Yasin Malik wife: ‘8 साल से आवाज नहीं सुनी…’; तिहाड़ जेल में बंद यासीन मलिक अपनी पाकिस्तानी पत्नी को देगा तलाक, खुद के लिए की फांसी की मांग

Yasin Malik wife Mushaal Mullick: राजधानी दिल्ली के तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कश्मीरी अलगाववादी संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के चेयरमैन यासीन मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल मलिक से शादी खत्म करने की इच्छा जाहिर की है। यासीन मलिक ने जम्मू की टाडा (TADA) कोर्ट में एक 25 पन्नों का हलफनामा दायर किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें उसने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक को तलाक देने और सरला भट्ट हत्याकांड में केस लड़े बिना खुद के लिए फांसी की मांग की है।

पत्नी-बेटी का किया जिक्र

मलिक ने इस मर्डर केस की सुनवाई के दौरान जम्मू की स्पेशल TADA/POTA कोर्ट में 25 पेज का पर्सनल हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करने का अनुरोध किया है। हमारे सहयोगी News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, हलफनामे में उसने अपनी मां, पत्नी और 13 साल की बेटी रजिया सुल्ताना का जिक्र किया है। इसमें उसने परिवार से लंबे समय तक अलग रहने के बारे में लिखा।

‘8 साल से आवाज नहीं सुनी…’

रिपोर्ट के मुताबिक, मलिक ने हलफनामे में यह भी कहा कि उसने पिछले आठ वर्षों से अपनी पत्नी की आवाज तक नहीं सुनी है। उसका दावा है कि जेल में रहने के दौरान उसे पत्नी और बेटी से नियमित फोन पर बातचीत या सामान्य वीडियो कॉल की सुविधा नहीं मिल सकी। मलिक के मुताबिक, जेल में रहने के दौरान उनके परिवार से बातचीत सीमित और अनिश्चित रही है। उसने इस लंबे अलगाव की वजह अपनी जेल की सज़ा और बातचीत पर लगी पाबंदियों को बताया।

पत्नी से कहा- अपनी जिंदगी में आगे बढ़ो

यासीन मलिक ने अपनी पत्नी मुशाल से कहा कि वह अपनी बाकी जिंदगी उसका इंतजार करते हुए या उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता में न बिताएं। उसने उन्हें जिंदगी में नया अध्याय शुरू करने की बात कही है। मलिक ने लिखा कि उसका फैसला किसी नाराजगी या दुश्मनी की वजह से नहीं है। वह अब भी अपनी पत्नी का सम्मान करता है। मलिक ने यह भी कहा कि उसने मुशाल के साथ बिताए वैवाहिक वर्षों का अफसोस नहीं है। दोनों के बीच दूरी के लिए उसने उन परिस्थितियों को जिम्मेदार बताया, जो उसके कंट्रोल से बाहर थीं।

बेटी का बचपन मिस करने का भी जिक्र

हलफनामे में मलिक ने अपनी बेटी के बचपन से दूर रहने का भी जिक्र किया है। उसने कहा कि लंबे समय तक जेल में रहने और परिवार से अलगाव के कारण वह अपने बच्चों के बचपन में उनके साथ नहीं रह सका। उसने लिखा कि उसके बच्चे माता-पिता की सामान्य मौजूदगी और मार्गदर्शन के बिना बड़े हुए। परिवार को उम्मीद थी कि वह किसी दिन वापस घर लौटेंगे। लेकिन बाद में उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया। मलिक ने यह भी माना कि उनकी गिरफ्तारी और लंबे कारावास का उनकी पत्नी और पूरे परिवार की निजी जिंदगी पर गहरा असर पड़ा है।

बेटी से दादी के साथ रहने की अपील

अपनी बेटी रजिया सुल्ताना को संबोधित करते हुए मलिक ने उससे अपनी दादी के करीब रहने की अपील की है। उसने बेटी से कहा कि वह अपनी दादी से हर दिन कम से कम पांच मिनट फोन पर बात करे, ताकि परिवार से दूर रहने के बावजूद उनकी मां को अपनी पोती का स्नेह और साथ मिलता रहे। मलिक ने कहा कि उसका हलफनामा किसी से सहानुभूति या दया हासिल करने के लिए नहीं है, बल्कि यह उनकी अंतरात्मा की आवाज और परिवार के लिए एक संदेश है।

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आतंकी फंडिंग मामले में उम्रकैद की काट रहा सजा

यासीन मलिक को साल 2022 में दिल्ली की स्पेशल NIA कोर्ट ने आतंकी फंडिंग मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। मलिक और उसके नेतृत्व वाले JKLF पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और हिंसा से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। कश्मीर में उग्रवाद के दौर में हिंदूओं के खिलाफ टारगेटेड हिंसा और हत्याओं की घटनाएं भी हुई थीं। इनमें कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन से जुड़ी घटनाएं भी शामिल थीं। इन सभी मामलों में मलिक मुख्य रूप से शामिल था।

आतंकी पम्मा की गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को धमकी:तूने 40 गोलियां चलाईं, हम 4 हजार चलाएंगे, मार-मार के छन्नी बना देंगे; ऑडियो लीक से गुस्साया

