‘नाजी जर्मनी जैसा है ईरानी शासन…’, मार्को रुबियो बोले- ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ से समझौता बेहद मुश्किल

Marco Rubio On Iran: भारत आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान और उसकी शीर्ष नेतृत्व प्रणाली पर जमकर निशाना साधा है। नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि ईरान के साथ शांति समझौते पर पहुंचना बेहद मुश्किल है, क्योंकि देश की कमान थियोलॉजी यानी धार्मिक नीतियों से संचालित होने वाले ‘कट्टरपंथी शिया मौलवियों’ के हाथों में है।

नाजी U-Boat रणनीति से की तुलना, भारतीय नाविकों की मौतों पर जताई चिंता

मार्को रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने के लिए ईरान की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ईरान की इन हरकतों की तुलना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी की सबमरीन रणनीतियों से की।

रुबियो ने कहा, ‘ईरान खुलेआम कह रहा है कि वे निर्दोष नाविकों को मारने और कमर्शियल जहाजों को डुबोने की कोशिश कर रहे हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऐसा कभी नहीं देखा गया। पूरी दुनिया को एक साथ आकर इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए।’

उन्होंने बताया कि इन हमलों में कई भारतीय नाविकों ने भी अपनी जान गंवाई है, क्योंकि वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारतीय नाविकों की बड़ी संख्या है। वैसे अमेरिकी नौसेना अधिकांश ईरानी ड्रोन और मिसाइलों को रास्ते में ही नष्ट कर रही है।

‘कट्टरपंथी मौलवियों के हाथ में कमान’, कूटनीति पर संकट

तेहरान के साथ राजनयिक समझौते और भविष्य में सैन्य तनाव की संभावना पर रुबियो ने स्पष्ट किया कि ईरानी नेतृत्व की कट्टरपंथी सोच के कारण बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।

उन्होंने कहा, ‘ईरानी शासन के साथ डील करना बहुत कठिन है। दुर्भाग्य से वे समझौता करना नहीं जानते और वे कट्टरपंथी शिया मौलवियों द्वारा नियंत्रित हैं।’ रुबियो ने स्पष्ट किया कि उनका हमला सामान्य शिया समुदाय पर नहीं, बल्कि शासन चला रहे कट्टरपंथियों पर है।

अमेरिका की ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ नीति जारी रहेगी

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि वाशिंगटन तेहरान पर असाधारण आर्थिक दबाव बनाना जारी रखेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान अपने नागरिकों की भलाई के बजाय मिलने वाले हर डॉलर का उपयोग आतंकवाद को स्पॉन्सर करने, मिसाइलें और ड्रोन बनाने में करता है।

इससे पहले अगस्त में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ ‘इकोनॉमिक एस्फिक्सिया’ यानी आर्थिक तौर पर पंगु बनाने की रणनीति का ऐलान किया था, जिसके तहत डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, गोल्ड, एविएशन और शिपिंग सेक्टर्स पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए हैं।

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Hormuz Strait Viral Video: समुद्र में बहने लगे iPhone और महंगे फ्रेंच परफ्यूम! ईरानी मछुआरों के लूटने का दावा, वीडियो हुआ वायरल

Hormuz Strait Viral Video: ईरान के पास रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में एक कंटेनर जहाज के डूबने के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में कथित तौर पर ईरानी मछुआरों और स्थानीय लोगों को समुद्र में तैरते iPhone, महंगे फ्रेंच परफ्यूम और दूसरे कीमती सामान को लूटने ने की कोशिश करते हुए दिखाया गया है। कुछ वीडियो में छोटी नावों को समुद्र में तैरते बड़े शिपिंग कंटेनरों को खींचने की कोशिश करते हुए भी देखा जा सकता है। हालांकि, इन वायरल वीडियो की सच्चाई पर सवाल उठने लगे हैं। कुछ फैक्ट-चेकिंग टीमों का कहना है कि ऑनलाइन वायरल हो रहे कुछ फुटेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए हैं।

‘अल जजीरा’ की 17 अक्टूबर को जारी ओपन-सोर्स जांच के मुताबिक, स्मार्टफोन और लग्जरी परफ्यूम को समुद्र से निकालने का दावा करने वाले कई वीडियो फर्जी पाए गए। जांच में इन क्लिप्स को AI से तैयार किया गया बताया गया है। ऐसे में जहाज के डूबने की वास्तविक घटना और उससे जोड़कर शेयर किए जा रहे वीडियो के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

