का कहर! जानिए भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में लाखों लोगों के सामने इसने कैसे खड़ा कर दिया जल संकट

El Nino effect: भारत के पड़ोसी देश श्रीलंका में जलवायु परिवर्तन और मौसमी बदलावों के बीच पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मजबूत होते अल नीनो, रिकॉर्ड हाई टेंप्रेचर और बारिश की भारी कमी की वजह से श्रीलंका के कई हिस्सों में सूखा और ड्राई मौसम बेहद भीषण रूप ले चुका है। अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस मौसमी आपदा की वजह से देश भर में 1 लाख 15 से अधिक लोग पीने के पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं।

अल नीनो का श्रीलंका पर असर

श्रीलंका के मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने जानकारी दी है कि क्षेत्र में अल नीनो का असर रंग दिखा रहा है। ये गर्म मौसम के पैटर्न के लिए जिम्मेदार हो सकता है। आपको बता दें कि अल नीनो एक ऐसी मौसमी गतिविधि है जो मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के पानी का के गर्म होने से पैदा होती है। ये पूरे क्षेत्र के तापमान पैटर्न को पूरी तरह से बदल देता है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि चारों तरफ से हिंद महासागर से घिरा होने की वजह से श्रीलंका पर इस अल नीनो का असर अधिक तेज देखने को मिल सकता है। लगातार जारी सूखे के बीच अधिकारी इसके संभावित प्रभावों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

7 जिलों के 115000 से अधिक लोग प्रभावित, जलाशय सूखे

आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक अल नीनो मौसम पैटर्न की वजह से श्रीलंका के 25 प्रशासनिक जिलों में से 7 जिलों में 115586 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। भीषण गर्मी और बारिश न होने से कई इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर गंभीर चुनौतियां पैदा हो गई हैं। डीएमसी अधिकारी प्रगीत दनांसुरिया के मुताबिक मौजूदा समय में देश के 1 लाख 15 हजार से ज्यादा लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं।

उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में सिंचाई अधिकारियों ने बताया कि लगभग 3500 एकड़-फिट की क्षमता वाले एरुवेवा जलाशय का जलस्तर घटकर अब मात्र 1000 एकड़-फिट रह गया है। मध्य क्षेत्र के माटले और उत्तर-पूर्व के नंदीकडाल सहित कई क्षेत्रों में वॉटर बॉडी के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

वन्यजीवों, समुद्री जीवन और खेती पर पड़ा बुरा असर

इस लंबे शुष्क मौसम और जल संकट ने श्रीलंका के पारितंत्र और कृषि को भारी नुकसान पहुंचाया है। उत्तर-पूर्व के मुल्लैथिवु लैगून में हजारों की संख्या में छोटी मछलियां मृत पाई गई हैं। अधिकारियों ने इन मौतों का कारण समुद्री पानी और मीठे पानी के आपस में मिलने को बताया है। कई क्षेत्रों में प्राकृतिक जल स्रोत पूरी तरह सूख रहे हैं। इसकी वजह से जंगली जानवर पानी के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में भटकने के लिए मजबूर हो गए हैं। पानी की कमी की वजह से कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। धान, नारियल, केला और अमरूद जैसी प्रमुख फसलें पानी न मिलने से नष्ट होने के कगार पर हैं।

सितंबर के अंत से राहत की उम्मीद

मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने उम्मीद जताई है कि सितंबर के अंत से देश में कुछ बारिश होने की संभावना है। ऐसे में अगर बारिश होती ह तो श्रीलंका को इस भीषण गर्म मौसम, जल संकट और अल नीनो के प्रभाव से राहत मिल सकती है।

ये भी पढ़ें- Delhi Building Collapse: ₹32 हजार किराया, फिर भी मालिक का पता नहीं! दिल्ली के सत्य निकेतन में ध्वस्त PG में टूटी दीवारों के बीच रह रहे थे छात्र

El Nino: मजबूत अल नीनो का असर, जुलाई में राहत के बाद फिर गहराया सूखा संकट! 14% की गिरावट के साथ सितंबर में भी कम बारिश का अलर्ट