ब्रिटेन(UK) में बैठे खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पम्मा ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ को धमकी दी है। पम्मा ने कहा कि बहाने से बात कर गोल्डी ने कॉल रिकॉर्डिंग लीक कर दी। कनाडा में हरदीप निज्जर को मरवाकर अच्छा नहीं किया। गोल्डी बराड़ एजेंसियों का बंदा है। पम्मा ने कहा कि गोल्डी बराड़ ने 40 गोलियों की बात की है, हम 4 हजार चलाएंगे और तेरे पूरे शरीर को छन्नी बना देंगे। तुझे निज्जर के कत्ल का हिसाब चुकाना पड़ेगा। गैंगस्टर गोल्डी बराड़ ने लॉरेंस के साथ मिलकर पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला का कत्ल कराया था। वहीं परमजीत सिंह पम्मा को जुलाई 2020 में भारतीय गृह मंत्रालय ने UAPA के तहत आतंकी घोषित किया है। वह NIA की मोस्ट वांटेड सूची में है। NIA के अनुसार उसका संबंध Khalistan Tiger Force (KTF) से रहा है। हरदीप निज्जर भी इसी संगठन से जुड़ा था। इससे पहले सिख फॉर जस्टिस (SFJ) का आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू भी गोल्डी बराड़ को धमका चुका है। पन्नू ने बदला लेने की धमकी देते हुए कहा था कि गोल्डी FBI, कनाडाई या अमेरिकी अदालतों से बच सकता है लेकिन ‘खालसा न्याय’ से नहीं बच पाएगा। आतंकी पम्मा ने गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के लिए क्या-क्या कहा… जिस रिकॉर्डिंग पर पम्मा भड़का, उसमें गोल्डी बराड़ ने क्या कहा था
जिस रिकॉर्डिंग को लेकर पम्मा ने बयान जारी किया, उसमें गोल्डी बराड़ ने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जिम्मेदारी लेने की बात कही थी। बराड़ ने उसे ‘शहीद’ का दर्जा दिए जाने पर आपत्ति जताई। उसने दावा किया कि निज्जर ऐसे लोगों को समर्थन देता था, जो युवाओं को ड्रग्स के कारोबार में धकेलते और उन्हें ब्लैकमेल कर मुखबिर के तौर पर इस्तेमाल करते थे। बराड़ ने निज्जर पर हथियारों की तस्करी से जुड़े लोगों को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। बातचीत में उसने कहा कि इन्हीं वजहों से उसकी टीम ने निज्जर को निशाना बनाया। ************ ये खबरें भी पढ़ें: निज्जर हत्याकांड में 2 पंजाबी गैंगस्टर आमने-सामने: अर्श डल्ला बोला- गोल्डी बराड़ का दावा झूठा, इसने सिद्धू मूसेवाला को झूठ बोलकर मारा गैंगस्टर गोल्डी बराड़ बोला- हरदीप निज्जर को मैंने मरवाया:मेरे भाइयों को मरवाने वाले इसकी कोठी में रहते थे; पहले भारतीय एजेंसियों पर आरोप लगे थे आतंकी की गोल्डी बराड़ को धमकी- गोली माथे पर लगेगी:कनाडा-अमेरिका की अदालतों से बचोगे, खालसाई इंसाफ से नहीं; निज्जर हत्याकांड पर आमने-सामने

पश्चिमी यूपी में ‘पीडीए’ की नई बिसात, जाट बनाम जाटव-गुर्जर की सियासी गोलबंदी

पश्चिमी यूपी में ‘पीडीए’ की नई बिसात, जाट बनाम जाटव-गुर्जर की सियासी गोलबंदी

Akhilesh Yadav

मेरठ की घटना को अखिलेश यादव का राजनीतिक मंच बनाना महज पुलिस कार्रवाई का सवाल नहीं, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बदलते जातीय समीकरणों को साधने की कोशिश है। जाटों के बीच ‘चवन्नी’ विवाद से पैदा हुई नाराजगी के बीच सपा अब जाटव और गुर्जर समुदाय को अपने पीडीए प्लस के पाले में खड़ा करने की कवायद में लगी है। ALSO READ: शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से सिर्फ चुनावी आंकड़ों का खेल नहीं रही, बल्कि जातीय अस्मिता, सामाजिक वर्चस्व और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बीच संतुलन साधने की कवायद रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यही पुराना मैदान एक बार फिर नए किरदारों और नए समीकरणों के साथ अपनी बिसात बिछाता नजर आ रहा है। जाट, मुस्लिम, दलित, गुर्जर और सवर्ण मतदाताओं के बीच बनते-बिगड़ते रिश्ते यह तय करेंगे कि पश्चिमी यूपी में 2027 की अगली पटकथा कौन लिखेगा।

 

अखिलेश यादव द्वारा ललिता मर्डर केस में न्याय की मांग कर रहें दो नेताओं को सामने लाकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह वहीं नेता है जिन्होंने मेरठ एस एस पी अविनाश पांडे पर उनकी टीम पर बर्बरता से मारपीट का आरोप लगाया है। इस प्रेसवार्ता व्यापक राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हालांकि पुलिस का अपना पक्ष है और दोनों आरोपियों के आपराधिक मुकदमों का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा है। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पुलिस के खिलाफ तथ्यहीन और भ्रामक आरोप लगाए हैं। लेकिन राजनीति में कई बार घटना से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका बनाया गया नैरेटिव होता है। अखिलेश ने इसी नैरेटिव को जातीय पहचान और पुलिस उत्पीड़न के सवाल से जोड़ने की कोशिश की है।

 

यहां सपा की रणनीति अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई देती है, जाटव और गुर्जर समाज को यह संदेश देना कि सत्ता और पुलिस व्यवस्था के कथित अन्याय के खिलाफ खड़ा होने के लिए उनके पास एक राजनीतिक मंच मौजूद है। यानी किसी एक घटना को व्यापक सामाजिक असुरक्षा के प्रतीक में बदलना और फिर उसे ‘पीडीए’ की राजनीति से जोड़ देना।