समुद्र में तैरते iPhone और परफ्यूम के वीडियो वायरल

सोशल मीडिया पर वायरल कुछ क्लिप्स में समुद्र की लहरों के बीच कंटेनर और पैकेट तैरते दिखाई देते हैं। दावा किया जा रहा है कि जहाज के डूबने के बाद उसका कीमती सामान पानी में बह गया। इसे देखते ही स्थानीय लोग उसे निकालने के लिए नावों से समुद्र में पहुंच गए। कुछ पोस्ट में इन पैकेटों को iPhone और फ्रांस के महंगे परफ्यूम की खेप बताया गया। हालांकि, इन सामानों की वास्तविक पहचान और वीडियो में दिखाई जा रही घटनाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

लेबनान के अखबार अन-नहार की फैक्ट-चेकिंग टीम ने भी एक वायरल वीडियो की जांच की, जिसमें कथित तौर पर जहाज दुर्घटना के बाद iPhone के डिब्बे समुद्र तट पर पहुंचे दिखाई देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक विशेष डिटेक्शन टूल ने इस वीडियो के AI से बनाए जाने की बहुत अधिक संभावना जताई। इसलिए वायरल वीडियो को वास्तविक घटना का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।

क्या है GFS Pride जहाज के डूबने की पूरी घटना?

यह मामला सिंगापुर के झंडे वाले कंटेनर जहाज GFS Pride के होर्मुज जलडमरूमध्य के पास डूबने के बाद सामने आया है। जहाज के डूबने की घटना की पुष्टि समुद्री अधिकारियों ने की है। सिंगापुर की मैरीटाइम एंड पोर्ट अथॉरिटी (MPA) के अनुसार, जहाज को नुकसान पहुंचा था और उसमें आग लग गई थी। इसके बाद जहाज समुद्र में डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी 21 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। अधिकारियों ने किसी के घायल होने की सूचना नहीं दी।

न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, MPA ने अपने बयान में बताया कि जहाज क्षतिग्रस्त होने और उसमें आग लगने के बाद डूब गया। इस हादसे में सभी 21 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया।

GFS Pride की कंटेनर क्षमता 2,824 TEU थी। TEU का अर्थ ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट है, जिसका इस्तेमाल कंटेनर जहाजों की क्षमता मापने के लिए किया जाता है।

जहाज कैसे डूबा? ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने खुद बताया

जहाज के डूबने की वजह को लेकर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने अलग दावा किया। उसके मुताबिक, जहाज एक अवैध और खतरनाक समुद्री रूट्स में दाखिल हुआ था। समुद्री बारूदी सुरंग से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई। हालांकि, जहाज के डूबने की परिस्थितियों, आग लगने के सटीक कारण और उसमें मौजूद सामान के बारे में किए जा रहे अलग-अलग दावों को सावधानी से देखना जरूरी है। खास तौर पर वायरल वीडियो में दिखाए गए iPhone और महंगे परफ्यूम की खेप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

होर्मुज में बढ़ा समुद्री जहाजों पर खतरा

GFS Pride के डूबने की घटना ऐसे समय हुई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। ‘रॉयटर्स’ ने 14 अक्टूबर की रिपोर्ट में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों में बढ़ोतरी की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के अधिकारियों ने जलडमरूमध्य पर अपना कंट्रोल मजबूत करने की कोशिशों के बीच रणनीति में बदलाव की बात कही थी।

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होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रूट है। युद्ध से पहले दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रूट से गुजरता था। फिलहाल, सबसे अहम बात यह है कि जहाज का डूबना वास्तविक घटना है। लेकिन समुद्र से iPhone और महंगे परफ्यूम निकालते लोगों के नाम पर वायरल हो रहे कई वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठ रहे हैं। इसलिए इन सभी वीडियो को वास्तविक घटना बताकर शेयर करने से पहले उनकी पुष्टि करना जरूरी है।

ईरान की अमेरिका को कड़ी चेतावनी! फिर हमला हुआ तो पहले से ज्यादा मजबूत जवाब देंगे, बातचीत का रास्ता भी खुला

Iran-US War Update: ईरान ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए एक बार फिर साफ किया है कि वह अपनी रक्षा के साथ-साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिश भी जारी रखेगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार (4 अक्टूबर) को चेतावनी दी कि अगर उनके देश के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की गई तो इसका जवाब पहले से ज्यादा ताकतवर होगा। हालांकि, उन्होंने साथ ही बातचीत के जरिए न्यायपूर्ण और सम्मानजनक समाधान की संभावना भी खुली रखी है।

