लखनऊ कैफे ऑनर मर्डर केस : पुलिस महकमे में भूचाल! DCP, ACP और SO पर गिरी गाज, फरार मॉडल श्रद्धा पर 25 हजार का इनाम

लखनऊ कैफे ऑनर मर्डर केस : पुलिस महकमे में भूचाल! DCP, ACP और SO पर गिरी गाज, फरार मॉडल श्रद्धा पर 25 हजार का इनाम

Lucknow Cafe Owner Shiva Sharma Case

Lucknow Cafe Owner Shiva Sharma Case: नवाबों के शहर लखनऊ में 28 वर्षीय कैफे मालिक शिवा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं, बल्कि खाकी के लिए साख का सवाल बन चुका है। घटना के 10वें दिन भी आरोपी फैशन मॉडल श्रद्धा दुबे पुलिस की पकड़ से बाहर है, वहीं दूसरी तरफ इस हाई-प्रोफाइल केस में लापरवाही और गाज गिरने का बड़ा दौर शुरू हो गया है। सोमवार को प्रशासनिक फेरबदल करते हुए लखनऊ के डीसीपी, एसीपी और हजरतगंज थाना प्रभारी को उनके पदों से हटा दिया गया है। 25 हजार की इनामी मॉडल का एक सनसनीखेज इंटरव्यू वीडियो भी सामने आया है, जिसने पूरी जांच की दिशा ही मोड़ दी है।

क्या है पूरा मामला?

5वीं मंजिल से रहस्यमयी मौत या हत्या? : बीती 9 अक्टूबर को हजरतगंज के बालू अड्डा इलाके के ‘अवध ग्रीन अपार्टमेंट’ से गिरकर कैफे मालिक शिवा शर्मा की मौत हो गई थी। शुरुआती तौर पर इसे हादसा या खुदकुशी माना जा रहा था, लेकिन मृतक की मां रंजना शर्मा के बयानों और साक्ष्यों ने पुलिस की थ्योरी बदल दी। मां का आरोप है कि शिवा की लिव-इन पार्टनर व फैशन मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन रश्मि और साथियों ने शिवा को बेरहमी से पीटा, प्रताड़ित किया और बालकनी से नीचे फेंक दिया।

पुलिस अफसरों का तबादला

मामले में लापरवाही और जांच में देरी की सुगबुगाहट के बीच शासन ने सख्त कदम उठाया है। डीसीपी (मध्य) विक्रांत वीर को यूपी पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। एसीपी रजनीश वर्मा को क्राइम ब्रांच में भेज दिया गया। हजरतगंज थाना प्रभारी (SO) विक्रम सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

फरार मॉडल का ‘इंटरव्यू बम’ और आत्महत्या का दावा

जब पुलिस मॉडल श्रद्धा दुबे, उसकी बहन और सहयोगी दानिश की तलाश में नेपाल बॉर्डर तक खाक छान रही है, तभी श्रद्धा का एक रिकॉर्डेड इंटरव्यू सामने आया। वीडियो में उसने खुद को बेकसूर बताते हुए दावा किया कि शिवा पर 15-20 लाख रुपए का कर्ज था और उसने आर्थिक तंगी में आत्महत्या की है।

 

उसने कहा- घटना वाले दिन शिवा ने खुद को बाथरूम में बंद किया और अचानक बालकनी से छलांग लगा दी। श्रद्धा ने कहा कि मैं भगोड़ी नहीं हूं, पुलिस के सामने सच रखूंगी। साथ ही सोशल मीडिया पर एक ऑडियो भी वायरल हुआ, जिसमें शिवा कथित तौर पर श्रद्धा के 6 लाख के गहने बेच देने की बात मान रहा है।

नेपाल भागने की आशंका और पुलिस का शिकंजा

श्रद्धा का महिंद्रा स्कॉर्पियो-एन वाहन बहराइच के रूपईडीहा में लावारिस हालत में मिला है, जो नेपाल सीमा से महज 1 किलोमीटर दूर है। पुलिस को अंदेशा है कि आरोपी नेपाल सीमा पार कर चुके हैं। तीनों मुख्य आरोपियों पर 25-25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर दिया गया है। फिलहाल, शिवा के परिजनों की मांग है कि जब आरोपी बेकसूर है, तो वह पुलिस के सामने आने के बजाय क्यों भाग रही है?

सिर्फ ₹5 की कॉफी ने खड़ा किया ₹180 करोड़ का बिजनेस! जानिए कैसे ‘हट्टी कापी’ बनी देश का मशहूर ब्रैंड?

नई दिल्ली। बेंगलुरु में 5 रुपये प्रति कप कॉफी बेचने से शुरू हुआ एक छोटा सा कारोबार आज करीब 180 करोड़ रुपये की कंपनी बन चुका है। इस कंपनी का नाम है हट्टी कापी (Hatti Kaapi)। यूएस महेंद्र (U.S. Mahendra) ने साल 2009 में एक इमारत की सीढ़ियों के नीचे छोटी सी जगह से इसकी शुरुआत की थी। आज कंपनी के आउटलेट ऑफिस, एयरपोर्ट और होटलों तक पहुंच चुके हैं।

महेंद्र कर्नाटक के हासन जिले में पले-बढ़े थे और उन्हें कॉफी के बिजनेस की अच्छी समझ थी। वह कैफे कॉफी डे के फाउंडर वीजी सिद्धार्थ से भी इंस्पायर्ड थे। उन्होंने कॉफी के अच्छे टेस्ट और सर्विस पर ध्यान दिया। बाद में उन्होंने जंबराडी गांव के 15 से 20 किसानों से कॉफी खरीदनी शुरू की।

देश-विदेश तक ऐसे पहुंचा हट्टी कापी का बिजनेस

हट्टी कापी की पॉपुलैरिटी बढ़ने के बाद कंपनी ने अपने आउटलेट को बढ़ा दिया है। साल 2014 में इंफोसिस ने अपने कैंपस में इसे जगह दी। इसके बाद डेलॉइट और SAP जैसी कंपनियों के ऑफिस और एयरपोर्ट पर भी इसके काउंटर खुल गए। कंपनी मैरियट इंटरनेशनल से जुड़े होटलों को भी सर्विस दे रही है और पैक की हुई कॉफी ऑनलाइन बेचती है।

अब हट्टी कापी का कारोबार भारत से बाहर भी पहुंच गया है। कंपनी लंदन में मौजूद है और एम्स्टर्डम, अमेरिका, दुबई के साथ यूरोप के दूसरे शहरों में भी बिजनेस बढ़ाने की प्लानिंग बना रही है।

