UP Panchayat Chunav 2026: यूपी पंचायत चुनाव पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, तीन महीने के भीतर इलेक्शन कराने के निर्देश

UP Panchayat Chunav 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने तीन महीने के भीतर यूपी पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की बात कही गई है। इस आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों और समयसीमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को तीन महीने के भीतर पूरा कराने की बात कही गई है। यह आदेश ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने और आगे की प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

निवर्तमान ग्राम प्रधानों की भूमिका पर भी निर्देश

कोर्ट ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने की बात भी कही है। इससे चुनाव होने तक ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज को जारी रखने की व्यवस्था प्रभावित होगी। हालांकि, प्रशासक के तौर पर उनकी शक्तियों और जिम्मेदारियों का सटीक दायरा आधिकारिक आदेश के विस्तृत डिटेल्स आने के बाद ही स्पष्ट होगा। कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसमें निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले को अवैध बताया गया था। इसका मतलब है कि अगले तीन महीने तक पंचायतों का कामकाज प्रशासकों के माध्यम से जारी रह सकता है।

चुनाव की तैयारियों पर रहेगी नजर

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभागों की ओर से पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर उठाए जाने वाले कदम अहम होंगे। चुनाव की तारीखों, अधिसूचना और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि तीन महीने के अंदर यूपी के पंचायत चुनाव हो जाने चाहिए। पहले कयास ये कगाए जा रहे थे कि विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव होगा। यह फैसला जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने करीब तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद सुनाया।

सरकार के आदेश को कोर्ट ने बताया वैध

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर यूपी सरकार की ओर से जारी शासनादेश पूरी तरह वैध है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि पंचायत निकायों के चुनाव निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे कराए जाएं। इस फैसले से पंचायत चुनाव की तैयारी और समयसीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अदालत ने प्रशासकों को चुनाव समाप्त होने तक कामकाज जारी रखने की व्यवस्था भी बरकरार रखी है।

OBC आयोग की प्रक्रिया से अलग होगी चुनाव की तैयारी?

हाई कोर्ट ने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग अपना काम बिना किसी बाधा के जारी रखेगा। लेकिन पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया आयोग की कार्यवाही पूरी होने पर निर्भर नहीं रहेगी। यानी आयोग की प्रक्रिया के कारण चुनाव को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव मौजूदा नियमों और व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे।

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चुनाव प्रक्रिया में 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन करना होगा। इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार के सामने तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा पूरी करने की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, चुनाव की तारीखों और मतदान के शेड्यूल को लेकर सरकार की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी।

दिल्ली, गुजरात और तेलंगाना के चीफ जस्टिस अब होंगे सुप्रीम कोर्ट में जज, केंद्र ने जारी किया तीनों की नियुक्ति का नोटिफिकेशन

नई दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय, गुजरात हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस जस्टिस सुनीता अग्रवाल और तेलंगाना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस जस्टिस अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में जज के तौर पर नियुक्त किया गया है। इस संबंध में सोमवार को केंद्र सरकार ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया। यह अधिसूचना न्याय विभाग की तरफ से जारी की गई थी।

राष्ट्रपति डॉ द्रौपदी मुर्मू ने भारत के संविधान के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए ये नियुक्तियां की हैं। इस कदम से शीर्ष अदालत और मजबूत होगा, जिसकी मंजूर संख्या 38 है। इनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा 28 सितंबर को हुई मीटिंग में पदोन्नति की सिफारिश के कुछ दिनों बाद हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रमुख भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत हैं। उन्होंने कॉलेजियम की बैठक में तीनों की पदोन्नति की सिफारिश की थी।

अभी सुप्रीम कोर्ट में 34 जजों की वर्किंग स्ट्रेंथ है, नए जजों के शपथ लेने के बाद इन नियुक्तियों से इसकी प्रभावी स्ट्रेंथ 37 हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया समेत जजों की मंजूरी वाली संख्या 38 है। सुप्रीम कोर्ट अमेंडमेंट एक्ट, 2026 के बाद हाल ही में मंजूरी वाली संख्या 34 से बढ़ाई गई थी।

नए नियुक्त जजों के बारे में

जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय : जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय जनवरी 2025 से दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहे हैं। इससे पहले वे बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं, और जुलाई 2023 में उन्होंने अपना पद संभाला था। जस्टिस उपाध्याय को 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में प्रमोट किया गया था और वे अगस्त 2013 में परमानेंट जज बने थे।