भारत में इस साल का मॉनसून अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, मॉनसून सीजन के आखिरी महीने सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। मॉनसून के दौरान बारिश की कमी पहले ही चिंता का कारण बनी हुई है। 1 जून से 31 अगस्त तक देश में सामान्य के मुकाबले 14 फीसदी कम बारिश हुई है। अब सितंबर में भी कम बारिश का अनुमान है, ऐसे में पूरे मॉनसून सीजन में बारिश की कमी और बढ़ सकती है। मौसम विभाग ने इस दौरान अल नीनो के असर की संभावना भी जताई थी, जिसे मॉनसून की बारिश को प्रभावित करने वाली अहम वजहों में से एक माना जाता है।

जून से सितंबर तक चलने वाले चार महीने के मॉनसून में सितंबर का महीना काफी अहम माना जाता है, लेकिन इस बार कम बारिश का अनुमान किसानों और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ा सकता है। हालांकि, बारिश का असर अलग-अलग राज्यों और इलाकों में अलग रह सकता है।

1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म रहा अगस्त

अगस्त के दौरान देश के कई क्षेत्रों में गर्मी का असर काफी ज्यादा देखने को मिला। अगस्त में देश के कई हिस्सों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड के करीब पहुंचकर चिंता बढ़ाई। दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में यह महीना 1901 के बाद दूसरा सबसे गर्म अगस्त रहा। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर इलाकों में अगस्त तीसरा सबसे गर्म रहा। उत्तर-पश्चिम भारत में भी तापमान काफी ज्यादा रहा और यहां 126 साल के रिकॉर्ड में पांचवां सबसे गर्म अगस्त दर्ज किया गया। इससे साफ है कि इस साल अगस्त में देश के अलग-अलग हिस्सों में गर्मी का असर काफी ज्यादा रहा।

सितंबर में कब होगी बारिश

IMD चीफ मृत्युंजय महापात्रा ने कहा, “देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है।” उन्होंने कहा कि फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में “मजबूत अल नीनो की स्थिति” बनी हुई है, जिसके चलते मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है। महापात्रा ने कहा, “आने वाले महीनों में इन स्थितियों के और मजबूत होने की संभावना है।” उन्होंने संकेत दिया कि इसका सितंबर की बारिश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

IOD की स्थिति नॉर्मल

अल नीनो की स्थिति को आमतौर पर भारत में कमजोर मॉनसून और ज्यादा गर्मी से जोड़कर देखा जाता है। वहीं, हिंद महासागर में फिलहाल इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति सामान्य है और इसके सितंबर तक ऐसी ही रहने की संभावना है। सकारात्मक IOD मॉनसून को मजबूत करने और बारिश बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन मौजूदा समय में ऐसी स्थिति नहीं है। ऐसे में मॉनसून को हिंद महासागर से बारिश बढ़ाने के लिए कोई खास मदद मिलने की उम्मीद नहीं है।

बारिश का रिकॉर्ड

इस साल मॉनसून की बारिश का असर देशभर में एक जैसा नहीं रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, जून में बारिश की कमी 35% तक पहुंच गई थी। मॉनसून बारिश के वितरण का आकलन किए गए कुल 741 जिलों में से 312 जिलों (42%) में 31 अगस्त तक सामान्य से कम बारिश हुई, जबकि 38 जिलों (5%) में बहुत कम बारिश दर्ज की गई।

फसलों पर पड़ेगा असर

सितंबर में अगर बारिश उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई तो इसका सीधा असर किसानों और खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। भले ही ज्यादातर खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन इस साल फसल का कुल रकबा पिछले साल के मुकाबले करीब 2 फीसदी कम है। ऐसे में बारिश की कमी किसानों की मुश्किलें और बढ़ा सकती है। खेतों में नमी बनाए रखने के लिए उन्हें सिंचाई का सहारा लेना पड़ सकता है, जिससे डीजल, बिजली और पानी पर खर्च बढ़ेगा और खेती की लागत पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

El Nino Impact: 2 दशकों में सबसे कमजोर मानसून का खतरा! अल नीनो ने बढ़ाई चिंता, जानिए अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर

El Nino Impact: भारत में इस साल करीब दो दशकों का सबसे कमजोर मानसून रह सकता है। मौसम विभाग के दो वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, इस साल मानसून सीजन खत्म होने तक बारिश लंबी अवधि के औसत से करीब 15 फीसदी कम रहने का अनुमान है। अगर ऐसा होता है तो 2009 के बाद यह सबसे कम बारिश वाला मानसून होगा।