 

पश्चिमी यूपी में यह प्रयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां दलित राजनीति का अर्थ केवल दलित वोट नहीं है। जाटव मतदाता लंबे समय से बहुजन राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रहा है, जबकि गुर्जर समुदाय भी कई विधानसभा क्षेत्रों में निर्णायक प्रभाव रखता है। मुस्लिम मतदाताओं के साथ इन समूहों का संभावित मेल सपा के लिए एक ऐसा सामाजिक गठजोड़ बना सकता है, जो जाट-केंद्रित राजनीति के मुकाबले नया संतुलन खड़ा करे।

 

लेकिन सपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती जाट राजनीति है। भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन पश्चिमी यूपी में जाट मतदाताओं के लिए वर्तमान में फेवीकोल का जोड़ है। जयंत चौधरी इस सामाजिक आधार को अपनी सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी मानते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव और जयंत के बीच ‘चवन्नी’ विवाद महज दो नेताओं की व्यक्तिगत राजनीतिक तकरार नहीं रह गया है। इसे जाट सम्मान और राजनीतिक प्रतिबिंब से जोड़कर पेश किया जा रहा है। ALSO READ: लखनऊ के विकास में मुख्यमंत्री योगी का सबसे बड़ा सहयोग : राजनाथ सिंह

 

यही वह बिंदु है जहां पश्चिमी यूपी की राजनीति दिलचस्प हो जाती है। सपा अगर जाटों के एक हिस्से को खोने की आशंका महसूस कर रही है, तो उसका विकल्प जाटव, गुर्जर, मुस्लिम और अन्य पिछड़े समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करना है। दूसरी तरफ भाजपा-रालोद गठबंधन के लिए चुनौती यह है कि वह जाट आधार को बनाए रखते हुए मुस्लिम, गुर्जर, दलित और गैर-यादव पिछड़े मतदाताओं के बीच भी अपनी ग्राह्यता (उपयुक्तता) बढ़ाए।

 

दरअसल, पश्चिमी यूपी में 2027 का चुनाव केवल भाजपा बनाम सपा या गठबंधन बनाम विपक्ष की लड़ाई नहीं होगा। यह उस पुराने सामाजिक समीकरण के पुनर्गठन का चुनाव भी हो सकता है, जिसने दशकों तक उत्तर प्रदेश की राजनीति को दिशा दी है।

 

कांग्रेस का इतिहास इस बदलाव को समझने की एक महत्वपूर्ण कुंजी है। एक समय मुस्लिम, दलित और ब्राह्मण उसके मजबूत सामाजिक स्तंभ थे। मंडल-कमंडल की राजनीति, बहुजन आंदोलन और क्षेत्रीय दलों के उभार के साथ ये सामाजिक आधार अलग-अलग राजनीतिक खेमों में बंटते चले गए। दलितों का बड़ा हिस्सा बसपा के साथ गया, मुस्लिम मतदाता सपा की तरफ खिसका, ब्राह्मणों और अन्य सवर्णों का बड़ा हिस्सा भाजपा के साथ जुड़ा और पिछड़े वर्गों की राजनीति भी अलग-अलग क्षेत्रीय दलों में बंट गई। कांग्रेस का क्षरण इसी सामाजिक गठजोड़ के टूटने की कहानी है।

 

आज अखिलेश यादव उसी इतिहास को उलटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बदले हुए सामाजिक संदर्भ में। ‘पीडीए’ इसी कोशिश का राजनीतिक नाम है। पश्चिमी यूपी में इसका ‘प्लस’ संस्करण जाटव, गुर्जर, मुस्लिम और अन्य पिछड़े समूहों को जोड़कर तैयार करने की कोशिश है।

 

मगर सवाल यह है कि क्या एक घटना के जरिए जातीय अस्मिता को राजनीतिक गोलबंदी में बदला जा सकता है? और क्या जाटों के बीच पैदा हुई नाराजगी की भरपाई जाटव-गुर्जर-मुस्लिम समीकरण से संभव होगी?
 

2027 की पश्चिमी यूपी की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली

अखिलेश के लिए चुनौती केवल वोट जोड़ने की नहीं, बल्कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच ऐसा विश्वास पैदा करने की है कि उनका ‘पीडीए’ केवल चुनावी नारा नहीं, सत्ता में हिस्सेदारी का वास्तविक मॉडल है। जयंत चौधरी के लिए चुनौती जाट अस्मिता को भाजपा गठबंधन की राजनीति से जोड़कर रखना है। भाजपा के लिए चुनौती इन दोनों के बीच बनने वाले किसी भी नए सामाजिक समीकरण को प्रभावी होने से रोकना है।

 

इसलिए मेरठ की घटना के बाद अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस को केवल एक पुलिस विवाद के रूप में देखना पश्चिमी यूपी की मौजूदा राजनीति को छोटा करके देखना होगा। इसके पीछे असली लड़ाई नैरेटिव की है—कौन पीड़ित की आवाज बनेगा, कौन जातीय सम्मान का प्रतिनिधि बनेगा और कौन अलग-अलग सामाजिक समूहों को एक चुनावी गठजोड़ में बदल पाएगा।

 