जस्टिस अपरेश कुमार सिंह : जस्टिस अपरेश कुमार सिंह झारखंड, त्रिपुरा और तेलंगाना से बहुत ज्यादा न्यायिक अनुभव लेकर आए हैं। उन्हें जनवरी 2012 में झारखंड हाई कोर्ट का जज प्रमोट किया गया था और जनवरी 2014 में उन्हें परमानेंट जज के तौर पर कन्फर्म किया गया था।

जस्टिस सुनीता अग्रवाल : सुनीता अग्रवाल सुप्रीम कोर्ट में काम करने वाली तीसरी महिला जज होंगी। उन्हें 2011 में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पदोन्नत किया गया था और 2013 में वह परमानेंट जज बन गईं। उन्होंने जुलाई 2023 में गुजरात हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। जस्टिस अग्रवाल ने बेंच में आने से पहले सिविल साइड में प्रैक्टिस की और 1990 में एडवोकेट के तौर पर एनरोल हुईं।

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अब घर बैठे चेक करें अपनी जमीन और मकान का लैंड यूज! DDA ने लॉन्च किया GIS-आधारित डिजिटल मैप

Land use of House in Delhi: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए जमीन और प्रॉपर्टी से जुड़ी जानकारी हासिल करना अब पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने ‘मास्टर प्लान फॉर दिल्ली-2047 (MPD-2047)’ के तहत तैयार लैंड यूज प्लान (Land Use Plan) को GIS आधारित इंटरएक्टिव डिजिटल मैप के रूप में उपलब्ध कराया है। इसके जरिए लोग घर बैठे किसी इलाके, जमीन या प्रॉपर्टी का निर्धारित लैंड यूज ऑनलाइन देख सकेंगे।

यह पहल दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर सेवाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से की गई है। अब सामान्य लैंड यूज संबंधी जानकारी के लिए लोगों को संबंधित सरकारी या स्थानीय निकाय कार्यालयों के चक्कर लगाने अथवा किसी तीसरे पक्ष पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी।

प्लॉट लेवल तक देख सकेंगे जमीन का Land Use

DDA की ओर से उपलब्ध कराए गए इस डिजिटल मैप में यूजर किसी खास इलाके, लोकेशन या प्रॉपर्टी को सर्च कर सकता है। मैप पर धीरे-धीरे Zoom करते हुए प्लॉट लेवल तक पहुंचा जा सकता है। इसके बाद संबंधित जमीन का निर्धारित Land Use देखा जा सकता है। पारंपरिक 2D नक्शों के मुकाबले यह डिजिटल मैप अधिक डिटेल्स और लोकेशन-स्पेसिफिक जानकारी उपलब्ध कराता है। इससे किसी प्रॉपर्टी के आसपास की जमीन का Land Use भी समझने में मदद मिलेगी।

9 प्रमुख Land Use कैटेगरी

DDA के इस लैंड यूज प्लान में दिल्ली की जमीन को नौ प्रमुख कैटेगरी में दिखाया गया है। इनमें शामिल हैं:-

  • Residential (आवासीय)
  • Commercial (व्यावसायिक)
  • Industrial (औद्योगिक)
  • Recreation (मनोरंजन)
  • Transport (परिवहन)
  • Utility (उपयोगिता सेवाएं)
  • Government (सरकारी)
  • Public and Semi-Public Facilities (सार्वजनिक एवं अर्ध-सार्वजनिक सुविधाएं)

    Agriculture & Water Body (कृषि एवं जल निकाय)

इन सभी कैटेगरी के लिए अलग-अलग कलर कोडिंग की गई है। इससे नक्शे पर किसी जमीन का निर्धारित उपयोग आसानी से पहचाना जा सकता है।

लैंड पूलिंग और TOD Zone की भी मिलेगी जानकारी

इस इंटरएक्टिव मैप में सिर्फ लैंड यूज की जानकारी ही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण प्लानिंग लेयर्स भी जोड़ी गई हैं। इनमें लैंड पूलिंग एरिया (Land Pooling Areas) और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन प्रमुख हैं। इसके अलावा डिजिटल मैप पर द्वारका सब-सिटी, रोहिणी प्रोजेक्ट लेआउट, PM-UDAY कॉलोनियां, DDA के पार्क और अन्य महत्वपूर्ण थीमैटिक लेयर्स भी उपलब्ध हैं।