वहीं, कमजोर मानसून का सीधा असर देश की खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। फसलों की पैदावार घट सकती है, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं और गांवों में लोगों की आमदनी पर भी दबाव पड़ सकता है। बता दें कि भारत में सालभर होने वाली कुल बारिश का करीब 70 फीसदी हिस्सा मानसून से ही मिलता है, इसलिए अच्छी बारिश खेती के लिए बेहद जरूरी है।

कपास-सोयाबीन की पैदावार पर पड़ेगा असर

अब अगर सितंबर के महत्वपूर्ण महीने में अच्छी बारिश नहीं हुई तो कपास, सोयाबीन, मक्का और दालों जैसी ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसलों की पैदावार कम हो सकती है, साथ ही गेहूं और रेपसीड जैसी शीतकालीन ऋतु में बोई जाने वाली फसलों के लिए आवश्यक मिट्टी की नमी भी कम हो सकती है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “हम मानसून की बारिश पर अल नीनो का प्रभाव देख रहे हैं। सितंबर में यह प्रभाव गंभीर होने की संभावना है और बारिश में दो अंकों की कमी देखने को मिल सकती है।”

उन्होंने कहा कि जून-सितंबर के मौसम में भारत में औसत से 15% कम, यानी सामान्य से 85% कम बारिश हो सकती है, जो 2009 के बाद सबसे कम बारिश होगी। यह मौसम विभाग के शुरुआती पूर्वानुमान में अनुमानित 8% की कमी से लगभग दोगुनी होगी।

उन्होंने आगे कहा कि कुछ पूर्वी राज्यों को छोड़कर, देश के अधिकांश हिस्सों में सितंबर में औसत से कम बारिश होने की संभावना है, जिससे मौसमी कमी और बढ़ जाएगी।

हालांकि, IMD इस महीने के अंत तक सितंबर की बारिश को लेकर अपना आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर सकता है।

समय से पहले लौट सकता है मानसून

मौसम विभाग के एक अन्य सूत्र ने आधिकारिक नियमों के अनुसार नाम न बताने की शर्त पर कहा कि यदि कोई नई मौसम प्रणाली विकसित नहीं होती है, तो इस साल मानसून अगले महीने देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से सामान्य से कुछ दिन पहले ही लौटना शुरू कर सकता है।

गौरतलब है कि आमतौर पर मानसून जून में दस्तक देता है और 17 सितंबर के आसपास उत्तर-पश्चिमी हिस्सों से वापस लौटना शुरू करता है। इसके बाद अक्टूबर के मध्य तक पूरे देश से मानसून की विदाई हो जाती है।

उन्होंने बताया कि अल नीनो मजबूत हो रहा है और सितंबर में इसके और तीव्र होने की संभावना है, जिससे भारत में वर्षा कम हो सकती है।

अल नीनो क्या है?

अल नीनो एक जलवायु पैटर्न है जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से गर्म रहता है। यह वैश्विक मौसम पैटर्न को बाधित करता है और दक्षिण-पूर्व एशिया और अन्य क्षेत्रों में शुष्क परिस्थितियां ला सकता है।

पिछले वर्षों में भारत में अल नीनो वाले ज्यादातर सालों में सामान्य से कम बारिश हुई है। कई बार स्थिति इतनी गंभीर रही कि सूखे की वजह से फसलें बर्बाद हो गईं और सरकार को कुछ अनाज के निर्यात पर रोक या प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाने पड़े।

इस साल भी मानसून की शुरुआत से अब तक भारत में सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश हुई है। 1 जून से शुरू हुए मानसून सीजन में जून में बारिश 35.4 फीसदी कम रही। इसके बाद जुलाई में बारिश सामान्य से 1 फीसदी ज्यादा हुई, जिससे थोड़ी राहत मिली। हालांकि अगस्त में मानसून एक बार फिर कमजोर पड़ गया और अब तक इस महीने में सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है।

यह भी पढ़ें: मॉस्को में विदेश मंत्री जयशंकर को देखते ही पुतिन ने पीएम मोदी के लिए कही ये बात फिर भारत संग दोस्ती पर दिया बड़ा बयान