एक बात और समझना जरूरी है। पश्चिमी उत्तरप्रदेश में जाट मतदाताओं ने बीजेपी से गलबहियां कर ली थीं। मुजफ्फरनगर और बागपत में अजित सिंह और जयंत चौधरी की कालांतर में हुई पराजय इसका स्पष्ट प्रमाण हैं। ऐसे में बीजेपी से हाथ मिलाकर सत्ता सुख भोगना जयंत को हितकर लगा और वे अखिलेश का साथ छोड़कर बीजेपी के कॉर्पोरेट का हिस्सा बन गए। जब से चवन्नी पलटी तब से आरएलडी लगातार कमजोर ही हुई है। आरएलडी के अनेक लॉयल नेता उनका साथ छोड़ चुके हैं। यहां यह भी समझना जरूरी है कि समाजवादी पार्टी का जाटों के बीच जनाधार नगण्य है।

सिर्फ स्थानीय स्तर पर किसी प्रभावशाली नेता को सामने रख सोशल इंजीनियरिंग कर अखिलेश यादव को कुछ प्राप्ति हो सकती है। इसलिए यह कहना कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अखिलेश के पास खोने के लिए अपना कुछ नहीं है लेकिन कुछ जिलें ऐसे हैं जिन्हें अखिलेश से संभल की तर्ज पर ही कुछ छीना जा सकता है, वरना इंडिया गठबंधन वहां उन्नीस-बीस  नहीं बल्कि 19-25 है।

अगर अखिलेश का दांव चल गया तो पश्चिमी यूपी में 2027 की लड़ाई दिलचस्प होगी! यह इस पर भी निर्भर होगा कि बीजेपी को अब तक अजेय बनाए रखने वाला ओबीसी किस करवट बैठता है! कांग्रेस के साथ होने पर इंडिया गठबंधन कितने प्रतिशत जाटव वोटों को अपने पाले में खींच पाता है! गुर्जरों का रुख क्या रहता है? ओवैसी कितने फीसदी वोट काटकर बीजेपी की राह को सुगम बना पाते हैं या नहीं?

दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड: 47KM तक बस में नाबालिग के साथ होती रही दरिंदगी

दिल्ली में फिर निर्भया जैसा कांड: 47KM तक बस में नाबालिग के साथ होती रही दरिंदगी

crime news

राजधानी दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में एक बार फिर मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, जिसने छह साल पुरानी ‘निर्भया’ कांड की खौफनाक यादें ताजा कर दी हैं। 47 किलोमीटर लंबे सफर के दौरान एक चलती हुई बस में ग्यारहवीं कक्षा की नाबालिग छात्रा के साथ हैवानियत की गई। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों (ड्राइवर और कंडक्टर) को तिमारपुर बस पार्किंग से गिरफ्तार कर लिया है। ALSO READ: शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

 

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले की रहने वाली यह छात्रा 4 अगस्त को घर में किसी बात से नाराज होकर बिना बताए निकल गई थी। वह नोएडा में रहने वाले अपने चचेरे भाई के पास जा रही थी। भारी बारिश और रात के अंधेरे के कारण वह अपनी सही जगह पर उतरने के बजाय परी चौक पर उतर गई।

 

 वहां से गुजर रही एक खाली स्लीपर बस को देखकर उसने रुकने का इशारा किया। बस के कंडक्टर ने उसे आश्वस्त किया कि वह उसे नोएडा सेक्टर-63 उतार देगा। लेकिन बस में चढ़ने के कुछ ही देर बाद कंडक्टर और ड्राइवर ने अपनी घिनौनी करतूत शुरू कर दी। विरोध करने पर आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी और चलती बस में उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी देर रात उसे कश्मीरी गेट बस अड्डे के पास रिंग रोड पर छोड़कर फरार हो गए।

 

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस चेकिंग पर उठे गंभीर सवाल

 

47 किलोमीटर का लंबा रास्ता: परी चौक से कश्मीरी गेट तक के इस सफर में बस ने लगभग 47 किलोमीटर की दूरी तय की, लेकिन इस बीच उन्हें कहीं भी पुलिस बैरिकेडिंग या चेकिंग का सामना नहीं करना पड़ा।

 

काले पर्दे और सुनियोजित साजिश: बस में गहरे रंग के पर्दे लगे हुए थे, जिसके कारण बाहर से गुजर रहे किसी भी राहगीर को अंदर चल रही इस दरिंदगी का अहसास नहीं हो सका।

 

वर्कशॉप जा रही थी बस: पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी बस खराब होने के बाद उसे सूरजपुर की वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए ले गए थे और फिर खाली बस को तिमारपुर ला रहे थे, तभी रास्ते में छात्रा उन्हें मिल गई। ALSO READ: राहुल गांधी की बढ़ीं मुश्किलें, उत्तराखंड में FIR दर्ज, जातिवादी टिप्पणी का लगा आरोप

 

सीसीटीवी फुटेज की मदद से आरोपी गिरफ्तार

घायल अवस्था में पीड़िता ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और आपबीती बताई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाल बिछाया और दोनों आरोपियों को तिमारपुर से दबोच लिया। बस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। साथ ही, परिजनों को तुरंत दिल्ली बुलाकर काउंसलिंग के बाद पीड़िता को सुरक्षित उनके हवाले कर दिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर बसों के नियमों और सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

शामली में पुलिस मुठभेड़, अंकित बालियान हत्याकांड के दो शूटर ढेर

shamli encounter

Shamli Encounter: उत्तर प्रदेश के शामली में सोमवार तड़के पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दो बदमाश मारे गए। पुलिस के मुताबिक, दोनों बदमाश अंकित बालियान हत्याकांड में शामिल शूटर थे और उनकी गिरफ्तारी पर 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित था।

