कल का मौसम: 30 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में 65 kmph स्पीड से हवाएं, पूर्वोत्तर-दक्षिण भारत के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

Weather forecast for September 30: देश भर में मानसून के अंतिम पड़ाव और समुद्र में बन रही चक्रवाती हवाओं के असर से बुधवार 30 सितंबर को देश के कई हिस्सों में तूफानी मौसम रहने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, पूरे कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश की पूरी संभावना है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और म्यांमार-बांग्लादेश तटों से सटे इलाकों में 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की गंभीर चेतावनी जारी की गई है।

पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, 30 सितंबर को देश के दो प्रमुख क्षेत्रों पूर्वोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मूसलाधार बारिश का दौर बना रहेगा। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश होने की संभावना है। दक्षिण भारत की बात करें तो पूरे आंतरिक कर्नाटक (उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक), केरल व माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में तेज बारिश होने के आसार हैं।

तमिलनाडु और रायलसीमा में 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

दक्षिण भारत के मैदानी और तटीय इलाकों में तेज हवाओं और बिजली चमकने का असर देखा जाएगा। रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर आकाशीय बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।

आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक में बिजली चमकने और हवाओं का अनुमान

मध्य, पूर्व और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी मौसमी हलचल बनी रहेगी। तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और ओडिशा में पर आकाशीय बिजली गिरने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा के साथ-साथ मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा और केरल व माहे में अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती मौसम: 65 kmph की गति से चलेंगी हवाएं

समुद्री इलाकों की बात करें तो बंगाल की खाड़ी और पड़ोसी तटीय क्षेत्रों में स्थिति काफी खतरनाक बनी हुई है। IMD के मुताबिक उत्तरी म्यांमार और बांग्लादेश के तटीय इलाकों से सटे उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। इन हवाओं की गति बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे के खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है। समुद्र में तेज उथल-पुथल को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र के भीतर न जाने की सख्त हिदायत दी है।

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कल का मौसम: 28 सितंबर को उत्तराखंड, कर्नाटक और अंडमान में भारी बारिश का अलर्ट, IMD ने यूपी से बिहार तक दी आंधी-तूफान की चेतावनी

IMD Weather Update: देश के अलग हिस्सों में मौसमी प्रणालियों के बने रहने से सोमवार 28 सितंबर को भी बारिश और तूफानी गतिविधियों का दौर जारी रहने वाला है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा पूर्व अनुमान के मुताबिक सोमवार को उत्तराखंड, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इसके साथ ही देश के बड़े हिस्से में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और आंधी-तूफान आने की चेतावनी जारी की गई है।

उत्तराखंड, कर्नाटक और अंडमान में भारी बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 28 सितंबर को उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मौसम का मिजाज काफी बिगड़ा रहेगा। राज्य के अलग अलग हिस्सों में भारी बारिश होने का अनुमान है। इसी तरह दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक के दक्षिण आंतरिक हिस्सों में मूसलाधार पानी गिरने के आसार हैं। केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी कई जगहों पर भारी बारिश की प्रबल संभावना बनी हुई है।

अंडमान में 60 किमी/घंटे की रफ्तार से थंडरस्कवॉल का अलर्ट

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के आसपास बने मौसमी तंत्र के चलते वहां का मौसम बेहद खराब रहेगा। IMD ने चेतावनी दी है कि द्वीप समूह में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने और आंधी-तूफान आने की आशंका है, जिसके झोंके और तेज हो सकते हैं। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी गई है।

पूर्वोत्तर, हिमाचल और राजस्थान में 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी तूफानी हवाएं

उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में तेज रफ्तार हवाओं के साथ बारिश और बिजली कड़कने का अलर्ट है। असम व मेघालय, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा, राजस्थान और तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर आकाशीय बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। राजस्थान के मैदानी इलाकों से लेकर हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों तक बादलों की आवाजाही और गर्जना के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है।

बिहार, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में 40 किमी/घंटे की गति से आंधी का अनुमान

देश के मध्य और पूर्वी राज्यों में भी आंधी और बिजली गिरने का जोखिम बना हुआ है। आंध्र प्रदेश, बिहार, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, ओडिशा और तेलंगाना के विभिन्न जिलों में पृथक स्थानों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। मध्य भारत के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में अलग जगहों पर बिजली चमकने की संभावना जताई गई है। वहीं तटीय आंध्र प्रदेश के इलाकों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी।

IMD (4)

समुद्र में तूफानी हवाएं: मछुआरों के लिए विशेष चेतावनी

समुद्र और तटीय क्षेत्रों में चक्रवाती हवाओं की वजह से स्थिति काफी प्रतिकूल बनी रहेगी। मौसम विभाग ने विभिन्न समुद्री क्षेत्रों के लिए हवा की गति और चेतावनी जारी की है। सोमालिया तट के पास और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। इनके झोंके 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं।