UP News: सरकारी स्कूलों के रसोइयों की सैलरी में ₹1000 की बढ़ोतरी, 3.54 लाख कर्मचारियों के लिए हेल्थ कवर का भी ऐलान

UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मिड-डे मील’ योजना के तहत काम करने वाली रसोइयों के हित में चार अहम ऐलान किया है। योगी सरकार ने दूसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश यानी मैटरनिटी लीव लेने की अनिवार्य दो साल की उम्र-अंतर की शर्त खत्म कर दी है। यानी अब दोनों बच्चों के बीच उम्र का अंतर दो साल से कम होने पर भी पात्र महिला कर्मचारी मैटरनिटी लीव ले सकेंगी। इसके अलावा करीब 3.5 लाख रसोइयों का मासिक मानदेय सितंबर से 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दिया गया है, जो साल में 10 महीने मिलेगा।

साथ ही योगी सरकार ने 3.54 लाख कर्मचारियों के लिए हेल्थ कवर का भी ऐलान किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राज्य के मिड-डे मील प्रोग्राम के तहत काम करने वाले 3.54 लाख रसोइयों के लिए कैशलेस मेडिकल कार्ड शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने इस पहल को उनकी सेहत, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में एक कदम बताया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि स्कूल की रसोई में खाना बनाना सिर्फ भोजन तैयार करने तक सीमित नहीं है, क्योंकि यह लाखों बच्चों की सेहत, शिक्षा और भविष्य में योगदान देता है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 3.54 लाख मिड-डे मील रसोइयों के लिए रविवार को कैशलेस मेडिकल कार्ड वितरण और सम्मान समारोह आयोजित किया गया।

सीएम योगी ने रविवार को X पर लिखा, “रक्षाबंधन के पहले प्रदेश के रसोइयों हेतु चार उपहार…1- मानदेय में वृद्धि…2- दुर्घटना होने पर परिवार को ₹2 लाख की सहायता…3- प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस उपचार… 4- साड़ी के लिए धनराशि बढ़ाकर ₹1,000।” सीएम योगी ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “रसोइयों का मानदेय ₹1,000 से बढ़ाकर अब ₹3,000 कर दिया गया है..।”

मुख्यमंत्री ने ‘पीएम पोषण योजना’ के तहत रसोइयों के तौर पर काम करने वाली महिलाओं की तारीफ की। सीएम योगी ने उन्हें प्रोग्राम की ‘बुनियादी ताकत’ बताते हुए स्कूली बच्चों को खाना खिलाने में उनके योगदान का जिक्र किया।

उनके ट्वीट में लिखा, “हमारी रसोइया माताएं और बहनें, जो अपनी मेहनत और ममता से इस पवित्र काम को पूरा करती हैं, वे पीएम पोषण की असली बुनियादी ताकत हैं।” मंत्रिमंडल ने बुलंदशहर में नए बस अड्डों और अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा मार्ग को चार लेन करने की संशोधित परियोजना को भी मंजूरी दी है।

जर्जर स्कूलों के वीडियो पर CM योगी का SP पर हमला

योगी आदित्यनाथ ने रविवार को समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सोशल मीडिया पर प्रदेश के जर्जर स्कूल भवनों के वीडियो साझा कर सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। जबकि इनमें से कई इमारतें 2017 से पहले की हैं, जब प्रदेश में सपा की सरकार थी।

लखनऊ में आयोजित ‘मिड-डे मील रसोइयों के सम्मान समारोह’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार पुराने और जर्जर स्कूल भवनों को चिन्हित कर उन्हें नए भवनों से बदलने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पुराने भवनों की तस्वीरें और वीडियो दिखाकर मौजूदा सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने कई पुराने और खराब हो चुके स्कूल भवनों को नए भवनों से बदल दिया है। उन्होंने कहा कि जो भवन अभी भी जर्जर स्थिति में हैं, उनकी पहचान की जा रही है और उन्हें भी चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। मुख्यमंत्री ने सपा सरकार के कार्यकाल पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान कानून-व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था दोनों की स्थिति खराब थी। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार में गरीबों और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की अनदेखी हुई तथा प्रदेश में दंगे और अव्यवस्था आम बात थी।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं। सीएम योगी ने दावा किया कि उनकी सरकार सरकारी स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं, सुरक्षित भवन और विद्यार्थियों के लिए बेहतर माहौल उपलब्ध कराने पर लगातार काम कर रही है।