 

शामली के कोतवाली क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई की जानकारी देते हुए एसपी एनपी सिंह ने बताया कि पुलिस को सुबह करीब चार बजे सूचना मिली थी कि अंकित बालियान हत्याकांड में शामिल दो शूटर शामली की ओर आ रहे हैं। सूचना मिलते ही जिले के सभी संबंधित थानों की पुलिस को अलर्ट कर मौके पर भेजा गया।

 

पुलिस के अनुसार, बदमाशों ने पुलिस को चकमा देने की कोशिश की और मन्ना माजरा की ओर भागने लगे। इसी दौरान होटल राजमहल के पास उन्होंने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। बदमाशों की गोलीबारी में पुलिस की एक गाड़ी को भी गोली लगी, जबकि दो पुलिसकर्मी घायल हो गए।

 

इसके बाद पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए फायरिंग की, जिसमें दोनों बदमाशों को गोली लगी। पुलिस टीम ने दोनों को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृत बदमाशों की पहचान सुमित पुत्र धर्मपाल और मोहित के रूप में हुई है। दोनों हरियाणा के सोनीपत जिले के राझड़ा गांव के निवासी बताए गए हैं।

 

मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और जांच शुरू कर दी है। मौके पर एसपी एनपी सिंह समेत पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं। पुलिस अब दोनों बदमाशों के आपराधिक रिकॉर्ड और अंकित बालियान हत्याकांड में उनकी भूमिका से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

Gurpreet Singh Shot Dead: कौन थे गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी? अपनी ही सरकार में AAP नेता की सरेआम हत्या

Gurpreet Singh Shot Dead: पंजाब के फिरोजपुर में आम आदमी पार्टी (AAP) के एक सीनियर नेता गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने रविवार (30 अगस्त) को बताया कि हमलावरों ने उनके बाइक का काफी देर तक पीछा किया और फिर उनपर तोबड़तोड़ फायरिंग की। यह हत्याकांड रविवार (29 अगस्त) शाम पंजाब के सीमावर्ती जिले फिरोजपुर के ममदोट शहर में हुई। गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी की सरेआम कई राउंड गोली मारकर हत्या कर दी गई।

हथियारबंद हमलावरों ने कथित तौर पर उस मोटरसाइकिल का पीछा किया जिस पर वह सवार थे। फिर उन पर गोलियां चला दीं। यह घटना शाम करीब 7:45 बजे हुई। पुलिस के मुताबिक, गोपी और एक अन्य व्यक्ति मोटरसाइकिल पर जा रहे थे, तभी कार में सवार हमलावरों ने उनका पीछा किया और फायरिंग कर दी।

गोलीबारी में गोपी को गंभीर चोटें आईं। फिर उन्हें इलाज के लिए फिरोजपुर के एक अस्पताल ले जाया गया, जहां बाद में उनकी मौत हो गई। गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद, फिरोजपुर ग्रामीण के डीएसपी करण कुमार शर्मा भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।

पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। घटनाक्रम का पता लगाने तथा हमलावरों की पहचान करने के लिए इलाके में और उसके आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है। इस हत्याकांड से पंजाब में तनाव का माहौल है। इस हत्याकांड पर इसलिए अधिक सवार उठ रहे हैं क्योंकि पंजाब में आम आदमी पार्टी की ही सरकार है।

दोस्त के कार पर भी गोलीबारी

SSP ने बताया कि इस हमले के पीछे एक पुराना विवाद था। जांच में चुनाव से जुड़ा विवाद एक अहम पहलू के तौर पर सामने आया है। सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस भूपिंदर सिंह सिद्धू ने बताया कि गोपी और उनके दोस्त हरप्रीत मोटरसाइकिल पर जा रहे थे। जबकि उनके कुछ दोस्त एक अलग कार में उनके पीछे आ रहे थे। पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने उस कार पर भी गोलीबारी की।

‘आरोपी का आपराधिक बैकग्राउंड है’

जांच करने वाले अधिकारी गाड़ी पर हुई फायरिंग से जुड़े हालात की जांच कर रहे हैं। घटनाक्रम का पूरा ब्योरा पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। एसएसपी भूपिंदर सिंह सिद्धू ने कहा, “दोनों पक्षों के बीच पुराना विवाद था। हमलावरों की पहचान कर ली गई है। हमारी टीमें बना दी गई हैं। हम जल्द से जल्द उन्हें गिरफ्तार कर लेंगे।” उन्होंने आगे कहा कि मुख्य आरोपी का आपराधिक बैकग्राउंड है। वह गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल व्यक्ति के तौर पर जाना जाता है।

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उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि जांच जारी रहने के साथ ही कई टीमें बनाई गई हैं। आरोपी की तलाश में अलग-अलग जगहों पर छापेमारी की जा रही है। दरअसल, इस घटना ने पंजाब में कानून-व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। हमले के पीछे चुनाव से जुड़ा विवाद होने की बात से इस मामले के राजनीतिक चर्चा का विषय बनने की भी संभावना है।

Ankit Balyan Shot Dead: मशहूर हरियाणवी गायक को जिम के बाहर मार दी गईं 15 गोलियां, कौन थे अंकित बालियान?