बिजनेस बढ़ाने के लिए कंपनी ने अलग-अलग इंवेस्टर्स से पैसा जुटाया। Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक:

• मई 2024 में कंपनी को करीब 21.9 लाख डॉलर का इन्वेस्टमेंट मिला।

• अप्रैल 2025 में करीब 10.2 लाख डॉलर की फंडिंग मिली।

• कंपनी ने कुल 13 चरणों में करीब 66.83 करोड़ रुपये जुटाए।

• 19 अगस्त 2025 तक कंपनी की कीमत करीब 180 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

हट्टी कापी की कमाई साल 2025 में करीब 44.11 करोड़ रुपये रही। इसके बावजूद कंपनी को 18.59 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। साल 2024 में यह घाटा 3.86 करोड़ रुपये था। हट्टी कापी ने कॉफी से शुरुआत करके देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। उनकी कंपनी की कमाई के साथ घाटा भी हुआ है। अब कंपनी के इस बिजनेस को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

‘मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 4.7 करोड़ चुराए हैं’, टेक कर्मचारी ने 2 साल तक कुछ काम न करने पर कही बड़ी बात

एक टेक कर्मचारी ने यह दावा करके इंटरनेट यूजर्स को हैरान कर दिया है कि उसने लगभग दो साल तक काम पर लगभग कुछ भी न करते हुए 275,000 डॉलर (करीब 2.6 करोड़ रुपये) की सालाना सैलरी कमाई। कर्मचारी का अनुमान है कि इस दौरान उसे 500,000 डॉलर (लगभग 4.7 करोड़ रुपये) से ज्यादा का भुगतान किया गया, जबकि उसके पास लगभग कोई जिम्मेदारी नहीं थी।

रेडिट पोस्ट वायरल

रेडिट (Reddit) पर एक पोस्ट में उसने बताया कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में से एक में एक बड़ा प्रमोशन कैसे एक अप्रत्याशित मोड़ पर आ गया। कंपनी में अचानक हुए पुनर्गठन (restructuring) के कारण उसके पास न तो कोई सार्थक काम बचा और न ही उसे मैनेजमेंट से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश मिले।

रेडिट के ‘r/corporate’ सबरेडिट पर अपना अनुभव साझा करते हुए कर्मचारी ने कहा- “मुझे ऐसा लगता है जैसे मैंने अपनी कंपनी से 500,000 डॉलर से ज्यादा चुरा लिए हैं।” उसने बताया कि उसने कंपनी में लगभग एक दशक बिताया और इस दौरान पांच अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। हालांकि 2025 की शुरुआत में जो उसके करियर का एक अहम पड़ाव होना चाहिए था, वह अनिश्चितता के एक लंबे दौर में बदल गया।

रेडिट यूजर के अनुसार- उसे एक नई टीम में शामिल होने का ऑफर मिला, जो उसके करियर में एक बड़ा कदम था। लेकिन जिस दिन उसने नई टीम जॉइन की उसी दिन कंपनी में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन हुआ, जिसके चलते वे मैनेजर और डायरेक्टर दोनों ही कंपनी छोड़कर चले गए, जिन्होंने उसे काम पर रखा था।

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इस मौके के लिए अपने परिवार को वेस्ट कोस्ट से न्यूयॉर्क शहर ले जाने के बाद उन्होंने एक-दो सप्ताह इंतजार करने का फैसला किया कि नई लीडरशिप के तहत टीम कैसे काम करेगी। हालांकि हालात वैसे नहीं सुधरे जैसी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने लिखा- “तो वहां मैं था। साल के लगभग 275,000 डॉलर कमा रहा था एक ऐसी टीम में जहां कोई जिम्मेदारी या मैनेजमेंट का कोई दिशा-निर्देश नहीं था। बस कुछ नहीं कर रहा था।”

ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे

कर्मचारी ने बताया कि उनका अनुभव सिर्फ कम काम या कभी-कभार होने वाली मीटिंग्स से कहीं बढ़कर था। उन्होंने बताया कि वे अपने काम के घंटों में ऑफिस के कैफे में बैठकर यूट्यूब और नेटफ्लिक्स देखते थे। न्यूयॉर्क शहर के मशहूर रेस्तरां ढूंढ़ते थे और मैनहट्टन में घूमते-फिरते थे। भले ही यह सुनने में एक बहुत ही शानदार स्थिति लगे, लेकिन उन्होंने कहा कि किसी उद्देश्य का न होना धीरे-धीरे उनके लिए निराशा का कारण बन गया।

रेडिट यूजर ने यह भी बताया कि शुरुआत में उन्होंने सार्थक काम पाने और बिजनेस को बेहतर ढंग से समझने के लिए कई कोशिशें कीं। हालांकि उनका कहना है कि नए मैनेजर की तरफ से कोई खास दिशा-निर्देश नहीं मिले, जिसकी वजह से वे अपने काम से पूरी तरह अलग-थलग महसूस करने लगे।

आखिरकार उसने काम खोजने की नियमित कोशिशें बंद कर दीं और ज्यादातर दिन घर पर ही रहने लगा। उसने बताया कि वह अपने अपार्टमेंट के जिम में समय बिताता था, तरह-तरह के नाश्ते तैयार करता था, बालकनी में बैठकर शहर के नजारे देखते हुए कॉफी पीता था और कॉर्पोरेट जीवन की बेतुकी बातों के बारे में सोचता रहता था।

इस अनुभव ने टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के प्रति उसके नजरिए को भी बदल दिया। उसने कहा कि उसे इस बात से काफी हैरानी हुई कि कोई कर्मचारी इतने लंबे समय तक बिना किसी काम (बिना किसी असाइनमेंट) के रह सकता है और फिर भी उसे अच्छी-खासी सैलरी मिलती रहती है।

टेक कर्मचारी का कहना है कि आखिरकार उसे एक बेहतर रोल मिल गया

इन अजीब हालात के बावजूद कर्मचारी ने तय किया कि वह इस अनचाहे ब्रेक का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करेगा। कई महीनों तक इंटरव्यू देने के बाद उसे हाल ही में उसी कंपनी में एक और पद मिल गया, जिसे उसने अपने करियर में एक बड़ी तरक्की बताया। हालांकि वह इस नए मौके को लेकर उत्साहित था, लेकिन लगभग दो साल तक बिना किसी काम के रहने के बाद फिर से एक चुनौतीपूर्ण रोल में लौटना काफी मुश्किल साबित हुआ।