तेहरान में विदेशी राजदूतों और राजनयिक मिशनों के प्रमुखों को संबोधित करते हुए अराघची ने कहा कि अगर दुश्मन फिर से सैन्य टकराव का रास्ता चुनते हैं तो उन्हें पहले से अधिक मजबूत प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ईरान कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने के लिए तैयार है।

ईरान-अमेरिका बातचीत पर फिर अड़चन

यह बयान ऐसे समय आया है जब युद्ध खत्म करने की कोशिशें फिलहाल गतिरोध में नजर आ रही हैं। अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी के अंत में शुरू किए गए सैन्य अभियान के बाद भारी बमबारी हुई। लेकिन संघर्ष का निर्णायक अंत नहीं हो सका। हाल के हफ्तों में अमेरिका ने सैन्य अभियानों को कम करते हुए आर्थिक दबाव बढ़ाने पर जोर दिया है। जून में ईरान और अमेरिका ने स्थायी समाधान की दिशा में एक रूपरेखा तैयार करने के लिए समझौता ज्ञापन पर सहमति जताई थी। हालांकि, बाद में यह प्रक्रिया टूट गई। इसका एक प्रमुख विवादित मुद्दा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा।

होर्मुज बना बड़ा मुद्दा

युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर कंट्रोल कायम करने की कोशिश की है। ईरान ने उन जहाजों पर भी हमले किए हैं जो उसकी अनुमति के बिना इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान और अमेरिका के अधिकारियों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत भी हुई। तेहरान के मुताबिक, उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए सात शर्तें रखीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। लेकिन आगे बातचीत की संभावना के साथ-साथ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू करने का विकल्प भी खुला रखा।

अमेरिका ने 1 सितंबर के बाद नहीं किया हमला

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने 1 सितंबर के बाद ईरान पर कोई नया हमला नहीं किया है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को ईरान में युद्ध और यमन के संघर्ष को लेकर बैठक की। इस बीच, ईरान समर्थित हूती संगठन यमन में सरकारी बलों के खिलाफ लड़ाई जारी रखे हुए है। हूती अब खुलकर सऊदी अरब को भी निशाना बना रहा है। ऐसे में ईरान-अमेरिका तनाव के साथ क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर भी स्थिति पर नजर बनी हुई है।

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ईरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल के बराबर पहुंची! युद्ध के असर के बाद ये हाल आया सामने

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध का सबसे गंभीर और विनाशकारी असर ईरान की इकॉनमी पर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। तेहरान के मुद्रा बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 25 लाख (2.5 मिलियन) रियाल के आंकड़े को पार कर गई। यह अब तक के इतिहास में ईरानी रियाल का सबसे निचला स्तर है। यह साफ इशारा कर रहा है कि युद्ध ने ईरान के आर्थिक संतुलन को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी मुद्रा में यह बड़ी गिरावट सिर्फ 27 दिनों के भीतर आई है। इससे पहले 2 सितंबर को रियाल ने 22 लाख (2.2 मिलियन) प्रति डॉलर का निचला स्तर छुआ था। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरानी मुद्रा लगातार नए निचले रिकॉर्ड बना रही है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए मध्यस्थता वार्ता में तेजी

एक तरफ जहां ईरान की इकॉनमी चरमरा रही है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत अब और अधिक गंभीर मोड़ में पहुंच गई है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के बाद और पाकिस्तानी व कतर के मध्यस्थों से मुलाकात के बाद ईरानी मीडिया को बताया कि मौजूदा समय में पूरा ध्यान सिर्फ युद्ध के मुख्य केंद्र यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर फोकस्ड है। कतर के मध्यस्थ जल्द ही अमेरिकी पक्ष से इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा करेंगे। अमेरिका का अंतिम रुख सामने आने के बाद तेहरान में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अमेरिकी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच लड़ाई रोकने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुजे को खोलने के लिए एक समझौते पर काम किया जा रहा है।

हालांकि, यह मध्यस्थता प्रयास ऐसे समय में जारी हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें ईरान ने अमेरिकी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने, ईरानी संपत्ति को बहाल करने और तेल बिक्री पर प्रतिबंध हटाने की शर्त पर 7 दिनों में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने की बात कही थी।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी जनता को दिया सीधा संदेश