Ankit Balyan Shot Dead: मशहूर यूट्यूबर और हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की बुधवार (26 अगस्त) शाम उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक जिम के बाहर कुछ अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शामली के शहर कोतवाली इलाके में शाम को अंकित बालियान जब जिम से बाहर निकले, तभी कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। इससे उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सिंगर पर करीब 15 से 18 राउंड फायरिंग की गई।

पुलिस अधीक्षक (SP) नरेंद्र प्रताप सिंह ने पत्रकारों को बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें बनाई गई हैं। हत्या के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस के मुताबिक, हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए और बालियान पर कई राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

अंकित बालियान की हत्या कैसे हुई?

मौके पर मौजूद एक शख्स ने घटनाक्रम के बारे में बताया कि बालियान जिम में कसरत करने के बाद जैसे ही बाहर निकले उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। चश्मदीद ने कहा, “अंकित एक्सरसाइज के बाद जिम से बाहर आए थे। फायरिंग शुरू होते ही हम बाहर भागे और उन्हें गोली लगने से घायल पाया।

अंकित पिछले एक साल से रोज इस जिम में आ रहे थे। वह शाम करीब 4 से 4:15 बजे के बीच जिम पहुंचे थे। कम से कम 10 से 15 राउंड फायरिंग हुई। हमने चार लोगों को भागते हुए देखा। आरोपी पैदल थे और उनके हाथों में पिस्तौल थी।” इस बयान से पता चलता है कि हमलावर हथियारों से लैस थे। गोलीबारी के तुरंत बाद वे मौके से भाग गए।

हत्या के पीछे की असल वजह अभी साफ नहीं है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर हत्या से जुड़ी परिस्थितियों का पता चल जाएगा। जांचकर्ता हमलावरों की पहचान करने और घटनाक्रम को समझने के लिए CCTV फुटेज की जांच कर रहे हैं। वे यह पता लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं कि हमलावर कहां से आए थे। वे मौके तक कैसे पहुंचे और भागने के लिए उन्होंने किस रास्ते का इस्तेमाल किया।

अखिलेश का बीजेपी पर हमला

समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वारदात को लेकर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश का पूरा जाट समुदाय इसे खुद पर प्रहार मानकर आक्रोशित है। सपा प्रमुख ने बालियान की हत्या को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति शून्य पर पहुंच गई है। उन्होंने हत्या की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के पहलू से भी जांच किए जाने की मांग की।

उन्होंने देर रात X पर कहा, “उप्र की कानून-व्यवस्था को शून्य करते हुए जिस प्रकार शामली में लोकप्रिय गायक अंकित बालियान की 18 राउंड गोलियां चलाकर बेरहमी से हत्या की गई है उससे पूरे क्षेत्र में भय व्याप्त हो गया है।”

यादव ने इसी पोस्ट में आगे कहा, ”मृतक की दुखी मां के द्वारा अपने बेटे के शव को गोद में रखकर सड़क पर ही शोकाकुल होने का समाचार हृदयविदारक है। जाट समाज ने हमलावारों की गिरफ्तारी को लेकर सड़क पर ही अपनी मांग बुलंद की है। उत्तर प्रदेश का समस्त जाट समुदाय इसे अपने ऊपर प्रहार मानकर आक्रोशित है।” उन्होंने कहा, ”इस हत्याकांड की जांच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के दृष्टिकोण से भी किये जाने की मांग उठ रही है। बेहद निंदनीय!”

पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे बालियान?

यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि अंकित बालियान आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, अधिकारियों या उनके सहयोगियों की ओर से तत्काल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, और न ही यह स्पष्ट हो सका कि क्या यह उनकी हत्या की वजह हो सकती है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। उन्होंने कहा, “शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं।”

पुलिस के अनुसार, हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए और बालियान पर कई गोलियां चलाईं जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों की पहचान के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है।

कौन थे अंकित बालियान?

हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान के यूट्यूब चैनल के 3.66 लाख से अधिक सब्सक्राइबर थे। वह अपने वीडियो में विभिन्न सहयोगियों के साथ गायक और कलाकार के रूप में नजर आते थे। उनके कई वीडियो में बंदूक, हथियार और SUV का इस्तेमाल दिखाया गया था। संगीत के अलावा बालियान ने हरियाणवी पॉप वीडियो, पॉडकास्ट और जमीनी स्तर के व्लॉग के जरिए अपनी मजबूत डिजिटल मौजूदगी बनाई थी।

उनका कंटेंट अक्सर क्षेत्रीय गर्व, देसी पहचान, ग्रामीण जीवन और युवा संस्कृति पर केंद्रित होता था। उनके कई गानों में बंदूक संस्कृति, स्थानीय राजनीति और बहादुरी जैसे विषय शामिल थे। एक गायक और क्रिएटर के तौर पर बालियान ने मासूम शर्मा, राजू पंजाबी और आशु ट्विंकल जैसे हरियाणवी कलाकारों के साथ भी काम किया।

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बालियान ने राजनीतिक पॉडकास्ट और स्थानीय व्लॉगिंग में भी हाथ आजमाया। उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के राजनेताओं और समुदाय के प्रमुख लोगों के इंटरव्यू लिए। उनके लोकप्रिय गानों में ‘भारी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान’, ‘112 NE’, ‘गोली के बारूद’, ‘जाट जाटनी’, ‘अगला जनम जाट’, ‘संविधान’, ‘मोदी बरगा रुतबा’, ‘जाट धर्मेंद्र की तरिया’, ‘एक खटोला जेल के भीतर’, ‘वेट’, ‘सिस्टम’ और ‘राइफलें’ शामिल थे।

इजरायल में काकेशियन माफिया को सिर में सटाकर मार दी गोली, कौन था लक्जरी कारों का ये शौकीन क्राइम बॉस यानीस युशवाएव?