उत्तरी अंडमान सागर तथा दक्षिणी म्यांमार तट के आसपास 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने का अनुमान है जहां झोंके 60 किमी/घंटे तक जा सकते हैं। उत्तरी म्यांमार तट और उससे सटे पूर्व-मध्य व उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के हिस्सों में 35 से 45 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। इनके झोंके 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक जा सकते हैं। मौसम विभाग ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र में न उतरने की सलाह दी है।

Cyclone Arnab threat: ओडिशा-आंध्र तट से टकराया ‘अर्नब’ तूफान! इन राज्यों में भारी बारिश का रेड अलर्ट, स्कूलों में छुट्टी का ऐलान, पुरी में बरसात शुरू

Cyclone Arnab threat: बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव अब उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट के बेहद करीब पहुंच गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, यह सिस्टम 23 सितंबर की रात विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच, कलिंगपट्टनम के दक्षिण-पश्चिम के करीब तट पार करने की स्थिति में पहुंच गया था। इसके प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र में बेहद खराब परिस्थितियों का खतरा बना हुआ है।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों से ‘अर्नब’ तूफान के टकराने की खबर है। IMD ने बताया कि ‘अर्नब’ तूफान के कारण ओडिशा में हो रही बारिश की तीव्रता बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में कोरापुट जिले के सेमिलीगुडा में सबसे अधिक 230 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। पुरी में कई हिस्सों में तेज बारिश हो रही है।

तट के बेहद करीब पहुंचा डीप डिप्रेशन

IMD के बुलेटिन के अनुसार, डीप डिप्रेशन उत्तर आंध्र प्रदेश के तट के पास कलिंगपट्टनम से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम, विशाखापत्तनम से करीब 90 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व और गोपालपुर से करीब 160 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में केंद्रित था। वेदर सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रही थी। अगले कुछ घंटों में विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार करने की संभावना जताई गई थी।

ओडिशा में सबसे ज्यादा असर की आशंका

ओडिशा के दक्षिणी और तटीय हिस्सों में पहले से ही भारी बारिश हो रही है। मौसम की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य प्रशासन ने कई जिलों में एहतियाती कदम उठाए हैं। दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों में IMD ने भारी से बहुत भारी और कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। दक्षिणी तट पर समुद्र की स्थिति भी बहुत खराब से अत्यधिक खराब रहने की चेतावनी दी गई थी।

इन जिलों में रेड अलर्ट और भारी बारिश का खतरा

ओडिशा के दक्षिणी जिलों में बारिश को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। पहले जारी पूर्वानुमानों में कोरापुट, गजपति और गंजाम में भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई गई थी। इसके अलावा कालाहांडी, नबरंगपुर, कोरापुट और मलकानगिरी में भी भारी बारिश की चेतावनी दी गई थी। IMD के अलर्ट के बाद राज्य प्रशासन ने कई जिलों के कलेक्टरों को हाई अलर्ट पर रखा है। संभावित जलभराव, बाढ़, भूस्खलन और मिट्टी खिसकने जैसी घटनाओं को देखते हुए राहत और बचाव की तैयारियां बढ़ाई गई हैं।

ओडिशा में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद

खराब मौसम को देखते हुए ओडिशा के कई जिलों में स्कूल बंद करने का फैसला लिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार खुर्दा, जगतसिंहपुर, गंजाम, गजपति, पुरी, कोरापुट, नबरंगपुर और मलकानगिरी समेत प्रभावित जिलों में 24 सितंबर तक शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों को भी बंद रखने का आदेश दिया गया है। हालांकि, स्कूल बंद रहने के बावजूद कई जगहों पर शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों को अपने तैनाती वाले जिले में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रशासनिक और राहत कार्यों में मदद मिल सके।

‘चिल्का झील’ में फेरी सेवा भी रोकी गई

मौसम खराब होने और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चिल्का झील में सतपड़ा-जाह्निकुड़ा के बीच फेरी सेवा को भी अस्थायी रूप से रोकने का फैसला लिया गया है। प्रशासन की कोशिश है कि खराब मौसम के दौरान संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही कम से कम हो। तटीय क्षेत्रों में समुद्र में जाने पर भी रोक और चेतावनी जारी की गई है। पुरी में समुद्र तटों पर लाल झंडे लगाए गए हैं। समुद्र में स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया था।

आंध्र प्रदेश में भी तेज हवाओं और भारी बारिश का खतरा

डीप डिप्रेशन का सबसे सीधा प्रभाव उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर पड़ रहा है। सिस्टम के कलिंगपट्टनम और विशाखापत्तनम के बीच से गुजरने के कारण तटीय जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश की स्थिति बनी हुई है। IMD के तटीय मौसम बुलेटिन के मुताबिक, दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट के आसपास तेज हवाएं चलने और समुद्र के बहुत खराब स्थिति में रहने की चेतावनी दी गई थी। 24 सितंबर की शाम तक हवाओं के झोंके करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना जताई गई थी। ऐसे में तटीय इलाकों में लोगों को समुद्र से दूर रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने को कहा गया है।

क्या यह ‘साइक्लोन अर्नब’ है?