उन्होंने लिखा, “मुझे यहां आए अभी सिर्फ डेढ़ हफ्ता ही हुआ है और मुझे लगभग 2 साल तक कोई काम न करने का असर अभी से महसूस होने लगा है। मुझे लग रहा है कि मैं काफी पीछे छूट गया हूं और मेरी कार्यक्षमता भी काफी कम हो गई है।” फिर भी उन्होंने कहा कि वे खुश हैं कि उन्हें एक ऐसी भूमिका मिल गई है, जहां वे सार्थक योगदान दे सकते हैं और फिर से कुछ नया सीख सकते हैं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें बिना ज्यादा काम किए सैलरी लेने पर कोई गिल्ट महसूस हुआ तो उन्होंने माना कि शुरुआत में उन्हें लगा जैसे वे कंपनी पर एक ‘बेवजह का खर्च’ बन गए हैं। ऐसा इसलिए था क्योंकि इससे पहले एक सेल्सपर्सन के तौर पर वे कंपनी के लिए काफी रेवेन्यू (कमाई) लाते थे।

हालांकि समय के साथ उनका यह अपराधबोध गुस्से में बदल गया और फिर उन्होंने स्थिति को स्वीकार कर लिया। आखिरकार उन्होंने इस समय का भरपूर फायदा उठाने का फैसला किया—अपनी पत्नी के साथ अच्छा समय बिताया, न्यूयॉर्क के अलग-अलग रेस्तरां में खाना चखा और खुद को एक बहुत जरूरी मानसिक ब्रेक दिया।

उन्होंने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी नौकरियों के बारे में एक अलग नजरिया दिया है। यहां कर्मचारी कभी-कभी कंपनी की व्यवस्था की कमियों के बीच ऐसे छिप सकते हैं कि किसी को पता ही नहीं चलता कि उनकी जिम्मेदारियां क्या हैं।

पोस्ट के अंत में उन्होंने पाठकों को अपने सवाल पूछने के लिए इनवाइट किया। बाद में एक एडिट में उन्होंने अपने जैसे अनुभव साझा करने वाले लोगों को धन्यवाद दिया और कहा कि उनकी कहानियां सुनकर उन्हें अपनी स्थिति के बारे में बेहतर महसूस हुआ।

रेडिट यूजर्स ने अपने मिलते-जुलते अनुभव साझा किए

इस कर्मचारी की कहानी पढ़ने के बाद कई रेडिट यूजर्स ने अपने विचार साझा किए। कुछ लोगों को इस स्थिति से जलन हुई तो कुछ ने इस बात पर चिंता जताई कि कोई सार्थक काम न होने से मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। एक यूजर ने कहा, “न्यूयॉर्क में इधर-उधर घूमना किसी सपने जैसा लगता है, लेकिन अगर मेरे हफ्ते में 2 दिन से ज्यादा समय खाली निकल जाए तो मैं पागल होने लगता हूं।”

एक दूसरे यूजर ने कहा, “मैं खुद टेक इंडस्ट्री में काम करता हूं और पूरे दिन व्यस्त रहता हूं, इसलिए आप मेरी ‘ड्रीम जॉब’ जी रहे हैं! बस फर्क इतना है कि अगर मैं आपकी जगह होता तो उस खाली समय का इस्तेमाल अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने और नए सर्टिफिकेशन लेने में करता।”

एक तीसरे यूजर ने कहा, “मैं यहां कुछ पूछने नहीं आया हूं, बस इतना कहना चाहता हूं कि ‘मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ है!’ कुछ समय तक तो मजा आता है, लेकिन फिर यह निराशाजनक लगने लगता है। मुझे अभी एक प्रमोशन मिला है और मैं थोड़ा घबराया हुआ हूं क्योंकि अब मुझे सच में काम करना पड़ेगा, लेकिन साथ ही मुझे कुछ नया सीखने और असली काम करने का मौका भी मिलेगा! और हां, अब यह पूरी तरह से रिमोट (घर से काम) नहीं है, बल्कि हाइब्रिड है, जिसे लेकर मैं काफी उत्साहित हूं! और सबसे अच्छी बात यह है कि मैं यूरोप जा रहा हूं।”

Dussehra Long Weekend 2026: दशहरे पर मिलेगा 4 दिन का लॉन्ग वीकेंड, घूमने के लिए ये 6 जगहें रहेंगी बेस्ट; अभी बना लें प्लान

अगर आप कहीं पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो दशहरे के आसपास कहीं घूमने का प्लान बना सकते हैं। अक्टूबर में दशहरे पर आपको चार दिन का लॉन्ग वीकेंड मिल सकती है। इन चार दिन की छुट्टी में ऐसी जगह जाना बेहतर रहेगा, जहां कम समय में ज्यादा घूम सकें। इन चार दिनों की छुट्टियों में आप राजस्थान के ऐतिहासिक शहर, हम्पी के पुराने मंदिर और खंडहर या गोवा के खूबसूरत समुद्र तटों पर जा सकते हैं। ये सभी जगहें छोटी छुट्टी के दौरान घूमने के लिए अच्छे विकल्प हो सकती हैं। आइए जानते हैं दशहरे के लॉन्ग वीकेंड में आप कहां-कहां पर घूम सकते हैं।

कब से कब तक होगी छुट्टी

2026 में दशहरा यानी विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। इससे पहले 17 अक्टूबर को शनिवार और 18 अक्टूबर को रविवार है। ऐसे में अगर आप 19 अक्टूबर, सोमवार की छुट्टी ले लेते हैं तो 17 से 20 अक्टूबर तक लगातार चार दिन का ब्रेक मिल जाएगा। इस दौरान आप परिवार या दोस्तों के साथ छोटी ट्रिप प्लान कर सकते हैं।

राजस्थान

अक्टूबर में राजस्थान घूमने के लिए मौसम काफी अच्छा रहता है। इस दौरान गर्मी कम होने लगती है और सर्दियों की शुरुआत के साथ यात्रा करना आरामदायक हो जाता है। चार दिन की छुट्टी में जयपुर और उदयपुर को ट्रिप में शामिल किया जा सकता है। जयपुर में अंबर फोर्ट, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर देख सकते हैं, जबकि उदयपुर अपनी खूबसूरत झीलों, महलों और पुराने शहर की गलियों के लिए जाना जाता है। कम समय में आराम से घूमने के लिए बेहतर होगा कि दोनों शहरों में करीब दो-दो दिन बिताएं और ज्यादा जगहों को एक साथ कवर करने की कोशिश न करें।