Caucasus Jewish Mafia: इजरायल के कैसरिया जंक्शन पर सोमवार को दिनदहाड़े एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई। इजरायल में काकेशियन यहूदी माफिया का कथित सरगना 40 वर्षीय यानीस युशवाएव मारा गया। हमलावर ने बहुत पास से यानीस के सिर में पिस्टल सटाकर गोली मार दी।

माफिया वर्ल्ड से लेकर लग्जरी कारों के शौक तक, आइए जानते हैं कि इजरायल की पुलिस की नाक में दम करने वाला यह अंडरवर्ल्ड डॉन यानीस युशवाएव कौन था।

दिनदहाड़े पेट्रो स्टेशन पर प्वाइंट-ब्लैंक रेंज पर मारी गोली

सीसीटीवी फुटेज में कैद इस हत्याकांड की वारदात बेहद खौफनाक है। यानीस अपने दो साथियों के साथ कैसरिया जंक्शन स्थित एक पेट्रोल स्टेशन के बिजनेस आउटलेट से बाहर निकल रहा था। हुडी और कैप पहने एक नकाबपोश हमलावर पास आया और सीधे प्वाइंट-ब्लैंक रेंज से यानीस के सिर में गोली मार दी। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, हमलावर ने पुलिस से बचने के लिए चेहरे पर एक बेहद रियलिस्टिक सिलिकॉन ह्यूमन मास्क पहन रखा था।

कौन था यानीस युशवाएव?

ऑर अकीवा का रहने वाला 40 वर्षीय यानीस युशवाएव इजरायल के शरोन क्षेत्र में एक खौफनाक नाम बन चुका था। इजरायली मीडिया और पुलिस सूत्रों के अनुसार, वह काकेशियन यहूदी संगठित अपराध गिरोह का कथित चीफ था। यानीस कई बड़े रेस्टोरेंट का मालिक था और बेंटले जैसी लग्जरी गाड़ियों में चलता था।

अक्टूबर में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में उसने माफिया होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था, ‘मैं एक लीगल बिजनेसमैन हूं, बेहद स्थापित हूं और बेंटले चलाता हूं। पुलिस को इसी बात से परेशानी होती है।’

गैंगवार, बम धमाके और दर्जनों गाड़ियों में आगजनी का आरोप

इजरायली पुलिस कई सालों से यानीस के पीछे पड़ी थी, लेकिन वह हर बार कानून के शिकंजे से बच निकलता था। नवंबर 2025 में कोर्ट की सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारियों ने उसे खूनी दुश्मनी में शामिल क्राइम गैंग का मुखिया बताया था।

साल 2023 में ऑर अकीवा और हाडेरा में एक ही महीने के भीतर दर्जनों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था, जिसमें यानीस मुख्य संदिग्ध था। उस पर हडेरा के बड़े व्यापारियों के घरों और गाड़ियों पर गोलियां बरसाने, हैंड ग्रेनेड फेंकने और हत्या के प्रयास के दर्जनों केस दर्ज थे।

इसी साल फरवरी में जब वह मॉस्को से लौट रहा था, तब बेन गुरियन एयरपोर्ट से पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था, पर सबूतों के अभाव में कुछ ही दिनों में रिहा कर दिया गया।

पुलिस की जासूसी से भी हमेशा रहता था आगे

पुलिस सूत्रों का कहना है कि यानीस को सजा दिलाना सबसे मुश्किल काम था। वह जानता था कि उसके फोन टैप किए जा रहे हैं, इसलिए वह कभी फोन पर संवेदनशील बात नहीं करता था। उसके गैंग के साथी पुलिस पूछताछ के दौरान कभी मुंह नहीं खोलते थे। करीब 10 साल पहले हाडेरा में एक शोक सभा के दौरान भी उस पर जानलेवा हमला हुआ था, जिसमें वह गोली लगने से घायल हुआ था, लेकिन बच निकला।

सबूतों की कमी के चलते अदालत से बार-बार बरी होने वाले इस ‘काकेशियन क्राइम बॉस’ का अंत अदालत के बजाय गैंगवार की रंजिश में हुआ। यानीस युशवाएव की इस सनसनीखेज हत्या के साथ ही इजरायल के शरोन रीजन में जारी लंबे अंडरवर्ल्ड संघर्ष में एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया है।

बांग्लादेश बोला- हमारे PM को भारत दौरे की जल्दबाजी नहीं:मंत्री ने कहा- भारत से अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेंगे

बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के भारत दौरे को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भारत के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है, लेकिन अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा। हुमायूं कबीर ने कहा कि प्रधानमंत्री के भारत दौरे का फैसला दोनों देशों के बीच बातचीत और जरूरी तैयारियों के बाद होगा। भारत ने रहमान को द्विपक्षीय दौरे का न्योता भेजा भारत ने तारिक रहमान को द्विपक्षीय दौरे के लिए आमंत्रित किया है। उन्हें 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS समिट के आउटरीच सेशन में शामिल होने का न्योता भी मिला है। यह दौरा भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्ते सुधारने के लिए अहम माना जा रहा है। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव बढ़ा हुआ है। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा बांग्लादेश अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना भारत आ गई थीं। उन्हें ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) ने हत्या के लिए उकसाने और हत्या का आदेश देने के लिए मौत की सजा दी है। बाकी मामलों में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। ICT ने उन्हें 5 मामलों में आरोपी बनाया था। ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को छात्र आंदोलन के दौरान हुई हत्याओं का मास्टरमाइंड बताया था। इसी के चलते बांग्लादेश लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। कबीर ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण का मुद्दा भी दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हिस्सा है। भारत का कहना है कि वह बांग्लादेश के अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत समीक्षा कर रहा है। हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया 5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल मीडिया कार्यक्रम में शेख हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी और देश को फिर से सही रास्ते पर लाने की कोशिश करेंगी। इस बयान पर बांग्लादेश ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि इससे बांग्लादेश के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसके बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में फिर से तनाव बढ़ गया। ढाका ने कहा था कि भारत में हसीना के ऐसे कार्यक्रम दोनों देशों के रिश्ते बेहतर बनाने की कोशिशों पर असर डाल सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया कि कार्यक्रम के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। जयशंकर बोले- कोई भी रिश्ता तभी मजबूत जब उससे दोनों का फायदा भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर का बयान भी काफी चर्चा में है। उन्होंने शनिवार को इकोनॉमिक टाइम्स के वर्ल्ड लीडर फोरम में कहा, कोई भी रिश्ता तभी मजबूत और सफल होता है, जब उससे दोनों पक्षों को फायदा हो। जयशंकर ने कहा कि भारत यह उम्मीद नहीं करता कि पड़ोसी देश सिर्फ उसके हितों के मुताबिक काम करें। जैसे भारत दूसरे देशों के हितों का सम्मान करता है, वैसे ही उम्मीद वह दूसरे देशों से रखता है। —————————— यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे: जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश गंगा जल संधि में भारत से ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करने की मांग कर रहा है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

‘उसे सब पता था…’, पत्नी की हत्या के बाद SBI कर्मचारी के WhatsApp स्टेटस में आया यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा का नाम

Divya Mishra Murder: लखनऊ में दिव्या मिश्रा की हत्या के मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। दरअसल, दिव्या की मौत से पहले उनके पति मानस वाजपेयी ने एक WhatsApp स्टेटस लगाया था, जिसमें उसने ने दावा किया था कि उसने अपनी पत्नी की हत्या कर दी है और आरोप लगाया कि उसने उसे धोखा दिया था। मानस ने स्टेटस में यह भी लिखा कि दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा और उनके पति भरत को “सब कुछ पता था।”

बता दें कि मशहूर हिंदी यूट्यूबर प्रज्ञा मिश्रा की बहन दिव्या को गुरुवार दोपहर गोमती नगर में ICICI बैंक की ब्रांच के बाहर गोली मार दी गई थी, जहां वह काम करती थीं। जिसके बाद उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

‘उसे सब पता है’: स्टेटस में क्या लिखा था

38 वर्षीय मानस, जो SBI में कर्मचारी था उस पर आरोप है कि वह दिव्या के ऑफिस पहुंचा और उसे गोली मार दी। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद वह घर लौटा और अपनी 28 साल की बहन शिवा वाजपेयी (जो मानसिक रूप से बीमार थी) को गोली मारी, और फिर खुद को भी गोली मार ली।

मानस ने अपने WhatsApp स्टेटस में बताया कि उसने अपनी पत्नी को मार दिया है और उस पर धोखा देने का आरोप लगाया। उसने प्रज्ञा और उसके पति का भी जिक्र किया और कहा कि उन्हें “सब पता था।”

खास बात यह है कि यह स्टेटस दिव्या की मौत की खबर आने से पहले शेयर किया गया था।

बहन को ऑफिस के बाहर मारी गई गोली

प्रज्ञा ने दोपहर करीब 1:26 बजे X पर एक पोस्ट कर इस हमले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्हें फोन पर सूचना मिली है कि उनकी बहन को गोमती नगर में गोली मार दी गई है और उनका इलाज लोहिया अस्पताल में चल रहा है। प्रज्ञा ने लोगों से दिव्या के लिए दुआ और प्रार्थना करने की अपील भी की।

बता दें कि प्रज्ञा पहले न्यूज टेलीविजन चैनलों के साथ काम कर चुकी हैं। अब वह अपने YouTube चैनल ‘उल्टा चश्मा’ के लिए जानी जाती हैं, जिसके 85 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर हैं।

पति-पत्नी एक साल से ज्यादा समय से अलग रह रहे थे

दिव्या और मानस की शादी को 12 साल हो चुके थे, लेकिन वे एक साल से ज्यादा समय से अलग-अलग रह रहे थे। दिव्या ने पिछले साल तलाक के लिए अर्जी भी दी थी।

पुलिस ने बताया कि मानस ने अपनी बहन शिवा की हत्या इसलिए कर दी क्योंकि उसे लगता था कि उसकी मौत के बाद उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं होगा।

पड़ोसी को मानस मृत अवस्था में मिला

मानस के घर के पास रहने वाले एक दुकानदार ने NDTV को बताया कि वह दोपहर करीब 12:30 बजे घर लौटा था। वह जल्दबाजी में लग रहा था और उसे बहुत पसीना आ रहा था। पड़ोसी ने बताया कि मानस अंदर गया और उसने हनुमान चालीसा बजाई।

इसके बाद जब पड़ोसी ने मानस का WhatsApp स्टेटस देखा, तो वह घर के अंदर गया। वहां उसने मानस को मृत पाया।

हत्याओं के इस घटनाक्रम के बाद जांचकर्ता अब कपल के खराब रिश्तों और मानस के आखिरी WhatsApp स्टेटस में लगाए गए आरोपों से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं।

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