ईरान की सड़कों पर बदल गई तस्वीर! महिलाएं खुलेआम निकल रहीं बिना हिजाब, सरकार क्यों है परेशान?

Iran Hijab Controversy: ईरान की सड़कों पर हिजाब एक बार फिर सरकार और आम महिलाओं के बीच नए टकराव का केंद्र बनता जा रहा है। देश के रूढ़िवादी नेता महिलाओं को इस्लामिक ड्रेस कोड के दायरे में वापस लाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग कर रहे हैं लेकिन शासन के लिए यह फैसला आसान नजर नहीं आ रहा है। अधिकारियों को डर है कि जबरन कार्रवाई करने से देश में एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों की नई लहर खड़ी हो सकती है और इसकी भारी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।

सड़कों पर बदला नजारा और व्यवसायों पर सख्त कार्रवाई

सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की राजधानी तेहरान और दूसरे बड़े शहरों की सड़कों पर महिलाएं अब खुलेआम बिना अनिवार्य हिजाब के घूमती नजर आ रही हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने अब तक सीधे महिलाओं से टकराने के बजाय कैफे और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायों को निशाना बनाया है। ड्रेस कोड का पालन कराने में नाकाम रहने के आरोप में कई कैफे और रेस्टोरेंट को सील कर दिया गया है और दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद सार्वजनिक स्थानों पर बिना सिर ढके निकलने वाली महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

रूढ़िवादी नेताओं का बढ़ता दबाव और सरकार की दुविधा

ईरान में दशकों से हिजाब इस्लामिक गणराज्य के सामाजिक नियमों का एक प्रमुख प्रतीक रहा है और कानूनन महिलाओं के लिए सार्वजनिक रूप से अपने बाल ढकना अनिवार्य है। हालांकि अब रूढ़िवादी राजनेता और धर्मगुरु सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि वह ड्रेस कोड के इस खुले उल्लंघन के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करे। उनका तर्क है कि सरकार इस्लामिक मूल्यों के इस तरह क्षरण को चुपचाप नजरअंदाज नहीं कर सकती।

लेकिन तेहरान के लिए बड़े पैमाने पर इस कानून को लागू करना बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती है। ईरानी अधिकारियों को पता है कि हिजाब का मुद्दा सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सरकार विरोधी जनाक्रोश का रूप ले सकता है।

2022 के प्रदर्शन और महसा अमीनी का मामला भी यादों में है

सड़कों पर फिर से गश्ती पुलिस की तैनाती 2022 के उन जख्मों को हरा कर सकती है जब 22 वर्षीय कुर्द-ईरानी महिला महसा अमीनी की हिरासत में मौत हो गई थी। अमीनी को हिजाब नियम का ठीक से पालन न करने के आरोप में मोरल पुलिस ने हिरासत में लिया था। महसा अमीनी की मौत के बाद पूरे ईरान में ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ आंदोलन छिड़ गया था। यह प्रदर्शन दशकों में ईरान के धार्मिक नेतृत्व के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था जहां महिलाओं ने खुलेआम अपने हिजाब जलाए थे। अधिकारियों ने बाद में इन प्रदर्शनों को दबा दिया था लेकिन जनता के भीतर से अभी इसकी यादें मिटी नहीं हैं।

चार साल बाद आज कई महिलाएं फिर उसी राह पर हैं। तेहरान में युवा महिलाएं बिना सिर ढके स्कूटर चलाती, खरीदारी करती और सार्वजनिक समारोहों में शामिल होती देखी जा सकती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब नियमों को पहले जितना सख्त तरीके से लागू नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति ने सरकार को एक अजीब मोड़ पर खड़ा कर दिया है। अधिकारी किसी कैफे को बंद कर सकते हैं या किसी दुकान पर ताला लगा सकते हैं, लेकिन भारी संख्या में महिलाओं का सीधे सामना करना जोखिम भरा है। सोशल मीडिया के दौर में एक छोटी सी घटना भी तुरंत विरोध का प्रतीक बन सकती है।

क्या बल प्रयोग से बदलेगी सोच?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने भी इस बात पर सवाल उठाया है कि क्या लोगों के व्यवहार और मान्यताओं को बल प्रयोग के जरिए बदला जा सकता है। उन्होंने संकेत दिया है कि बढ़ती वैचारिक खाई को पाटने के लिए दबाव बनाना एक स्थायी समाधान नहीं हो सकता। इसके उलट रूढ़िवादी गुट देश के इस्लामिक मूल्यों को बहाल करने के लिए कठोर कदम उठाने की मांग पर अड़े हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि एक तरफ महिलाएं अपने पहनावे की आजादी को लेकर आगे बढ़ रही हैं तो दूसरी तरफ सरकार इस सोच में पड़ी है कि बिना किसी नए संकट को जन्म दिए इस स्थिति पर कैसे नियंत्रण पाया जाए।