दार्जिलिंग

अक्टूबर की छुट्टी में अगर आप ठंडे मौसम और पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं तो दार्जिलिंग अच्छा ऑप्शन हो सकता है। मॉनसून के बाद यहां मौसम साफ रहने की वजह से हिमालय के शानदार नजारे देखने को मिलते हैं। इस दौरान दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे में सफर करने, चाय के बागानों की सैर करने और खूबसूरत व्यू पॉइंट्स देखने का मौका मिल सकता है। चार दिन की छोटी ट्रिप के लिए भी दार्जिलिंग एक बेहतर डेस्टिनेशन है। लेकिन, पहाड़ी सफर पर निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर ले लें।

ऋषिकेश

अगर आप चार दिन की छुट्टी में प्रकृति के साथ एडवेंचर और सुकून का मजा लेना चाहते हैं तो ऋषिकेश एक अच्छा विकल्प हो सकता है। अक्टूबर में मॉनसून के बाद यहां मौसम सुहावना हो जाता है और घूमने के साथ योग व आउटडोर एक्टिविटीज का आनंद लिया जा सकता है। इस दौरान तापमान आमतौर पर 15 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। चार दिन की यात्रा में गंगा घाट, राम झूला, बीटल्स आश्रम, स्थानीय कैफे और आसपास के झरने व नेचर ट्रेल्स देखे जा सकते हैं।

हम्पी

अगर आप इतिहास और पुरानी विरासत को करीब से देखना चाहते हैं तो दशहरे की छुट्टी में हम्पी घूमने का प्लान बना सकते हैं। अक्टूबर से फरवरी तक यहां मौसम घूमने के लिए काफी आरामदायक रहता है। हम्पी अपने प्राचीन मंदिरों, विजयनगर साम्राज्य के खंडहरों, पत्थरों से बनी ऐतिहासिक इमारतों और अनोखे प्राकृतिक नजारों के लिए मशहूर है। यहां विरुपाक्ष मंदिर, विजया विट्ठल मंदिर, स्टोन रथ, लोटस महल और मतंगा हिल जैसी जगहें देखी जा सकती हैं। हम्पी की प्रमुख जगहों को घूमने के लिए आमतौर पर दो से तीन दिन काफी होते हैं, इसलिए चार दिन की छुट्टी में यह एक अच्छा ट्रैवल ऑप्शन हो सकता है।

गोवा

चार दिन की छुट्टी में अगर आप समुद्र, अच्छा खाना और आराम का मजा लेना चाहते हैं तो गोवा एक बढ़िया विकल्प हो सकता है। अक्टूबर से यहां मौसम धीरे-धीरे बेहतर होने लगता है और मॉनसून के मुकाबले आसमान साफ रहने की संभावना ज्यादा रहती है। इस दौरान दिसंबर और नए साल के पीक सीजन जैसी ज्यादा भीड़ भी नहीं होती। चार दिन की यात्रा में नॉर्थ गोवा के बीच और नाइटलाइफ का आनंद लेने के साथ साउथ गोवा की शांत जगहों पर भी समय बिताया जा सकता है।

केरल

अगर आप छुट्टी में प्रकृति और शांति का मजा लेना चाहते हैं तो केरल अच्छा विकल्प है। अक्टूबर के बाद यहां मौसम घूमने के लिए बेहतर हो जाता है। केरल में पहाड़, बैकवाटर्स, समुद्र तट और ऐतिहासिक जगहें देखने को मिलती हैं। चार दिन की छुट्टी में पूरे केरल को घूमना मुश्किल है, इसलिए कोच्चि और अलाप्पुझा जैसी एक-दो जगहों को ही ट्रिप में शामिल करना बेहतर रहेगा। इससे कम समय में आराम से घूम सकेंगे।

दिल्ली-NCR से जयपुर या ऋषिकेश की रोड ट्रिप की जा सकती है। वहीं, बेंगलुरु से हम्पी और मुंबई से गोवा या राजस्थान जाना भी अच्छा विकल्प रहेगा। दशहरे के समय ट्रैवल सीजन रहता है, इसलिए ट्रेन, फ्लाइट और होटल की बुकिंग पहले ही कर लेना बेहतर होगा।

नाजियों की जीत का कारण हिंसा, हिटलर का करिश्मा नहीं:जर्मनी के दो प्रांत्रों में नाजी समर्थक पार्टी की जीत से छिड़ी नई बहस

जर्मनी के दो प्रांतों में धुर-दक्षिणपंथी पार्टी के सत्ता में आने के बाद यूरोप में जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर (1933-1945 तक सत्ता में था) पर नई बहस छिड़ गई है। आम धारणा है कि हिटलर गजब का करिश्माई नेता था। उसका प्रचार मंत्री जोसेफ गोएबल्स का प्रोपेगैंडा बेजोड़ था और जर्मनी की आर्थिक मंदी ने नाजियों की राह आसान की। अब इन बातों को जर्मनी के लेखक और इतिहासकार फिलिप रुख ने सिरे से खारिज किया है। अपनी नई शोधपरक किताब ‘डेर रुकफॉल’ में रुख बताते हैं कि हिटलर कोई कुशल नेता नहीं था। वह एक आलसी अपराधी था, जो दोपहर तक सोता था। उसकी नाजी पार्टी की जीत को समझने के लिए 14 सितंबर 1930 के चुनावों को देखना होगा। 1928 में नाजी पार्टी को महज 8 लाख वोट और 12 सीटें मिली थीं। रुख बताते हैं कि 1930 में नाजियों को 64 लाख वोट और 107 सीटें मिलीं, जिससे यह सनकी गुट दूसरी राजनीतिक ताकत बना। हिंसा के खौफ से लोग नाजियों के साथ हुए और 1933 में सत्ता में आया। हिटलर से जुड़े 3 बड़े भ्रम ‘सेंटर फॉर पॉलिटिकल ब्यूटी’ के संस्थापक रुख कहते हैं- 1. हिटलर का करिश्मा छलावा था 1930 के चुनाव में हिटलर उम्मीदवार भी नहीं था, क्योंकि उसके पास जर्मन नागरिकता नहीं थी। तख्तापलट की साजिश में उस पर देश से निकाले जाने का खतरा था। 1929 में हिटलर ने पूरे साल में केवल 29 भाषण दिए थे। पार्टी दफ्तर जाने के बजाय कैफे और सिनेमाघरों में वक्त बिताता था। 2. कमजोर प्रोपेगैंडा नाजी अखबार जैसे- ‘इलुस्ट्रिएटर बीओबैक्टर’ बेहद स्तरहीन था। उसे बहुत कम लोग पढ़ते थे। अन्य पार्टियों के पास प्रचार के लिए नियॉन साइन जैसे बेहतर साधन थे, जबकि नाजियों की प्रचार सामग्री पेशेवर नहीं थी। 3. महामंदी मुख्य वजह नहीं जिन इलाकों में बेरोजगारी ज्यादा थी, वहां नाज़ियों को सबसे कम वोट मिले। महामंदी का असर जर्मनी में जुलाई 1931 में दिखा। रुख लिखते हैं कि नाजियों की सबसे बड़ी ताकत उनकी ‘राजनीतिक हिंसा और विरोधियों के सफाए की खुली सनक’ थी। दावा- दक्षिणपंथी पार्टियां समाज में नफरत का फायदा उठाती हैं फिलिप रुख के अनुसार, नाजी पार्टी किसी आर्थिक या सामाजिक नीति पर बात नहीं कर रही थी, बल्कि विरोधियों की हत्याओं के षड्यंत्र रच रही थी। दुर्भाग्य से यही हिंसक सनक उस समय के जर्मन मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को आकर्षित कर गई। रुख चेताते हैं कि आज के दौर में भी दक्षिणपंथी, चरमपंथी पार्टियों पर घोटालों या खुलासों का असर नहीं पड़ता, क्योंकि वे समाज के भीतर मौजूद नफरत का फायदा उठाती हैं।