MPD-2047 लेयर के जरिए दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तावित लैंड यूज को देखा जा सकता है। जबकि लैंड पूलिंग और TOD लेयर से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कौन से इलाके इन प्लानिंग फ्रेमवर्क के अंतर्गत आते हैं या प्रस्तावित हैं।

मैप पर जमीन की लंबाई-चौड़ाई भी माप सकेंगे

डिजिटल मैप में यूजर्स के लिए मेजरमेंट (Measurement) और ड्राइंग/स्केचिंग टूल्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। इनके जरिए किसी सड़क या प्लॉट की लंबाई, चौड़ाई अथवा दो स्थानों के बीच की दूरी को मैप पर मापा जा सकता है। यूजर अपनी जरूरत के अनुसार मैप पर मार्किंग या स्केच भी कर सकता है। यह सुविधा व्यक्तिगत संदर्भ, प्रारंभिक विश्लेषण और प्लानिंग के लिए उपयोगी हो सकती है।

लैंड यूज प्लान में समय के साथ किया जाएगा अपडेट

DDA के मुताबिक GIS आधारित लैंड यूज प्लान को इस तरह तैयार किया गया है कि नए डेटा उपलब्ध होने के साथ इसमें लगातार अपडेट किया जा सके। इससे दिल्ली में जमीन के इस्तेमाल और शहरी नियोजन से जुड़ी जानकारी को अधिक अपडेटेड और प्रासंगिक बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे दिल्ली के बदलते शहरी स्वरूप के अनुसार प्लानिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी तरीके से अपडेट करने में भी सहायता मिलेगी।

सरकारी एजेंसियों को भी फायदा

एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लैंड प्लान यूज से सिर्फ आम नागरिक ही नहीं, बल्कि शहरी योजनाकारों, आर्किटेक्ट्स, इंफ्रास्ट्रक्चर विशेषज्ञों, सरकारी विभागों और अन्य हितधारकों को भी फायदा होगा। इस जानकारी का इस्तेमाल शुरुआती प्लानिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और विकास से जुड़े आकलन में किया जा सकेगा। DDA का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, योजना संबंधी जानकारी तक पहुंच आसान होगी।

कैसे देख सकेंगे Land Use Plan?

DDA का GIS आधारित इंटरएक्टिव लैंड यूज प्लान उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर ‘Master Plan for Delhi-2047’ सेक्शन में उपलब्ध है। यहां जाकर यूजर किसी इलाके, लोकेशन या प्रॉपर्टी को सर्च कर सकता है और डिजिटल मैप पर उसका निर्धारित Land Use देख सकता है।

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DDA के मुताबिक इस पहल से दिल्ली के लोगों को जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी बुनियादी जानकारी आसानी से उपलब्ध होगी, नियमित जानकारी के लिए सरकारी कार्यालयों के भौतिक दौरे की जरूरत कम होगी और दिल्ली में अधिक पारदर्शी, सूचित और तकनीक आधारित शहरी नियोजन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।

कल का मौसम: 30 सितंबर को बंगाल की खाड़ी में 65 kmph स्पीड से हवाएं, पूर्वोत्तर-दक्षिण भारत के इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

Weather forecast for September 30: देश भर में मानसून के अंतिम पड़ाव और समुद्र में बन रही चक्रवाती हवाओं के असर से बुधवार 30 सितंबर को देश के कई हिस्सों में तूफानी मौसम रहने का अनुमान है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक पूर्वोत्तर भारत के राज्यों, पूरे कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में भारी बारिश की पूरी संभावना है। इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और म्यांमार-बांग्लादेश तटों से सटे इलाकों में 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने की गंभीर चेतावनी जारी की गई है।

पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण भारत में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार, 30 सितंबर को देश के दो प्रमुख क्षेत्रों पूर्वोत्तर और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मूसलाधार बारिश का दौर बना रहेगा। पूर्वोत्तर भारत की बात करें तो असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भारी बारिश होने की संभावना है। दक्षिण भारत की बात करें तो पूरे आंतरिक कर्नाटक (उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक), केरल व माहे, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में तेज बारिश होने के आसार हैं।

तमिलनाडु और रायलसीमा में 50 किमी/घंटे की रफ्तार से आंधी का अलर्ट

दक्षिण भारत के मैदानी और तटीय इलाकों में तेज हवाओं और बिजली चमकने का असर देखा जाएगा। रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी व कराइकल में अलग-अलग जगहों पर आकाशीय बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।