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Iran-US War Update: ‘एक बूंद भी तेल नहीं निकलेगा’; होर्मुज में तनाव के बीच ईरान की अमेरिका को सबसे बड़ी धमकी

Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है, जिसका असर सिर्फ दोनों देशों तक सीमित नहीं रह सकता। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उसके खिलाफ कथित ‘आर्थिक युद्ध’ जारी रखा, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) समेत फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात पूरी तरह रोक सकता है। ईरान की इस धमकी ने दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

सवाल यह है कि अगर Hormuz से तेल की आवाजाही वास्तव में रुकती है तो इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया के पेट्रोल, डीजल, LPG और दूसरे ईंधनों की कीमतों पर कितना पड़ेगा?

‘एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा’

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहन रेजाई ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर आर्थिक युद्ध जारी रहता है तो होर्मुज के रास्ते या फारस की खाड़ी के किसी अन्य हिस्से से एक बूंद तेल भी निर्यात नहीं होगा।

रेजाई ने केवल अमेरिका को ही चेतावनी नहीं दी, बल्कि उन देशों को भी निशाने पर लिया जो ईरान के खिलाफ अमेरिकी आर्थिक अभियान में शामिल होते हैं या उसका समर्थन करते हैं। उनके मुताबिक, ईरान ऐसे किसी भी देश की भागीदारी या समर्थन को युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखेगा।

अमेरिका करने जा रहा है बड़ा आर्थिक हमला

ईरान की यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब अमेरिका उसके खिलाफ नए और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी Reuters के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इसमें ईरान और उसके साथ व्यापार करने वाले देशों को निशाना बनाने वाली नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया जा सकता है।

Financial Times में लिखे एक लेख में बेसेंट ने आने वाले कदमों को किसी विरोधी के खिलाफ अब तक की गई सबसे बड़ी वित्तीय कार्रवाई बताया है। अमेरिका ने अभी इन संभावित प्रतिबंधों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। लेकिन संकेत दिया है कि ईरान के साथ आर्थिक और वित्तीय संबंध बनाए रखने वाले देशों पर भी दबाव डाला जा सकता है।

चीन को भी अमेरिका की चेतावनी

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों को लेकर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। Reuters के अनुसार, बेसेंट ने चीन से भी अमेरिका के साथ सहयोग करने का आग्रह किया है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन की ऊर्जा जरूरतों में खाड़ी क्षेत्र की बड़ी भूमिका है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अपने तेल आयात का करीब आधा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से प्राप्त करता है।

चीन ने हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों की नीति पर आपत्ति जताई है। वॉशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि प्रतिबंध और दबाव समस्या के समाधान में मदद नहीं करते और कूटनीति का रास्ता अपनाने की जरूरत है। ईरान के नेताओं ने अमेरिकी दबाव के खिलाफ बयानबाजी तेज कर दी है।

ईरानी सेना यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने अमेरिकी आर्थिक दबाव को लेकर कहा कि यह सैन्य मोर्चे पर अमेरिका की कथित हार की स्वीकारोक्ति है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए युद्ध और प्रतिबंध कोई नई चीज नहीं हैं। ईरान करीब दो दशकों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है।

होर्मुज पर क्यों टिकी है पूरी दुनिया की नजर?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल रूट्स में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाले तेल और गैस के लिए यह प्रमुख समुद्री रास्ता है। इसलिए यहां किसी भी बड़े सैन्य या राजनीतिक संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।

Reuters के मुताबिक, ईरान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आर्थिक दबाव में है। इसके अलावा हालिया हमलों के कारण उसके बुनियादी ढांचे को नुकसान, व्यापार में बाधा, उत्पादन में कमी और पुनर्निर्माण की लागत का दबाव भी बढ़ा है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के पास अब भी पर्याप्त मिसाइल और ड्रोन क्षमता मौजूद है, जिससे वह खाड़ी के पड़ोसी देशों को निशाना बना सकता है। होर्मुज से गुजरने वाले तेल टैंकरों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह संकट?

ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और LPG का आयात करता है। ऐसे में अगर होर्मुज के जरिए तेल की आपूर्ति लंबे समय तक प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

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इसका असर आगे चलकर पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। खासकर LPG के मामले में भारत के लिए आयात और अंतरराष्ट्रीय कीमतें महत्वपूर्ण हैं। यही वजह है कि होर्मुज में बढ़ता तनाव भारत के लिए केवल विदेश नीति या सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि आम आदमी की रसोई और वाहन के खर्च से भी जुड़ा हुआ मामला है।

Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में अशोकधाम मंदिर में भगदड़! 7 लोगों की मौत, बिजली का तार गिरने से एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल

Bihar Temple Stampede: बिहार के लखीसराय में स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर में नाग पंचमी और सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर 17 अगस्त की सुबह बड़ा हादसा हो गया। मंदिर में भारी भीड़ के बीच भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई, जिसमें कम से कम 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। ‘न्यूज 18’ के मुताबिक, इस हादसे में एक दर्जन से ज्यादा श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में सभी महिलाएं होने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के वक्त मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक करने और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, करीब 50 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में मौजूद थे।  बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया। इससे लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

लखीसराय के DM शैलेंद्र कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। सुबह करीब 6.30-6.45 बजे दो ट्रेनें आईं, जिससे भीड़ और बढ़ गई। हमने भीड़ का अंदाजा लगाते हुए इंतजाम किए थे। फिर हमें पता चला कि भीड़ की वजह से एक तरफ की बैरिकेडिंग टूट गई और लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। हमने तुरंत 10-15 लोगों को यहां भेजा।”

7 लोगों की मौत की पुष्टि

मंदिर में हुए हादसे पर SDPO शिवम कुमार ने न्यूज एजेंसी ANI को बताया, “सात लोगों की मौत की खबर है। बताया जा रहा है कि वहां बिजली का एक खंभा गिर गया और लोग बिजली की चपेट में आ गए, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। हम पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही सही वजह बता पाएंगे।” घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है। उनका इलाज जारी है।

बिजली के खंभे की अफवाह से मची भगदड़?

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हादसा अशोक धाम रेलवे स्टेशन से मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर हुआ। बताया जा रहा है कि रात के दौरान इस रास्ते पर एक बिजली का खंभा गिर गया था। सोमवार सुबह भीड़ के बीच अचानक यह अफवाह फैल गई कि गिरे हुए बिजली के खंभे में करंट दौड़ रहा है।

इस खबर से श्रद्धालुओं में घबराहट फैल गई और लोग अचानक इधर-उधर भागने लगे। देखते ही देखते रास्ते पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। भीड़ में कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े और अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और दूसरे श्रद्धालुओं ने भीड़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने और घायलों की मदद करने की कोशिश की।

सभी घायल महिलाएं, कई की हालत गंभीर

हादसे में घायल हुए सभी श्रद्धालुओं के महिला होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को इलाज के लिए लखीसराय सदर अस्पताल ले जाया गया है, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर राहत और चिकित्सा व्यवस्था में जुट गईं।

मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम

हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। स्वास्थ्य विभाग और राहत-बचाव दलों को भी घटनास्थल पर लगाया गया है। अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

सावन की तीसरी सोमवारी पर उमड़ी थी भारी भीड़

सोमवार को सावन की तीसरी सोमवारी और नागपंचमी होने के कारण अशोक धाम मंदिर में सुबह से ही भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए दूर-दूर से लोग आए थे। भारी भीड़ के बीच बिजली के खंभे को लेकर फैली अफवाह ने अचानक लोगों में डर पैदा कर दिया। इस दौरान देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। बिहार प्रशासन की ओर से फिलहाल घटना की डिटेल्स जांच की जा रही है। हादसे के सही कारण और मृतकों एवं घायलों की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है।

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Iran-US War News Update: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान ने एक बड़ा और बेहद चौंकाने वाला ऐलान किया है। ईरान ने अमेरिकी सैनिक को मारने या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपने वाले व्यक्ति को 30 हजार अमेरिकी डॉलर (करीब 25 लाख रुपये) का इनाम देने की घोषणा की है। खास बात यह है कि अगर यह कार्रवाई किसी ईरानी महिला द्वारा की जाती है, तो उसे इनाम की रकम दोगुनी दी जाएगी।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA के मुताबिक, ईरानी सेना के प्रमुख अमीर हातमी ने इस इनाम की घोषणा की है। हातमी ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने इस तरह की कार्रवाई में शामिल होने की इच्छा जताई थी, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिकी सैनिक को पकड़ने या मारने की कार्रवाई कहां और कब की जानी है।