Bengaluru: ट्रैफिक और महंगे किराए से अलग दिखा शहर का खूबसूरत चेहरा, चेन्नई के शख्स ने बताई दिल की बात

बेंगलुरु का नाम आते ही अक्सर ट्रैफिक जाम, महंगे किराए, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और लंबे सफर की बातें होने लगती हैं। लेकिन करीब डेढ़ साल से कर्नाटक की राजधानी में रह रहे चेन्नई के एक शख्स ने शहर की ऐसी तस्वीर सामने रखी है, जिसे अक्सर चर्चाओं में जगह नहीं मिलती। उन्होंने रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई छोटी-छोटी चीजें गिनाईं, जिन्होंने उन्हें बेंगलुरु का मुरीद बना दिया।

ट्रैफिक और समस्याओं के बीच दिखीं शहर की अच्छी बातें

Reddit पर एक पोस्ट के जरिए इस शख्स ने लिखा कि बेंगलुरु को लेकर लोगों की कई शिकायतें जायज हैं, लेकिन शहर में ऐसी कई सुविधाएं भी हैं जिनकी लोग अक्सर अनदेखी कर देते हैं।

अपने पोस्ट में उन्होंने बेंगलुरु की तुलना चेन्नई से करते हुए बताया कि शहर की कुछ सामान्य-सी लगने वाली चीजें उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को काफी आसान और बेहतर बनाती हैं।

मोहल्लों के छोटे पार्क बने पसंदीदा ठिकाने

बेंगलुरु के बड़े और मशहूर पार्कों की चर्चा तो खूब होती है, लेकिन इस चेन्नई निवासी को शहर के छोटे BBMP पार्क खास तौर पर पसंद आए।

उन्होंने बताया कि रिहायशी इलाकों के बीच बने इन छोटे पार्कों में पेड़, हरियाली और बैठने की जगह होती है। उनके लिए ये सिर्फ घूमने की जगह नहीं, बल्कि रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।

₹80 का खाना याद आया तो पुरानी यादें ताजा हो गईं

बेंगलुरु की Darshini और Udupi फूड कल्चर भी उन्हें काफी पसंद है। खासतौर पर कम कीमत में साफ-सुथरा शाकाहारी खाना मिलने की सुविधा ने उनका ध्यान खींचा।

उन्होंने अपने इंटर्नशिप के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय महज ₹80 में मिलने वाला Udupi मील उनके लिए काफी मददगार साबित होता था। उनके मुताबिक, कम बजट में पेट भरने के लिए ऐसे विकल्प किसी राहत से कम नहीं थे।

Weekend Trip के लिए बेंगलुरु की लोकेशन शानदार

शहर की भौगोलिक स्थिति भी उन्हें पसंद आई। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु से तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और गोवा की ओर जाना आसान है।

खास तौर पर KSRTC बस कनेक्टिविटी को उन्होंने बेहद उपयोगी बताया। उनके मुताबिक, शहर में रहने वालों के लिए आसपास के राज्यों तक पहुंचने के कई सुविधाजनक विकल्प मौजूद हैं।

₹30 की बस राइड ने खींचा ध्यान

उनकी सबसे दिलचस्प बातों में से एक बेंगलुरु की बस सेवा को लेकर थी। उन्होंने 500-सीरीज बसों का जिक्र करते हुए बताया कि Outer Ring Road की ओर जाने के लिए उन्हें अक्सर AC बस मिल जाती है। जहां उनके कुछ साथी कैब या बाइक टैक्सी का सहारा लेते हैं, वहीं वह करीब ₹30 में बस से ऑफिस पहुंच जाते हैं। उनके मुताबिक, इसमें surge pricing जैसी परेशानी भी नहीं होती।

IT और पब्स से आगे भी है Bengaluru

चेन्नई के इस शख्स ने शहर के मंदिरों और पारंपरिक बाजारों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि बेंगलुरु को अक्सर IT कंपनियों, कैफे और पब्स के लिए जाना जाता है, लेकिन शहर का एक पारंपरिक और सांस्कृतिक पक्ष भी है। उनकी पोस्ट का मकसद भी इसी दूसरे पहलू को सामने लाना था। उन्होंने लोगों से शहर की समस्याओं के साथ-साथ उसकी अच्छी चीजों पर भी ध्यान देने की अपील की।

Reddit पर लोगों ने भी की तारीफ

पोस्ट सामने आने के बाद कई Reddit यूजर्स ने इस सकारात्मक नजरिए की सराहना की। एक यूजर ने इसे बेंगलुरु की तारीफ से जुड़ी दुर्लभ पोस्ट बताया। कुछ लोगों ने शहर के मौसम और शाम की सैर का जिक्र किया, जबकि दूसरे यूजर्स ने KSRTC की कनेक्टिविटी को लेकर सहमति जताई। एक यूजर ने तो यहां तक कहा कि यही वह बेंगलुरु है, जिसे वह भी पसंद करता है। कुल मिलाकर, यह पोस्ट बेंगलुरु की उन छोटी-छोटी खूबियों पर रोशनी डालती है, जो बड़े ट्रैफिक जाम और महंगे किराए जैसी चर्चाओं के बीच अक्सर नजरों से ओझल हो जाती हैं।