ईरान की इकॉनमी पर बढ़ते दबाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के मुख्य प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेबी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे अमेरिकी नागरिकों से अपील की। उन्होंने एक पत्र पढ़कर सुनाया और अमेरिकी जनता से आह्वान किया कि वे अपनी सरकार पर दबाव बनाएं ताकि अमेरिका मिडिल ईस्ट में जारी इस युद्ध को समाप्त करे। जनरल मोहेबी ने कहा कि इस युद्ध को खत्म करने का एकमात्र रास्ता यह है कि वाशिंगटन अपनी हार स्वीकार करे और ये इलाका छोड़कर चला जाए। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम का बहाना बनाकर देश की संपत्ति को लूटने और उसे फिर से एक उपनिवेश बनाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन और आर्थिक संकट

ईरान का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में 3 नवंबर को महत्वपूर्ण मिडटर्म इलेक्शन होने जा रहे हैं। युद्ध की वजह से अमेरिका में भी ईंधन और गैसोलीन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर वहां की राजनीति और लोगों पर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके वरिष्ठ सलाहकारों का मानना है कि ईरान की इकॉनमी अब इस लंबे संघर्ष को झेलने में सक्षम नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि नई पाबंदियों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान का तेल व्यापार रुक गया है जिससे तेहरान एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका का दावा है कि तेल की कमाई रोकने से ईरान को उन संसाधनों के इस्तेमाल से रोका जा रहा है, जिनका प्रयोग वह सैन्य गतिविधियों के लिए करता है।

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : मंथली एक्सपायरी के दिन बाजार के लिए कमजोर संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी बिल्कुल फ्लैट नजर आ रहा है। एशियाई बाजारों में दबाव दिख रहा है। 10 साल की US बॉन्ड यील्ड 5.25% तक उछलने से अमेरिकी बाजार के सेंटिमेंट भी बिगड़े हैं। इधर कच्चा तेल भी 105 डॉलर के ऊपर कायम है। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

कल भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स ने हफ्ते की शुरुआत कमजोरी के साथ की। भारी बिकवाली के बीच निफ्टी इंट्राडे में 22,800 के नीचे फिसल गया,जिससे लगातार सातवें हफ्ते भी गिरावट का सिलसिला जारी रहा।

जैसे-जैसे ट्रेडिंग आगे बढ़ी,बिकवाली का दबाव और बढ़ गया। निफ्टी छह महीने के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। कमजोर ग्लोबल संकेत,कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और बॉन्ड यील्ड,FII की लगातार बिकवाली और US-Iran शांति वार्ता में गतिरोध के बाद बढ़ी हुई जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता बाजार पर दबाव बनाने वाली मुख्य वजहें रहीं। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर और निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

गिफ्ट निफ्टी

शुरुआती कारोबार में GIFT निफ्टी 22,834 के आसपास सपाट ट्रेड कर रहा था,जिससे घरेलू इक्विटी मार्केट में सुस्त शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं।

एशियाई बाजार

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार गिरावट के साथ खुले। जापान का निक्केई 1 प्रतिशत और टॉपिक्स इंडेक्स 1.68 प्रतिशत नीचे था। वहीं, कोस्पी में 0.56 फीसदी की और ताइवान के बाजार में 0.06 फीसदी की गिरावट नजर आ रही थी।

अमेरिकी बाजार

सोमवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट आई। तेल की कीमतें और ट्रेजरी यील्ड में बढ़त ने बाजार पर दबाव बनाया। निवेशक ईरान युद्ध से जुड़ी शांति वार्ता की संभावनाओं और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की चाल पर नजरे बनाए हुए हैं।

डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 347.11 अंक या 0.67% गिरकर 51,481.51 पर आ गया,S&P 500 में 59.72 अंक या 0.77% की गिरावट के साथ यह 7,683.69 पर बंद हुआ और नैस्डैक कम्पोजिट 248.34 अंक या 0.92% गिरकर 26,820.38 पर आ गया। S&P में आई यह गिरावट 20 अगस्त के बाद से एक दिन में प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ी गिरावट थी।

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एशियन करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई करेंसीज में मिला-जुला कारोबार होता दिख रहा है। इसमें इंडोनेशियाई रुपिया और थाई बहत में गिरावट दिख रही है,जबकि फिलीपीन्स के पेसो और मलेशियाई रिंगित में बढ़त हुई है। इंडोनेशियाई रुपिया 0.42% गिरा है। जबकि थाई बहत में 0.09% और ताइवान डॉलर में 0.11% की गिरावट आई है। सिंगापुर डॉलर 0.05% कमजोर हुआ है,जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन मामूली गिरावट (0.04%) के साथ लगभग सपाट दिख रहा है।