अमेरिकी सैनिक को पकड़ने पर भी मिलेगा इनाम

हातमी ने कहा कि जो भी व्यक्ति किसी आक्रमणकारी अमेरिकी सैन्यकर्मी को मारता है या पकड़कर ईरानी सेना को सौंपता है, उसे 30 हजार डॉलर या 5 अरब तोमान का इनाम दिया जाएगा। ईरान में तोमान एक अनौपचारिक करेंसी है, जिसका इस्तेमाल आम तौर पर रियाल के साथ किया जाता है। ईरानी सेना प्रमुख ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए अलग घोषणा करते हुए कहा कि यदि कोई बहादुर ईरानी महिला ऐसी कार्रवाई करती है, तो उसे दोगुना इनाम दिया जाएगा।

अमेरिका को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी

इनाम की घोषणा के साथ ही हातमी ने अमेरिका को क्षेत्र से अपनी सेना हटाने की मांग भी दोहराई। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेनाओं को अब फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एंट्री करने की अनुमति नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य एवं राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। हालांकि, संघर्ष के दौरान ईरान के भीतर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी सामने नहीं आई है।

ईरान में अमेरिकी जमीनी सैनिकों की तैनाती नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में एक बड़े बचाव अभियान के दौरान करीब 200 अमेरिकी सैन्यकर्मी और 170 से अधिक विमान शामिल हुए थे। इस अभियान का उद्देश्य हादसे का शिकार हुए F-15 के वेपन सिस्टम ऑफिसर को सुरक्षित निकालना था। इसके अलावा ईरान के अंदर अमेरिकी जमीनी सैनिकों की किसी बड़ी तैनाती की जानकारी नहीं है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने के लिए इनाम की घोषणा का ऐलान खास तौर पर तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

कैसे शुरू हुआ अमेरिका-ईरान संघर्ष?

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिकी और इजरायली सेना ने ईरान के खिलाफ हमले किए। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लड़ाई जारी रही। बाद में अप्रैल में संघर्ष विराम हुआ। इसके बाद जून में शांति वार्ता के लिए एक संभावित ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई। लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी और प्रयास विफल हो गया।

इसके बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच छिटपुट सैन्य हमले जारी रहे हैं। खासकर दक्षिणी ईरान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास तनाव देखने को मिला है। हालांकि मध्यस्थों के जरिए दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क जारी रहने की बात कही गई है, लेकिन अब तक कोई बड़ा कूटनीतिक समाधान सामने नहीं आया है।

संघर्ष में 17 अमेरिकी जवानों की मौत

US मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 17 अमेरिकी सैन्यकर्मी मारे जा चुके हैं। इनमें सबसे हालिया मौतों की जानकारी जुलाई में सामने आई थी। बड़ी बात यह है कि इन सभी अमेरिकी सैन्यकर्मियों की मौत ईरान के बाहर हुई। इनमें जॉर्डन और इराक में मारे गए अमेरिकी सैनिक भी शामिल हैं।

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ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों को मारने या पकड़ने पर इनाम की घोषणा ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ-साथ राजनयिक स्तर पर भी गतिरोध बना हुआ है। ऐसे में इस ऐलान से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, ईरान के इस घोषणा पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पलटवार का इंतजार है।

Iran-US War Update: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बड़ी डील, अब पूरी तरह खुलने के लिए अमेरिका की क्या होगी भूमिका?

Iran-US War News Update: ईरान और ओमान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल रूट में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम समझौता किया है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों के लिए निर्धारित एंट्री-एग्जिट रूट तय किए गए हैं। इसे लंबे समय से चले आ रहे समुद्री तनाव और अव्यवस्था के बीच एक बड़ी कूटनीतिक प्रगति के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, अभी इस समझौते पर तकनीकी स्तर की बातचीत जारी है। दोनों देशों की ओर से जॉइंट आधिकारिक बयान आना बाकी है। इसके बावजूद, ईरान और ओमान ने सुरक्षित वाणिज्यिक आवाजाही के लिए अलग-अलग समुद्री कॉरिडोर तैयार करने पर सहमति बना ली है।

क्या है समझौते का पूरा प्लान?