आंध्र प्रदेश, ओडिशा और कर्नाटक में बिजली चमकने और हवाओं का अनुमान

मध्य, पूर्व और दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी मौसमी हलचल बनी रहेगी। तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और ओडिशा में पर आकाशीय बिजली गिरने के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चलने का अनुमान है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा के साथ-साथ मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा और केरल व माहे में अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में दिन भर तेज सतही हवाएं चलती रहेंगी।

बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती मौसम: 65 kmph की गति से चलेंगी हवाएं

समुद्री इलाकों की बात करें तो बंगाल की खाड़ी और पड़ोसी तटीय क्षेत्रों में स्थिति काफी खतरनाक बनी हुई है। IMD के मुताबिक उत्तरी म्यांमार और बांग्लादेश के तटीय इलाकों से सटे उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य बंगाल की खाड़ी में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। इन हवाओं की गति बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे के खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है। समुद्र में तेज उथल-पुथल को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को इन इलाकों में समुद्र के भीतर न जाने की सख्त हिदायत दी है।

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निठारी कांड के आरोपी कोली का शव मिला

हरिद्वार। दिल्ली और एनसीआर सहित पूरे देश को दहला देने वाले निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला में उसकी चाय की दुकान में फांसी पर लटका मिला। बताया गया है कि वह पिछले कुछ महीनों से नाम बदलकर हरिद्वार में रह रहा था। शुरुआती जानकारी के आधार पर बताया जा रहा है कि आत्महत्या की है, हालांकि पुलिस अभी पूरे मामले की जांच कर रही है।

करीब 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में बरी होकर वह जेल से बाहर आया था। गौरतलब है कि दिल्ली से सटे नोएडा के निठारी में 2005-06 में बच्चों और महिलाओं के गायब होने की एक के बाद एक हुई कई घटनाओं के बाद उसका नाम सामने आया था। 29 दिसंबर 2006 को मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी के पीछे नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी। पंढेर की कोठी में ही कोली काम करता था।

इस घटना का खुलासा होने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच की और कोली के खिलाफ कई केस चले। कोली को निठारी से जुड़े 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी कर दिया। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी थी।

निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत, हरिद्वार में फांसी लगाकर दी जान

देशभर में बहुचर्चित रहे 2006 के निठारी सीरियल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कोली उत्तर हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में काफी समय से रह रहा था। वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

बताया जा रहा है कि, कोली की मौत सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में बरी होने और जेल से रिहा होने के एक साल से भी कम समय बाद हुई है।

क्या है पूरा मामला?

कोली को नोएडा के निठारी में 2005 और 2006 के बीच महिलाओं और बच्चों की मौत और उनके लापता होने से जुड़े कई मामलों में दोषी ठहराया गया था। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2023 में उसे 12 मामलों में बरी कर दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में आखिरी लंबित मामले में उसकी दोषसिद्धि को पलट दिया।

नवंबर 2025 में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने किशोरी रिम्पा हलदर की हत्या के मामले में कोली की क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी दे दी। जिसके तहत कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखने वाले अपने पहले के फैसले को वापस ले लिया और आदेश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे रिहा कर दिया जाए।

बता दें कि यह फैसला तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में 12 अन्य मामलों में कोली और उसके पूर्व नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंढेर को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा था।

वहीं, आखिरी मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा कोली के कबूलनामे, कथित बरामदगी और फोरेंसिक सबूतों पर किए गए दावों की बारीकी से जांच की। कोर्ट ने जांच और उन सबूतों में कई कमियां पाईं, जिनके आधार पर कोली को दोषी ठहराया गया था।

जानकारी के मुताबिक, निठारी हत्याकांड का पता दिसंबर 2006 में चला, जब निठारी में पंढेर के घर के पीछे एक नाले के पास इंसानी अवशेष मिले।

जांच के दौरान कोली (जो पंढेर के यहां घरेलू काम करता था) और पंढेर को गिरफ्तार किया गया। यह मामला इलाके से महिलाओं और बच्चों के गायब होने और उनकी कथित हत्याओं से जुड़ा था।

इसके बाद कोली को कई मामलों में दोषी ठहराया गया, जिनमें से कुछ मामलों में उसे मौत की सजा सुनाई गई। पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में ऊपरी अदालतों में चली कार्यवाही में उसे बरी कर दिया गया।