दूसरी ओर फिलीपीन पेसो में 0.22% की बढ़त नजर आई है। इसके बाद मलेशियाई रिंगित में 0.07% और जापानी येन में 0.05% की बढ़ोतरी हुई है। चीनी रेनमिनबी में 0.02% की बढ़त हुई है।

सोना $4200 के नीचे

मजबूत डॉलर और US में अगले 1 साल में 3 रेट हाइक की आशंका से सोने-चांदी में तेज गिरावट आई है और यह $4200 के नीचे फिसल गया है। वहीं, चांदी $61 के नीचे आ गई है। US में अक्टूबर में दरें बढ़ने की 70% संभावना है।

ईरान को प्रतिबंधों में ढील की खबर फर्जी: ट्रंप

ईरान को प्रतिबंधों में ढील और फ्रीज किए गए फंडों को रिलीज करने की खबरों को ट्रंप ने खारिज करते हुए कहा है कि Axios की खबर फर्जी और कोरी अफवाह हैं। इधर ईरान ने नवंबर में US चुनाव के बाद युद्ध और भड़कने की आशंका जताई है।

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए बड़ा कदम

टाटा संस की लिस्टिंग टालने के लिए टाटा ट्रस्ट का बड़ा कदम सामने आया है। Tata Electronics, Tata Consulting Engineers का टाटा संस में मर्जर का प्रस्ताव रखा गया है। इसके कंपनी के NBFC और CIC कैटेगरी से बाहर निकलने में मदद मिलेगी। ट्रस्ट ने कहा है कि रीस्ट्रक्चरिंग शेयरहोल्डर्स के हित में होगी।

कल निफ्टी में होगा बड़ा बदलाव

कल निफ्टी में बड़ा बदलाव होगा। करीब 3 दशक बाद विप्रो निफ्टी से बाहर होगा। वहीं, BSE इसमें शामिल होगा। BSE में 650 मिलियन डॉलर का इनफ्लो हो सकता है। वहीं, विप्रो से करीब 200 मिलियन डॉलर निकलेंगे।

होनासा कंज्यूमर में ब्लॉक डील संभव, Cube Highways Trust में भी बड़े सौदे संभव

आज ब्लॉक डील्स पर नजर रहेगी । सूत्रों के मुताबिक 2.73 परसेंट हिस्से के लिए होनासा कंज्यूमर में 400 Cr रुपए की ब्लॉक डील संभव है। करीब साढ़े 3 परसेंट डिस्काउंट पर 450 रुपए प्रति शेयर फ्लोर प्राइस तय की गई है। साथ ही Cube Highways Trust में भी करीब पौने 700 करोड़ के बड़े सौदे हो सकते हैं।

कोफोर्ज: अखिल कुमार गुप्ता बने नए चेयरमैन

कोफोर्ज आज फोकस में होगा। अखिल कुमार गुप्ता नए चेयरमैन बने हैं। ये ओपी भट्ट के पद छोड़ने के बाद जिम्मेदारी संभालेंगे। इनका कार्यकाल 5 साल का होगा।

अगस्त IIP ग्रोथ 7.4% से बढ़कर 8%

देश के इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में तेजी आई है। अगस्त में IIP ग्रोथ 7.4% से बढ़कर 8% रही है। जुलाई IIP ग्रोथ 6.7% से रिवाइज होकर 7.4% हो गई है। मैन्युफैक्चरिंग,इलेक्ट्रिसिटी और इंटरमीडिएट गुड्स ग्रोथ में तेजी देखने को मिली है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

28 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार तीसरे सेशन में भी बिकवाली जारी रखी और 5,300 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे। वहीं,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा देना जारी रखा और इस सेशन के दौरान लगभग 5,189 करोड़ रुपये की खरीदारी के साथ वे नेट बायर बने रहे।

Chabahar Zahedan rail link: ईरान में 730 KM की चाबहार-जाहेदान रेल लाइन तैयार, भारत के लिए खुला मध्य एशिया और रूस का नया रास्ता, फुल डिटेल जानिए

Chabahar Zahedan rail link: काफी अरसे से बन रही चाबहार-जाहेदान रेलवे लाइन प्रोजेक्ट अंतिम पड़ाव पर है। इस प्रोजेक्ट के जरिए ईरान की मदद से भारत की पहुंच अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस के कुछ हिस्सों तक बेहतर हो सकेगी। 730 km लंबा यह रेल लिंक अगले 3 से 4 महीने में पूरी तरह ऑपरेशनल होने का अनुमान लगाया जा रहा है। ईरान ने इसके पूरा होने की घोषणा की है।