‘CM विजय को गले लगाना है…’ जंतर-मंतर सड़क पर लेटी महिला की अनोखी मांग, Video वायरल

न्यूजलेटर लिखकर महिला ने खड़ा किया 2.5 करोड़ का कारोबार, फिर भी इसे बताती हैं ‘साइड हसल’; जानिए क्यों

एक छोटा सा आइडिया कब बड़ा बिजनेस बन जाए, यह कहना मुश्किल है। सैन फ्रांसिस्को की फ्रीलांस राइटर एमी सुटो ने भी शायद नहीं सोचा था कि लेखकों की मदद के लिए शुरू किया गया उनका साधारण न्यूजलेटर एक दिन करोड़ों रुपये की कमाई करने लगेगा। जून 2023 में उन्होंने लेखकों के साथ पेड काम के मौके, करियर टिप्स और राइटिंग से जुड़ी उपयोगी जानकारी शेयर करने के लिए Substack शुरू किया था। शुरुआत में यह सिर्फ दूसरे राइटर्स की मदद करने की कोशिश थी, लेकिन धीरे-धीरे पाठकों की संख्या बढ़ती गई और प्लेटफॉर्म का दायरा भी बड़ा होता गया। आज इस न्यूजलेटर से 58 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। इसमें जॉब बोर्ड, राइटिंग रिसोर्स और राइटर्स की कम्युनिटी जैसी सुविधाएं भी हैं।

खास बात यह है कि इस बिजनेस को बढ़ाने के लिए एमी ने बड़े विज्ञापन खर्च का सहारा नहीं लिया। लगातार उपयोगी कंटेंट और सही ऑडियंस ने इस छोटे आइडिया को एक कमाई वाले साइड बिजनेस में बदल दिया।

लेखकों की मदद के लिए शुरू किया था न्यूजलेटर

एमी सुटो ने जून 2023 में अपना Substack न्यूजलेटर शुरू किया था। शुरुआत में उनका मकसद कोई बड़ा बिजनेस खड़ा करना नहीं था। वह अपने जैसे दूसरे लेखकों के साथ राइटिंग के मौके और काम से जुड़ी जानकारी शेयर करना चाहती थीं।

फ्रीलांस राइटर के तौर पर काम करते हुए सुटो से अक्सर दूसरे लेखक पूछते थे कि उन्हें पेड राइटिंग प्रोजेक्ट कहां से मिलते हैं। इसी जरूरत को देखते हुए उन्होंने एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने का फैसला किया, जहां लेखकों को काम के अवसर आसानी से मिल सकें।

पेरिस के कैफे में आया बड़ा आइडिया

इस बिजनेस को आगे बढ़ाने वाला एक अहम मोड़ पेरिस में आया। एक कैफे में काम करते समय सुटो को महसूस हुआ कि उनके पास इतने प्रोजेक्ट आ रहे हैं कि वह सभी काम खुद नहीं कर सकतीं।

दूसरी तरफ क्लाइंट्स नए लेखकों के लिए उनसे संपर्क कर रहे थे। सुटो के पास इन कामों को लेने का समय नहीं था, लेकिन वह दूसरे लेखकों को इन अवसरों से जोड़ सकती थीं। यहीं से ‘Make Writing Your Job’ का आइडिया सामने आया।

2024 में जॉब बोर्ड ने बदली तस्वीर

शुरुआत में न्यूजलेटर पर राइटिंग टिप्स और करियर से जुड़ी जानकारी साझा की जाती थी। इसके बाद 2024 में सुटो ने पेड जॉब बोर्ड शुरू किया।

पहले इसमें ऐसे काम शामिल किए जाते थे, जिन्हें सुटो खुद नहीं कर पा रही थीं। बाद में उन्होंने अपने पति काइल कॉर्ड्स के साथ मिलकर इंटरनेट पर अलग-अलग जगहों से राइटिंग जॉब तलाशना शुरू किया और उन्हें सब्सक्राइबर्स तक पहुंचाया।

सिर्फ नौकरी नहीं, राइटर्स के लिए पूरा प्लेटफॉर्म

समय के साथ यह न्यूजलेटर सिर्फ जॉब लिस्ट तक सीमित नहीं रहा। इसमें राइटिंग से जुड़े मुफ्त संसाधन, लेखकों के इंटरव्यू और ‘The Guest Stack’ जैसी सीरीज भी जोड़ी गईं।

इससे पाठकों को नौकरी तलाशने के साथ-साथ नई चीजें सीखने और इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के अनुभव जानने का मौका मिलने लगा।

बिना बड़े विज्ञापन खर्च के बढ़ी पहुंच

सुटो ने न्यूजलेटर की ग्रोथ के लिए लगातार कंटेंट पर ध्यान दिया। वह शुरुआत से हर सप्ताह नया न्यूजलेटर प्रकाशित करती रहीं। इसके अलावा LinkedIn, Threads और Substack Notes जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए नए पाठकों तक पहुंच बनाई।

खास बात यह है कि Business Insider के अनुसार, सुटो और उनके पति ने विज्ञापन पर 100 डॉलर से भी कम खर्च किया।

58 हजार सब्सक्राइबर्स और करोड़ों की कमाई

आज इस प्लेटफॉर्म से 58 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हैं। कमाई के लिए अलग-अलग मेंबरशिप प्लान रखे गए हैं। स्टैंडर्ड प्लान 19 डॉलर प्रति महीने का है, जबकि फाउंडिंग मेंबरशिप 550 डॉलर सालाना की है। 2025 के मध्य तक बिजनेस की सालाना कमाई छह अंकों तक पहुंच गई थी। इसके बाद रेवेन्यू दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा। अब यह वेंचर 2.63 लाख डॉलर यानी करीब 2.5 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना ग्रॉस रिकरिंग रेवेन्यू कमा रहा है।

 

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Dubai Mall की तरह जयपुर में खुल रहा पैसिफिक मॉल! 450+ ब्रांड्स और IMAX सिनेमा के साथ जानें क्या है खास

Pacific Mall Jaipur Launch: जयपुर शहर क सुंदरता और चमक धमक अब सिर्फ किलो-महलों और ऐतिहासिक इमारतों, हवेलियों तक ही सीमित नहीं रह गई हैं बल्कि जयपुर देश के बड़े शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर और हैदराबाद की तरह आधुनिक चकाचौंध के इंफ्रास्ट्रक्चर की चमक भी जयपुर में बिखरे रही हैं बड़े-बड़े शाही और लग्ज़री होटलों के साथ राजधानी जयपुर के शॉपिंग मॉल्स में दुनियाभर के लग्जरी ब्रांडों, रेस्तरांओं और शॉपिंग हब के रूप में अपनी पहचान बना रहा हैं।