जुलाई 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ CBI और पीड़ितों के परिवारों द्वारा दायर 14 अपीलें खारिज कर दीं।

उस समय सुनवाई के दौरान, तत्कालीन CJI गवाई ने इस मामले पर मीडिया के बहुत ज़्यादा ध्यान दिए जाने का जिक्र किया। गवाई ने कहा, “मीडिया का काफ़ी दबाव वगैरह रहा होगा,” और सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला “मीडिया ट्रायल” से प्रभावित था।

उस समय सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने इस मामले को मिली जबरदस्त मीडिया कवरेज का भी जिक्र किया। गवाई ने कहा, “मीडिया का काफी दबाव वगैरह रहा होगा,” और सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट का फैसला “मीडिया ट्रायल” से प्रभावित था।

वहीं, उस फैसले के बाद भी कोली जेल में ही रहा क्योंकि रिम्पा हलदर मामले में उसे मिली उम्रकैद की सजा अभी भी लागू थी। हालांकि, नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसकी रिहाई में बची आखिरी कानूनी अड़चन भी दूर हो गई।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद कोली को रिहा कर दिया गया। जेल से रिहाई के कुछ महीनों बाद अब हरिद्वार से उसकी कथित मौत की खबर सामने आई है।

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Hathras Victim Family Relocation: हाथरस पीड़िता के परिवार को 3 महीने में नोएडा या गाजियाबाद करें शिफ्ट; हाईकोर्ट का UP सरकार को निर्देश

Hathras Victim Family Relocation: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने हाथरस दुष्कर्म मामले की पीड़िता के परिवार के पुनर्वास को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकार के 22 फरवरी, 2025 के फैसले को रद्द करते हुए उसे तीन महीने के भीतर पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में बसाने का निर्देश दिया। जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस जसप्रीत सिंह की पीठ ने कहा कि हाई कोर्ट ने पहले राज्य सरकार को पीड़िता के परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में बसाने के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया था। लेकिन सरकार ने इस अनुरोध पर समुचित ध्यान नहीं दिया।

पीठ ने कहा कि सरकार ने अदालत के निर्देशों की अनदेखी करते हुए अपने फैसले में परिवार को पुनर्वास के लिए कासगंज, एटा और अलीगढ़ में से किसी एक स्थान को चुनने का विकल्प दिया था। सोमवार को दिए गए आदेश में पीठ ने कहा कि 22 फरवरी, 2025 के फैसले में सरकार ने गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वास के परिवार के अनुरोध का कोई उल्लेख नहीं किया था। इसलिए इसे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया फैसला नहीं माना जा सकता।

NCR में बसाने की मांग

पीठ ने कहा कि इस मामले में राज्य की ओर से अनावश्यक विरोध दिखाई देता है। उसके रवैये से परिवार के इस आरोप को बल मिलता है कि सरकार इस मामले को अपने खिलाफ मुकदमे की तरह देख रही है। पीड़िता के परिवार की ओर से पेश वकील महमूद प्राचा ने कहा कि कासगंज, एटा और अलीगढ़ हाथरस के करीब हैं। इससे परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा होती है। उन्होंने कहा कि इन जिलों में परिवार का कोई रिश्तेदार भी नहीं रहता है।

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत परिवार के रिश्तेदार गाजियाबाद और नोएडा में रहते हैं, जहां बसने पर वे बिना किसी भय के सामान्य जीवन जी सकेंगे। अदालत ने निर्देश दिया कि पुनर्वास पूरा होने के बाद परिवार के एक सदस्य को रोजगार भी दिया जाए, जैसा कि 26 जुलाई, 2022 के आदेश में निर्देश दिया गया था।

मुख्य सचिव को अहम निर्देश

पीठ ने यूपी के अपर मुख्य सचिव (गृह) को अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि आदेश का पालन नहीं होने की स्थिति में उन्हें 30 नवंबर, 2026 को व्यक्तिगत रूप से उसके समक्ष पेश होना होगा।

क्या है केस?

उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में 14 सितंबर, 2020 को एक दलित युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म की कथित घटना सामने आई थी। घटना के करीब दो सप्ताह बाद दिल्ली के एक अस्पताल में युवती की मौत हो गई थी।

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मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए अपने बयान में पीड़िता ने चार आरोपियों पर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। यह भी आरोप लगाया गया था कि पुलिस ने परिवार की सहमति के बिना रात में पीड़िता का जबरन अंतिम संस्कार कर दिया था। हालांकि, पुलिस ने इस दावे को गलत बताया था।

यूपी में लड़कियों को स्कूल में हिजाब पहनकर आने की अनुमति नहीं; इलाहाबाद HC ने खारिज की मुस्लिम छात्रा की याचिका

Hijab in Islam: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने स्कूल में स्कार्फ या हिजाब पहनने की अनुमति देने का स्कूल अधिकारियों को निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी है। प्रयागराज के अतरसुइया थाना अंतर्गत टैगोर पब्लिक स्कूल की छात्रा सुकैना रिजवी ने अपनी मां के जरिए यह याचिका दायर की थी। रिजवी ने इस स्कूल से 10वीं की परीक्षा पास की है। वह इसी स्कूल में 11वीं कक्षा में एडमिशन ले रही है। अदालत ने कहा कि दूसरी हाई कोर्ट्स की भी यही राय रही है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ल की पीठ ने कहा, “हमने याचिकाकर्ता से जुड़ी विभिन्न कक्षाओं की तस्वीरें देखी हैं और केवल उसे छोड़कर किसी भी छात्रा ने हिजाब नहीं पहना है। यहां तक कि जिस धार्मिक समुदाय से वह आती है, उस समुदाय की छात्राओं ने भी हिजाब नहीं पहना है।”

अदालत ने कहा, “जब कभी भी यह मुद्दा उठा है, उच्च न्यायालयों का एकमत रहा है कि हिजाब पहनना इस्लामिक आस्था का आवश्यक हिस्सा नहीं है। एक महिला के हिजाब नहीं पहनने से आस्था खतरे में नहीं पड़ जाएगी।” हाई कोर्ट ने 21 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि याचिका में यह दावा कि हिजाब पहनना एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, केवल एक दावा भर है।”

स्टूडेंट ने स्कूल प्रशासन से यूनिफॉर्म के अलावा सिर पर स्कार्फ पहनने की इजाजत देने की मांग की थी। याचिका में कहा गया था कि सिर पर स्कार्फ पहनना इस्लामिक परंपरा का एक जरूरी हिस्सा है। छात्रा उसी स्कूल में छठी कक्षा से ही इसे पहनती आ रही हैं।

‘हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की जरूरी प्रथा नहीं’

हाई कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि हेडस्कार्फ पहनना इस्लाम की एक जरूरी प्रथा है। कोर्ट ने आगे कहा, “जहां भी यह मुद्दा उठा है, हाई कोर्ट्स की राय एक रही है कि महिलाओं के लिए हेडस्कार्फ पहनना इस्लामी आस्था का कोई जरूरी हिस्सा नहीं है, जिसके बिना आस्था खतरे में पड़ जाएगी।” अपने फैसले में कोर्ट ने यह भी कहा, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि रिट याचिका में यह दावा कि हेडस्कार्फ पहनना एक जरूरी धार्मिक प्रथा है, महज एक दावा भर है।”

कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जब तक किसी स्कूल का यूनिफॉर्म कोड निष्पक्ष और बिना भेदभाव का है। उसे संस्थान में अनुशासन और समानता बनाए रखने के लिए लागू किया गया है, तब तक संस्थान को अपने आंतरिक अनुशासन और ड्रेस कोड को लागू करने की पूरी आजादी है।

हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी बिना सरकारी मदद वाले प्राइवेट शिक्षण संस्थान को अपने परिसर में एक जैसा ड्रेस कोड लागू करने का पूरा अधिकार है। कोर्ट ने माना कि तय स्कूल यूनिफॉर्म का पालन करना जरूरी है। साथ ही व्यक्तिगत आधार पर उसमें हेडस्कार्फ जोड़ने की अनुमति मांगने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

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कोर्ट ने साफ किया कि अगर यूनिफॉर्म सभी छात्रों पर समान रूप से लागू होती है। व्यक्तिगत छात्रों को अपनी पसंद के आधार पर तय यूनिफ़ॉर्म में बदलाव करने या उसे न पहनने की अनुमति देने से यूनिफॉर्म का मूल मकसद ही खत्म हो जाएगा। इससे स्कूल के अनुशासन को तय करने का अधिकार संस्थान के हाथ से निकलकर व्यक्तिगत छात्रों के हाथ में चला जाएगा।