‘बंगाल की खाड़ी’ में बने इस सिस्टम को लेकर सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में ‘साइक्लोन अर्नब’ नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन यहां स्थिति को सही तरीके से समझना जरूरी है। IMD के अनुसार, 23 सितंबर को यह सिस्टम डीप डिप्रेशन था और इसके तट पार करने का पूर्वानुमान भी डीप डिप्रेशन के रूप में दिया गया था।

‘Arnab’ नाम उस क्षेत्र के अगले चक्रवाती तूफान के लिए नामों की सूची में है। यह नाम बांग्लादेश ने दिया है और इसका अर्थ बंगाली में ‘समुद्र’ बताया गया है। इसलिए जब तक IMD किसी सिस्टम को आधिकारिक तौर पर चक्रवाती तूफान घोषित नहीं करता। उसे सीधे ‘साइक्लोन अर्नब’ कहना सही नहीं होगा।

बाढ़ और भूस्खलन को लेकर प्रशासन अलर्ट

ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और मिट्टी खिसकने की आशंका भी बनी हुई है। मलकानगिरी समेत कई जिलों में प्रशासन ने बचाव दलों को तैयार रखा है। संवेदनशील स्थानों पर भारी मशीनरी तैनात की गई है। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है।

आगे क्या रहेगा मौसम का हाल?

डीप डिप्रेशन के तट पार करने के बाद भी इसके प्रभाव से ओडिशा और आंध्र प्रदेश में बारिश का दौर जारी रह सकता है। खासकर तटीय और दक्षिणी ओडिशा तथा उत्तर आंध्र प्रदेश के इलाकों में अगले चरण में भी तेज बारिश और हवाओं पर नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग (IMD), लगातार सिस्टम की दिशा और तीव्रता पर नजर बनाए हुए है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे समुद्र, नदियों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें, अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइंस का पालन करें।

देश के दूसरे हिस्सों पर भी असर

इस मौसम प्रणाली का प्रभाव केवल तटीय ओडिशा और आंध्र प्रदेश तक सीमित नहीं रह सकता। पूर्वी भारत के कुछ अन्य हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। इससे पहले के पूर्वानुमानों में तेलंगाना, छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश की संभावना जताई गई थी। फिलहाल, सबसे ज्यादा निगाह उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा पर है, जहां डीप डिप्रेशन के तट पार करने के दौरान भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्र की खराब स्थिति का खतरा बना हुआ है।

बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन! ओडिशा-आंध्र प्रदेश समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन! ओडिशा-आंध्र प्रदेश समेत 20 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

deep depression in bay of bengal

बंगाल की खाड़ी का डिप्रेशन डीप डिप्रेशन में बदल गया है। इसके चक्रवाती तूफान अर्नब में बदलने और 23 सितंबर की रात उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को पार कर सकता है। डीप डिप्रेशन की वजह से ओडिसा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश समेत 20 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। ALSO READ: Top News 23 September: बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन, मध्य प्रदेश में नो यूपीआई डे, क्रूड के दाम गिरे

 

ओडिशा में भारी से बहुत भारी बारिश

ओडिशा के तटीय और दक्षिणी हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश हो रही है। भारी बारिश के चलते ओडिशा में ODRAF टीमें तैनात की गई हैं। समुद्र में मछुआरों के जाने पर रोक और पुरी में समुद्र स्नान पर प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य के 7 जिलों में 24 सितंबर तक शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का फैसला किया गया है, जबकि सरकारी कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें ड्यूटी पर लौटने को कहा गया है। 

 

आईएमडी ने 23 और 24 सितंबर को कोरापुट, गजपति और गंजाम में रेड अलर्ट जारी किया है। यहां 20 सेंटीमीटर से ज्यादा बारिश होने की संभावना है। 24 और 25 सितंबर के लिए कालाहांडी, नबरंगपुर, कोरापुट और मलकानगिरी में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है। दक्षिण ओडिशा में 23 और 24 सितंबर को बहुत भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अनुमान है। 25 और 26 सितंबर को भी कुछ इलाकों में भारी बारिश जारी रह सकती है।

राजस्थान से मानसून की विदाई

उत्तर पश्चिम भारत से दक्षिण पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, राजस्थान के कई हिस्सों से मानसून लौटने लगा है और अगले 3-4 दिनों में राज्य के कुछ और हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। 23 से 25 सितंबर तक मौसम शुष्क रहने का अनुमान है। ALSO READ: अभी खत्म नहीं हुआ मानसून! लौट आया बारिश का दौर, 24 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग ने दिल्ली-NCR के लिए फिलहाल कोई अलर्ट नहीं जारी किया है। यहां बुधवार को मौसम सामान्य तौर पर सूखा रहने का अनुमान है। आसमान साफ रहने से दिन के तापमान में ज्यादा राहत नहीं मिलेगी और अधिकतम तापमान करीब 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