चाबहार-जाहेदान रेलवे लाइन रूट पर 33 स्टेशन, 39 टनल और 201 पुल हैं। यह ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर चाबहार को जाहेदान से जोड़ता है। इससे जमीन से घिरे अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों को हिंद महासागर के जरिए समुद्री रास्तों से एक और संपर्क मिलेगा। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी अधिकारी ऑपरेशन शुरू होने से पहले अंतिम सुरक्षा जांच कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट से ईरान के जरिए अफगानिस्तान, सेंट्रल एशिया और रूस के कुछ हिस्सों तक भारत की पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।

मोदी-पेजेशकियन के बीच चाबहार पोर्ट पर हुई थी चर्चा

यह डेवलपमेंट ऐसे समय में हुआ है जब भारत और ईरान चाबहार पोर्ट में नई दिल्ली की भागीदारी पर बातचीत कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में BRICS समिट के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात के समय यह मुद्दा एजेंडे में था। मोदी और पेजेशकियन 11 सितंबर को मिले और उन्होंने पश्चिम एशिया में आपसी रिश्तों और विकास पर चर्चा की।

भारत-ईरान कर चुके हैं 10 साल का एग्रीमेंट साइन

इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड और ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन ने मई 2024 में चाबहार में शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल के डेवलपमेंट और ऑपरेशन के लिए 10 साल के एग्रीमेंट पर साइन किए। इसके बाद भारत ने कॉन्ट्रैक्ट के तहत अपना $120 मिलियन का फाइनेंशियल कमिटमेंट पूरा किया।

अमेरिका वापस ले चुका है सैंक्शन

चाबहार प्रोजेक्ट को गिरफ्त में लेने वाले प्रतिबंधिक को अमेरिका ने सितंबर 2025 में वापस ले लिया। इससे पहले भारत को एक सशर्त छूट दी थी जो 26 अप्रैल, 2026 को खत्म हो रही थी। भारत सरकार ने तब से कहा है कि वह इसके असर पर स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत कर रहा है। इससे पहले ईटी ने रिपोर्ट किया था कि नई दिल्ली एक ऐसी व्यवस्था पर भी चर्चा कर रही है जिसके तहत एक स्थानीय ईरानी पोर्ट्स अथॉरिटी चाबहार को मैनेज कर सकती है, जिसमें अमेरिकी प्रतिबंध हटने पर ऑपरेशनल राइट्स भारत को वापस करने के कानूनी प्रोविजन होंगे।

Iran-US Conflict: ‘अगर हमला किया तो कयामत ला देंगे…’ ट्रंप को अराघची की खुली चेतावनी

Silver Price Today: चांदी ₹6000 हुई सस्ती, खरीदारी से पहले जानें 10 प्रमुख शहरों के भाव

Silver Price Today: US-Iran बातचीत के रुकने और तेल की कीमतें बढ़ने से फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं, जिससे चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। ट्रेडर्स US में रोज़गार और महंगाई के आने वाले आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं और साथ ही मिडिल ईस्ट में संभावित सैन्य तनाव पर भी नजर रखे हुए हैं।

फेड अधिकारियों के सख़्त बयानों से US डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि बिना रिटर्न (ब्याज) वाली चांदी की मांग कम हुई है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव शुरुआती कारोबार में 2.53% घटकर यानी 6000 रुपये गिरावट के साथ 2,28,758 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,34,696 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। बुलियस के मुताबिक चांदी की कीमत बढ़कर 2,28,780 रुपये किलो हो गई। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 62.37 रुपये प्रति औंस हो गई।

दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2.37 लाख रुपये प्रति किलो (सभी टैक्स सहित) है।पिछले सप्ताह में चांदी की कीमतों में 10000 रुपये यानी 4 फीसदी की गिरावट आई थी। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी 5000 रुपये लुढ़क कर 2,40,000 रुपये प्रति किलो पर है।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2,40,000-2,45,000 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,40,000
मुंबई₹2,40,000
कोलकाता₹2,40,000
चेन्नई₹2,45,000
लखनऊ₹2,40,000
पटना₹2,40,000
जयपुर₹2,40,000
अहमदाबाद₹2,40,000
पुणे₹2,40,000
बेंगलुरु₹2,40,000
हैदराबाद₹2,40,000
भोपाल₹2,40,000
चंडीगढ़₹2,40,000
नोएडा₹2,40,000
गुरुग्राम₹2,40,000