समझौते के मुताबिक, ईरान आने वाले यानी इनबाउंड कमर्शियल जहाजों की निगरानी करेगा। जबकि ओमान बाहर जाने वाले जहाजों यानी आउटबाउंड ट्रैफिक को संभालेगा। इसके लिए अलग-अलग निर्धारित शिपिंग लेन बनाई गई हैं। इनका उद्देश्य जहाजों के बीच टक्कर, सुरक्षा संबंधी घटनाओं और समुद्री तनाव को कम करना है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच स्वतंत्र बातचीत के बाद तैयार हुई है।

इसका मकसद समुद्री ट्रैफिक को व्यवस्थित करना है। लेकिन साथ ही ईरान और ओमान की क्षेत्रीय संप्रभुता से समझौता न करना भी है। फिलहाल दोनों देशों की तकनीकी टीमें ऑपरेशनल प्रोटोकॉल, संचार व्यवस्था और पर्यावरण सुरक्षा से जुड़े नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद संयुक्त औपचारिक घोषणा किए जाने की उम्मीद है।

सिर्फ रास्ते तय होने से नहीं खुलेगा होर्मुज

यह समझौता महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि होर्मुज जलडमरूमध्य तुरंत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल ट्रैफिक के लिए खोल दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण रूप से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का फैसला व्यापक भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

तेहरान की प्रमुख मांगों में अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जैसी कार्रवाइयों का अंत, सैन्य धमकियों को रोकना और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत शामिल है। जब तक इन बाहरी परिस्थितियों पर सहमति नहीं बनती, तब तक नए निर्धारित समुद्री कॉरिडोर कड़ी निगरानी के तहत संचालित किए जाएंगे।

दुनिया के लिए इतना महत्वपूर्ण क्यों है होर्मुज?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत पेट्रोलियम आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से गुजरती है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस भी इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।

यही वजह है कि इस जलडमरूमध्य में तनाव या जहाजों की आवाजाही में किसी भी तरह की बड़ी रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। पिछले महीनों में बढ़े तनाव और समुद्री ट्रैफिक में आई बाधाओं के कारण अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा और जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा (War-Risk Insurance) की लागत भी काफी बढ़ गई।

क्या वैश्विक तेल बाजार को मिलेगी राहत?

ईरान और ओमान के बीच हुआ यह समझौता वैश्विक बाजारों के लिए अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि होर्मुज संकट का कूटनीतिक समाधान संभव है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह संकट का अंत नहीं माना जा सकता। समुद्री मार्ग की पूर्ण और सामान्य आवाजाही इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान, अमेरिका और अन्य संबंधित पक्षों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक मुद्दों पर किस तरह की सहमति बनती है। इसलिए फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उम्मीद जरूर जगी है। लेकिन पूरी तरह सामान्य स्थिति लौटने में अभी कई अड़चनें बाकी हैं।

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Iran-US War Update: ईरान को धमकाते हुए क्यों पीछे हटे ट्रंप? फिलहाल ईरान पर हमला नहीं करेगा अमेरिका, सैन्य कार्रवाई रोकी

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया है। ट्रंप के अनुसार, ईरान और मध्य पूर्व के कुछ अन्य देशों ने संभावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है। इसके बाद उन्होंने वैश्विक हित को ध्यान में रखते हुए सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि वॉशिंगटन ने ईरान पर तय सैन्य हमला इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि तेहरान और मध्य पूर्व के दूसरे देशों ने एक प्रस्तावित समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगा था।

इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत फिर से खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल होगा। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ट्रंप ने लिखा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ ऐसी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, जिसकी ताकत और क्षमता द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नहीं देखी गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि बातचीत में प्रगति होने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने हमले को फिलहाल रद्द करने का निर्णय लिया।

ट्रंप के मुताबिक, ईरान के साथ प्रस्तावित समझौते में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तत्काल, पूरी तरह और बिना किसी बाधा के खोलना तथा ईरानी परमाणु खतरे को समाप्त करना शामिल है। उन्होंने कहा कि यदि जल्द समझौता हो जाता है तो यह पूरी दुनिया और ईरान दोनों के लिए फायदेमंद होगा।

इजरायल ने अमेरिका का किया सपोर्ट

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि इजरायल ने भी वार्ता जारी रहने तक सैन्य कार्रवाई टालने के फैसले में अमेरिका का साथ दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से जल्द से जल्द समझौता पूरा करने की अपील की। उधर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका, इजरायल या क्षेत्र का कोई अन्य देश ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई करता है, तो तेहरान उसका निर्णायक जवाब देगा।

अराघची ने यह बात तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद के साथ अलग-अलग बातचीत के दौरान कही। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी पुष्टि की है कि दोनों पक्षों के बीच जारी वार्ता की ताजा स्थिति पर चर्चा हुई।

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हालांकि, ट्रंप के इन दावों पर ईरान या अन्य संबंधित देशों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए संभावित समझौते और हमले को टालने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि बातचीत जारी रहने के दौरान सैन्य कार्रवाई में देरी करने में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो गया है।