बंगाल की खाड़ी में बना रहा ‘अर्नब’ चक्रवात? ओडिशा, आंध्र प्रदेश और बंगाल में भारी बारिश-तूफान का खतरा, IMD ने जारी किया रेड अलर्ट

Cyclone Arnab: बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना मौसम सिस्टम जल्द ही तटीय इलाकों में अपना असर दिखा सकता है। IMD के मुताबिक, यह सिस्टम लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसके जल्द ही और मजबूत होने की संभावना है। इसके बाद यह डीप डिप्रेशन (गहरा दबाव) में बदल सकता है और आंध्र प्रदेश-ओडिशा तट को पार कर सकता है।

इससे पहले सोमवार को मौसम विभाग ने बताया था कि पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना डिप्रेशन ‘डीप डिप्रेशन’ में बदल सकता है।

IMD ने कहा, “पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना डिप्रेशन पिछले 6 घंटों में 18 किमी/घंटा की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा और आज, 22 सितंबर 2026 को सुबह 8:30 बजे (IST) उसी इलाके में 17.9°N अक्षांश और 86.0°E देशांतर के पास केंद्रित था। यह गोपालपुर (ओडिशा) से लगभग 200 किमी दक्षिण-पूर्व, कलिंगपटनम (आंध्र प्रदेश) से 200 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व, पुरी (ओडिशा) से 210 किमी दक्षिण और विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) से 290 किमी पूर्व में स्थित था।”

IMD ने आगे कहा, “इसके अगले 12 घंटों के दौरान पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ने और पश्चिम-मध्य व उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक गहरे डिप्रेशन (deep depression) में बदलने की बहुत संभावना है।” साथ ही, यह भी बताया गया कि इस सिस्टम के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते रहने का अनुमान है।

मौसम विभाग ने कहा कि इस सिस्टम के बुधवार रात और गुरुवार तड़के विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तटों को ‘डीप डिप्रेशन’ के रूप में पार करने की संभावना है।

इसका नाम ‘अर्नब’ कब रखा जाएगा?

उत्तरी हिंद महासागर में चक्रवाती तूफानों के नामों की सूची के अनुसार, इस क्षेत्र में बनने वाले अगले चक्रवात का नाम ‘अर्नब’ रखा जाएगा।

‘अर्नब’ का मतलब बंगाली भाषा में ‘समुद्र’ होता है। यह नाम बांग्लादेश ने दिया है। यह नाम विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की ओर से तैयार की गई क्षेत्रीय उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की नामकरण सूची में शामिल है।

आंध्र प्रदेश में रेड अलर्ट

आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम और विजयनगरम के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। 22-23 सितंबर को इन दोनों जिलों और पार्वतीपुरम मन्यम में कुछ जगहों पर बहुत ज्यादा बारिश होने की संभावना है।

इसके अलावा, अल्लूरी सीताराम राजू, अनाकापल्ली और विशाखापत्तनम जिलों में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने की उम्मीद है, जबकि कई अन्य जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है।

23 और 24 सितंबर को श्रीकाकुलम, विजयनगरम, पार्वतीपुरम मान्यम और अल्लूरी सीताराम राजू में कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश हो सकती है। वहीं, अनकापल्ली, विशाखापत्तनम, काकीनाडा, ईस्ट गोदावरी और एलुरु में भारी से बहुत भारी बारिश होने की उम्मीद है।

मौसम विभाग ने जारी की एडवाइजरी

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण कई जगहों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है। सड़कें फिसलन भरी हो सकती हैं। इसके अलावा पेड़ और बिजली के खंभे गिरने, बिजली-पानी की सप्लाई प्रभावित होने और नालियों के जाम होने का खतरा भी है। कुछ जगहों पर जलाशयों या बांधों के टूटने की आशंका भी जताई गई है।

प्रशासन ने लोगों को बेवजह बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। साथ ही सड़क, रेल और हवाई यातायात को जरूरत के हिसाब से नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। राहत और बचाव दलों के साथ बिजली और पानी विभागों को भी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

यह मौसम संबंधी एडवाइजरी 22 सितंबर 2026 को दोपहर 1 बजे जारी की गई।

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IMD Rain Forecast: बंगाल की खाड़ी में बढ़ा खतरा! 12 घंटे में डीप डिप्रेशन से 4 राज्यों में बेहद भारी बारिश का अलर्ट, इन राज्यों में भी बिगड़ेगा मौसम

India Weather Update: बंगाल की खाड़ी में बने मौसमी सिस्टम ने देश के कई राज्यों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 22 सितंबर के मौसम बुलेटिन के मुताबिक पश्चिम-मध्य और उससे सटी पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में बना सुस्पष्ट कम दबाव का क्षेत्र 21 सितंबर की शाम 5:30 बजे डिप्रेशन (चक्रवाती दबाव) में बदल गया था। इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा और 22 सितंबर की सुबह 8:30 बजे यह ओडिशा के गोपालपुर से करीब 200 किमी दक्षिण-पूर्व, पुरी से 210 किमी दक्षिण, आंध्र प्रदेश के कलिंगपटनम से 200 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व और विशाखापट्टनम से 290 किमी पूर्व में केंद्रित था।