3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री पोषण योजना (PM Poshan Yojana) के तहत सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में काम कर रहे करीब 3.53 लाख रसोइयों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई बड़े ऐलान भी किए। सीएम योगी ने कहा कि मिड-डे मील तैयार करने वाले रसोइये बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सरकार उनके हितों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल स्कूल भवनों तक सीमित नहीं है। बल्कि छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ-साथ उनसे जुड़े कर्मचारियों और रसोइयों के कल्याण पर भी सरकार का ध्यान है।

ये भी पढ़ें- Monsoon-El Nino Effect: मानसून का सबसे डरावना चेहरा! 70% बढ़ा सूखे का खतरा? मंडराया भुखमरी का संकट, कांपे किसान

El Nino impact: भारत में अल नीनो और कमजोर मानसून का दोहरा वार! क्या बढ़ेंगे दाल, चावल और सब्जियों के दाम?

El Nino Impact on India: प्रशांत महासागर में मजबूत होता अल नीनो का प्रभाव भारत की फूड इकॉनमी के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। जलवायु की यह स्थिति खेती की पैदावार पर असर डाल सकती है जिससे फूड सप्लाई चेन पर भी असर पड़ेगा। ऐसा हुआ तो खाने-पीने के सामान पर महंगाई का असर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि भारत सरकार ने इस वित्त वर्ष में खरीफ की फसल को कम नुकसान का अनुमान दिया है पर भारत के विकास आउटलुक में पहले से ही महंगाई के जोखिम ने अपनी जगह बना रखी है।

रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) पहले ही चेतावनी जारी कर चुका है कि वित्त वर्ष 2026-27 में फूड और फ्यूल इंफ्लेशन भारत के आथिर्क विकास पर असर डाल सकते हैं। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले वित्त वर्ष के 7.6 फीसदी से कम है। Ind-Ra के मुताबिक FY27 में रिटेल इंफ्लेशन औसतन 4.9 प्रतिशत रह सकता है। पिछले वित्त वर्ष में यह सिर्फ 2 फीसदी था। अल नीनो की वजह से फूड इंफ्लेशन बढ़ने के जोखिम को आर्थिक विकास में रुकावट डालने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना गया है।

कृषि क्षेत्र की मौजूदा तस्वीर और खरीफ की स्थिति

वैसे अल नीनो के खतरे के बावजूद मौजूदा खेती की तस्वीर बहुत अधिक चिंताजनक नजर नहीं आ रहा है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 18 अगस्त को स्पष्ट किया था कि इस साल के खरीफ उत्पादन पर अल नीनो का कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि कुछ जगहों पर स्थानीय स्तर पर नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ इलाकों को छोड़कर अल नीनो का बड़ा असर नहीं दिख रहा है और स्थिति कुल मिलाकर अच्छी बनी हुई है। अधिकांश हिस्सों में फसलों की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बारिश हुई है।

देश के कृषि क्षेत्र ने कुछ इलाकों में कम बारिश के बावजूद व्यापक नुकसान से बचाव किया है। 14 अगस्त तक 1016.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी थी, जो इस अवधि तक सामान्य रूप से कवर होने वाले औसत क्षेत्र का 92 प्रतिशत है। यह रकबा पिछले साल के स्तर से सिर्फ 2 फीसदी ही कम है। कृषि मंत्री के मुताबिक बुआई का अंतर काफी कम हुआ है और संवेदनशील माने जाने वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर लगभग 100 रह गई है।

हालांकि क्षेत्रीय स्तर पर स्थिति असमान बनी हुई है। कर्नाटक और तेलंगाना में जल संकट का सामना करना पड़ा है जबकि पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में बारिश की कमी अधिक देखी गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक 12 अगस्त तक कुल मानसूनी घाटा 12 प्रतिशत था। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में 26 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीप में 19 प्रतिशत और उत्तर-पश्चिम भारत में 11 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है। आपको बता दें कि अल नीनो का असर हर जगह एक जैसा नहीं होता। इसमें कुछ हिस्से सूखे रह जाते हैं जबकि अन्य हिस्सों में सामान्य या अधिक बारिश होती है।