जयपुर के मानसरोवर इलाके में हालही में बनकर तैयार हुआ उत्तर भारत का सबसे बड़ा और राजस्थान का सबसे आधुनिक पैसिफिक मॉल जिसके उद्घाटन का इंतजार पूरा शहर कर रहा है। मानसरोवर VT रोड़ पर सालों की मेहनत से बनकर तैयार हुआ पैसिफिक मॉल का उद्घाटन 11 अक्टूबर को होगा जो जयपुर की आधुनिक चकाचौंध में चार चांद लगा देगा।

Pacific Mall Jaipur Launch

जयपुर में बनकर तैयार हुआ पैसिफिक मॉल लगभग 12 एकड़ की जमीन पर बना हैं जो राजस्थान का सबसे बड़ा शॉपिंग मॉल हैं जहां जयपुर में पहली बार IKEA, Uniqlo, Michael Kors और Armani Exchange जैसे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय और भारतीय ब्रांड्स इस मॉल के जरिए अपनी जगह जयपुर में बनाने के लिए तैयार हैं जयपुर के पैसिफिक मॉल 450 से अधिक ब्रांड्स के आउटलेट्स के साथ खुलने वाला जयपुर का सबसे भव्य शॉपिंग मॉल होगा।

दुबई मॉल की तरह जयपुर में चमकेगा पैसिफिक मॉल

दुनियाभर में जब भी शॉपिंग मॉल्स और शॉपिंग सेंटर की बात आती हैं दुबई मॉल की सबसे ज्यादा चर्चाएं होती हैं। ऐसे जयपुर का पैसिफिक मॉल भी राजस्थान का दुबई मॉल से कम नहीं हैं। जिसे खासतौर पर ‘The Spirit of Rajasthan’ थीम पर तैयार किया गया है जो राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आधुनिकता का एक बेहतरीन संगम हैं।

Pacific Mall Jaipur Launch

जयपुर में पैसिफिक मॉल का निमार्ण पैसिफिक ग्रुप द्वारा किया गया हैं जहां इसके खुलने के बाद जयपुर को शॉपिंग, डाइनिंग और एंटरटेनमेंट के मामले में एक वैश्विक पहचान मिलेगी। क्योंकि इस मॉल में लोगों की लिए दुनियाभर के लग्जरी ब्रांड्स के आउटलेट्स इसे खास बनाएगा।

साथ ही पैसिफिक मॉल में शॉपिंग के साथ जयपुर के सिनेमा और मनोरंजन को भी नई ऊंचाईयां मिलने जा रही हैं क्योंकि इस मॉल में शानदार 9-स्क्रीन मल्टीप्लेक्स सिनेमाघर के साथ राजस्थान का पहले IMAX आईमैक्स का अनुभव जयपुर के लोगों को मिलेगा।

मॉल में 30 से अधिक फूड कोर्ट काउंटर, 40 से अधिक कैफे व रेस्तरां से लग्ज़री फूड का स्वाद लोगों के लिए हॉट-स्पॉट बनेगा। साथ ही इस मॉल के साथ जोड़कर 135 कमरों वाला लेमन ट्री होटल भी तैयार किया जा रहा हैं जो 2027 तक तैयार होगा। जो जयपुर के तेजी से विकसित हो रहे पर्यटन और बाजार को नया आयाम देगा।

जयपुर के सबसे लग्जरी मॉल में लोगों को मिलेगी ये सुविधाएं

जयपुर में शुरू हो जा रहा पैसिफिक मॉल जयपुर के अन्य शॉपिंग मॉल्स की तरह नहीं बल्कि उससे भी बढ़कर लोगों को या सुविधाएं मिलेंगी। जहां शॉपिंग, इंटरटेनमेंट, फूड, कॉर्पोरेट बिजनेस, स्पोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स की चकाचौंध सबसे खास होगी।

Pacific Mall Jaipur Launch

जयपुर का यह पैसिफिक मॉल 8 मंजिला के रूप में तैयार किया गया हैं जहां अलग-अलग वेन्यू कर लोगों को खास सुविधाएं मिलेंगी। जहां 3 हजार गाड़ियों की पार्किंग से लेकर हॉस्पिटैलिटी और कमर्शियल डेस्टिनेशन का यह मॉल सबसे बड़ा हब होगा। मॉल में दुनियाभर के फैशन और लाइफस्टाइल स्टोर, प्रीमियम और लक्जरी कपड़ों के स्टोर, इलेक्ट्रानिक्स हब, आईमैक्स मल्टीप्लेक्स सिनेमा, बच्चों के लिए भव्य गेमिंग जोन और हर वो चीज जो मॉल नाम सुनते ही लोगों के मन में दिखाई देने लगता हैं।

जयपुर में फिलहाल वर्ल्ड ट्रेड पार्क, टाईटन मॉल, पिंक स्क्वायर मॉल, जयपुर मॉल जैसे कई लग्ज़री मॉल्स है जहां युवाओं का हूजूम हर समय मॉल में उमड़ा रहता हैं जो दुनियाभर के बाजारों और ब्रांड्स के पर्यटन का मुख्य केंद्र हैं।

रिपोर्ट- अंकित राजपूत

अब घर बैठे चेक करें अपनी जमीन और मकान का लैंड यूज! DDA ने लॉन्च किया GIS-आधारित डिजिटल मैप

Land use of House in Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए जमीन और प्रॉपर्टी से जुड़ी जानकारी हासिल करना अब पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ‘मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 (MPD-2047)’ के तहत तैयार लैंड यूज प्लान (Land Use Plan) को GIS आधारित इंटरएक्टिव डिजिटल मैप के रूप में उपलब्ध कराया है। इसके जरिए लोग घर बैठे किसी इलाके, जमीन या प्रॉपर्टी का निर्धारित लैंड यूज ऑनलाइन देख सकेंगे।

यह पहल दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर सेवाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से की गई है। अब सामान्य लैंड यूज संबंधी जानकारी के लिए लोगों को संबंधित सरकारी या स्थानीय निकाय कार्यालयों के चक्कर लगाने अथवा किसी तीसरे पक्ष पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।