लगातार 10वीं रात अमेरिका ने ईरान पर किया तबाही वाला हमली, इस बीच 17 अमेरिकी सैनिक मारे गए तो ट्रंप ने खाई ये कसम

Iran-US War Update: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा युद्ध अब बेहद खतरनाक और बेकाबू मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिकी सेना ने सोमवार रात लगातार 10वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हवाई हमले किए। दूसरी ओर इस युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। वीकेंड पर अमेरिकी सैनिकों की हुई मौतों और नुकसान से भड़के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ भयंकर बदले की कसम खाई है।

5 घंटे चला ऑपरेशन: US CENTCOM ने इन ठिकानों को बनाया निशाना

अमेरिकी मध्य कमान (U।S। Central Command – CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए इस ताजा कार्रवाई की पुष्टि की है। अमेरिकी सेना के मुताबिक सोमवार रात को ईरान पर किया गया ताजा हमला करीब 5 घंटे तक चला।

अमेरिकी हवाई हमलों ने ईरान के सैन्य कमान केंद्रों, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइटों, समुद्री क्षमताओं और एयर डिफेंस सिस्टम को सीधे तौर पर निशाना बनाया और तबाह कर दिया। वाशिंगटन का कहना है कि इन स्ट्राइक्स का मुख्य मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले करने की ईरान की क्षमता को पूरी तरह से नष्ट और कमजोर करना है।

17 पहुंची मृत अमेरिकी सैनिकों की संख्या, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

हाल ही में वीकेंड के दौरान हुए भीषण हमलों के बाद अमेरिकी सेना के हताहतों की संख्या बढ़ गई है। इस युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है। अमेरिकी सैनिकों के लिए खूनी साबित हुए इस वीकेंड के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान से कड़ा बदला लेने की कसम खाई है। बीते हफ्ते में ट्रंप ने ईरान में हमलों का दायरा बढ़ाने की चेतावनी दी थी। इसमें ईरान के प्रमुख ऊर्जा संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाना शामिल है।

कैसे शुरू हुई यह जंग और दुनिया पर क्या पड़ रहा है असर?

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर एक साथ बड़ा हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलें दागी थीं। युद्ध के दौरान ईरान पर हुए अमेरिकी-इजराइली हमलों और लेबनान में हुए इजराइली हमलों में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। इस युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी अनिश्चितता छा गई है।

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Iran-US War Update: फिर बंद होने के कगार पर होर्मुज! ईरान ने जॉर्डन में की मिसाइलों की बौछार, अमेरिका का चाबहार पोर्ट पर अटैक

Iran-US War Update: ब्रिटिश सेना ने शुक्रवार (17 जुलाई) को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर ओमान के सबसे पास वाले समुद्री रूट्स से गुजर रहे एक टैंकर पर हमला किया गया। ब्रिटेन के यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला शुक्रवार तड़के हुआ, जिसमें एक टैंकर से टकराया। UKMTO  ने बताया कि हमले में टैंकर के बाईं हिस्से को मामूली क्षति पहुंची। उसने कहा, “चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। सभी का पता लगा लिया गया है। पर्यावरण को किसी प्रकार की क्षति की सूचना नहीं है। पोत अपने अगले गंतव्य की ओर बढ़ रहा है।”

ईरान ओमान के निकट इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों पर हमले करता रहा है। हालांकि, इस घटना के संबंध में ईरान की ओर से तत्काल किसी हमले की पुष्टि नहीं की गई। इस बीच जॉर्डन की सेना ने शुक्रवार को कहा कि उसने ईरान की ओर से दागी गई तीन मिसाइलों को बीच रास्ते में ही मार गिराया।

जॉर्डन की सरकारी समाचार एजेंसी पेट्रा के अनुसार, सेना ने यह जानकारी दी। हमले में किसी के हताहत होने की अभी सूचना नहीं है। जॉर्डन में अमेरिकी सैनिक और सैन्य विमान तैनात हैं। अमेरिका द्वारा ईरान पर हवाई हमलों का अभियान तेज किए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई के तहत ईरान कई बार जॉर्डन को निशाना बना चुका है।

होर्मुज में ट्रैफिक कम हुआ

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ी लड़ाई ने होर्मुज से होने वाले ट्रैफिक को काफी हद तक रोक दिया है। होर्मुज तेल और गैस के लिए दुनिया का सबसे अहम शिपिंग रूट है। इसके बंद होने से दुनिया भर में एनर्जी की कीमतें बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के शुक्रवार सुबह 0513 GMT के डेटा के मुताबिक, फ्यूल ऑयल ले जा रहे ‘मीरान’ (एक सैंक्शन वाला प्रोडक्ट टैंकर) और लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस ले जा रहे छोटे जहाज ‘नोरिता’ ने गुरुवार को ईरानी रूट से जलडमरूमध्य (स्ट्रेट) को पार किया।