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Monkey Viral Video: शराब की दुकान में घुसी रांची की बंदरिया, बोतल से गटक गई Vodka! नशा चढ़ा तो बक्से पर ही सो गई, देखने उमड़ी भीड़

Ranchi Monkey Viral Video: झारखंड की राजधानी में स्थित एक शराब की दुकान से अनोखा मामला सामने आया है। रांची में एक शराब की दुकान में उस वक्त अजीबोगरीब नजारा देखने को मिला, जब एक बंदरिया अचानक शॉप के अंदर घुस गई। इसके बाद उसने ऐसा कारनामा किया कि दुकान पर मौजूद लोग भी हैरान रह गए। बंदरिया ने कथित तौर पर शराब की बोतल से शराब पी और फिर दुकान के अंदर ही आराम से सो गई।

घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में दुकान के अंदर एक कथित गर्भवती बंदरिया दिख रही है। उसने कथित तौर पर दुकान के अंदर शराब पी और फिर नशे होने के बाद सो गई। उसका वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

पहले दुकान में घुसी, भगाने पर कर्मचारी को काटा

मामला रांची के ओरमांझी ब्लॉक चौक के पास स्थित शराब की दुकान का बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, बंदरिया शुक्रवार 25 सितंबर को शराब की दुकान में घुस गई थी। उसे बाहर निकालने की कोशिश की गई। लेकिन वह आक्रामक हो गई। उसने कथित तौर पर एक कर्मचारी को काट लिया। इसके बाद लोगों ने उससे दूरी बना ली।

दुकान के अंदर अकेली रह गई बंदरिया कुछ देर तक इधर-उधर घूमती रही। तभी उसकी नजर वहां रखी शराब की बोतल पर पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि उसने बोतल (Vodka का क्वार्टर) से शराब पी। एक वीडियो में दुकान के अंदर सोई बंदरिया और पास में रखी शराब की बोतल दिखाई दे रही है।

शराब पी और फिर दुकान में ही ‘पावर नैप’

शराब पीने के बाद बंदरिया दुकान के अंदर रखे सामान/बक्सों के ऊपर जाकर लेट गई। कुछ ही देर में वह गहरी नींद में नजर आने लगी। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति उसे कैमरे में कैद करता है। लेकिन उसकी आवाज या हलचल से बंदरिया कुछ पल के लिए आंखें खोलती है। फिर दोबारा आंखें बंद कर लेती है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बंदरिया ने करीब एक क्वार्टर Vodka पी थी। हालांकि, शराब की सही मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।

खुद को गर्भवती बता रहे थे लोग

वीडियो में मौजूद व्यक्ति बंदरिया को मादा और गर्भवती बता रहा है। इसी वजह से सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट्स में उसे ‘प्रेग्नेंट मंकी’ कहा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इस गर्भावस्था की कोई स्वतंत्र पशु डॉक्टरों की तरफ से पुष्टि सामने नहीं आई है। घटना के वीडियो में दिख रहा है कि ग्राहक शराब खरीदने के लिए दुकान पर आ रहे हैं। स्टाफ सामान्य रूप से काम कर रहा है। जबकि बंदर पीछे सो रहा है।

देखने के लिए दुकान के बाहर जुट गई भीड़

कुछ ही देर बाद बंदरिया के शराब पीकर दुकान में सो जाने की खबर इलाके में तेजी से फैल गई। इसके बाद लोगों की भीड़ दुकान के बाहर जमा हो गई। कई लोगों ने मोबाइल फोन से इसका वीडियो बनाया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मामले की जानकारी मिलने के बाद एक रेस्क्यू टीम भी मौके पर पहुंची। उन्होंने बंदरिया को सुरक्षित तरीके से दुकान से बाहर निकालने की कोशिश की। कई रिपोर्टों के मुताबिक, उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।

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यूजर्स के मजेदार रिएक्शन

सोशल मीडिया पर इस अजीब घटना को लेकर लोग तरह-तरह के मजेदार कमेंट कर रहे हैं। हालांकि, कुछ यूजर्स ने बंदरिया की हालत और शराब पीने के असर को लेकर चिंता भी जताई है।

वीडियो ने लोगों को इसलिए भी चौंका दिया क्योंकि इसमें एक तरफ शराब की दुकान, दूसरी तरफ बोतल से शराब पीती बंदरिया और उसके बाद दुकान के अंदर ही उसकी लंबी ‘नींद’ का मामला किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लग रहा है। दुकानदारों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से बंदर को फेंकी गई बोतलों से बची हुई शराब चाटते हुए देखा गया था।