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 12 घंटों के दौरान यह डिप्रेशन और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन में बदल जाएगा। इसके बाद यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की तड़के के बीच विशाखापट्टनम और गोपालपुर के बीच उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों को पार करेगा। इस सिस्टम के असर से ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

4 राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट: ओडिशा से तेलंगाना तक संकट

चक्रवाती दबाव के सीधे प्रभाव से ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में मूसलाधार और तूफानी बारिश का दौर शुरू होने वाला है। ओडिशा में 22 से 24 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश के साथ अत्यंत भारी बारिश होने का अनुमान है। 25 सितंबर को बहुत भारी और 22 से 24 सितंबर के दौरान अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश जारी रहेगी। इसके साथ ही 22 से 24 सितंबर तक राज्य में 50 से 60 किमी/घंटे (झोंके 70 किमी/घंटे) की रफ्तार से थंडरस्कवॉल चलने का भी अलर्ट है।

तटीय आंध्र प्रदेश और यणम में 22 और 23 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश होगी। 24 सितंबर को बहुत भारी बारिश तथा 22, 23 और 25 सितंबर को भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। 23 और 24 सितंबर को यहां 50 से 60 किमी/घंटे की गति से थंडरस्कवॉल चलने की आशंका है।

इसी तरह छत्तीसगढ़ में 23 और 24 सितंबर को अलग-अलग जगहों पर अत्यंत भारी बारिश होने का अनुमान जताया गया है। राज्य में 22 से 24 सितंबर और 27 सितंबर को भारी बारिश तथा 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। तेलंगाना में 23 और 24 सितंबर को अलग-अलग जगहों पर अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा 22, 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश तथा 23 व 24 सितंबर को 50 से 60 किमी/घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।

मध्य प्रदेश, विदर्भ, झारखंड और बिहार का मौसम

चक्रवाती दबाव की वजह से मध्य भारत और पूर्वी भारत के राज्यों में भी वर्षा की गतिविधियां काफी तेज रहेंगी। पूर्वी मध्य प्रदेश और विदर्भ में 22 से 27 सितंबर तक और छत्तीसगढ़ में 22 से 28 सितंबर तक काफी बारिश होने का अनुमान है। विदर्भ में 24 और 25 सितंबर को और पूर्वी मध्य प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश हो सकती है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने का अलर्ट जारी किया गया है।

पूर्वी भारत के गांगेय पश्चिम बंगाल और झारखंड में 24 सितंबर को, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में 25 सितंबर को और बिहार में 24 व 25 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश होने का पूर्वानुमान है। झारखंड में 22 सितंबर को मध्यम से तीव्र आकाशीय बिजली चमकने की चेतावनी भी दी गई है।

उत्तर-पश्चिम और पूर्वोत्तर भारत में बारिश व बिजली का पूर्वानुमान

उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तराखंड में 26 और 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश और 28 सितंबर को भारी बारिश होगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 26 सितंबर को बहुत भारी बारिश और 25 व 27 सितंबर को भारी बारिश होने के आसार हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 26 और 27 सितंबर को भारी बारिश होने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 28 सितंबर को गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।

दूसरी ओर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान के शेष हिस्सों, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों से अगले 2 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई की स्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो असम और मेघालय में 23 सितंबर को काफी बारिश होगी। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में 22 और 23 सितंबर को भारी बारिश होने का अनुमान है।

पश्चिम और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत का हाल

पश्चिम भारत के कोंकण व गोवा और मराठवाड़ा में 22 और 23 सितंबर को और मध्य महाराष्ट्र में 22 सितंबर को व्यापक बारिश होगी। कोंकण, गोवा और मध्य महाराष्ट्र में 22 एवं 23 सितंबर को और मराठवाड़ा में 22 से 25 सितंबर के दौरान भारी बारिश की संभावना है। 24 और 25 सितंबर को मध्य महाराष्ट्र व मराठवाड़ा में तेज सतही हवाएं चलेंगी।

दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के केरल व माहे में 23 से 25 सितंबर, तटीय कर्नाटक में 24 सितंबर, उत्तर व दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में 22 से 24 सितंबर तथा रायलसीमा में 22 सितंबर को अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

समुद्र में तूफानी हवाओं का अलर्ट और मछुआरों के लिए सख्त निर्देश

समुद्र में मौसमी गतिविधियों के कारण स्थिति बहुत गंभीर बनी हुई है। पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में 22 सितंबर की शाम से हवा की गति 50-60 किमी/घंटे से बढ़कर 23 और 24 सितंबर की शाम तक 55 से 65 किमी/घंटे (झोंके 75 किमी/घंटे) तक पहुंच जाएगी।

दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश के तटों पर 22 सितंबर की शाम से हवाएं 50-60 किमी/घंटे और 23 सितंबर की सुबह से 24 सितंबर की शाम तक 55-65 किमी/घंटे (झोंके 75 किमी/घंटे) की गति से चलेंगी।

पश्चिम बंगाल और दक्षिणी आंध्र प्रदेश के तटों पर भी 23 और 24 सितंबर को 45 से 55 किमी/घंटे की हवाएं चलेंगी। इस दौरान बंगाल की खाड़ी के विभिन्न हिस्सों और आंध्र प्रदेश, ओडिशा व पश्चिम बंगाल के तटों पर समुद्र की स्थिति बेहद खराब रहेगी।

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IMD Heavy Rain Alert: मौसम विभाग का बड़ा अलर्ट! यूपी-MP में आसमान से आफत, इन राज्यों में 3 सितंबर तक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का अलर्ट

IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून एक बार फिर खतरनाक रूप लेता दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा समेत कई राज्यों में आने वाले दिनों में मूसलाधार बारिश हो सकती है। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का भी खतरा जताया गया है। पिछले 24 घंटे में ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। उत्तराखंड, मेघालय, मिजोरम और पूर्वी मध्य प्रदेश में भी 12 से 20 सेंटीमीटर तक बहुत भारी बारिश रिकॉर्ड की गई। इससे कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का खतरा बढ़ गया है।

यूपी-मध्य प्रदेश में फिर भारी बारिश की दस्तक

पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश और आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से 28 अगस्त को पूर्वी मध्य प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। उत्तर प्रदेश में भी 28 अगस्त को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार यह कम दबाव का क्षेत्र फिलहाल पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्र में मौजूद है, हालांकि अगले 24 घंटे में इसके कमजोर पड़ने की संभावना है।

मध्य प्रदेश में इन दिनों सतर्क रहें

पूर्वी मध्य प्रदेश में 28 से 30 अगस्त के दौरान व्यापक बारिश की संभावना है। इसके बाद 2 और 3 सितंबर को भी बारिश का दौर जारी रह सकता है:-

  • पूर्वी मध्य प्रदेश में 29 अगस्त से 2 सितंबर तक कहीं-कहीं भारी बारिश होगी।
  • 28 अगस्त और 3 सितंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश होने की आशंका है।
  • पश्चिमी मध्य प्रदेश में 28 अगस्त तथा 2-3 सितंबर को भारी बारिश की आशंका है।
  • छत्तीसगढ़ में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है।
  • मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर भी सावधानी की जरूरत है।

ओडिशा में सबसे बड़ा खतरा! 30 अगस्त को बेहद भारी बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पश्चिमी हिस्से और उससे सटे पश्चिम बंगाल-उत्तर ओडिशा तट के पास 29 अगस्त के आसपास एक नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके प्रभाव से ओडिशा में 28 से 31 अगस्त तक भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। लेकिन 30 अगस्त को स्थिति और ज्यादा गंभीर हो सकती है, क्योंकि मौसम विभाग ने इस दिन अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है।

ओडिशा में 28-29 अगस्त और 31 अगस्त को भी कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा राज्य में गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है।

उत्तराखंड में भी लगातार बारिश का दौर जारी

उत्तराखंड में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। 28 से 30 अगस्त और फिर 2-3 सितंबर को कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। वहीं 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच बहुत भारी बारिश की भी आशंका है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, अचानक नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने और सड़क संपर्क प्रभावित होने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

बिहार में बिजली और तेज हवाओं का अलर्ट

बिहार में आज यानी 28 अगस्त को मध्यम से गंभीर बिजली गतिविधि की संभावना जताई गई है। राज्य में 28 अगस्त से 1 सितंबर तक कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 28 अगस्त से 3 सितंबर के बीच गरज-चमक और तेज हवाओं का भी असर देखने को मिल सकता है। झारखंड में भी 28 से 31 अगस्त के बीच भारी बारिश का अनुमान है।

बंगाल और पूर्वोत्तर में भी मौसम बिगड़ेगा

पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्यों में भी 28 अगस्त से 3 सितंबर तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र तक बारिश का असर

पिछले 24 घंटे में पूर्वी राजस्थान में 7-11 सेंटीमीटर, जबकि छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी भारी बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक व्यापक बारिश की संभावना है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र-कच्छ में भी इस दौरान कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।

दक्षिण भारत में बारिश अपेक्षाकृत कम, लेकिन तेज हवाओं का खतरा

मौसम विभाग ने बताया है कि प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं। फिर भी तटीय कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। उत्तर आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में 28-29 अगस्त को तेज हवाओं के साथ गरज-चमक की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 50-60 किमी प्रति घंटे तक झोंकों के साथ पहुंच सकती है।