लेकिन ओमान की खाड़ी में रुक गए। वहां US की नाकेबंदी है। LSEG के डेटा से पता चला कि इराकी फ्यूल ऑयल से लदा बंकरिंग टैंकर ‘एरोलिया’ शुक्रवार को खाड़ी से बाहर निकलने के कुछ ही घंटों बाद वापस खाड़ी की ओर मुड़ गया।

अमेरिका का चाबहार पोर्ट पर अटैक

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को एक टावर की तस्वीर शेयर की, जो ईरान पर लगातार हमलों के बाद गिरता हुआ दिख रहा था। न्यूज  एजेंसी AP के अनुसार, यह तस्वीर चाबहार पोर्ट के टावर की है। हालांकि हेगसेथ ने खुद इस टावर या तस्वीर को किसी खास जगह से नहीं जोड़ा। चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी हवाई हमले बार-बार होते रहे हैं।

ईरान के सरकारी मीडिया ने इस जगह पर हमलों के तीसरे दौर की बात तो मानी। लेकिन तुरंत यह नहीं बताया कि टावर गिर गया है। हालांकि, ईरान ने कहा कि यह टावर पोर्ट पर आने-जाने वाले कमर्शियल ट्रैफिक पर नजर रखने का काम करता था।

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ईरान का पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड भी देश भर के पोर्ट्स पर काम करता है। इस बीच, तेहरान ने शुक्रवार को दावा किया कि उसने खाड़ी इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर नए सिरे से हमले किए हैं। यह जवाबी कार्रवाई तब हुई जब अमेरिकी सेना ने लगातार छठी रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। हमलों के इस नए दौर से तनाव और बढ़ गया है। पिछले महीने हुए सीजफायर के बाद अब दोनों तरफ से रोजाना हमले हो रहे हैं।

US-Iran War News: होर्मुज को लेकर ट्रंप का बड़ा ऐलान! ईरानी जहाजों पर पूरी नाकाबंदी, शुल्क लगाने की धमकी से पीछे हटे

US-Iran War News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर ईरान और खाड़ी क्षेत्र को लेकर कई बड़े ऐलान किए हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सेना की वजह से वैश्विक तेल आपूर्ति रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान को छोड़कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी देशों के लिए खुला रहेगा। जबकि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों पर पूरी नाकाबंदी लागू की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

इन हमलों में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। जबकि 10 अन्य घायल हो गए। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार सुबह ईरान दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी को तलब किया और इन हमलों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया। भारत ने कहा कि वह होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के दौरान ‘ए अल बहियाह’ और ‘एमटी मोम्बासा’ नाम के दो पोत पर हुए हमलों को लेकर बेहद चिंतित है।

टैरिफ वाले बयान से पीछे हटे

डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले माल पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की अपनी योजना से एक दिन बाद ही पीछे हटते हुए कहा कि इसके बजाय पश्चिम एशियाई देश अमेरिका के साथ निवेश और व्यापार समझौते करेंगे।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा. “पश्चिम एशिया के नेताओं के साथ अत्यंत सकारात्मक बातचीत के आधार पर मैंने 20 प्रतिशत अमेरिकी प्रतिपूर्ति शुल्क को उन व्यापार और निवेश समझौतों से बदलने का फैसला किया है। उन्हें विभिन्न खाड़ी देश अमेरिका में करेंगे।”

राष्ट्रपति ने कहा कि ये निवेश बहुत बड़े पैमाने पर होंगे। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि ये उन नई प्रतिबद्धताओं से अलग होंगे या नहीं, जिनकी घोषणा ट्रंप ने पिछले साल पश्चिम एशिया यात्रा के बाद की थी।

ईरान का हिंसक दौर अब खत्म होगा?