प्लॉट लेवल तक देख सकेंगे जमीन का Land Use

DDA की ओर से उपलब्ध कराए गए इस डिजिटल मैप में यूजर किसी खास इलाके, लोकेशन या प्रॉपर्टी को सर्च कर सकता है। मैप पर धीरे-धीरे Zoom करते हुए प्लॉट लेवल तक पहुंचा जा सकता है। इसके बाद संबंधित जमीन का निर्धारित Land Use देखा जा सकता है। पारंपरिक 2D नक्शों के मुकाबले यह डिजिटल मैप अधिक डिटेल्स और लोकेशन-स्पेसिफिक जानकारी उपलब्ध कराता है। इससे किसी प्रॉपर्टी के आसपास की जमीन का Land Use भी समझने में मदद मिलेगी।

9 प्रमुख Land Use कैटेगरी

DDA के इस लैंड यूज प्लान में दिल्ली की जमीन को नौ प्रमुख कैटेगरी में दिखाया गया है। इनमें शामिल हैं:-

  • Residential (आवासीय)
  • Commercial (व्यावसायिक)
  • Industrial (औद्योगिक)
  • Recreation (मनोरंजन)
  • Transport (परिवहन)
  • Utility (उपयोगिता सेवाएं)
  • Government (सरकारी)
  • Public and Semi-Public Facilities (सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक सुविधाएं)

    Agriculture & Water Body (कृषि एवं जल निकाय)

इन सभी कैटेगरी के लिए अलग-अलग कलर कोडिंग की गई है। इससे नक्शे पर किसी जमीन का निर्धारित उपयोग आसानी से पहचाना जा सकता है।

लैंड पूलिंग और TOD Zone की भी मिलेगी जानकारी

इस इंटरएक्टिव मैप में सिर्फ लैंड यूज की जानकारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण प्लानिंग लेयर्स भी जोड़ी गई हैं। इनमें लैंड पूलिंग एरिया (Land Pooling Areas) और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन प्रमुख हैं। इसके अलावा डिजिटल मैप पर द्वारका सब-सिटी, रोहिणी प्रोजेक्ट लेआउट, PM-UDAY कॉलोनियां, DDA के पार्क और अन्य महत्वपूर्ण थीमैटिक लेयर्स भी उपलब्ध हैं।

MPD-2047 लेयर के जरिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तावित लैंड यूज को देखा जा सकता है। जबकि लैंड पूलिंग और TOD लेयर से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कौन से इलाके इन प्लानिंग फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते हैं या प्रस्तावित हैं।

मैप पर जमीन की लंबाई-चौड़ाई भी माप सकेंगे

डिजिटल मैप में यूजर्स के लिए मेजरमेंट (Measurement) और ड्राइंग/स्केचिंग टूल्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। इनके जरिए किसी सड़क या प्लॉट की लंबाई, चौड़ाई अथवा दो स्थानों के बीच की दूरी को मैप पर मापा जा सकता है। यूजर अपनी जरूरत के अनुसार मैप पर मार्किंग या स्केच भी कर सकता है। यह सुविधा व्यक्तिगत संदर्भ, प्रारंभिक विश्लेषण और प्लानिंग के लिए उपयोगी हो सकती है।

लैंड यूज प्लान में समय के साथ किया जाएगा अपडेट

DDA के मुताबिक GIS आधारित लैंड यूज प्लान को इस तरह तैयार किया गया है कि नए डेटा उपलब्ध होने के साथ इसमें लगातार अपडेट किया जा सके। इससे दिल्ली में जमीन के इस्तेमाल और शहरी नियोजन से जुड़ी जानकारी को अधिक अपडेटेड और प्रासंगिक बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे दिल्ली के बदलते शहरी स्वरूप के अनुसार प्लानिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी तरीके से अपडेट करने में भी सहायता मिलेगी।

सरकारी एजेंसियों को भी फायदा

एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लैंड प्लान यूज से सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि शहरी योजनाकारों, आर्किटेक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों, सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों को भी फायदा होगा। इस जानकारी का इस्तेमाल शुरुआती प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और विकास से जुड़े आकलन में किया जा सकेगा। DDA का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, योजना संबंधी जानकारी तक पहुंच आसान होगी।

कैसे देख सकेंगे Land Use Plan?

DDA का GIS आधारित इंटरएक्टिव लैंड यूज प्लान उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर ‘Master Plan for Delhi-2047’ सेक्शन में उपलब्ध है। यहां जाकर यूजर किसी इलाके, लोकेशन या प्रॉपर्टी को सर्च कर सकता है और डिजिटल मैप पर उसका निर्धारित Land Use देख सकता है।

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DDA के मुताबिक इस पहल से दिल्ली के लोगों को जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी बुनियादी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी, नियमित जानकारी के लिए सरकारी कार्यालयों के भौतिक दौरे की जरूरत कम होगी और दिल्ली में अधिक पारदर्शी, सूचित और तकनीक आधारित शहरी नियोजन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

कल का मौसम: 30 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में 65 kmph स्पीड से हवाएं, पूर्वोत्तर-दक्षिण भारत के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

Weather forecast for September 30: देश भर में मानसून के अंतिम पड़ाव और समुद्र में बन रही चक्रवाती हवाओं के असर से बुधवार 30 सितंबर को देश के कई हिस्सों में तूफानी मौसम रहने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, पूरे कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश की पूरी संभावना है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और म्यांमार-बांग्लादेश तटों से सटे इलाकों में 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की गंभीर चेतावनी जारी की गई है।

पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, 30 सितंबर को देश के दो प्रमुख क्षेत्रों पूर्वोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मूसलाधार बारिश का दौर बना रहेगा। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश होने की संभावना है। दक्षिण भारत की बात करें तो पूरे आंतरिक कर्नाटक (उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक), केरल व माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में तेज बारिश होने के आसार हैं।

तमिलनाडु और रायलसीमा में 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

दक्षिण भारत के मैदानी और तटीय इलाकों में तेज हवाओं और बिजली चमकने का असर देखा जाएगा। रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर आकाशीय बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।

आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक में बिजली चमकने और हवाओं का अनुमान

मध्य, पूर्व और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी मौसमी हलचल बनी रहेगी। तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और ओडिशा में पर आकाशीय बिजली गिरने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा के साथ-साथ मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा और केरल व माहे में अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती मौसम: 65 kmph की गति से चलेंगी हवाएं

समुद्री इलाकों की बात करें तो बंगाल की खाड़ी और पड़ोसी तटीय क्षेत्रों में स्थिति काफी खतरनाक बनी हुई है। IMD के मुताबिक उत्तरी म्यांमार और बांग्लादेश के तटीय इलाकों से सटे उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। इन हवाओं की गति बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे के खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है। समुद्र में तेज उथल-पुथल को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र के भीतर न जाने की सख्त हिदायत दी है।

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