मछुआरों के लिए भी समुद्र में जाने की मनाही जैसा अलर्ट

मौसम विभाग ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के कई हिस्सों में समुद्री परिस्थितियों को लेकर मछुआरों को चेतावनी दी है। बंगाल की खाड़ी में पश्चिम बंगाल, ओडिशा और बांग्लादेश के तटों के आसपास 29 अगस्त से 1 सितंबर के बीच मौसम खराब रहने की संभावना है। अंडमान सागर में भी तेज हवाओं और 50-70 किमी प्रति घंटे तक की थंडरस्क्वॉल की संभावना जताई गई है।

अगले कुछ दिन बेहद अहम

IMD के पूर्वानुमान से साफ है कि 28 अगस्त से 3 सितंबर तक देश के कई हिस्सों में मानसून सक्रिय रहेगा। सबसे ज्यादा चिंता ओडिशा की है, जहां 30 अगस्त को अत्यधिक भारी बारिश का खतरा है। वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में भी अलग-अलग दिनों में भारी बारिश हो सकती है। ऐसे में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह है।

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चीन ने पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश में चली बड़ी चाल, बंगाल की खाड़ी को लेकर उसकी ये योजना कान खड़े कर देगी

भारत के पूर्वी सीमा के आसपास पकड़ बनाने के लिए चीन पूरे दक्षिण एशिया में अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। पहले चीन ने पाकिस्तान में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में बड़ा निवेश किया था। अब उसने एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत वह म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश तक एक नया आर्थिक कॉरिडोर बनाना चाहता है।

हालांकि, यह प्रस्ताव सिर्फ एक सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्लान नहीं लगता है, बल्कि इसके पीछे रणनीतिक सोच भी है। इसका मकसद चीन के लिए समुद्री रास्तों तक आसान पहुंच बनाना है, खासकर बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) तक। फिलहाल, भारत के लिए इस संदेश को नजरअंदाज करना मुश्किल है। लेकिन यह कॉरिडोर अभी हकीकत से बहुत दूर है, और यह हिंद महासागर के आस-पास अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की बीजिंग की लगातार कोशिशों को दिखाता है।

बीजिंग ने भारत को छोड़कर एक पुराने विचार को फिर से शुरू किया

यह प्रस्ताव बांग्लादेशी प्रधानमंत्री तारिक रहमान की हालिया बीजिंग यात्रा के दौरान सामने आया। जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस विचार का समर्थन किया और इसे दोनों देशों के बीच व्यापक सहयोग का हिस्सा बताया।

तारिक रहमान के प्रवक्ता महदी अमीन के अनुसार, इस कॉरिडोर को आर्थिक विकास और लॉजिस्टिक्स (logistics) को बेहतर बनाने के एक साधन के रूप में पेश किया जा रहा है।

अमीन ने कहा, “बैठक के दौरान एक प्रस्ताव आया कि म्यांमार के रास्ते बांग्लादेश से चीन तक एक आर्थिक कॉरिडोर कैसे बनाया जा सकता है।” प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस प्रस्ताव का मकसद “बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का विस्तार करना, आर्थिक लेन-देन बढ़ाना और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन को और बेहतर बनाना” है।

असल में, यह प्रोजेक्ट लंबे समय से चर्चा में रहे बांग्लादेश-चीन-भारत-म्यांमार  (BCIM) कॉरिडोर को फिर से शुरू करता है, लेकिन इसमें एक बड़ा बदलाव है: भारत अब इसका हिस्सा नहीं है।

बता दें कि शुरुआती BCIM कॉरिडोर में चारों देशों को जोड़ने वाली सड़क और रेल कनेक्टिविटी की योजना थी। हालांकि, भारत ने सावधानी बरती और चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ में कभी शामिल नहीं हुआ; इसकी कुछ वजहें संप्रभुता से जुड़ी चिंताएं और बीजिंग की बढ़ती भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं थीं।

अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक

CPEC के नजरिए से देखने पर चीन की बड़ी रणनीति और साफ हो जाती है। दरअसल, बीजिंग ने पाकिस्तान के जरिए, ग्वादर पोर्ट के माध्यम से अरब सागर तक पहुंच हासिल की। हालांकि ​​इस प्रोजेक्ट की भारत लंबे समय से आलोचना करता रहा है क्योंकि यह गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है, जिसे भारत पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला इलाका मानता है।

वहीं, अब,बांग्लादेश-म्यांमार रूट से चीन को एक और रणनीतिक पहुंच मिल सकती है, जो इस बार भारत के पूर्वी समुद्री पड़ोस के ज्यादा करीब होगी। इससे बीजिंग को मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है, जो दुनिया के सबसे अहम और संवेदनशील शिपिंग चोकपॉइंट्स में से एक है।

बांग्लादेश की नजर बंदरगाह, व्यापार और चीनी निवेश पर

ढाका ने इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से एक आर्थिक अवसर के तौर पर पेश किया है। खबरों के मुताबिक, बातचीत मुख्य रूप से चट्टोग्राम बंदरगाह और मोंगला बंदरगाह के आस-पास बुनियादी ढांचे पर केंद्रित रही।

बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के प्रवक्ता मेहदी अमीन ने कहा, “हम इस बात पर काम करना चाहते हैं कि इस बंदरगाह [मोंगला बंदरगाह] को एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में कैसे विकसित किया जाए, जो न केवल बांग्लादेश बल्कि अन्य देशों के लिए भी काम आए।”

बांग्लादेश ने हाल के समय में चीनी समर्थित इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग की ओर भी रुख किया है। मोंगला के आसपास की जमीन, जिसे पहले 2015 के एक द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत समर्थित आर्थिक परियोजना के लिए रखा गया था, उसे 2025 में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने हटा दिया।

रहमान की यात्रा के दौरान, ढाका ने उस आर्थिक क्षेत्र को विकसित करने के लिए चीन की सरकारी कंपनी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।

‘द डेली स्टार’ के अनुसार, यह प्रस्तावित रूट चीन के कुनमिंग से शुरू होकर म्यांमार के मांडले तक जाएगा, फिर यह दो हिस्सों में बंटकर यांगून और क्याउकफ्यू पोर्ट तक पहुंचेगा, और आगे चलकर बांग्लादेश के चट्टोग्राम और कॉक्स बाजार से जुड़ेगा।

म्यांमार सबसे कमजोर कड़ी बना

इस प्रस्ताव को लेकर जितनी भी उम्मीदें हैं, उनमें सबसे बड़ी चुनौती म्यांमार है। यह प्रस्तावित कॉरिडोर ऐसे इलाकों से होकर गुजरेगा जो लंबे समय से गृहयुद्ध और अस्थिरता से प्रभावित हैं।

रखाइन राज्य (Rakhine State), जहां रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्याउकफ्यू (Kyaukphyu) डीप-सी पोर्ट स्थित है, वहां सेना और सशस्त्र समूहों के बीच भारी संघर्ष चल रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, वहां की कई जगहों पर सेना का नियंत्रण भी कमजोर पड़ चुका है। इस वजह से किसी बड़े ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को पूरी तरह लागू करना बेहद मुश्किल माना जा रहा है।

The Daily Star की रिपोर्ट के मुताबिक, म्यांमार में पहले से मौजूद चीनी निवेश भी गंभीर सुरक्षा जोखिमों का सामना कर रहा है, जिनमें इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में रुकावट और संपत्तियों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने जैसी समस्याएं शामिल हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो, जब तक म्यांमार के रास्ते एक सुरक्षित और स्थिर मार्ग नहीं बनता, यह पूरा कॉरिडोर फिलहाल सिर्फ एक सैद्धांतिक योजना ही बना रहेगा।

भारत इस प्रस्ताव को क्यों नजरअंदाज नहीं कर सकता

भारत के नजरिए से देखें तो इस योजना से तुरंत कोई बड़ा खतरा न भी हो, लेकिन लंबे समय में इसके रणनीतिक असर काफी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अगर चीन-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर पूरी तरह काम करने लगता है, तो इससे चीन की मौजूदगी बंगाल की खाड़ी के आसपास और मजबूत हो जाएगी। वह बंदरगाहों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और औद्योगिक ढांचे के जरिए इस पूरे क्षेत्र में अपनी पकड़ बढ़ा सकता है। इससे चीन का प्रभाव भारत के पड़ोसी क्षेत्र में और गहरा होगा और उसे हिंद महासागर (Indian Ocean) तक अधिक पहुंच मिल सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार सुबीर भौमिक ने Rediff में लिखा कि युन्नान स्थित थिंक टैंक से जुड़े चीनी विशेषज्ञों ने उन्हें बताया कि बीजिंग अपनी व्यापक समुद्री रणनीति के तहत चीन-म्यांमार आर्थिक कॉरिडोर को बांग्लादेश तक विस्तारित करना चाहता है।

उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम पर “दिल्ली और वाशिंगटन की नजर रहेगी और वे इससे खुश नहीं होंगे”।

अभी के लिए यह प्रोजेक्ट से ज्यादा एक संकेत है

फिलहाल चीन-म्यांमार-बांग्लादेश कॉरिडोर सिर्फ एक प्रस्ताव है, कोई पूरी तरह मंजूर किया गया प्रोजेक्ट नहीं। लेकिन इस स्तर पर भी, यह एक साफ संकेत देता है।

भारत के बेल्ट एंड रोड पहल से बाहर रहने और BCIM कॉरिडोर के लगभग खत्म हो जाने के बावजूद, चीन लगातार ऐसे वैकल्पिक रास्ते तलाश रहा है, जिनसे वह दक्षिण एशिया में अपना आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव बढ़ा सके।

चाहे यह कॉरिडोर आगे जाकर बने या न बने, बीजिंग की मंशा अब साफ होती जा रही है—हिंद महासागर तक पहुंच के लिए कई रास्ते तैयार करना और भारत के आसपास के क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना।

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