ट्रंप ने दुनिया को भरोसा दिलाते हुए संकल्प लिया है कि अमेरिका, ईरान को कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने दावा किया है कि इन कड़े कदमों के बाद अब क्षेत्र में ईरान का हिंसक और आक्रामक दौर हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।

होर्मुज में हमले में एक भारतीय की मौत

भारत ने कमर्शियल पोत ‘एमटी अल बहिया’ और ‘एमटी मोम्बासा’ पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की है। उन पर कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। भारत ने पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता लाने के लिए हिंसा को तुरंत रोकने और बातचीत व कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपनी अपील दोहराई।

संयुक्त अरब अमीरात के दो तेल टैंकरों पर हमले अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुए। ईरान पर 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद शुरू हुए संघर्ष में पश्चिम एशिया में 14 भारतीयों की मौत हो चुकी है।

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विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीय नागरिक के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की। मंत्रालय ने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में भारतीय मिशन हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। साथ ही प्रभावित भारतीय नाविकों को हर संभव मदद दिलाने के लिए खाड़ी देश के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।

Nitin Gadkari VIDEO: ‘अब हवा में उड़ने वाली बस लाऊंगा…’; केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा ऐलान, जानें- किन शहरों में होगी शुरुआत

Nitin Gadkari VIDEO: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह भविष्य में ऐसी बस लाने जा रहे हैं, जो हवा में उड़ेगी। जी हां, उन्होंने कहा कि देश में बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक परिवहन तकनीकों को अपनाना जरूरी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के लोकार्पण कार्यक्रम में गडकरी ने कहा कि वह जल्द ही हवा में उड़ने वाली बस लेकर आएंगे।

उन्होंने कहा कि जैसे वह पानी में उतरने वाला हवाई जहाज लेकर आए थे, वैसे ही जो भी वादा करेंगे, उसे पूरा करके दिखाएंगे। नितिन गडकरी ने कहा, “अब मैं ऐसी बस लाने जा रहा हूं जो हवा में उड़ती हुई चलेगी।” उनका यह बयान भविष्य की एरियल पब्लिक ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी की ओर इशारा माना जा रहा है। उनका इशारा रोपवे आधारित सार्वजनिक परिवहन, स्काई बस, पॉड टैक्सी और अन्य एरियल मोबिलिटी सिस्टम जैसी परियोजनाओं की ओर माना जा रहा है, जिन पर केंद्र सरकार लंबे समय से काम कर रही है।

ट्रांजिट सिस्टम को बढ़ावा देने की वकालत

केंद्रीय मंत्री लंबे समय से देश में रोपवे, स्काई बस, पॉड टैक्सी और अन्य एरियल ट्रांजिट सिस्टम को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। उनका मानना है कि जमीन के ऊपर चलने वाली सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था से बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम कम होगा। साथ ही यात्रा का समय घटेगा और प्रदूषण पर भी कंट्रोल पाया जा सकेगा।

गडकरी ने कहा कि सरकार का लक्ष्य लोगों को सस्ता, सुरक्षित, तेज और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराना है। इसके लिए नई तकनीकों पर लगातार काम किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने जिस ‘हवा में उड़ने वाली बस’ का जिक्र किया, उसके बारे में अभी कोई डिटेल्स प्लान, प्रोजेक्ट या लॉन्च की तारीख घोषित नहीं की गई है। फिलहाल इसे भविष्य की आधुनिक परिवहन सिस्टम के रूप में देखा जा रहा है।

क्या है उड़ने वाली बस का मतलब?

गडकरी ने पहले भी कई बार कहा है कि भारत के शहरों में बढ़ते ट्रैफिक को कम करने के लिए जमीन के ऊपर चलने वाली आधुनिक परिवहन सिस्टम विकसित की जाएंगी। इनमें शामिल हैं:-

रोपवे आधारित बस सिस्टम

स्काई बस

पॉड टैक्सी

एरियल इलेक्ट्रिक ट्रांजिट

केबल-कार आधारित शहरी परिवहन

इन सिस्टम में वाहन सड़क पर नहीं बल्कि ऊंचे ट्रैक, केबल या सस्पेंडेड सिस्टम पर चलते हैं। इससे ऐसा लगता है मानो बस हवा में उड़ रही हो।

किन शहरों में हो सकता है प्रयोग?

परिवहन मंत्रालय पहले से कई शहरों में वैकल्पिक एरियल ट्रांजिट सिस्टम की संभावनाएं तलाश रहा है। इनमें शामिल हो सकते हैं: नागपुर, वाराणसी, मुंबई, दिल्ली और देहरादून।

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पहले भी दे चुके हैं ऐसे बयान

नितिन गडकरी अक्सर नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए चर्चित बयान देते रहे हैं। वे इलेक्ट्रिक वाहन, हाइड्रोजन ईंधन, फ्लेक्स-फ्यूल, रोपवे और जल परिवहन जैसी परियोजनाओं के बड़े समर्थक माने जाते हैं। हालांकि, उन्होंने जिस ‘हवा में उड़ने वाली बस’ की बात कही, उसके लिए अभी कोई विस्तृत सरकारी परियोजना या लॉन्चिंग डेट घोषित नहीं की गई है।