खाद्य कीमतों और अर्थव्यवस्था पर अल नीनो का प्रभाव

अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के गर्म होने से होने वाला एक मौसमी बदलाव है। ये वैश्विक स्तर पर वायुमंडलीय परिसंचरण, बारिश और तापमान को बदल देता है। भारत के लिए इसका सबसे बड़ा असर मानसून और कृषि पर देखा जाता है। कमजोर या असमान मानसून उन फसलों की उपज को घटा सकता है जो सिंचाई के बिना पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं। उत्पादन में गिरावट से आपूर्ति कम होती है, जिससे थोक और खुदरा कीमतें बढ़ने लगती हैं।

फसल की यह कमी सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहती बल्कि पूरी फूड सप्लाई चेन (प्रॉक्यूरमेंट, स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट, प्रोसेसिंग और रिटेल) पर भी असल डालती है। मुख्य फसलों की कम उपलब्धता से आयात की मांग बढ़ती है, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ पड़ता है और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ता है। Ind-Ra के मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अल नीनो की वजह से पैदा हुई महंगाई कच्चे तेल की कम कीमतों से भारत को मिलने वाले फायदे को भी खत्म कर सकती है।

जब अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां या अन्य फसलें कम पैदा होती हैं, तो बाजार में उनकी उपलब्धता घट जाती है। मांग समान रहने पर कीमतें बढ़ने लगती हैं। इसके सीधे असर से खरीद लागत बढ़ जाती है। आखिरकार यह बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं तक पहुंचती है जिससे घरेलू बजट बिगड़ता है। सरकार को भी कीमतें नियंत्रित करने के लिए अपने स्टॉक से अनाज छोड़ने, आयात बढ़ाने या निर्यात पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाने पड़ते हैं। लगातार खाद्य मुद्रास्फीति बने रहने से भारतीय रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश भी कम हो जाती है।

दुनिया भर में रिकॉर्ड तोड़ अल नीनो का खतरा

मौजूदा अल नीनो एक बड़े वैश्विक जलवायु संकट का रूप ले रहा है। क्लाइमेट ब्रिंक डैशबोर्ड के मुताबिक प्रशांत महासागर के नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान 30 साल के औसत से लगभग 2.6°C अधिक हो चुका है। पूर्वानुमानों के अनुसार नवंबर तक यह अंतर 3.9°C तक पहुंच सकता है। ऐसा हुआ तो ये 2015 के शक्तिशाली अल नीनो के करीब 3°C के रिकॉर्ड को भी पार कर जाएगा।

अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) का अनुमान है कि 69 प्रतिशत संभावना है कि यह 1950 के बाद का सबसे मजबूत अल नीनो बन जाएगा। इस वजह से दुनिया के कुछ हिस्से अत्यधिक गर्म और सूखे हो रहे हैं जबकि अन्य इलाकों में मूसलाधार बारिश और बाढ़ आ रही है। उदाहरण के लिए इंडोनेशिया में लंबे सूखे के कारण भीषण जंगलों की आग देखी गई है।

जलवायु वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह अल नीनो वर्ष 2027 में वैश्विक तापमान में करीब 0.3°C और बढ़ा सकता है। इस वजह से ग्लोबल टेंप्रेचर औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से 1.76°C ऊपर पहुंच सकता है, जिससे 2027 अब तक का सबसे गर्म साल बन सकता है।

मैन मेड ग्लोबल वार्मिंग भी अल नीनो के असर को और घातक बना रही है। गर्म हवा अधिक नमी सोखती है जिससे अति-बारिश की तीव्रता बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ उच्च तापमान मिट्टी की नमी सुखाकर सूखे को और भीषण बना देता है। ऐतिहासिक रिकॉर्ड और कोरल डेटा बताते हैं कि पिछली एक सदी में अल नीनो की तीव्रता में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। भारत के लिए तात्कालिक निष्कर्ष यही है कि भले ही कृषि क्षति अभी व्यापक न हुई हो, लेकिन मानसून के घाटे और अल नीनो के मजबूत होने से खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर जोखिम लगातार मंडरा रहा है।

यह भी पढ़ें: असम में बाढ़ में घायल हथिनी ‘जॉयमोती’ को मिला नया जीवन, इलाज के लिए वंतारा किया गया एयरलिफ्ट