Iran-US War Update: ‘ईरान में लोग मर रहे हैं, पैसे के लिए खोलना चाहता है होर्मुज’; ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने किया पलटवार

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (26 सितंबर) को दावा किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना चाहता है, क्योंकि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते उसके पास पैसे नहीं आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने खुद ही अपने लिए मुश्किल खड़ी कर ली है। मीडिया रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना चाहते हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसे नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपना पैसा होर्मुज से मिलता है। इसलिए उन्होंने खुद को ही मात दे दी।”

ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से पूरी दुनिया के लिए परेशानी पैदा हुई। लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अब तक की सबसे बड़ी नाकेबंदी लागू कर दी। उन्होंने इसे ‘स्टील की दीवार’ बताते हुए कहा कि इसके कारण ईरान के पास अब धन का प्रवाह नहीं हो रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सोचा था कि जलडमरूमध्य बंद करने से दुनिया के लिए समस्या खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जवाब में जलडमरूमध्य को ईरान के लिए बंद कर दिया। जबकि अन्य देशों को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

ईरान के शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकराया

ट्रंप की यह टिप्पणी एक दिन बाद आई, जब उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने कतर के मध्यस्थों के जरिए ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव की घोषणा इसी सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान की थी। इसके बाद ईरान ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष का समाधान केवल कूटनीति के जरिए ही संभव है। तेहरान ने यह भी कहा कि वह अभी अपने प्रस्ताव पर अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

क्या था ईरान का प्रस्ताव?

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है, तेहरान तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देगा। साथ ही अगर सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू होता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ट्रंप द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने की बात अभी आधिकारिक तौर पर तेहरान तक नहीं पहुंची है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ।

इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। इसके बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।

जयशंकर ने रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

रूस और ईरान से तेल एवं गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध से संबंधित एक नए कानून पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर रूस और ईरान के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान और रूस के अपने समकक्षों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय मुद्दों और ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की।

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ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी भाग लिया था।

Iran-US Conflict: ट्रंप ने ठुकराया ईरान का 7 दिन का सीजफायर प्लान, चुनाव बाद फिर बमबारी के संकेत

Iran-US Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सात दिन के युद्धविराम (सीजफायर) के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी फिर से शुरू हो जाएगी।

बता दें कि तेहरान कि ओर से अमेरिका को दिए गए इस प्रस्ताव के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने की बात कही गई थी। ईरान चाहता था कि अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा दे, ताकि जहाजों की आवाजाही हो सके। गौरतलब है कि इस नाकाबंदी से ईरान की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप को इस बात पर शक है कि तेहरान उनकी मांगें मानेगा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि तेहरान मध्यावधि चुनावों के बाद एक ऐसी डील करना चाहता है जिससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम खत्म हो जाए।

ईरान ने सात दिन का प्लान पेश किया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पत्रकारों को बताया था कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और सात दिनों के भीतर परमाणु बातचीत फिर से शुरू करने का प्रस्ताव दिया है।

ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटा ले, तेल पर लगी पाबंदियां खत्म कर दे और लेबनान समेत युद्धविराम का पालन करे, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (जो दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा मार्ग है) को फिर से खोल देगा और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत दोबारा शुरू करेगा।

अरागची ने कहा, “ईरान ने रणनीतिक रूप से अहम जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए वॉशिंगटन के सामने सात दिन का एक “ठोस” प्लान पेश किया है। अगर जरूरी शर्तें पूरी हो जाती हैं, तो होर्मुज को फिर से खोला जा सकता है और सात दिनों के भीतर सामान्य समुद्री आवाजाही बहाल की जा सकती है। अब फैसला अमेरिका को करना है।”

ये कदम नए नहीं हैं’

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका से जिन कदमों की मांग की जा रही है, वे नए नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “अमेरिका को जो कदम उठाने चाहिए, वे नए नहीं हैं। ये सभी पहले से ही MOU में शामिल हैं।” उन्होंने जून में ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते (MOU) का जिक्र करते हुए यह बात कही।

ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी से देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) इस विवाद का मुख्य केंद्र बना हुआ है।

हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ट्रंप ने सात दिन के संघर्ष-विराम (ceasefire) के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है और अपने सहयोगियों से कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान पर अमेरिकी बमबारी फिर से शुरू हो जाएगी।

बता दें कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव एक गतिरोध (stalemate) की स्थिति में पहुंच गया है और इसमें किसी समाधान की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

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